|| पद ||📚🕉️ एक दिन श्री राम जी ने हनुमान जी से कहा कि~ "हनुमन्त ! मैंने तुम्हें कोई पद नहीं दिया, मैं चाहता हूँ कि तुम्हें कोई अच्छा सा पद दे दूँ। क्योंकि सुग्रीव को तुम्हारे कारण किष्किन्धा का पद मिला, विभीषण को भी तुम्हारे कारण लंका का पद मिला और मुझे भी तो तुम्हारी सहायता के कारण ही अयोध्या का पद मिला। परंतु तुम्हें कोई पद नहीं मिला.!" हनुमानजी ने कहा - "प्रभु! सबसे ज्यादा लाभ में तो मैं हूँ।" भगवान राम ने पूछा -" वो कैसे, हनुमन्त " ? हनुमान जी ने कहा - "सुग्रीव को किष्किन्धा का एक पद मिला, विभीषण को लंका का एक पद मिला और आप को भी अयोध्या एक ही पद मिला।" "हनुमानजी ने भगवान के चरणों में सिर रख कर कहा- "प्रभु ! जिसे आपके ये दो दो पद मिले हों, वह एक पद क्यों लेना चाहेगा।" भगवान राम हनुमानजी की बात सुनकर बहुत प्रसन्न हुए । सब कै ममता ताग बटोरी। मम पद मनहि बाँधि वर डोरी॥📚🕉️

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 3 शेयर

|| निःस्वार्थ भक्ति ||📚🕉️

एक भक्त था, वह रोज बिहारी जी के मंदिर जाता था।पर मंदिर में बिहारी जी की जगह उसे एक ज्योति दिखाई देती थी,मंदिर में बाकी के सभी भक्त कहते-

वाह ! आज बिहारीजी का श्रंगार कितना अच्छा है,बिहारी जी का मुकुट ऐसा, उनकी पोशाक...

(पूरा पढ़ें)
+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

जो इंसान अपनी माँ की तहे दिल से इज़्ज़त नही कर सकता वो इस संसार मे किसी भी दूसरी नारी को इज़्ज़त नही दे सकता |📚🕉️

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

|| 10 अनमोल सीखे काव्य महाभारत से ||
📚🕉️

1

कभी किसी का अपमान मत करो। अपमान की आग बड़े-बड़े साम्राज्य नष्ट कर देती है। कभी किसी मनुष्य के व्यवसाय या नौकरी को छोटा मत समझो, उसे छोटा मत कहो।

2

अगर मित्रता करो तो उसे जरूर निभाओ, लेकिन मित्र होने क...

(पूरा पढ़ें)
+6 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 1 शेयर