Jeta Goswami Jan 15, 2019

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Jeta Goswami Jan 14, 2019

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Jeta Goswami Jan 11, 2019

🌹मकर संक्रांति के बारे मे जानकारी 💐 🌹वर्ष 2019 में "मकर संक्रांति" का पर्व 14 व 15 तारीख को मनाया जाएगा। सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। जब सूर्य गोचरवश भ्रमण करते हुए मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब इसे 🌹 🌹"मकर-संक्रांति" कहा जाता है। वर्ष 2019 में सूर्य दिनांक 14 जनवरी को सायंकाल 7 बजकर 51 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। 🌹 🌹 उदयकालीन तिथि की मान्यतानुसार सूर्य 15 जनवरी को प्रात: मकर राशि में होंगे अत: इसी दिन "मकर-संक्रांति" का पर्व मनाया जाएगा।🌹 🌹संक्रांति का वाहन-🌹 🌹इस बार संक्रांति का वाहन सिंह एवं उपवाहन गज (हाथी) होगा। वर्ष 2019 में संक्रांति श्वेत वस्त्र धारण किए स्वर्ण-पात्र में अन्न ग्रहण करते हुए कुंकुम का लेप किए हुए उत्तर दिशा की ओर जाती हुई आ रही है।🌹 🌹संक्रांति का पुण्य काल-🌹 🌹"मकर संक्रांति" के दिन पवित्र नदियों में तिल का उबटन लगा कर स्नान करना विशेष लाभप्रद रहता है। 🌹 🌹"मकर संक्रांति" स्नान का पुण्य काल दिनांक 14 जनवरी 2019 की अर्द्धरात्रि 2 बजकर 20 मिनट से दिनांक 15 जनवरी 2019 को प्रात:काल से लेकर सायंकाल 6 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। 🌹 🌹तिलदान का विशेष महत्व-🌹 🌹"मकर-संक्रांति के दिन तिल से बनी हुई वस्तुओं एवं ताम्र पात्रों का दान देना श्रेयस्कर रहेगा। 🌹 🌹"मकर संक्रांति" का फ़ल-🌹 🌹12 राशियों पर "मकर संक्रांति" का फ़ल निम्नानुसार होगा-🌹 1. मेष-धनलाभ 2. वृष-हानि 3. मिथुन-लाभ 4. कर्क-कार्यसिद्धि 5. सिंह-पुण्य लाभ 6. कन्या- कष्ट व पीड़ा 7. तुला- सम्मान व प्रतिष्ठा की प्राप्ति 8. वृश्चिक- भय व व्याधि 9. धनु- सफ़लता 10. मकर- विवाद 11. कुंभ- धनलाभ 12. मीन- कार्यसिद्धि। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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Jeta Goswami Jan 9, 2019

🌷 *जा की रही भावन जैसी,प्रभु मूरत देखहि तिन तैसी* 🌷💐 🌅एक बार तुलसी दास जी वृन्दावन आये वहा पर वह नित्य ही कृष्ण स्वरूप श्री नाथ जी के दर्शन को जाते थे उस मंदिर में एक महंत थे जिनका नाम परशुराम था । एक दिन जब नित्य कि तरह तुलसी बाबा दर्शन करने पहुँचे तो उनहोंने देखा कि *बंशी लकुट काछनी काछे |* *मुकुट माथ माला उर आछे ||* प्रभु के एक हाथ में बंशी है और एक हाथ में लकुटि है प्रभु ने धोती काछ रखी है माथे पर सुन्दर मुकुट है और गले में माला है तुलसीदास दर्शन कर ही रह थे कि महंत बोले *अपने अपने इष्टके, नमन करै सब कोय |* *परशुराम बिन इष्टके, नवै सो मूरख होय ||* महंत जी बोले कि हर कोई अपने इष्ट को वंदन करता है और आप के इष्ट तो राम हैं ये तो मेरे इष्ट हैं और जो दूसरे के इष्ट को नमन करता है वो मूरख कहलाता है इतना सुनते ही पहले तो तुलसीदास हँसे फिर मन में सीताराम को याद करक बोले *कहा कहो छबि आजुकी, भले बने हो नाथ |* *तुलसी मस्तक तब नवै, धरौ धनुष शर हाथ ||* बाबा बोले प्रभु आज कि छबि का क्या वर्णन क्या जाए प्रभु कि आप कितने सुन्दर हो लेकिन अब ये तुलसी मस्तक जब झुकेगा जब आप धनुष बाण हाथ मे लोगे। अब जैसे ही इतना बोला तो क्या हुआ कि *मुरली लकुट दुरायके, धरयो धनुष शर हाथ |* *तुलसी लखि रूचि दासकी, नाथ भये रघुनाथ ||* जैसे हि तुलसी दास ने कहा तो प्रभु कि मुरली लकुटी गायब हो गयी जो श्री नाथ कि प्रतिमा थी वो श्री राम की प्रतिमा हो गयी और हाथ में धनुष बाण आ गये। चारो तरफ तुलसीदास जी की जय जय कार होने लगी तुलसी बाबा ने प्रसन्न मन से प्रभु को शीश नवाया अब बात ये आती है कि ऐसा हुआ कैसे और अब क्यों नही होता तो इसका सीधा सा प्रमाण रामचरित मानस में देखने को मिलता है जब प्रभु श्री राम कहते है *निर्मल मन जन सो मोहि पावा ।* *मोहि कपट छल छिद्र न भावा ||* कि मुझे कपट,छल,निन्दयी नहीं बल्कि निर्मल और शुद्ध ह्रदय वाले लोग भाते है इसलिये निर्मल ह्रदय से प्रभु को भजिये और सबको प्यार करिये किसी से द्वेश मत रखिये क्योंकि *रामहि केवल प्रेम पियारा |* *जान लेहु जेहि जान निहारा ||* 🍁💦🙏Զเधे👣Զเधे🙏🏻💦🍁 *☘🌷!! हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे !!💖* *☘💞हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे !!🌹💐* ÷सदैव जपिए एवँ प्रसन्न रहिए÷

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