JAWAHAR LAL Sep 9, 2019

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JAWAHAR LAL Aug 5, 2019

_*🙏🏻🙏🏻🌸बर्ष में एक बार होने वाले श्री नागचंद्रेश्वर जी के दर्शन 🌸🙏🏻🙏🏻*_ 🙏🏻🌹जय श्री महाकाल 🌹🙏🏻 श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिन्ग उज्जैन स्तिथ श्री नागचन्देश्वर जी के दर्शन। (वर्ष में केवल नागपंचमी को होते है दर्शन) उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर : क्यों खुलता है सिर्फ साल में एक दिन. हिंदू धर्म में सदियों से नागों की पूजा करने की परंपरा रही है। हिंदू परंपरा में नागों को भगवान का आभूषण भी माना गया है। भारत में नागों के अनेक मंदिर हैं, इन्हीं में से एक मंदिर है उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर का,जो की उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित है। इसकी खास बात यह है कि यह मंदिर साल में सिर्फ एक दिन नागपंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी) पर ही दर्शनों के लिए खोला जाता है। ऐसी मान्यता है कि नागराज तक्षक स्वयं मंदिर में रहते हैं। नागचंद्रेश्वर मंदिर में 11वीं शताब्दी की एक अद्भुत प्रतिमा है, इसमें फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-पार्वती बैठे हैं। कहते हैं यह प्रतिमा नेपाल से यहां लाई गई थी। उज्जैन के अलावा दुनिया में कहीं भी ऐसी प्रतिमा नहीं है। पूरी दुनिया में यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसमें विष्णु भगवान की जगह भगवान भोलेनाथ सर्प शय्या पर विराजमान हैं। मंदिर में स्थापित प्राचीन मूर्ति में शिवजी, गणेशजी और मां पार्वती के साथ दशमुखी सर्प शय्या पर विराजित हैं। शिवशंभु के गले और भुजाओं में भुजंग लिपटे हुए हैं। क्या है पौराणिक मान्यता : सर्पराज तक्षक ने शिवशंकर को मनाने के लिए घोर तपस्या की थी। तपस्या से भोलेनाथ प्रसन्न हुए और उन्होंने सर्पों के राजा तक्षक नाग को अमरत्व का वरदान दिया। मान्यता है कि उसके बाद से तक्षक राजा ने प्रभु के सा‍‍‍न्निध्य में ही वास करना शुरू कर दिया। लेकिन महाकाल वन में वास करने से पूर्व उनकी यही मंशा थी कि उनके एकांत में विघ्न ना हो अत: वर्षों से यही प्रथा है कि मात्र नागपंचमी के दिन ही वे दर्शन को उपलब्ध होते हैं। शेष समय उनके सम्मान में परंपरा के अनुसार मंदिर बंद रहता है। इस मंदिर में दर्शन करने के बाद व्यक्ति किसी भी तरह के सर्पदोष से मुक्त हो जाता है, इसलिए नागपंचमी के दिन खुलने वाले इस मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी कतार लगी रहती है। यह मंदिर काफी प्राचीन है। माना जाता है कि परमार राजा भोज ने 1050 ईस्वी के लगभग इस मंदिर का निर्माण करवाया था। इसके बाद सिं‍धिया घराने के महाराज राणोजी सिंधिया ने 1732 में महाकाल मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। उस समय इस मंदिर का भी जीर्णोद्धार हुआ था। सभी की यही मनोकामना रहती है कि नागराज पर विराजे शिवशंभु की उन्हें एक झलक मिल जाए। लगभग दो लाख से ज्यादा भक्त एक ही दिन में नागदेव के दर्शन करते हैं। नागपंचमी पर वर्ष में एक बार होने वाले भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए मंगलवार 4/8/19 रात12 बजे मंदिर के पट खुलेंगे।

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JAWAHAR LAL Jul 24, 2019

घुटनों का रामबाण इलाज इसके लिए एक video प्रस्तुत है। आज से ही केवल 3 क्रिया आरम्भ करनी है।जिनके दोनों घुटने स्वस्थ हैं, उनको भी करना है, और जिनके घुटने टेढ़े हो गए हैं, चलने में कठिनाई होती है, दर्द होता है,धरती पर बैठनें में परेशानी होतीहै और घुटने मुड़ते नहीं हैं, उन सभी को हर हालत में मात्र 3 सरल पैरों की क्रियाएं करनी हैं।45 से ऊपर उम्र वालों को आपने लंगड़ाते हुए देखा होगा।कितना अपार कष्ट होता है, स्वयं को और देखने वालों को। मेरी पोस्ट को गंभीरता से लेना और अगर डॉक्टरों के हाथों लूटने से बचना है, तो आज़ से ही आरम्भ हो जाओ।बुढापा सभी का आना है, यह प्रकृति का नियम है।अधिक आराम के लिए आप नारियल का पानी और उसके अंदर वाली मलाई भी निकालकर खा सकते हैं।खीरे के साथ कच्चे नारियल की गरी का सलाद भी खाने से 30 मिनट पहिले अवश्य लेना चाहिए।

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