JAWAHAR LAL Jan 21, 2021

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 *भगवान नाम की महिमा* *गाँव का एक अनपढ़ आदमी एक पण्डित जी के पास जाकर बोला ‘‘महाराज ! हमको कोई सीधा-साधा नाम बता दो, हमें भगवान का नाम लेना है।* *पंडित जी ने कहा- तुम* *‘अघमोचन-अघमोचन’ ("अघ" माने पाप, "मोचन" माने छुड़ाने वाला) नाम लिया करो ।’’* *अब वह बेचारा गाँव का गँवार आदमी "अघमोचन-अघमोचन" करता हुआ चला तो पर गाँव जाते-जाते "अ" भूल गया। वह 'घमोचन-घमोचन" बोलने लगा।* *एक दिन वह हल चला रहा था और "घमोचन-घमोचन" कर रहा था,* *उधर वैकुंठ लोक में भगवान भोजन करने बैठे ही थे कि घमोचन नाम का उच्चारण सुन उनको हँसी आ गयी।* *लक्ष्मीजी ने पूछा-‘प्रभू! आप क्यों हँस रहे हो ?* *भगवान बोले- आज हमारा भक्त एक ऐसा नाम ले रहा है कि वैसा नाम तो किसी शास्त्र में है ही नहीं। उसी को सुनकर मुझे हँसी आ गयी है।* *‘‘लक्ष्मी जी बोली- प्रभू! तब तो हम उसको देखेंगे और सुनेंगेे कि वह कैसा भक्त है और कौन-सा नाम ले रहा है।’’* *लक्ष्मी-नारायण दोनों उसी खेत के पास पहुँच गए जहाँ वह हल जोतते हुए* *"घमोचन-घमोचन" का जप कर रहा था ।* *पास में एक गड्ढा था भगवान स्वयं तो वहाँ छिप गये और लक्ष्मीजी भक्त के पास जाकर पूछने लगीं- ‘‘अरे, तू यह क्या घमोचन-घमोचन बोले जा रहा है ?’’* *उन्होंने एक बार, दो बार, तीन बार पूछा परंतु उसने कुछ उत्तर ही नही दिया।* *उसने सोचा कि इसको बताने में हमारा नाम-जप छूट जायेगा। अतः वह* *"घमोचन-घमोचन" करते रहा, बोला ही नहीं।* *जब बार-बार लक्ष्मी जी पूछती रहीं तो अंत में उसको आया गुस्सा, गाँव का आदमी तो था ही, बोला : ‘‘जा ! तेरे भरतार (पति) का नाम ले रहा हूँ क्या कराेगी ।’’* *अब तो लक्ष्मी जी डर गयी ,कि यह तो हमको पहचान गया। फिर बोलीं- ‘‘अरे, तू मेरे भरतार (पति) को जानता है क्या ?* *कहाँ है मेरा भरतार?’’* *एक बार, दो बार, तीन बार पूछने पर वह फिर झुँझलाकर बोला ‘‘वहाँ गड्ढे में है, जाना है तुझे भी उस गड्ढे मे..???* *लक्ष्मी जी समझ गयीं कि इसने हमको पक्का पहचान लिया बोली प्रभू! बाहर आ जाओ अब छिपने से कोई फायदा नही है...* *...और तब भगवान उसी गड्ढे से बाहर निकल कर वहाँ आ गये और बोले ‘‘लक्ष्मी ! देख लिया, 'मेरे नाम की महिमा' ! यह अघमोचन और घमोचन का भेद भले ही न समझता हो लेकिन यह जप तो हमारा ही कर रहा था। हम तो समझते हैं...* *यह घमोचन नाम से हमको ही पुकार रहा था। जिसके कारण मुझे इसको दर्शन देना पड़ा।* *भगवान ने भक्त को दर्शन देकर कृतार्थ किया कोई भी भक्त शुद्ध-अशुद्ध, टूटे- फूटे शब्दों से अथवा गुस्से में भी कैसे भी भगवान का नाम लेता है तब भी भगवान का ह्रदय उससे मिलने को लालायित हो उठता है और खुद को भक्त से मिलने को रोक नहीं पाता हूं ।* *तुलसी अपने राम को रीझ भजे या खीझ।* *भूमि पड़े सो जामिहै उल्टे सीधे बीज।* 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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JAWAHAR LAL Dec 13, 2020

🙏🌹जय माता अम्बे भवानी🙏🌹 *आपका जीवन साथी कौन है?* माँ पिता बीवी बेटा पति बेटी दोस्त...???? बिल्कुल नहीं * आपका असली जीवन साथी * * आपका शरीर है .. * एक बार जब आपका शरीर जवाब देना बंद कर देता है तो कोई भी आपके साथ नहीं है। आप और आपका शरीर जन्म से लेकर मृत्यु तक एक साथ रहते हैं। जितना अधिक आप इसकी परवाह करते हैं, उतना ही ये आपका साथ निभाएगा। आप क्या खाते हो, फ़िट होने के लिए आप क्या करते हैं, आप तनाव से कैसे निपटते हैं आप कितना आराम करते हैं आपका शरीर वैसा ही जवाब देगा। याद रखें कि आपका शरीर एकमात्र स्थायी पता है जहां आप रहते हैं। आपका शरीर आपकी संपत्ति है, जो कोई और साझा नही कर सकता । आपका शरीर आपकी ज़िम्मेदारी है। इसलिये, तुम हो इसके असली जीवनसाथी। हमेशा के लिए फिट रहो अपना ख्याल रखो, पैसा आता है और चला जाता है रिश्तेदार और दोस्त भी स्थायी नहीं हैं। याद रखिये, कोई भी आपके अलावा आपके शरीर की मदद नहीं कर सकता है। आप करें:- * प्राणायाम - फेफड़ों के लिए * ध्यान - मन के लिए * योग-आसन - शरीर के लिए * चलना - दिल के लिए * अच्छा भोजन - आंतों के लिए * अच्छे विचार - आत्मा के लिए * अच्छे कर्म - दुनिया के लिए इसलिए स्वस्थ रहो, फिट रहो और प्रसन्न रहो । हमेशा मुस्कुराते रहो। ☺️☺️☺️❣️🧲

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