Jitendra Jha Apr 22, 2019

‼*"बहुत ही प्यारी कविता"*‼ *ऐ "सुख" तू कहाँ मिलता है* *क्या तेरा कोई पक्का पता है*‼ *क्यों बन बैठा है अन्जाना* *आखिर क्या है तेरा ठिकाना।*‼ *कहाँ कहाँ ढूंढा तुझको* *पर तू न कहीं मिला मुझको*‼ *ढूंढा ऊँचे मकानों में*‼ *बड़ी बड़ी दुकानों में*‼ *स्वादिष्ट पकवानों में*‼ *चोटी के धनवानों में*‼ *वो भी तुझको ही ढूंढ रहे थे*‼ *बल्कि मुझको ही पूछ रहे थे*‼ *क्या आपको कुछ पता है* *ये सुख आखिर कहाँ रहता है?*⁉ *मेरे पास तो "दुःख" का पता था*‼ *जो सुबह शाम अक्सर मिलता था*‼ *परेशान होके शिकायत लिखवाई*‼ *पर ये कोशिश भी काम न आई*‼ *उम्र अब ढलान पे है*‼ *हौसला अब थकान पे है*‼ *हाँ उसकी तस्वीर है मेरे पास*‼ *अब भी बची हुई है आस*‼ *मैं भी हार नही मानूंगा*‼ *सुख के रहस्य को जानूंगा*‼ *बचपन में मिला करता था*‼ *मेरे साथ रहा करता था*‼ *पर जबसे मैं बड़ा हो गया*‼ *मेरा सुख मुझसे जुदा हो गया।*‼ *मैं फिर भी नही हुआ हताश*‼ *जारी रखी उसकी तलाश*‼ *एक दिन जब आवाज ये आई*‼ *क्या मुझको ढूंढ रहा है भाई*‼ *मैं तेरे अन्दर छुपा हुआ हूँ*‼ *तेरे ही घर में बसा हुआ हूँ*‼ *मेरा नहीं है कुछ भी "मोल"*‼ *सिक्कों में मुझको न तोल*‼ *मैं बच्चों की मुस्कानों में हूँ*‼ *पत्नी के साथ चाय पीने में*‼ *"परिवार" के संग जीने में*‼ *माँ बाप के आशीर्वाद में*‼ *रसोई घर के पकवानों में*‼ *बच्चों की सफलता में हूँ*‼ *माँ की निश्छल ममता में हूँ*‼ *हर पल तेरे संग रहता हूँ*‼ *और अक्सर तुझसे कहता हूँ*‼ *मैं तो हूँ बस एक "अहसास"*‼ *बंद कर दे तू मेरी तलाश*‼ *जो मिला उसी में कर "संतोष"*‼ *आज को जी ले कल की न सोच*‼ *कल के लिए आज को न खोना*‼ *मेरे लिए कभी दुखी न होना*‼ *मेरे लिए कभी दुखी न होना* !धन्यवाद!

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Jitendra Jha Apr 21, 2019

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Jitendra Jha Apr 20, 2019

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