Jitendra Jha Feb 18, 2019

_अंधों को दर्पण क्या देना_ _बहरों को भजन सुनाना क्या_ _जो रक्त पान करते उनको_ _गंगा का नीर पिलाना क्या.._ _हमने जिनको दो आँखे दी_ _वो हमको आँख दिखा बैठे_ _हम शांति यज्ञ में लगे रहे_ _वो श्वेत कबूतर खा बैठे.._ _वो छल पे छल करता आया_ _हम अड़े रहे विश्वासों पर_ _कितने समझौते थोप दिए_ _हमने बेटों की लाशों पर.._ _अब लाशें भी यह बोल उठी_ _मत अंतर्मन पर घात करो_ _दुश्मन जो भाषा समझ सके_ _अब उस भाषा में बात करो.._ _वो झाड़ी है, हम बरगद हैं_ _वो है बबूल हम चन्दन हैं_ _वो है जमात गीदड़ वाली_ _हम सिंहों का अभिनन्दन हैं.._ _ऐ पाक तुम्हारी धमकी से_ _यह धरा नहीं डरने वाली_ _यह अमर सनातन माटी है_ _ये कभी नहीं मरने वाली.._ _तुम भूल गए सन् अड़तालिस_ _पैदा होते ही अकड़े थे_ _हम उन कबायली बकरों की_ _गर्दन हाथों से पकड़े थे.._ _तुम भूल गए सन् पैंसठ को_ _तुमने पंगा कर डाला था_ _छोटे से लाल बहादुर ने_ _तुमको नंगा कर डाला था.._ _तुम भूले सन् इकहत्तर को_ _जब तुम ढाका पर ऐंठे थे_ _नब्बे हजार पाकिस्तानी_ _घुटनों के बल पर बैठे थे.._ _तुम भूल गए करगिल का रण_ _हिमगिरि पर लिखी कहानी थी_ _इस्लामाबादी गुंडों को_ _जब याद दिलाई नानी थी.._ _तुम सारी दुर्गति भूल गए_ _फिर से बवाल कर बैठे हो_ _है उत्तर खुद के पास नहीं_ _हमसे सवाल कर बैठे हो.._ _बिगड़ैल किसी बच्चे जैसे_ _आलाप तुम्हारे लगते हैं_ _तुम भूल गए हो रिश्ते में_ _हम बाप तुम्हारे लगते हैं.._ _बेटा पिटने का आदी है_ _बेटा पक्का जेहादी है_ _शायद बेटे की किस्मत में_ _बर्बादी ही बर्बादी है.._ _तेरी बर्बादी में खुद को_ _बर्बाद नहीं होने देंगे_ _हम भारत माँ के सीने पर_ _जेहाद नहीं होने देंगे.._ _तू रख हथियार उधारी के_ _हम अपने दम से लड़ लेंगे_ _गर एटम बम से लड़ना हो_ _तो एटम बम से लड़ लेंगे.._ _जब तक तू बटन दबायेगा_ _हम पृथ्वी नाग चला देंगे_ _तू जब तक दिल्ली ढूंढेगा_ _हम पूरा पाक जला देंगे.._ _यह कथन सारा आवाम कहे_ _गर फिर से आँख दिखाओगे_ _तुम सवा अरब के भारत की_ _मुट्ठी से मसले जाओगे.._ पुलवामा शहीद जवानों को शत शत नमन। 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

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Jitendra Jha Feb 18, 2019

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Jitendra Jha Feb 14, 2019

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