Ishwari Sharma Jan 7, 2019

● *हम वो आखरी पीढ़ी हैं*, जिन्होंने कई-कई बार मिटटी के घरों में बैठ कर परियों और राजाओं की कहानियां सुनीं, जमीन पर बैठ कर खाना खाया है, प्लेट में चाय पी है। ● *हम वो आखरी लोग हैं*, जिन्होंने बचपन में मोहल्ले के मैदानों में अपने दोस्तों के साथ पम्परागत खेल, गिल्ली-डंडा, छुपा-छिपी, खो-खो, कबड्डी, कंचे जैसे खेल खेले हैं। ● *हम वो आखरी पीढ़ी के लोग हैं*, जिन्होंने कम या बल्ब की पीली रोशनी में होम वर्क किया है और नावेल पढ़े हैं। ● *हम वही पीढ़ी के लोग हैं*, जिन्होंने अपनों के लिए अपने जज़्बात, खतों में आदान प्रदान किये हैं। ● *हम वो आखरी पीढ़ी के लोग हैं*, जिन्होंने कूलर, एसी या हीटर के बिना ही बचपन गुज़ारा है। ● *हम वो आखरी लोग हैं*, जो अक्सर अपने छोटे बालों में, सरसों का ज्यादा तेल लगा कर, स्कूल और शादियों में जाया करते थे। ● *हम वो आखरी पीढ़ी के लोग हैं*, जिन्होंने स्याही वाली दावात या पेन से कॉपी, किताबें, कपडे और हाथ काले, नीले किये है। ● *हम वो आखरी लोग हैं*, जिन्होंने टीचर्स से मार खाई है। ● *हम वो आखरी लोग हैं*, जो मोहल्ले के बुज़ुर्गों को दूर से देख कर, नुक्कड़ से भाग कर, घर आ जाया करते थे। ● *हम वो आखरी लोग हैं*, जिन्होंने अपने स्कूल के सफ़ेद केनवास शूज़ पर, खड़िया का पेस्ट लगा कर चमकाया हैं। ● *हम वो आखरी लोग हैं*, जिन्होंने गोदरेज सोप की गोल डिबिया से साबुन लगाकर शेव बनाई है। जिन्होंने गुड़ की चाय पी है। काफी समय तक सुबह काला या लाल दंत मंजन या सफेद टूथ पाउडर इस्तेमाल किया है। ● *हम निश्चित ही वो आखिर लोग हैं*, जिन्होंने चांदनी रातों में, रेडियो पर BBC की ख़बरें, विविध भारती, आल इंडिया रेडियो और बिनाका जैसे प्रोग्राम सुने हैं। ● *हम ही वो आखिर लोग हैं*, जब हम सब शाम होते ही छत पर पानी का छिड़काव किया करते थे। उसके बाद सफ़ेद चादरें बिछा कर सोते थे। एक स्टैंड वाला पंखा सब को हवा के लिए हुआ करता था। सुबह सूरज निकलने के बाद भी ढीठ बने सोते रहते थे। वो सब दौर बीत गया। चादरें अब नहीं बिछा करतीं। डब्बों जैसे कमरों में कूलर, एसी के सामने रात होती है, दिन गुज़रते हैं। ● *हम वो आखरी पीढ़ी के लोग हैं*, जिन्होने वो खूबसूरत रिश्ते और उनकी मिठास बांटने वाले लोग देखे हैं, जो लगातार कम होते चले गए। अब तो लोग जितना पढ़ लिख रहे हैं, उतना ही खुदगर्ज़ी, बेमुरव्वती, अनिश्चितता, अकेलेपन, व निराशा में खोते जा रहे हैं। *हम ही वो खुशनसीब लोग हैं, जिन्होंने रिश्तों की मिठास महसूस की है...!!* *हम एक मात्र वह पीढी है* जिसने अपने माँ-बाप की बात भी मानी है।

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Ishwari Sharma Dec 30, 2018

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Ishwari Sharma Dec 27, 2018

(((( आधी साड़ी का दान )))) . एक बार द्रोपदी सुबह तड़के स्नान करने यमुना घाट पर गयी। . भोर का समय था तभी उसका ध्यान सहज ही एक साधु की ओर गया जिसके शरीर पर मात्र एक लँगोटी थी. . साधु स्नान के पश्चात अपनी दुसरी लँगोटी लेने गया तो वो लँगोटी अचानक हवा के झोके से उड़कर पानी मे चली गयी और बह गयी. . सँयोगवस साधु ने जो लँगोटी पहनी थी वो भी फटी हुई थी. साधु सोच में पड़ गया कि अब वह अपनी लाज कैसे बचाए थोडी देर में सुर्योदय हो जाएगा और घाट पर भीड़ बढ़ जाएगी. . साधु तेजी से पानी से बाहर आया और झाड़ी मे छिप गया. . द्रोपदी यह सारा दृश्य देख अपनी साड़ी जो पहन रखी थी उसमे से आधी फाड़ कर उस साधु के पास गयी और उसे आधी साड़ी देते हुए बोली, . तात मै आपकी परेशानी समझ गयी इस वस्त्र से अपनी लाज ढँक लीजिए. . साधु ने सकुचाते हुए साड़ी का टुकड़ा ले लिया और आशीष दिया क़ि जिस तरह आज तुमने मेरी लाज बचायी उसी तरह एक दिन भगवान् तुम्हारी लाज बचाएगें. . और जब भरी सभा मे चीरहरण के समय द्रोपदी की करुण पुकार नारद जी ने भगवान् तक पहुचायी तो भगवान् ने कहा, . कर्मो के बदले मेरी कृपा बरसती है क्या कोई पुण्य है द्रोपदी के खाते मे ? . जाँचा परखा गया तो उस दिन साधु को दिया वस्त्र दान हिसाब में मिला जिसका ब्याज भी कई गुणा बढ गया था जिसको चुकता करने भगवान् पहुंच गये द्रोपदी की मदद करने, . दुस्सासन चीर खीचता गया और हज़ारों गज कपड़ा बढता गया. . इन्सान जैसा कर्म करता है परमात्मा उसे वैसा ही उसे लौटा देता है.!! ~~~~~~~~~~~~~~~~~ ((((((( जय जय श्री राधे ))))))) ~~~~~~~~~~~~~~~~~

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Ishwari Sharma Dec 27, 2018

🌹☝🌹 ॐ नमो भागवते वाशुदेवाय नम: सारे धर्मशास्त्रों में सुबह जल्दी लगभग 4 बजे से उठकर ईश्वर का नाम लेने का क्यों कहा गया है । ईश्वर ने जो कुदरत बनायीं है उसके हिसाब से भी देखा जाये तो जब सुबह होती है तो उसके सभी पशु-पक्षी उठ जाते हैं । और अपने भोजन की तलाश मे निकल जाते हैं और ईश्वर उन्हें उनके हिस्से का खाना दे देता हैं। इसी प्रकार यदि इंसान भी उसकी कुदरत के हिसाब से चले तो ईश्वर उनके हिस्से की रोजी -रोटी देने के साथ उन्हें सभी कार्यो में सफलता देता हैं । और भक्ति मार्ग में सुबह उठकर ईश्वर का नाम लेने से ईश्वर इसलिए खुश होता है क्योंकि कुदरत के हिसाब से रात सभी को सोने के लिए दी है। मतलब आराम करने के लिए । और जो इंसान सुबह 4 बजे उठकर अपनी नींद और आराम को छोड़कर ईश्वर की भक्ति करता है , तो उसे प्रेम में गिना जाता हैं ।और जहाँ प्रेम होता हैं वहाँ ईश्वर खुश होकर उस इंसान को बहुत ऊँचे दर्जे का संत या पवित्र आत्मा बना देता हैं ।। इसीलिए दोस्तो सुबह जल्दी उठकर अपने मालिक को याद करो जिसने जमीन आसमानों को पैदा किया है और उसमें हम सबकों पाल रहा है । वो ईश्वर हमें जरूर गले लगायेगा और बहुत प्यार देगा ।। 🌹☝🌹

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