🌻 शुभ प्रभात मंगल बेला 🌻👏 🙇‍♂️👌👌👌👍 🌹 🥀🎺 🥀 🥁 🌹🎸🌹🥁 🥀🎷🥀🌹🌹 🌹 🌹हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे🌹🌹🌹🌹 🌹हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।। 🌹🌹🌹🌹💃🌹🕺🌹 🥀💃🕺🌹🥀💃🌹🕺🌹नाम संकीर्तन-हरे कृष्ण महामंत्र ....जरूर सुने👇 🎸🎷🥁🎺🎻💤🙇‍♂️💤💃🥁🕺..... कलियुग में नाम संकीर्तन के अलावा जीव के उद्धार का अन्य कोई भी उपाय नहीं है| 🤷‍♂️👣🤷‍♀️👣🙋‍♂️👣🙋‍♀️👣🙋‍♂️🙋‍♀️👣🤷‍♀️🤷‍♂️ बृहन्नार्दीय पुराण में आता है–👇 🌷हरेर्नाम हरेर्नाम हरेर्नामैव केवलं| 🌷कलौ नास्त्यैव नास्त्यैव नास्त्यैव गतिरन्यथा|| 🐥💐🐦🌸🦃🏵🐧💮🌼🐥🌻🐓🌺 कलियुग में केवल हरिनाम,🕉💤🕉💤🕉🙋‍♀️ हरिनाम और हरिनाम से ही उद्धार हो सकता है| हरिनाम के अलावा कलियुग में उद्धार का अन्य कोई भी उपाय **नहीं है! नहीं है! नहीं है!** 🕉💤🕉💤🕉💤🕉💤🕉💤🕉💤🕉🙋‍♂️ कृष्ण तथा कृष्ण नाम अभिन्न हैं: कलियुग में तो स्वयं कृष्ण ही हरिनाम के रूप में अवतार लेते हैं | केवल हरिनाम से ही सारे जगत का उद्धार संभव है 🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀⚘🥀⚘🥀☆ कलि काले नाम रूपे कृष्ण अवतार | ☆ नाम हइते सर्व जगत निस्तार|| 🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿🥀🌿 यजुर्वेद के कलि संतारण उपनिषद् में आता है– द्वापर युग के अंत में जब देवर्षि नारद ने ब्रह्माजी से कलियुग में कलि के प्रभाव से मुक्त होने का उपाय पूछा, तब सृष्टिकर्ता ने कहा- आदिपुरुष भगवान नारायण के नामोच्चारण से मनुष्य कलियुग के दोषों को नष्ट कर सकता है। 💮🏵💮🏵💮🏵💮🏵💮🏵💮🏵💮🏵 नारदजी के द्वारा उस नाम-मंत्र को पूछने पर हिरण्यगर्भ ब्रह्माजी ने बताया-👇 🌹🥀🌹🥀🌹🥀🌹🥀🌹🥀🌹🥀🌹🌹🌹 🌹 हरे कृष्णा हरे कृष्णा,कृष्णा कृष्णा हरे हरे 🌹🌹🌹🌹 हरे रामा हरे रामा,रामा रामा हरे हरे🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 पद्मपुराण में कहा गया है– ☆ नाम: चिंतामणि कृष्णश्चैतन्य रस विग्रह:| ☆ पूर्ण शुद्धो नित्यमुक्तोसभिन्नत्वं नाम नामिनो:|| ▪¤▪¤▪¤▪¤▪¤▪¤▪¤▪¤▪¤▪¤▪¤▪¤▪¤▪ हरिनाम उस चिंतामणि के समान है जो समस्त कामनाओं को पूर्ण सकता है | 🌺हरिनाम स्वयं रसस्वरूप कृष्ण ही हैं !🌺 🌺तथा चिन्मयत्त्व दिव्यता के आगार हैं |🌺 ⚘🌾⚘🌾⚘🌾⚘🌾⚘🌿⚘🌾⚘🌾 हरिनाम पूर्ण हैं, शुद्ध हैं, नित्यमुक्त हैं | हरि तथा हरिनाम में कोई अंतर नहीं है| 🌺जो कृष्ण हैं– वही कृष्ण नाम है| 🌺 🌺जो कृष्ण नाम है– वही कृष्ण हैं|🌺 🌻कृष्ण के नाम का किसी भी प्रामाणिक स्त्रोत से श्रवण उत्तम है, परन्तु शास्त्रों एवं श्री चैतन्य महाप्रभु के अनुसार *कलियुग में हरे कृष्ण महामंत्र*ही बताया गया है । 🌹 कलियुग में इस महामंत्र का संकीर्तन करने मात्र से प्राणी मुक्ति के अधिकारी बन सकते हैं। कलियुग में भगवान की प्राप्ति का सबसे सरल किंतु प्रबल साधन उनका नाम-जप ही बताया गया है। 🌹 श्रीमद्भागवत (१२.३.५१) का कथन है- यद्यपि कलियुग दोषों का भंडार है तथापि इसमें एक बहुत बडा सद्गुण यह है कि 👇 ☆ सतयुग में भगवान के ध्यान (तप) द्वारा, ☆ त्रेतायुगमें यज्ञ-अनुष्ठान के द्वारा, ☆ द्वापरयुगमें पूजा-अर्चनासे जो फल मिलता था, ☆ कलियुग में वह पुण्यफल श्री हरि के 💃🕺 🎻🥁नाम-संकीर्तन 🎸🎷मात्र से ही प्राप्त हो जाता है। 🥀राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।🥀 🥀सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥🥀 ⚘🌱⚘🌱⚘🌱⚘🌱⚘🌱⚘🌱⚘ ●○●○●○●○●○●○●○●○●○●○●○●

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🌷🌾🌷जय श्री राधे कृष्णा 🌷🌾🌷 श्री कृष्ण जी का एक रोचक कथा प्रसंग 👇🙇‍♂️ 🌻जब भी कृष्ण भगवान के मंदिर जाएं तो यह जरुर ध्यान रखें कि कृष्ण जी कि मूर्ति की पीठ के दर्शन ना करें। 🌻दरअसल पीठ के दर्शन न करने के संबंध🌾 में भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण की🌾🌾 एक कथा प्रचलित है। 🌻कथा के अनुसार जब श्री कृष्ण जरासंध से युद्ध कर रहे थे तब जरासंध का एक साथी असूर कालयवन भी भगवान से युद्ध करने आ पहुंचा। कालयवन श्रीकृष्ण केसामनेपहुंचकर ललकारने लगा। तब श्रीकृष्ण वहां से भाग निकले।🚶‍♂️🌲 इस तरह रणभूमि से भागने के कारण ही उनका नाम " रणछोड़ " पड़ा🚶‍♂️🌲 🌻जब श्रीकृष्ण भाग रहे थे तब कालयवन भी उनके पीछे-पीछे भागने लगा।🌾🌾🌾🌾🌾 इस तरह भगवान रणभूमि से भागे क्योंकि...🌾 कालयवन के पिछले जन्मों के पुण्य बहुतअधिक थे और कृष्ण जी  किसी को भी तब तक सजा नहीं देते ! जब कि पुण्य का बल शेष रहता है । कालयवन कृष्णा की पीठ देखते हुए भागने लगा और इसी तरह उसका अधर्म बढऩे लगा !🌾🌾 🌱🍁🌱🍁🌱🍁🌱🍁🌱🍁🌱🍁🌱🍁🌱🌻क्योंकि भगवान की पीठ पर अधर्म का वास  होता हैऔर उसके दर्शन करनेसे अधर्म बढ़ता है। 🍁🌱🍁🌱🍁🌱🍁🌱🍁🌱🍁🌱🍁🌱🍁

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💃🌻🌷राधे राधे जय श्री कृष्णा 🌷🙇‍♂️🙋‍♀️💃 ✍जब श्रीकृष्ण जी ने दिया राधारानी को शाप, पढ़ें अनूठी कथा 👇......🌲कृष्ण भक्तों के लिए🌳 💃💃 सुंदर भजन प्रस्तुति🌷🌷आनंद लें👇 🍁🌱🍁🌱🍁🌱🍁🌱🍁🌱🍁🌱🍁🌱 🌻श्री कृष्ण🌻"श्री" का अर्थ है "शक्ति" अर्थात "राधा जी"⚘कृष्ण यदि शब्द हैं तो राधा अर्थ हैं। कृष्ण गीत हैं तो राधा संगीत हैं, कृष्ण वंशी हैं तो राधा स्वर हैं, कृष्ण समुद्र हैं तो राधा तरंग हैं, कृष्ण पुष्प हैं तो राधा उस पुष्प कि सुगंध हैं। 💃राधा जी कृष्ण जी कि अल्हादिनी शक्ति हैं। वह दोनों एक दूसरे से अलग हैं ही नहीं। ठीक वैसे जैसे शिव और हरि एक ही हैं | भक्तों के लिए वे🌾🌾 अलग-अलग रूप धारण करते हैं, अलग-अलग लीलाएं करते हैं।🌷🌾🌷🌾🌷🌾🌷🌾🌷 💃राधा एक आध्यात्मिक पृष्ठ हैं जहां द्वैत-अद्वैत का मिलन है। राधा एक सम्पूर्ण काल का उद्गम है जो कृष्ण रुपी समुद्र से मिलती हैं । श्री कृष्ण के जीवन में राधा प्रेम की मूर्ति बनकर आईं  जिस🌾🌾🌾🌾 प्रेम को कोई नाप नहीं सका,उसकी आधारशिला राधा जी ने ही रखी थी। 🔴🔆🔴🔆🔴🔆🔴🔆🔴🔆🔴🔆🔴🔆 🌻संपूर्ण ब्रह्मांड की आत्मा भगवान कृष्ण हैं और कृष्ण की आत्मा राधा हैं। आत्मा को देखा है किसी ने तो राधा को कैसे देख लोगे।राधा रहस्य थीं और रहेंगी 🔴🔆🔴🔆🔴🔆🔴🔆🔴🔆🔴🔆🔴🔆 🌻सृष्टि से पूर्व दिव्य गो लोक धाम में निरंतर रास-विलास करते-करते एक बार श्री राधा जी के मन में एक पुत्र पैदा करने की इच्छा हुई। इच्छा होते ही पुत्र की उत्पति हुई। परम सुंदरी का पुत्र भी परम सुंदर हुआ। 🌹🤱🎉🎈🎉🎈🎉🎈🎉🎈🎉🎈🎉🎈 🌻एक दिन उस पुत्र ने जम्हाई ली। उस के पंच भूत, आकाश, पाताल, वन, पर्वत,वृक्ष, अहंतत्व, अहंकार, प्रकृति, पुरुष सभी दिखाई दिए। उसके मुख में यह सब देख कर सुकुमारी श्री राधा रानी को बड़ा बुरा लगा। उन्होंने मन ही मन सोचा कैसा विराट बेटा हुआ है? उन्होंने उसे जल में रख दिया। वही बेटा विराट पुरुष हुआ। उसी से समस्त ब्रह्मांड की उत्पति हुई। ✳🔆✳🔆✳🔆✳🔆✳🔆✳🔆✳🔆 🌻राधा रानी का अपने पुत्र के प्रति ऐसा व्यवहार देख कर श्री कृष्ण ने राधा रानी को श्राप दिया," अब भविष्य में तुम्हें कभी संतान होगी ही नहीं। "तभी तो राधा रानी का नाम कृशोदरी पड़ा। इनका पेट कभी बढ़ता ही नहीं। 🙇‍♀️🌷🕉🌷🕉🌷🕉🌷🕉🌷🕉🌷🕉🌷

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🌹ॐ श्री गुरुवे नमः🌹🌹 जय श्री हरि विष्णु 🌹 🌹🌻🎋ॐ नमो नारायणायः🎋🌻🌹 🥀भक्ति रस प्रस्तुति भजन 🥀👌🧘‍♀️ जरूर सुनें 💃नर में है नारायण बंदे ,नर में है नारायण....👇 ✍पौराणिक प्रसंग :-👇🎋🌻🎋🌻🎋🌻 🌷🧘‍♂️🧘‍♂️नर-नारायण हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु के दशावतार में से एक अवतार था। इस अवतार में विष्णु जी ने नर और नारायण रूप में अवतार लिये थे। इस रूप में बद्रीनाथ तीर्थ में तपस्या की थी। 🌷भगवान विष्णु ने धर्म और रुचि को यह वरदान दिया था कि वह अवश्य ही उनके घर में जन्म लेंगे। इस वरदान की पूर्ति के लिए उन्होंने नर और नारायण के रूप में धर्म और रुचि की संतान के रूप में जन्म लिया। 🌹🌷🌹👬🌹🌷🤱🌹🌷🧘‍♂️🧘‍♂️🌷🌹🌷 🌷दोनों ही बालक जन्म से ही तपस्वी थे और ईश्वर के ध्यान में लीन रहते थे। जन्म के कुछ समय बाद ही वे ध्यान करने हेतु बद्रिकाश्रम चले गए। उनके तप के तेज से वह स्थान भी प्रकाशमान हो गया।🎋🌾🎋🌾🎋🌾🎋🌾 🌷दूर-दराज के क्षेत्रों से साधु-महात्मा, उनसे ज्ञान अर्जित करने और उनके दर्शन करने आते थे। नर-नारायण का तप इतना प्रबल था कि स्वयं देवराज इंद्र उनसे भयभीत रहने लगे। 🌷इन्द्र को यह डर लगने लगा कि कहीं अपने तप और ध्यान के कारण वे भगवान विष्णु से वरदान के रूप में इन्द्र का सिंहासन तो नहीं मांग लेंगे। अपने मन के इसी डर के कारण इन्द्र, नर-नारायण के तप को भंग करने की योजनाएं बनाने लगे। 🌷इन्द्र ने अपने मित्र कामदेव को अप्सराओं के साथ बद्रिकाश्रम भेजा, ताकि वे नर-नारायण के ध्यान में विघ्न पैदा कर सकें। 🌷कामदेव ने अप्सराओं की सहायता से🌷 नर-नारायण के ध्यान को भंग करने की भरपूर कोशिश की, लेकिन वे पूर्ण रूप से असफल रहे। दोनों ही अपने दिव्य नेत्रों से अप्सराओं और कामदेव को देख रहे थे। जैसे ही उन्होंने आंखें खोलीं तो वे सभी इस भय से कांपने लगे कि कहीं वे उनके क्रोध के कारण शाप के भागीदार ना बन जाएं। 🌷लेकिन इसके विपरीत जब नर-नारायण ने अपने चक्षु खोलने के बाद कामदेव और अप्सराओं से ये कहा कि वे उनसे जरा भी नाराज नहीं हैं और उनका प्रेमपूर्वक स्वागत करते हैं तो सभी हैरत में पड़ गए। 🌷नर-नारायण के ये बोल सुनकर कामदेव अत्यंत लज्जित हुए और कहा कि ये सब उन्होंने देवराज इन्द्र के कहने पर किया था। कामदेव ने कहा “आप परम ज्ञानी और काम आदि विकारों से पूर्ण रूप से परे हैं, अपनी कृपा हम पर अवश्य बनाएं रखें”। 🌷कामदेव की स्तुति ने नर-नारायण को प्रसन्न किया। अपनी योगमाया से नर-नारायण ने अद्भुत लीला की। कामदेव और अन्य अप्सराओं ने देखा कि अत्यंत सुंदर अप्सराएं नर-नारायण की सेवा कर रही हैं। 🌷नर-नारायण ने कामदेव से कहा कि वे इन अप्सराओं में से किसी भी एक अप्सरा को अपने साथ स्वर्ग लेकर जा सकते हैं। 🌷कामदेव ने अत्यंत आकर्षक और बेहद खूबसूरत उर्वशी को अपने साथ स्वर्ग ले जाने की बात कही। उरू यानि जंघा से उत्पन्न होने के कारण उस अप्सरा को उर्वशी नाम दिया गया था। 🌷उर्वशी को लेकर कामदेव स्वर्ग की ओर प्रस्थान कर गए। ये सब देखने के बाद स्वयं देवराज इन्द्र को पश्चाताप होने लगा और नर-नारायण से क्षमा मांगने के लिए पहुंच गए। 🌷भगवान नर-नारायण ने इन्द्र को क्षमा प्रदान करते हुए कहा यह भोलेनाथ की भूमि है, यहां आकर मन के सभी विकार मिट जाते हैं। आप भी महादेव की कृपा प्राप्त करने के लिए यहं साधना करें। 🌷ऐसा माना जाता है कि बद्रिकाश्रम वही स्थान है जहां भगवान शिव ने नर-नारायण और देवराज इन्द्र को दर्शन दिए थे। ✍हिन्दू पुराणों के अनुसार:-🎋🙏 🌷नर-नारायण की तपस्या से ही धरती पर धर्म का प्रचार-प्रसार हुआ| ✍ऐसा भी कहा जाता है कि :-🎋🙏 केदारनाथ और बद्रिकाश्रम में नर-नारायण आज भी तपस्या में लीन रहते हैं। ✳नारायण 🎋नारायण 🎋नारायण✳ ○●○●○●○●○●○●○●○●○●○●○

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