Harinarayan Patel Jul 22, 2020

अवश्य पढ़ें..... अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा महल में झाड़ू लगा रही थी तो द्रौपदी उसके समीप गई उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए बोली, "पुत्री भविष्य में कभी तुम पर दुख, पीड़ा या घोर से घोर विपत्ति भी आए तो कभी अपने किसी नाते-रिश्तेदार की शरण में मत जाना सीधे भगवान की शरण में जाना उत्तरा हैरान होते हुए माता द्रौपदी को निहारते हुए बोली:-आप ऐसा क्यों कह रही हैं माता?" द्रौपदी बोली:-क्योंकि यह बात मेरे ऊपर भी बीत चुकी है। जब मेरे पांचों पति कौरवों के साथ जुआ खेल रहे थे, तो अपना सर्वस्व हारने के बाद मुझे भी दांव पर लगाकर हार गए। फिर कौरव पुत्रों ने भरी सभा में मेरा बहुत अपमान किया मैंने सहायता के लिए अपने पतियों को पुकारा मगर वो सभी अपना सिर नीचे झुकाए बैठे थे। पितामह भीष्म, द्रोण, धृतराष्ट्र सभी को मदद के लिए पुकारती रही मगर किसी ने भी मेरी तरफ नहीं देखा, वह सभी आंखे झुकाए आंसू बहाते रहे फिर मैने भगवान श्रीद्वारिकाधीश को पुकारा:-हे प्रभु अब आपके सिवाय मेरा कोई भी नहीं है। भगवान तुरंत आए और मेरी रक्षा करी। इसलिए वेटी जीवन में जब भी संकट आये आप भी उन्हें ही पुकारना जब द्रौपदी पर ऐसी विपत्ति आ रही थी तो द्वारिका में श्रीकृष्ण बहुत विचलित हो रहे थे। क्योंकि उनकी सबसे प्रिय भक्त पर संकट आन पड़ा था रूकमणि उनसे दुखी होने का कारण पूछती हैं तो वह बताते हैं मेरी सबसे बड़ी भक्त को भरी सभा में नग्न किया जा रहा है। रूकमणि बोलती हैं, "आप जाएं और उसकी मदद करें। "श्रीकृष्ण बोले," जब तक द्रोपदी मुझे पुकारेगी नहीं मैं कैसे जा सकता हूं। एक बार वो मुझे पुकार लें तो मैं तुरंत उसके पास जाकर उसकी रक्षा करूंगा तुम्हें याद होगा जब पाण्डवों ने राजसूर्य यज्ञ करवाया तो शिशुपाल का वध करने के लिए" मैंने अपनी उंगली पर चक्र धारण किया तो उससे मेरी उंगली कट गई उस समय "मेरी सभी 16 हजार 108 पत्नियां वहीं थी कोई वैद्य को बुलाने भागी तो कोई औषधि लेने चली गई" मगर उस समय "मेरी इस भक्त ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़ा और उसे मेरी उंगली पर बांध दिया । आज उसी का ऋण मुझे चुकाना है लेकिन जब तक वो मुझे पुकारेगी नहीं मैं नहीं जाऊंगा अत: द्रौपदी ने जैसे ही भगवान कृष्ण को पुकारा प्रभु तुरंत ही दौड़े चले गये हमारे जीवन में भी कही संकट आते रहते है प्रभु-स्मरण, उनके प्रति किया "सत्-कर्म" हमारी सहयाता के लिए भगवान को बिवस कर देता है और तुरन्त संकट टल जाता है

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Harinarayan Patel Apr 7, 2020

हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं.. 🙏🌹🎉 हनुमान जी का चरित्र अत्यंत प्रभावशाली है। हनुमान जी के जीवन से हमें काफी सीख मिलती है। तीन गुण- बल, बुद्धि और विद्या का विशिष्ट समन्वय हनुमान जी के जीवन में मिलता है। हनुमान जी ने हमेशा से ही अपने बल व सामर्थ्य का अवसर के अनुकूल उचित प्रदर्शन किया है। हनुमान जी व मेघनाद के मध्य हुये युद्ध में मेघनाद ने उन पर 'ब्रह्मास्त्र' का प्रयोग कर दिया। हनुमान जी इसको बेअसर कर सकते थे लेकिन ब्रह्मास्त्र का महत्व कम न हो इसलिए उन्होंने इसका तीव्र आघात सहन कर लिया। 'सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा, विकट रूप धरि लंक जरावा।'इस पंक्ति का अर्थ है कि सीता जी के सामने उन्होंने खुद को सूक्ष्म रूप में रखा लेकिन संहारक के रूप में वो राक्षसों के लिये काल बन गए। समुद्र लांघते समय जब देवताओं के कहने पर नागमाता सुरसा ने उनकी परीक्षा लेनी चाही तो उन्होंने हनुमान जी की विनम्रता व बुद्धि कौशल को देखते हुये उन्हें सफल होने का आशीर्वाद दिया।हनुमान जी के इस प्रसंंग से हमें शिक्षा मिलती है कि केवल बल या सामर्थ्य से ही कार्य में सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती बल्कि विनम्रता व बुद्धि से भी कार्य सम्पन्न किये जा सकते हैं। हनुमान जी एक बहुत बड़े तपस्वी थे। भगवान राम स्वयं कहते हैं, "जब लोक पर कोई संकट आता था तब वह मेरी अभ्यर्थना करता है लेकिन जब मुझ पर संकट आता था तब मैं संकट के निवारण के लिये पवनपुत्र का स्मरण करता हूं।" श्रीराम अपने लौकिक जीवन के सकटमोचन का श्रेय हनुमान जी को देते हैं। आज हम युवाओं को हनुमान जी की पूजा करने से अधिक उनके चरित्र को आत्मसात करने की आवश्यकता है जिससे बल, बुद्धि, विद्या रूपी तीन गुणों का समन्वय हमारे व्यक्तित्व में स्थापित हो सके।अगर हम युवा उनकी यह चारित्रिक विशेषता अपने जीवन में घोल लें तो हम स्वयं के साथ-साथ राष्ट्र को भी नयी दिशा दे सकेंगे। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 💐आया जन्मोत्सव राम भक्त हनुमान का💐 💐अंजनी के लाल का, पवन पुत्र हनुमान का💐 💐बोलो सब मिलकर जयकार हनुमान की💐 💐सबको बधाई हो जन्मोत्सव हनुमान की💐 🙏💟जय श्रीराम, जय हनुमान💟🙏

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Harinarayan Patel Feb 21, 2020

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Harinarayan Patel Jan 30, 2020

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