*❤️कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारं।* *सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानी सहितं नमामि।।* *#जय_बम_बम_भोले....🚩* *🔱#महामृत्युंजय_मंत्र🔱* *ऊँ ञयंबकं यजामहे,सुगंधिम् पुष्टिवर्धनं,उर्वारूकमिवबंधनान् ,मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्* ☘️🔥☘️🔥☘️🔥☘️🔥 *#प्रभात_दर्शन_ :-* *खीरा सिर ते काटि केमलियत लौंन लगाय,* *रहिमन करुए मुखन को, चाहिए यही सजाय।।* *#भावार्थ :-* खीरे का कडुवापन दूर करने के लिए उसके ऊपरी सिरे को काटने के बाद नमक लगा कर घिसा जाता है। रहीम कहते हैं कि कड़ुवे मुंह वाले के लिए – कटु वचन बोलने वाले के लिए यही सजा ठीक है।। *🔥आपके मंगलमय सोमवार की कामना करते है🔥* *🍀सुप्रभात🍀* 🕉⛲🔱☕🔱⛲🕉

+26 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 4 शेयर

*❤️शान्तितुल्यं तपो नास्ति तोषान्न परमं सुखम्।* *नास्ति तृष्णापरो व्याधिर्न च धर्मो दयापरः॥* *#भावार्थ* :-शान्ति जैसा कोई तप (यहाँ तप का अर्थ उपलब्धि समझना चाहिए) नहीं है, सन्तोष जैसा कोई सुख नहीं है (कहा भी गया है "संतोषी सदा सुखी), कामना जैसी कोई ब्याधि नहीं है और दया जैसा कोई धर्म नहीं है। *प्रभात दर्शन:-* *यो ध्रुवाणि परित्यज्य अध्रुवाणि निषेवते।* *ध्रुवाणि तस्य नश्यन्ति अध्रुवाणि नष्टमेव हि॥* *#अर्थ* :- जो निश्चित को छोड़कर अनिश्चित का आश्रय लेते हैं, उनका निश्चित भी नष्ट हो जाता है और अनिश्चित तो लगभग नष्ट के समान है ही। *🙏🙏 #सुप्रभात 🙏🙏* *🌐#जय_श्री_राम🌐* *🌹आपका दिन रविवार मंगलमय हो🌹* *जय जय श्रीराम !!* 🌞🙏🛕☕🛕🙏🌞

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

*❤️सर्वमंगल मांग्लये शिवे सर्वार्थ साधिके।* *शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुति।।* *जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कृपालिनि।* *दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।।* *या देवि सर्वभूतेषु मातृ रूपेण संस्थिता* *नमस्तस्ये नमस्तस्ये, नमस्तस्ये नमो नमः।।* *🌺सुप्रभात.......🌺🌺🌺* *उत्साह-उत्साहो बलवानार्य नास्त्युत्साहात्परं बलम्।* *सोत्साहस्य हि लोकेषु न किञ्चदपि दुर्लभम् ॥* *#अर्थ :-* उत्साह बड़ा बलवान होता है; उत्साह से बढ़कर कोई बल नहीं है। उत्साही पुरुष के लिए संसार में कुछ भी दुर्लभ नहीं है। *🌺जय माँ लक्ष्मी🌺* *🌻सुप्रभात🌻* *आपका दिन शुक्रवार मंगलमय हो* 🙏🛕🥌☕🛕🥌🙏

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

*❤️शान्ताकारं भुजगशयनं पद्यनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।* *#भावार्थ : जिनकी आकृति अतिशय शांत है, जो शेषनाग की शैया पर शयन किए हुए हैं, जिनकी नाभि में कमल है, जो ‍देवताओं के भी ईश्वर और संपूर्ण जगत के आधार हैं, जो आकाश के सदृश सर्वत्र व्याप्त हैं, नीलमेघ के समान जिनका वर्ण है, अतिशय सुंदर जिनके संपूर्ण अंग हैं, जो योगियों द्वारा ध्यान करके प्राप्त किए जाते हैं, जो संपूर्ण लोकों के स्वामी हैं, जो जन्म-मरण रूप भय का नाश करने वाले हैं, ऐसे लक्ष्मीपति, कमलनेत्र भगवान-श्रीविष्णु को मैं प्रणाम करता हूँ। ॐ॥* ☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️ *अब प्रभु कृपा करहु एहि भाँति। सब तजि भजनु करौं दिन राती॥* *सुनि बिराग संजुत कपि बानी। बोले बिहँसि रामु धनुपानी॥* *#भावार्थ* :-हे प्रभो अब तो इस प्रकार कृपा कीजिए कि सब छोड़कर दिन-रात मैं आपका भजन ही करूँ। सुग्रीव की वैराग्ययुक्त वाणी सुनकर (उसके क्षणिक वैराग्य को देखकर) हाथ में धनुष धारण करने वाले श्री रामजी मुस्कुराने लगे।। *🌻🙏🏻 शुभ प्रभात🙏🏻🌻* *🔥आपका गुरुवार मंगलमय हो🔥* *🔥#सुप्रभात🔥* 🛕🙏🌞☕🌞🙏🛕

+16 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 7 शेयर