Gumansingh Rathore Jun 13, 2019

+6 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Gumansingh Rathore Jun 13, 2019

निर्जला एकादशी आज, जानिए व्रत और पूजा से संबंधित पूरी जानकारी निर्जला एकादशी 2019: व्रती जो सुबह से निर्जल रहना शुरू किए हैं उन्हें अगले दिन सुबह जब सूर्य उदय होंगे उससे पहले स्नान आदि से निवृत होकर, पूजा-पाठ कर ब्राह्मण आदि को दान देना या उन्हें भोजन कराना चाहिए। निर्जला एकादशी को हिन्दू धर्म ग्रंथों में अत्यंत महत्व प्रदान किया गया है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली यह एकादशी अन्य सभी चौबीस एकदशियों में बेहद महत्वपूर्ण और कठिन मानी जाती है। इसमें व्रती को बिना जल ग्रहण किए व्रत करना होता है। साल 2019 में निर्जला एकादशी का व्रत 13 जून, गुरुवार को जानि आज रखा जाएगा। मान्यता है कि इस निर्जला एकादशी व्रत का अनंत गुना फल व्रत रखने वाले को प्राप्त होता है, यदि वह इस व्रत का पालन सच्ची लगन और श्रद्धा के साथ करता है। वहीं भगवान विष्णु को समर्पित इस एकादशी-व्रत में हमें दो तिथियों में बिना जल के रहना पड़ता है। आगे जानते हैं निर्जला एकादशी व्रत की विधि और पूजन से संबंधित पूरी जानकारी। सबसे पहले निर्जला एकादशी के दिन स्नान-ध्यान कर जल से आचमन करना चाहिए। फिर भगवान विष्णु की, अपने इष्ट देव की पूजा करें। इसके बाद निर्जला एकादशी की कथा सुनें और सुनाएं। इस तरह से निर्जला एकादशी का व्रत शुरू होता है। निर्जला एकादशी के दिन किसी भी प्रकार से जल ग्रहण करना वर्जित है। इसलिए इस एकादशी का व्रत रखने वालों को पूरे दिन और रात बिना जल ग्रहण किए रहना चाहिए। हिन्दू पंचांग के अनुसार 13 जून को शाम के 4 बजकर 50 मिनट के आसपास तक एकादशी का योग रहने वाला है। चूंकि सूर्योदय के साथ एकादशी प्रारंभ होगी इसलिए इस एकादशी की व्रत अवधि पूरी रात तक मानी जाएगी। दरअसल बहुत लोग ऐसा मानते हैं कि द्वादशी लग गई अब जल ग्रहण कर किया जा सकता है। परंतु ऐसा नहीं है, व्रती को एकादशी व्रत का पालन सूर्य उदय से अगले सूर्य उदय तक करना होता है, ऐसा शास्त्रों में वर्णित है। बता दें कि जो लोग निर्जला एकादशी व्रत रखते हैं उन्हें नियम का पालन करना चाहिए। व्रती जो सुबह से निर्जल रहना शुरू किए हैं उन्हें अगले दिन सुबह जब सूर्य उदय होंगे उससे पहले स्नान आदि से निवृत होकर, पूजा-पाठ कर ब्राह्मण आदि को दान देना या उन्हें भोजन कराना चाहिए। साथ ही यदि व्रती कम से कम पांच व्यक्तियों को ब्राह्मण कराने में सक्षम नहीं हैं तो इसके निमित्त कहीं भी जाकर पांच व्यक्तियों का भोजन, फल अथवा मिठाई जरूर दान करना चाहिए। इसके अलावा दान-दक्षिणा जितना संभव हो सके जरूर करें। वहीं द्वादशी के दिन दान करने का भी प्रचलन है। इसके लिए व्रती को छाता, कपड़े, चटाई, जूता-चप्पल और दक्षिणा आदि दान करना चाहिए। फिर इसके बाद भोजन आदि ग्रहण करके व्रत को खोलना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार यही निर्जला एकादशी की सही विधि है।

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 2 शेयर
Gumansingh Rathore Dec 9, 2018

1. भगवान मेँ बुद्धि की स्थापना करना ही "शम" है ।
2. इन्द्रियोँ को वश मेँ करना ही "दम" है ।
3. किसी भी प्राणी से द्रोह न करना ही "दान" है ।
4. सभी कामनाओँ का त्याग करना ही "तप" है ।
5. वासना और स्वभाव को जीतना ही "शौर्य "है ।
6. ब्रह्म का विचार कर...

(पूरा पढ़ें)
+6 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 38 शेयर
Gumansingh Rathore Dec 7, 2018

#कलयुग_में_रामायण_पाठ_की_महिमा

कलयुग का अर्थ है, काली का युग । काली माता तामसिक शक्ति का प्रतीक है । उनका स्वरूप रुद्र है । जहां युग ही तामसिक शक्तियों का हो, उस समयकाल में आप शांति की तो कल्पना भी नही कर सकते ।।

लेकिन हां !! कलयुग में भी सतयुग...

(पूरा पढ़ें)
+1 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Gumansingh Rathore Oct 3, 2018

*~~~~~~~~~~~~~~*
ओ३म् श्री कृष्णा
*~~~~~~~~~~~~~~*

_आइए श्री कृष्ण के महान चरित्र को जानकर हम भी अपने जीवन मे अपनाने का संकल्प लें।_

श्रीकृष्ण का महान व्यक्तित्व
(आर्य विचार)

*(1) जुए के विरोधी:-*
वे जुए के घोर विरोधी थे।जुए को एक बहुत ही बुरा ...

(पूरा पढ़ें)
+1 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर
Gumansingh Rathore Sep 22, 2018

पद्मा / परिवर्तिनी एकादशी ,,,,,

युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! भाद्रपद शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? इसकी विधि तथा इसका माहात्म्य कृपा करके कहिए। तब भगवान श्रीकृष्ण कहने लगे कि इस पुण्य, स्वर्ग और मोक्ष को देने वाली तथा सब पापों का नाश करने वाल...

(पूरा पढ़ें)
+1 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 2 शेयर
Gumansingh Rathore Sep 15, 2018

धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार श्री वेद व्यास ने गणेश चतुर्थी से महाभारत कथा श्री गणेश को लगातार १० दिन तक सुनाई थी जिसे श्री गणेश जी ने अक्षरश: लिखा था। १० दिन बाद जब वेद व्यास जी ने आंखें खोली तो पाया कि १० दिन की अथक मेहनत के बाद गणेश जी का तापमान ...

(पूरा पढ़ें)
+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 2 शेयर