+6 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 1 शेयर

*प्रशासक समिति✊🚩* (२५/०२) *🚩⚔️ विजयादशमी अधर्म पर धर्म की विजय का बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व* _स्टेटस वीडियो देखिये, लाइक ओर सब्सक्राइब करें👇👇_ https://youtu.be/Aq5BjiDFvtM *🔥 हम हर साल रावण के पुतलों का दहन करते हैं परंतु, अधर्म और उसकी शक्ति उनका दुस्साहस प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, कारण है कमजोर दंड विधान। दुष्ट अपराधियों में ना कानून का डर है ना किसी भी प्रकार के दंड का भय है इसलिए वह निरंतर निरंकुश हुए नित्य प्रतिदिन अपराध किए जा रहे हैं* *⚔️ यदि अपराध को रोकना है सुखी स्वस्थ और सुंदर भारत का निर्माण करना है तो अपराधियों को कठोर से कठोर दंड मिले ऐसा प्रावधान होना आवश्यक है* *⚔️ और सबसे जरूरी है कि हम सभी को आत्मरक्षा के अपने अधिकार को समझना होगा हम सभी को अधर्म के विरुद्ध लड़ने के लिए खुद को तैयार करना होगा अन्यथा इसी प्रकार अपराधियों का दुस्साहस बढ़ता रहेगा* *✊ हमें खुद को जागरूक करना है खुद को संगठित करना है और सभी को जागरूक कर हमारे धर्म तथा देश की रक्षा सुनिश्चित करनी है। जब तक हम जागरूक और संगठित नहीं होंगे तब तक हमारा देश हमारा धर्म सुरक्षित नहीं हो सकता* *✊🚩⚔️ दशहरे के इस विजय पर्व पर संकल्प लो खुदकी, अपनों की, अपने समाज की ,अपने धर्म की और अपने देश की सुरक्षा के लिए खुद को तैयार करो, समाज को तैयार करो* *⚔️✊शस्त्र में जयते ✊⚔️* 🙏🚩🔱🏹🐚🕉️

+1 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

एक बार भगवान नारायण लक्ष्मी जी से बोले, “लोगों में कितनी भक्ति बढ़ गयी है …. सब “नारायण नारायण” करते हैं !” .. तो लक्ष्मी जी बोली, “आप को पाने के लिए नहीं!, मुझे पाने के लिए भक्ति बढ़ गयी है!” .. तो भगवान बोले, “लोग “लक्ष्मी लक्ष्मी” ऐसा जाप थोड़े ही ना करते हैं !” .. तो माता लक्ष्मी बोली कि , “विश्वास ना हो तो परीक्षा हो जाए!” ..भगवान नारायण एक गाँव में ब्राह्मण का रूप लेकर गए…एक घर का दरवाजा खटखटाया…घर के यजमान ने दरवाजा खोल कर पूछा , “कहाँ के हैं ?” तो …भगवान बोले, “हम तुम्हारे नगर में भगवान का कथा-कीर्तन करना चाहते हैं…” .. यजमान बोला, “ठीक है महाराज, जब तक कथा होगी आप मेरे घर में रहना…” … गाँव के कुछ लोग इकट्ठा हो गये और सब तैयारी कर दी….पहले दिन कुछ लोग आये…अब भगवान स्वयं कथा कर रहे थे तो संगत बढ़ी ! दूसरे और तीसरे दिन और भी भीड़ हो गयी….भगवान खुश हो गए..की कितनी भक्ति है लोगो में….! लक्ष्मी माता ने सोचा अब देखा जाये कि क्या चल रहा है। .. लक्ष्मी माता ने बुढ्ढी माता का रूप लिया….और उस नगर में पहुंची…. एक महिला ताला बंद कर के कथा में जा रही थी कि माता उसके द्वार पर पहुंची ! बोली, “बेटी ज़रा पानी पिला दे!” तो वो महिला बोली,”माताजी , साढ़े 3 बजे है…मेरे को प्रवचन में जाना है!” .. लक्ष्मी माता बोली..”पिला दे बेटी थोडा पानी…बहुत प्यास लगी है..” तो वो महिला लौटा भर के पानी लायी….माता ने पानी पिया और लौटा वापिस लौटाया तो सोने का हो गया था!! .. यह देख कर महिला अचंभित हो गयी कि लौटा दिया था तो स्टील का और वापस लिया तो सोने का ! कैसी चमत्कारिक माता जी हैं !..अब तो वो महिला हाथ-जोड़ कर कहने लगी कि, “माताजी आप को भूख भी लगी होगी ..खाना खा लीजिये..!” ये सोचा कि खाना खाएगी तो थाली, कटोरी, चम्मच, गिलास आदि भी सोने के हो जायेंगे। माता लक्ष्मी बोली, “तुम जाओ बेटी, तुम्हारा प्रवचन का टाइम हो गया!” .. वह महिला प्रवचन में आई तो सही … लेकिन आस-पास की महिलाओं को सारी बात बतायी…. .. अब महिलायें यह बात सुनकर चालू सत्संग में से उठ कर चली गयी !! अगले दिन से कथा में लोगों की संख्या कम हो गयी….तो भगवान ने पूछा कि, “लोगों की संख्या कैसे कम हो गयी ?” …. किसी ने कहा, ‘एक चमत्कारिक माताजी आई हैं नगर में… जिस के घर दूध पीती हैं तो गिलास सोने का हो जाता है,…. जिस थाली में रोटी सब्जी खाती हैं तो थाली सोने की हो जाती है !… उस के कारण लोग प्रवचन में नहीं आते..” .. भगवान नारायण समझ गए कि लक्ष्मी जी का आगमन हो चुका है! इतनी बात सुनते ही देखा कि जो यजमान सेठ जी थे, वो भी उठ खड़े हो गए….. खिसक गए! .. पहुंचे माता लक्ष्मी जी के पास ! बोले, “ माता, मैं तो भगवान की कथा का आयोजन कर रहा था और आप ने मेरे घर को ही छोड़ दिया !” माता लक्ष्मी बोली, “तुम्हारे घर तो मैं सब से पहले आनेवाली थी ! लेकिन तुमने अपने घर में जिस कथा कार को ठहराया है ना , वो चला जाए तभी तो मैं आऊं !” सेठ जी बोले, “बस इतनी सी बात !… अभी उनको धर्मशाला में कमरा दिलवा देता हूँ !” .. जैसे ही महाराज (भगवान्) कथा कर के घर आये तो सेठ जी बोले, "महाराज" आप अपना बिस्तर बांधो ! आपकी व्यवस्था अबसे धर्मशाला में कर दी है !!” महाराज बोले, “ अभी तो 2-3 दिन बचे है कथा के…..यहीं रहने दो” सेठ बोले, “नहीं नहीं, जल्दी जाओ ! मैं कुछ नहीं सुनने वाला ! किसी और मेहमान को ठहराना है। ” .. इतने में लक्ष्मी जी आई , कहा कि, “सेठ जी , आप थोड़ा बाहर जाओ… मैं इन से निबट लूँ!” माता लक्ष्मी जी भगवान् से बोली, "प्रभु" , अब तो मान गए?” भगवान नारायण बोले, “हां लक्ष्मी तुम्हारा प्रभाव तो है, लेकिन एक बात तुम को भी मेरी माननी पड़ेगी कि तुम तब आई, जब संत के रूप में मैं यहाँ आया!! संत जहां कथा करेंगे वहाँ लक्ष्मी तुम्हारा निवास जरुर होगा…!!” यह कह कर नारायण भगवान् ने वहां से बैकुंठ के लिए विदाई ली। अब प्रभु के जाने के बाद अगले दिन सेठ के घर सभी गाँव वालों की भीड़ हो गयी। सभी चाहते थे कि यह माता सभी के घरों में बारी 2 आये। पर यह क्या ? लक्ष्मी माता ने सेठ और बाकी सभी गाँव वालों को कहा कि, अब मैं भी जा रही हूँ। सभी कहने लगे कि, माता, ऐसा क्यों, क्या हमसे कोई भूल हुई है ? माता ने कहा, मैं वही रहती हूँ जहाँ नारायण का वास होता है। आपने नारायण को तो निकाल दिया, फिर मैं कैसे रह सकती हूँ ?’ और वे चली गयी। शिक्षा : जो लोग केवल माता लक्ष्मी को पूजते हैं, वे भगवान् नारायण से दूर हो जाते हैं। अगर हम नारायण की पूजा करें तो लक्ष्मी तो वैसे ही पीछे 2 आ जाएँगी, क्योंकि वो उनके बिना रह ही नहीं सकती । जहाँ परमात्मा की याद है। वहाँ लक्ष्मी का वास होता है। केवल लक्ष्मी के पीछे भागने वालों को न माया मिलती ना ही राम। 🙏🙏🙏🙏🙏

+1 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

+8 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 4 शेयर

*सरदार जी की 'कन्याएं'* *मुहल्ले की औरतें कन्या पूजन के लिए तैयार थी, मिली नहीं कोई लड़की, उन्होंने हार अपनी मान ली !* *फिर किसी ने बताया, अपने मोहल्ले के है बाहर जी, बारह बेटियों का बाप, है सरदार जी !* *सुन कर उसकी बात, हँस कर मैंने यह कह दिया, बेटे के चक्कर में सरदार, बेटियां बारह कर के बैठ गया !* *पड़ोसियों को साथ लेकर, जा पहुँचा उसके घर पे,सत श्री अ काल कहा, मैंने प्रणाम उसे कर के !* *कन्या पूजन के लिए आपकी बेटियां घर लेकर जानी है, आपकी पत्नी ने कन्या बिठा ली, या बिठानी है ?* *सुन के मेरी बात बोला, आपको कोई गलतफहमी हुई है, किसकी पत्नी जी ? मेरी तो अभी शादी भी नहीं हुई है !* *सुन के उसकी बात, मैं तो चकरा गया, बातों-बातों में वो मुझे क्या-क्या बता गया !* *मत पूछो इनके बारे में, जो बातें मैंने छुपाई है, क्या बताऊँ आपको, कि मैंने कहाँ-कहाँ से उठाई हैं !* *माँ-बाप इनके हैवानियत की हदें सब तोड़ गए,* *मन्दिर, मस्ज़िद और कई हस्पतालों में थे छोड़ गए !* *बड़े-बड़े दरिंदे है, अपने इस जहान में,* *यह जो दो छोटियां है, मिली थी मुझेे कूड़ेदान में !* *इसका बाप कितना निर्दयी होगा, जिसे दया ना आई नन्ही सी जान पे,* *हम मुर्दों को लेकर जाते हैं, वो जिन्दा ही छोड़ गया इसे श्मशान में !* *यह जो बड़ी प्यारी सी है, थोड़ा लंगड़ा के चल रही है,* *मैंने देखा के तलाब के पास एक गाड़ी खड़ी थी !* *बैग फेंक कर भगा ली गाड़ी, जैसे उसे जल्दी बड़ी थी,* *शायद उसके पीछे कोई बड़ी आफ़त पड़ी थी !* *बैग था आकर्षित, मैंने लालच में उठाया था,* *देखा जब खोल के, आंसू रोक नहीं पाया था !* *जबरन बैग में डालने के लिए, उसने पैर इसके मोड़ दिये थे,* *शायद उसे पता नहीं चला, कि उसने कब पैर इसके तोड़ दिये थे !* *सात साल हो गए इस बात को, ये दिल पे लगा कर बैठी है,* *बस गुमसुम सी रहती हैं, दर्द सीने में छुपा कर बैठी है !* *सुन के बात सरदार जी की, सामने आया सब पाप था,* *लड़की के सामने जो खड़ा था कोई और नहीं, वो उसका बाप था !* *देखा जब पडोसियों के तरफ़, उनके चेहरे के रंग बताते थे,* *वो भी किसी ना किसी लड़की के, मुझे माँ-बाप नजर आते थे !* *दिल पे पत्थर रख कर, लड़कियों को घर लेकर आ गया,* *बारी-बारी से सब को हमने पूजा के लिए बिठा दिया !* *जिन हाथों ने अपने हाथ से, तोड़े थे जो पैर जी,* *टूटे हुए पैरों को छू कर, मांग रहे थे ख़ैर जी !* *क्यों लोग खुद की बेटी मार कर, दूसरों की पूजना चाहते हैं ?* *कुछ लोग कन्या पूजन ऐसे ही मनाते हैं !* *।।जय जय श्री राम।।* *।।हर हर महादेव।।*

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

🥺अब्दुल हमीद भी फर्जी निकला🥺 कोंग्रेस की घटिया करतूत का एक और हसीन पल 🤔 पढ़िये पूरा आंखे_खोल_देने_वाला #सच 1965 के युद्ध का झूठा इतिहास ध्यान से और लगन से पढें. . मुस्लिम सैनिकों की गहरी साजिश का खुलासा??? हमें इतिहास में पढाया गया कि अब्दुल हमीद ने पैटन टैंक उड़ाए थे, जबकि ये सरासर झूठ है, और कांग्रेस का भारतीयों से एक और विश्वासघात है...! हरियाणा निवासी भारतीय फौज के बहादुर सिपाही #चंद्रभान_साहू ने पैटन टैंक को उड़ाया था, ना कि किसी अब्दुल हमीद ने...! परमवीर चक्र भी उसी #सैनिक_चंद्रभान_साहू ने जीता था ना कि किसी #अब्दुल_हमीद ने...! बात सन् 1965 के भारत-पाक युद्ध की है... जब अमेरिका द्वारा प्राप्त अत्याधुनिक पैटन टैंकों के बूते पाकिस्तान अपनी जीत को पक्का मान रहा था, और भारतीय सेना इन टैंकों से निपटने के लिये चिंतित थी... भारतीय सेना के सामने, भारतीय सेना ने ही एक मुसिबत खडी कर दी। युद्ध के वक़्त भारतीय सेना की मुस्लिम बटालियन के अधिकांश मुस्लिम सैनिकों द्वारा पाकिस्तान के खेमे में चले जाने व बाकी मुस्लिम सैनिकों द्वारा उसके समर्थन में हथियार डाले जाने से भारतीय खेमे में आत्मविश्वास की बेहद कमी व घोर निराशा थी... . उस घोर निराशा व बेहद चिंताजनक स्थिति के वक़्त आशा की किरण व पूरे युध्द का महानायक बनकर आया था, भारतीय सेना का एक बीस वर्षीय नौजवान, सैनिक चंद्रभान साहू...(पूरा पता-- चंद्रभान साहू सुपुत्र श्री मौजीराम साहू, गांव रानीला, जिला भिवानी, वर्तमान जिला चरखी दादरी, हरियाणा). .. रानीला गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि सैनिक चंद्रभान साहू का शव बेहद क्षत-विक्षत व टुकड़ों में था। शव के साथ आये सैनिक व अधिकारी अश्रुपूर्ण आंखों से उसकी अमर शौर्यगाथा सुना रहे थे कि किस तरह एक के बाद एक उसने अकेले पांच पैटन टैंक नष्ट कर दिये थे। इसमें बुरी तरह घायल हो चुके थे, और उन्हें जबरन एक तरफ लिटा दिया गया था कि आप पहले ही बहुत बड़ा कार्य कर चुके हैं, अब आपको ट्रक आते ही अन्य घायलों के साथ अस्पताल भेजा जायेगा। लेकिन सैनिक चंद्रभान साहू ये कहते हुए उठ खड़े हुए कि मैं एक तरफ लेटकर युद्ध का तमाशा नहीं देख सकता, घर पर माता-पिता की बुढ़ापे में सेवा के लिये और भाई हैं, मैं अन्तिम सांस तक लडूंगा, और दुश्मन को अधिकतम हानि पहुँचाऊँगा... कोई हथियार न दिये जाने पर साक्षात महाकाल का रूप धारण कर सबके मना करते करते भी अभूतपूर्व वीरता व साहस दिखाते हुए एंटी टैंक माइन लेकर पास से गुजरते टैंक के नीचे लेटकर छठा टैंक ध्वस्त कर युद्ध में प्राणों का सर्वोच्च बलिदान कर दिया... उनके इस सर्वोच्च व अदभुत बलिदान ने भारतीय सेना में अपूर्व जोश व आक्रोश भर दिया था व उसके बाद हर जगह पैटन टैंकों की कब्र खोद दी गई। ग्रामीणों ने नई पीढ़ी को प्रेरणा देने के लिये दशकों तक उसका फोटो व शौर्यगाथा रानीला गांव के बड़े स्कूल में टांग कर रखी और आज भी स्कूल में उनका नाम लिखा हुआ बताते हैं... बार्डर फिल्म में जो घायल अवस्था में सुनील शेट्टी वाला एंटी-टैंक माइन लेकर टैंक के नीचे लेटकर टैंक उड़ाने का दृश्य है, वो सैनिक चंद्रभान साहू ने वास्तव में किया था। ऐसे रोम रोम से राष्ट्रभक्त महायोद्धा सिर्फ भारतभूमि पर जन्म ले सकते हैं... मुस्लिम रेजिमेंट द्वारा पाकिस्तान का समर्थन करने से मुस्लिमों की हो रही भयानक किरकिरी को रोकने व मुस्लिमों की छवि ठीक रखने के लिये इंदिरा गाँधी की कांग्रेस सरकार ने परमवीर चंद्रभान साहू की अनुपम वीरगाथा को पूरे युद्ध के एकमात्र मुस्लिम मृतक अब्दुल हमीद के नाम से अखबारों में छपवा दिया व रेडियो पर चलवा दिया, और अब्दुल हमीद को परमवीर चक्र दे दिया व इसका असली अधिकारी सैनिक चंद्रभान साहू गुमनामी के अंधेरे में खो गया...!!! ऐसे ही अनेक काम कांग्रेस ने पिछले 75 सालों में हर क्षेत्र में किये, जिनका खुलासा होना बाकी है। शेयर करते रहिए पता नही राष्ट्र से जुड़े कितने रहस्य अभी उजागर होने बाकी है। *जय हिंद* *वन्देमातरम*

+5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 3 शेयर

☘️ *_जान लीजिये हार्ट अटैक का सच नही तो पछताते रहोगे जिन्दगी भर_* www.navneetayurveda.com आज हम आपके लिए एक महत्वपूर्ण और जबरदस्त जानकारी लेकर आये है, हार्ट अटेक के बारे में। दोस्तो अमेरिका की बड़ी बड़ी कंपनिया जो दवाइया भारत मे बेच रही है वो अमेरिका मे 20 -20 साल से बंद है । आपको जो अमेरिका की सबसे खतरनाक दवा दी जा रही है वो आज कल दिल के रोगी (heart patient) को सबसे ज्यादा दी जा रही है। भगवान न करे कि आपको कभी जिंदगी मे heart attack आए। लेकिन अगर आ गया तो आप जाएँगे डाक्टर के पास ही और डॉक्टर के पास जाने पर डॉक्टर कहता है कि इसका तो angioplasty आपरेशन करना होगा तभी इनकी जान बच पाएगी। और आपको मालूम ही है कि हार्ट अटेक होने पर एक angioplasty आपरेशन होता है । उस angioplasty आपरेशन मे डाक्टर दिल की नली मे एक स्प्रिंग (spring) डालते हैं । उसको स्टेंट (stent) कहते हैं । और ये stent अमेरिका से आता है और इसका cost of production सिर्फ 3 डालर का है और यहाँ लाकर वो 3 से 5 लाख रुपए मे बेचते है और ऐसे लूटते हैं आपको। और एक बार attack मे एक stent डालेंगे, दूसरी बार दूसरा डालेंगे। डाक्टर को commission है इसलिए वो बार-बार कहता हैं angioplasty करवाओ angioplasty करवाओ। इसलिए कभी मत करवाए। *तो फिर आप बोलेंगे कि हम क्या करें ?* दोस्तों आप इसका आयुर्वेदिक इलाज करे जो कि बहुत ही सरल है। पहले आप एक बात जान लीजिये। aangioplasty आपरेशन कभी किसी का सफल नहीं होता। क्यूंकि डाक्टर जो spring दिल की नली मे डालता है वो spring बिलकुल pen के spring की तरह होता है और कुछ दिन बाद उस spring की दोनों side आगे और पीछे फिर blockage जमा होनी शुरू हो जाएगी और फिर दूसरा attack आता है। डाक्टर आपको फिर कहता है कि angioplasty आपरेशन करवाओ। इस तरह आपके लाखो रूपये लूटता है और आपकी ज़िंदगी इसी मे निकल जाती है। *-:अब जान लीजिये इसका आयुर्वेदिक इलाज :-* हमारे भारत देश मे 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे उनका नाम था महाऋषि वागवट जी। उन्होने एक पुस्तक लिखी थी जिसका नाम है अष्टांग हृदयम। इस पुस्तक मे उन्होने ने बीमारियो को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखे थे। ये उनमे से ही एक सूत्र है। वागवट जी लिखते है कि कभी भी ह्रदय को घात हो रहा है मतलब दिल की नलियो मे blockage होना शुरू हो रहा है । तो इसका मतलब है कि रक्त मे अम्लता बढ़ी हुई है यानि ब्लड में एसिडिटी बढ़ी हुई है। अम्लता आप समझते है यानि जिसको अँग्रेजी मे कहते है acidity । *अम्लता दो तरह की होती है । एक होती है पेट की अम्लता । और एक होती है रक्त (blood) की अम्लता ।।* जब आपके पेट मे अम्लता बढ़ती है तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है, खट्टी खट्टी डकार आ रही है, मुंह से पानी निकाल रहा है और अगर ये अम्लता (acidity)और बढ़ जाये तो hyperacidity होगी और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त मे आती है तो रक्त अम्लता (blood acidity) होती है। जब blood मे acidity बढ़ती है तो ये अमलीय रकत दिल की नलियो मे से निकल नहीं पाता और नलियों मे blockage कर देता है। तभी heart attack होता है। इसके बिना heart attack नहीं होता। ये ही आयुर्वेद का सबसे बड़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं क्यूंकि इसका इलाज सबसे सरल है। *अब इलाज क्या है ??* दोस्तों वागबट जी लिखते है कि जब रक्त मे अम्लता बढ़ गई है यानि ब्लड में एसिडिटी बढ़ गई है तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय है । आप जानते है दो तरह की चीजे होती है । *अमलीय और क्षारीय ।।* (Acid and alkaline) *अब अम्ल और क्षार (acid and alkaline) को मिला दो तो क्या होता है ?* *Neutral होता है, सब जानते है ।* तो वागबट जी लिखते है कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय (alkaline) चीजे खाओ तो रक्त की अम्लता (acidity) neutral हो जाएगी और रक्त मे अम्लता neutral हो गई तो heart attack होने की जिन्दगी में सम्भावना ही नही होगी। *अब यह आप पूछोगे जी ऐसी कौन कोंन सी चीजे है जो क्षारीय है और हम खाये ?* दोस्तों आपके रसोई घर मे सुबह से शाम तक ऐसी बहुत सी चीजे है जो क्षारीय है। जिन्हें आप खाये तो कभी heart attack न आए और अगर आ गया है तो दुबारा न आए। सबसे ज्यादा आपके घर मे क्षारीय चीज है वह है लौकी। जिसे दुदी भी कहते है। English मे इसे कहते है bottle gourd । जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है । इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है । तो आप रोज लौकी का रस निकाल-निकाल कर पियो या कच्ची लौकी खाओ। दोस्तों स्वामी रामदेव जी को आपने कई बार कहते सुना होगा लौकी का जूस पीयों- लौकी का जूस पीयों। 3 लाख से ज्यादा लोगो को उन्होने ठीक कर दिया लौकी का जूस पिला पिला कर। उसमे हजारो डाक्टर है जिनको खुद heart attack होने वाला था। वो वहाँ जाते है लौकी का रस पी पी कर आते है। 3 महीने 4 महीने लौकी का रस पीकर वापिस आते है आकर फिर clinic पर बैठ जाते है। वो बताते नहीं हम कहाँ गए थे। वो कहते है हम न्यूयार्क गए थे, हम जर्मनी गए थे आपरेशन करवाने। वो रामदेव जी के यहाँ गए थे और 3 महीने लौकी का रस पीकर आए है। आकर फिर clinic मे आपरेशन करने लग गए है। और वो इतने हरामखोर है आपको बताते नहीं कि आप भी लौकी का रस पी लो। तो मित्रो जो ये रामदेव जी बताते है वे भी वागवट जी के आधार पर ही बताते है। वागवट जी कहते है रक्त की अम्लता कम करने की सबसे ज्यादा ताकत लौकी मे ही है । तो आप लौकी के रस का सेवन करे। *कितना करे ?* रोज 200 से 300 मिलीग्राम पियो। *कब पिये ??* सुबह खाली पेट toilet जाने के बाद पी सकते है या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते है। दोस्तों इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते है। इसमे 7 से 10 पत्ते के तुलसी के डाल लो। तुलसी बहुत क्षारीय है। इसके साथ आप पुदीने से 7 से 10 पत्ते मिला सकते है। पुदीना बहुत क्षारीय है। इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले। ये भी बहुत क्षारीय है। लेकिन याद रखे नमक काला या सेंधा ही डाले। वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले। ये आयोडीन युक्त नमक अम्लीय है। तो दोस्तों आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करे। 2 से 3 महीने में आपकी सारी heart की blockage ठीक कर देगा। 21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा। कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी। घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा और आपका अनमोल शरीर और लाखो रुपए आपरेशन के बच जाएँगे। *यह लेख सामान्य उपचार की जन सामान्य को जानकारी और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के प्रचार प्रसार के लिए लिखा गया है. यदि आप किसी विशेष और गम्भीर रोग से पीड़ित हैं तो अपने निकट के वैद्य से मिलकर ही अपना इलाज करवाएं. या हमसे संपर्क करे* *सभी प्रकार की आयुर्वैदिक मेडिसिन से संबंधित जानकारी के लिए हमारे यूट्यूब चैनल को लाइक एवं सबस्कराइब करें।* https://www.youtube.com/channel/UCs0vAfOASseGU5l7LVXAbkw *विशेष चिकित्सीय सलाह हेतु आप व्यक्तिगत सुबह ९ बजे के बाद और साय ५ बजे सम्पर्क कर सकते हैं* *_वैद्य नवनित भारद्वाज (आयुर्वेदाचार्य, पंचकर्म, योगा)_* *_प्रधान -आदि शंकराचार्य योगा और औषधालय केंद्र ,जीदं रोड सफिदो।_* *_सचिव हरीयाणा-सर्व ब्राह्मण महासभा भारत_* *_आयुर्वेद विशेषज्ञ एवं अध्यापक-रामस्वरूप आक्षर्म,(सफिदो,कपालमोचन, ऋषिकेश,हरिद्वार)_* *_चिकित्सा सलाहकार एवं आयुर्वेद प्रचारक-स्वामी निगमबोध आक्षर्म एवं टर्सट,(लुधियाना,हरिद्वार)_* *_ओषधि निर्माण एवं मुख्य चिकित्सक-डेरा बाबा दया दास (कुचपड धनाना, महम,रोहतक)_* *_मैं वैद्य नवनित भारद्वाज भारत को भारतीयता के मान्यता के आधार पर फिर से खड़ा करना चाहता हूँ उस काम मे लगा हुआ हूँ_* www.navneetayurveda.com *_वैद्य नवनित भारद्वाज जी के आयुवेदिक ग्रुप में सदस्य बना चाहते है तो वडसप्प नम्बर 9813201008 पर- नाम,पता,क्या कार्य करते हे- मैसेज करे।_* *_जटिल से जटिल रोगों के उपचार हेतु लेख पढ़ें व share करें।_* https://m.facebook.com/DrNavneetBhardwaj/?_e_pi_=7%2CPAGE_ID10%2C3868181226 *अमर शहीद राष्ट्रगुरु, आयुर्वेदज्ञाता, होमियोपैथी ज्ञाता स्वर्गीय भाई राजीव दीक्षित जी के सपनो (स्वस्थ व समृद्ध भारत) को पूरा करने हेतु अपना समय दान दें मेरी दिल की तम्मना है हर इंसान का स्वस्थ स्वास्थ्य के हेतु समृद्धि का नाश न हो इसलिये इन ज्ञान को अपनाकर अपना व औरो का स्वस्थ व समृद्धि बचाये। ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और जो भाई बहन इन सामाजिक मीडिया से दूर हैं उन्हें आप व्यक्तिगत रूप से ज्ञान दें।* *_Note- इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें ताकि किसी रोगी को इसका फायदा मिल सके_* *_वन्देमातरम_*

+1 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

*हजारों साल से शूद्र दलित मंदिरों में पूजा करते आ रहे थे पर अचानक 19वी० शताब्दी में ऐसा क्या हुवा कि दलितों को मंदिरों में प्रवेश नकार दिया गया?* क्या आप सबको इसका सही कारण मालूम है? या सिर्फ बामनों को गाली देकर मन को झूठी तसल्ली दे देते हो? पढिये सबूत के साथ क्या हुवा था उस समय! अछूतों को मन्दिर में न घुसने देने की सच्चाई क्या है? ये काम पुजारी करते थे कि मक्कार अंग्रेजो के लूटपाट का षड्यंत्र था? 1932 में लोथियन कॉमेटी की रिपोर्ट सौंपते समय डॉ आंबेडकर ने अछूतों को मन्दिर में न घुसने देने का जो उद्धरण पेश किया है वो वही लिस्ट है जो अंग्रेजो ने #कंगाल यानि गरीब लोगों की लिस्ट बनाई थी जो मन्दिर में घुसने देने के लिए अंग्रेजों द्वारा लगाये गए टैक्स को देने में असमर्थ थे! #षड़यंत्र- मित्रों 1808ई० में ईस्ट इंडिया कंपनी पूरी के जगन्नाथ मंदिर को अपने कब्जे में लेती है और फिर लोगो से कर बसूला जाता है तीर्थ यात्रा के नाम पर! चार ग्रुप बनाए जाते हैं! और चौथा ग्रुप जो कंगाल है उनकी एक लिस्ट जारी की जाती है! 1932 ई० में जब डॉ आंबेडकर अछूतों के बारे में लिखते हैं तो वे ईस्ट इंडिया के जगन्नाथ पुरी मंदिर के दस्तावेज की लिस्ट को अछूत बनाकर लिखते हैं! भगवान जगन्नाथ के मंदिर की यात्रा को यात्रा कर में बदलने से ईस्ट इंडिया कंपनी को बेहद मुनाफ़ा हुआ और यह 1809 से 1840 तक निरंतर चला! जिससे अरबो रूपये सीधे अंग्रेजो के खजाने में बने और इंग्लैंड पहुंचे! श्रद्धालु यात्रियों को चार श्रेणियों में विभाजित किया जाता था! प्रथम श्रेणी = लाल जतरी (उत्तर के धनी यात्री ) द्वितीय श्रेणी = निम्न लाल (दक्षिण के धनी यात्री ) तृतीय श्रेणी = भुरंग ( यात्री जो दो रुपया दे सके ) चतुर्थ श्रेणी = पुंज तीर्थ (कंगाल की श्रेणी जिनके पास दो रूपये भी नही ,तलासी लेने के बाद ) चतुर्थ श्रेणी के नाम इस प्रकार हैं! 1. लोली या कुस्बी! 2. कुलाल या सोनारी! 3.मछुवा! 4.नामसुंदर या चंडाल 5.घोस्की 6.गजुर 7.बागड़ी 8.जोगी 9.कहार 10. राजबंशी 11.पीरैली 12. चमार 13.डोम 14.पौन 15.टोर 16.बनमाली 17.हड्डी प्रथम श्रेणी से 10 रूपये! द्वितीय श्रेणी से 6 रूपये! तृतीय श्रेणी से 2 रूपये और चतुर्थ श्रेणी से कुछ नही! अब जो कंगाल की लिस्ट है जिन्हें हर जगह रोका जाता था और मंदिर में नही घुसने दिया जाता था! आप यदि उस समय 10 रूपये भर सकते तो आप सबसे अच्छे से ट्रीट किये जाओगे! डॉ आंबेडकर ने अपनी Lothian Commtee Report में इसी लिस्ट का जिक्र किया है और कहा की कंगाल पिछले 100 साल में कंगाल ही रहे! पढिये! "In regard to the depressed classes of Bengal there is an important piece of evidence to which I should like to call attention and which goes to show that the list given in the Bengal Census of 1911 is a correct enumeration of caste which have been traditionally treated as untouchable castes in Bengal. I refer to Section 7 of Regulation IV of 1809 (A regulation for rescinding Regulations IV and V of 1806 ; and for substituting rules in lieu of those enacted in the said regulations for levying duties from the pilgrims resorting to Jagannath, and for the superintendence and management of the affairs of the temple; passed by the Governor-General in Council, on the 28th of April 1809) which gives the following list of castes which were debarred from entering the temple of Jagannath at Puri : (1) Loli or Kashi, (2) Kalal or Sunri, (3) Machhua, (4) Namasudra or Chandal, (5) Ghuski, (6) Gazur, (7) Bagdi, (8) Jogi or Nurbaf, (9) Kahar-Bauri and Dulia, (10) Rajbansi, (II) Pirali, (12) Chamar, (13) Dom, (14) Pan, (15) Tiyar, (16) Bhuinnali, and (17) Hari. The enumeration agrees with the list of 1911 Census and thus lends support to its correctness. Incidentally it shows that a period of 100 years made no change in the social status of the untouchables of Bengal. बाद में वही कंगाल षडयंत्र के तहत अछूत बनाये गए! *हिन्दुओ के सनातन धर्म में छुआछुत बैसिक रूप से कभी था ही नहीं!* यदि ऐसा होता तो सभी हिन्दुओ के श्मशानघाट और चिता अलग अलग होती! और मंदिर भी जातियों के हिसाब से ही बने होते और हरिद्वार में अस्थि विसर्जन भी जातियों के हिसाब से ही होता! ये जातिवाद ईसाई और मुसलमानों में है इन में जातियों और फिरको के हिसाब से अलग अलग चर्च और अलग अलग मस्जिदें और अलग अलग कब्रिस्तान बने हैं! हिन्दूऔ में जातिवाद, भाषावाद, प्रान्तवाद, धर्मनिपेक्षवाद, जडतावाद, कुतर्कवाद, गुरुवाद, राजनीतिक पार्टीवाद *पिछले 1000 वर्षों से मुस्लिम और अग्रेजी शासको ने षडयंत्र से डाला है!* जिस पर से काग्रेस नाम के राजनीतिक दल ने पिछले 70 वर्षो तक अपनी राजनीति की रोटियां और जूते में दाल खाई षडयंत्रो को समझो हिन्दुओ। वेदों की ओर लौटो. भारतीय जन मोर्चा पार्टी

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर