gopal Krishna Feb 21, 2020

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gopal Krishna Feb 21, 2020

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gopal Krishna Jan 25, 2020

सुख-समृद्धि देने वाले पांच देवता,एक ही परमात्मा पांच इष्ट रूपों में!!!!!! एक परम प्रभु चिदानन्दघन परम तत्त्व हैं सर्वाधार । सर्वातीत,सर्वगत वे ही अखिलविश्वमय रुप अपार ।। हरि, हर, भानु, शक्ति, गणपति हैं इनके पांच स्वरूप उदार । मान उपास्य उन्हें भजते जन भक्त स्वरुचि श्रद्धा अनुसार ।। (पद-रत्नाकर) निराकार ब्रह्म के साकार रूप हैं पंचदेव!!!!!!!! परब्रह्म परमात्मा निराकार व अशरीरी है, अत: साधारण मनुष्यों के लिए उसके स्वरूप का ज्ञान असंभव है । इसलिए निराकार ब्रह्म ने अपने साकार रूप में पांच देवों को उपासना के लिए निश्चित किया जिन्हें पंचदेव कहते हैं । ये पंचदेव हैं—विष्णु, शिव, गणेश, सूर्यऔर शक्ति। आदित्यं गणनाथं च देवीं रुद्रं च केशवम् । पंचदैवतभित्युक्तं सर्वकर्मसु पूजयेत् ।। एवं यो भजते विष्णुं रुद्रं दुर्गां गणाधिपम् । भास्करं च धिया नित्यं स कदाचिन्न सीदति ।। (उपासनातत्त्व) अर्थात्—सूर्य, गणेश, देवी, रुद्र और विष्णु—ये पांच देव सब कामों में पूजने योग्य हैं, जो आदर के साथ इनकी आराधना करते हैं वे कभी हीन नहीं होते, उनके यश-पुण्य और नाम सदैव रहते हैं । वेद-पुराणों में पंचदेवों की उपासना को महाफलदायी और उसी तरह आवश्यक बतलाया गया है जैसे नित्य स्नान को । इनकी सेवा से ‘परब्रह्म परमात्मा’ की उपासना हो जाती है । अन्य देवताओं की अपेक्षा इन पांच देवों की प्रधानता ही क्यों? अन्य देवों की अपेक्षा पंचदेवों की प्रधानता के दो कारण हैं— १. पंचदेव पंचभूतों के अधिष्ठाता (स्वामी) हैं। पंचदेव आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी—इन पंचभूतों के अधिपति हैं । —सूर्य वायु तत्त्व के अधिपति हैं इसलिए उनकी अर्घ्य और नमस्कार द्वारा आराधना की जाती है । —गणेश के जल तत्त्व के अधिपति होने के कारण उनकी सर्वप्रथम पूजा करने का विधान हैं, क्योंकि सृष्टि के आदि में सर्वत्र ‘जल’ तत्त्व ही था । —शक्ति (देवी, जगदम्बा) अग्नि तत्त्व की अधिपति हैं इसलिए भगवती देवी की अग्निकुण्ड में हवन के द्वारा पूजा करने का विधान हैं । —शिव पृथ्वी तत्त्व के अधिपति हैं इसलिए उनकी शिवलिंग के रुप में पार्थिव-पूजा करने का विधान हैं । —विष्णु आकाश तत्त्व के अधिपति हैं इसलिए उनकी शब्दों द्वारा स्तुति करने का विधान हैं । २. अन्य देवों की अपेक्षा इन पंचदेवों के नाम के अर्थ ही ऐसे हैं कि जो इनके ब्रह्म होने के सूचक हैं— विष्णु अर्थात् सबमें व्याप्त, शिव यानी कल्याणकारी, गणेश अर्थात् विश्व के सभी गणों के स्वामी, सूर्य अर्थात् सर्वगत (सभी जगह जाने वाले), शक्ति अर्थात् सामर्थ्य । संसार में देवपूजा को स्थायी रखने के उद्देश्य से वेदव्यासजी ने विभिन्न देवताओं के लिए अलग-अलग पुराणों की रचना की । अपने-अपने पुराणों में इन देवताओं को सृष्टि को पैदा करने वाला, पालन करने वाला और संहार करने वाला अर्थात् ब्रह्म माना गया है । जैसे विष्णुपुराण में विष्णु को, शिवपुराण में शिव को, गणेशपुराण में गणेश को, सूर्यपुराण में सूर्य को और शक्तिपुराण में शक्ति को ब्रह्म माना गया है । अत: मनुष्य अपनी रुचि के अनुसार किसी भी देव को पूजे, उपासना एक ब्रह्म की ही होती है क्योंकि पंचदेव ब्रह्म के ही प्रतिरुप (साकार रूप) हैं । उनकी उपासना या आराधना में ब्रह्म का ही ध्यान होता है और वही इष्टदेव में प्रविष्ट रहकर मनवांछित फल देते हैं । वही एक परमात्मा अपनी विभूतियों में आप ही बैठा हुआ अपने को सबसे बड़ा कह रहा है वास्तव में न तो कोई देव बड़ा है और न कोई छोटा । एक उपास्य देव ही करते लीला विविध अनन्त प्रकार । पूजे जाते वे विभिन्न रूपों में निज-निज रुचि अनुसार ।। (पद रत्नाकर) पंचदेव और उनके उपासक!!!! विष्णु के उपासक ‘वैष्णव’ कहलाते हैं, शिव के उपासक ‘शैव’ के नाम से जाने जाते हैं, गणपति के उपासक ‘गाणपत्य’ कहलाते हैं, सूर्य के उपासक ‘सौर’ होते हैं, और शक्ति के उपासक ‘शाक्त’ कहलाते हैं । इनमें शैव, वैष्णव और शाक्त विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं । पंचदेवों के ही विभिन्न नाम और रूप हैं अन्य देवता!!!!!! शालग्राम, लक्ष्मीनारायण, सत्यनारायण, गोविन्ददेव, सिद्धिविनायक, हनुमान, भवानी, भैरव, शीतला, संतोषीमाता, वैष्णोदेवी, कामाख्या, अन्नपूर्णा आदि अन्य देवता इन्हीं पंचदेवों के रूपान्तर (विभिन्न रूप) और नामान्तर हैं । पंचायतन में किस देवता को किस कोण (दिशा) में स्थापित करें!!!!!! पंचायतन विधि—पंचदेवोपासना में पांच देव पूज्य हैं । पूजा की चौकी या सिंहासन पर अपने इष्टदेव को मध्य में स्थापित करके अन्य चार देव चार दिशाओं में स्थापित किए जाते हैं । इसे ‘पंचायतन’कहते हैं । शास्त्रों के अनुसार इन पाँच देवों की मूर्तियों को अपने इष्टदेव के अनुसार सिंहासन में स्थापित करने का भी एक निश्चित क्रम है । इसे ‘पंचायतन विधि’ कहते हैं । जैसे— विष्णु पंचायतन—जब विष्णु इष्ट हों तो मध्य में विष्णु, ईशान कोण में शिव, आग्नेय कोण में गणेश, नैऋत्य कोण में सूर्य और वायव्य कोण में शक्ति की स्थापना होगी । सूर्य पंचायतन—यदि सूर्य को इष्ट के रूप में मध्य में स्थापित किया जाए तो ईशान कोण में शिव, अग्नि कोण में गणेश, नैऋत्य कोण में विष्णु और वायव्य कोण में शक्ति की स्थापना होगी । देवी पंचायतन—जब देवी भवानी इष्ट रूप में मध्य में हों तो ईशान कोण में विष्णु, आग्नेय कोण में शिव, नैऋत्य कोण में गणेश और वायव्य कोण में सूर्य रहेंगे । शिव पंचायतन—जब शंकर इष्ट रूप में मध्य में हों तो ईशान कोण में विष्णु, आग्नेय कोण में सूर्य, नैऋत्य कोण में गणेश और वायव्य कोण में शक्ति का स्थान होगा । गणेश पंचायतन—जब इष्ट रूप में मध्य में गणेश की स्थापना है तो ईशान कोण में विष्णु, आग्नेय कोण में शिव, नैऋत्य कोण में सूर्य तथा वायव्य कोण में शक्ति की पूजा होगी । शास्त्रों के अनुसार यदि पंचायतन में देवों को अपने स्थान पर न रखकर अन्यत्र स्थापित कर दिया जाता है तो वह साधक के दु:ख, शोक और भय का कारण बन जाता है । देवता चाहे एक हो, अनेक हों, तीन हों या तैंतीस करोड़ हो, उपासना ‘पंचदेवों’ की ही प्रसिद्ध है । इन सबमें गणेश का पूजन अनिवार्य है । यदि अज्ञानवश गणेश का पूजन न किया जाए तो विघ्नराज गणेशजी उसकी पूजा का पूरा फल हर लेते हैं।

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gopal Krishna Jan 25, 2020

*🌾बाजरा खाइए, हड्डियों के रोग नहीं होंगें। 🌾बाजरे की रोटी का स्वाद जितना अच्छा है, उससे अधिक उसमें गुण भी हैं। 🌾- बाजरे की रोटी खाने वाले को हड्डियों में कैल्शियम की कमी से पैदा होने वाला रोग *आस्टियोपोरोसिस* और खून की कमी यानी *एनीमिया* नहीं होता। 🌾- बाजरा *लीवर* से संबंधित रोगों को भी कम करता है। 🌾- गेहूं और चावल के मुकाबले बाजरे में *ऊर्जा* कई गुना है। 🌾- बाजरे में भरपूर कैल्शियम होता है जो हड्डियों के लिए रामबाण औषधि है। उधर *आयरन* भी बाजरे में इतना अधिक होता है कि खून की कमी से होने वाले रोग नहीं हो सकते। 🌾- खासतौर पर गर्भवती महिलाओं ने कैल्शियम की गोलियां खाने के स्थान पर रोज बाजरे की दो रोटी खाना चाहिए। 🌾- वरिष्ठ चिकित्साधिकारी मेजर डा. बी.पी. सिंह के सेना में सिक्किम में तैनाती के दौरान जब गर्भवती महिलाओं को कैल्शियम और आयरन की जगह बाजरे की रोटी और खिचड़ी दी जाती थी। इससे उनके बच्चों को जन्म से लेकर पांच साल की उम्र तक *कैल्शियम और आयरन* की कमी से होने वाले रोग नहीं होते थे। 🌾-इतना ही नहीं बाजरे का सेवन करने वाली महिलाओं में प्रसव में *असामान्य पीड़ा* के मामले भी न के बराबर पाए गए। 🌾- डाक्टर तो बाजरे के गुणों से इतने प्रभावित है कि इसे अनाजों में *वज्र* की उपाधि देने में जुट गए हैं। 🌾- बाजरे का किसी भी रूप में सेवन लाभकारी है। 🌾*लीवर की सुरक्षा* के लिए भी बाजरा खाना लाभकारी है। 🌾- *उच्च रक्तचाप, हृदय की कमजोरी, अस्थमा से ग्रस्त लोगों तथा दूध पिलाने वाली माताओं में दूध की कमी* के लिये यह टॉनिक का कार्य करता है। 🌾- यदि बाजरे का नियमित रूप से सेवन किया जाय तो यह *कुपोषण, क्षरण सम्बन्धी रोग और असमय वृद्धहोने* की प्रक्रियाओं को दूर करता 🌾- रागी की खपत से शरीर प्राकृतिक रूप से शान्त होता है। *यह एंग्जायटी, डिप्रेशन और नींद* न आने की बीमारियों में फायदेमन्द होता है। यह *माइग्रेन* के लिये भी लाभदायक है। 🌾- इसमें लेसिथिन और मिथियोनिन नामक अमीनो अम्ल होते हैं जो अतिरिक्त वसा को हटा कर *कोलेस्ट्रॉल* की मात्रा को कम करते हैं। 🌾- बाजरे में उपस्थित रसायन पाचन की प्रक्रिया को धीमा करते हैं। *डायबिटीज़ में यह रक्त में शक्कर* की मात्रा को नियन्त्रित करने में सहायक होता है।

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gopal Krishna Jan 23, 2020

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय सत्य है ईश्वर, शिव है जीवन, सुन्दर यह संसार है तीनो लोक हैं तुझमे, तेरी माया अपरम्पार है ॐ नमः शिवाय नमो, ॐ नमः शिवाय नमो मन मेरा मंदिर, शिव मेरी पूजा, शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा बोल सत्यम शिवम्, बोल तू सुंदरम, मन मेरे शिव की महिमा के गुण गाए जा मन मेरा मंदिर, शिव मेरी पूजा, शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा बोल सत्यम शिवम्, बोल तू सुंदरम, मन मेरे शिव की महिमा के गुण गाए जा मन मेरा मंदिर, शिव मेरी पूजा, शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा पार्वती जब सीता बन कर, जय श्री राम के सन्मुख आयी, पार्वती जब सीता बन कर, जय श्री राम के सन्मुख आयी, राम ने उनको माता कह कर, शिव शंकर की महिमा गायी शिव भक्ति में सब कुछ सुझा, शिव से बढ़कर नहीं कोई दूजा, बोल सत्यम शिवम्, बोल तू सुंदरम, मन मेरे शिव की महिमा के गुण गए जा मन मेरा मंदिर, शिव मेरी पूजा, शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा ॐ नमः शिवाय नमो, ॐ नमः शिवाय नमो ॐ नमः शिवाय नमो, ॐ नमः शिवाय नमो तेरी जटा से निकली गंगा और गंगा ने भीष्म दिया है, तेरी जटा से निकली गंगा और गंगा ने भीष्म दिया है, तेरे भक्तो की शक्ति ने सारे जगत को जीत लिया है तुझको सब देवों ने पूजा, शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा बोल सत्यम शिवम्, बोल तू सुंदरम, मन मेरे शिव की महिमा के गुण गए जा मन मेरा मंदिर, शिव मेरी पूजा, शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा , बोल सत्यम शिवम्, बोल तू सुंदरम, मन मेरे शिव की महिमा के गुण गाए जा मन मेरा मंदिर, शिव मेरी पूजा, शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा

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