*वसंत पंचमी की सुंदर पौराणिक कथा :* जब चतुर्भुज सुंदरी प्रकट हुई मां सरस्वती के रूप में वसंत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। इस ऋतु में मौसम खूबसूरत हो जाता है। फूल, पत्ते, आकाश, धरती सब पर बहार आ जाती है। सारे पुराने पत्ते झड़ जाते हैं और नए फूल आने लगते हैं। प्रकृति के इस अनोखे दृश्य को देख हर व्यक्ति का मन मोह जाता है। मौसम के इस सुहावने मौके को उत्सव की तरह मनाया जाता है। वसंत पंचमी को श्री पंचमी तथा ज्ञान पंचमी भी कहते हैं। सृष्टि की रचना का कार्य जब भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी को दिया तब खुश नहीं थे। सृष्टि निर्माण के बाद उदासी से भरा वातावरण देख वे विष्णु जी के पास गए और सुझाव मागा। फिर विष्णु जी के मार्गदर्शन अनुसार उन्होंने अपने कमंडल से जल लेकर धरती पर छिड़का। तब एक चतुर्भुज सुंदरी हुई, जिसने जीवों को वाणी प्रदान की। यह देवी विद्या, बुद्धि और संगीत की देवी थीं, उनके आने से सारा वातावरण संगीतमय और सरस हो उठा इसलिए उन्हें सरस्वती देवी कहा गया। इसलिए इस दिन सरस्वती देवी का जन्म बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है और इनकी पूजा भी की जाती है। इस दिन लोग अपने घरों में सरस्वती यंत्र स्थापित करते हैं। इस दिन 108 बार सरस्वती मंत्र के जाप करने से अनेक फायदे होते हैं। इस दिन बच्चों की जुबान पर केसर रख कर नीचे दिए गए मंत्र का उच्चारण कराया जाता है...इससे वाणी, बुद्धि और विवेक का शुभ आशीष मिलता है। मंत्र-‘ॐ ऐं महासरस्वत्यै नमः’ वसंत ऋतु के बारे में ऋग्वेद में भी उल्लेख मिलता है। प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु। इसका अर्थ है सरस्वती परम् चेतना हैं। वे हमारी बुद्धि, समृद्धि तथा मनोभावों की सुरक्षा करती हैं... भगवान श्री कृष्ण ने गीता में वसंत को अपनी विभूति माना है और कहा है ‘ऋतुनां कुसुमाकरः’ सहस शील हृदय में भर दे जीवन त्याग से भर दे संयम सत्य स्नेह का वर दे माँ सरस्वती आपके जीवन को हर्षोल्लास से भर दे । 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐🙏

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क्यों सात बार राई वारने से उतर जाती हैं नजर ? मित्रों अक्सर हम सुनते है कि जब किसी को नजर लग जाती है तो उसे कहते हैं कि अपनी मुट्ठी में राई लेकर अपने सिर से सात बार वार कर फेंक दो। क्या राई को सात बार वार देने क्या नजर उतर सकती हैं ? आइये इसके पीछे क्या विज्ञान काम करता हैं समझने का प्रयास करते हैं। मित्रों अक्सर आप देखते होंगे की राई को जब किसी प्लास्टिक बेग से निकालते हैं तो राई उस प्लाष्टिक बेग से चिपक जाती हैं। वो इसलिये कि राई में चुम्बकीय गुण विद्धमान होता हैं। और राई को बेग से निकालते वक्त घर्षण से उसका चुम्बकीय गुण सक्रीय हो जाता हैं। अब जब इसे सात बार हमारे शरीर पर से वारा जाता हैं तब इसका संपर्क हमारे शरीर के सात रंग वाले आभामंडल से होता हैं, जिसे हम सुरक्षा चक्र भी कहते हैं। राई के लगातार हमारे आभामंडल से टकराने से इसका चुम्बकीय गुण सक्रीय होकर हमारे शरीर के सातों चक्रों में फैली नकारात्मकता को सोख लेता हैं। सात बार वारने का मतलब हमारे सूक्ष्म शरीर के सातों चक्रों का शुद्धिकरण करना होता हैं। सात बार राई को वारने के बाद उसे घर से कुछ दूर नाली में फेंक दिया जाता हैं। वैसे आभामंडल के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इसके लिए साधारण तौर पर इतना बता देता हूँ कि आभामंडल हमारे शरीर का सुरक्षा चक्र होता हैं। जब ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अच्छी-बुरी दशा चलती हैं तो उसका सबसे पहला प्रभाव हमारे आभामंडल पर ही पड़ता हैं। पर अगर हम किसी अच्छी संगत, अच्छे विचार या किसी ज्ञानी गुरु के संपर्क में हो या किसी भगवान् में हमारी आस्था बहुत मजबूत हो तो ग्रहों के बुरे प्रभाव की रश्मियाँ हमारे उस आभामंडल यानी सुरक्षा चक्र का भेदन करने में कामयाब नही होती। इसलिए जो लोग निरंतर सत्संग करते हैं, सकारात्मक विचारों के संपर्क में रहते हैं ऐसे पुण्यशाली लोगों पर ग्रहों, टोने-टोटके और नजर इत्यादि का बुरा प्रभाव आसानी से नही पड़ता। और न ही कोई नकारात्मकता उनके आभामंडल को भेद पाती हैं।

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🙏 मां सरस्वती के विद्या-प्रदायक 12 नाम 🙏 मां सरस्वती के इन चमत्कारी सिद्ध 12 नामों के नित्य तीन बार पाठ करने से मनुष्य की जिह्वा के अग्र भाग पर सरस्वती विराजमान हो जाती है अर्थात् जो भी बात वह कहता है वह पूरी हो जाती है । महर्षि, वाल्मीकि, व्यास, वशिष्ठ, विश्वामित्र और शौनक आदि ऋषि सरस्वतीजी की साधना से ही सिद्ध हुए । ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार सृष्टि काल में ईश्वर की इच्छा से आद्याशक्ति ने अपने को पांच भागों में विभक्त कर लिया था । वे राधा, पद्मा, सावित्री, दुर्गा और सरस्वती के रूप में भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न अंगों से प्रकट हुई थीं । भगवान श्रीकृष्ण के कण्ठ से उत्पन्न होने वाली देवी का नाम ‘सरस्वती’ हुआ । ये ही विद्या की अधिष्ठात्री देवी हैं । पुस्तक और कलम में मां सरस्वती का निवास-स्थान माना जाता है, इसलिए इनको कभी भी जूठे हाथों से नहीं छूना चाहिए और अपवित्र जगह पर नहीं रखना चाहिए । ‘श्रीदेवीभागवत’ के अनुसार आद्याशक्ति ने अपने-आपको तीन भागों में विभक्त किया, जो महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के नाम से जानी जाती हैं । मां सरस्वती की महिमा अपार है । इन्हें वेद में ‘वाग्देवी’ कहा गया है । वाग्देवी को प्रसन्न कर लेने पर मनुष्य संसार के सारे सुख भोगता है क्योंकि विद्या को सभी धनों में सर्वश्रेष्ठ धन कहा गया है । विद्यार्थियों को विशेष रूप से मां सरस्वती का नाम-जप करना चाहिए । मां सरस्वती की कृपा से मनुष्य ज्ञानी, विज्ञानी, मेधावी, महर्षि और ब्रह्मर्षि हो जाता है । गोस्वामी तुलसीदासजी ने गंगा और सरस्वती को एक समान माना है । गंगा पापहारिणी है तो मां सरस्वती अविवेकहारिणी हैं । 🌸 मां सरस्वती का द्वादश (12) नाम स्तोत्र 🌸 प्रथमं भारती नाम द्वितीयं च सरस्वती । तृतीयं शारदा देवी चतुर्थं हंसवाहिनी ।। पंचमं जगती ख्याता षष्ठं वागीश्वरी तथा । सप्तमं कुमुदी प्रोक्ता अष्टमं ब्रह्मचारिणी ।। नवमं बुधमाता च दशमं वरदायिनी । एकादशं चन्द्रकान्तिर्द्वादशं भुवनेश्वरी ।। द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं य: पठेन्नर: । जिह्वाग्रै वसते नित्यं ब्रह्मरूपा सरस्वती ।। सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने । विश्वरूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोऽस्तु ते ।। ❇मां सरस्वती के द्वादश (12) नाम हिन्दी में❇ *भारती *सरस्वती *शारदा *हंसवाहिनी *ख्याता *वागीश्वरी *कुमुदी *ब्रह्मचारिणी *बुधमाता *वरदायिनी *चन्द्रकान्ति *भुवनेश्वरी मां सरस्वती के इन चमत्कारी सिद्ध 12 नामों के नित्य तीन बार पाठ करने से मनुष्य की जिह्वा के अग्र भाग पर सरस्वती विराजमान हो जाती है अर्थात् जो भी बात वह कहता है वह पूरी हो जाती है । महर्षि वाल्मीकि, व्यास, वशिष्ठ, विश्वामित्र और शौनक आदि ऋषि सरस्वतीजी की साधना से ही सिद्ध हुए । जय मां 🙏

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23 जनवरी की रात को शनि राशि बदलकर मकर में प्रवेश करेगा। इससे पहले 26 जनवरी 2017 से ये ग्रह धनु राशि में था। अब शनि 29 अप्रैल 2022 को कुंभ राशि में जाएगा। यहां जानिए सभी 12 राशियों पर शनि का कैसा असर होने वाला है ============================================= मेष शनि की वजह से प्रतिष्ठा बढ़ेगी। पुरानी बाधाएं अब हल होने लगेंगी और कार्यों में गति आएगी। नौकरी करने वाले लोगों को विशेष लाभ मिल सकता है। वृष इस राशि के लिए शनि की स्थिति शुभ रहेगी। वृष पर अब ढय्या नहीं रहेगा। धन संबंधी कामों विशेष लाभ मिल सकता है। परिवार में सुखद वातावरण रहेगा और जीवन साथी का सहयोग मिलेगा। मिथुन इन लोगों के लिए शनि का ढय्या शुरू हो रहा है। इस वजह से हानि के योग बन रहे हैं। सावधान रहने का समय है। बुरी संगत से बचें और वरिष्ठ लोगों का मार्गदर्शन लेकर आगे बढ़ें। कर्क आपकी राशि के लिए शनि शुभ स्थिति में रहेगा। रुके कामों में गति आने से सफलता मिलेगी और पैसों से जुड़ी समस्याएं खत्म होंगी। सिंह सिंह राशि के लोगों को खान-पान में लापरवाही से बचना होगा। शनि की वजह से रोगों में वृद्धि होने के योग बन रहे हैं। कन्या इन राशि के लोगों को शनि की वजह से शुभ फल प्राप्त होंगे। इस राशि से शनि का ढय्या उतर जाएगा। नौकरी में अधिकारियों की मदद से प्रमोशन प्राप्त कर सकते हैं। परिवार में सुख बना रहेगा। तुला इस राशि शनि का ढय्या शुरू होगा। मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है। व्यर्थ बातों की वजह से चिंता बनी रहेगी। धन संबंधी कामों में बाधाएं बढ़ सकती हैं। वृश्चिक शनि की वजह से दैनिक जीवन में सुख बढ़ेगा। इस राशि से साढ़ेसाती उतर जाएगी। इन लोगों को कड़ी मेहनत के बाद बड़ी सफलता मिल सकती है। पुराने अटके कामों में गति आएगी। धनु इस राशि पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम ढय्या है, ये शुभ रहेगा। सफलता के साथ ही मान-सम्मान मिलेगा। मांगलिक आयोजन हो सकते हैं। मकर आपके लिए शुभ समय रहेगा। साढ़ेसाती का दूसरा चरण रहेगा। कार्यों में आशा के अनुरूप सफलता मिल सकती है। पुरानी योजनाएं सफल हो सकती हैं। कुंभ इन लोगों के खर्चों में बढ़ोतरी हो सकती है। शनि की साढ़ेसाती शुरू हो गई है। शनि का साथ मिलेगा और नौकरी में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। मीन इस राशि के लिए शनि का राशि परिवर्तन लाभदायक रहेगा। घर-परिवार में सुखद माहौल रहेगा। लंबी दूरी की यात्रा हो सकती है। धन लाभ मिलने के अवसर मिलेंगे। शनि के लिए क्या करें और क्या न करें शनि के अशुभ असर को कम करने के लिए हर शनिवार ऊँ शं शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप करना चाहिए। हनुमानजी, शिवजी और श्रीकृष्ण की विशेष पूजा करें। घर के बड़े लोगों का और अन्य वरिष्ठ लोगों का सम्मान करें। भूलकर भी किसी महिला और बूढ़े व्यक्ति का अनादर न करें। तिल, तेल, काले वस्त्र का दान करना चाहिए। हर शनिवार शनि के लिए सरसों के तेल का दीपक जलाएं। आलस्य से बचें, अपना काम ईमानदारी से करें। बेईमानी करेंगे तो नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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असतं? शरीरातील सर्वात मुख्य खनिजं असून ते हाडांची मजबुती आणि शरीराच्या निर्मितीसाठी आवश्यक असते. 🌺🌺🌺 *🔺लोह* कशात असतं? खजूर, अंजीर, मनुका, सफरचंद, डाळिंब, पालक, सीताफळ, उस, बोर, मध, पपई आणि मेथी. कमतरतेमुळे काय होतं? शरीरात रक्ताची कमतरता भासते. अशक्तपणा, कावीळ किंवा पोटात मुरडा येतो. कार्य काय असतं? शरीराच्या वाढीसाठी अतिशय आवश्यक असतें. 🌺🌺🌺 *🔺सोडिअम* कशात असतं? मीठ, पाणी, बटाटा, आलं, लसूण, कांदा, मिरची, पालक, सफरचंद, कारलं. कमतरतेमुळे काय होतं? रक्तदाबाशी निगडित समस्या, निद्रानाश, अंगदुखी, अपचन, मूळव्याधीसारखे आजार, मोतीबिंदू, बहिरेपणा, हात अणि पाय कडक होणे. कार्य काय असतं? शरीराला आवश्यक असणारी पाचक रसायनाची निर्मिती करतात, त्याचप्रमाणे शरीरात होणारा गॅस नष्ट होतो. 🌺🌺🌺 *🔺आयोडिन* कशात असतं? शिंघाडा, काकडी, कोबी, राजगिरा, शतावरी, मीठ आणि लसूण. कमतरतेमुळे काय होतं? थायरॉइडची समस्या, केस गळणे, डिप्रेशन किंवा बैचेनी येणे. कार्य काय असतं? शरीरात उत्पन्न होणाऱ्या विषारी पदार्थापासून मेंदूला बचावण्याचं काम करतो. 🌺🌺🌺 *🔺पोटॅशिअम* कशात असतं? सर्व प्रकारची धान्य, डाळ, संत्र, अननस, केळं, बटाटा, लिंबू, बदाम. कमतरतेमुळे काय होतं? अ‍ॅसिडिटी, त्वचेवर सुरकुत्या किंवा मुरुमं येणं, त्वचा रोग, केस पिकणे. कार्य काय असतं? शरीरात तंतू आणि यकृत यांना सुरळत ठेवण्याचं कार्य करतं. 🌺🌺🌺 *🔺फॉस्फरस* कशात असतं? दूध, पनीर, डाळी, कांदा, टोमॅटो, गाजर, जांभळं, पेरू, काजू, बदाम, बाजरी आणि चणे. कमतरतेमुळे काय होतं? ऑस्टिओपोरोसिस, गतिमंद होणे, मानसिक थकवा, दंत रोग. कार्य काय असतं? मेंदूला ताजंतवानं ठेवण्याचं काम हे खनिजं करतं. 🌺🌺🌺 *🔺सिलिकॉन* कशात असतं? गहू, पालक, तांदूळ, कोबी, काकडी, मध. कमतरतेमुळे काय होतं? कॅन्सर, त्वचारोग, बहिरेपणा, केस गळणे. कार्य काय असतं? जननेंद्रियांची कार्यक्षमता वाढवून शरीरातील तंतूना मजबूत करतात. 🌺🌺🌺 *🔺मॅग्नेशिअम* कशात असतं? बाजरी, बीट, खजूर, सोयाबीन, दूध, लीची, कारलं. कमतरतेमुळे काय होतं? उदास होणे, आळस येणे, तणाव असणे, झोप न लागणे, बैचेनी, सोरायसिस, फोडं, नपुंसकता किंवा वांझपणा. कार्य काय असतं? पेशीचं कार्य सुधारतं. रेचक म्हणून काम करतं. 🌺🌺🌺 *🔺सल्फर * कशात असतं? दूध, पनीर, डाळ, टोमॅटो, बटाटा, आलं, मिरची, सफरचंद, अननस, सुरण. कमतरतेमुळे काय होतं? प्रतीकारशक्ती कमी होते, केस गळतात, वजन वाढतं, मधुमेहाला आमंत्रण मिळतं. कार्य काय असतं? इन्सुलिनचं रेचन म्हणून कार्य करतं. 🌺🌺🌺 *🔺क्लोरिन * कशात असतं? पानी, बीट, कोबी, मीठ, दूध, लिंबू, आवळा, मध. कमतरतेमुळे काय होतं? अ‍ॅसिडिटी, अल्सर, कॅन्सर, आणि अ‍ॅलर्जी. कार्य काय असतं? सोडिअम आणि पोटॅशिअमला पाचक बनवण्यासाठी सहायता करतं, त्याचप्रमाणे शरीरातील आम्लक्षाराचं संतुलन राखलं जातं. 🌺🌺🌺 *🔺खाद्यपदार्थामधील खनिजं शरीराला मिळावीत म्हणून काय केलं पाहिजे.🔺* » फळं किंवा भाज्या कापल्यानंतर कधीच धुवू नयेत. असं केल्याने त्यातील खनिजं पाण्यावाटे नष्ट होतात. » डाळ, तांदूळ किंवा धान्यदेखील उकडण्यापूर्वीच स्वच्छ धुऊन घ्यावेत. » काही धान्य, फळं तसंच भाज्यांच्या सालींमध्ये खनिजांचा मोठा प्रमाणावर साठा असतो. त्यामुळे अशा सालींचा आहारात समावेश करावा. » दुधात खनिजांचा भरपूर स्रेत असतो म्हणूनच दूध जास्त प्रमाणात उकळू नये. दूध जास्त प्रमाणात उकळल्याने त्यातील खनिजं नष्ट होतात. » फळं कापून खाण्याऐवजी शक्यतो आहे तशीच खावीत. उदाहरणार्थ, चिकू किंवा सफरचंद ही फळं संपूर्ण खावीत. 🌺🌺🌺 *▫ब्लड प्रेशर आणि नियंत्रण▫* *============================* ब्लडप्रेशर असलेल्या रुग्णांची संख्या दिवसेंदिवस वाढतच चालली आहे. धकाधकीच्या जीवनात फास्ट फूड आणि अनियमित दिनचर्या या कारणामुळे या आजाराचे रुग्ण भारतातही मोठ्या प्रमाणात दिसून येत आहेत. ब्लडप्रेशरमुळे हृदयाचे आजार, स्ट्रोक अशा समस्या निर्माण होण्याची दाट शक्यता असते. ब्लडप्रेशरच्या रुग्णाला दररोज औषध घ्यावे लागते. आज तुम्हाला काही घरगुती उपायांची माहिती देत आहोत. तुम्हालाही ब्लडप्रेशरचा त्रास असेल तुम्ही हे घरुगुती उपाय अवश्य करून पाहा. या उपायांनी तुमचे ब्लडप्रेशर नियंत्रणात राहील. 🌺🌺🌺 *▫लसूण -* ब्लडप्रेशरच्या रुग्णांसाठी लसूण अमृतासमान औषधी आहे. यामध्ये एलिसीन नावाचे तत्त्व असते, जे नायट्रिक ऑक्साइडचे प्रमाण वाढवते आणि यामुळे आपल्या मासपेशींना आराम मिळतो. ब्लडप्रेशरच्या डायलॉस्टिक आणि सिस्टॉलिक कार्यप्रणालीला आराम मिळतो. यामुळे ब्लडप्रेशरच्या रुग्णांनी दररोज लसणाची एक पाकळी अवश्य खावी. 🌺🌺🌺 *▫शेवगा -* यामध्ये भरपूर प्रमाणात प्रोटीन आणि व्हिटॅमिन तसेच खनिज लवण आढळून येतात. एका संशोधनानुसार, या झाडाच्या पानांचा अर्क पिल्यास ब्लडप्रेशरच्या डायलॉस्टिक आणि सिस्टॉलिक कार्यप्रणालीवर सकारत्मक प्रबाव पडतो. ब्लडप्रेशरच्या रुग्णाने मसूरच्या डाळीसोबत शेवग्याचे सेवन करावे. 🌺🌺🌺 *▫जवस -* जवसामध्ये अल्फा लिनोनेलिक अ‍ॅसिड भरपूर प्रमणात असते. हे एक प्रकारचे महत्त्वपूर्ण ओमेगा-३ फॅटी अ‍ॅसिड आहे. विविध संशोधनामध्ये समोर आले आहे, की ज्या लोकांना हायपरटेन्शनची समस्या असेल त्यांनी जेवणात जवसाचा उपयोग अवश्य करावा. यामुळे कॉलेस्टेरॉलची मात्रा कमी होते आणि याच्या सेवनाने ब्लडप्रेशर नियंत्रणात राहते. 🌺🌺 *▫विलायची -* एका संशोधनानुसार विलायचीचे नियमित सेवन केल्यास ब्लडप्रेशर व्यवस्थित राहते. याच्या सेवनाने शर हळद Turmeric 🌺🌺 * गुणधर्म :- तिखट, कडवट, रूक्ष, गरम, जंतुनाशक, रक्तशुद्धीकारक, वात, पित्त, कफ शमन करणारी. * उपयोग :- *१)* जखमेवर किंवा मुका मार लागणे. हळद लावा. *२)* रक्ती मुळव्याध - बकरीचे दूध + हळद घ्या. *३)* सर्दी, कफ, खोकला - गरम दूध + तूप + हळद घ्या. *४)* जास्त लघवी - पांढरे तीळ + गुळ + हळद घ्या. *५)* आवाज़ बसणे - हळद + गुळ गोळ्या करून खा. *६)* काविळ - ताक + हळद. *७)* ताप - गरम दूध + हळद + काळीमिरी पुड. *८)* लघवितून पू जाणे - आवळा रस + हळद + मध. *९)* मुतखडा ( स्टोन ) - ताक + हळद + जूना गुळ. 🌺🌺🌺 # *आरोग्य संदेश* # हळदच आहे जंतुनाशक, रक्तशुद्धीकारक, नक्कीच आजारांना आहे ती मारक. *तोंडाचे विकार* * कारणे :- जागरण करणे, जास्त तिखट खाणे, पोट साफ नसणे, पित्त होणे, अपचन होणे, उष्णता वाढणे, रोगप्रतिकारक शक्ति कमी होणे. व्यसन करणे. * उपाय :- *१)* जेवणात गाईचे तूप व ताक घ्या. *२)* गुलकंद खा. *३)* ज्येष्ठमधाची कांडी चघळावी. *४)* दुधाची साय आणि शंखजीरे मिक्स करून तोंडातून लावा. *५)* हलका आहार घ्या. *६)* वरील कारणे कमी करा. त्रिफळा चूर्ण घेऊन पोट साफ ठेवा. *७)* दही उष्ण असल्याने जास्त खाऊ नका. *८)* जाईची पाने किंवा तोंडलीची पाने किंवा पेरूची पाने किंवा उंबराची कोवळी कांडी चावून थुंका. *९)* नियमित प्राणायाम करा. *१०)* आवळा पदार्थ खा. *११)* एकाचवेळी सर्व उपाय करू नका. 🌺🌺🌺 *जीभेची साले निघत असल्यास* *उपाय -----* *१)* पुदिन्याची पाने आणि खडीसाखर मिक्स करून चावून थुंकत रहा. *२)* एक केळ गाईच्या दूधाबरोबर खावे. *३)* त्रिफळाच्या काड्याने गुळण्या करा. जंतुसंसर्ग कमी होतो. 🌺🌺🌺 # *आरोग्य संदेश* # *व्यायामानेच पचनशक्ती वाढवा* *उपाय -------* *१)* नारळाची शेंडी जाळून राख बनवा. *२)* ती राख २/३ ग्रँम ताकातून घ्या. *३)* रिकाम्या पोटीच घ्या. *४)* सकाळ व संध्याकाळ घ्या. *५)* मुळा / सुरण भाजी खा. *६)* अक्रोड खाऊन वर दूध प्या. *७)* जेवणात कच्चा कांदा खा. *८)* श्वास रोखू बटरफ्लाय व्यायाम करा. *९)* हलका आहार घ्या. गाईचे तुप खा. *१०)* पोट साफ ठेवा. *११)* नियमित प्राणायाम करा. *१२)* चोथायुक्त पदार्थ खा. *१३)* शाकाहारी राहण्याचा प्रयत्न करा. *१४)* एकाचवेळी सर्व उपाय करू नका. 🌺🌺🌺 # *आरोग्य संदेश* # पोट राहूद्या नियमित साफ, मुळव्याधीचा चूकेल व्याप. *काळ्या द्राक्षांचे 10 फायदे, वाचाल तर रोज खाल* *1. डायबिटीस, ब्लड प्रेशरवर नियंत्रण* काळी द्राक्ष नियमित खाल्यामुळे डायबिटीस आणि ब्लड प्रेशर नियंत्रणात राहतं. काळ्या द्राक्षांमध्ये रेसवटॉल नावाचा पदार्थ असतो, ज्यामुळे रक्तात इन्सुलिन वाढतं. ही द्राक्ष खाल्यामुळे शरिरातलं रक्त वाढायलाही मदत होते, त्यामुळे ब्लड प्रेशरचा त्रास होत नाही. *2. एकाग्रता वाढायला मदत* काळी द्राक्ष खाल्यामुळे एकाग्रता आणि स्मरणशक्ती वाढायला मदत होते. तसंच मायग्रेनसारखा आजारही या द्राक्षांमुळे बरा होतो. 🌺🌺🌺 *3. हार्ट ऍटेकचा धोका कमी* काळ्या द्राक्षांमध्ये सायटोकेमिकल्स असतात जे हृदयाला स्वस्थ ठेवतात. तसंच या द्राक्षांमुळे कोलेस्ट्रॉलही नियंत्रणात राहतं, ज्यामुळे हार्ट ऍटेकचा धोका कमी होतो. *4. वजन होतं कमी* नियमित काळी द्राक्ष खालली तर वजन कमी होऊ शकतं. यामध्ये असणारा एँटीऑक्साईड शरिरात जास्तीचं असलेलं टॉक्सिन्स बाहेर काढायला मदत करतो. ज्यामुळे वजन कमी होतं. 🌺🌺🌺 *5. अस्थमा होतो बरा* काळी द्राक्ष शरिरात असलेल्या बॅक्टेरिया आणि फंगसला मारायचं काम करतात, जी इंफेक्शन तयार करतात. पोलिओविरुद्ध लढण्यासाठीही द्राक्ष हा चांगला उपाय आहे. काळ्या द्राक्षांमुळे अस्थमा बरा व्हायला मदत होते. *7. अपचन होत नाही* काळ्या द्राक्षांमध्ये शुगर, ऑरगॅनिक ऍसिड आणि पॉलीओस जास्त प्रमाणात असल्यामुळे अपचन आणि पोटाची जळजळ होत नाही. 🌺🌺🌺 *8. डोळ्यांसाठी गुणकारी* दृष्टी सुधारण्यासाठीही काळी द्राक्ष गुणकारी आहेत. *9. सुरकुत्या होतात कमी* काळ्या द्राक्षांमुळे डोळ्यांखाली होणारा काळा भाग कमी करतो. तसंच त्वचेवर पडणाऱ्या सुरकुत्याही यामुळे कमी होतात. 🌺🌺🌺 *10. केस गळती थांबवायला मदत* काळ्या द्राक्षांमध्ये असलेल्या विटॅमिन इ मुळे केस गळणं, केस पांढरे होणं यासारख्या समस्या दूर होतात. द्राक्ष खाल्यानं केसांच्या मुळापर्यंत रक्त पोहोचायला मदत होते, त्यामुळे केस मुलायम आणि मजबूत होतात. शरीरावरील काळे डाग 🌺🌺🌺 *उपाय -----* *१)* नियमित प्राणायाम करा. *२)* पचनशक्ती स्ट्राँग ठेवा. *३)* पोट साफ राहूद्या. *४)* पालेभाज्या व फळभाज्या खा. *५)* सकाळी ऊठल्यावर तोंडातील लाळ सर्व डागांवर चोळून लावा. तोंड धुण्यापूर्वीची लाळ पाहिजे. हा जबरदस्त उपाय आहे. *६)* कोरफड पानातील गर लावा. *७)* आवळा रस / पदार्थ घ्या. *८)* डागांवर कच्च्या पपईचा रस लावा. *९)* कडुलिंबाची पाने आंघोळीच्या पाण्यात टाकून पाणी उकळवून घ्या. नंतर त्याच पाण्याने आंघोळ करा. मात्र साबण वापरू नका. 🌺🌺🌺 # *आरोग्य संदेश* # करा योग, पळतील रोग. संपतील भोग. 🍲 आहार तज्ञ - ऋजुता दिवेकर यांच्या मते आहाराविषयीच्या संकल्पना. 🍲 *नियोजनबद्ध आहार कोणता?* आपला भारतीय संस्कृतीतील आहार योग्य आहे. भाजी, पोळी, भात, आमटी, पोहे, उपमा हे पदार्थ अतिशय पौष्टिक आहेत. आपण आपला आहार सोडून अन्य पदार्थांचे पर्याय शोधतो. म्हणून खाद्यसंस्कृती बदलते आहे. आपले वेगळेपण आपणच जपले पाहिजे. आपल्या चौरस आहाराची किंमत आपल्यालाच समजत नाही, याची खंत आहे. 🌺🌺🌺 🏃 *वाढलेली चरबी कशी कमी करावी?* आपल्या खाण्या-पिण्याला शिस्त असेल, तर चरबी वाढणार नाही. वाढली तरी कमी होण्यासही मदत होईल. सलग ३० मिनिटे एका जागेवर बसू नका. आपण शरीराचा पुरेसा वापर करीत नाही म्हणून चरबी वाढते. दरवर्षी अर्ध्या किंवा एक किलोने वजन वाढते. वजन वाढते, याचा अर्थ आपण आळशी होत आहोत, हे समजून घ्या. म्हणून गरज आहे ती `मूव्ह मोअर अँड सिट लेस` या मंत्राची. 🌺🌺🌺 🍇 *कोणती फळे खावीत?* आंबा, केळे, सीताफळ, चिकू आणि द्राक्ष ही फळे प्रत्येक भारतीयाच्या आहारात आवर्जून आलीच पाहिजेत. आरोग्यासाठी केळे हे सर्वोत्तम असल्याचा दुजोरा आता जगभरातून मिळत आहे. बाळाच्या आहारातही आईच्या दुधानंतर फळांमध्ये केळ्याचाच समावेश होतो. ◆ *मधुमेहासाठी आहार कसा असावा?* खरं तर मधुमेहींनी जे पदार्थ खाल्ले पाहिजेत, तेच पदार्थ डॉक्टर टाळण्यास सांगतात. मात्र, भात, केळं आणि तुपाचा समावेश आहारात अवश्य असावा. दोन जेवणांमध्ये फार अंतर ठेऊ नये, व्यायाम भरपूर करावा आणि अगदी झोपेपर्यंत टीव्ही पाहणे टाळावे. 🌺🌺🌺 ◆ *शुगर-फ्रीचा वापर करावा का?* शुगर फ्री आहारातून वर्ज्यच करा. आहारात जेवढी साखर आवश्यक असते, तेवढी खावी. लाडू, हलवा यासारख्या घरी बनणाऱ्या गोड पदार्थांत वापरली जाणारी साखर आरोग्यासाठी चांगली असते. ऊस आणि गूळ यांना एकमेकांशी रिप्लेस करू नये. आवश्यकतेनुसार पदार्थात साखर किंवा गुळाचा वापर करावा. शरीरातील उष्णता वाढवायला गुळाची मदत होते. 🌺🌺🌺 ◆ *वाढतं वजन आणि ताण यांचा संबंध कसा आहे?* वाढत्या ताणामुळे वजन वाढतं. फर्गेट, फर्गिव्ह आणि फॉर्वर्ड या सूत्रानुसार जीवन जगायला सुरवात केल्यास आयुष्यातील तणाव कमी होतील. 🌺🌺🌺 ● *कडधान्य कशी खावीत..* आपण उसळ करताना कडधान्य शिजवून घेतो. त्यामुळे मोड आलेली कडधान्ये कच्ची कशासाठी खायची? ती उकडून, उसळ करून खाणेच योग्य. ● *जेवणात कोणते तेल आणि किती वापरावे?* शेंगदाण्याचे घाण्यावरून करून आणलेले तेल स्वयंपाकासाठी सर्वोत्तम आहे. शंभर ग्रॅम शेंगदाण्याचे २५ ते ३० टक्के तेल निघते. बाकी चोथा वाया जातो. तेल बनविण्याची पारंपरिक पद्धत अतिशय शुद्ध आहे. आहारात तेल बदलण्याची गरज नसते. पिशव्या किंवा डब्यांमध्ये मिळणारे आणि हृदयाच्या आकाराचे चित्र डब्यांवर दिसणारे तेल आरोग्याला योग्य नाही. तेल जेवढे वापरावेसे वाटते, तेवढे वापरावे. लोणचे, तळलेला पापड, भजी हे पदार्थ आहारात आलेच पाहिजेत. जास्त तेल पोटात जाईल, म्हणून ते खाणे टाळू नये. 🌺🌺🌺 🚫 *आहारातून ड जीवनसत्त्व कमी झाल्यास काय होते?* शरीरात हवे असलेले फॅट मिळत नाहीत, म्हणून ड जीवनसत्व कमी होते. वेळेवर त्यावर उपाय न केल्यास हाडे दुखतात, केस गळतात, त्वचेवर डाग पडतात. मधुमेह किंवा कॅन्सर होण्यापर्यंत ही पातळी जाऊ शकते. *आजकाल बिझी रुटीनमुळे व्यायाम करणे अनेकांना शक्य होत नाही. व्यायामाला दुसरा काही पर्याय आहे का?* आजच्या युगात आपण नवीन गाडी घेतली, तरीसुद्धा ती नियमितपणे चालवतो. बाहेरगावी गेलो, तरी शेजारी किंवा नातेवाईकांना गाडी सुरू ठेवायला सांगतो. व्यायामाचेसुद्धा तसेच आहे. व्यायामाला कोणताही पर्याय नाही, तो नियमितपणे केलाच पाहिजे. अंग दुखतं, म्हणून व्यायाम करत नाही, अशी सबब अनेक जण देतात. पण खरे तर व्यायाम करत नाही, म्हणून अंग दुखतं. व्यायाम करण्यासाठी आठवड्यात फक्त १५० मिनिटे लागतात. आठवड्याच्या व्यायामाचे नीट प्लानिंग करून ते वेळापत्रक पाळले जायला हवे. व्यायाम अनेकदा उद्यावर ढकलला जातो, त्याचं योग्य नियोजन होत नाही, त्याचं गांभीर्य लोकांच्या लक्षात येत नाही. 🌺🌺🌺 ✌ *दोन- दोन तासाने खा, असे सांगितले जाते. हे योग्य की अयोग्य?* सकाळी उठल्या उठल्या आपण चहाने सुरुवात केली, तर दिवसभराची भूक मरते आणि दिवसभराचे रुटीन बिघडते. दोन- दोन तासाने खावे. सकाळी उठून एखादं केळ खाल्लं की, आपण नंतर नीट नाश्ता करू शकतो. सकाळी नाश्त्याला डोसा, घावन, थालीपीठ असं खावं. त्यानंतर जेवणाआधी पन्हं, कोकम सरबत यासारखं पेय घेऊन त्यानंतर आपण नियमित जेवण घेऊ शकतो. जेवताना शक्यतो पाणि पिऊ नये,जेवणाच्या अर्धा तास आधी एक ग्लास पाणि प्यावे व जेवणानंतर एक तासाने पाणि प्यावे.त्यानंतर मध्ये एखाद- दुसरं फळ, संध्याकाळी चार ते सहाच्या मध्ये पुन्हा सकाळच्या नाश्त्याप्रमाणे आहार घेतला की, आपल्याला रात्री फार भूक लागत नाही. मग रात्री पेज किंवा भात खावा, म्हणजे आपल्याला शांत झोप लागू शकते. 🍚 *घरी केलेले चिवडा, लाडू खाण्याची योग्य वेळ कोणती?* चिवडा आणि लाडू आपण कधीही खाण्यासाठीच तयार करून ठेवतो. चिवड्यासारखी व्हर्सेटाइल गोष्ट कोणतीच नाही. चिवडा कशातही मिक्स करून खाऊ शकतो, त्यामुळे चिवडा कोणत्याही वेळी खाता येईल. लाडूसुद्धा संध्याकाळी ५-६च्या आसपास किंवा सकाळी नाश्त्यालासुद्धा लाडू चांगला. 🌺🌺🌺 👨👩 *वाढत्या वयाबरोबर कसा व्यायाम करावा ?* वयानुसार आपलं शरीर बदलतं, पण ते बिघडू देऊ नये. आपलं रुटीन नियमित फॉलो केलं पाहिजे. आठवड्याला १५० मिनिटे व्यायाम केला, तर ते कोणत्याही वयाला चालतं. वय वाढलं म्हणून व्यायाम कमी करण्याची गरज नाही. 💧 *सकाळी उठून गरम पाणी प्यायल्याने चरबी कमी होते, असा समज आहे. यात किती तथ्य आहे?* सकाळी उठल्यावर आवड म्हणून गरम पाणी पिण्यास काहीच हरकत नाही. पण त्यामुळे चरबी अजिबात कमी होत नाही. सकाळी उठल्यावर साधं, माठाचं किंवा गरम कोणतेही पाणी आपण पिऊ शकतो. 🍲 *साखरेऐवजी गूळ वापरल्याने फायदा होतो का ?* प्रत्येक गोष्टीचा एक विशिष्ट गुणधर्म असतो. त्यामुळे ज्या गोष्टीत साखर वापरण्याची गरज आहे, त्यात साखर वापरली पाहिजे आणि ज्या गोष्टीत गूळ वापरण्याची गरज आहे, त्यात गूळच वापरला पाहिजे. अन्यथा पदार्थाची चव बिघडते. साखर ही चांगलीच आहे. उगाच साखरेच नाव वाईट आहे. साखरेने उष्णता कमी होते, तर गुळाने उष्णता वाढते. त्यामुळे आपण पदार्थानुसार साखर किंवा गूळ वापरावा, 🌺🌺🌺 🙆 *केस, त्वचेसाठी काय सल्ला.* केस गळण्यापासून वाचण्यासाठी तसेच तजेलदार त्वचेसाठी आहारात भात, नारळ, तूप यांचा समावेश हवा. आहारामध्ये हळदीचा समावेश असण्याची गरज आहे. हळद केसांच्या वाढीसाठी फायदेशीर आहे. 🌞 *आपला दिवस कसा असतो?* मी ज्या शहरात असेन, त्यानुसार दिवस प्लॅन करते. ऋतूमानानुसार आणि स्थानिक पदार्थांना आहारात प्राधान्य देतेत. रोज सकाळी पोहे खाते. सध्या उन्हाळ्यामुळे कोकम आणि पन्हं घेते. जे आवडतं, तेच पदार्थ खाते. जे पदार्थ शरीराला लागतात, ते आवर्जून खाते. कारण, आपण जे खातो, तेच आपल्या चेहऱ्यावर दिसते. 🍌 *फळ किंवा सुका मेव्याने दिवसाची सुरुवात करा* 🍲 *नाश्त्याला पोहे, उपमा, शिरा खा* 🍷 *जेवणापर्यंतच्या वेळेत सरबत घ्या* 🍎 *जेवणानंतर एखादे फळ खा* 🍲 *संध्याकाळी गूळ, तूप, पोळी किंवा फोडणीचा भात* 😇 *रात्री ८.३० च्या दरम्यान हलका आहार घ्या* हलका आहार घेतल्याने झोप चांगली लागते आणि दुसऱ्या दिवशी व्यायाम करण्यास उत्साह राहतो. 🌺🌺🌺 *आहारातून उपचार* पुढील आजार झाल्यास त्यांच्या खाली दिलेले अन्नपदार्थ खा. आजार लवकर बरे होतील. *१) आम्लपित्त :-* काळी मनुका, आलं, थंड दुध, आवळा, जिरे खा. *२) मलावरोध :-* पेरु, पपई, चोथा / फायबरयुक्त असलेले अन्न, दुध + पाणी, कोमटपाणी , त्रिफळा चूर्ण घ्या. पोटाचे व्यायाम करा, टाँयलेटला बसल्यावर हनुवटी प्रेस करा. लवकर पोट साफ होते. *३) हार्टअटैक / ब्लॉकेज :-* लसूण, कांदा, आलं खा. रक्ताच्या गाठी होत नाहीत. रक्ताभिसरण उत्तम होते. *४) डिसेन्टरी / जुलाब :-* कापूर + गुळ एकत्र करून खा. त्यावर पाणी प्या. लगेच गुण येतो. *५) खोकला :-* २ / ३ काळीमिरी चोखा. दिवसातून तीन वेळा. खोकला थांबतो. *६) मुळव्याध :-* नारळाची शेंडी जाळून राख ताकातून दिवसातून २ / ३ वेळा घ्या. चांगला गुण येतो. रामदेव बाबांचा उपाय आहे. *७) दारूचे व्यसन :-* वारंवार गरम पाणी प्या. तसेच दारू पिण्याची आठवण येईल त्यावेळी जरूर गरमच पाणी प्या. २ / ३ महीन्यात दारू सुटेल. *८) डोळे येणे :-* डोळ्यांना गाईचे तुप लावा. आराम पडेल. कापूर जवळ ठेवा. संसर्ग वाढणार नाही. *९) स्टोन :-* पानफुटीची पाने खा. कुळीथ भाजी खा. भरपूर पाणी प्या. *१०) तारूण्यासाठी :-* भाज्यांचा रस, आरोग्य पेय, फळे खा. गव्हांकुराचा रस, Green Tea ,प्या. 🌺🌺🌺 📢 *आरोग्य संदेश* 🔔 *संतुलित आहारात उपचार आहेत खरे, सर्वच आजार नक्कीच होतील बरे.* *आर्टीकल जरा मोठे आहे ,पण जीवनावश्यक आहे*🙏🏼🙏🏼 🌺🌺🌺 #स्रोत - आयुर्वेदाचा शोध लावणारे आणि जगातील पहिली शस्त्रक्रिया करणारे ऋषी सुश्रुत आणि वागभट्ट यांचा ग्रंथावर आधारित. ♡♡♡♡♡♡♡♡♡♡♡♡♡♡♡♡♡♢♢♢♢♢♢♢♢♢♢♢♢♢♢♢♢♢♤♤♤♤♤♤♤♤♤♤♤♤♤♤♤♤♤ *शरीर स्वस्थ व आरोग्यदायी राहण्यासाठी* (१) ९०% आजार हे पोटातून होतात, पोटात अॅसिडीटी, कब्ज नसला पाहिजे, पोट स्वच्छ, साफ तो आरोग्याचा राजा. (२) शरीरात न धरता येणारे १३ वेग आहेत. याचा विचार करा. (३) १६० प्रकारचे रोग फक्त मांसाहाराने होतात हे लक्षात ठेवा. (४) ८० प्रकारचे आजार नुसत्या चहा पिण्याने होतात. हा आपल्याला इंग्रजांनी दिलेला विषारी डोस आहे. (५) ४८ प्रकाचे रोग ऎल्युनियम भांडी वापरल्याने होतात.त्यात आपण ही भांडी सर्रास वापरतो. ही भांडी ब्रिटिशांनी आपल्या कैदी लोकांना त्रास होवा म्हणून वापरत. (६) तसेच दारू, कोल्ड्रिंक, चहा याच्या अति सेवनाने हदय रोग होऊ शकतो. (७) मॅगिनॉट, गुटका, सारी, डुक्कराचे मांस, पिज्जा, बर्गर, बिडी, सिगारेट, पेप्सी, कोक यामुळे मोठे आतडे सडते. (८) जेवण झाल्यावर लगेच स्नान करु नये यामुळे पाचनशक्ती मंद होते, शरीर कमजोर होते. (९) केस रंगवू नका, हेअर कलरने डोळ्यास त्रास होतो, कमी दिसू लागते. (१०) गरम पाण्याने स्नान करण्याने शरीराची प्रतिकार शक्ती कमी होते. गरम पाणी कधीही डोक्यावरुन घेऊ नये डोळे कमजोर होतात. (११) स्नान करताना कधीही पटकण डोक्यावरून पाणी घेऊ नका कारण पॅरालिसिसचा, हदयाचा अॅटक येऊ शकतो. प्रथम पायावर, गुडघ्यावर, मांडीवर, पोटावर, छातीवर, खांद्यावर, पाणी टाकत चोळत पहिल्यांदा स्नान करावे नंतर डोक्यावर पाणी घ्यावे त्यामुळे डोक्यातून रक्तसंचार पाया कडे होता व त्रास होत नाही, चक्कर येत नाही. (१२) उभ्याने कधीही पाणी पिऊ नये टाच कायमची दुखु लागते. (१३) जेवताना वरुन कधीही मीठ घेऊ नये त्यामुळे चक्तचाप, ब्लडप्रेशर वाढतो. (१४) कधीही जोराने शिंकू नये नाहीतर कानाला त्रास होऊ शकतो. (१५) रोज सकाळी तुळशीचे पाने खावीत कधीच सर्दी, ताप, मलेरिया होणार नाही (१६) जेवणानंतर रोज जुना गुळ आणि सौफ खावी पचन चांगले होते व अॅसिडिटी होत नाही. (१७) सतत कफ होत असेल तर नेहमी मुलहठी चोळावी कफ बाहेर पडतो व आवाज चांगला होतो. (१८) नेहमी पाणी ताजे प्यावे,विहीरीचे पाणी फार चांगले, बाटलीबंद फ्रिज मधले पाणी कधीही पिऊ नये यामुळे नसानसांत त्रास होतो. (१९) पाण्याने होणारे रोग यकृत, टायफॉइड, शस्त्र, पोटाचे रोग या पासून लिंबू आपल्याला वाचवते. (२०) गहूचा चीक, गहूचे कोंब खाण्याने शरीराची प्रतिकार शक्ती वाढते. (२२) स्वैयपाक झाल्यावर ४८ मिनिटाच्या आत खावा नाहीतर त्यातील पोषक तत्वे नाहीशी होतात. (२३) मातीच्या भांडयात स्वैयपाक केल्यास १००% पोषक, काशाच्या भांडयात स्वैयपाक केल्यास ९७% पोषक, पिताळाच्या भांडयात स्वैयपाक केल्यास ९३% पोषक, अल्युमिनियमच्या भांडयात स्वैयपाक केल्यास ७ ते १३% पोषक असते (२४) गव्हाचे पीठ १५ दिवस जुने झालेले वापरू नये. (२५) १४ वर्षाच्या

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शनि का वाहन 2020 अनुसार :--- शनिदेव जिस वाहन पर सवार होकर किसी की राशि में प्रवेश करते हैं, उसी के अनुसार उसे अच्छे-बुरे फल की प्राप्ति होती है। शनिदेव 24 जनवरी 2020 को प्रातःकाल 09:35 बजे धनु से स्वराशि मकर में प्रवेश कर रहे हैं, और यहाँ 17 जनवरी 2023 तक विचरण करेंगे। इस समय चंद्रदेव भी सुबह 07:51 बजे मकर राशि मे प्रवेश कर चुके होंगे। वाहन निर्धारण का तरीका :– व्यक्ति को अपने जन्म नक्षत्र की संख्या और शनि के राशि बदलने की तिथि की नक्षत्र संख्या दोनो को जोड कर योगफल को नौ से भाग करना चाहिए. शेष संख्या के आधार पर शनि का वाहन निर्धारित होता है । शनि का वाहन जानने की एक अन्य विधि भी प्रचलन मे है उसकी चर्चा बाद में करेगे... शेष संख्या 1 होने पर शनि का वाहन गधा होता है। शेष सँख्या 2 होने पर शनि का वाहन घोड़ा होता है। शेष सँख्या 3 होने पर शनि का वाहन हाथी होता है। शेष सँख्या 4 होने पर शनि का वाहन भैंसा होता है। शेष सँख्या 5 होने पर शनि का वाहन सिंह होता है। शेष सँख्या 6 होने पर शनि का वाहन सियार होता है। शेष सँख्या 7 होने पर शनि का वाहन कौआ होता है। शेष सँख्या 8 होने पर शनि का वाहन मोर होता है। शेष सँख्या 9 होने पर शनि का वाहन हँस होता है। विशेष – शेष संख्या 0 आने पर सँख्या 9 समझनी चाहिए- और शनि का वाहन हँस समझना चाहिए। मुझे इस विधि में जो समझ आया मैं आपको एक उदहारण से समझाता हु.... मान लीजिये किसी का जन्म नक्षत्र मृगशिरा है तो मृगशिरा पांचवा नक्षत्र हुआ और शनि 24 jan 2020 को राशि बदल कर मकर में आये है उस समय अमावस्या तिथि होगी जिसकी संख्या 30 है... अब 5+30=35 35 अंक हमारे पास आया अब उसको 9 से भाग देंगे तो शेष 8 बचेगा... यानि मृगशिरा वालो का वाहन मोर है जो शुभ है.... वाहन फलकथन:---- 1.शनिदेव का वाहन गधा। जब शनिदेव का वाहन गधा होता है तो यह शुभ नहीं माना जाता है। तब जातक को शुभ फलों को मिलने में कमी होती है। जातक को इस स्थिति में कायों में सफलता प्राप्त करने में लिए काफी प्रयास करना होता है। यहां जातक को अपने कर्तव्य का पालन करना हितकर होता हैं। 2.शनिदेव का वाहन घोड़ा यदि शनिदेव का वाहन घोड़ा हो तो जातक को शुभ फल मिलते हैं। इस समय जातक समझदारी से काम लें तो अपने शत्रुओं पर आसानी से विजय पा सकता है। घोड़े को शक्ति का प्रतिक माना जाता है, इसलिय व्यक्ति इस समय जोश और उर्जा से भरा होता है। 3.शनिदेव का वाहन हाथी। यदि जातक के लिए शनि का वाहन हाथी हो तो इसे शुभ नहीं माना जाता है। यह जातक को आशा के विपरीत फल देता है। इस स्थिति में जातक को साहस और हिम्मत से काम लेना चाहिए। परीत स्थिति में घबराना बिलकुल नहीं चाहिए। 4.शनिदेव का वाहन भैसा । यदि शनिदेव का वाहन भैसा हो तो जातक को मिला जुला फल प्राप्ति की उम्मीद होती है। इस स्थिति में जातक को समझदारी और होशियारी से काम करना ज्यादा बेहतर होता है। यदि जातक सावधानी से काम न ले तो कटु फलों में वृद्धि होने की संभावना बढ़ जाती है। 5.शनिदेव का वाहन सिंह । यदि शनि की सवारी सिंह हो तो जातक को शुभ फल मिलता है। इस समय जातक को समझदारी और चतुराई से काम लेना चाहिए इससे शत्रु पक्ष को परास्त करने में मदद मिलती है। इस अवधि में जातक को अपने विरोधियों से घबराने या ड़रने की कोई आवश्यकता नहीं है। 6.शनिदेव का वाहन सियार । यदि शनि का वाहन सियार हो तो जातक को शुभ फल नहीं मिलते है। इस दौरान जातक को अशुभ सूचनाएं अधिक मिलने की संभावनाएं बढ़ जाती है। इस स्थिति में जातक को बहुत ही हिम्मत से काम लेना होता है। 7.शनिदेव का वाहन कौआ । यदि शनि का वाहन कौआ हो तो जातक को इस अवधि में कलह में बढ़ोतरी होती है। परिवार या दफ्तर में किसी मुद्दे को लेकर कलह या टकरावों की स्थिति से बचना चाहिए। इस समय जातक को शांति, संयम और मसले को बातचीत से हल करने का प्रयास करना चाहिए। 8.शनिदेव का वाहन मोर । शनि की का वाहन हो तो जातक को शुभ फल देता है। इस समय जातक को अपनी मेहनत के साथ-साथ भाग्य का साथ भी मिलता है। इस दौरान जातक को समझदारी से काम करने पर बड़ी-बड़ी परेशानी से भी पार पाया जा सकता है। इसमें मेहनत से आर्थिक स्थिति को भी सुधारा जा सकता है। 9.शनिदेव का वाहन हंस । यदि शनि की का वाहन हो तो जातक के लिए बहुत शुभ होता है। इस सायम जातक अपनी बुद्धि औए मेहनत करके भाग्य का पूरा सहयोग ले सकता है। इस अवधि में जातक की आर्थिक में सुधार देखने को मिलता है। हंस को शनि के सभी वाहनों में सबसे अच्छा वाहन कहा गया है। 27 नक्षत्रों के नाम :- 1 अश्विनी 2 भरणी 3. कृतिका 4 रोहिणी 5 मृगशिर 6 आर्द्रा 7 पुनर्वसु 8 पुष्य 9 आश्लेषा 10 मघा 11 पूर्वाफल्गुनी 12 उत्तरफाल्गुनी 13 हस्त 14 चित्रा 15 स्वाती 16 विशाखा 17 अनुराधा 18 ज्येष्ठा 19 मूला 20 पूर्वाषाढ़ा 21 उत्तराषाढा 22 श्रवण 23 धनिष्ठा 24 शतभिषा 25 पूर्वाभाद्रपद 26 उत्तरभाद्रपद 27 रेवती 𝐏𝐋𝐙 𝐋𝐈𝐊𝐄 𝐌𝐘 𝐏𝐀𝐆𝐄 & 𝐒𝐇𝐀𝐑𝐄

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