🕉🔱💐श्री गणेशाय नमः💐🔱🕉 🌸🌿💠शुभ बुधवार💠🌿🌸 🌻💦🐚सुप्रभात🐚💦🌻 🎎पंचांग:- 🎨दिनाँक --- 16 जनवरी 2019 💦दिन --बुधवार 🎡सम्वत ---2075 विरोधकृत नाम सम्वत्सर पौष मास शुक्ल पक्ष दशमी तिथि पूरे दिन व रात्रि में 12:04 बजे तक तत पश्चात एकादशी तिथि 💠नक्षत्र ---भरणी दिन में 2:12 बजे तक तत पश्चात कृतिका नक्षत्र 🏵योग ---शुभ पूरे दिन व रात्रि में 3:44 बजे तक तत पश्चात शुक्ल योग 🌷चन्द्रमा --- मेष राशि में पूरे दिन व रात्रि में 8:08 बजे तक तत पश्चात वृष राशि में 🌸राहू काल -----दिन में 12 बजे से 1:30 बजे तक 🎎आज --सिद्धि विनायक गणपति जी की आराधना, पूजन, जप, पाठ करने का विशेष दिन हैं, अतः आज गणपति जी को दूर्वा, मोदक, लड्डू आदि दक्षिणा सहित अर्पित कर के आरती करना चाहिए, एवम श्री गनपति अथर्वशीर्षम का पाठ करना चाहिए, गाय को, बकरी को हरा चारा, खिलाना चाहिए, बहन, बेटी, बुआ जी से सम्बंध मधुर रखना चाहिए, 👏गौरीशंकर नंदन गणपति जी महाराज आपके परिवार पर अपनी कृपा बनाये रखें व आपके समस्त कार्य सिद्ध करें।🎎 🙏आपका बुधवार के दिन शुभ अतिसुन्दर और मंगलमय हो🙏 👏🌷 नमस्कार जी 🌷👏 💦💦💦💦💦💦💦💦 🚩🌹💐ॐ गणपतये नमः💐🌹🚩

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Dr. Ratan Singh Dec 20, 2018

🎎खर मास - क्या करें क्या न करें🎎 🎡भारतीय पंचाग के अनुसार जब सूर्य धनु राशि में संक्रांति करते हैं तो यह समय शुभ नहीं माना जाता इसी कारण जब तक सर्य मकर राशि में संक्रमित नहीं होते तब तक किसी भी प्रकार के शुभ कार्य नहीं किये जाते। पंचाग के अनुसार यह समय सौर पौष मास का होता है जिसे खर मास कहा जाता है। माना जाता है कि इस मास में सूर्य देवता के रथ को घोड़ों की जगह गधे खिंचते हैं। रथ की गति धीमी होने के कारण ही इस मास में अत्यधिक सर्दी भी पड़ती है। विशेषकर उत्तरी भारत में खर मास की मान्यता अधिक है। आइये जानते हैं खर मास के महत्व व इसकी पौराणिक कथा के बारे में। 🎎खर मास की पौराणिक कहानी★ पौराणिक ग्रंथों के अनुसार खर मास की कहानी कुछ यूं है। भगवान सूर्यदेव सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर लगातार ब्रह्मांड की परिक्रमा करते रहते हैं। उन्हें कहीं पर भी रूकने की इज़ाजत नहीं है, मान्यता है कि उनके रूकते ही जन-जीवन भी ठहर जायेगा। लेकिन जो घोड़े उनके रथ में जुड़े होते हैं वे लगातार चलने व विश्राम न मिलने के कारण भूख-प्यास से बहुत थक जाते हैं। उनकी इस दयनीय दशा को देखकर सूर्यदेव का मन भी द्रवित हो गया। भगवान सूर्यदेव उन्हें एक तालाब के किनारे ले गये लेकिन उन्हें तभी यह भी आभास हुआ कि अगर रथ रूका अनर्थ हो जायेगा। लेकिन घोड़ों का सौभाग्य कहिये कि तालाब के किनारे दो खर मौजूद थे। भगवान सूर्यदेव घोड़ों को पानी पीने व विश्राम देने के लिये छोड़ देते हैं और खर यानि गधों को अपने रथ में जोड़ लेते हैं। अब घोड़ा घोड़ा होता है और गधा गधा, रथ की गति धीमी हो जाती है फिर भी जैसे तैसे एक मास का चक्र पूरा होता है तब तक घोड़ों को भी विश्राम मिल चुका होता है इस तरह यह क्रम चलता रहता है और हर सौर वर्ष में एक सौर मास खर मास कहलाता है। खर मास अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार 16 दिसंबर के आस पास सूर्य देव के धनु राशि में संक्रमण से शुरु होता है 14 जनवरी को मकर राशि में संक्रमण न होने तक रहता है। इस दौरान लगभग सभी मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। नर्क में जाता है खर मास में मरने वाला मान्यता है कि खर मास में यदि कोई प्राण त्याग करता है तो उसे निश्चित तौर पर नर्क में निवास मिलता है। इसका उदाहरण महाभारत में भी मिलता है जब भीष्म पितामह शर शैय्या पर लेटे होते हैं लेकिन खर मास के कारण वे अपने प्राण इस माह नहीं त्यागते जैसे ही सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं भीष्म पितामह अपने प्राण त्याग देते हैं। 🌷खरमास क्या न करें 🌹इस पूरे मास यानि धनु संक्रांति से लेकर मकर संक्रांति तक विवाह, सगाई, ग्रह-प्रवेश आदि धार्मिक शुभकार्य या मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिये। नई वस्तुओं, घर, कार आदि की खरीददारी भी नहीं करनी चाहिये। घर का निर्माण कार्य या फिर निर्माण संबंधी सामग्री भी इस समय नहीं खरीदनी चाहिये। 🏵खरमास क्या करें 🎡खर मास को मल मास भी कहा जाता है। इस मास में भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ-साथ धार्मिक स्थलों पर स्नान-दान आदि करने का भी महत्व माना जाता है। इस मास की एकादशियों का उपवास कर भगवान विष्णु की पूजा कर उन्हें तुलसी के पत्तों के साथ खीर का भोग लगाया जाता है। इस मास में प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके भगवान विष्णु का केसर युक्त दूध से अभिषेक करें व तुलसी की माला से 11 बार भगवान विष्णु के मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः का जप करें। पीपल के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना जाता है इस मास में पीपल की पूजा करना भी शुभ रहता है। कार्यक्षेत्र में उन्नति के लिये खरमास की नवमी तिथि को कन्याओं को भोजन करवाना पुण्य फलदायी माना जाता है। सबसे जरुरी और महत्वपूर्ण कार्य इस मास में यह किया जा सकता है कि दुर्व्यसनों, दुर्विचारों, पापाचार को त्याग कर श्री हरि की भक्ति में मन लगायें और सत्कर्म करें। भगवान विष्णु भली करेंगें। 💐खर मास - क्या करें क्या न करें भारतीय पंचाग के अनुसार जब सूर्य धनु राशि में संक्रांति करते हैं तो यह समय शुभ नहीं माना जाता इसी कारण जब तक सर्य मकर राशि में संक्रमित नहीं होते तब तक किसी भी प्रकार के शुभ कार्य नहीं किये जाते। पंचाग के अनुसार यह समय सौर पौष मास का होता है जिसे खर मास कहा जाता है। माना जाता है कि इस मास में सूर्य देवता के रथ को घोड़ों की जगह गधे खिंचते हैं। रथ की गति धीमी होने के कारण ही इस मास में अत्यधिक सर्दी भी पड़ती है। विशेषकर उत्तरी भारत में खर मास की मान्यता अधिक है। आइये जानते हैं खर मास के महत्व व इसकी पौराणिक कथा के बारे में। 🍥खर मास की पौराणिक कहानी :-- पौराणिक ग्रंथों के अनुसार खर मास की कहानी कुछ यूं है। भगवान सूर्यदेव सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर लगातार ब्रह्मांड की परिक्रमा करते रहते हैं। उन्हें कहीं पर भी रूकने की इज़ाजत नहीं है, मान्यता है कि उनके रूकते ही जन-जीवन भी ठहर जायेगा। लेकिन जो घोड़े उनके रथ में जुड़े होते हैं वे लगातार चलने व विश्राम न मिलने के कारण भूख-प्यास से बहुत थक जाते हैं। उनकी इस दयनीय दशा को देखकर सूर्यदेव का मन भी द्रवित हो गया। भगवान सूर्यदेव उन्हें एक तालाब के किनारे ले गये लेकिन उन्हें तभी यह भी आभास हुआ कि अगर रथ रूका अनर्थ हो जायेगा। लेकिन घोड़ों का सौभाग्य कहिये कि तालाब के किनारे दो खर मौजूद थे। भगवान सूर्यदेव घोड़ों को पानी पीने व विश्राम देने के लिये छोड़ देते हैं और खर यानि गधों को अपने रथ में जोड़ लेते हैं। अब घोड़ा घोड़ा होता है और गधा गधा, रथ की गति धीमी हो जाती है फिर भी जैसे तैसे एक मास का चक्र पूरा होता है तब तक घोड़ों को भी विश्राम मिल चुका होता है इस तरह यह क्रम चलता रहता है और हर सौर वर्ष में एक सौर मास खर मास कहलाता है। खर मास अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार 16 दिसंबर के आस पास सूर्य देव के धनु राशि में संक्रमण से शुरु होता है 14 जनवरी को मकर राशि में संक्रमण न होने तक रहता है। इस दौरान लगभग सभी मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। 💐नर्क में जाता है खर मास में मरने वाला:- मान्यता है कि खर मास में यदि कोई प्राण त्याग करता है तो उसे निश्चित तौर पर नर्क में निवास मिलता है। इसका उदाहरण महाभारत में भी मिलता है जब भीष्म पितामह शर शैय्या पर लेटे होते हैं लेकिन खर मास के कारण वे अपने प्राण इस माह नहीं त्यागते जैसे ही सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं भीष्म पितामह अपने प्राण त्याग देते हैं। 🎭खरमास क्या न करें:- इस पूरे मास यानि धनु संक्रांति से लेकर मकर संक्रांति तक विवाह, सगाई, ग्रह-प्रवेश आदि धार्मिक शुभकार्य या मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिये। नई वस्तुओं, घर, कार आदि की खरीददारी भी नहीं करनी चाहिये। घर का निर्माण कार्य या फिर निर्माण संबंधी सामग्री भी इस समय नहीं खरीदनी चाहिये। 🎎खरमास क्या करें:- खर मास को मल मास भी कहा जाता है। इस मास में भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ-साथ धार्मिक स्थलों पर स्नान-दान आदि करने का भी महत्व माना जाता है। इस मास की एकादशियों का उपवास कर भगवान विष्णु की पूजा कर उन्हें तुलसी के पत्तों के साथ खीर का भोग लगाया जाता है। इस मास में प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके भगवान विष्णु का केसर युक्त दूध से अभिषेक करें व तुलसी की माला से 11 बार भगवान विष्णु के मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः का जप करें। पीपल के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना जाता है इस मास में पीपल की पूजा करना भी शुभ रहता है। कार्यक्षेत्र में उन्नति के लिये खरमास की नवमी तिथि को कन्याओं को भोजन करवाना पुण्य फलदायी माना जाता है। सबसे जरुरी और महत्वपूर्ण कार्य इस मास में यह किया जा सकता है कि दुर्व्यसनों, दुर्विचारों, पापाचार को त्याग कर श्री हरि की भक्ति में मन लगायें और सत्कर्म करें। भगवान विष्णु भला करेंगें। #🎭जानकारी #🎎खरमास #🌷हरि ॐ 🌹🌿ॐ विष्णुदेवाय नमः🌿🌹 🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉

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Dr. Ratan Singh Dec 19, 2018

🎎भगवान श्रीगणेश के 8 अवतार🎎
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🌹आज हम आपको भगवान गणेश के प्रमुख 8 अवतारों के बारे में बताएंगे। अन्य सभी देवताओं के समान भगवान गणेश ने भी आसुरी शक्तियों के विनाश के लिए विभिन्न अवतार लिए। श्रीगणेश के इन अवतारों का वर्णन गणेश...

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Dr. Ratan Singh Dec 19, 2018

🌷🍀जय श्री कृष्ण🍀🌷

🌻🌲सुप्रभात🌲🌻

🌸🌿शुभ बुधवार🌿🌸

🔔🕉🌹ॐ गणपतये नमः🌹🕉🔔

🎎अतिसुन्दर प्रार्थना🎎

*सुकून उतना ही देना,*
*प्रभु जितने से जिंदगी चल जाए,*

*औकात बस इतनी देना, कि,*
*औरों का भला हो जाए,...

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