🌺🐚🎎ॐ विष्णु देवाय नमः🎎🐚🌺 🚩💐🎪जय माँ महालक्ष्मी🎪💐🚩 🙏🌲🌺शुभ मौनी अमावस्या 🌺🌲🙏 🌼🌹💮शुभ शुक्रवार💮🌹🌼 🌲🌺🌻सप्रभात🌻🌺🌲 ✳️✳️✳️✳️✳️✳️✳️✳️✳️✳️✳️✳️✳️✳️✳️ 🙏आप और आपके पूरे परिवार को मौनी अमावस्या गंगा स्नान पर्व और शुभ शुक्रवार की हार्दिक शुभकामनाएं🙏 🍑🍑🍑🍑🍑🍑🍑🍑🍑🍑🍑🍑🍑🍑🍑 🎎आप और आपके पूरे परिवार पर श्री हरि विष्णु जी और माँ महालक्ष्मी जी और की आशीर्वाद सदा बनी रहे और सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो 🎎 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 👏आपका शुक्रवार का दिन शुभ अतिसुन्दर शांतिमय ममतामय और मंगलमय व्यतीत हो🙏 🚩🌿🎪 ॐ लक्ष्मी नारायण नमो नमः🎪🌿🚩 🌹🌹🌹 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

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🎎प्रदोष व्रत कथा व व्रत विधि🎎 ====================== 🚩🌿🔱ॐ नमः शिवाय 🔱🌿🚩 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🔔🐚🚩ॐ गणपतए नमः🚩🐚🔔 ⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️ 💐🌲🍑शुभ बुधवार🍑🌲💐 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 🌻❇️🌺सुप्रभात🌺❇️🌻 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 🎎प्रदोष व्रत कथा व व्रत विधि🎎 +++++++++++-+++-+++++++ 🔱प्रदोष व्रत एक लोकप्रिय हिंदू व्रत है जो भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित है। यह उपवास कृष्ण पक्ष (अमावस्या) और शुक्ल पक्ष (पौर्णिमा) के त्रय्दाशी (13 वें दिन) को मनाया जाता है।🌼 🚩 स्कंद पुराण के अनुसार प्रत्येक माह की दोनों पक्षों की त्रयोदशी के दिन संध्याकाल के समय को "प्रदोष" कहा जाता है और इस दिन शिवजी को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत रखा जाता है। प्रदोष व्रत की कथा निम्न है: 🎎 स्कंद पुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक विधवा ब्राह्मणी अपने पुत्र को लेकर भिक्षा लेने जाती और संध्या को लौटती थी। एक दिन जब वह भिक्षा लेकर लौट रही थी तो उसे नदी किनारे एक सुन्दर बालक दिखाई दिया जो विदर्भ देश का राजकुमार धर्मगुप्त था। शत्रुओं ने उसके पिता को मारकर उसका राज्य हड़प लिया था। उसकी माता की मृत्यु भी अकाल हुई थी। ब्राह्मणी ने उस बालक को अपना लिया और उसका पालन-पोषण किया। 🥀कुछ समय पश्चात ब्राह्मणी दोनों बालकों के साथ देवयोग से देव मंदिर गई। वहां उनकी भेंट ऋषि शाण्डिल्य से हुई। ऋषि शाण्डिल्य ने ब्राह्मणी को बताया कि जो बालक उन्हें मिला है वह विदर्भदेश के राजा का पुत्र है जो युद्ध में मारे गए थे और उनकी माता को ग्राह ने अपना भोजन बना लिया था। ऋषि शाण्डिल्य ने ब्राह्मणी को प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। ऋषि आज्ञा से दोनों बालकों ने भी प्रदोष व्रत करना शुरू किया। 🌋 एक दिन दोनों बालक वन में घूम रहे थे तभी उन्हें कुछ गंधर्व कन्याएं नजर आई। ब्राह्मण बालक तो घर लौट आया किंतु राजकुमार धर्मगुप्त "अंशुमती" नाम की गंधर्व कन्या से बात करने लगे। गंधर्व कन्या और राजकुमार एक दूसरे पर मोहित हो गए, कन्या ने विवाह हेतु राजकुमार को अपने पिता से मिलवाने के लिए बुलाया। दूसरे दिन जब वह पुन: गंधर्व कन्या से मिलने आया तो गंधर्व कन्या के पिता ने बताया कि वह विदर्भ देश का राजकुमार है। भगवान शिव की आज्ञा से गंधर्वराज ने अपनी पुत्री का विवाह राजकुमार धर्मगुप्त से कराया। ⚛️ इसके बाद राजकुमार धर्मगुप्त ने गंधर्व सेना की सहायता से विदर्भ देश पर पुनः आधिपत्य प्राप्त किया। यह सब ब्राह्मणी और राजकुमार धर्मगुप्त के प्रदोष व्रत करने का फल था। स्कंदपुराण के अनुसार जो भक्त प्रदोषव्रत के दिन शिवपूजा के बाद एक्राग होकर प्रदोष व्रत कथा सुनता या पढ़ता है उसे सौ जन्मों तक कभी दरिद्रता नहीं होती। 🎎प्रदोष व्रत विधि🎎 ******************* ⚛️ प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी के दिन प्रदोष व्रत किया जाता है। इस दिन सूर्यास्त से पहले स्नान कर श्वेत वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद सायंकाल में विभिन्न पुष्पों, लाल चंदन, हवन और पंचामृत द्वारा भगवान शिवजी की पूजा करनी चाहिए। पूजा के समय एकाग्र रहना चाहिए और शिव-पार्वती का ध्यान करना चाहिए। मान्यता है कि एक वर्ष तक लगातार यह व्रत करने से मनुष्य के सभी पाप खत्म हो जाते हैं। 🌹प्रमोशम के दिन सूर्योदय और सूर्यास्त से पहले के समय को शुभ माना जाता है। इस समय के दौरान ही सभी सारी पूजा पाठ किये जाते है।सूर्यास्त से एक घंटे पहले भक्तों को स्नान करके पूजा के लिए तैयार हो जाना चाहिए। 🌋एक प्रारंभिक पूजा की जाती है जिसमे भगवान शिव को देवी पार्वती भगवान गणेश भगवान कार्तिक और नंदी के साथ पूजा जाता है। उसके बाद एक अनुष्ठान किया जाता है जिसमे भगवान शिव की पूजा की जाती है और एक पवित्र बर्तन या 'कलाशा' में उनका आवाहन किया जाता है। 🚩इस अनुष्ठान के बाद भक्त प्रदोष व्रत कथा सुनते है या शिव पुराण की कहानियां सुनते हैं। महामृत्यंजय मंत्र का 108 बार जाप भी किया जाता है।पूजा समाप्त होने के बाद, कलशा से पानी भरेगा और भक्त अपने माथे पर पवित्र राख को लागू करेंगे। 🔯प्रदोष वात के लाभ🔯 💐दिन केअनुसार प्रदोष व्रत का नाम बदलता रहता है💐 🎎 सोम प्रदोष व्रत। यह सोमवार को आता है इसलिए इसे 'सोम परदोषा’ कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने से भक्तों के अन्दर सकारात्मक विचार आते है और वह अपने जीवन में सफलता प्राप्त करते है। 🌹भोम प्रदोष व्रत। जब प्रदोष व्रत मंगलवार को आता है तो इसे ‘भौम प्रदोश' कहा जाता है। इस व्रत को रखने से भक्तों की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याए दूर होती है और उनके शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार आता है। भोम प्रदोष व्रत जीवन में समृद्धि लाता है। 🔱सौम्य वारा प्रदोष व्रत। सौम्य वारा प्रदोष बुधवार को आता है। इस शुभ दिन पर व्रत रखने से भक्तों की इच्छाएं पूरी होती है और ज्ञान भी प्राप्त होता हैं। 🎎गुरुवार प्रदोष व्रत। यह व्रत गुरुवार को आता है और इस उपवास को रख कर भक्त अपने सभी मौजूदा खतरों को समाप्त कर सकते हैं। इसके अलावा गुरुवार प्रदोष व्रत रखने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है। 🍑भृगु वारा प्रदोष व्रत। जब प्रदोष व्रत शुक्रवार को मनाया जाता है तो उसे भृगु वारा प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस व्रत को करने से जीवन से नकारात्मकता समाप्त होती है और सफलता मिलती है। 🌑शनि प्रदोष व्रत। शनि प्रदोष व्रत शनिवार को आता है और सभी प्रदोष व्रतों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखता है वह खोये हुए धन की प्राप्ति करता है और जीवन में सफलता प्राप्त करता है। 🔥भानु वारा प्रदोष व्रत। यह रविवार को आता है और भानु वारा प्रदोष वात का लाभ यह है कि भक्त इस दिन उपवास को रखकर दीर्घायु और शांति प्राप्त कर सकते है। 🔔🌹🔱ॐ नमः शिवाय 🔱🌹🔔 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱

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🎎🐚🌹ॐ विष्णु देवाय नमः 🌹🐚🎎 🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔 🚩🌿🔱ॐ नमः शिवाय 🔱🌿🚩 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🎎🌲💐षट्तिला एकादशी 💐🌲🎎 🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼 🕯️🌺 🌑शुभरात्रि 🌑 🌺 🕯️ ⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️ 🙏आपको सपरिवार षट्तिला एकादशी व्रत और शिवमय सोमवार की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 🎎आप और आपके संपूर्ण परिवार पर भगवान श्री हरि विष्णुजी और महादेव जी की आशिर्वाद निरंतर बनी रहे 🎎 🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋🌋 🌹आपका सोमवार का रात्री शुभ शांतिमय शिवमय और मंगलमय पूर्ण हो जी🕯️ 🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀 🔯🌿🚩ॐ विष्णु देवाय नमः 🚩🌿🔯 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚

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🚩🌿🌹जय श्री राम🌹🌿🚩 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🎪🌲🌺ॐ श्री शनिदेवाय नमः🌺🌲🎪 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 🚩🎆🍑ॐ श्री हनुमन्ते नमः🍑🎆🚩 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 🌺🌳🏵️शुभ शनिवार🏵️🌳🌺 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 💮🕯️🎆शुभसंध्या🎆🕯️💮 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🌺शनि ग्रह शांत करने का सबसे सुंदर भजन🌺 ************************************** 🌹✳️✳️✳️✳️✳️✳️✳️✳️✳️✳️✳️✳️✳️🌹 🎎आप और आपके सम्पूर्ण परिवार पर श्री राम भक्त हनुमान जी भगवान शनिदेव जी की आशीर्वाद सदा बनी रहे और सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो 🙏 🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆 🍑आपका शनिवार का संध्या काल शुभ अतिसुन्दर🍑 🎭चिन्तामुक्त शांतिमय और मंगलमय व्यतीत हो🎭 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴 🚩🌿🌺जय श्री राम🌹🌿🚩 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️ ⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️

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🚩🌿🌹ॐ विष्णुदेवाय नमः🌹🌿🚩 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🏵🌳💐शुभ गुरूवार💐🌳🏵 ❇️❇️❇️❇️❇️❇️❇️❇️❇️❇️ 🌸🐚🌻सुप्रभात🌻🐚🌸 🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀 🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚 👏सभी भाई बहनो का गुरूवार का दिन शुभ और मंगलमय व्यतीत हो 🙏 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🎎भगवान श्री हरि विष्णु जी की विशेष कृपा आप पर हमेसा बनी रहे और सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो🙏 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत । अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥ परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् । धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥ 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 भावार्थः जब जब धर्म की हानि होने लगती है और अधर्म आगे बढ़ने लगता है, तब तब मैं स्वयं की सृष्टि करता हूं, अर्थात् जन्म लेता हूं । सज्जनों की रक्षा एवं दुष्टों के विनाश और धर्म की पुनःस्थापना के लिए मैं विभिन्न युगों (कालों) मैं अवतरित होता हूं 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 🚩🌿🌹ॐ विष्णुदेवाय नमः🌹🌿🚩 🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚

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Dr.ratan Singh Jan 14, 2020

🎎15 जनवरी 2020 को है मकरसंक्रान्ति का शुभ मुहूर्त जानें पूजा विधि, स्‍नान,दान का महत्‍व और मान्यताएं🎎 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 🌞 मकर संक्रान्ति के पर्व से खरमास की समाप्ति और शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। मकर संक्रांति के दिन से ही घरों में शादी-ब्याह, मुंडन और नामकरण जैसे शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं। पिछले वर्ष की भांति इस बार भी स्‍नान-दान का यह पवित्र पर्व 15 जनवरी को पड़ रहा है। सूर्य के मकर राशि में विलंब से प्रवेश के चलते मकर संक्रांति का पुण्यकाल इस बार 14 जनवरी के बजाए 15 जनवरी को रहेगा। 🎎 मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। इसी वजह से इस संक्रांति को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात 02:07 बजे हो रहा है। इसके साथ ही दीर्घायु, आरोग्य, धन-धान्य, ऐश्वर्य समेत सर्व मंगल के कारक प्रत्यक्ष देव सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे। इसीलिए 15 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व बुधवार को मनाना शास्त्र सम्मत रहेगा। 15 जनवरी को पर्वकाल सूर्योदय से सूर्यास्त तक रहेगा। ⚛️मकर संक्रान्ति का अर्थ ⚛️ :::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: 🚩मकर संंक्रान्ति का तात्पर्य... 🌞 मकर संक्रांति पर्व को उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सूर्य उत्तर की ओर बढ़ने लगता है जो ठंड के घटने का प्रतीक है। मकर संक्रांति में 'मकर' शब्द मकर राशि को इंगित करता है जबकि 'संक्रांति' का अर्थ संक्रमण अर्थात प्रवेश करना है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। एक राशि को छोड़कर दूसरे में प्रवेश करने की इस विस्थापन क्रिया को संक्रांति कहते हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार मकर संक्रांति से ही सूर्य उत्तरायण होंगे। मकर संक्रांति में सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण तक का सफर महत्व रखता है। 🎎 देवता धरती पर अवतरित होते हैं 🎎 🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 🚩मकर संक्रांति के दिन देवता धरती पर अवतरित होते हैं मान्यता है कि सूर्य के उत्तरायण काल में ही शुभ कार्य किए जाते हैं। सूर्य जब मकर, कुंभ, वृष, मीन, मेष और मिथुन राशि में रहता है तब इसे उत्तरायण कहते हैं. वहीं, जब सूर्य बाकी राशियों सिंह, कन्या, कर्क, तुला, वृच्छिक और धनु राशि में रहता है, तब इसे दक्षिणायन कहते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं जो मकर राशि के शासक थे। पिता और पुत्र आम तौर पर अच्छी तरह नहीं मिल पाते इसलिए भगवान सूर्य महीने के इस दिन को अपने पुत्र से मिलने का एक मौका बनाते हैं। शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण की अवधि देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन देवताओं की रात्रि है। वैदिक काल में उत्तरायण को देवयान तथा दक्षिणायन को पितृयान कहा जाता था। मकर संक्रांति के दिन यज्ञ में दिए गए द्रव्य को ग्रहण करने के लिए देवता धरती पर अवतरित होते हैं। 🌹मकर संक्रान्ति के दिन इसलिए गंगास्‍नान करने की है मान्‍यता 🌹 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 🌺मकर संक्रान्ति पर इसलिए गंगास्‍नान करने की है मान्‍यता पौराणिक कथाओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन की गंगा जी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होते है सागर में जा मिली थीं। इसीलिए आज के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति को मौसम में बदलाव का सूचक भी माना जाता है। आज से वातारण में कुछ गर्मी आने लगती है और फिर बसंत ऋतु के बाद ग्रीष्म ऋतु का आगमन होता है।कुछ अन्य कथाओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन देवता पृथ्वी पर अवतरित होते हैं और गंगा स्नान करते हैं। इस वजह से भी गंगा स्नान का आज विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान, पूजा आदि करने से व्यक्ति का पुण्य प्रभाव हजार गुना बढ़ जाता है। इस खास दिन को सुख और समृद्धि का दिन माना जाता है। 🎎तिल के महत्व की पौराणिक कहानी🎎 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 🌞 मकर संक्रांति से जुड़ी तिल के महत्व की पौराणिक कहानी इस पर्व पर धर्मग्रंथों में तिल दान को बहुत विशेष बताया गया है। मकर संक्रांति के दिन ना सिर्फ तिल खाएं जाते हैं बल्कि इन्हें पानी में डालकर स्नान भी करना लाभकारी होता है। मकर संक्रान्ति के दिन तिल की मान्‍यता क्यों है इसको लेकर एक पौराणिक कथा है। इस कथा के अनुसार शनि देव को उनके पिता सूर्य देव पसंद नहीं करते थे। इसी कारण सूर्य देव ने शनि देव और उनकी मां छाया को अपने से अलग कर दिया। इस बात से क्रोध में आकर शनि और उनकी मां ने सूर्य देव को कुष्ठ रोग का श्राप दे डाला। पिता को कुष्ठ रोग में पीड़ित देख यमराज (जो कि सूर्य भगवान की दूसरी पत्नी संज्ञा के पुत्र हैं) ने तपस्या की। यमराज की तपस्या से सूर्यदेव कुष्ठ रोग से मुक्त हो गए। लेकिन सूर्य देव ने क्रोध में आकर शनि देव और उनकी माता के घर 'कुंभ' (शनि देव की राशि) को जला दिया। इससे दोनों को बहुत कष्ट हुआ। यमराज ने अपनी सौतेली माता और भाई शनि को कष्ट में देख उनके कल्याण के लिए पिता सूर्य को समझाया। यमराज की बात मान सूर्य देव शनि से मिलने उनके घर पहुंचे। कुंभ में आग लगाने के बाद वहां सब कुछ जल गया था, सिवाय काले तिल के। इसीलिए शनि देव ने अपने पिता सूर्य देव की पूजा काले तिल से की। इसके बाद सूर्य देव ने शनि को उनका दूसरा घर 'मकर' मिला।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान, पूजा आदि करने से व्यक्ति का पुण्य प्रभाव हजार गुना बढ़ जाता है। शनि देव को तिल की वजह से ही उनके पिता, घर और सुख की प्राप्ति हुई, तभी से मकर संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा के साथ तिल का बड़ा महत्व माना जाता है। 🎎विभिन्नभागों में इस पर्व की दिखती हैअलगही छटा🎎 ******************************************** 🚩 मकर संक्रांति पर्व देश के विभिन्न भागों में अलग अलग नामों से भी मनाया जाता है। तमिलनाडु में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में मनाया जाता है जबकि कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल 'संक्रान्ति' कहा जाता है। मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व हिमाचल, हरियाणा तथा पंजाब में यह त्योहार लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सायंकाल अंधेरा होते ही होली के समान आग जलाकर तिल, गुड़, चावल तथा भुने हुए मक्का से अग्नि पूजन करके आहुति डाली जाती है। इस सामग्री को तिलचौली कहते हैं। इस अवसर पर लोग मूंगफली, तिल की गजक, रेवडि़यां आदि आपस में बांटकर खुशियां मनाते हैं। #🌹पोंगल की धूम🌹 # ********************* 🔥तमिलनाडु में इस त्योहार को पोंगल के रूप में चार दिन तक मनाया जाता है। पहले दिन कूड़ा करकट जलाया जाता है, दूसरे दिन लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है और तीसरे दिन पशु धन की पूजा की जाती है। पोंगल मनाने के लिए स्नान करके खुले आंगन में मिट्टी के बर्तन में खीर बनाई जाती है, जिसे पोंगल कहते हैं। इसके बाद सूर्य देव को नैवैद्य चढ़ाकर खीर को प्रसाद के रूप में सभी ग्रहण करते हैं। ❇️*महाराष्‍ट्र में मकरसंक्रान्ति*❇️ """"""""""""""""""""""''''""'''"""""""""""""""""""" 🌹महाराष्ट्र में इस दिन सभी विवाहित महिलाएं अपनी पहली संक्रांति पर कपास, तेल, नमक आदि वस्तुएं अन्य सुहागिन महिलाओं को दान करती हैं। 🔥*असम में मकरसंक्रान्ति*🔥 """""""""""""""""""''"""""""""""""""""""""'"" 🎎असम में मकर संक्रांति को माघ-बिहू अथवा भोगाली- बिहू के नाम से मनाया जाता है तो राजस्थान में इस पर्व पर सुहागन महिलाएं अपनी सास को वायना देकर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। ⚛️मकर संक्रांति 15 जनवरी 2020को, पूरे दिन रहेगा पुण्यकाल। 🚩🔥🌞ॐ आदित्याय नमः 🌞🔥🚩 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️

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