dheeraj patel May 19, 2019

🌹जय श्री राधे🎎कृष्णा जी🌹 🌹सर्मपण और अहंकार🌹 🌴पेड़ 🌴की सबसे ऊँची डाली पर लटक रहा नारियल रोज नीचे नदी मे पडे़ पत्थर पर हँसता और कहता.... तुम्हारी तकदीर में भी बस एक जगह पडे़ रह कर नदी की धारा औं के प्रवाह को सहन करना ही लिखा है देखना एक दिन यूं ही पडे़ -पडे़ घिस जाओगे मुझे देखो कैसी शान से ऊपर बैठा हूँ पत्थर रोज उसकी ★अहंकार★भरी बातों को अनसुना कर देता....... समय बीता एक दिन वही पत्थर घिस-घिस कर गोल हो गया और श्री विष्णु प्रतीक शालिग्राम के रुप में जाकर मन्दिर में प्रतिष्ठित हो गया........ एक दिन वही नारियल उस शालिग्राम जी की पूजन सामग्री के रुप में मन्दिर मे लाया गया शालिग्राम ने नारियल को पहचानते हुये कहा भाई देखो घिस-घिस कर परिष्कृत होने वाले ही प्रभु के प्रताप से इस स्थिति को पहुँचते है सबसे आदर का पात्र भी बनते है जब कि ★अहंकार★ के मतवाले अपने ही दभं के डसने से नीचे आ गिरते है तुम जो कल आसमान मे थे आज से मेरे आगे टूट कर कल से सड़ने भी लगोगे पर मेरा आस्तिव अब कायम रहेगा भगवान की टृष्टि मे मूल्य....🙏समर्पण🙏 का है ★अहंकार ★का नही 🌹जय श्री राधेकृष्णा जी🌹

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