Davinder Singh Rana Feb 26, 2021

*🕉श्री हरिहरो विजयतेतराम🕉 🌄सुप्रभातम🌄 🗓आज का पञ्चाङ्ग🗓 🌻शुक्रवार, २६ फरवरी २०२१🌻 सूर्योदय: 🌄 ०६:५६ सूर्यास्त: 🌅 ०६:१५ चन्द्रोदय: 🌝 १७:१३ चन्द्रास्त: 🌜❌❌❌ अयन 🌕 उत्तराणायने (दक्षिणगोलीय) ऋतु: ❄️ शिशिर शक सम्वत: 👉 १९४२ (शर्वरी) विक्रम सम्वत: 👉 २०७७ (प्रमादी) मास 👉 माघ पक्ष 👉 शुक्ल तिथि 👉 चतुर्दशी (१५:४९ तक) नक्षत्र 👉 आश्लेशा (१२:३५ तक) योग 👉 अतिगण्ड (२२:३६ तक) प्रथम करण 👉 वणिज (१५:४९ तक) द्वितीय करण 👉 विष्टि (२६:५१ तक) 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰️〰️ ॥ गोचर ग्रहा: ॥ 🌖🌗🌖🌗 सूर्य 🌟 कुम्भ चंद्र 🌟 सिंह (१२:३४ से) मंगल 🌟 वृषभ (उदित, पूर्व, मार्गी) बुध 🌟 मकर (उदित, पश्चिम, मार्गी) गुरु 🌟 मकर (उदय, पूर्व, मार्गी) शुक्र 🌟 कुम्भ (अस्त, पूर्व, मार्गी) शनि 🌟 मकर (उदय, पूर्व, मार्गी) राहु 🌟 वृष केतु 🌟 वृश्चिक 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 शुभाशुभ मुहूर्त विचार ⏳⏲⏳⏲⏳⏲⏳ 〰〰〰〰〰〰〰 अभिजित मुहूर्त 👉 १२:०७ से १२:५३ अमृत काल 👉 ११:०२ से १२:३५ रवियोग 👉 ०६:४६ से १२:३५ विजय मुहूर्त 👉 १४:२४ से १५:१० गोधूलि मुहूर्त 👉 १८:०२ से १८:२६ निशिता मुहूर्त 👉 २४:०४+ से २४:५४+ राहुकाल 👉 ११:०४ से १२:३० राहुवास 👉 दक्षिण-पूर्व यमगण्ड 👉 १५:२२ से १६:४८ होमाहुति 👉 चन्द्र दिशाशूल 👉 पश्चिम अग्निवास 👉 आकाश भद्रावास 👉 मृत्यु १५:४९ से २६:५१ चन्द्रवास 👉 उत्तर (पूर्व १२:३५ से) 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ ☄चौघड़िया विचार☄ 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ ॥ दिन का चौघड़िया ॥ १ - चर २ - लाभ ३ - अमृत ४ - काल ५ - शुभ ६ - रोग ७ - उद्वेग ८ - चर ॥रात्रि का चौघड़िया॥ १ - रोग २ - काल ३ - लाभ ४ - उद्वेग ५ - शुभ ६ - अमृत ७ - चर ८ - रोग नोट-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 शुभ यात्रा दिशा 🚌🚈🚗⛵🛫 पूर्व-उत्तर (दहीलस्सी अथवा राई का सेवन कर यात्रा करें) 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 तिथि विशेष 🗓📆🗓📆 〰️〰️〰️〰️ माघ पूर्णिमा व्रत आदि। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 आज जन्मे शिशुओं का नामकरण 〰〰〰〰〰〰〰〰〰️〰️ आज १२:३५ तक जन्मे शिशुओ का नाम आश्लेषा नक्षत्र के तृतीय एवं चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (डे, डो) नामाक्षर से तथा इसके बाद जन्मे शिशुओ का नाम मघा नक्षत्र के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय चरण अनुसार क्रमश (मा, मी, मू) नामाक्षर से रखना शास्त्रसम्मत है। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 उदय-लग्न मुहूर्त कुम्भ ३०:०९ से ०७:३५ मीन - ०७:३५ से ०८:५९ मेष - ०८:५९ से १०:३२ वृषभ - १०:३२ से १२:२७ मिथुन - १२:२७ से १४:४२ कर्क - १४:४२ से १७:०४ सिंह - १७:०४ से १९:२३ कन्या - १९:२३ से २१:४० तुला - २१:४० से २४:०१+ वृश्चिक - २४:०१+ से २६:२१+ धनु - २६:२१+ से २८:२४+ मकर - २८:२४+ से ३०:०५+ 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 पञ्चक रहित मुहूर्त रज पञ्चक - ०६:४६ से ०७:३५ शुभ मुहूर्त - ०७:३५ से ०८:५९ शुभ मुहूर्त - ०८:५९ से १०:३२ रज पञ्चक - १०:३२ से १२:२७ शुभ मुहूर्त - १२:२७ से १२:३५ चोर पञ्चक - १२:३५ से १४:४२ शुभ मुहूर्त - १४:४२ से १५:४९ रोग पञ्चक - १५:४९ से १७:०४ शुभ मुहूर्त - १७:०४ से १९:२३ मृत्यु पञ्चक - १९:२३ से २१:४० अग्नि पञ्चक - २१:४० से २४:०१+ शुभ मुहूर्त - २४:०१+ से २६:२१+ रज पञ्चक - २६:२१+ से २८:२४+ शुभ मुहूर्त - २८:२४+ से ३०:०५+ चोर पञ्चक - ३०:०५+ से ३०:४५ तक **राणा जी खेड़ांवाली* आज का राशिफल 🐐🐂💏💮🐅👩 〰️〰️〰️〰️〰️〰️ मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ) आज के दिन भी आप बैठे बिठाये व्यर्थ के झगड़े मोल लेंगे कार्य क्षेत्र पर आवश्यकता अनुसार आय आसानी से हो जाएगी फिर भी असंतोषी स्वभाव उटपटांग के कार्यो में भटकाएगा आज अपने काम से काम रखें पराये काम मे टांग फसाना भारी पड़ सकता है मान हानि के प्रबल योग है। सहकारी कार्यो से आज बच कर ही रहे समय धन व्यर्थ करने के बाद भी काम बनना सन्देहास्पद रहेगा। कार्य क्षेत्र पर भागीदारों अथवा किसी अन्य से धन को लेकर कहासुनी हो सकती है। घरेलू वातावरण भी आपके रूखे व्यवहार के कारण अशांत रहेगा वादा कर मुकरने पर भी किसी से कलह होगी। आज आपके समर्थन की अपेक्षा विरोध करने वाले अधिक मिलेंगे धैर्य से दिन बिताएं यात्रा से बचे सेहत थोड़ी बहुत नरम रहेगी। वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) आज के दिन आपके अंदर पराक्रम शक्ति प्रबल रहेगी एवं भाग्य का भी साथ ठीक मिलने से किसी भी कार्यो में ज्यादा माथापच्ची नही करनी पड़ेगी। लेकिन छोटे भाई बहनों को दबाना आपके व्यक्तित्त्व पर विपरीत प्रभाव डालेगा। आज सभी को साथ लेकर चलने में ही भलाई है वरना घरेलू कलह सार्वजनिक होने पर बदनामी का भय है। व्यवसाय से आय के अवसर कई बार मिलेंगे धन लाभ ठीक ठाक होगा परन्तु खर्च भी साथ लगे रहने से कुछ हाथ नही लगेगा। कार्य क्षेत्र पर सहकर्मी अथवा भागीदारों से विवाद होने की संभावना है शांति से काम ले इसका समय व्यर्थ के अलावा और कुछ निष्कर्ष नही निकलेगा। संध्या बाद अनैतिक कार्यो की ओर प्रवृत्त होंगे यात्रा की योजना बनेगी। मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा) आज का दिन भी उदासीनता में बीतेगा। व्यावसायिक मति एवं बाजार की जानकारी होने के बाद भी जिस कार्य को करने का प्रयास करेंगे उसमे धन अथवा अन्य किसी अभाव के कारण गति नही दे पाएंगे फिर भी जोड़ तोड़ कर धन लाभ कही न कही से अवश्य होगा लेकिन अनैतिक कार्यो में खर्च होने से बचत नही हो सकेगी उलटे संचित धन में कमी आएगी। अतिमहत्त्वपूर्ण कार्य आज टालना ही बेहतर रहेगा अथवा दोपहर के बाद करने पर हानि की संभावना कम रहेगी। घरेलू वातावरण आशानुकूल मिलने से राहत रहेगी परिजन हर कार्य मे सहयोग के लिये तैयार रहेंगे। दुर्घटना के योग भी है सावधान रहें। स्वास्थ्य में दिन भर गिरावट रहेगी लेकिन संध्या बाद सुधार आएगा। कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो) आज आप के दिमाग मे केवल पैसा ही रहेगा दिन के आरंभ से ही आर्थिक लाभ पाने के लिये प्रयासरत रहेंगे आज भी कल की ही भांति परिश्रम करना पड़ेगा लेकिन आर्थिक दृष्टिकोण से आज दिन कल की तुलना में बेहतर रहेगा। किसी भी कार्य के आरंभ में सफलता को लेकर संदेह होगा लेकिन ध्यान रहे जिस भी काम को हाथ मे ले उसे पूरा ही करके छोड़े आशाजनक ना सही कुछ ना कुछ लाभ अवश्य मिलेगा। भूमि भवन संबंधित कार्य से भी आज लाभ की संभावना है लेकिन किसी न किसी की लापरवाही के चलते टल भी सकता है। परिवार अथवा रिश्तेदारी में ना चाहकर भी खर्च करने पर घर का बजट प्रभावित होगा। मन मे यात्रा पर्यटन के विचार बनेंगे इसके पूर्ण होने की सम्भवना आज कम ही है। सेहत लगभग ठीक ही रहेगी। सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे) आज का दिन आपको आशा के विपरीत फल देने वाला है। जिस कार्य अथवा समय लाभ की उम्मीद नही होगी उसी कार्य से अथवा समय अकस्मात लाभ होने से आश्चर्य में पड़ेंगे तथा जहां से सफलता की उम्मीद रहेगी वहां से निराश होने की संभावना है। आज किसी अन्य के ऊपर निर्भर रहने की जगह स्वयं के बल पर कार्य करे तो सफलता की संभावना अधिक रहेगी। काम-धंधे में जो भी कार्य को छोटा या बड़ा उसे निष्ठा से करे कुछ लाभ ही देकर जायेगा आनाकानी करने पर आगे के लिये मार्ग बंद हो सकता है। गृहस्थी में आनंद का वातावरण रहेगा परिजन कामनापूर्ति होने पर स्नेह बरसायेंगे लेकिन आनाकानी करने पर परिणाम विपरीत ही मिलेंगे। स्वयं अथवा परिजन कि सेहत को लेकर आशंकित रहेंगे इसमे लापरवाही से बचें। कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो) आज का दिन कुछेक विषयो को छोड़ आपके पक्ष में ही रहेगा। सेहत में नरमी रहने के बाद भी दैनिक अथवा अन्य कार्यो को थोड़े बहुत विलंब के बाद पूर्ण कर लेंगे। सामाजिक व्यवहार का भी आज विशेष लाभ मिलेगा जब भी दुविधा में फंसे नजर आएंगे किसी न किसी का सहयोग मिल जायेगा नौकरी पेशाओ को आज अधिकारी वर्ग को प्रसन्न रखने में परेशानी आएगी अतिरिक्त भागदौड़ करने के बाद भी काम मे नुक्स निकालेंगे। आर्थिक दृष्टिकोण से दिन सामान्य से अधिक उत्तम रहेगा आय के साथ अतिरिक्त खर्च भी लगे रहेंगे फिर भी संतुलन बना रहेगा। आज किसी सामाजिक व्यवहार का मान रखने के लिये यात्रा करनी पड़ेगी इसमें धन खर्च तो होगा लेकिन प्रतिष्ठा मिलने से अखरेगा नही। घर मे थोड़ी बहुत खींचतान के बाद भी आनंद आएगा। तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते) आज आपकी दिनचर्या चाहकर भी व्यवस्थित नही हो सकेगी मन मे काफी कुछ सोच कर रखेंगे लेकिन अंत समय मे ही विचार किये कार्य निरस्त कर अन्य कार्यो में लगना पड़ेगा। आज आपकी मानसिकता भी व्यवसायी रहेगी प्रत्येक कार्य मे हानि लाभ देखकर ही चलेंगे कार्य अथवा अन्य किसी क्षेत्र से आशा ना होने के बाद भी अकस्मात लाभ होने पर उत्साह बढ़ेगा फिर भी आर्थिक स्थिति से संतोष नही होगा ज्यादा से ज्यादा धन कमाने के चक्कर मे सेहत की अनदेखी करेंगे जो बाद महंगी पड़ेगी। दिन भर छुट पुट खर्च लगे रहेगें लेकिन संध्या बाद बड़ा खर्च करने की योजना बनेगी। घर मे भी छोटी मोटी बातो को छोड़ शांति रहेगी। यात्रा में वाहनादि से सावधानी रखें। वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू) आज का दिन आपके लिए सामान्य फलदायी रहेगा। आज आप जिसभी कार्य को करने का मन बनाएंगे उसमे सेहत की नरमी आलस्य प्रमाद फैलाएंगी जिससे कोई भी कार्य नियत समय पर सम्पन्न नही कर सकेंगे घर अथवा कार्य क्षेत्र पर इस कारण किसी की आलोचना सहनी पडेगी। व्यवसाय से आज ज्यादा लाभ की संभावना ना होने पर भी कम समय मे अधिक लाभ पाने की लालसा में कोई अनैतिक कार्य भी कर सकते है लेकिन आत्म निर्भर रहने के कारण व्यर्थ के झमेलों से बचे रहेंगे फिर भी जोखिम वाले कार्यो से आज बचकर रहे शारीरिक अथवा धन हानि हो सकती है। संध्या का समय मायूस करेगा धैर्य से काम लें कलनसे स्थिति सुधरेगी। धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे) आज का दिन पहले की तुलना में बेहतर रहेगा सेहत पुरानी बीमारी को छोड़ ठीक ही रहेगी लेकिन फिर भी स्वभाव किसी न किसी कारण से चिड़चिड़ा रहेगा घर के बड़े लोगो का व्यवहार आज कम ही पसंद आएगा। माता के सुख में भी आज कमी अनुभव होगी। कार्य क्षेत्र पर स्थिति बेहतर रहेगी लेकिन आज व्यवसाय अथवा अन्य कार्यो से पैतृक धन अथवा पिता के सहयोग की अन्य किसी रूप में आवश्यकता पड़ेगी इसलिये व्यवहार में विनम्रता रखे अन्यथा उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। सरकारी कार्यो को भी प्राथमिकता दें आज लापरवाही करने पर लंबे समय के लिये लटक सकते है। व्यवहारिकता कम रहने के कारण दिन से उचित लाभ नही उठा पाएंगे फिर भी धन की आमद संतोष जनक हो जाएगी। मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी) आज के दिन आपके अंदर पराक्रम शक्ति प्रबल रहेगी एवं भाग्य का भी साथ ठीक मिलने से किसी भी कार्यो में ज्यादा माथापच्ची नही करनी पड़ेगी। लेकिन छोटे भाई बहनों को दबाना आपके व्यक्तित्त्व पर विपरीत प्रभाव डालेगा। आज सभी को साथ लेकर चलने में ही भलाई है वरना घरेलू कलह सार्वजनिक होने पर बदनामी का भय है। व्यवसाय से आय के अवसर कई बार मिलेंगे धन लाभ ठीक ठाक होगा परन्तु खर्च भी साथ लगे रहने से कुछ हाथ नही लगेगा। कार्य क्षेत्र पर सहकर्मी अथवा भागीदारों से विवाद होने की संभावना है शांति से काम ले इसका समय व्यर्थ के अलावा और कुछ निष्कर्ष नही निकलेगा। संध्या बाद अनैतिक कार्यो की ओर प्रवृत्त होंगे यात्रा की योजना बनेगी। कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा) आज के दिन आपके दिमाग मे उथल पुथल लगी रहेगी किसी पुराने कार्य सफलता को लेकर अंदर से बेचैन रहेंगे लेकिन गुप्त होने के कारण प्रदर्शन भी नही कर पाएंगे। कार्य व्यवसाय से आशाजनक धन सजह मिल जाएगा फिर भी किसी बड़ी योजना को लेकर छोटे मोटे लाभ से संतुष्ट नही होंगे। कार्य क्षेत्र पर चतुराई का परिचय देंगे जिससे कुछ समय के लिये प्रेमीजन आपके खिलाफ भी होगे स्वतः ही सामान्य भी हो जाएंगे। नौकरी पेशाओ के लिये आज का दिन कोई नई दुविधा लाएगा पर साथ ही लाभ भी मिलने से ज्यादा अखरेगा नही। घर मे सुखशांति रहेगी किसी पर्यटक अथवा धार्मिक स्थल की यात्रा के लिये योजना बनाएंगे। सर्दी से बचना आवश्यक है जुखाम आदि से परेशानी हो सकती है। मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची) आज के दिन से आपको मिला जुला फल प्राप्त होगा मध्यान तक का समय कल्पनाओं में खराब करेंगे आज बुद्धि विवेक रहने पर भी किसी काम से बचने के चक्कर मे मूर्खो जैसी हरकते कर स्वयं ही हास्य के पात्र बनेंगे। मध्यान बाद आर्थिक विषयो को लेकर चिंता बढ़ेगी पूर्व में बरती लापरवाही की ग्लानि होगी। कार्य क्षेत्र पर गति रहेगी परन्तु प्रतिस्पर्धा भी होने के कारण लेदेकर सौदे करने पड़ेंगे फिर भी धन की आमद राहतजनक हो जाएगी। आज आप बाहर के लोगो से अत्यंत मधुर व्यवहार करेंगे लेकिन घर मे इसके विपरीत खर्च से बचने अथवा स्वभावतः परिजनों को दबाकर रखने के प्रयास में रहेंगे। संध्या का समय सेहत में नरमी आने पर पूर्वनियोजित कार्य रद्द करने पैड सकते है। *राणा जी खेड़ांवाली*

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Davinder Singh Rana Feb 26, 2021

*पुण्य लाभ के लिए इस पंचांग को औरो को भी अवश्य भेजिये स्वयं भी पूरा पढ़े*🙏🏻🙏🙏🙏🙏🙏 🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞 ⛅ *दिनांक 26 फरवरी 2021* ⛅ *दिन - शुक्रवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2077* ⛅ *शक संवत - 1942* ⛅ *अयन - उत्तरायण* ⛅ *ऋतु - वसंत* ⛅ *मास - माघ* ⛅ *पक्ष - शुक्ल* ⛅ *तिथि - चतुर्दशी शाम 03:49 तक तत्पश्चात पूर्णिमा* ⛅ *नक्षत्र - अश्लेशा दोपहर 12:35 तक तत्पश्चात मघा* ⛅ *योग - अतिगण्ड रात्रि 10:36 तक तत्पश्चात सुकर्मा* ⛅ *राहुकाल - सुबह 11:24 से दोपहर 12:52 तक* ⛅ *सूर्योदय - 07:02* ⛅ *सूर्यास्त - 18:40* (सूर्योदय और सूर्यास्त के समय मे जिलेवार अंतर संभव है) ⛅ *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में* *राणा जी खेड़ांवाली ⛅ *व्रत पर्व विवरण - व्रत पूर्णिमा* 💥 *विशेष - चतुर्दशी और पूर्णिमा के दिन ब्रह्मचर्य पालन करे तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *माघी पूर्णिमा* 🌷 🙏🏻 *ऐसे तो माघ की प्रत्येक तिथि पुण्यपर्व है, तथापि उनमें भी माघी पूर्णिमा का धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्त्व है । इस दिन स्नानादि से निवृत्त होकर भगवत्पूजन, श्राद्ध तथा दान करने का विशेष फल है । माघी पूर्णिमा के दिन तिल, सूती कपडे, कम्बल, रत्न, पगडी, जूते आदि का अपने वैभव के अनुसार दान करके मनुष्य स्वर्गलोक में सुखी होता है । ‘मत्स्य पुराण के अनुसार इस दिन जो व्यक्ति ‘ब्रह्मवैवर्त पुराण का दान करता है, उसे ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है । (मत्स्यपुराण ५३ । ३५)* 💥 *विशेष - 27 फरवरी 2021 शनिवार को माघी पूर्णिमा है।* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *माघी पूर्णिमा* 🌷 🙏🏻 *धर्म शास्त्रों में पूर्णिमा तिथि को विशेष फलदाई माना गया है। उन सभी पूर्णिमाओं में माघी पूर्णिमा (इस बार 27 फरवरी, शनिवार) का महत्व कहीं अधिक है। पुराणों के अनुसार, इस दिन विशेष उपाय करने से धन की देवी मां लक्ष्मी शीघ्र ही प्रसन्न हो जाती हैं। और भी कई उपाय इस दिन करने से शुभ फल मिलते हैं। ये उपाय इस प्रकार हैं-* ➡ *1. माघी पूर्णिमा माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए विशेष तिथि मानी गई है। इस पूर्णिमा की रात लगभग 12 बजे महालक्ष्मी की भगवान विष्णु सहित पूजा करें एवं रात को ही घर के मुख्य दरवाजे पर घी का दीपक लगाएं। इस उपाय से माता लक्ष्मी प्रसन्न होकर उस घर में निवास करती हैं।* ➡ *2. माघी पूर्णिमा की सुबह पास के किसी लक्ष्मी मंदिर में जाएं और 11 गुलाब के फूल अर्पित करें। इससे माता लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की कृपा भी आपको प्राप्त होगी और अचानक धन लाभ के योग भी बनेंगे।* ➡ *3. माघी पूर्णिमा की सुबह पूरे विधि-विधान से माता सरस्वती की भी पूजा की जाती है। इस दिन माता सरस्वती को सफेद फूल चढ़ाएं व खीर का भोग लगाएं। विद्या, बुद्धि देने वाली यह देवी इस उपाय से विशेष प्रसन्न होती हैं।* ➡ *4. पितरों के तर्पण के लिए भी यह दिन उत्तम माना गया है। इस दिन पितरों के निमित्त जलदान, अन्नदान, भूमिदान, वस्त्र एवं भोजन पदार्थ दान करने से उन्हें तृप्ति होती है। जोड़े सहित ब्राह्मणों को भोजन कराने से अनन्त फल की प्राप्ति होती है।* ➡ *5. वैसे तो सभी पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की पूजा होती है किंतु माघ मास की पूर्णिमा पर इसका महत्व बढ़कर बताया गया है। शाम को भगवान सत्यनारायण की पूजा कर, धूप दीप नैवेद्य अर्पण करें। भगवान सत्यनारायण की कथा सुनें।* ➡ *6. माघी पूर्णिमा पर दान का भी विशेष महत्व है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इस दिन जरूरतमंदों को तिल, कंबल, कपास, गुड़, घी, मोदक, जूते, फल, अन्न आदि का दान करना चाहिए।* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *माघी पूर्णिमा* 🌷 🙏🏻 *(27 फरवरी, शनिवार) माघ मास की पूर्णिमा है। धर्म ग्रंथों में इसे माघी पूर्णिमा कहा गया है। इस पूर्णिमा पर संयम से रहना, सुबह स्नान करना एवं व्रत, दान करना आदि नियम बताए गए हैं। इस समय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इसलिए इस समय व्रत करने से शरीर रोगग्रस्त नहीं होता एवं आगे आने वाले समय के लिए सकारात्मकता प्राप्त होती है।* 🙏🏻 *माघी पूर्णिमा की सुबह स्नान आदि करने के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें। फिर पितरों का श्राद्ध कर निशक्तजनों को भोजन, वस्त्र, तिल, कंबल, कपास, गुड़, घी, जूते, फल, अन्न आदि का दान करें। इस दिन सोने एवं चांदी का दान भी किया जाता है। गौ दान का विशेष फल प्राप्त होता है।* 🙏🏻 *इसी दिन संयमपूर्वक आचरण कर व्रत करें। इस दिन ज्यादा जोर से बोलना या किसी पर क्रोध नहीं करना चाहिए। गृह क्लेश से बचना चाहिए। गरीबों एवं जरुरतमंदों की सहायता करनी चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आपके द्वारा या आपके मन, वचन या कर्म के माध्यम से किसी का अपमान न हो। इस प्रकार संयमपूर्वक व्रत करने से व्रती को पुण्य फल प्राप्त होते हैं।* 11 मार्च प्रात: 9.19 बजे से 16 मार्च प्रात: 4.45 बजे तक 7 अप्रैल दोपहर 3 बजे से 12 अप्रैल प्रात: 11.30 बजे तक जया एकादशी मंगलवार, 23 फरवरी 2021 विजया एकादशी मंगलवार, 09 मार्च 2021 आमलकी एकादशी गुरुवार, 25 मार्च 2021 24 फरवरी: प्रदोष व्रत 10 मार्च: प्रदोष व्रत 26 मार्च: प्रदोष व्रत माघ पूर्णिमा 27 फरवरी, शनिवार फाल्गुन पूर्णिमा 28 मार्च, रविवार फाल्गुनी अमावस्या- शनिवार, 13 मार्च 2021. *राणा जी खेड़ांवाली* *राशिफल* 👉मेष आज का दिन आपको किसी भी धार्मिक वाद विवाद से उलझने के लिए शुभ नहीं है। आपको आज अपनी वाणी पर भी संयम रखना होगा। आपने जो भी व्यवसाय शुरू किया है, उसमें आज आपको सफलता मिलेगी, जिससे आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, लेकिन आपको ध्यान रखना होगा कि काम की अधिकता के चलते आप अपने परिवार की अपेक्षा ना करें। आज आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा, नहीं तो आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पारिवारिक दायित्वों की पूर्ति होगी और आपके भाई की सलाह उन्नति का कारण बनेगी। संतान को अपने भविष्य के लिए कार्य करते देख आज आपके मन में हर्ष की भावना रहेगी। पारिवारिक दायित्वों की पूर्ति होगी और भाई की सलाह उन्नति का कारण बनेगी 👉वृष विद्यार्थियों को आज अपने ज्ञान के अनुभव से नए नए अवसरों की प्राप्ति होगी, जिसके लिए उन्हें अपने गुरुजनों का भी आशीर्वाद प्राप्त होगा। इसके साथ-साथ परीक्षा की दिशा में किया गया श्रम आज सार्थक सिध्द होगा। यदि आप कोई व्यापार करना चाहते हैं, तो उसके लिए आज का दिन उत्तम है और आपकी सामाजिक चुनोतियो का भी आज विकास होगा। आपके प्रेम जीवन के लिए समय अनुकूल नहीं है। उसमें व्यस्तता के कारण कुछ समय के लिए दूरियां आ सकती है। आपकी आर्थिक स्थिती उन्नत होगी, लेकिन आपको अनावश्यक खर्चों से बचना होगा। 👉मिथुन जो भी विवाह योग्य जातक हैं, आज उनके लिए कुछ अच्छे प्रस्ताव आएंगे, जिससे परिवार के सभी सदस्यों के मन में खुशी की भावना होगी। आपके व्यापार में सकारात्मक बदलाव करने से लाभ की स्थितियां उत्पन्न होगी। विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्ति के लिए अधिक मेहनत की आवश्यकता है। यदि आपका कोई कार्य बहुत लंबे समय से रुका हुआ हैं, तो वह आज पूरा होंगा। कार्यक्षेत्र में आपके जीवन साथी की सलाह आज मददगार साबित होगी। आपको अपने भाइयों व मित्रों की सहायता करने का अवसर प्राप्त होगा। आपके पराक्रम में वृद्धि होने से धन व ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी। 👉कर्क व्यवसाय करने वाले लोगों की योजनाओं को आज बल मिलेगा, लेकिन उन्हें धन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। आपके पारिवारिक रिश्ते आज मजबूत होंगे, लेकिन आपको अपने परिवार के खर्चे पर भी ध्यान रखना होगा, नहीं तो आपकी आर्थिक स्थिति डगमगा सकती है। कार्यक्षेत्र में आज आपको कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन सफलतापूर्वक चुनौतियों का सामना करेंगे और अपनी वाणी पर संयम रखें, तो आपको भरपूर सफलता मिलती दिख रही है। आज अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें और बाहर के खाने-पीने से परहेज रखें। 👉सिंह आज शाम के समय आपको वाहन के प्रयोग से सावधानी रखनी होगी। आपके व्यवसाय में आज किसी मनचाहे समाचार की प्राप्ति होगी, जिससे आपका मन प्रसन्न हो उठेगा। यदि पारिवारिक संपत्ति से संबंधित कोई विवाद चल रहा है, तो वह आज समाप्त होगा और आपके मित्रो व भाइयों की सहायता से आपके अटके हुए कार्य पूरे होंगे। किसी अधीनस्थ कर्मचारी या किसी रिश्तेदार के कारण आज आपको तनाव मिल सकता है। आज आपको किसी से भी लेनदेन करने से बचना होगा। ससुराल पक्ष से आपको लाभ मिलता दिख रहा है और गृह उपयोगी वस्तुओं में वृद्धि होगी। विद्यार्थियों को भविष्य के लिए कोई सुखद समाचार प्राप्त हो सकता है, जिससे उनके भविष्य की योजनाएं सुदृढ़ होंगी। 👉कन्या विद्यार्थी अपने भविष्य के लिए आवश्यक कौशलों का चुनाव करेंगे, जिससे उनका भविष्य उज्जवल होगा। आर्थिक स्थिति की दिशा में किए गए प्रयास सफल होंगे और वाणी की सौम्यता आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि करेगी, इससे आपके मित्रों की संख्या में भी इजाफा होगा। पारिवारिक स्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं,जिसमें पिता का मार्गदर्शन भी आपको समय समय पर मिलता रहेगा। भाई बहनों से संबंधों में सुधार आएगा और प्रेम जीवन में आज कोई उपहार प्राप्त होगा। आज आपको अपने और अपने परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा और बाहार के खाने पीने पर संयम बरतना होगा। आपका जीवन साथी आपके सभी प्रयासों में आप का पूर्ण रुप से सहयोग करेगा। जो लोग रोजगार की दिशा में प्रयास कर रहे हैं, उन्हें आज कोई कुशल अवसर मिलेगे। 👉तुला आज का दिन आपके लिए मध्यम रूप से फलदायक रहेगा। धार्मिक कार्यों में आपकी रुचि बढ़ेगी और सामाजिक कार्यों करने से आपकी प्रतिष्ठा में आज वृद्धि होगी, लेकिन संतान के विवाह की चिंता जो आपको सता रही थी, वह आज समाप्त होती दिख रही है। व्यापार में किसी वृद्ध व्यक्ति का समर्थन आपको सभी समस्याओं से मुक्ति दिलाएगा। नई परियोजनाओं को शुरू करने के लिए समय उत्तम है। इसमें भाग्य का आपको भरपूर साथ मिलेगा और आपकी आर्थिक स्थिति है भी उत्तम बनी हुई है। कार्य के क्षेत्र में सकारात्मक सोच से आज नई ऊर्जा का संचार होगा, जिसमें अधिकारी वर्ग से भी आपको प्रशंसा सुनने को मिलेगी। आपके दांपत्य जीवन में आज आपको सुखद अनुभूति होगी। 👉वृश्चिक यदि आप रोजगार के क्षेत्र में बदलाव करने की सोच रहे हैं, तो उसके लिए समय उपयुक्त नहीं है। इसमें भाग्य आपका साथ नहीं देगा, इसलिए ऐसा कतई ना करें। लव लाइफ में आज नई ताजी का अनुभव होगा। आपके कार्यक्षेत्र में आज किसी महिला मित्र के कारण आपको उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे। मित्रों और परिजनों के कारण आज आपको अनावश्यक व्यय का सामना करना पड़ सकता है, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति पर बोझ पड़ेगा। यदि आपको कोई पुराना कर्जी चल रहा है, तो उससे आपको मुक्ति मिलेगी, लेकिन आवश्यक लेनदेन करने से आज आपको बचना होगा। परिवार के साथ आप अच्छा समय व्यतीत करेंगे और उनकी समस्याओं को सुलझाने में भी सहायक होंगे। आज आप अपने परिवार के सदस्यों के साथ किसी शुभ कार्य की चर्चा पर विचार कर सकते हैं। 👉धनु आज आपको अपने कार्य क्षेत्र में गुप्त शत्रुओं व ईषालु शत्रुओं से सावधान रहना होगा, नहीं तो आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। भविष्य की नींव मजबूत बनाने के लिए किए गए प्रयासों पर परिवार के साथ विचार विमर्श होगा। इससे आपके मन का बोझ हल्का होगा। व्यावसायिक मामलों के अनुभव व्यक्तियों के लिए सहायक होगे। आपके पारिवारिक बिजनेस में आज जीवनसाथी की सलाह आपको सफलता देगी और आप इससे आपकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। सायंकाल के समय किसी भी तरह के झगड़े हुए वाद विवाद से बचना होगा, नहीं तो कोई कानूनी विवाद हो सकता है। अपने स्वास्थ्य के प्रति आज सावधानी बरते हैं और खाने पीने पर संयम रखें। 👉मकर आपके प्रेम जीवन में आज आपको कोई उपहार मिल सकता है। दूसरों से सहयोग लेने से आज आपको सफलता प्राप्त होगी। व्यापार के लिए की गई यात्रा सुखद व लाभप्रद होगी, लेकिन आज आपको अपने जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा। परिवार की समस्याओं को खत्म करने के लिए आज वरिष्ठ सदस्यों के साथ चर्चा करेंगे, जिससे आपके मन का बोझ हल्का होगा। पराक्रम के बल पर आपके अटके हुए कार्य आज पूरे होंगे। विद्यार्थियों को गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त होगा, जिससे परीक्षा में सफलता प्राप्त करेंगे। कार्यक्षेत्र में आज आपके किसी सहयोगी के कारण आपको विश्वासघात का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन उच्च अधिकारियों के सहयोग से आपके अटके हुए कार्य पूरे होंगे। 👉कुंभ राजनीति की दिशा में किए गए प्रयास सफल रहेंगे और शासन सत्ता का सहयोग भी आज आपको मिलेगा। माता-पिता की सेवा का अवसर आज आपको प्राप्त होगा। लव लाइफ में नई ताजगी आयेगी। पारिवारिक जीवन में आज असमंजस की स्थिति बनेगी और चर्चा से मतभेद भी दूर होंगे। किसी अभिन्न मित्र से मेल मिलाप की संभावना बनती दिख रही है, जिनके साथ हुए आप निकटम दूर की यात्रा पर भी जा सकते हैं। संतान को अच्छे कार्य करते देख आज आपके मन में प्रसन्नता का भाव उठेगा। यदि आपका जीवन साथी किन्हीं कारणों से नाराज है, तो आज आपको उन्हे मनाने की पूरी कोशिश करनी चाहिए। 👉मीन आज का दिन आपके लिए उत्तम लाभदायक रहेगा। यदि आपके कुछ कार्य बहुत समय से अधूरे हैं, तो उनका पूरा करने के लिए आज उत्तम समय है। विद्यार्थियों को एकता बनाए रखनी होगी, तभी परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सकेंगे। आपको आज कोई पैतृक संपत्ति मिलने के भी भरपूर योग बन रहे हैं। यदि कोई मामला कोर्ट व कचहरी में चल रहा है, तो उसमें भी आज आपको भरपूर सफलता मिलेगी, लेकिन ससुराल पक्ष से तनाव हो सकता है। प्रेम जीवन में मधुरता बनी रहेगी, लेकिन पुराने झगड़े का झंझट से आज आपको मुक्ति मिलेगी, जिससे आप चैन की सांस लेंगे और आप अपने आप को स्वतंत्र महसूस करेंगे *राणा जी खेड़ांवाली* **🌹🌹🌹🌹🌹 जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं 26 को जन्मे व्यक्ति धीर गंभीर, परोपकारी, कर्मठ होते हैं। दिनांक 26 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 8 होगा। यह ग्रह सूर्यपुत्र शनि से संचालित होता है। आप भौतिकतावादी है। आप अद्भु त शक्तियों के मालिक हैं। आप अपने जीवन में जो कुछ भी करते हैं उसका एक मतलब होता है। आपकी वाणी कठोर तथा स्वर उग्र है। आपके मन की थाह पाना मुश्किल है। आपको सफलता अत्यंत संघर्ष के बाद हासिल होती है। कई बार आपके कार्यों का श्रेय दूसरे ले जाते हैं। शुभ दिनांक : 8, 17, 26 शुभ अंक : 8, 17, 26, 35, 44 शुभ वर्ष :2024, 2042 ईष्टदेव : हनुमानजी, शनि देवता शुभ रंग : काला, गहरा नीला, जामुनी कैसा रहेगा यह वर्ष व्यापार-व्यवसाय की स्थिति उत्तम रहेगी। नौकरीपेशा व्यक्ति प्रगति पाएंगे। सभी कार्यों में सफलता मिलेगी। जो अभी तक बाधित रहे है वे भी सफल होंगे। बेरोजगार प्रयास करें, तो रोजगार पाने में सफल होंगे। राजनैतिक व्यक्ति भी समय का सदुपयोग कर लाभान्वित होंगे। शत्रु वर्ग प्रभावहीन होंगे, स्वास्थ्य की दृष्टि से समय अनुकूल ही रहेगा। **राणा जी खेड़ांवाली*

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Davinder Singh Rana Feb 26, 2021

श्रीमद्भागवत-कथा श्रीमद्भागवत-महापुराण पोस्ट - 136 स्कन्ध - 06 अध्याय - 11 इस अध्याय में:- वृत्रासुर की वीरवाणी और भगवत्प्राप्ति श्रीशुकदेव जी कहते हैं- परीक्षित! असुर सेना भयभीत होकर भाग रही थी। उसके सैनिक इतने अचेत हो रहे थे कि उन्होंने अपने स्वामी के धर्मानुकूल वचनों पर भी ध्यान न दिया। वृत्रासुर ने देखा कि समय की अनुकूलता के कारण देवता लोग असुरों की सेना को खदेड़ रहे हैं और वह इस प्रकार छिन्न-भिन्न हो रही है, मानो बिना नायक की हो। राजन्! यह देखकर वृत्रासुर असहिष्णुता और क्रोध के मारे तिलमिला उठा। उसने बलपूर्वक देवसेना को आगे बढ़ने से रोक दिया और उन्हें डाँटकर ललकारते हुए कहा- ‘क्षुद्र देवताओं! रणभूमि में पीठ दिखलाने वाले कायर असुरों पर पीछे से प्रहार करने में क्या लाभ है। ये लोग तो अपने माँ-बाप के मल-मूत्र हैं। परन्तु अपने को शूरवीर मानने वाले तुम्हारे-जैसे पुरुषों के लिये भी तो डरपोकों को मारना कोई प्रशंसा की बात नहीं है और न इससे तुम्हें स्वर्ग ही मिल सकता है। यदि तुम्हारे मन में युद्ध करने की शक्ति और उत्साह है तथा अब जीवित रहकर विषय-सुख भोगने की लासला नहीं है, तो क्षण भर मेरे सामने डट जाओ और युद्ध का मजा चख लो’। परीक्षित! वृत्रासुर बड़ा बली था। वह अपने डील-डौल से ही शत्रु देवताओं को भयभीत करने लगा। उसने क्रोध में भरकर इतने जोर का सिंहनाद किया कि बहुत-से लोग तो उसे सुनकर ही अचेत हो गये। वृत्रासुर की भयानक गर्जना से सब-के-सब देवता मुर्च्छित होकर पृथ्वी पर गिर पड़े, मानो उन पर बिजली गिर गयी हो। अब जैसे मदोन्मत्त गजराज नरकट का वन रौंद डालता है, वैसे ही रण बाँकुरा वृत्रासुर हाथ में त्रिशूल लेकर भय से नेत्र बंद किये पड़ी हुई देव सेना को पैरों से कुचलने लगा। उसके वेग से धरती डगमगाने लगी। वज्रपाणि देवराज इन्द्र उसकी यह करतूत सह न सके। जब वह उनकी ओर झपटा, तब उन्होंने और भी चिढ़कर अपने शत्रु पर एक बहुत बड़ी गदा चलायी। अभी वह असह्य गदा वृत्रासुर के पास पहुँची भी न थी कि उसने खेल-ही खेल में बायें हाथ से उसे पकड़ लिया। राजन्! परमपराक्रमी वृत्रासुर ने क्रोध से आग-बबूला होकर उसी गदा से इन्द्र के वाहन ऐरावत के सिर पर बड़े जोर से गरजते हुए प्रहार किया। उसके इस कार्य की सभी लोग बड़ी प्रशंसा करने लगे। वृत्रासुर की गदा के आघात से ऐरावत हाथी वज्राहत पर्वत के समान तिलमिला उठा। सिर फट जाने से वह अत्यन्त व्याकुल हो गया और खून उगलता हुआ इन्द्र को लिये हुए अट्ठाईस हाथ पीछे हट गया। देवराज इन्द्र अपने वाहन ऐरावत के मुर्च्छित हो जाने से स्वयं भी विषादग्रस्त हो गये। यह देखकर युद्ध धर्म के मर्मज्ञ वृत्रासुर ने उनके ऊपर फिर से गदा नहीं चलायी। तब तक इन्द्र ने अपने अमृतस्रावी हाथ के स्पर्श से घायल ऐरावत की व्यथा मिटा दी और वे फिर रणभूमि में आ डटे। परीक्षित! जब वृत्रासुर ने देखा कि मेरे भाई विश्वरूप का वध करने वाला शत्रु इन्द्र युद्ध के लिये हाथ में वज्र लेकर फिर सामने आ गया है, तब उसे उनके उस क्रूर पापकर्म का स्मरण हो आया और वह शोक और मोह से युक्त हो हँसता हुआ उनसे कहने लगा। वृत्रासुर बोला- आज मेरे लिये बड़े सौभाग्य का दिन है कि तुम्हारे-जैसा शत्रु-जिसने विश्वरूप के रूप में ब्राह्मण, अपने गुरु एवं मेरे भाई की हत्या की है-मेरे सामने खड़ा है। अरे दुष्ट! अब शीघ्र-से-शीघ्र मैं तेरे पत्थर के समान कठोर हृदय को अपने शूल से विदीर्ण करके भाई से उऋण होऊँगा। अहा! यह मेरे लिये कैसे आनन्द की बात होगी। इन्द्र! तूने मेरे आत्मवेत्ता और निष्पाप बड़े भाई के, जो ब्राह्मण होने के साथ ही यज्ञ में दीक्षित और तुम्हारा गुरु था, विश्वास दिलाकर तलवार से तीनों सिर उतार लिये-ठीक वैसे ही जैसे स्वर्गकामी निर्दय मनुष्य यज्ञ में पशु का सिर काट डालता है। दया, लज्जा, लक्ष्मी और कीर्ति तुझे छोड़ चुकी है। तूने ऐसे-ऐसे नीच कर्म किये हैं, जिनकी निन्दा मनुष्यों की तो बात ही क्या-राक्षस तक करते हैं। आज मेरे त्रिशूल से तेरा शरीर टूक-टूक हो जायेगा। बड़े कष्ट से तेरी मृत्यु होगी। तेरे-जैसे पापी को आग भी नहीं जलायेगी, तुझे तो गीध नोंच-नोंचकर खायेंगे। ये अज्ञानी देवता तेरे-जैसे नीच और क्रूर के अनुयायी बनकर मुझ पर शस्त्रों से प्रहार कर रहे हैं। मैं अपने तीखे त्रिशूल से उनकी गरदन काट डालूँगा और उनके द्वारा गुणों के सहित भैरवादि भूतनाथों को बलि चढ़ाऊँगा। वीर इन्द्र! यह भी सम्भव है कि तू मेरी सेना को छिन्न-भिन्न करके अपने वज्र से मेरा सिर काट ले। तब तो मैं अपने शरीर की बलि पशु-पक्षियों को समर्पित करके, कर्म-बन्धन से मुक्त हो महापुरुषों की चरणरज का आश्रय ग्रहण करूँगा-जिस लोक में महापुरुषों जाते हैं, वहाँ पहुँच जाऊँगा। देवराज! मैं तेरे सामने खड़ा हूँ, तेरा शत्रु हूँ; अब तू मुझ पर अपना अमोघ वज्र क्यों नहीं छोड़ता? तू यह सन्देह न कर कि जैसे तेरी गदा निष्फल हो गयी, कृपण पुरुष से की हुई याचना के समान यह वज्र भी वैसे ही निष्फल हो जायेगा। इन्द्र! तेरा यह वज्र श्रीहरि के तेज और दधीचि ऋषि की तपस्या से शक्तिमान् हो रहा है। विष्णु भगवान् ने मुझे मारने के लिये तुझे आज्ञा भी दी है। इसलिये अब तू उसी वज्र से मुझे मार डाल। क्योंकि जिस पक्ष में भगवान् श्रीहरि हैं, उधर ही विजय, लक्ष्मी और सारे गुण निवास करते हैं। देवराज! भगवान् संकर्षण के आज्ञानुसार मैं अपने मन को उनके चरणकमलों में लीन कर दूँगा। तेरे वज्र का वेग मुझे नहीं, मेरे विषय-भोगरूप फंदे को काट डालेगा और मैं शरीर त्यागकर मुनिजनोचित गति प्राप्त करूँगा। जो पुरुष भगवान् से अनन्य प्रेम करते हैं-उनके निजजन हैं-उन्हें वे स्वर्ग, पृथ्वी अथवा रसातल की सम्पत्तियाँ नहीं देते। क्योंकि उनसे परमानन्द की उपलब्धि होती ही नहीं; उलटे द्वेष, उद्वेग, अभिमान, मानसिक पीड़ा, कलह, दुःख और परिश्रम ही हाथ लगते हैं। इन्द्र! हमारे स्वामी अपने भक्त के अर्थ, धर्म एवं काम सम्बन्धी प्रयास को व्यर्थ कर दिया करते हैं और सच पूछो तो इसी से भगवान् की कृपा का अनुमान होता है। क्योंकि उनका ऐसा कृपा-प्रसाद अकिंचन भक्तों के लिये ही अनुभवगम्य है, दूसरों के लिये तो अत्यन्त दुर्लभ ही है। (भगवान् को प्रत्यक्ष अनुभव करते हुए वृत्रासुर ने प्रार्थना की-) ‘प्रभो! आप मुझ पर ऐसी कृपा कीजिये कि अनन्य भाव से आपके चरणकमलों के आश्रित सेवकों की सेवा करने का अवसर मुझे अगले जन्म में भी प्राप्त हो। प्राणवल्लभ! मेरा मन आपके मंगलमय गुणों का स्मरण करता रहे, मेरी वाणी उन्हीं का गान करे और शरीर आपकी सेवा में ही सलंग्न रहे। सर्वसौभाग्यनिधे! मैं आपको छोड़कर स्वर्ग, ब्रह्मलोक, भूमण्डल का साम्राज्य, रसातल का एकच्छत्र राज्य, योग की सिद्धियाँ-यहाँ तक कि मोक्ष भी नहीं चाहता। जैसे पक्षियों के पंखहीन बच्चे अपनी माँ की बाट जोहते रहते हैं, जैसे भूखे बछड़े अपनी माँ का दूध पीने के लिये आतुर रहते हैं और जैसे वियोगिनी पत्नी अपने प्रवासी प्रियतम से मिलने के लिये उत्कण्ठित रहती है-वैसे ही कमलनयन! मेरा मन आपके दर्शन के लिये छटपटा रहा है। प्रभो! मैं मुक्ति नहीं चाहता। मेरे कर्मों के फलस्वरूप मुझे बार-बार जन्म-मृत्यु के चक्कर में भटकना पड़े, इसकी परवा नहीं। परन्तु मैं जहाँ-जहाँ जाऊँ, जिस-जिस योनि में जन्मूँ, वहाँ-वहाँ भगवान् के प्यारे भक्तजनों से मेरी प्रेम-मैत्री बनी रहे। स्वामिन्! मैं केवल यही चाहता हूँ कि जो लोग आपकी माया से देह-गेह और स्त्री-पुत्र आदि में आसक्त हो रहे हैं, उनके साथ मेरा कभी किसी प्रकार का भी सम्बन्ध न हो’। *राणा जी खेड़ांवाली* *श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे*। *हे नाथ नारायण वासुदेवाय*॥ *जय जय श्री हरि*"

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Davinder Singh Rana Feb 26, 2021

तिरुपति बालाजी की कथा!!!!!! वैंकटेश भगवान को कलियुग में बालाजी नाम से भी जाना गया है। पौराणिक गाथाओं और परम्पराओं से जु़डा संक्षिप्त इतिहास यहां प्रस्तुत है- प्रसिद्ध पौराणिक सागर-मंथन की गाथा के अनुसार जब सागर मंथन किया गया था तब कालकूट विष के अलावा चौदह रत्‍‌न निकले थे। इन रत्‍‌नों में से एक देवी लक्ष्मी भी थीं। लक्ष्मी के भव्य रूप और आकर्षण के फलस्वरूप सारे देवता, दैत्य और मनुष्य उनसे विवाह करने हेतु लालायित थे, किन्तु देवी लक्ष्मी को उन सबमें कोई न कोई कमी लगी। अत: उन्होंने समीप निरपेक्ष भाव से खड़े हुए विष्णुजी के गले में वरमाला पहना दी। विष्णु जी ने लक्ष्मी जी को अपने वक्ष पर स्थान दिया। यह रहस्यपूर्ण है कि विष्णुजी ने लक्ष्मीजी को अपने ह्वदय में स्थान क्यों नहीं दिया? महादेव शिवजी की जिस प्रकार पत्‍‌नी अथवा अर्धाग्नि पार्वती हैं, किन्तु उन्होंने अपने ह्वदयरूपी मानसरोवर में राजहंस राम को बसा रखा था उसी समानांतर आधार पर विष्णु के ह्वदय में संसार के पालन हेतु उत्तरदायित्व छिपा था। उस उत्तरदायित्व में कोई व्यवधान उत्पन्न नहीं हो इसलिए संभवतया लक्ष्मीजी का निवास वक्षस्थल बना। एक बार धरती पर विश्व कल्याण हेतु यज्ञ का आयोजन किया गया। तब समस्या उठी कि यज्ञ का फल ब्रम्हा, विष्णु, महेश में से किसे अर्पित किया जाए। इनमें से सर्वाधिक उपयुक्त का चयन करने हेतु ऋषि भृगु को नियुक्त किया गया। भृगु ऋषि पहले ब्रम्हाजी और तत्पश्चात महेश के पास पहुंचे किन्तु उन्हें यज्ञ फल हेतु अनुपयुक्त पाया। अंत में वे विष्णुलोक पहुंचे। विष्णुजी शेष शय्या पर लेटे हुए थे और उनकी दृष्टि भृगु पर नहीं जा पाई। भृगु ऋषि ने आवेश में आकर विष्णु जी के वक्ष पर ठोकर मार दी। अपेक्षा के विपरीत विष्णु जी ने अत्यंत विनम्र होकर उनका पांव पक़ड लिया और नम्र वचन बोले- हे ऋषिवर! आपके कोमल पांव में चोट तो नहीं आई? विष्णुजी के व्यवहार से प्रसन्न भृगु ऋषि ने यज्ञफल का सर्वाधिक उपयुक्त पात्र विष्णुजी को घोषित किया। उस घटना की साक्षी विष्णुजी की पत्‍‌नी लक्ष्मीजी अत्यंत क्रुद्व हो गई कि विष्णुजी का वक्ष स्थान तो उनका निवास स्थान है और वहां धरतीवासी भृगु को ठोकर लगाने का किसने अधिकार दिया? उन्हें विष्णुजी पर भी क्रोध आया कि उन्होंने भृगु को दंडित करने की अपेक्षा उनसे उल्टी क्षमा क्यों मांगी? परिणामस्वरूप लक्ष्मीजी विष्णुजी को त्याग कर चली गई। विष्णुजी ने उन्हें बहुत ढूंढा किन्तु वे नहीं मिलीं। अंतत: विष्णुजी ने लक्ष्मी को ढूंढते हुए धरती पर श्रीनिवास के नाम से जन्म लिया और संयोग से लक्ष्मी ने भी पद्मावती के रूप में जन्म लिया। घटनाचक्र ने उन दोनों का अंतत: परस्पर विवाह करवा दिया। सब देवताओं ने इस विवाह में भाग लिया और भृगु ऋषि ने आकर एक ओर लक्ष्मीजी से क्षमा मांगी तो साथ ही उन दोनों को आशीर्वाद प्रदान किया। लक्ष्मीजी ने भृगु ऋषि को क्षमा कर दिया किन्तु इस विवाह के अवसर पर एक अनहोनी घटना हुई। विवाह के उपलक्ष्य में लक्ष्मीजी को भेंट करने हेतु विष्णुजी ने कुबेर से धन उधार लिया जिसे वे कलियुग के समापन तक ब्याज सहित चुका देंगे। ऐसी मानता है कि जब भी कोई भक्त तिरूपति बालाजी के दर्शनार्थ जाकर कुछ चढ़ाता है तो वह न केवल अपनी श्रद्धा भक्ति अथवा आर्त प्रार्थना प्रस्तुत करता है अपितु भगवान विष्णु के ऊपर कुबेर के ऋण को चुकाने में सहायता भी करता है। अत: विष्णुजी अपने ऐसे भक्त को खाली हाथ वापस नहीं जाने देते हैं। जिस नगर में यह मंदिर बना है उसका नाम तिरूपति है और नगर की जिस पहाड़ी पर मंदिर बना है उसे तिरूमला (श्री+मलय) कहते हैं। तिरूमला को वैंकट पहाड़ी अथवा शेषांचलम भी कहा जाता है। यह पहड़ी सर्पाकार प्रतीत होती हैं जिसके सात चोटियां हैं जो आदि शेष के फनों की प्रतीक मानी जाती हैं। इन सात चोटियों के नाम क्रमश: शेषाद्रि, नीलाद्रि, गरू़डाद्रि, अंजनाद्रि, वृषभाद्रि, नारायणाद्रि और वैंकटाद्रि हैं। तिरुपति बालाजी मंदिर के यह ग्यारह सच आप नहीं जानते हैं!!!!!! देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में तिरुपति बालाजी मंदिर अत्यंत प्रसिद्ध है। कई बड़े उद्योगपति, फिल्म सितारे और राजनेता यहां अपनी उपस्थिति देते हैं क्योंकि उनके चमत्कारों की कई कथाएं प्रचलित हैं। आइए जानें उनके ग्यारह आश्चर्यजनक चमत्कार.... 1. मुख्यद्वार के दाएं और बालाजी के सिर पर अनंताळवारजी के द्वारा मारे गए निशान हैं। बालरूप में बालाजी को ठोड़ी से रक्त आया था, उसी समय से बालाजी के ठोड़ी पर चंदन लगाने की प्रथा शुरू हुई। 2. भगवान बालाजी के सिर पर आज भी रेशमी बाल हैं और उनमें उलझने नहीं आती और वह हमेशा ताजा लगते है। 3. मंदिर से 23 किलोमीटर दूर एक गांव है, उस गांव में बाहरी व्यक्ति का प्रवेश निषेध है। वहां पर लोग नियम से रहते हैं। वहां की महिलाएं ब्लाउज नहीं पहनती। वहीं से लाए गए फूल भगवान को चढ़ाए जाते हैं और वहीं की ही अन्य वस्तुओं को चढाया जाता है जैसे- दूध, घी, माखन आदि। 4. भगवान बालाजी गर्भगृह के मध्य भाग में खड़े दिखते हैं मगर वे दाई तरफ के कोने में खड़े हैं बाहर से देखने पर ऎसा लगता है। 5. बालाजी को प्रतिदिन नीचे धोती और उपर साड़ी से सजाया जाता है। 6. गृभगृह में चढ़ाई गई किसी वस्तु को बाहर नहीं लाया जाता, बालाजी के पीछे एक जलकुंड है उन्हें वहीं पीछे देखे बिना उनका विसर्जन किया जाता है। 7. बालाजी की पीठ को जितनी बार भी साफ करो, वहां गीलापन रहता ही है, वहां पर कान लगाने पर समुद्र घोष सुनाई देता है। 8. बालाजी के वक्षस्थल पर लक्ष्मीजी निवास करती हैं। हर गुरुवार को निजरूप दर्शन के समय भगवान बालाजी की चंदन से सजावट की जाती है उस चंदन को निकालने पर लक्ष्मीजी की छबि उस पर उतर आती है। बाद में उसे बेचा जाता है। 9. बालाजी के जलकुंड में विसर्जित वस्तुए तिरूपति से 20 किलोमीटर दूर वेरपेडु में बाहर आती हैं। 10. गर्भगृह मे जलने वाले चिराग कभी बुझते नही हैं, वे कितने ही हजार सालों से जल रहे हैं किसी को पता भी नही है। 11. बताया जाता है सन् 1800 में मंदिर परिसर को 12 साल के लिए बंद किया गया था। किसी एक राजा ने 12 लोगों को मारकर दीवार पर लटकाया था उस समय विमान में वेंकटेश्वर प्रकट हुए थे ऎसा माना जाता है। जानिये प्रसिद्ध मंदिर तिरुपति बालाजी के लड्डू का रहस्य !!!!!! तिरुपति में मौजूद बालाजी का मंदिर पूरी दुनिया में मशहूर है, बाबा के दर्शन के लिए आम लोगों से लेकर दुनिया भर के अमीर लोग यहां दर्शक को आते हैं। जितना खास ये मंदिर है उतना ही खास है यहां पर प्रसाद के रूप में मिलने वाला मंदिर। आखिर ये लड्डू क्यों इतना खास है हम आपको बताते हैं उसकी कहानी। 1. प्रसाद में मिलने वाले इस लड्डू का इतिहास 300 सालों से भी पुराना है। कहा जाता है कि पहली बार 2 अगस्त 1715 में इस लड्डू को प्रसाद के तौर पर दिया गया था, उसके बाद ये लड़्डू इस मंदिर का खास प्रसाद बन गया। 2. इस लड्डू को बनाने में आटा, चीनी, घृत, इलायची और मेवे आदि का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद इन्हें वेंकटेश्वर मंदिर में पूजा के दौरान भगवान को अर्पित किया जाता है। 3. इस लड्डू की कीमत की कुछ खास ज्यादा नहीं है। साथ ही ये कई दिनों तक चलता है, इसलिए यहां आने वाला हर शख्स इस लड्डू को यहां से खरीदकर जरूर ले जाता है। 4. इस लड्डू को बनाने के लिए भी एक खास जगह है, जहां हर शख्स के जाने की इजाजत नहीं हैं। इस लड्डू को बनाने के लिए रसोईया भी खास है। एक दिन में करीब 3 लाख लड्डू तैयार किए जाते हैं और भगवान को प्रसाद में रोज ताजे लड्डू ही चढ़ाए जाते हैं। 5. यहां मिलने वाले लड्डू का जो स्वाद है हो आपको दुनिया में कही भी नहीं मिलेगा।* *राणा जी खेड़ांवाली*

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Davinder Singh Rana Feb 26, 2021

तिलक लगाने के बाद चावल के दाने क्यों लगाए जाते है...??? ये तो आपने अक्सर देखा होगा, कि जब आपके घर में कोई त्यौहार, शादी या पूजा का समय होता है, तो इसकी शुभ शुरुआत व्यक्ति को तिलक लगा कर की जाती है. जी हां ये तो सब को मालूम है कि पूजा के दौरान व्यक्ति को तिलक लगाया जाता है, क्यूकि तिलक लगाना शुभ माना जाता है. मगर क्या आपने कभी ये सोचा है कि तिलक लगाने के बाद व्यक्ति के माथे पर चावल क्यों लगाए जाते है. यकीनन आपको कभी ये सोचना की जरूरत ही नहीं पड़ी होगी. हालांकि आज हम आपको ये बताएंगे कि तिलक लगाने के बाद उसके ऊपर चावल क्यों लगाए जाते है. गौरतलब है कि पूजा के दौरान माथे पर कुमकुम का तिलक लगाते समय चावल के दाने भी ललाट पर जरूर लगाए जाते है। ऐसा क्यों किया जाता है, इसके पीछे की वजह भी आज हम आपको विस्तार से बताते है. अगर वैज्ञानिक दृष्टि की बात करे तो माथे पर तिलक लगाने से दिमाग में शांति और शीतलता बनी रहती है. इसके इलावा चावल को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है. वही अगर शास्त्रों की बात करे तो चावल को हविष्य यानि हवन में देवी देवताओ को चढ़ाने वाला शुद्ध अन्न माना जाता है। एक और मान्यता के अनुसार चावल का एक अन्य नाम अक्षत भी है इसका अर्थ कभी क्षय ना होने वाला या जिसका कभी नाश नही होता है। तभी तो हम हर खास मौके पर चावल जरूर बनाते है. दरअसल ऐसा माना जाता है कि कच्चे चावल व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते है. यही वजह है कि पूजा के दौरान न केवल माथे पर तिलक लगाया जाता है, बल्कि पूजा की विधि संपन्न करने के लिए भी चावलों का इस्तेमाल किया जाता है। आपने अक्सर देखा होगा कि पूजा में तिलक और पुष्प के साथ कुछ मीठा और चावल जरूर होते है. वो इसलिए क्यूकि पूजा की विधि बिना चावलों के पूरी नहीं हो सकती. यही वजह है कि चावलों को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है और इसे माथे पर तिलक के साथ लगाया जाता है. इसके इलावा पूजा में भी कुमकुम के तिलक के ऊपर चावल के दाने इसलिए लगाए जाते है, ताकि हमारे आस पास जो नकारात्मक ऊर्जा है, वो दूर जा सके या खत्म हो सके. जी हां इसे लगाने का उद्देश्य यही होता है कि वो नकारात्मक ऊर्जा वास्तव में सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित हो सके। यक़ीनन इसे पढ़ने के बाद आप समझ गए होंगे कि माथे पर कुमकुम का तिलक लगाने के बाद उसके ऊपर चावल के दाने क्यों लगाए जाते है. हालांकि अगर आप पूजा के समय माथे पर केवल तिलक लगाते है और चावल के दानो का इस्तेमाल नहीं करते, तो यह सही नहीं है। अगर आप ऐसा करते है, तो अब से ऐसा कभी मत कीजियेगा, क्यूकि इससे न केवल पूजा अधूरी होने का आभास होता है, बल्कि इससे नकारात्मक ऊर्जा भी आपके आस पास भटकती रहती है. इसलिए हम तो यही कहेगे कि हर पूजा में चावलों का खास महत्व है. ऐसे में आपको चावलों का इस्तेमाल करना कभी नहीं भूलना चाहिए। हम उम्मीद करते है, कि इस जानकारी को पढ़ने के बाद आपको चावलों का महत्व पूरी तरह से समझ आ गया होगा।* *राणा जी खेड़ांवाली*

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Davinder Singh Rana Feb 26, 2021

*माघ पूर्णिमा महत्व, कथा, व्रत और पूजा विधि 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ माघ मास की पूर्णिमा तिथि को माघी पूर्णिमा मनाई जाती है। 27 नक्षत्रो में मघा नक्षत्र के नाम से “माघ पूर्णिमा” की उत्पत्ति होती है। इस तिथि का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व बताया गया है। इस वर्ष यह शुभ योग 26 फरवरी शुक्रवार के दिन पड़ रहा है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार माघ पूर्णिमा पर स्वयं भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं। इस दिन जो भी जातक गंगा स्नान करते है तथा उसके बाद जप और दान करते है उन्हें सांसारिक बंधनो से मुक्ति मिलती है। यह स्नान सम्पूर्ण माघ मास में चलता है अर्थात पौष मास की पूर्णिमा से आरंभ होकर माघ पूर्णिमा तक होता है। सम्पूर्ण मास में गंगा स्नान करने का विशेष महत्त्व है न की केवल पूर्णिमा के दिन। यदि आप सम्पूर्ण मास में स्नान न कर सके, तो तीन दिन अथवा एक दिन माघ स्नान अवश्य ही करना चाहिए। जो जातक पूरे महीने गंगा स्नान करता वह इसी जन्म में मुक्ति का भागीदार होता है। त्रिवेणी स्नान करने का अंतिम दिन माघ पूर्णिमा ही है। कहा जाता है कि माघ स्नान करने वाले व्यक्ति पर भगवान कृष्ण प्रसन्न होकर धन-धान्य, सुख-समृद्धि तथा संतान एवं मुक्ति प्रदान करते हैं। माघ पूर्णिमा का पौराणिक महत्व 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ हिन्दू मान्यता के अनुसार माघ मास में सभी देवता मानव रूप धारण करके स्वर्गलोक से पृथ्वी पर आकर वास करते है तथा प्रयागराज में स्नान, जप और दान करते हैं। इसी कारण कहा जाता है कि इस दिन प्रयाग में गंगा स्नान करने से व्यक्ति की सभी मनोवांछित मनोकामनाएं पूर्ण होती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। प्रयाग गंगा यमुना और सरस्वती का संगम स्थल है इसी कारण इस स्थान का विशेष महत्व हो जाता है।आ इस दिन ही होली का डंडा गाड़ा जाता है। इस दिन भैरव जयंती भी मनाने की परम्परा है। जो जातक चिरकाल तक स्वर्गलोग में रहना चाहते हैं। उन्हें माघ मास में सूर्य के मकर राशि में स्थित होने पर अवश्य तीर्थ स्नान करना चाहिए। स्वर्गलोके चिंर वासो येषां मनसि वर्तते | यत्र क्वापि जले तैस्तु स्नातव्यं मृगभास्करे॥ माघ पूर्णिमा का ज्योतिषीय महत्त्व 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ माघ पूर्णिमा का ज्योतिषीय महत्त्व भी माना गया है। जब चन्द्रमा अपनी ही राशि कर्क में होता है तथा सूर्य अपने पुत्र शनि की राशि मकर में होता है तब माघ पूर्णिमा का योग बनता है। इस योग में सूर्य और चन्द्रमा एक दूसरे से आमने सामने होते है। इस योग को पुण्य योग भी कहा जाता है। इस योग में स्नान करने से सूर्य और चंद्रमा से मिलने वाले कष्ट शीघ्र ही नष्ट हो जाते है। जिस जातक की जन्मकुंडली में चन्द्रमा नीच का है तथा मानसिक संताप प्रदान कर रहा है तो उसे सम्पूर्ण मास गंगा जल से स्नान करना चाहिए तथा अंतिम दिन दान करना चाहिए ऐसा करने से चन्द्रमा का दोष समाप्त हो जाता है। जिस जातक की कुंडली में सूर्य तुला राशि में है तथा मान-सम्मान, यश में कमी प्रदान कर रहा है तो वैसे व्यक्ति को माघ स्नान करना चाहिए तथा सूर्य भगवान् को प्रतिदिन अर्घ्य देना चाहिए ऐसा करने से सूर्य से मिलने वाले कष्ट दूर हो जाते है। माघ पूर्णिमा व्रत कथा 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर शुभव्रत नामक विद्वान ब्राह्मण निवास करते थे। ये बहुत ही लालची थे। इनका जीवन का मूल उद्देश्य येन केन प्रकारेण धन कमाना था तथा उन्होंने ऐसा किया भी। धन कमाते कमाते वे वृद्ध दिखने लगे। वे अनेक प्रकार के व्याधि से ग्रस्त हो गए। इसी मध्य उन्हें अचानक संज्ञान हुआ की आजतक मैंने सारा जीवन धन कमाने में ही नष्ट कर दिया है। मुक्ति के लिए मैंने कुछ भी नहीं किया है। अब मेरे जीवन का उद्धार कैसे होगा? मैंने तो आजतक कोई सत्कर्म नहीं किया है। उसी समय उन्हें अचानक एक श्‍लोक स्मरण आया, जिसमें माघ मास में स्नान का महत्त्व बताया गया था। शुभव्रत ने उसी श्‍लोक के अनुरूप माघ स्नान का संकल्प लिया और नर्मदा नदी में स्नान करने लगे। इस प्रकार वे लगातार 9 दिनों तक प्रात: नर्मदा के जल में स्नान करते रहे। दसवें दिन स्नान के बाद उनका स्वास्थ्य खराब हो गया। उनके मृत्यु का समय आ गया था वे सोचने लगे की मैंने तो आजीवन धनार्जन में लगा रहा कोई भी सत्कार्य नहीं किया अतः मुझे तो नरकलोक में ही रहना पड़ेगा। परन्तु माघ मास में स्नान करने के कारण उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। माघ पूर्णिमा व्रत और पूजा विधि 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ माघ पूर्णिमा के दिन सर्वप्रथम सुबह सूर्योदय से पहले किसी पवित्र गंगा, यमुना नदी, जलाशय, कुआं या बावड़ी में स्नान करना चाहिए । यदि आप गंगा स्नान नहीं कर सकते हैं तो नहाने की पानी मे गंगाजल डालकर स्नान करना चाहिए। यदि गंगाजल भी उपलब्ध न हो तो हाथ में जल लेकर इस संकल्प मन्त्र का उच्चारण करे — ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः अद्यैतस्य मासानाम् मासोतमे मासे माघ मासे शुक्ल पक्षे पूर्णिमा शुभ पूण्य तिथौ रविवासरे अमुक (अपने गौत्र का नाम लें) गोत्रोत्पन्नः शर्माऽहं/(वर्माऽहं/गुप्तोऽहं/दासोऽहं ) ममात्मनः सपरिवारस्य सर्वारिष्ट निरसन पूर्वक सर्वपाप क्षयार्थं, दीर्घायु शरीरारोग्य कामनया धन-धान्य-बल-पुष्टि-कीर्ति-यश लाभार्थं, श्रुति स्मृति पुराणतन्त्रोक्त फल प्राप्तयर्थं, सकल मनोरथ सिध्यर्थं अहम अपना नाम लेकर माघ पूर्णिमा स्नान करिष्ये। फिर निम्न मंत्र बोलें। ॐ गंगे च यमुना गोदावरी नर्मदे सिंधु कावेरी अस्मिन जले सन्निधिं कुरु। इस मंत्र के उच्चारण के बाद स्नान करना प्रारम्भ करे। स्नान के बाद सूर्यदेव को “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मन्त्र से अर्घ्य देना चाहिए। इसके बाद मन में माघ पूर्णिमा व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। दोपहर में किसी गरीब व्यक्ति और ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दे। दान में तिल और काले तिल विशेष रूप से दान करे तथा काले तिल से हवन और काले तिल से पितरों का तर्पण करे। माघ पूर्णिमा व्रत में स्नान और दान से लाभ 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ माघ पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त में नदी में स्नान करने से शारीरिक व्याधियां दूर होती हैं और शरीर निरोगी होता है। इस दिन स्नान-ध्यान कर भगवान महादेव या विष्णु की पूजा-अर्चना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। व्यक्ति को तिल और कम्बल का दान करना चाहिए ऐसा करने से जातक को नरक लोक से मुक्ति मिलती है। माघ की पूर्णिमा पर ब्रह्मवैवर्तपुराण का दान करे ऐसा करने से श्रद्धालु को ब्रह्म लोक की प्राप्ति होती है । सभी पापों से विमुक्ति, स्वर्गलाभ तथा भगवान् वासुदेव की प्राप्ति के लिए सभी श्रद्धालुओं को माघ स्नान करना चाहिए। माघ पूर्णिमा के राशि अनुसार उपाय 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ मेष🐐 माघ पूर्णिमा पर मेष राशि के लोग कन्याओं को खीर खिलाएं और चावल को दूध में धोकर बहते पानी में बहाएं। ऐसा करने से आपके सारे कष्ट दूर हो सकते हैं। वृष🐂 इस राशि में चंद्रमा उच्च का होता है। वृष राशि शुक्र की राशि है और राशि स्वामी शुक्र प्रसन्न होने पर भौतिक सुख-सुविधाएं प्रदान करते हैं। शुक्र देवता को प्रसन्न करने के लिए इस राशि के लोग दही और गाय का घी मंदिर में दान करें। मिथुन💏 इस राशि का स्वामी बुध, चंद्र के साथ मिल कर आपकी व्यापारिक एवं कार्य क्षेत्र के निर्णयों को प्रभावित करता है। उन्नति के लिए आप दूध और चावल का दान करें तो उत्तम रहेगा। कर्क🦀 आपके मन का स्वामी चंद्रमा है, जो कि आपका राशि स्वामी भी है। इसलिए आपको तनाव मुक्त और प्रसन्न रहने के लिए मिश्री मिला हुआ दूध मंदिर में दान देना चाहिए। सिंह🐅 आपका राशि का स्वामी सूर्य है। माघ पूर्णिमा के अवसर पर धन प्राप्ति के लिए मंदिर में गुड़ का दान करें तो आपकी आर्थिक स्थिति में परिवर्तन हो सकता है। कन्या👩 इस पर्व पर आपको अपनी राशि के अनुसार 3 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को भोजन में खीर खिलाना या दूध अथवा अन्य सफेद वस्तुओ का दान विशेष लाभदाई रहेगा। तुला⚖ इस राशि पर शुक्र का विशेष प्रभाव होता है। इस राशि के लोग धन और ऐश्वर्य के लिए धर्म स्थानों यानी मंदिरों पर दूध, चावल व शुद्ध घी का दान दें। वृश्चिक🦂 इस राशि में चंद्रमा नीच का होता है। सुख-शांति और संपन्नता के लिए इस राशि के लोग अपने राशि स्वामी मंगल देव से संबंधित वस्तुओं, कन्याओं को दूध व चांदी का दान दें। धनु🏹 इस राशि का स्वामी गुरु है। इसलिए इस राशि वालों को माघी पूर्णिमा के अवसर पर किए गए दान का पूरा फल मिलेगा। चने की दाल पीले कपड़े में रख कर मंदिर में दान दें। गुरु अथवा गुरु तुल्य महानुभावो को धन का दान करें। मकर🐊 इस राशि का स्वामी शनि है। आप बहते पानी में चावल बहाएं। इस उपाय से आपकी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। कुंभ🍯 इस राशि के लोगों का राशि स्वामी शनि है। इसलिए इस पर्व पर शनि के उपाय करें तो विशेष लाभ मिलेगा। आज दृष्टिहीनों को भोजन अवश्य करवाएं। मीन🐠 माघ पूर्णिमा के अवसर पर आपकी राशि से चंद्र पंचम होगा। इसलिए आप सुख, ऐश्वर्य और धन की प्राप्ति के लिए ब्राह्मणों को भोजन करवाएं। **राणा जी खेड़ांवाली* 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️

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Davinder Singh Rana Feb 26, 2021

*|| 'जय श्री सीताराम' ||* पोस्ट [23] "श्रीरामचरितमानस–सुंदरकाण्ड” *चौपाई :—* कोटि बिप्र बध लागहिं जाहू। आएँ सरन तजउँ नहिं ताहू॥ सनमुख होइ जीव मोहि जबहीं। जन्म कोटि अघ नासहिं तबहीं॥ पापवंत कर सहज सुभाऊ। भजनु मोर तेहि भाव न काऊ॥ जौं पै दुष्ट हृदय सोइ होई। मोरें सनमुख आव कि सोई॥ निर्मल मन जन सो मोहि पावा। मोहि कपट छल छिद्र न भावा॥ भेद लेन पठवा दससीसा। तबहुँ न कछु भय हानि कपीसा॥ जग महुँ सखा निसाचर जेते। लछिमनु हनइ निमिष महुँ तेते॥ जौं सभीत आवा सरनाईं। रखिहउँ ताहि प्रान की नाईं॥ *दोहा :—* उभय भाँति तेहि आनहु हँसि कह कृपानिकेत। जय कृपाल कहि कपि चले अंगद हनू समेत॥44॥ मंगल भवन अमंगल हारी द्रवहु सो दसरथ अजिर बिहारी !! राम सिया राम सिया राम जय जय राम ! राम सिया राम सिया राम जय जय राम !! *भावार्थ:—* जिसे करोड़ों ब्राह्मणों की हत्या लगी हो, शरण में आने पर मैं उसे भी नहीं त्यागता। जीव ज्यों ही मेरे सम्मुख होता है, त्यों ही उसके करोड़ों जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं॥ पापी का यह सहज स्वभाव होता है कि मेरा भजन उसे कभी नहीं सुहाता। यदि वह (रावण का भाई) निश्चय ही दुष्ट हृदय का होता तो क्या वह मेरे सम्मुख आ सकता था?॥ जो मनुष्य निर्मल मन का होता है, वही मुझे पाता है। मुझे कपट और छल-छिद्र नहीं सुहाते। यदि उसे रावण ने भेद लेने को भेजा है, तब भी हे सुग्रीव! अपने को कुछ भी भय या हानि नहीं है॥ क्योंकि हे सखे! जगत में जितने भी राक्षस हैं, लक्ष्मण क्षणभर में उन सबको मार सकते हैं और यदि वह भयभीत होकर मेरी शरण आया है तो मैं तो उसे प्राणों की तरह रखूँगा॥ कृपा के धाम श्री रामजी ने हँसकर कहा- दोनों ही स्थितियों में उसे ले आओ। तब अंगद और हनुमान्‌ सहित सुग्रीवजी 'कपालु श्री रामजी की जय हो' कहते हुए चले॥44॥ *चौपाई :—* सादर तेहि आगें करि बानर। चले जहाँ रघुपति करुनाकर॥ दूरिहि ते देखे द्वौ भ्राता। नयनानंद दान के दाता॥ बहुरि राम छबिधाम बिलोकी। रहेउ ठटुकि एकटक पल रोकी॥ भुज प्रलंब कंजारुन लोचन। स्यामल गात प्रनत भय मोचन॥ सिंघ कंध आयत उर सोहा। आनन अमित मदन मन मोहा॥ नयन नीर पुलकित अति गाता। मन धरि धीर कही मृदु बाता॥ नाथ दसानन कर मैं भ्राता। निसिचर बंस जनम सुरत्राता॥ सहज पापप्रिय तामस देहा। जथा उलूकहि तम पर नेहा॥ *दोहा :—* श्रवन सुजसु सुनि आयउँ प्रभु भंजन भव भीर। त्राहि त्राहि आरति हरन सरन सुखद रघुबीर॥45॥ मंगल भवन अमंगल हारी द्रवहु सो दसरथ अजिर बिहारी !! राम सिया राम सिया राम जय जय राम ! राम सिया राम सिया राम जय जय राम !! *भावार्थ:—* विभीषणजी को आदर सहित आगे करके वानर फिर वहाँ चले, जहाँ करुणा की खान श्री रघुनाथजी थे। नेत्रों को आनंद का दान देने वाले (अत्यंत सुखद) दोनों भाइयों को विभीषणजी ने दूर ही से देखा॥ फिर शोभा के धाम श्री रामजी को देखकर वे पलक (मारना) रोककर ठिठककर (स्तब्ध होकर) एकटक देखते ही रह गए। भगवान्‌ की विशाल भुजाएँ हैं लाल कमल के समान नेत्र हैं और शरणागत के भय का नाश करने वाला साँवला शरीर है॥ सिंह के से कंधे हैं, विशाल वक्षःस्थल (चौड़ी छाती) अत्यंत शोभा दे रहा है। असंख्य कामदेवों के मन को मोहित करने वाला मुख है। भगवान्‌ के स्वरूप को देखकर विभीषणजी के नेत्रों में (प्रेमाश्रुओं का) जल भर आया और शरीर अत्यंत पुलकित हो गया। फिर मन में धीरज धरकर उन्होंने कोमल वचन कहे॥ हे नाथ! मैं दशमुख रावण का भाई हूँ। हे देवताओं के रक्षक! मेरा जन्म राक्षस कुल में हुआ है। मेरा तामसी शरीर है, स्वभाव से ही मुझे पाप प्रिय हैं, जैसे उल्लू को अंधकार पर सहज स्नेह होता है॥ मैं कानों से आपका सुयश सुनकर आया हूँ कि प्रभु भव (जन्म-मरण) के भय का नाश करने वाले हैं। हे दुखियों के दुःख दूर करने वाले और शरणागत को सुख देने वाले श्री रघुवीर! मेरी रक्षा कीजिए, रक्षा कीजिए॥45॥ *राणा जी खेड़ांवाली* *क्रमशः अगले पोस्ट में* ...... "गीताप्रेस-गोरखपुर द्वारा प्रकाशित पुस्तक *'श्रीरामचरितमानस'* गोस्वामी तुलसीदास रचित, टीकाकार श्रद्धेय भाईजी श्रीहनुमान प्रसाद पोद्दार, पुस्तक कोड *[81]* से"

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