🌹bk preeti 🌹 Apr 29, 2021

*एक सुंदर कहानी* एक घर मे *पांच दिए* जल रहे थे। एक दिन पहले एक दिए ने कहा - इतना जलकर भी *मेरी रोशनी की* लोगो को *कोई कदर* नही है... तो बेहतर यही होगा कि मैं बुझ जाऊं। वह दिया खुद को व्यर्थ समझ कर बुझ गया । जानते है वह दिया कौन था ? वह दिया था *उत्साह* का प्रतीक । यह देख दूसरा दिया जो *शांति* का प्रतीक था, कहने लगा - मुझे भी बुझ जाना चाहिए। निरंतर *शांति की रोशनी* देने के बावजूद भी *लोग हिंसा कर* रहे है। और *शांति* का दिया बुझ गया । *उत्साह* और *शांति* के दिये के बुझने के बाद, जो तीसरा दिया *हिम्मत* का था, वह भी अपनी हिम्मत खो बैठा और बुझ गया। *उत्साह*, *शांति* और अब *हिम्मत* के न रहने पर चौथे दिए ने बुझना ही उचित समझा। *चौथा* दिया *समृद्धि* का प्रतीक था। सभी दिए बुझने के बाद केवल *पांचवां दिया* *अकेला ही जल* रहा था। हालांकि पांचवां दिया सबसे छोटा था मगर फिर भी वह *निरंतर जल रहा* था। तब उस घर मे एक *लड़के* ने प्रवेश किया। उसने देखा कि उस घर में सिर्फ *एक ही दिया* जल रहा है। वह खुशी से झूम उठा। चार दिए बुझने की वजह से वह दुखी नही हुआ बल्कि खुश हुआ। यह सोचकर कि *कम से कम* एक दिया तो जल रहा है। उसने तुरंत *पांचवां दिया उठाया* और बाकी के चार दिए *फिर से* जला दिए । जानते है वह *पांचवां अनोखा दिया* कौन सा था ? वह था *उम्मीद* का दिया... इसलिए *अपने घर में* अपने *मन में* हमेशा उम्मीद का दिया जलाए रखिये । चाहे *सब दिए बुझ जाए* लेकिन *उम्मीद का दिया* नही बुझना चाहिए । ये एक ही दिया *काफी* है बाकी *सब दियों* को जलाने के लिए .... ख़ुशियाँ आएँगी, कुछ समय बाद सब सामान्य होगा , *🎀उम्मीद का दिया जलाए रखें*🙏

+309 प्रतिक्रिया 106 कॉमेंट्स • 227 शेयर
🌹bk preeti 🌹 Apr 22, 2021

एक दिन एक राजा ने अपने तीन मन्त्रियो को दरबार में बुलाया और तीनो को आदेश दिया के एक एक थैला ले कर बगीचे में जाएं और वहां से अच्छे अच्छे फल जमा करें ओर ले कर दरबार मैं आयें वो तीनो अलग अलग बाग़ में प्रविष्ट हो गए पहले मन्त्री ने कोशिश की के राजा के लिए उसकी पसंद के अच्छे अच्छे और मज़ेदार फल जमा किए जाएँ,उस ने काफी मेहनत के बाद बढ़िया और ताज़ा फलों से थैला भर लिया, दूसरे मन्त्री ने सोचा राजा हर फल का परीक्षण तो करेगा नहीं इस लिए उसने जल्दी जल्दी थैला भरने में ताज़ा कच्चे ओर गले सड़े फल भी थैले में भर लिए तीसरे मन्त्री ने सोचा राजा की नज़र तो सिर्फ भरे हुवे थैले की तरफ होगी वो खोल कर देखेगा भी नहीं कि इसमें क्या है उसने समय बचाने के लिए जल्दी जल्दी इसमें घास और पत्ते भर लिए और वक़्त बचाया . दूसरे दिन राजा ने तीनों मन्त्रियो को उनके थैलों समेत दरबार में बुलाया और उनके थैले खोल कर भी नही देखे और आदेश दिया कि तीनों को उनके थैलों समेत दूर स्थान के एक जेल में तीन महीने बंद कर दिया जाए अब जेल में उनके पास खाने पीने को कुछ भी नहीं था सिवाए उन थैलों के,तो जिस मन्त्री ने अच्छे अच्छे फल जमा किये वो तो मज़े से खाता रहा और तीन महीने गुज़र भी गए फिर दूसरा मन्त्री जिसने ताज़ा कच्चे गले सड़े फल जमा किये थे वह कुछ दिन तो ताज़ा फल खाता रहा फिर उसे सड़े गले फल खाने पड़े जिस से वो बीमार होगया और बहुत तकलीफ उठानी पड़ी . और तीसरा मन्त्री जिसने थैले में सिर्फ घास और पत्ते जमा किये थे वो कुछ ही दिनों में भूख से मर गया अब हमने अपने आपसे पूछना है कि हम क्या जमा कर रहे है हम इस समय जीवन के बाग़ में हैं जहाँ चाहें तो अच्छे कर्म जमा करें चाहें तो बुरे कर्म ,मगर याद रहे जो हम जमा करेंगे वही हमें आखरी समय काम आयेगा क्योंकि दुनिया का राजा हम सब को चारों ओर से देख रहा है आओ ईश्वरसे अरदास करें की जीवन इन के द्वारा बताए हुए भगती मार्ग पर चल कर लोक सुखी ओर परलोक सुहेला करें

+354 प्रतिक्रिया 139 कॉमेंट्स • 321 शेयर
🌹bk preeti 🌹 Apr 13, 2021

*बहुत ही सुन्दर पंक्तियां एक नारी के सम्मान में🙏 जय माता दी 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🌹🌹🙏 ‌ छोटी थी तब ज्यादा बोलती थी* *माँ हमेशा झिड़कती ,* *चुप रहो ! बच्चे ज्यादा नहीं बोलते .* *थोड़ी बड़ी हुई जब , थोड़ा ज्यादा बोलने पर* *माँ फटकार लगाती* *चुप रहो ! बड़ी हो रही हो .* *जवान हुई जब , थोड़ा भी बोलने पर* *माँ जोर से डपटती* *चुप रहो , दूसरे के घर जाना है .* *ससुराल गई जब , कु़छ भी बोलने पर* *सास ने ताने कसे,* *चुप रहो , ये तुम्हारा मायका नहीं* . *गृहस्थी संभाला जब , पति की किसी बात पर बोलने पर* *उनकी डांट मिली ,* *चुप रहो ! तुम जानती ही क्या हो ?* *नौकरी पर गई , सही बात बोलने पर कहा गया* *चुप रहो ! अगर काम करना है तो* *थोड़ी उम्र ढली जब , अब जब भी बोली तो* *बच्चों ने कहा* *चुप रहो ! तुम्हें इन बातों से क्या लेना* . *बूढ़ी हो गई जब , कुछ भी बोलना चाहा तो* *सबने कहा* *चुप रहो ! तुम्हें आराम की जरूरत है।* *इन चुप्पी की तहों में , आत्मा की गहों में* *बहुत कुछ दबा पड़ा है* *उन्हें खोलना चाहती हूँ , बहुत कुछ बोलना चाहती हूँ* *पर सामने यमराज खड़ा है , कहा उसने* *चुप रहो ! तुम्हारा अंत आ गया है* *और मैं चुपचाप चुप हो गई* *हमेशा के लिए...* 🔥🔥🔥🔥

+349 प्रतिक्रिया 72 कॉमेंट्स • 205 शेयर
🌹bk preeti 🌹 Apr 13, 2021

JAI MATA DI जय माता दी🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏🙏 भोर भई दिन चढ़ गया, मेरी अम्बे हो रही जय जय कार मंदिर विच आरती जय माँ हे दरबारा वाली, आरती जय माँ हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ काहे दी मैया तेरी आरती बनावा काहे दी मैया तेरी आरती बनावा काहे दी पावां विच बाती मंदिर विच आरती जय माँ सुहे चोलेयाँवाली आरती जय माँ हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ सर्व सोने दी तेरी आरती बनावा सर्व सोने दी तेरी आरती बनावा अगर कपूर पावां बाती मंदिर विच आरती जय माँ हे माँ पिंडी रानी आरती जय माँ हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ कौन सुहागन दिवा बालेया, मेरी मैया कौन सुहागन दिवा बालेया, मेरी मैया कौन जागेगा सारी रात मंदिर विच आरती जय माँ सच्चियाँ ज्योतां वाली आरती जय माँ हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ सर्व सुहागिन दिवा बलिया मेरी मैया सर्व सुहागिन दिवा बलिया मेरी मैया ज्योत जागेगी सारी रात मंदिर विच आरती जय माँ हे माँ त्रिकुटा रानी आरती जय माँ हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ जुग जुग जीवे तेरा जम्मुए दा राजा जुग जुग जीवे तेरा जम्मुए दा राजा जिस तेरा भवन बनाया मंदिर विच आरती जय माँ हे मेरी अम्बे रानी आरती जय माँ हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ सिमर चरण तेरा ध्यानु यश गावे जो ध्यावे सो, यो फल पावे रख बाणे दी लाज मंदिर विच आरती जय माँ सोहनेया मंदिरां वाली आरती जय माँ हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ

+355 प्रतिक्रिया 71 कॉमेंट्स • 296 शेयर
🌹bk preeti 🌹 Apr 12, 2021

🏵️ *ताँबा - कोरोना के लिए घातक* 🏵️ ताँबा धातु और कोरोना वायरस को लेकर एक हैरान कर देने वाली बात सामने आ रही है। कहा जा रहा है ताँबा धारण करने वाले पर कोरोना का असर नहीं हो रहा. अगर किसी ने शुद्ध ताँबे की अंगूठी, कड़ा या पैंडेंट पहना हुआ है तो कोरोना वायरस उस पर बेअसर है। ब्रिटेन के माइक्रोबायोलॉजी रिसर्चर कीविल का दावा है ताँबा वायरसों का काल है. कीविल काफी समय से ताँबे का विभिन्न वायरसों पर प्रयोग कर रहे हैं. उनका कहना है कोविड 19 ही नहीं कोरोना परिवार के अन्य वायरस भी ताँबे के संपर्क में आते ही तुरंत नष्ट हो जाते हैं। मेडिकल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैरोलिना में माइक्रोबायोलॉजी और इम्यूनोलॉजी के प्रोफेसर माइकल जी श्मिट कहते हैं कीविल का काम हमारे पूर्वजों द्वारा ताँबे के अधिक से अधिक प्रयोग के कारण को सत्यापित करता है। खासकर भारत में तो ताँबे का बहुत ही व्यापक प्रयोग मिलता है। नदियों को साफ़ रखने के लिए उनमें ताँबे के सिक्के डालने से लेकर रसोई में ताँबे के बर्तनों के इस्तेमाल तक ताँबे के चमत्कारिक गुणों का उपयोग हुआ है। कीविल का कहना है ताँबा मनुष्य को प्रकृति का वरदान है। प्राचीनकाल से ही मनुष्य ने इसकी जर्म्स और बैक्टीरिया नष्ट करने की प्रकृति को जान लिया था। उनका मानना है यदि अस्पतालों, सार्वजानिक स्थानों और घरों के हैंडल और रेलिंग्स ताँबे के बनाये जाएं तो संक्रमणजनित रोगों पर बड़ी आसानी से विजय पाई जा सकती है। सनातन में सूर्य को सबसे बड़ा इम्युनिटी बूस्टर माना गया है और ताँबा सूर्य की धातु है. ताँबे को सबसे पवित्र और शुद्ध धातु भी माना गया है। 1918 में भारत में फ्लू महामारी से लगभग दो करोड़ लोग मारे गए थे, कहते हैं तब भी जिन लोगों ने ताँबा पहना हुआ था उन पर इस महामारी का कोई असर नहीं हुआ...! 🌹 *ज्ञानस्य मूलम धर्मम्* 🌹

+296 प्रतिक्रिया 101 कॉमेंट्स • 348 शेयर
🌹bk preeti 🌹 Apr 12, 2021

ओम शांति।। *यदि "महाभारत" को पढ़ने का समय न हो तो भी इसके नौ सार- सूत्र हमारे जीवन में उपयोगी सिद्ध हो सकते है....!!* *1.संतानों की गलत माँग और हठ पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया, तो अंत में आप असहाय हो जायेंगे-* *कौरव* *2.आप भले ही कितने बलवान हो लेकिन अधर्म के साथ हो तो, आपकी विद्या, अस्त्र-शस्त्र शक्ति और वरदान सब निष्फल हो जायेगा -* *कर्ण* *3.संतानों को इतना महत्वाकांक्षी मत बना दो कि विद्या का दुरुपयोग कर स्वयंनाश कर सर्वनाश को आमंत्रित करे-* *अश्वत्थामा* *4.कभी किसी को ऐसा वचन मत दो कि आपको अधर्मियों के आगे समर्पण करना पड़े -* *भीष्म पितामह* *5.संपत्ति, शक्ति व सत्ता का दुरुपयोग और दुराचारियों का साथ अंत में स्वयंनाश का दर्शन कराता है -* *दुर्योधन* *6.अंध व्यक्ति- अर्थात मुद्रा, मदिरा, अज्ञान, मोह और काम ( मृदुला) अंध व्यक्ति के हाथ में सत्ता भी विनाश की ओर ले जाती है -* *धृतराष्ट्र* *7.यदि व्यक्ति के पास विद्या, विवेक से बँधी हो तो विजय अवश्य मिलती है -* *अर्जुन* *8.हर कार्य में छल, कपट, व प्रपंच रच कर आप हमेशा सफल नहीं हो सकते -* *शकुनि* *9.यदि आप नीति, धर्म, व कर्म का सफलता पूर्वक पालन करेंगे, तो विश्व की कोई भी शक्ति आपको पराजित नहीं कर सकती -* *युधिष्ठिर* *यदि इन नौ सूत्रों से सबक लेना सम्भव नहीं होता है तो जीवन मे महाभारत संभव हो जाता है।* नित याद करो मन से शिव को 🙏

+481 प्रतिक्रिया 111 कॉमेंट्स • 604 शेयर
🌹bk preeti 🌹 Apr 10, 2021

**( भगवान् क्यो आते हैं )** .ram ram ji ✍️✍️🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏 . एक बार अकबर ने बीरबल से पूछाः तुम्हारे भगवान और हमारे खुदा में बहुत फर्क है। . हमारा खुदा तो अपना पैगम्बर भेजता है जबकि तुम्हारा भगवान बार- बार आता है। यह क्या बात है ? . बीरबलः जहाँपनाह ! इस बात का कभी व्यवहारिक तौर पर अनुभव करवा दूँगा। आप जरा थोड़े दिनों की मोहलत दीजिए। . चार-पाँच दिन बीत गये। बीरबल ने एक आयोजन किया। . अकबर को यमुनाजी में नौका विहार कराने ले गये। कुछ नावों की व्यवस्था पहले से ही करवा दी थी। . उस समय यमुनाजी छिछली न थीं। उनमें अथाह जल था। . बीरबल ने एक युक्ति की कि जिस नाव में अकबर बैठा था, उसी नाव में एक दासी को अकबर के नवजात शिशु के साथ बैठा दिया गया। . सचमुच में वह नवजात शिशु नहीं था। मोम का बालक पुतला बनाकर उसे राजसी वस्त्र पहनाये गये थे ताकि वह अकबर का बेटा लगे। . दासी को सब कुछ सिखा दिया गया था। नाव जब बीच मझधार में पहुँची और हिलने लगी तब 'अरे.... रे... रे.... ओ.... ओ.....' कहकर दासी ने स्त्री चरित्र करके बच्चे को पानी में गिरा दिया और रोने बिलखने लगी। . अपने बालक को बचाने-खोजने के लिए अकबर धड़ाम से यमुना में कूद पड़ा। . खूब इधर-उधर गोते मारकर, बड़ी मुश्किल से उसने बच्चे को पानी में से निकाला। . वह बच्चा तो क्या था मोम का पुतला था। . अकबर कहने लगाः बीरबल ! यह सारी शरारत तुम्हारी है। तुमने मेरी बेइज्जती करवाने के लिए ही ऐसा किया। . बीरबलः जहाँपनाह ! आपकी बेइज्जती के लिए नहीं, बल्कि आपके प्रश्न का उत्तर देने के लिए ऐसा ही किया गया था। . आप इसे अपना शिशु समझकर नदी में कूद पड़े। उस समय आपको पता तो था ही इन सब नावों में कई तैराक बैठे थे, नाविक भी बैठे थे और हम भी तो थे ! . आपने हमको आदेश क्यों नहीं दिया ? हम कूदकर आपके बेटे की रक्षा करते ! . अकबरः बीरबल ! यदि अपना बेटा डूबता हो तो अपने मंत्रियों को या तैराकों को कहने की फुरसत कहाँ रहती है ? . खुद ही कूदा जाता है। . बीरबलः जैसे अपने बेटे की रक्षा के लिए आप खुद कूद पड़े, ऐसे ही हमारे भगवान जब अपने बालकों को संसार एवं संसार की मुसीबतों में डूबता हुआ देखते हैं तो वे पैगम्बर-वैगम्बर को नहीं भेजते, वरन् खुद ही प्रगट होते हैं। . वे अपने बेटों की रक्षा के लिए आप ही अवतार ग्रहण करते है और संसार को आनंद तथा प्रेम के प्रसाद से धन्य करते हैं।

+533 प्रतिक्रिया 157 कॉमेंट्स • 829 शेयर