BACCHAN SINGH May 22, 2020

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BACCHAN SINGH May 10, 2020

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BACCHAN SINGH May 3, 2020

*कोरोनावायरस का कड़वा सच* कोरोना को मजाक में लेते हुए व्यापार करने वाले लाकडाऊन में बिना वजह बाहर निकलने वालों की हकीकत...☺ एक दिन................... अचानक बुख़ार आता है गले मे दर्द होता है साँस लेने मे कष्ट होता है Covid टेस्ट की जाती है 3 दिन तनाव में बीतते हैं ........ फिर टेस्ट +ve आने पर-- रिपोर्ट नगर निगम जाती है रिपोर्ट से हॉस्पिटल तय होता है फिर एम्बुलेंस कॉलोनी में आती है कॉलोनीवासी खिड़की से झाँक कर तुम्हे देखते है कुछ एक की सदिच्छा आप के साथ है कुछ मन ही मन हँस रहे है ओर चुपचाप कहते हैं बहुत माल बेचने की पड़ी थी रोज व्यापार कर रहा था एम्बुलेंस वाले उपयोग के कपड़े रखने का कहते है... बेचारे घरवाले तुम्हें जी भर के देखते हैं, तुम्हारी आँखों से आँसू बह रहे हैं..... तभी.. चलो जल्दी बैठो आवाज़ दी गई एम्बुलेंस का दरवाजा बन्द.. सायरन बजाते रवानगी...फिर कॉलोनी सील कर दी... 14दिन पेट के बल सोने कहा.. दो वक्त का जीने योग्य खाना मिला.. Tv mob सब अदृश्य हो गए.. सामने की दीवार पर अतीत वर्तमान के सारे दृश्य दिखने लगे,,.. अब आप ठीक हो गये तो ..ठीक वो भी जब 3 टेस्ट नेगेटिव आ जाये, तो घर वापसी..... लेकिन इलाज के दौरान यदि कोई अनहोनी आपके साथ हुई तो.. आपके शरीर को प्लास्टिक मे पैक करके सीधे शवदाहगृह.... अपनो को अंतिमदर्शन भी नही.. अंत्येष्टि क्रिया में अपने वाले भी नहीं... सिर्फ परिजनों को मिलता है एक डेथ सर्टिफिकेट और....खेल खतम। बेचारा चला गया.. अच्छा था। इतने में धड़ाम से नींद खुल जाती है देखा शरीर पसीने पसीने ,,, उठ कर ग्लास पानी का पीया । अपने आप से बोला नही निकलूंगा अब बाहर । इसीलिये, घर में सुरक्षित रहो. मोह त्यागो. व्यापार तो जिंदगी भर करना है जीवन अनमोल है मेरे भाईयों अपना *ध्यान रखें* दो गज की दुरी बहुत ही है जरुरी चार गज भूमि से अभी रखनी है 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏�

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BACCHAN SINGH Apr 29, 2020

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BACCHAN SINGH Apr 29, 2020

*सूचना देने वाले को 40 हजार का ईनाम:* @@ रोंगटे न खड़े हो जाए तो बताना @@ ************************ राम गोपाल सिंह एक सेवानिवृत अध्यापक हैं । सुबह दस बजे तक ये एकदम स्वस्थ प्रतीत हो रहे थे । शाम के सात बजते- बजते तेज बुखार के साथ-साथ वे सारे लक्षण दिखायी देने लगे, जो एक कोरोना पॉजीटिव मरीज के अंदर दिखाई देते हैं। परिवार के सदस्यों के चेहरों पर खौफ़ साफ़ दिखाई पड़ रहा था । उनकी चारपाई घर के एक पुराने बड़े से बाहरी कमरे में डाल दी गयी, जिसमें इनके पालतू कुत्ते "मार्शल" का बसेरा है । राम गोपाल जी कुछ साल पहले एक छोटा सा घायल पिल्ला सड़क से उठाकर लाये थे और अपने बच्चे की तरह पालकर इसको नाम दिया "मार्शल"। इस कमरे में अब राम गोपाल जी, उनकी चारपाई और उनका प्यारा मार्शल हैं । दोनों बेटों -बहुओं ने दूरी बना ली और बच्चों को भी पास ना जानें के निर्देश दे दिए गये l सरकार द्वारा जारी किये गये नंबर पर फोन कर के सूचना दे दी गयी । खबर मुहल्ले भर में फैल चुकी थी, लेकिन मिलने कोई नहीं आया । साड़ी के पल्ले से मुँह लपेटे हुए, हाथ में छड़ी लिये पड़ोस की कोई एक बूढी अम्मा आई और राम गोपाल जी की पत्नी से बोली - "अरे कोई इसके पास दूर से खाना भी सरका दो, वे अस्पताल वाले तो इसे भूखे को ही ले जाएँगे उठा के ।" अब प्रश्न ये था कि उनको खाना देनें के लिये कौन जाए ? बहुओं ने खाना अपनी सास को पकड़ा दिया l अब राम गोपाल जी की पत्नी के हाथ, थाली पकड़ते ही काँपने लगे, पैर मानो खूँटे से बाँध दिये गए हों । इतना देखकर वह पड़ोसन बूढ़ी अम्मा बोली- "अरी तेरा तो पति है, तू भी ........। मुँह बाँध के चली जा और दूर से थाली सरका दे, वो अपने आप उठाकर खा लेगा ।" सारा वार्तालाप राम गोपाल जी चुपचाप सुन रहे थे, उनकी आँखें नम थी और काँपते होठों से उन्होंने कहा कि- "कोई मेरे पास ना आये तो बेहतर है, मुझे भूख भी नहीं है ।" इसी बीच एम्बुलेंस आ जाती है और राम गोपाल जी को एम्बुलेंस में बैठने के लिये बोला जाता है । राम गोपाल जी घर के दरवाजे पर आकर एक बार पलटकर अपने घर की तरफ देखते हैं । पोती -पोते प्रथम तल की खिड़की से मास्क लगाए दादा को निहारते हुए और उन बच्चों के पीछे सर पर पल्लू रखे उनकी दोनों बहुएँ दिखाई पड़ती हैं । घर के दरवाजे से हटकर बरामदे पर, दोनों बेटे काफी दूर अपनी माँ के साथ खड़े थे। विचारों का तूफान राम गोपाल जी के अंदर उमड़ रहा था। उनकी पोती ने उनकी तरफ हाथ हिलाते हुए टाटा एवं बाई बाई कहा । एक क्षण को उन्हें लगा कि 'जिंदगी ने अलविदा कह दिया ।' राम गोपाल जी की आँखें लबलबा उठी । उन्होंने बैठकर अपने घर की देहरी को चूमा और एम्बुलेंस में जाकर बैठ गये । उनकी पत्नी ने तुरंत पानी से भरी बाल्टी घर की उस देहरी पर उलेड दी, जिसको राम गोपाल चूमकर एम्बुलेंस में बैठे थे। इसे तिरस्कार कहो या मजबूरी, लेकिन ये दृश्य देखकर कुत्ता भी रो पड़ा और उसी एम्बुलेंस के पीछे - पीछे हो लिया, जो राम गोपाल जी को अस्पताल लेकर जा रही थी। राम गोपाल जी अस्पताल में 14 दिनों के अब्ज़र्वेशन पीरियड में रहे । उनकी सभी जाँच सामान्य थी । उन्हें पूर्णतः स्वस्थ घोषित करके छुट्टी दे दी गयी । जब वह अस्पताल से बाहर निकले तो उनको अस्पताल के गेट पर उनका कुत्ता मार्शल बैठा दिखाई दिया । दोनों एक दूसरे से लिपट गये । एक की आँखों से गंगा तो एक की आँखों से यमुना बहे जा रही थी । जब तक उनके बेटों की लम्बी गाड़ी उन्हें लेने पहुँचती, तब तक वो अपने कुत्ते को लेकर किसी दूसरी दिशा की ओर निकल चुके थे । उसके बाद वो कभी दिखाई नहीं दिये । आज उनके फोटो के साथ उनकी गुमशुदगी की खबर छपी है l *अखबार में लिखा है कि सूचना देने वाले को 40 हजार का ईनाम दिया जायेगा ।* 40 हजार - हाँ पढ़कर ध्यान आया कि इतनी ही तो मासिक पेंशन आती थी उनकी, जिसको वो परिवार के ऊपर हँसते गाते उड़ा दिया करते थे। एक बार रामगोपाल जी के जगह पर स्वयं को खड़ा करो l कल्पना करो कि इस कहानी में किरदार आप हो । आपका सारा अहंकार और सब मोहमाया खत्म हो जाएगा। इसलिए मैं आप सभी से निवेदन करता हूं कि कुछ पुण्य कर्म कर लिया कीजिए l जीवन में कुछ नहीं है l कोई अपना नहीं है l *जब तक स्वार्थ है, तभी तक आपके सब हैं।* जीवन एक सफ़र है, मौत उसकी मंजिल है l मोक्ष का द्वार कर्म है। यही सत्य है। सत्य यही है।। 👏👏👏👏👏

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BACCHAN SINGH Apr 24, 2020

*दो ऐसी सत्य कथाऐं जिनको पढ़ने के बाद शायद आप भी अपनी ज़िंदगी जीने का अंदाज़ बदलना चाहें:-* *पहली* दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बनने के बाद ऐक बार नेल्सन मांडेला अपने सुरक्षा कर्मियों के साथ एक रेस्तरां में खाना खाने गए। सबने अपनी अपनी पसंद का खाना आर्डर किया और खाना आने का इंतजार करने लगे। उसी समय मांडेला की सीट के सामने वाली सीट पर एक व्यक्ति अपने खाने का इंतजार कर रहा था। मांडेला ने अपने सुरक्षा कर्मी से कहा कि उसे भी अपनी टेबल पर बुला लो। ऐसा ही हुआ। खाना आने के बाद सभी खाने लगे, *वो आदमी भी अपना खाना खाने लगा, पर उसके हाथ खाते हुए कांप रहे थे।* खाना खत्म कर वो आदमी सिर झुका कर रेस्तरां से बाहर निकल गया। उस आदमी के जाने के बाद मंडेला के सुरक्षा अधिकारी ने मंडेला से कहा कि वो व्यक्ति शायद बहुत बीमार था, खाते वख़्त उसके हाथ लगातार कांप रहे थे और वह ख़ुद भी कांप रहा था। मांडेला ने कहा नहीं ऐसा नहीं है। *वह उस जेल का जेलर था, जिसमें मुझे कैद रखा गया था। जब कभी मुझे यातनाएं दी जाती थीं और मै कराहते हुए पानी मांगता था तो ये मेरे ऊपर पेशाब करता था।* मांडेला ने कहा *मै अब राष्ट्रपति बन गया हूं, उसने समझा कि मै भी उसके साथ शायद वैसा ही व्यवहार करूंगा। पर मेरा चरित्र ऐसा नहीं है। मुझे लगता है बदले की भावना से काम करना विनाश की ओर ले जाता है। वहीं धैर्य और सहिष्णुता की मानसिकता हमें विकास की ओर ले जाती है।* *दूसरी* मुंबई से बैंगलुरू जा रही ट्रेन में सफ़र के दौरान टीसी ने सीट के नीचे छिपी लगभग तेरह/चौदह साल की ऐक लड़की से कहा टीसी "टिकट कहाँ है?" काँपती हुई लडकी "नहीं है साहब।" टी सी "तो गाड़ी से उतरो।" *इसका टिकट मैं दे रही हूँ।............पीछे से ऐक सह यात्री ऊषा भट्टाचार्य की आवाज आई जो पेशे से प्रोफेसर थी ।* ऊषा जी - "तुम्हें कहाँ जाना है ?" लड़की - "पता नहीं मैम!" ऊषा जी - "तब मेरे साथ चलो, बैंगलोर तक!" ऊषा जी - "तुम्हारा नाम क्या है?" लड़की - "चित्रा" बैंगलुरू पहुँच कर ऊषाजी ने चित्रा को अपनी जान पहचान की ऐक स्वंयसेवी संस्था को सौंप दिया और ऐक अच्छे स्कूल में भी एडमीशन करवा दिया। जल्द ही ऊषा जी का ट्रांसफर दिल्ली हो गया जिसके कारण चित्रा से संपर्क टूट गया, कभी-कभार केवल फोन पर बात हो जाया करती थी। करीब बीस साल बाद ऊषाजी को एक लेक्चर के लिए सेन फ्रांसिस्को (अमरीका) बुलाया गया । लेक्चर के बाद जब वह होटल का बिल देने रिसेप्सन पर गईं तो पता चला पीछे खड़े एक खूबसूरत दंपत्ति ने बिल चुका दिया था। ऊषाजी "तुमने मेरा बिल क्यों भरा?" *मैम, यह मुम्बई से बैंगलुरू तक के रेल टिकट के सामने कुछ भी नहीं है ।* ऊषाजी "अरे चित्रा!" ... चित्रा और कोई नहीं बल्कि *इंफोसिस फाउंडेशन की चेयरमैन सुधा मुर्ति थीं जो इंफोसिस के संस्थापक श्री नारायण मूर्ति की पत्नी हैं।* यह लघु कथा उन्ही की लिखी पुस्तक "द डे आई स्टाॅप्ड ड्रिंकिंग मिल्क" से ली गई है। *कभी कभी आपके द्वारा की गई किसी की सहायता, किसी का जीवन बदल सकती है।* *यदि जीवन में कुछ कमाना है तो पुण्य अर्जित कीजिये, क्योंकि यही वो मार्ग है जो स्वर्ग तक जाता है....* *सदैव प्रसन्न रहिये!!* *जो प्राप्त है-पर्याप्त है!!* 🙏

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BACCHAN SINGH Apr 23, 2020

कृष्ण जी के बारे में जाने ,,,, भगवान् श्री कृष्ण को अलग अलग स्थानों में अलग अलग नामो से जाना जाता है। * उत्तर प्रदेश में कृष्ण या गोपाल गोविन्द इत्यादि नामो से जानते है। * राजस्थान में श्रीनाथजी या ठाकुरजी के नाम से जानते है। * महाराष्ट्र में बिट्ठल के नाम से भगवान् जाने जाते है। * उड़ीसा में जगन्नाथ के नाम से जाने जाते है। * बंगाल में गोपालजी के नाम से जाने जाते है। * दक्षिण भारत में वेंकटेश या गोविंदा के नाम से जाने जाते है। * गुजरात में द्वारिकाधीश के नाम से जाने जाते है। * असम ,त्रिपुरा,नेपाल इत्यादि पूर्वोत्तर क्षेत्रो में कृष्ण नाम से ही पूजा होती है। * मलेशिया, इंडोनेशिया, अमेरिका, इंग्लैंड, फ़्रांस इत्यादि देशो में कृष्ण नाम ही विख्यात है। * गोविन्द या गोपाल में "गो" शब्द का अर्थ गाय एवं इन्द्रियों , दोनों से है। गो एक संस्कृत शब्द है और ऋग्वेद में गो का अर्थ होता है मनुष्य की इंद्रिया...जो इन्द्रियों का विजेता हो जिसके वश में इंद्रिया हो वही गोविंद है गोपाल है। * श्री कृष्ण के पिता का नाम वसुदेव था इसलिए इन्हें आजीवन "वासुदेव" के नाम से जाना गया। श्री कृष्ण के दादा का नाम शूरसेन था.. * श्री कृष्ण का जन्म उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद के राजा कंस की जेल में हुआ था। * श्री कृष्ण के भाई बलराम थे लेकिन उद्धव और अंगिरस उनके चचेरे भाई थे, अंगिरस ने बाद में तपस्या की थी और जैन धर्म के तीर्थंकर नेमिनाथ के नाम से विख्यात हुए थे। * श्री कृष्ण ने 16000 राजकुमारियों को असम के राजा नरकासुर की कारागार से मुक्त कराया था और उन राजकुमारियों को आत्महत्या से रोकने के लिए मजबूरी में उनके सम्मान हेतु उनसे विवाह किया था। क्योंकि उस युग में हरण की हुयी स्त्री अछूत समझी जाती थी और समाज उन स्त्रियों को अपनाता नहीं था।। * श्री कृष्ण की मूल पटरानी एक ही थी जिनका नाम रुक्मणी था जो महाराष्ट्र के विदर्भ राज्य के राजा रुक्मी की बहन थी।। रुक्मी शिशुपाल का मित्र था और श्री कृष्ण का शत्रु । * दुर्योधन श्री कृष्ण का समधी था और उसकी बेटी लक्ष्मणा का विवाह श्री कृष्ण के पुत्र साम्ब के साथ हुआ था। * श्री कृष्ण के धनुष का नाम सारंग था। शंख का नाम पाञ्चजन्य था। चक्र का नाम सुदर्शन था। उनकी प्रेमिका का नाम राधारानी था जो बरसाना के सरपंच वृषभानु की बेटी थी। श्री कृष्ण राधारानी से निष्काम और निश्वार्थ प्रेम करते थे। राधारानी श्री कृष्ण से उम्र में बहुत बड़ी थी। लगभग 6 साल से भी ज्यादा का अंतर था। श्री कृष्ण ने 14 वर्ष की उम्र में वृंदावन छोड़ दिया था।। और उसके बाद वो राधा से कभी नहीं मिले। * श्री कृष्ण विद्या अर्जित करने हेतु मथुरा से उज्जैन मध्य प्रदेश आये थे। और यहाँ उन्होंने उच्च कोटि के ब्राह्मण महर्षि सान्दीपनि से अलौकिक विद्याओ का ज्ञान अर्जित किया था।। * श्री कृष्ण की कुल 125 वर्ष धरती पर रहे । उनके शरीर का रंग गहरा काला था और उनके शरीर से 24 घंटे पवित्र अष्टगंध महकता था। उनके वस्त्र रेशम के पीले रंग के होते थे और मस्तक पर मोरमुकुट शोभा देता था। उनके सारथि का नाम दारुक था और उनके रथ में चार घोड़े जुते होते थे। उनकी दोनो आँखों में प्रचंड सम्मोहन था। * श्री कृष्ण के कुलगुरु महर्षि शांडिल्य थे। * श्री कृष्ण का नामकरण महर्षि गर्ग ने किया था। * श्री कृष्ण के बड़े पोते का नाम अनिरुद्ध था जिसके लिए श्री कृष्ण ने बाणासुर और भगवान् शिव से युद्ध करके उन्हें पराजित किया था। * श्री कृष्ण ने गुजरात के समुद्र के बीचो बीच द्वारिका नाम की राजधानी बसाई थी। द्वारिका पूरी सोने की थी और उसका निर्माण देवशिल्पी विश्वकर्मा ने किया था। * श्री कृष्ण को ज़रा नाम के शिकारी का बाण उनके पैर के अंगूठे मे लगा वो शिकारी पूर्व जन्म का बाली था,बाण लगने के पश्चात भगवान स्वलोक धाम को गमन कर गए। * श्री कृष्ण ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र में अर्जुन को पवित्र गीता का ज्ञान रविवार शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन मात्र 45 मिनट में दे दिया था। * श्री कृष्ण ने सिर्फ एक बार बाल्यावस्था में नदी में नग्न स्नान कर रही स्त्रियों के वस्त्र चुराए थे और उन्हें अगली बार यु खुले में नग्न स्नान न करने की नसीहत दी थी। * श्री कृष्ण के अनुसार गौ हत्या करने वाला असुर है और उसको जीने का कोई अधिकार नहीं। * श्री कृष्ण अवतार नहीं थे बल्कि अवतारी थे....जिसका अर्थ होता है "पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान्" न ही उनका जन्म साधारण मनुष्य की तरह हुआ था और न ही उनकी मृत्यु हुयी थी। सर्वान् धर्मान परित्यजम मामेकं शरणम् व्रज अहम् त्वम् सर्व पापेभ्यो मोक्षस्यामी मा शुच-- ( भगवद् गीता अध्याय 18 ) श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव ...👏🏼

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