Babita Sharma May 10, 2019

पहले माँ की पूजा, सबकुछ उसके बाद आपके साथ सदा रहे, माँ का आशीर्वाद। शुभ दिवस की मंगलकामना जय माता दी🙏🚩🚩 जानिए शुभ कार्यों में पंच यानी 5 का महत्त्व: भारतीय संस्कृति में 5 की संख्या शुभ मानी गई है। 🙏पंचदेव : सूर्य, गणेश, शिव, शक्ति और विष्णु ये पंचदेव कहलाते हैं। सूर्य की दो परिक्रमा, गणेश की एक परिक्रमा, शक्ति की तीन, विष्णु की चार तथा शिव की आधी परिक्रमा की जाती है। 🙏पंच उपचार पूजा : गंध, पुष्प, धूप, दीप और नेवैद्य अर्पित करना पंच उपचार पूजा कहलाती है। 🙏पंच पल्लव : पीपल, गूलर, अशोक, आम और वट के पत्ते सामूहिक रूप से पंच पल्लव के नाम से जाने जाते हैं। 🙏पंच पुष्प : चमेली, गुलाब, शमी (खेजड़ा), पद्म (कमल) और कनेर के पुष्प सामूहिक रूप से पंच पुष्प के नाम से जाने जाते हैं। 🙏पंच गव्य : भूरी गाय का मूत्र (8 भाग), लाल गाय का गोबर (16 भाग), सफेद गाय का दूध (12 भाग), काली गाय का दही (10 भाग), दो रंग की गाय का घी (8 भाग) का मिश्रण पंचगव्य के नाम से जाना जाता है। 🙏पंच गंध : चूर्ण किया हुआ, घिसा हुआ, दाह से खींचा हुआ, रस से मथा हुआ, प्राणी के अंग से पैदा हुआ ये पंच गंध है। 🙏पंचामृत : दूध, दही, घी, चीनी (शक्कर), शहद का मिश्रण पंचामृत के नाम से जाना जाता है। 🙏पंचांग : जिस पुस्तक या ता‍लिका में तिथि, वार, नक्षत्र, करण और योग को सम्मिलित रूप से दर्शाया जाता है उसे पंचांग कहते हैं। 🙏पंचमेवा : काजू, बादाम, किशमिश, छुआरा, खोपरा पंचमेवा के नाम से जाने जाते हैं। मां भवानी सदा सबका कल्याण करें 🚩🚩जय माता दी 🙏

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Babita Sharma May 9, 2019

*माँगी हुई ख़ुशियों से....किसका भला होता है.....!!* *मिलता वो ही है.... जो हमने बोया होता है.....!!* * सुप्रभात हरि ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🌹🌹🙏 कर्मों का फल🙏🙏 एक बार कृष्ण और अर्जुन ब्रह्मांड के भ्रमण पर निकले और ब्रह्मांड के लोगो के कार्यकलापों को देख रहे थे | तभी उनकी नज़र एक हलवाई की दुकान पर पड़ी हलवाई ने पुराना बासी खाना दुकान के पास में इक्कट्ठा कर रखा था | उस खाने के ढेर को देख एक कुत्ता बार- बार उसे खाने आता लेकिन हलवाई उसे पत्थर मार के भगा देता कुत्ता जोर-जोर से रोता और फिर खाने आता उसे फिर हलवाई भगा देता| यह देख कर अर्जुन को दुःख हो रहा था लेकिन कृष्ण हँस रहे थे | तब अर्जुन ने आश्चर्य से उनके हँसने का कारण पूछा | तब कृष्ण ने कहा – अर्जुन ! यह दुकान एक नामी हलवाई की थी | उसने अपने इस काम से बहुत धन कमाया था पर उसका नौकर चाकर और नाते रिश्तेदारों से बहुत गंदा बर्ताव था | वो सभी की बहुत बेज्जती करता था | ये कुत्ता वही नामी हलवाई हैं और इस दुकान का वर्तमान मालिक उसी का बेटा हैं जो अपने ही पिता को पत्थर मार रहा हैं | ये जो भी इस कुत्ते के साथ हो रहा है ये उसके पिछले जन्मों का फल है | इन्सान को अपने कर्मों पर विशेष ध्यान देना चाहिए वो हर जन्म में अपने कर्मों का भोग करता ही हैं | कहावत हैं “जो जैसा बोता हैं वैसा ही काटता हैं” इंसान अपने कर्म से बड़ा नहीं होता जब तक उसकी खुद पर विजय नहीं होती वो कभी बड़ा नहीं बन सकता | पूजा,धर्मिक आडम्बर व्यर्थ हैं इंसानी धर्म, सात्विक कर्म और मीठे वचन ही जीवन का आधार हैं।तभी तो कहते हैं कर भला हो भला🙏🌿🌺🌿 हरि ॐ 🙏

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Babita Sharma May 7, 2019

अक्षय तृतीया एवं परशुराम जन्मोत्सव के पावन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएं🙏🙏 मां लक्ष्मी की कृपा सभी पर बनी रहे। आपके जीवन में सुख समृद्धि एवं स्वास्थ्य का अक्षय वास हो। जय श्री राधे कृष्णा 🌺🌱🌺🙏 अक्षय तृतीया के दिन मां रेणुका के गर्भ से विष्णुजी के अवतार भगवान परशुराम अवतरित हुए थे। चूंकि वह चिरंजीवी हैं इसलिए इस तिथि को चिरंजीवी तिथि भी कहा जाता है। अक्षय तृतीया पर कई उपाय आजमाए जाते हैं। 5 सटीक उपाय, जो हर संकट से बचाएं...... 🌹अक्षय तृतीया के दिन सोने चांदी की चीजें खरीदी जाती हैं। इससे बरकत आती है। अगर आप भी बरकत चाहते हैं इस दिन सोने या चांदी के लक्ष्मी की चरण पादुका लाकर घर में रखें और इसकी नियमित पूजा करें। क्योंकि जहां लक्ष्मी के चरण पड़ते हैं वहां अभाव नहीं रहता है। 🌹अक्षय तृतीया के दिन 11 कौड़ियों को लाल कपडे में बांधकर पूजा स्थान में रखे इसमें देवी लक्ष्मी को आकर्षित करने की क्षमता होती है। इनका प्रयोग तंत्र मंत्र में भी होता है। देवी लक्ष्मी के समान ही कौड़ियां समुद्र से उत्पन्न हुई हैं। 🌹 अक्षय तृतीया के दिन केसर और हल्दी से देवी लक्ष्मी की पूजा करने से आर्थिक परेशानियों में लाभ मिलता है। 🌹अक्षय तृतीया के दिन घर में पूजा स्थान में एकाक्षी नारियल स्थापित करने से देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। 🌹 इस दिन स्वर्गीय आत्माओं की प्रसन्नता के लिए जल कलश, पंखा, खड़ाऊं, छाता, सत्तू, ककड़ी, खरबूजा आदि फल, शक्कर, घी आदि ब्राह्मण को दान करने चाहिए इससे पितरों की कृपा प्राप्त होती है। 🌹इस दिन गौ, भूमि, तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, धान्य, गुड़, चांदी, नमक, शहद और कन्या यह बारह दान का महत्व है। जो भी भूखा हो वह अन्न दान का पात्र है। जो जिस वस्तु की इच्छा रखता है यदि वह वस्तु उसे बिना मांगे दे दी जाए तो दाता को पूरा फल मिलता है। सेवक को दिया दान एक चौथाई फल देता है। कन्या दान इन सभी दानों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है इसीलिए इस दिन कन्या का विवाह किया जाता है। 🌹अक्षय तृतीया पर दान देने वाला स्वर्ग लोक को प्राप्त होता है। इस तिथि को जो व्रत करता है वह ऋद्धि, वृद्धि एवं श्री से संपन्न होता है। इस दिन किए गए कर्म अक्षय हो जाते हैं। अत: इस दिन शुभ कर्म ही करने चाहिए। जय श्री राधे कृष्णा 🙏🌺🌿

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Babita Sharma May 5, 2019

*जय श्री राधे....*💐💐🙏 *७ मई २०१९ दिन मंगलवार* बहुत ही सुंदर और पावन दिन *" अक्षय तृतीया "* जिसको आखा तीज भी बोलते है। इस दिन वृन्दावन के लाड़ले ओर श्री स्वामी हरिदास जी महाराज के लाड़ले हम सब के प्यारे *श्री बाँके बिहारी लाल जी* के चरण दर्शन होते है। *श्री बाँके बिहारी जी* लाल के चरणों के दर्शन साल में सिर्फ एक बार ही होते है अन्यथा वो पोशाक में छिपे रहते है। इस दिन *श्री बाँके बिहारी जी* को पाजेब भी पहनाई जाती है कहा जाता है जिनकी शादी में रुकावटें आती हो वो *अक्षय तृतीया* को *बिहारी जी* को पाजेब भेंट कर दे तो उनका वर जल्दी मिल जाता है। इस दिन अधिक गर्मी होने के कारण *श्री बाँके बिहारी जी* को चंदन का लेप भी किया जाता है जिससे उनको गर्मी से राहत मिल सके। *अक्षय तृतीया* के दिन *श्री बाँके बिहारी जी* पीले वस्त्रों में अपने भक्तों को फूल बंगले में विराजकर दर्शन देंगे। *अक्षय तृतीया* को जौ के आटे का सत्तू ,चने के आटे का सत्तू , गेंहू के आटे का सत्तू, और भी अनेक प्रकार के सत्तू का शर्बत बनाकर ठाकुरजी को भोग लगता है परन्तु अब बड़े बड़े शहर होते जा रहे हैं तो वहाँ सत्तू नही मिल पाता तो उसकी जगह आप मीठे शर्बत का प्रसाद भी लगा सकते है. सभी अपने *लड्डू गोपाल*, जुगल जोड़ी आदि का सुंदर श्रृंगार कर चंदन का लेप जरूर लगाएं और *ठाकुर जी* को पायल भी पहनाएं ओर शर्बत का भोग लगाएं....🙏🏼 बिहारी जी के चरण दर्शन की अद्भुत कथा: बांके बिहारी जी साक्षात राधा और कृष्‍ण का सम्मिलित रूप हैं। स्‍वामी हरिदासजी ने इन्‍हें अपनी भक्ति और साधना से प्रकट किया था। बड़ा ही अद्भुत रूप है बांके बिहारी जी का। एक बार वृंदावन में एक संत अक्षय तृतीया के दिन बांके बिहारी जी के चरणों का दर्शन करते हुए श्रृद्धा भाव से गुनगुना रहे थे- ‘श्री बांके बिहारी जी के चरण कमल में नयन हमारे अटके’। एक व्‍यक्ति वहीं पर खड़ा होकर यह गीत सुन रहा था। उसे प्रभु की भक्ति का यह भाव बहुत पसंद आया। दर्शन करके वह भी गुनगुनाते हुए अपने घर की ओर बढ़ गया। भक्ति भाव में लीन इस व्‍यक्ति की गाते-गाते कब जुबान पलट गई, वह जान ही नहीं पाया और वह उल्‍टा गाने लगा- बांके बिहारी जी के नयन कमल में चरण हमारे अटके। उसके भक्तिभाव से प्रसन्‍न होकर बांके बिहारी प्रकट हो गए। प्रभु ने मुस्‍कुराते हुए उससे कहा, अरे भाई मेरे एक से बढ़कर एक भक्‍त हैं, परंतु तुझ जैसा निराला भक्‍त मुझे कभी नहीं मिला। लोगों के नयन तो हमारे चरणों में अटक जाते हैं परंतु तुमने तो हमारे ही नयन अपने चरणों में अटका दिए। प्रभु की बातों को वह समझ नहीं पा रहा था, क्‍योंकि वह प्रभु के निस्‍वार्थ प्रेम भक्ति में डूबा था। मगर फिर उसे समझ आया कि प्रभु तो केवल भाव के भूखे हैं। फिर उसे लगा कि अगर उससे कोई गलती हुई होती तो भगवान उसे दर्शन देने न आते। प्रभु के अदृश्‍य होने के बाद वह खूब रोया और प्रभु के दर्शन पाकर अपने जीवन को सफल समझने लगा। ऐसी ही है प्रभु की लीला। *जय श्री कृष्ण....*🌸💐👏🏼 .

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