Babita Sharma May 14, 2020

शुभ प्रभात वंदन 🙏🙏 जय बोलो मधुसूदन की सब,जय बोलो गिरधारी की|जय बोलो सब मीत मिताई,जय बोलो बनवारी की| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय🙏🌹🌹🌺🌺🌹🌹🌺 यदि किसी से पूछा जाए" प्रसिद्ध आरती, *'ओम जय जगदीश हरे'* के रचयिता कौन हैं ? " इसके उत्तर में किसी ने कहा, ये आरती तो पौराणिक काल से गाई जाती है। किसी ने इस आरती को वेदों का एक भाग बताया। और एक ने तो ये भी कहा कि, सम्भवत: इसके रचयिता अभिनेता-निर्माता-निर्देशक मनोज कुमार हैं! "ॐ जय जगदीश हरे " आरती आज हर हिन्दू घर में गाई जाती है। इस आरती की तर्ज पर अन्य देवी देवताओं की आरतियाँ बन चुकी हैं और गाई जाती हैं। परंतु इस मूल आरती के रचयिता के बारे में काफी कम लोगों को पता है। *इस आरती के रचयिता थे पं. श्रद्धाराम शर्मा या श्रद्धाराम फिल्लौरी।* *पं. श्रद्धाराम शर्मा* का जन्म *पंजाब* के जिले जालंधर में स्थित *फिल्लौर नगर* में हुआ था। वे सनातन धर्म प्रचारक, ज्योतिषी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, संगीतज्ञ तथा हिन्दी और पंजाबी के प्रसिद्ध साहित्यकार थे। उनका विवाह सिख महिला *महताब कौर* के साथ हुआ था। बचपन से ही उन्हें ज्योतिष और साहित्य के विषय में उनकी गहरी रूचि थी। उन्होनें वैसे तो किसी प्रकार की शिक्षा हासिल नहीं की थी परंतु उन्होंने सात साल की उम्र तक गुरुमुखी में पढ़ाई की और दस साल की उम्र तक वे *संस्कृत, हिन्दी, फ़ारसी भाषाओं तथा ज्योतिष* की विधा में पारंगत हो चुके थे। उन्होने पंजाबी (गुरूमुखी) में *'सिक्खां दे राज दी विथियाँ' और 'पंजाबी बातचीत'* जैसी पुस्तकें लिखीं। *'सिक्खां दे राज दी विथियाँ'* उनकी पहली किताब थी। इस किताब में उन्होनें सिख धर्म की स्थापना और इसकी नीतियों के बारे में बहुत सारगर्भित रूप से बताया था। यह पुस्तक लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय साबित हुई थी और अंग्रेज सरकार ने तब होने वाली *आई.सी.एस* (जिसका भारतीय नाम अब *आई.ए.एस* हो गया है) परीक्षा के कोर्स में इस पुस्तक को शामिल किया था। *पं. श्रद्धाराम शर्मा गुरूमुखी और पंजाबी* के अच्छे जानकार थे और उन्होनें अपनी पहली पुस्तक गुरूमुखी मे ही लिखी थी परंतु वे मानते थे कि हिन्दी के माध्यम से ही अपनी बात को अधिकाधिक लोगों तक पहुँचाया जा सकता है। वैसे *पं. श्रद्धाराम शर्मा धार्मिक कथाओं और आख्यानों* के लिए काफी प्रसिद्ध थे. वे महाभारत का उध्दरण देते हुए अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ जनजागरण का ऐसा वातावरण तैयार कर देते थे उनका आख्यान सुनकर प्रत्येक व्यक्ति के भीतर देशभक्ति की भावना भर जाती। *इससे अंग्रेज सरकार की नींद उड़ने लगी और उसने 1865 में पं. श्रद्धाराम को फुल्लौरी* से निष्कासित कर दिया और आसपास के गाँवों तक में उनके प्रवेश पर पाबंदी लगा दी। लेकिन उनके द्वारा लिखी गई किताबों का पठन विद्यालयों में हो रहा था और वह जारी रहा। निष्कासन का उन पर कोई असर नहीं हुआ, बल्कि उनकी लोकप्रियता और बढ गई। निष्कासन के दौरान उन्होनें कई पुस्तकें लिखीं और लोगों के सम्पर्क में रहे। *पं. श्रद्धाराम* ने अपने व्याख्यानों से लोगों में अंग्रेज सरकार के खिलाफ क्रांति की मशाल ही नहीं जलाई बल्कि साक्षरता के लिए भी ज़बर्दस्त काम किया। *1870 में उन्होंने एक ऐसी आरती लिखी* जो भविष्य में घर घर में गाई जानी थी। वह आरती थी-ॐ जय जगदीश हरे... पं. शर्मा जहाँ कहीं व्याख्यान देने जाते *ॐ जय जगदीश हरे* की आरती गाकर सुनाते। उनकी यह आरती लोगों के बीच लोकप्रिय होने लगी और फिर तो आज कई पीढियाँ गुजर जाने के बाद भी यह आरती गाई जाती है और कालजयी हो गई है। इस आरती का उपयोग प्रसिद्ध निर्माता निर्देशक मनोज कुमार ने अपनी एक फिल्म 'पूरब और पश्चिम' में किया था और इसलिए कई लोग इस आरती के साथ मनोज कुमार का नाम जोड़ देते हैं। पं. शर्मा सदैव प्रचार और आत्म प्रशंसा से दूर रहे थे। शायद यह भी एक वजह हो कि उनकी रचनाओं को चाव से पढ़ने वाले लोग भी उनके जीवन और उनके कार्यों से परिचित नहीं हैं। *24 जून 1881 को लाहौर* में पं. श्रद्धाराम शर्मा ने आखिरी सांस ली। ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे | भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे | ॐ जय जगदीश हरे ||🙏 जो ध्यावे फल पावे, दुःखबिन से मन का, स्वामी दुःखबिन से मन का | सुख सम्पति घर आवे, सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का | ॐ जय जगदीश हरे ||🙏 मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी, स्वामी शरण गहूं मैं किसकी | तुम बिन और न दूजा, प्रभु बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी | ॐ जय जगदीश हरे ||🙏 तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, स्वामी तुम अन्तर्यामी | पारब्रह्म परमेश्वर, पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी | ॐ जय जगदीश हरे ||🙏 तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता, स्वामी तुम पालनकर्ता | मैं मूरख फलकामी मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता | ॐ जय जगदीश हरे ||🙏 तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति | किस विधि मिलूं दयामय, किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति | ॐ जय जगदीश हरे ||🙏 दीन-बन्धु दुःख-हर्ता, ठाकुर तुम मेरे, स्वामी रक्षक तुम मेरे | अपने हाथ उठाओ, अपने शरण लगाओ द्वार पड़ा तेरे | ॐ जय जगदीश हरे ||🙏

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Babita Sharma May 12, 2020

" *सुबह की राम-राम*"🙏🌹 रिश्ते निभाने के लिए बुद्धि नही... दिल की शुद्धि होनी चाहिए.!! *किसी के अकेलेपन* *का मज़ाक मत* *बनाओ..!* *तुम्हारे साथ जो भीड़* *खड़ी है वो भी अधिकतर अपने* *मतलब से खड़ी है..!* *आपका दिन मंगलमय हो* 🙏 राम दूत अतुलित बल धामा अंजनी पुत्र पवन सुत नामा 🙏 पवनपुत्र हनुमानजी भगवान शिव के ग्यारहवें अवतार के रूप में सर्वत्र पूजनीय हैं. वे बल और बुद्धि के देवता हैं. कई हनुमान मंदिरों में उनकी मूर्ति को पर्वत उठाए तथा राक्षस का मान मर्दन करते हुए दिखाया जाता है, लेकिन प्रभु श्रीराम के मंदिरों में वे राम के चरणों में मस्तक झुकाए बैठे हैं. भगवान शिव भी प्रभु श्रीराम का स्मरण करते हैं इसलिए उनके अवतार हनुमान को भी राम नाम अधिक प्रिय है. कोई भी रामकथा हनुमानजी के बिना पूरी नहीं होती. एक प्रसंग के अनुसार- एक बार वे माता अंजनी को रामायण सुना रहे थे. उनकी कथा से प्रभावित होकर माता अंजनी ने उनसे पूछा- तुम इतने शक्तिशाली हो कि तुम पूंछ के एक वार से पूरी लंका को उड़ा सकते थे, रावण को मार सकते थे और मां सीता को छुड़ा कर ला सकते थे फिर तुमने ऐसा क्यों नहीं किया? अगर तुम ऐसा करते तो युद्ध में नष्ट हुआ समय बच जाता? इस पर हनुमानजी विनम्रता के साथ माता अंजनी को कहते हैं- क्योंकि प्रभु श्रीराम ने कभी मुझे ऐसा करने के लिए नहीं कहा था. मैं उतना ही करता हूं मां, जितना मुझे प्रभु श्रीराम कहते हैं और वे जानते हैं कि मुझे क्या करना है. इसलिए मैं अपनी मर्यादा का उल्लंघन नहीं करता और वही करता हूं जितना मुझे बताया गया है. प्रभु श्रीराम के प्रति उनके इस अगाध प्रेम और श्रद्धा के कारण ही हनुमानजी पूरे संसार में पूजे जाते हैं. यदि हनुमान भक्त को किसी भी प्रकार की परेशानी आये , ”हनुमान जयंती, मंगलवार तथा शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का सात बार पाठ करें, ”तो उनके कष्टों का निवारण होता है. जय सियाराम 🚩 जय श्री बालाजी महाराज 🙏🙏

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Babita Sharma May 11, 2020

शुभ प्रभात 🙏🙏ॐ नमः शिवाय 🔱 *मुस्कुराओ...😊* क्योंकि क्रोध में दिया गया *आशीर्वाद* भी बुरा लगता है, और मुस्कुराकर कहे गए *बुरे शब्द* भी अच्छे लगते हैं। *हंसते रहिए, हंसाते रहिए!* *जीवन में सदा मुस्कुराते रहिए!!* कण कण में भगवान हैं, पर हम जाते हार । प्रभु को ढूँढ़ा जब जहाँ, मौन मिले हर बार पुरी धाम सब तीर्थ में, किये रात दिन एक । हुई न अब तक प्रेरणा, हुआ न बेड़ा पार प्रभु उसको कैसे मिलें, तन माया में चूर । अंग-अंग है विष भरा, जिसका ना परिहार जब तक छोड़ेगा नहीं, अपना अहं मनुष्य । तब तक प्रभु के पास में, जाना है बेकार जो भजता है लीन हो, भूल जगत् के कष्ट । हो जाता वह एक दिन, प्रभु में एकाकार हर हर महादेव 🙏🔱🍃🍃🌻

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Babita Sharma May 10, 2020

मातृ देवो भव: मां एक ऐसा शब्द है,जिसे सिर्फ बोलने से ही ह्रदय में प्यार और खुशी की लहर आ जाती है।और ऐसे पावन दिवस पर हर मां को मेरा प्रणाम 🙋🙏🙏 आप सभी को मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🌹🌹💞🤱 *............."माँ".............* *माँ- दुःख में सुख का एहसास है,* *माँ - हरपल मेरे आस पास है* *माँ- घर की आत्मा है,* *माँ- साक्षात् परमात्मा है* *माँ- आरती, अज़ान है,* *माँ- गीता और कुरान है* *माँ- ठण्ड में गुनगुनी धूप है,* *माँ- उस रब का ही एक रूप है* *माँ- तपती धूप में साया है,* *माँ- आदि शक्ति महामाया है* *माँ- जीवन में प्रकाश है,* *माँ- निराशा में आस है* *माँ- महीनों में सावन है,* *माँ- गंगा सी पावन है* *माँ- वृक्षों में पीपल है,* *माँ- फलों में श्रीफल है* *माँ- देवियों में गायत्री है,* *माँ- मनुज देह में सावित्री है* *माँ- ईश् वंदना का गायन है,* *माँ- चलती फिरती रामायन है* *माँ- रत्नों की माला है,* *माँ- अँधेरे में उजाला है,* *माँ- बंदन और रोली है,* *माँ- रक्षासूत्र की मौली है* *माँ- ममता का प्याला है,* *माँ- शीत में दुशाला है* *माँ- गुड सी मीठी बोली है,* *माँ- ईद, दिवाली, होली है* *माँ- इस जहाँ में हमें लाई है,* *माँ- मेरी दुर्गा माई है,* *माँ- ब्रह्माण्ड के कण कण में समाई है* *माँ- ब्रह्माण्ड के कण कण में समाई है* *"अंत में मैं बस ये इक पुण्य का काम करता हूँ,* *दुनिया की हरेक माँ को दंडवत प्रणाम 🙏🙏*

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Babita Sharma May 9, 2020

ॐ रां रामाय नमः 🙏 ॐ हं हनुमंते नमः 🙏 शुभ दिवस की मंगलकामना सहित 🥀🥀 🌳🌳🌲🌴पर्यावरण पर एक पहल: बरगद एक लगाइये,पीपल रोपें पाँच। घर घर नीम लगाइये,यही पुरातन साँच।। यही पुरातन साँच,- आज सब मान रहे हैं। भाग जाय प्रदूषण सभी अब जान रहे हैं।। विश्व ताप मिट जाये होय हर जन मन गदगद। धरती पर त्रिदेव हैं- नीम पीपल औ बरगद।। *आप को लगेगा अजीब बकवास है किन्तु यह सत्य है.. .* *पिछले 68 सालों में पीपल, बरगद और नीम के पेडों को सरकारी स्तर पर लगाना बन्द किया गया है* *पीपल कार्बन डाई ऑक्साइड का 100% एब्जार्बर है, बरगद 80% और नीम 75 %* *अब सरकार ने इन पेड़ों से दूरी बना ली तथा इसके बदले विदेशी यूकेलिप्टस को लगाना शुरू कर दिया जो जमीन को जल विहीन कर देता है* *आज हर जगह यूकेलिप्टस, गुलमोहर और अन्य सजावटी पेड़ों ने ले ली है* *अब जब वायुमण्डल में रिफ्रेशर ही नही रहेगा तो गर्मी तो बढ़ेगी ही और जब गर्मी बढ़ेगी तो जल भाप बनकर उड़ेगा ही* *हर 500 मीटर की दूरी पर एक पीपल का पेड़ लगायें तो आने वाले कुछ साल भर बाद प्रदूषण मुक्त भारत होगा* *वैसे आपको एक और जानकारी दे दी जाए* पीपल के पत्ते का फलक अधिक और डंठल पतला होता है जिसकी वजह शांत मौसम में भी पत्ते हिलते रहते हैं और स्वच्छ ऑक्सीजन देते रहते हैं। वैसे भी पीपल को वृक्षों का राजा कहते है। इसकी वंदना में एक श्लोक देखिए- *मूलम् ब्रह्मा, त्वचा विष्णु,* *सखा शंकरमेवच।* *पत्रे-पत्रेका सर्वदेवानाम,* *वृक्षराज नमस्तुते।* 🙏🙏*अब करने योग्य कार्य* *इन जीवनदायी पेड़ों को ज्यादा से ज्यादा लगायें***🌲🍀🌳🌴🌿💐🌷 🙏🙏🌹💚🌱🎄🏡*

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Babita Sharma May 8, 2020

🚩*जय माता दी*🚩 🙏 *शुभ प्रभात नमन* 🙏 *आपका जीवन खुशियों से परिपूर्ण हो*🌹🌹 संतोषी सदा सुखी 🙏🙏🥀 पुराने समय में एक सेठ ने अपनी पूरी संपत्ति का पूरा मूल्यांकन किया तो उसे मालूम हुआ कि उसके पास इतना धन है, जिससे उसकी सात पीढ़ियों के पास सभी सुख-सुविधाएं रहेंगी। व्यापारी ने सोचा कि मेरी सिर्फ सात पीढ़ियां ही सुखी रहेंगी, आठवीं पीढ़ी दुखी रहेगी? उन्हें सुख कैसे मिलेगा? ये बातें सोचकर वह परेशान हो गया। तब वह क्षेत्र के प्रसिद्ध संत के पास पहुंचा। सेठ ने संत से कहा कि महाराज कृपया मेरी चिंता दूर करें। मेरे पास सिर्फ सात पीढ़ियों के लिए ही धन है। मेरी आठवीं पीढ़ी भी सुखी जीवन जी सके, इसके लिए मुझे क्या करना चाहिए, कृपया कोई उपाय बताएं। संत ने सेठ की बात ध्यान से सुनी और कहा कि गांव में एक वृद्ध महिला है, उसके घर में कमाने वाला कोई नहीं है। बड़ी मुश्किल से उसे रोज का खाना मिल पाता है। तुम एक काम करो, उस महिला को थोड़ा सा आटा दे दो। इस छोटे से दान से तुम्हारी चिंता दूर हो जाएगी। सेठ तुरंत ही अपने घर गया और वहां से उसने एक बोरी आटा लिया और महिला के घर पहुंचा। उसने वृद्ध महिला से कहा कि मैं आपके लिए एक बोरी आटा लाया हूं। कृपया इसे ग्रहण करें। महिला बोली कि मेरे पास आज के लिए पर्याप्त आटा है, इसीलिए मुझे ये नहीं चाहिए। सेठ ने कहा कि इसे स्वीकार करें, इससे आपको कई दिनों तक खाने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। महिला बोली कि मैं इसे रखकर क्या करूंगी, मेरे लिए आज के खाने की व्यवस्था हो गई है। तब सेठ ने कहा कि ठीक है ज्यादा मत रखो, थोड़ा ही ले लो कल काम आ जाएगा। महिला बोली कि मैं कल की चिंता नहीं करती, जैसे आज खाना मिला है, कल भी मिल जाएगा। भगवान की कृपा से मेरा का भरण-पोषण रोज हो जाता है। ये बातें सुनकर सेठ समझ गया कि महिला के पास कल के लिए भोजन की व्यवस्था नहीं है, लेकिन ये कल की चिंता नहीं करती है। मेरे पास तो अपार धन-संपत्ति है, फिर भी मैं बिना वजह चिंतित हो रहा हूं। मेरी ये चिंता व्यर्थ है। सेठ ने भविष्य की चिंता करना छोड़ दिया और वह सुख-शांति से रहने लगा। कथा की सीख: भविष्य में क्या होगा, ये बात सोचकर वर्तमान को खराब नहीं करना चाहिए। आज परेशानियों का सामना करके भविष्य के लिए धन बचाने का कोई लाभ नहीं है। हमें वर्तमान को अच्छी तरह जीना चाहिए। आज धर्म के अनुसार काम करेंगे तो भविष्य में भी अच्छा ही फल मिलेगा। जय माता दी 🚩

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Babita Sharma May 7, 2020

बुद्ध पूर्णिमा के शुभ अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान बुद्ध के विचार व उनकी शिक्षा सदैव हमको प्रेरित करती रहे। 🙏🌹बुद्धं शरणं गच्छामि 🙏🌹 मन की शांति कहीं बाहर नहीं मिलेगी,वो तो आपके अंदर ही है,बस उसे जानने और समझने की जरूरत है......नमो बुद्धाय 🙏वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन बुद्ध का जन्म हुआ था और इसी‍ दिन उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था तथा इसी दिन उन्होंने देह छोड़ ‍दी थी अर्थात निर्वाण प्राप्त किया था इसलिए उक्त पूर्णिमा के दिन बुद्ध जयंती और निर्वाण दिवस मनाया जाता है। इसके अलावा आषाढ़ की पूर्णिमा का दिन भी बौद्धों का प्रमुख त्योहार होता है। 🙏शोध बताते हैं कि दुनिया में सर्वाधिक प्रवचन बुद्ध के ही रहे हैं। यह रिकॉर्ड है कि बुद्ध ने जितना कहा और जितना समझाया उतना किसी और ने नहीं। धरती पर अभी तक ऐसा कोई नहीं हुआ जो बुद्ध के बराबर कह गया। सैकड़ों ग्रंथ है जो उनके प्रवचनों से भरे पड़े हैं और आश्चर्य कि उनमें कहीं भी दोहराव नहीं है। कहते हैं कि एक बार बुद्ध को मारने के लिए एक पागल हाथी छोड़ा गया था लेकिन वह हाथी बुद्ध के पास आकर उनके चरणों में बैठ गया था। यह भी कहा जाता है कि एक बार उन्होंने एक नदी पर पैदल चलकर उसे पार किया था। इस तरह से उनके कई चमत्कारों के बारे में जानकारी मिलती है। 🙏गौतमबुद्ध के अंतिम वचन : कहते हैं कि भगवान बुद्ध ने एक वृक्ष के नीचे लेटकर अपने शिष्यों से पूछा कि अंतिम बार कुछ पूछना चाहते हो तो पूछें। अंत में भगवान बुद्ध ने कहा, 'हे भिक्षुओं, इस समय आज तुमसे इतना ही कहता हूं कि जितने भी संस्कार हैं, सब नाश होने वाले हैं, प्रमाद रहित हो कर अपना कल्याण करो। अप्प दीपो भव:। 'मेरा जन्म दो शाल वृक्षों के मध्य हुआ था, अत: अन्त भी दो शाल वृक्षों के बीच में ही होगा। अब मेरा अंतिम समय आ गया है।' आनंद को बहुत दु:ख हुआ। वे रोने लगे। बुद्ध को पता लगा तो उन्होंने उन्हें बुलवाया और कहा, 'मैंने तुमसे पहले ही कहा था कि जो चीज उत्पन्न हुई है, वह मरती है। निर्वाण अनिवार्य और स्वाभाविक है। अत: रोते क्यों हो? बुद्ध ने आनंद से कहा कि मेरे मरने के बाद मुझे गुरु मानकर मत चलना। 🙏 अंतिम दर्शन : उनके मरने पर 6 दिनों तक लोग दर्शनों के लिए आते रहे। सातवें दिन शव को जलाया गया। फिर उनके अवशेषों पर मगध के राजा अजातशत्रु, कपिलवस्तु के शाक्यों और वैशाली के विच्छवियों आदि में भयंकर झगड़ा हुआ। जब झगड़ा शांत नहीं हुआ तो द्रोण नामक ब्राह्मण ने समझौता कराया कि अवशेष आठ भागों में बांट लिये जाएं। ऐसा ही हुआ। आठ स्तूप आठ राज्यों में बनाकर अवशेष रखे गये। बताया जाता है कि बाद में अशोक ने उन्हें निकलवा कर 84000 स्तूपों में बांट दिया था। 🙏पुन: जन्म लेंगे बुद्ध : भगवान बुद्ध ने भिक्षुओं के आग्रह पर उन्हें वचन दिया था कि मैं 'मैत्रेय' से पुन: जन्म लूंगा। तब से अब तक 2500 साल से अधिक समय बीत गया। कहते हैं कि बुद्ध ने इस बीच कई बार जन्म लेने का प्रयास किया लेकिन कुछ कारण ऐसे बने कि वे जन्म नहीं ले पाए। बुद्धं शरणं गच्छामि्🌻🌻🙏

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Babita Sharma May 6, 2020

*जब तक ज़िन्दगी पटरी पर चलती है ,* *तब सोचते हैं कि हम कुशल चालक हैं ,* *लेकिन जब पटरी से उतरती है,* *तो सच सामने आता है कि ज़िन्दगी* *कोई और ही चला रहा है ।* *इसलिए ईश्वर को न भूलें।* *सुप्रभात*🙏🏽ॐ गं गणपतए नमः 🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻 🙏दूरदर्षिता🙏 कोरोना की इस विपत्ति के समय एक साथ 3 महीने का राशन लेकर आए अपने पुत्र को उसके पिता ने कहा कि अपने पूर्वज कितनी दूरदर्शिता रखते थे ।हमको भी घर में वैसी ही दूरदर्शिता रखना चाहिए । वह लोग घर में 1 साल का गेहूं चावल और तेल के डिब्बे भर लेते थे ।इसी तरह से तुवर की दाल चने की दाल मूंग दाल आदि भी साल भर के रखते थे ।एक बार गेहूं चावल साल भर के आ जायें तो ऐसी विपत्ति में कोई डर ना रहे और भोजन व्यवस्था चलती रहे । हमारे इस विशाल देश में करोड़ों लोग मध्यमवर्गीय गरीब हैं अगर उनको ताजी सब्जी नहीं मिले तो आज वे बेहाल हो जाते हैं। हमारे पूर्वज घर में अचार रखते थे ।उससे बहुत आनन्द से भोजन हो जाता था। यह भी हमारी संस्कृति की एक विशेषता है। ऐसी विशेषता विदेशियों के पास नहीं है । अभी तो छोटे परिवार हैं परंतु पहले संयुक्त परिवार बड़े होते थे ,तो सारे साल चले इतना खट्टा तीखा मीठा कई प्रकार का अचार घर में रखा रहता था ।कुछ नहीं मिले तो आचार और रोटी पूरा भोजन होता था। इसी तरह दूध या छाछ हो तो उसके साथ भी रोटी का भोजन हो जाता था दूध पर मलाई निकाल करके रोटी पर चुपड़कर उस पर थोड़ी शक्कर डालकर रोल बनाकर चार पांच रोटी नाश्ते में खा लेते थे। ऐसे ही कटोरी में खाने का थोड़ा तेल नमक मिर्ची और शकर डाल कर के और थोड़ी हींग मिलाकर के जायका बनाते थे ,और उस जायके को रोटी के साथ बड़े प्रेम से खाते थे । इसी तरह रोटी के छोटे-छोटे टुकड़े करके उसमें गुड़ और घी मिला करके और लड्डू छोटे-छोटे बनते थे इनको बड़े प्रेम से खाया जाता था । ऐसी लॉक डाउन की विपत्ति के समय नई पीढ़ी को भी यह ध्यान रखना चाहिए कि अगर हमारे पास बाजार जाने की सुविधा ना हो तो हम घर पर किस प्रकार अपना भोजन की व्यवस्था कर सकें ,बिना बाहर निकले । हमारी संस्कृति ऐसी है कि हम अपनी जरूरतों को घर पर ही पूरा कर सकते हैं ।अमेरिका और पश्चिम देशों में ऐसी संस्कृति नहीं है ।आज जैसी लॉक डाउन की स्थिति में वह लोग पागल जैसे या मानसिक असंतुलन की स्थिति में पहुंच जाते हैं । अमेरिका और यूरोप में जितने लोगों की मृत्यु हो रही है उनमें 80% वृद्ध है ।इसका कारण भी यही है कि वहां वे लोग संयुक्त परिवार को नहीं जानते ।अकेले रहते हैं और इस कारण से मानसिक और शारीरिक रूप से अस्वस्थ रहते हैं । हमारे यहां पर संयुक्त परिवार में सारे परिवार के लोग अपने बुजुर्गों का ध्यान रखते हैं । कोरोनावायरस अपने शरीर की आंतरिक सिस्टम को हिला सकता है परंतु हमारी संस्कृति कोरोना के विरुद्ध ढाल बनकर हमारी रक्षा करती है।नई पीढ़ी को पुरानी पीढ़ी से इस प्रकार की बातों को सीखना चाहिए और पश्चिम की अंधी नकल नही करनी चाहिए । नमस्कार 🙏🙏 राधे राधे 🌺ॐ गं गणपतए नमः 🌺

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