Astro Guru Jul 18, 2019

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®* 🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚 🔅 आज का दिनाँक 18 जुलाई 2019 🔅 दिन - गुरुवार 🔅 विक्रम संवत - 2076 🔅 शक संवत - 1941 🔅 अयन - दक्षिणायण 🔅 ऋतु - वर्षा 🔅 मास - श्रावण 🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष 🔅 तिथि - द्वितीय 🔅 नक्षत्र - श्रवण 🔅 योग - प्रीति 🔅 दिशाशूल - दक्षिण दिशा मे 🔅 सूर्योदय - 05:56 मिनट 🔅 सूर्यास्त - 19:30 मिनट पर 🔅 चंद्रोदय - 20:47 मिनट +पर 🔅 चंद्रास्त - 06:54 मिनट पर 🔅 राहुकाल - 14:25 - 16:07 अशुभ 🔅 अभिजित -12:12 -13:00 शुभ 🔅 तिथिविशेष - श्रावण मास द्वितीय दिवस , ************************************************************ *🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱* *👉जैन धर्म में रात्रि भोजन पर क्यों है मनाही::----------------------* *💥जैन धर्म भारत वर्ष का प्राचीन धर्म है और यह धर्म अहिंसा प्रधान धर्म है। इस धर्म का सारा जोर हिंसा रोकने पर है। वह चाहे किसी भी रूप में, किसी भी तरह की हिंसा क्यों न हो। रात्रि भोजन के त्याग के पीछे अहिंसा और स्वास्थ्य दो प्रमुख कारण है। यह वैज्ञानिक तथ्य है कि रात्रि में सूक्ष्म जीव बड़ी मात्रा में फैल जाते हैं। ऐसे में सूर्यास्त के बाद खाना बनाने से सूक्ष्म जीव भोजन में प्रवेश कर जाते हैं। खाना खाने पर ये सभी जीव पेट में चले जाते हैं।जैन धारणा में इसे हिंसा माना गया है। इसी कारण रात के भोजन को जैन धर्म में निषेध माना गया है। इसका एक कारण स्वास्थ्य से जुड़ा है तो दूसरा पाचन तंत्र से। सूर्यास्त के बाद हमारी पाचन शक्ति मंद पड़ जाती है। इसलिए खाना सूर्यास्त से पहले खाने की परंपरा जैनोँ के अलावा हिंदुओं में भी है। यह भी कहा जाता है कि हमारा पाचन तंत्र कमल के समान होता है। जिसकी तुलना ब्रह्म कमल से की गई है। प्राकृतिक सिद्धांत है कि सूर्य उदय के साथ कमल खिलता है। अस्त होने के साथ बंद हो जाता है। इसी तरह पाचन तंत्र भी सूर्य की रोशनी मे खुला रहता है और अस्त होने पर बंद हो जाता है। ऐसे में यदि हम भोजन ग्रहण करें तो बंद कमल के बाहर ही सारा अन्न बिखर जाता है। वह पाचन तंत्र में समा नही पाता। इसलिए शरीर को भोजन से जो ऊर्जा मिलनी चाहिए। वह नहीं मिलती और भोजन नष्ट हो जाता है।* *For Free Prediction Call Now:* *+919314147672* *??कोई समस्या है या कोई सवाल है तो दिए हुए ईमेल लिंक पे क्लिक कर आप अपनी समस्या और अपने सवाल भेज सकते है.!!* *You can contact us on whatsapp* http://wa.me/919314147672/?text=Hello *# I.k. bhardwaj* *#Astrology* *# vaastu salahkar* *# sri sarswat Jyotish* *👉नोट~~~~ आज प्रीति योग में तेल का दान करना शुभफलदायी है।* ================================================== *✍ पंचागकर्ता~~~इन्द्रकृष्ण भारद्वाज(बीकानेर)* *मोबाइल नम्बर ---- +919314147672 9214247672* *Email. --- [email protected]* ================================================== *यह पंचांगबीकानेर की अक्षांश रेखांश पर आधारित है।* 🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻

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*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®* 🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚 🔅 आज का दिनाँक 18 जुलाई 2019 🔅 दिन - गुरुवार 🔅 विक्रम संवत - 2076 🔅 शक संवत - 1941 🔅 अयन - दक्षिणायण 🔅 ऋतु - वर्षा 🔅 मास - श्रावण 🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष 🔅 तिथि - द्वितीय 🔅 नक्षत्र - श्रवण 🔅 योग - प्रीति 🔅 दिशाशूल - दक्षिण दिशा मे 🔅 सूर्योदय - 05:56 मिनट 🔅 सूर्यास्त - 19:30 मिनट पर 🔅 चंद्रोदय - 20:47 मिनट +पर 🔅 चंद्रास्त - 06:54 मिनट पर 🔅 राहुकाल - 14:25 - 16:07 अशुभ 🔅 अभिजित -12:12 -13:00 शुभ 🔅 तिथिविशेष - श्रावण मास द्वितीय दिवस , ************************************************************ *🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱* *👉जैन धर्म में रात्रि भोजन पर क्यों है मनाही::----------------------* *💥जैन धर्म भारत वर्ष का प्राचीन धर्म है और यह धर्म अहिंसा प्रधान धर्म है। इस धर्म का सारा जोर हिंसा रोकने पर है। वह चाहे किसी भी रूप में, किसी भी तरह की हिंसा क्यों न हो। रात्रि भोजन के त्याग के पीछे अहिंसा और स्वास्थ्य दो प्रमुख कारण है। यह वैज्ञानिक तथ्य है कि रात्रि में सूक्ष्म जीव बड़ी मात्रा में फैल जाते हैं। ऐसे में सूर्यास्त के बाद खाना बनाने से सूक्ष्म जीव भोजन में प्रवेश कर जाते हैं। खाना खाने पर ये सभी जीव पेट में चले जाते हैं।जैन धारणा में इसे हिंसा माना गया है। इसी कारण रात के भोजन को जैन धर्म में निषेध माना गया है। इसका एक कारण स्वास्थ्य से जुड़ा है तो दूसरा पाचन तंत्र से। सूर्यास्त के बाद हमारी पाचन शक्ति मंद पड़ जाती है। इसलिए खाना सूर्यास्त से पहले खाने की परंपरा जैनोँ के अलावा हिंदुओं में भी है। यह भी कहा जाता है कि हमारा पाचन तंत्र कमल के समान होता है। जिसकी तुलना ब्रह्म कमल से की गई है। प्राकृतिक सिद्धांत है कि सूर्य उदय के साथ कमल खिलता है। अस्त होने के साथ बंद हो जाता है। इसी तरह पाचन तंत्र भी सूर्य की रोशनी मे खुला रहता है और अस्त होने पर बंद हो जाता है। ऐसे में यदि हम भोजन ग्रहण करें तो बंद कमल के बाहर ही सारा अन्न बिखर जाता है। वह पाचन तंत्र में समा नही पाता। इसलिए शरीर को भोजन से जो ऊर्जा मिलनी चाहिए। वह नहीं मिलती और भोजन नष्ट हो जाता है।* *For Free Prediction Call Now:* *+919314147672* *??कोई समस्या है या कोई सवाल है तो दिए हुए ईमेल लिंक पे क्लिक कर आप अपनी समस्या और अपने सवाल भेज सकते है.!!* *You can contact us on whatsapp* http://wa.me/919314147672/?text=Hello *# I.k. bhardwaj* *#Astrology* *# vaastu salahkar* *# sri sarswat Jyotish* *👉नोट~~~~ आज प्रीति योग में तेल का दान करना शुभफलदायी है।* ================================================== *✍ पंचागकर्ता~~~इन्द्रकृष्ण भारद्वाज(बीकानेर)* *मोबाइल नम्बर ---- +919314147672 9214247672* *Email. --- [email protected]* ================================================== *यह पंचांगबीकानेर की अक्षांश रेखांश पर आधारित है।* 🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻

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*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®* 🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚 🔅 आज का दिनाँक 17 जुलाई 2019 🔅 दिन - बुधवार 🔅 विक्रम संवत - 2076 🔅 शक संवत - 1941 🔅 अयन - दक्षिणायण 🔅 ऋतु - वर्षा 🔅 मास - श्रावण 🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष 🔅 तिथि - प्रतिपदा 🔅 नक्षत्र - उत्तराषाढ़ा 🔅 योग - विष्कुंभ 🔅 दिशाशूल - उत्तर दिशा मे 🔅 सूर्योदय - 05:55 मिनट 🔅 सूर्यास्त - 19:31 मिनट पर 🔅 चंद्रोदय - 20:04 मिनट +पर 🔅 चंद्रास्त - 06:00 मिनट पर 🔅 राहुकाल - 12:43 - 14:25 अशुभ 🔅 अभिजित -12:12 -13:00 अशुभ 🔅 तिथिविशेष - श्रावण मास प्रारंभ , **************************************************************** *🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱* *👉जानिए कैसे होता है, शिव जलाभिषेक से सर्वकल्याण::-----------------------* *💥शिव पुराण के अनुसार वेद मंत्रों के साथ भगवान शिव को जलधारा चढ़ाने से साधक का स्वयं कल्याण तो होता ही है साथ ही वह समस्त संसार के कल्याण के लिए भी महाऔषधि तैयार कर लेता है। पांच तत्वों में जल तत्व बहुत महत्वपूर्ण है। पुराणों में शिवाभिषेक का बहुत महत्व बताया गया है। जल में भगवान विष्णु का वास है, जल का एक नाम 'नार' भी है। इसीलिए भगवान विष्णु को नारायण कहते हैं। जल से ही धरती का ताप दूर होता है और जो भक्त शिव को जलधारा चढ़ाते हैं उनके ताप, संताप, रोग-शोक, दुःख दरिद्र सभी दूर हो जाते हैं। भगवान शिव की आराधना वैदिक आराधना है। भारत वर्ष में जितने भी शिवधाम हैं वहां वेद मंत्रों के साथ ही पूजा की जाती है। अतः यह कहा जा सकता है शिव आराधना के माध्यम से वेद के ज्ञान का विस्तार निरंतर होता आ रहा है। भगवान शिव को महादेव इसीलिए कहते हैं कि वह देव, दानव, यक्ष, किन्नर, नाग, मनुष्य, सभी द्वारा पूजित हैं। वस्तुतः भगवान शिव, कल्याण और समन्वय के देवता है, वही किसी का अहित नहीं करते लेकिन अपने द्वारा कर्मगति की चक्की में पिसता मनुष्य इसके लिए स्वयं दोषी है। यदि मन से शिव उपासना करेंगे तो अपने शुभ-अशुभ कर्मों को शिवार्पण करने वालों का कर्मगति का चक्र छूट जाता है। भगवान शिव तो ऐसे कृपालु देवता हैं जो एक लोटे जल से ही प्रसन्न हो जाते हैं।* *For Free Prediction Call Now:* *+919314147672* *??कोई समस्या है या कोई सवाल है तो दिए हुए ईमेल लिंक पे क्लिक कर आप अपनी समस्या और अपने सवाल भेज सकते है.!!* *You can contact us on whatsapp* http://wa.me/919314147672/?text=Hello *# I.k. bhardwaj* *#Astrology* *# vaastu salahkar* *# sri sarswat Jyotish* *👉नोट~~~~ आज विष्कुंभ योग में घड़े का दान करना शुभफलदायी है।* ================================================== *✍ पंचागकर्ता~~~इन्द्रकृष्ण भारद्वाज(बीकानेर)* *मोबाइल नम्बर ---- +919314147672 9214247672* *Email. --- [email protected]* ================================================== *यह पंचांगबीकानेर की अक्षांश रेखांश पर आधारित है।* 🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻

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Astro Guru Jul 17, 2019

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®* 🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚 🔅 आज का दिनाँक 17 जुलाई 2019 🔅 दिन - बुधवार 🔅 विक्रम संवत - 2076 🔅 शक संवत - 1941 🔅 अयन - दक्षिणायण 🔅 ऋतु - वर्षा 🔅 मास - श्रावण 🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष 🔅 तिथि - प्रतिपदा 🔅 नक्षत्र - उत्तराषाढ़ा 🔅 योग - विष्कुंभ 🔅 दिशाशूल - उत्तर दिशा मे 🔅 सूर्योदय - 05:55 मिनट 🔅 सूर्यास्त - 19:31 मिनट पर 🔅 चंद्रोदय - 20:04 मिनट +पर 🔅 चंद्रास्त - 06:00 मिनट पर 🔅 राहुकाल - 12:43 - 14:25 अशुभ 🔅 अभिजित -12:12 -13:00 अशुभ 🔅 तिथिविशेष - श्रावण मास प्रारंभ , **************************************************************** *🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱* *👉जानिए कैसे होता है, शिव जलाभिषेक से सर्वकल्याण::-----------------------* *💥शिव पुराण के अनुसार वेद मंत्रों के साथ भगवान शिव को जलधारा चढ़ाने से साधक का स्वयं कल्याण तो होता ही है साथ ही वह समस्त संसार के कल्याण के लिए भी महाऔषधि तैयार कर लेता है। पांच तत्वों में जल तत्व बहुत महत्वपूर्ण है। पुराणों में शिवाभिषेक का बहुत महत्व बताया गया है। जल में भगवान विष्णु का वास है, जल का एक नाम 'नार' भी है। इसीलिए भगवान विष्णु को नारायण कहते हैं। जल से ही धरती का ताप दूर होता है और जो भक्त शिव को जलधारा चढ़ाते हैं उनके ताप, संताप, रोग-शोक, दुःख दरिद्र सभी दूर हो जाते हैं। भगवान शिव की आराधना वैदिक आराधना है। भारत वर्ष में जितने भी शिवधाम हैं वहां वेद मंत्रों के साथ ही पूजा की जाती है। अतः यह कहा जा सकता है शिव आराधना के माध्यम से वेद के ज्ञान का विस्तार निरंतर होता आ रहा है। भगवान शिव को महादेव इसीलिए कहते हैं कि वह देव, दानव, यक्ष, किन्नर, नाग, मनुष्य, सभी द्वारा पूजित हैं। वस्तुतः भगवान शिव, कल्याण और समन्वय के देवता है, वही किसी का अहित नहीं करते लेकिन अपने द्वारा कर्मगति की चक्की में पिसता मनुष्य इसके लिए स्वयं दोषी है। यदि मन से शिव उपासना करेंगे तो अपने शुभ-अशुभ कर्मों को शिवार्पण करने वालों का कर्मगति का चक्र छूट जाता है। भगवान शिव तो ऐसे कृपालु देवता हैं जो एक लोटे जल से ही प्रसन्न हो जाते हैं।* *For Free Prediction Call Now:* *+919314147672* *??कोई समस्या है या कोई सवाल है तो दिए हुए ईमेल लिंक पे क्लिक कर आप अपनी समस्या और अपने सवाल भेज सकते है.!!* *You can contact us on whatsapp* http://wa.me/919314147672/?text=Hello *# I.k. bhardwaj* *#Astrology* *# vaastu salahkar* *# sri sarswat Jyotish* *👉नोट~~~~ आज विष्कुंभ योग में घड़े का दान करना शुभफलदायी है।* ================================================== *✍ पंचागकर्ता~~~इन्द्रकृष्ण भारद्वाज(बीकानेर)* *मोबाइल नम्बर ---- +919314147672 9214247672* *Email. --- [email protected]* ================================================== *यह पंचांगबीकानेर की अक्षांश रेखांश पर आधारित है।* 🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻

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