Aruna Sharma (anu) Aug 28, 2020

🙏🌹🌹🌹🌹💕💕💕💕🌹🌹🌹🌹🙏 🙏🎄🍀🎄🍀🎄🍀🎄🍀🎄🍀🎄🍀🙏 🙏165 साल बाद ऐसा संयोग, पितृपक्ष के 1 महीने बाद आएगी नवरात्र🙏जय माता दी🙏 हर साल पितृ पक्ष के समापन के अगले दिन से नवरात्र का आरंभ हो जाता है और घट स्‍थापना के साथ 9 दिनों तक नवरात्र की पूजा होती है। यानी पितृ अमावस्‍या के अगले दिन से प्रतिपदा के साथ शारदीय नवरात्र का आरंभ हो जाता है जो कि इस साल नहीं होगा। इस बार श्राद्ध पक्ष समाप्‍त होते ही अधिकमास लग जाएगा। अधिकमास लगने से नवरात्र और पितृपक्ष के बीच एक महीने का अंतर आ जाएगा। आश्विन मास में मलमास लगना और एक महीने के अंतर पर दुर्गा पूजा आरंभ होना ऐसा संयोग करीब 165 साल बाद होने जा रहा है। लीप वर्ष होने के कारण ऐसा हो रहा है। इसलिए इस बार चातुर्मास जो हमेशा चार महीने का होता है, इस बार पांच महीने का होगा। ज्योतिष की मानें तो 160 साल बाद लीप ईयर और अधिकमास दोनों ही एक साल में हो रहे हैं। चातुर्मास लगने से विवाह, मुंडन, कर्ण छेदन जैसे मांगलिक कार्य नहीं होंगे। इस काल में पूजन पाठ, व्रत उपवास और साधना का विशेष महत्व होता है। इस दौरान देव सो जाते हैं। देवउठनी एकादशी के बाद ही देव जागृत होते हैं। इस साल 17 सितंबर 2020 को श्राद्ध खत्म होंगे। इसके अगले दिन अधिकमास शुरू हो जाएगा, जो 16 अक्टूबर तक चलेगा। इसके बाद 17 अक्टूबर से नवरात्रि व्रत रखे जाएंगे। इसके बाद 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी होगी। जिसके साथ ही चातुर्मास समाप्त होंगे। इसके बाद ही शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन आदि शुरू होंगे। पंचांग के अनुसार इस साल आश्विन माह का अधिकमास होगा। यानी दो आश्विन मास होंगे। आश्विन मास में श्राद्ध और नवरात्रि, दशहरा जैसे त्योहार होते हैं। अधिकमास लगने के कारण इस बार दशहरा 26 अक्टूबर को दीपावली भी काफी बाद में 14 नवंबर को मनाई जाएगी। क्‍या होता है अधिक मास एक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, जबकि एक चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। ये अंतर हर तीन वर्ष में लगभग एक माह के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को दूर करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अतिरिक्त आता है, जिसे अतिरिक्त होने की वजह से अधिकमास का नाम दिया गया है। अधिकमास को कुछ स्‍थानों पर मलमास भी कहते हैं। दरअसल इसकी वजह यह है कि इस पूरे महीने में शुभ कार्य वर्जित होते हैं। इस पूरे माह में सूर्य संक्रांति न होने के कारण यह महीना मलिन मान लिया जाता है। इस कारण लोग इसे मलमास भी कहते हैं। मलमास में विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश जैसे कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। पौराणिक मान्‍यताओं में बताया गया है कि मलिनमास होने के कारण कोई भी देवता इस माह में अपनी पूजा नहीं करवाना चाहते थे और कोई भी इस माह के देवता नहीं बनना चाहते थे, तब मलमास ने स्‍वयं श्रीहरि से उन्‍हें स्‍वीकार करने का निवेदन किया। तब श्रीहर‍ि ने इस महीने को अपना नाम दिया पुरुषोत्‍तम। तब से इस महीने को पुरुषोत्‍तम मास भी कहा fजाता है। इस महीने में भागवत कथा सुनने और प्रवचन सुनने का विशेष महत्‍व माना गया है। साथ ही दान पुण्‍य करने से आपके लिए मोक्ष के द्वार खुलते हैं।🙏🌹हरि विष्णु जी🌹🙏🕉🕉🕉🕉

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Aruna Sharma (anu) Aug 27, 2020

🙏🌹🌹💕💕जय माता दी💕💕🌹🌹🙏 🙏🌹💕*माँ कभी वापिस नहीं आती.💕🌹🙏 *उम्र - दो साल* -- मम्मा कहाँ है ? मम्मा को दिखा दो, मम्मा को देख लूँ, मम्मा कहाँ गयी ?... *उम्र - चार साल* -- मम्मी कहाँ हो ? मैं स्कूल जाऊँ ? अच्छा bye मुझे आपकी याद आती है स्कूल में... *उम्र - आठ साल* -- मम्मा, लव यू, आज टिफिन में क्या भेजोगी ? मम्मा स्कूल में बहुत होम वर्क मिला है... *उम्र - बारह साल* -- पापा, मम्मा कहाँ है ? स्कूल से आते ही मम्मी नहीं दिखती, तो अच्छा नहीं लगता... *उम्र - चौदह साल* -- मम्मी आप पास बैठो ना, खूब सारी बातें करनी है आपसे... *उम्र - अठारह साल* -- ओफ्फो मम्मी समझो ना, आप पापा से कह दो ना, आज पार्टी में जाने दें... *उम्र - बाईस साल* -- क्या माँ ? ज़माना बदल रहा है, आपको कुछ नहीं पता, समझते ही नहीं हो... *उम्र - पच्चीस साल* -- माँ, माँ जब देखो नसीहतें देती रहती हो, मैं दूध पीता बच्चा नहीं... *उम्र - अठाईस साल* -- माँ, वो मेरी पत्नी है, आप समझा करो ना, आप अपनी मानसिकता बदलो... *उम्र - तीस साल* -- माँ, वो भी माँ है, उसे आता हैं बच्चों को सम्भालना, हर बात में दखलंदाजी नहीं किया करो... *और उस के बाद, माँ को कभी पूछा ही नहीं। माँ कब बूढ़ी हो गयी, पता ही नहीं उसे। माँ तो आज भी वो ही हैं, बस उम्र के साथ बच्चों के अंदाज़ बदल जाते हैं...* *उम्र - पचास साल* -- फ़िर एक दिन माँ, माँ चुप क्यों हो ? बोलो ना, पर माँ नहीं बोलती, खामोश हो गयी... *माँ, दो साल से पचास साल के, इस परिवर्तन को समझ ही नहीं पायी, क्योंकि माँ के लिये तो पचास साल का भी प्रौढ़ भी, बच्चा ही हैं, वो बेचारी तो अंत तक, बेटे की छोटी सी बीमारी पर, वैसे ही तड़प जाती, जैसे उस के बचपन में तडपती थी।* *और बेटा, माँ के जाने पर ही जान पाता है, कि उसने क्या अनमोल खजाना खो दिया...?* *ज़िन्दगी बीत जाती है, कुछ अनकही और अनसुनी बातें बताने कहने के लिए, माँ का सदा आदर सत्कार करें, उन्हें भी समझें और कुछ अनमोल वक्त उनके साथ भी बिताएं, क्योंकि वक्त गुज़र जाता है, लेकिन माँ कभी वापिस नहीं मिलती...!!* ** *हर बच्चे तक पहुंचा कर उसे एहसास करवाइए माँ का प्यार क्या होता है।* *माँ को समार्पित...!* 💐🙏💐🙏💐🙏💐🙏💐

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Aruna Sharma (anu) Jul 21, 2020

🙏🌹My mandir up group रिश्ते.🌹🙏 क्या और कैसे होते हैं,,🌹 🌹लाइक कॉमेंट्स से शुरू होते हैं,,🌹 बिना देखे बिना मिले ही बन जाते हैं,,🌹 कोई खून का रिश्ता ना होते हुए भी रिश्ता बन जाता है,,🌹 आपास में 1 अजीब सा जुड़ाव हो जाता जो खून के 🌹रिश्ते से बढ़कर हो जाते हैं हमारे लिए,,🌹 यहाँ हम 1 दूसरे से रूठते भी हैं, और मनाते भी हैं , जो 1 रूठ जाए तो हाल दोनो का बुरा होता है। 🌹 एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहाँ हम सब किसी के भी 🌹रिश्तेदार नहीं....🌹 किसी को देखा नहीं....🌹 किसी को मिले नहीं....🌹 शायद ताउम्र देखेंगे भी नहीं मिलेंगे भी नहीं....🌹 फिर भी यहां एक अटूट रिश्ता बांध लिया जाता है...🌹 🌹जिसमे आपसी प्यार है,,❤️ हंसी मजाक है,,❤️ रूठना है , तो मनाना भी है,,❤️ जन्मदिन की मुबारकबाद है,,❤️ बीमार हो तो दुआऐं है,,❤️ 🌹किसी के शहर जाओ तो मिलने की आस है,, तो कोई मदद कर ने के लिए तत्पर है,,❤️ 🌺कोई दीदी..... बन जाती है,,🥰 तो कोई माँ बन जाती है,,🥰 तो कोई सखी बन जाती है,,🥰 तो कई अज़ीज़ दोस्त बन जाते हैं,,🥰 तो कई हमारे लिए ना टूटने वाला रिश्ते बन जाते है,,🥰 🌹कुछ ऐसा ही होता है My mandir up groupका रिश्ता, 🙏🌹🙏🌹जय श्री गणेशाय 🌹🙏🌹🙏

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Aruna Sharma (anu) Jul 21, 2020

गुरू सिद्धि नहीं शुद्धि देते है 🙏🕉🙏🕉🙏🕉🙏 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ तुम्हारी पहचान तुम्हारे गुरू से होती है, तुम्हारे गुरू कौन है। जैसे ही तुम गुरू की ओर देखते हो तो देखते ही तुम्हारा अपने गुरू के साथ एक कनेक्शन हो जाता है, और जब कनेक्शन होता है तो गुरू के अंदर जो उर्जा होती है वह तुम्हारी ओर ट्रांसफर होना प्रारम्भ हो जाती है। और यदि गुरू पवित्र है तो गुरू का ध्यान करते ही तुम्हारे शरीर में, मन में और जीवन में पवित्रता बहना शुरू हो जाती है। गुरू सिद्धि नहीं शुद्धि देगे । वह तुम्हें संस्कारों की शुद्धि देगे । वह तुम्हारे एक-एक बुरे कर्म को हटाकर तुम्हारी चेतना को उठाएगे । वह यह कभी नहीं कहेगे , ’कि चलो आज मैं तुम्हें सिद्धि देता हॅू।’ क्योंकि सब कुछ तुम्हारे ही भीतर समाया हुआ है। सब सिद्धियॉ भी तुम्हारे ही भीतर है, सारे अविष्कार जो हो चुके हैं और जो आगे होने वाले हैं वो सभी तुम्हारे ही भीतर समाये हुऐ हैं। तुम्हें बाहर से कुछ दिया ही नहीं जा सकता। एक बार गौतम बुद्ध कहीं जा रहे थे तो उन्हें कुछ लोग मिले और बोले कि आइए हमारे पास कुछ सिद्धियां हैं हम आपको सिद्धि देते हैं। पर ऐसा नहीं हुआ भगवान बुद्ध ने तपश्चर्या की, साधना की और बोधित्व को प्राप्त हुये। तुम अपने आप को असहाय और कमजोर कभी मत समझो, सारी शक्ति तुम्हारे अंदर मौजूद है। तुम्हारे अन्दर ही अन्नत छिपा है। सदगुरू का यही प्रयास है कि तुम्हारे अंदर जो अनंत सोया हुआ है तुम उसे जगा लो। जिस दिन तुम अपने भीतर की संपदा को जान लोगे उस दिन सारे दुख, सारे रोग दूर हो जाएंगे। तुम त्रिलोकी को बाहर खोज रहे हो। उसी त्रिलोकी को अंदर खोजो। अंदर भी वही त्रिलोकी है। लेकिन जब तक गुरू जीवन में नहीं आते तब तक मनुष्य भटकता रहता है जैसे कस्तूरी मृग की नाभि में होती है लेकिन इसकी सुगंध को ढूंढने के लिए मृग वन वन भटकता है उसी प्रकार मनुष्य ईश्वर की खोज में जीवन भर भटकता रहता है लेकिन जब गुरू उसके जीवन में आते हैं तो उसे अनुभव होता है कि भगवान कहीं बाहर नहीं वह तो अन्दर है। इस सृष्टि के कण कण में उस परमसत्ता का वास है।उसी के चेतना से समस्त सृष्टि चल रही है। जब तुम किसी को गुरू बनाते हो तो उस समय तुम अपने जीवन की बागड़ोर उसके हाथ में दे देते हो। उसके द्वारा बतायी साधना को करना और यदि तुम्हें उससे अनुभव होने लगे तुम्हारा जीवन बदलने लगे तुम्हें आत्मिक शांति प्राप्त होने लगे तो समझ लेना तुम्हे तुम्हारे गुरू मिल गये जिसे न जाने तुम कब से खोज रहे थे। उसी को अपना गुरू बनाना और जिसे एक बार गुरू बना लिया तो फिर उसके पल्लू को कस के पकड लेना। फिर उसे छोड़ने की मत सोचना। सब कुछ उस पर छोड़ देना। वह तुम्हें इस लोक में भी पार करा देगा और परलोक में भी पार करा देगा। इसलिए कहा गया है कि नानक नाम जहाज है जो उसके जहाज में चढ़ गया वह एक न एक दिन पार हो ही जायेगा। और जो कभी इधर कभी उधर मन को भटकाये रखता है वह जीवन के भंवर में फंस जाता है। गुरू का वह मार्ग है जो आपको नर से नारायण की यात्रा भी करा सकता है। वह आपकी चेतना का विस्तार करता है और फिर साधना करते-करते सगुण से निर्गुण अवस्था आती है तभी हम सिद्धत्व को प्राप्त होते हैं और यह अवस्था इतनी आसान नहीं है लेकिन यदि गुरू है तो आसान भी है। क्योंकि गुरू वह यात्रा कर चुका है जिस पर वह तुम्हें आगे बढ़ा रहा है। गुरू दीक्षा देता है। दीक्षा यानी नाम-दान। नाम दान का बड़ा महत्व है क्यांकि गुरू के मुख से जो शब्द निकलता है उसमें गुरू के तप की अग्नि होती है और जब शिष्य उनके द्वारा दिये गए मंत्र का पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ जप करता है तो गुरू मंत्र की शक्ति से संचित कर्म भस्म होने लगते हैं उसकी बंद ग्रंथियॉं खुलने लगती हैं। जिससे उसके जीवन में शारीरिक, मानसिक, भौतिक एवं आध्यात्मिक उन्नति होना प्रारम्भ हो जाती है। सिद्ध वो है जो कड़ा तप करता है। सिद्ध वो है जो आत्मसाक्षात्कार को प्राप्त कर चुका है जो अब और लोगों को भी इस मार्ग पर ले जा सकता है। गुरू तुम्हें मार्ग दिखा सकता है। सिद्ध होने के लिए आपको स्वयं मेहनत करनी होगी। गुरू शक्ति देता है। दुनियां के प्रपंचों से तुम्हारी रक्षा करता है। जहां तुम्हारे कदम गलत रास्ते पर गये वह तुम्हारे कदमों का आगे बढ़ने से रोक देगा। तुम जीवन के भंवर में कहीं फॅस न जाओं इसलिए वह तुम्हे सदमार्ग पर लेकर जाता है।🙏🌹🙏🕉🕉

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Aruna Sharma (anu) Jul 17, 2020

वास्तविक सौंदर्य 🌿🌿🌿🌿🌿 👩एक लड़की ने अपने पिता से पूंछा - पापा मैं अपने शरीर के कितने हिस्से को ढकूं और कितने हिस्से को खुला छोड़ दूं ? 👉पिता का बड़ा खूबसूरत जबाब मिला - बेटा जितने हिस्से पर तुम नर्क की आग सहन कर सको उतना हिस्सा खुला छोड़ दो!! 👉 लड़की बोली-ऐसा क्यों पापा?🤔🤔 👳‍♀ 👉पापा :- क्योंकि पर्दा करना बहुत जरूरी है क्योंकि तुमने श्री कृष्ण की गोपियों के कपड़े चुराने बाली कहानी तो सुनी होगी जब गोपियां तालाब में निर्वस्त्र होकर नहाती थी तो भगवान श्री कृष्ण गोपियों के कपड़े उठा ले जाते थे और उनको परेशान करते थे वो ऐसा इसलिए करते थे क्योंकि वो नही चाहते थे कि कोई भी स्त्री बिना कपड़ों के नहाये,, क्योंकि गोपियों को इंसान के अलावा जीव जंतु पशु पक्षी मछली व अन्य जानवर भी देखते थे,, जिसका ज्ञान गोपियों को नही था,, इसलिए वो बिना कपड़ों के नहाने के लिए मना करते थे व स्त्री को पर्दे में रहने की शिक्षा देते थे, लेकिन कुछ लोगो ने इसका उल्टा अर्थ निकाल लिया!! 👩 👉 लड़की बोली - पापा अगर में पर्दा करूँगी तो खूबसूरत कैसे दिखूंगी ?🤷‍♀🤷‍♀👸👰 👳‍♀ 👉 पिता - इसका जबाब में बेटा बाद में दूंगा, कुछ दिन बाद पिता काम से विदेश चला गया, और, वहाँ से उसने लड़की के लिये गिफ्ट भेजा, 🎁🎁 👩 👉 लड़की ने गिफ्ट खोला उसमे एप्पल का मोबाइल था,,📱📱 👳‍♀ 👉 पिता का फोन आया - बेटा गिफ्ट कैसा लगा? 👩 👉 लड़की - बहुत अच्छा! 👳‍♀ 👉पिता -बेटा अब क्या करोगे! 👩 👉 लड़की - सबसे पहले मैं इस फोन का स्क्रीनगार्ड और कबर ख़रीदूंगी! 👳‍♀ 👉 पिता - इससे क्या होगा? 👩 👉 लड़की - इससे फोन सेफ रहेगा! 👳‍♀ 👉पिता-क्या ये सब लगाना जरूरी है? 👩 लड़की -हां पापा बहुत जरूरी है! 👳‍♀ पिता - क्या ऐप्पल कंपनी के मालिक ने ये लगाने के लिए बोला है? 👩 लड़की - हा पापा बॉक्स में इंस्ट्रक्सन लिखे है कि ये जरूर लगाएं! 👳‍♀ पिता - इनको लगाने से फोन खराब तो नही दिखेगा? 👩 लड़की -नही पापा इसको लगाने से मेरा फोन और ज्यादा खूबसूरत दिखने लगेगा!! 👳‍♀ पिता - बेटा जब एक मोबाइल की सेफ्टी और खूबसूरत दिखने के लिए इस्क्रीन गार्ड और कबर बहुत इम्पोर्टेन्ट है। तो बेटा तुमतो उस ईश्वर की नायाब रचना हो!! 👳‍♀ तुम्हारी सेफ्टी और खूबसूरती के लिये ही उसने पर्दा करने को कहा है, जब इस्क्रीनगार्ड और कबर से मोबाइल खूबसूरत हो जाता है उसी प्रकार पर्दा करने से तुम भी और ज्यादा खूबसूरत दिखोगी और सब तुम्हारी इज्ज़त भी करेंगे!! 👳‍♀ 👉 शरीर खुला रखने से नही ढकने से खूबसूरती आती है!! और, ये केवल तुम पर नही हर इंसान पर लागू होता है! वो चाहे स्त्री हो या पुरुष!! 👳‍♀ 👉 अगर हम लोग भी निर्वस्त्र होकर घूमने लगे तो जानवरों और हममें कोई फर्क नही, और न ही हमे खुद को बुद्दिजीवी कहने का अधिकार है!! 👩बेटी की आखों मैं आंसू आगए 😭😭 "आज" 👳‍♀👉पिता ने अपनी बेटी को जिंदगी की एक महत्वपूर्ण शिक्षा दे दी!! 👩 👉 बेटी ने हाथ 🙏 जोड़कर पिता से बोला की हर लड़की को हमारे पिता के समान पिता ही देना! यह हमारी भगवान से प्रार्थना है!! Notice :-(अगर आप चाहते हैं की इस लड़की के पिता के समान हम भी बने तो इस स्टोरी में जितनी भी बातें बताई गई हैं उन बातों को आप सभी अपने ऊपर लागू करें है) 🙏🙏 अगर आप को इस कहानी से प्रेरणा मिली हो तो अपने परिवार में अपने बच्चों को जरूर सुनाते🙏🕉 🙏🙏🌹🌹जय श्री राधे कृष्णा 🌹🌹🙏🙏

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Aruna Sharma (anu) Jul 13, 2020

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Aruna Sharma (anu) Jun 3, 2020

🙏🌹गाय से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी 🌹🙏 1. गौ माता जिस जगह खड़ी रहकर आनंदपूर्वक चैन की सांस लेती है । वहां वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं । 2. जिस जगह गौ माता खुशी से रभांने लगे उस जगह देवी देवता पुष्प वर्षा करते हैं । 3. गौ माता के गले में घंटी जरूर बांधे ; गाय के गले में बंधी घंटी बजने से गौ आरती होती है । 4. जो व्यक्ति गौ माता की सेवा पूजा करता है उस पर आने वाली सभी प्रकार की विपदाओं को गौ माता हर लेती है । 5. गौ माता के खुर्र में नागदेवता का वास होता है । जहां गौ माता विचरण करती है उस जगह सांप बिच्छू नहीं आते । 6. गौ माता के गोबर में लक्ष्मी जी का वास होता है । 7. गौ माता कि एक आंख में सुर्य व दूसरी आंख में चन्द्र देव का वास होता है । 8. गौ माता के दुध मे सुवर्ण तत्व पाया जाता है जो रोगों की क्षमता को कम करता है। 9. गौ माता की पूंछ में हनुमानजी का वास होता है । किसी व्यक्ति को बुरी नजर हो जाये तो गौ माता की पूंछ से झाड़ा लगाने से नजर उतर जाती है । 10. गौ माता की पीठ पर एक उभरा हुआ कुबड़ होता है , उस कुबड़ में सूर्य केतु नाड़ी होती है । रोजाना सुबह आधा घंटा गौ माता की कुबड़ में हाथ फेरने से रोगों का नाश होता है । 11. एक गौ माता को चारा खिलाने से तैंतीस कोटी देवी देवताओं को भोग लग जाता है । 12. गौ माता के दूध घी मख्खन दही गोबर गोमुत्र से बने पंचगव्य हजारों रोगों की दवा है । इसके सेवन से असाध्य रोग मिट जाते हैं । 13. जिस व्यक्ति के भाग्य की रेखा सोई हुई हो तो वो व्यक्ति अपनी हथेली में गुड़ को रखकर गौ माता को जीभ से चटाये गौ माता की जीभ हथेली पर रखे गुड़ को चाटने से व्यक्ति की सोई हुई भाग्य रेखा खुल जाती है । 14. गौ माता के चारो चरणों के बीच से निकल कर परिक्रमा करने से इंसान भय मुक्त हो जाता है । 15. गौ माता के गर्भ से ही महान विद्वान धर्म रक्षक गौ कर्ण जी महाराज पैदा हुए थे। 16. गौ माता की सेवा के लिए ही इस धरा पर देवी देवताओं ने अवतार लिये हैं । 17. जब गौ माता बछड़े को जन्म देती तब पहला दूध बांझ स्त्री को पिलाने से उनका बांझपन मिट जाता है । 18. स्वस्थ गौ माता का गौ मूत्र को रोजाना दो तोला सात पट कपड़े में छानकर सेवन करने से सारे रोग मिट जाते हैं । 19. गौ माता वात्सल्य भरी निगाहों से जिसे भी देखती है उनके ऊपर गौकृपा हो जाती है । 20. काली गाय की पूजा करने से नौ ग्रह शांत रहते हैं । जो ध्यानपूर्वक धर्म के साथ गौ पूजन करता है उनको शत्रु दोषों से छुटकारा मिलता है । 21. गाय एक चलता फिरता मंदिर है । हमारे सनातन धर्म में तैंतीस कोटि देवी देवता है , हम रोजाना तैंतीस कोटि देवी देवताओं के मंदिर जा कर उनके दर्शन नहीं कर सकते पर गौ माता के दर्शन से सभी देवी देवताओं के दर्शन हो जाते हैं । 22. कोई भी शुभ कार्य अटका हुआ हो बार बार प्रयत्न करने पर भी सफल नहीं हो रहा हो तो गौ माता के कान में कहिये रूका हुआ काम बन जायेगा ! 23. गौ माता सर्व सुखों की दातार है । हे मां आप अनंत ! आपके गुण अनंत ! इतना मुझमें सामर्थ्य नहीं कि मैं आपके गुणों का बखान कर सकूं । जय गाय माता की जय श्री कृष्णा ।।जय जय श्री राम।।

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