Aruna Sharma(Anu) Aug 21, 2019

🙏🌹🌹🎂 Happy Janmashtami🎂🌹🌹🙏 🕉️🥀🕉️🥀🕉️🥀 advance🥀🕉️🥀🕉️🥀🕉️ 🙏🌹युधिष्ठर को पूर्ण आभास था, कि कलयुग में क्या होगा ? पूरा अवश्य पढें। अच्छा लगेगा।🙏 पाण्डवों का अज्ञातवाश समाप्त होने में कुछ समय शेष रह गया था। पाँचो पाण्डव एवं द्रोपदी जंगल मे छूपने का स्थान ढूंढ रहे थे। उधर शनिदेव की आकाश मंडल से पाण्डवों पर नजर पड़ी शनिदेव के मन विचार आया कि इन 5 में बुद्धिमान कौन है परीक्षा ली जाय। शनिदेव ने एक माया का महल बनाया कई योजन दूरी में उस महल के चार कोने थे, पूरब, पश्चिम, उतर, दक्षिण। अचानक भीम की नजर महल पर पड़ी और वो आकर्षित हो गया , भीम, यधिष्ठिर से बोला- भैया मुझे महल देखना है भाई ने कहा जाओ । भीम महल के द्वार पर पहुंचा वहाँ शनिदेव दरबान के रूप में खड़े थे, भीम बोला- मुझे महल देखना है! शनिदेव ने कहा- महल की कुछ शर्त है । 1- शर्त महल में चार कोने हैं आप एक ही कोना देख सकते हैं। 2-शर्त महल में जो देखोगे उसकी सार सहित व्याख्या करोगे। 3-शर्त अगर व्याख्या नहीं कर सके तो कैद कर लिए जाओगे। भीम ने कहा- मैं स्वीकार करता हूँ ऐसा ही होगा । और वह महल के पूर्व छोर की ओर गया । वहां जाकर उसने अद्भूत पशु पक्षी और फूलों एवं फलों से लदे वृक्षों का नजारा देखा, आगे जाकर देखता है कि तीन कुंए है अगल-बगल में छोटे कुंए और बीच में एक बडा कुआ। बीच वाला बड़े कुंए में पानी का उफान आता है और दोनों छोटे खाली कुओं को पानी से भर देता है। फिर कुछ देर बाद दोनों छोटे कुओं में उफान आता है तो खाली पड़े बड़े कुंए का पानी आधा रह जाता है इस क्रिया को भीम कई बार देखता है पर समझ नहीं पाता और लौटकर दरबान के पास आता है। दरबान - क्या देखा आपने ? भीम- महाशय मैंने पेड़ पौधे पशु पक्षी देखा वो मैंने पहले कभी नहीं देखा था जो अजीब थे। एक बात समझ में नहीं आई छोटे कुंए पानी से भर जाते हैं बड़ा क्यों नहीं भर पाता ये समझ में नहीं आया। दरबान बोला आप शर्त के अनुसार बंदी हो गये हैं और बंदी घर में बैठा दिया। अर्जुन आया बोला- मुझे महल देखना है, दरबान ने शर्त बता दी और अर्जुन पश्चिम वाले छोर की तरफ चला गया। आगे जाकर अर्जुन क्या देखता है। एक खेत में दो फसल उग रही थी एक तरफ बाजरे की फसल दूसरी तरफ मक्का की फसल । बाजरे के पौधे से मक्का निकल रही तथा मक्का के पौधे से बाजरी निकल रही । अजीब लगा कुछ समझ नहीं आया वापिस द्वार पर आ गया। दरबान ने पूछा क्या देखा, अर्जुन बोला महाशय सब कुछ देखा पर बाजरा और मक्का की बात समझ में नहीं आई। शनिदेव ने कहा शर्त के अनुसार आप बंदी हैं । नकुल आया बोला मुझे महल देखना है । फिर वह उत्तर दिशा की और गया वहाँ उसने देखा कि बहुत सारी सफेद गायें जब उनको भूख लगती है तो अपनी छोटी बछियों का दूध पीती है उसे कुछ समझ नहीं आया द्वार पर आया । शनिदेव ने पूछा क्या देखा ? नकुल बोला महाशय गाय बछियों का दूध पीती है यह समझ नहीं आया तब उसे भी बंदी बना लिया। सहदेव आया बोला मुझे महल देखना है और वह दक्षिण दिशा की और गया अंतिम कोना देखने के लिए क्या देखता है वहां पर एक सोने की बड़ी शिला एक चांदी के सिक्के पर टिकी हुई डगमग डोले पर गिरे नहीं छूने पर भी वैसे ही रहती है समझ नहीं आया वह वापिस द्वार पर आ गया और बोला सोने की शिला की बात समझ में नहीं आई तब वह भी बंदी हो गया। चारों भाई बहुत देर से नहीं आये तब युधिष्ठिर को चिंता हुई वह भी द्रोपदी सहित महल में गये। भाइयों के लिए पूछा तब दरबान ने बताया वो शर्त अनुसार बंदी है। युधिष्ठिर बोला भीम तुमने क्या देखा ? भीम ने कुंऐ के बारे में बताया तब युधिष्ठिर ने कहा- यह कलियुग में होने वाला है एक बाप दो बेटों का पेट तो भर देगा परन्तु दो बेटे मिलकर एक बाप का पेट नहीं भर पायेंगे। भीम को छोड़ दिया। अर्जुन से पुछा तुमने क्या देखा ?? उसने फसल के बारे में बताया युधिष्ठिर ने कहा- यह भी कलियुग में होने वाला है। वंश परिवर्तन अर्थात ब्राह्मण के घर शूद्र की लड़की और शूद्र के घर बनिए की लड़की ब्याही जायेंगी। अर्जुन भी छूट गया। नकुल से पूछा तुमने क्या देखा तब उसने गाय का वृतान्त बताया । तब युधिष्ठिर ने कहा- कलियुग में माताऐं अपनी बेटियों के घर में पलेंगी बेटी का दाना खायेंगी और बेटे सेवा नहीं करेंगे । तब नकुल भी छूट गया। सहदेव से पूछा तुमने क्या देखा, उसने सोने की शिला का वृतांत बताया, तब युधिष्ठिर बोले- कलियुग में पाप धर्म को दबाता रहेगा परन्तु धर्म फिर भी जिंदा रहेगा खत्म नहीं होगा।। आज के कलयुग में यह सारी बातें सच साबित हो रही है ।। 👏🏻👏🏻 जयश्रीकृष्ण, जय श्रीराधे 👏🏻👏🏻 🙏🏻 *ॐ शांति*🙏🏻

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Aruna Sharma(Anu) Aug 20, 2019

🙏🕉️🌹🕉️🌹जय श्री राधे राधे जी🌹🕉️🌹🕉️🙏 🙏🌹जय श्री कृष्ण 🌹🙏 🤵👩हम लोग हवेली में या मंदिर में दर्शन करने जाते हैं,। दर्शन करने के बाद बाहर आकर मंदिर की पौड़ी पर या ओटले पर थोड़ी देर बैठते हैं। इस परंपरा का कारण क्या है ? अभी तो लोग वहां बैठकर अपने घर की, व्यापार की, राजनीति की चर्चा करते हैं। परंतु यह परंपरा एक विशेष उद्देश्य के लिए बनाई गई है। वास्तव में वहां मंदिर की पैड़ी पर बैठ कर के एक श्लोक बोलना चाहिए । यह श्लोक हम भूल गए हैं। इस श्लोक को सुनें और याद करें ।और आने वाली पीढ़ी को भी इसे बता कर जाएं । श्लोक इस प्रकार है :- अनायासेन मरणम ,बिना दैन्येन जीवनम । देहान्ते तव सानिध्यम ,देहिमे परमेश्वरम।। जब हम मंदिर में दर्शन करने जाएं तो खुली आंखों से ठाकुर जी का दर्शन करें । कुछ लोग वहां नेत्र बंद करके खड़े रहते हैं ।आंखें बंद क्यों करना ? हम तो दर्शन करने ही आए हैं ।ठाकुर जी के स्वरूप का ,श्री चरणों का , मुखारविंद का ,श्रंगार का संपूर्ण आनंद लें । आंखों में भर लें इस स्वरूप को । दर्शन करें और दर्शन करने के बाद जब बाहर आकर बैठें ! तब नेत्र बंद करके ,जो दर्शन किए हैं, उस स्वरूप का ध्यान करें । मंदिर में नेत्र नहीं बंद करना, बाहर आने के बाद पैड़ी पर बैठकर ; जब ठाकुर जी का ध्यान करें ; तब नेत्र बंद करें, और अगर ठाकुर जी का स्वरूप ध्यान में नहीं आए ; तो दोबारा मंदिर में जाएं । यह प्रार्थना है ; याचना नहीं । याचना सांसारिक पदार्थों के लिए होती है, घर ,व्यापार ,नौकरी ,पुत्र पुत्री, दुकान ,सांसारिक सुख या अन्य बातों के लिए जो मांग की जाती है, वह याचना है । हम प्रार्थना करते हैं। प्रार्थना का विशेष अर्थ है :- प्र अर्थात विशिष्ट, श्रेष्ठ ; अर्थना अर्थात निवेदन । ठाकुर जी से प्रार्थना करें ,और प्रार्थना क्या करना है ,यह श्लोक बोलना है । श्लोक का अर्थ है :- "अनायासेना मरणम" अर्थात बिना तकलीफ के हमारी मृत्यु हो, बीमार होकर बिस्तर पर पड़े पड़े ,कष्ट उठाकर मृत्यु नहीं चाहिए ।चलते चलते ही श्री जी शरण हो जाएं। " बिना दैन्येन जीवनम " अर्थात परवशता का जीवन न हो। किसी के सहारे न रहना पड़े ,।जैसे लकवा हो जाता है ,और व्यक्ति दूसरों पर आश्रित हो जाता है ।वैसे परवश, बेबस न हों। ठाकुर जी की कृपा से बिना सहारा मांगे जीवन बसर हो सके। " देहान्ते तव सानिध्यम " अर्थात जब मृत्यु हो ; तब ठाकुर जी सन्मुख खड़े हो। जब प्राण तन से निकले , आप सामने खड़े हों। जैसे भीष्म पितामह की मृत्यु के समय स्वयं ठाकुर जी उनके सम्मुख जाकर खड़े हो गए । उनके दर्शन करते हुए प्राण निकले। यह प्रार्थना करें । गाड़ी ,लाड़ी ,लड़का, लड़की पति, पत्नी ,घर ,धन यह मांगना नहीं ।यह तो ठाकुर जी आपकी पात्रता के हिसाब से खुद ही आपको दे देते हैं । तो दर्शन करने के बाद बाहर बैठकर यह प्रार्थना अवश्य पढ़ें । 🙏🌹जय श्री कृष्ण🌹🙏

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Aruna Sharma(Anu) Aug 18, 2019

🙏🌹🌹🥀🥀जय श्री कृष्णा🥀🥀🌹🌹🙏 🙏एक बार की बात है - वृंदावन का एक साधू अयोध्या की गलियों में राधे कृष्ण - राधे कृष्ण जप रहा था । अयोध्या का एक साधू वहां से गुजरा तो राधे कृष्ण राधे कृष्ण सुनकर उस साधू को बोला - अरे जपना ही है तो सीता राम जपो, क्या उस टेढ़े का नाम जपते हो ? वृन्दावन का साधू भड़क कर बोला - जरा जबान संभाल कर बात करो, हमारी जबान पान खिलाती हैं तो लात भी खिलाती है । तुमने मेरे इष्ट को टेढ़ा कैसे बोला ? अयोध्या वाला साधू बोला इसमें गलत क्या है ? तुम्हारे कन्हैया तो हैं ही टेढ़े । कुछ भी लिख कर देख लो- उनका नाम टेढ़ा - कृष्ण उनका धाम टेढ़ा - वृन्दावन वृन्दावन वाला साधू बोला चलो मान लिया, पर उनका काम भी टेढ़ा है और वो खुद भी टेढ़ा है, ये तुम कैसे कह रहे हो ? अयोध्या वाला साधू बोला - अच्छा अब ये भी बताना पडेगा ? तो सुन - यमुना में नहाती गोपियों के कपड़े चुराना, रास रचाना, माक्खन चुराना - ये कौन से सीधे लोगों के काम हैं ? और बता आज तक किसी ने उसे सीधे खडे देखा है क्या कभी ? ......... वृन्दावन के साधू को बड़ी बेईज्जती महसूस हुई , और सीधे जा पहुंचा बिहारी जी के मंदिर । अपना डंडा डोरिया पटक कर बोला - इतने साल तक खूब उल्लू बनाया लाला तुमने । ये लो अपनी लकुटी, कमरिया और पटक कर बोला ये अपनी सोटी भी संभालो । हम तो चले अयोध्या राम जी की शरण में ,और सब पटक कर साधू चल दिया। अब बिहारी जी मंद मंद मुस्कुराते हुए उसके पीछे पीछे । साधू की बाँह पकड कर बोले अरे " भई तुझे किसी ने गलत भड़का दिया है " पर साधू नही माना तो बोले, अच्छा जाना है तो तेरी मरजी , पर यह तो बता राम जी सीधे और मै टेढ़ा कैसे ? कहते हुए बिहारी जी कुए की तरफ नहाने चल दिये । वृन्दावन वाला साधू गुस्से से बोला - " नाम आपका टेढ़ा- कृष्ण, धाम आपका टेढ़ा- वृन्दावन, काम तो सारे टेढ़े- कभी किसी के कपडे चुरा लिए ,कभी गोपियों के वस्त्र चुरा लिए और सीधे तुझे कभी किसी ने खड़े होते नहीं देखा। तेरा सीधा है क्या "। अयोध्या वाले साधू से हुई सारी झैं झैं और बईज़्जती की सारी भड़ास निकाल दी। बिहारी जी मुस्कुराते रहे और चुपके से अपनी बाल्टी कूँए में गिरा दी । फिर साधू से बोले अच्छा चले जाना पर जरा मदद तो कर जा, तनिक एक सरिया ला दे तो मैं अपनी बाल्टी निकाल लूं । साधू सरिया ला देता है और श्री कृष्ण सरिये से बाल्टी निकालने की कोशिश करने लगते हैं । साधू बोला इतनी अक्ल नही है क्या कि सीधे सरिये से भला बाल्टी कैसे निकलेगी ? सरिये को तनिक टेढ़ा कर, फिर देख कैसे एक बार में बाल्टी निकल आएगी ! बिहारी जी मुस्कुराते रहे और बोले - जब सीधेपन से इस छोटे से कूंए से एक छोटी सी बाल्टी नहीं निकाल पा रहा, तो तुम्हें इतने बडे़ भवसागर से कैसे पार लगाउंगा ! अरे आज का इंसान तो इतने गहरे पापों के भवसागर में डूब चुका है कि इस से निकाल पाना मेरे जैसे टेढ़े के ही बस की बात है ! *टेढ़े वृन्दावन बिहारी लाल की जय🙏

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Aruna Sharma(Anu) Aug 14, 2019

🙏🕉️🌹जय श्री राम जी🌹🕉️🙏 🙏🇮🇳🌹🇮🇳🌹🇮🇳🌹🇮🇳🌹🇮🇳🙏 🙏🌹🇮🇳🌹🇮🇳🌹🇮🇳🌹🇮🇳🌹🙏 🙏🇮🇳🌹🇮🇳🌹🇮🇳🌹🇮🇳🌹🇮🇳🙏 🙏🇮🇳🌹जय हिंद जय भारत🌹🇮🇳🙏 🙏🌹इस राखी पर, खूब सारी शुभकामनाओं के साथ, खास भाभियों के लिये यह रचना! 🙏🙏 नई मिट्टी में अपनी जड़े जमाकर, स्नेह के धागे से रक्षा पर्व बुनती है बंधन तो भाई की कलाई पर होता है, भाभी गांठ की मजबूती बनती है बहनों का बचपना ज़िंदा रखती है, घर में प्रेम के झूले बांधती हैं तिलक तो भाई के माथे पर होता है, भाभी उसकी लालिमा बनती है अपनों सी मुस्कान ले आती है, मायके का उजास बन जाती है मिठाई तो भाई के मुंह में जाती है, भाभी उसकी मिठास बनती है परंपरा के धागों से जोड़े रखती है, वह दो घरों का सेतु होती है अक्षत तो भाई पर वारे जाते हैं, भाभी उसका आशीर्वाद बनती है अपनी खुशियों से ऊपर वह रिश्ते की गरिमा का प्रकाश रखती है दीपक तो भाई के सामने होता है, भाभी उसकी दीपशिखा बनती है जीवन की थाली का मीठा सा रिश्ता, भाभी उसका ज़ायका बनती है उपहार तो भाई से मिल जाता है, भाभी उसके साथ अनकहा मायका बनती है🙏🕉️🙏🕉️🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

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Aruna Sharma(Anu) Aug 13, 2019

🙏🕉️🌹🕉️🌹🕉️🌹🕉️🌹🕉️🌹🕉️🙏 🍁🍁🍁🍁जय श्री राम🍁🍁🍁🍁 🌞सुबह सुबह🤵 मिया 👩बीवी का झगड़ा हो गया, बीवी गुस्से मे बोली - बस, बहुत कर लिया बरदाश्त, अब एक मिनट भी तुम्हारे साथ नही रह सकती। पति भी गुस्से मे था, बोला "मैं भी तुम्हे झेलते झेलते तंग आ चुका हुं। पति गुस्से मे ही दफ्तर चले गया पत्नी ने अपनी मां को फ़ोन किया और बताया के वो सब छोड़ छाड़ कर बच्चो समेत मायके आ रही है, अब और ज़्यादा नही रह सकती इस जहन्नुम मे। मां ने कहा - बेटी बहु बन के आराम से वही बैठ, तेरी बड़ी बहन भी अपने पति से लड़कर आई थी, और इसी ज़िद्द मे तलाक लेकर बैठी हुई है, अब तुने वही ड्रामा शुरू कर दिया है, ख़बरदार जो तुने इधर कदम भी रखा तो... सुलह कर ले पति से, वो इतना बुरा भी नही है। मां ने लाल झंडी दिखाई तो बेटी के होश ठिकाने आ गए और वो फूट फूट कर रो दी, जब रोकर थकी तो दिल हल्का हो चुका था, पति के साथ लड़ाई का सीन सोचा तो अपनी खुद की भी काफ़ी गलतियां नज़र आई। मुहं हाथ धोकर फ्रेश हुई और पति के पसंद की डीश बनाना शुरू कर दी, और साथ स्पेशल खीर भी बना ली, सोचा कि शाम को पति से माफ़ी मांग लुंगी, अपना घर फिर भी अपना ही होता है पति शाम को जब घर आया तो पत्नी ने उसका अच्छे से स्वागत किया, जैसे सुबह कुछ हुआ ही ना हो पति को भी हैरत हुई। खाना खाने के बाद पति जब खीर खा रहा था तो बोला डिअर, कभी कभार मैं भी ज़्यादती कर जाता हुं, तुम दिल पर मत लिया करो, इंसान हुं, गुस्सा आ ही जाता है"। पति पत्नी का शुक्रिया अदा कर रहा था, और पत्नी दिल ही दिल मे अपनी मां को दुआएं दे रही थी, जिसकी सख़्ती ने उसको अपना फैसला बदलने पर मजबूर किया था, वरना तो जज़्बाती फैसला घर तबाह कर देता। अगर माँ-बाप अपनी शादीशुदा बेटी की हर जायज़ नाजायज़ बात को सपोर्ट करना बंद कर दे तो रिश्ते बच जाते है। 🙏🌹🕉️🌹🕉️🌹जय श्री राधे🌹🕉️🌹🕉️🙏

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Aruna Sharma(Anu) Aug 11, 2019

🙏🌹🕉️🌹हर हर महादेव जी🌹🕉️🌹🙏 🙏🌹🕉️🌹 *राधे राधे जी🌹🕉️🌹🙏 🇲🇰 *सत्संग महिमा* 🇲🇰 ✍ एक संत के पास *बहरा* 👂 आदमी सत्संग सुनने आता था, उसके कान तो थे पर वे नाडिय़ों से जुड़े नहीं थे, एकदम बहरा, एक शब्द भी नहीं सुन सकता था। किसी ने संत से कहा:- ‘‘बाबा जी, वह जो वृद्ध बैठे हैं वह कथा सुनते-सुनते हंसते तो हैं पर हैं बहरे।’’ बाबा जी सोचने लगे:- ‘‘बहरा होगा तो कथा सुनता नहीं होगा और कथा नहीं सुनता होगा तो रस नहीं आता होगा। रस नहीं आता होगा तो यहां बैठना भी नहीं चाहिए, उठ कर चले जाना चाहिए, यह जाता भी नहीं है।’ बाबा जी ने इशारे से उस वृद्ध को अपने पास बुला लिया। सेवक से कागज-कलम मंगाया और लिख कर पूछा:- ‘‘तुम सत्संग में क्यों आते हो?’’ उस वृद्ध ने लिख कर जवाब दिया:- ‘‘बाबा जी, सुन तो नहीं सकता हूं लेकिन यह तो समझता हूं कि ईश्वर प्राप्त *महापुरुष* जब बोलते हैं तो पहले परमात्मा में डुबकी मारते हैं। *संसारी आदमी* बोलता है तो उसकी वाणी मन व बुद्धि को छूकर आती है लेकिन *ब्रह्मज्ञानी संत* जब बोलते हैं तो उनकी वाणी आत्मा को छूकर आती है। *मैं आपकी अमृतवाणी तो नहीं सुन पाता हूं पर उसके आंदोलन मेरे शरीर को स्पर्श करते हैं।* दूसरी बात आपकी अमृतवाणी सुनने के लिए जो पुण्यात्मा लोग आते हैं उनके बीच बैठने का पुण्य भी मुझे प्राप्त होता है । *बाबा जी ने देखा कि यह तो ऊंची समझ के धनी हैं,* उन्होंने कहा:- ‘‘मैं यह जानना चाहता हूं कि आप रोज सत्संग में समय पर पहुंच जाते हैं और आगे बैठते हैं, ऐसा क्यों?’’ उस वृद्ध ने लिखकर जबाब दिया:- *‘‘मैं परिवार में सबसे बड़ा हूं, बड़े जैसा करते हैं वैसा ही छोटे भी करते हैं।* *मैं सत्संग में आने लगा तो मेरा बड़ा लड़का भी इधर आने लगा।* शुरूआत में कभी-कभी मैं बहाना बनाकर उसे ले आता था। *मैं उसे ले आया तो वह अपनी पत्नी को यहां ले आया, पत्नी बच्चों को ले आई, अब सारा कुटुम्ब सत्संग में आने लगा, कुटुम्ब को संस्कार मिल गए।’’* 👉 *ब्रह्मचर्चा, आत्मज्ञान का सत्संग ऐसा है कि यह समझ में नहीं आए तो क्या, सुनाई नहीं देता हो तो भी इसमें शामिल होने मात्र से कुछ पुण्य तो होता है और पूरे परिवार का कल्याण होने लगता है।* *फिर जो व्यक्ति श्रद्धा एवं एकाग्रतापूर्वक सुनकर इसका मनन करे उसके परम कल्याण में संशय ही क्या....* 😴😴😴😴😴😴😴😴😴😴😴 🙏शिव💥 पिता परमात्मा को याद कर के सोये।।।🙏🌝

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Aruna Sharma(Anu) Aug 7, 2019

🙏🕉️🌹🕉️🌹🕉️🌹🕉️🌹🕉️🌹🕉️🙏 🙏🕉️एक भरोसा भगवान पर🕉️🙏 🙏🌺🌹🌺🙏🌺🌹🌺🙏 *एक बच्चा रोज अपने दादा जी को सायंकालीन पूजा करते देखता था।बच्चा भी उनकी इस पूजा को देखकर अंदर से स्वयं इस अनुष्ठान को पूर्ण करने की इच्छा रखता था,किन्तु दादा जी की उपस्थिति उसे अवसर नही देती थी।* एक दिन दादा जी को शाम को आने में विलंब हुआ,इस अवसर का लाभ लेते हुए बच्चे ने समय पर पूजा प्रारम्भ कर दी। जब दादा जी आये,तो दीवार के पीछे से बच्चे की पूजा देख रहे थे। बच्चा बहुत सारी अगरबत्ती एवं अन्य सभी सामग्री का अनुष्ठान में यथाविधि प्रयोग करता है और फिर अपनी प्रार्थना में कहता है, *भगवान जी प्रणाम🙏* आप मेरे दादा जी को स्वस्थ रखना,और दादी के घुटनो के दर्द को ठीक कर देना क्योकि दादा दादी को कुछ हो गया,तो मुझे चॉकलेट कौन देगा फिर आगे कहता है,भगवान जी मेरे सभी दोस्तों को अच्छा रखना,वरना मेरे साथ कौन खेलेगा फिर मेरे पापा और मम्मी को ठीक रखना,घर के कुत्ते को भी ठीक रखना,क्योकि उसे कुछ हो गया,तो घर को चोरों से कौन बचाएगा (लेकिन भगवान यदि आप बुरा न मानो तो एक बात कहू, सबका ध्यान रखना,लेकिन उससे पहले आप अपना ध्यान रखना,क्योकि आपको कुछ हो गया,तो हम सबका क्या होगा) इस सहज प्रार्थना को सुनकर दादा की आंखों में भी आंसू आ गए,क्योकि ऐसी प्रार्थना उन्होंने न कभी की थी,और न सुनी थी।🥺 Ek bharosa bhagwanji ke uper 🙏🌹👏👏👏🌹🙏

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