Aruna Sharma (anu) Feb 20, 2020

🙏🌹महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं🌹🙏 1-भक्ति शिव की करें ताकि शिव शक्ति मिले, 2-शिवरात्रि के शुभ अवसर पर आपके जीवन को एक नई अच्छी शुरूआत मिले. 3- भगवान शिव की भक्ति से नूर मिलता हैं, दिल के धड़कनों को सुरूर मिलता हैं, जो भी आता भोले के द्वार कुछ न कुछ जरूर मिलता हैं. 4- बाबा ने जिस पर भी डाली छाया रातो रात उसकी किस्मत की पलट गई छाया वो सब मिला उसे बिन मांगे ही जो कभी किसी ने ना पाया शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं 5- शिव की बनी रहे आप पर छाया पलट दे जो आपकी किस्मत की काया मिले आपको वो सब इस अपनी ज़िन्दगी में जो कभी किसी ने भी ना पाया 6- भोले की भक्ति में मुझे डूब जाने दो शिव के चरणों में शीश झुकाने दो आई है शिवरात्रि मेरे भोले बाबा का दिन आज के दिन मुझे भोले के गीत गाने दो 7- शिव की ज्योति से नूर मिलता है सबके दिलो को सुरूर मिलता हैं जो भी जाता है भोले के द्वार कुछ न कुछ ज़रूर मिलता हैं 8- सारा जहाँ है जिसकी शरण में नमन है उस शिव जी के चरण में बने उस शिवजी के चरणों की धुल आओ मिल कर चढ़ाये हम श्रद्धा के फूल 9- पी के भांग जमा लो रंग जिन्दगी बीते खुशियों के संग लेकर नाम शिव भोले का दिल में भर लो शिवरात्रि की उमंग महा शिवरात्रि की हार्दिक बधाई 10- यह कैसी घटा छाई हैं हवा में नई सुर्खी आई है फ़ैली है जो सुगंध हवा में जरुर महादेव ने चिलम लगाई है 11- जगह-जगह में शिव हैं हर जगह में शिव है है वर्तमान शिव और भविष्य भी शिव हैं ! आप सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं 12- शिव की बनी रहे आप पर छाए पलट दे जो आपकी किस्मत की काया मिले आपको वो सब इस अपनी ज़िन्दगी में जो कभी किसी ने भी ना पाया ! शिवरात्रि की ढेरों बधाई 13- भोले आयें आपके द्वार भर दें जीवन में खुशियों की बहार ना रहे जीवन में कोई भी दुःख हर ओर फ़ैल जाये सुख ही सुख 14- कहते है सांस लेने से जान आती है, सांस ना लो तो जान जाती है, कैसे कह दुं कि मै सांसों के सहारे जिन्दा हुं, मेरी सांस तो ॐ नम: शिवाये: बोलने के बाद आती है. 15- शिव सत्य है, शिव अनंत है, शिव अनादि है, शिव भगवंत है, शिव ओंकार है, शिव ब्रह्म है, शिव शक्ति है, शिव भक्ति है. 16- ॐ नमः शिवाय आप सभी भक्तो को शिवरात्रि की शुभकामनाएँ! 17- भोले की लीला में मुझे डूब जाने दो शिव के चरणों में शीश झुकाने दो आज है शिवरात्रि मेरे भोले बाबा का दिन आज के दिन मुझे भोले के गीत गाने दो 18- महाकाल का नारा लगा के दुनिया में हम छा गये दुश्मन भी छुपकर बोले वो देखो महाकाल के भक्त आ गये 19- अदभुत भोले तेरी माया अमरनाथ में डेरा जमाया नीलकंठ में तेरा साया तू ही मेरे दिल में समाया 20- बम भोले डमरू वाले शिव का प्यारा नाम है भक्तो पे दर्श दिखाता हरी का प्यारा नाम है शिव जी की जिसने दिल से की है पूजा भगवान शंकर ने सवारा उसका काम है ! 🙏🌹महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌹🙏

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Aruna Sharma (anu) Feb 16, 2020

🙏🙏🌹🌹जय बाबा खाटू श्याम 🌹🌹🙏🙏 एक *साधू* किसी नदी के पनघट पर गया और पानी पीकर पत्थर पर सिर रखकर सो गया....!!! पनघट पर पनिहारिन आती-जाती रहती हैं!!! तो आईं तो एक ने कहा- *"आहा! साधु हो गया, फिर भी तकिए का मोह नहीं गया*... *पत्थर का ही सही, लेकिन रखा तो है।"* पनिहारिन की बात साधु ने सुन ली... *उसने तुरंत पत्थर फेंक दिया*... दूसरी बोली-- *"साधु हुआ, लेकिन खीज नहीं गई..* *अभी रोष नहीं गया,तकिया फेंक दिया।"* तब साधु सोचने लगा, अब वह क्या करें ? तब तीसरी बोली-- *"बाबा! यह तो पनघट है,यहां तो हमारी जैसी पनिहारिनें आती ही रहेंगी, बोलती ही रहेंगी, उनके कहने पर तुम बार-बार परिवर्तन करोगे तो साधना कब करोगे?"* लेकिन चौथी ने बहुत ही सुन्दर और एक बड़ी अद्भुत बात कह दी- *"क्षमा करना,लेकिन हमको लगता है,तूमने सब कुछ छोड़ा लेकिन अपना चित्त नहीं छोड़ा है,अभी तक वहीं का वहीं बने हुए है।* *दुनिया पाखण्डी कहे तो कहे, तुम जैसे भी हो,हरिनाम लेते रहो।"* *सच तो यही है, दुनिया का तो काम ही है कहना...* आप ऊपर देखकर चलोगे तो कहेंगे... *"अभिमानी हो गए।"* नीचे देखोगे तो कहेंगे... *"बस किसी के सामने देखते ही नहीं।"* आंखे बंद करोगे तो कहेंगे कि... *"ध्यान का नाटक कर रहा है।"* चारो ओर देखोगे तो कहेंगे कि... *"निगाह का ठिकाना नहीं। निगाह घूमती ही रहती है।"* और परेशान होकर आंख फोड़ लोगे तो यही दुनिया कहेगी कि... *"किया हुआ भोगना ही पड़ता है।"* *ईश्वर*को राजी करना आसान है, लेकिन संसार को राजी करना असंभव है.. *इसलिए दुनिया क्या कहेगी, उस पर ध्यान दोगे तो आप अपना ध्यान🙇🏻‍♀🙇🏻‍♂ नहीं लगा पाओगे।* 🙏🙏🌹🌹जय बाबा खाटू श्याम जी🌹🌹🙏🙏

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Aruna Sharma (anu) Feb 13, 2020

🙏🌹🌹🚩🚩Jai shree shyam 🚩🚩🌹🌹🙏 🙏🌹मित्रो!एक फ़कीर नदी के किनारे बैठा था किसी ने पूछा बाबा क्या कर रहे हो? फ़कीर ने कहा इंतज़ार कर रहा हूँ की पूरी नदी बह जाएं तो फिर पार करूँ।उस व्यक्ति ने कहा कैसी बात करते हो बाबा पूरा जल बहने के इंतज़ार मे तो तुम कभी नदी पार ही नही कर पाओगे।फ़कीर ने कहा यही तो मै तुम लोगो को समझाना चाहता हूँ की तुम लोग जो सदा यह कहते रहते हो की एक बार जीवन की ज़िम्मेदारियाँ पूरी हो जाये तो सेवा,सिमरण,सत्संग शुरू करेंगे;जैसे नदी का जल खत्म नही होगा हमको इस जल से ही पार जाने का रास्ता बनाना है इस प्रकार याद रखो जीवन खत्म हो जायेगा पर जीवन के काम खत्म नही होंगे इन कार्यो जिम्मेदारियों के बीच मे से ही आगे की तैयारी यानि सेवा,सिमरण,सत्संग का मार्ग बनाना है..... 🙏🏻🙏🏻🙏🏻👏🏻👏🏻🌹

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Aruna Sharma (anu) Jan 28, 2020

🙏🌹☘️🍀 Happy Basant Panchami 🍀☘️🌹🙏 बसन्त पंचमी 29 जनवरी विशेष 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ बसंत पंचमी की तिथि पूजा विधि, शुभ मुहूर्त व महत्व 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ बसंत पंचमी भारतीय संस्कृति में एक बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने वाला त्यौहार है जिसमे हमारी परम्परा, भौगौलिक परिवर्तन , सामाजिक कार्य तथा आध्यात्मिक पक्ष सभी का सम्मिश्रण है, हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है वास्तव में भारतीय गणना के अनुसार वर्ष भर में पड़ने वाली छः ऋतुओं (बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर) में बसंत को ऋतुराज अर्थात सभी ऋतुओं का राजा माना गया है और बसंत पंचमी के दिन को बसंत ऋतु का आगमन माना जाता है इसलिए बसंत पंचमी ऋतू परिवर्तन का दिन भी है जिस दिन से प्राकृतिक सौन्दर्य निखारना शुरू हो जाता है पेड़ों पर नयी पत्तिया कोपले और कालिया खिलना शुरू हो जाती हैं पूरी प्रकृति एक नवीन ऊर्जा से भर उठती है। बसंत पंचमी को विशेष रूप से सरस्वती जयंती के रूप में मनाया जाता है यह माता सरस्वती का प्राकट्योत्सव है इसलिए इस दिन विशेष रूप से माता सरस्वती की पूजा उपासना कर उनसे विद्या बुद्धि प्राप्ति की कामना की जाती है इसी लिए विद्यार्थियों के लिए बसंत पंचमी का त्यौहार बहुत विशेष होता है। बसंत पंचमी का त्यौहार बहुत ऊर्जामय ढंग से और विभिन्न प्रकार से पूरे भारत वर्ष में मनाया जाता है इस दिन पीले वस्त्र पहनने और खिचड़ी बनाने और बाटने की प्रथा भी प्रचलित है तो इस दिन बसंत ऋतु के आगमन होने से आकास में रंगीन पतंगे उड़ने की परम्परा भी बहुत दीर्घकाल से प्रचलन में है। बसंत पंचमी के दिन का एक और विशेष महत्व भी है बसंत पंचमी को मुहूर्त शास्त्र के अनुसार एक स्वयं सिद्ध मुहूर्त और अनसूज साया भी माना गया है अर्थात इस दिन कोई भी शुभ मंगल कार्य करने के लिए पंचांग शुद्धि की आवश्यकता नहीं होती इस दिन नींव पूजन, गृह प्रवेश, वाहन खरीदना, व्यापार आरम्भ करना, सगाई और विवाह आदि मंगल कार्य किये जा सकते है। माता सरस्वती को ज्ञान, सँगीत, कला, विज्ञान और शिल्प-कला की देवी माना जाता है। भक्त लोग, ज्ञान प्राप्ति और सुस्ती, आलस्य एवं अज्ञानता से छुटकारा पाने के लिये, आज के दिन देवी सरस्वती की उपासना करते हैं। कुछ प्रदेशों में आज के दिन शिशुओं को पहला अक्षर लिखना सिखाया जाता है। दूसरे शब्दों में वसन्त पञ्चमी का दिन विद्या आरम्भ करने के लिये काफी शुभ माना जाता है इसीलिये माता-पिता आज के दिन शिशु को माता सरस्वती के आशीर्वाद के साथ विद्या आरम्भ कराते हैं। सभी विद्यालयों में आज के दिन सुबह के समय माता सरस्वती की पूजा की जाती है। वसन्त पञ्चमी का दिन हिन्दु कैलेण्डर में पञ्चमी तिथि को मनाया जाता है। जिस दिन पञ्चमी तिथि सूर्योदय और दोपहर के बीच में व्याप्त रहती है उस दिन को सरस्वती पूजा के लिये उपयुक्त माना जाता है। हिन्दु कैलेण्डर में सूर्योदय और दोपहर के मध्य के समय को पूर्वाह्न के नाम से जाना जाता है। ज्योतिष विद्या में पारन्गत व्यक्तियों के अनुसार वसन्त पञ्चमी का दिन सभी शुभ कार्यो के लिये उपयुक्त माना जाता है। इसी कारण से वसन्त पञ्चमी का दिन अबूझ मुहूर्त के नाम से प्रसिद्ध है और नवीन कार्यों की शुरुआत के लिये उत्तम माना जाता है। वसन्त पञ्चमी के दिन किसी भी समय सरस्वती पूजा की जा सकती है परन्तु पूर्वाह्न का समय पूजा के लिये श्रेष्ठ माना जाता है। सभी विद्यालयों और शिक्षा केन्द्रों में पूर्वाह्न के समय ही सरस्वती पूजा कर माता सरस्वती का आशीर्वाद ग्रहण किया जाता है। नीचे सरस्वती पूजा का जो मुहूर्त दिया गया है उस समय पञ्चमी तिथि और पूर्वाह्न दोनों ही व्याप्त होते हैं। इसीलिये वसन्त पञ्चमी के दिन सरस्वती पूजा इसी समय के दौरान करना श्रेष्ठ है। सरस्वती, बसंतपंचमी पूजा 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ 1. प्रात:काल स्नाना करके पीले वस्त्र धारण करें। 2. मां सरस्वती की प्रतिमा को सामने रखें तत्पश्चात कलश स्थापित कर प्रथम पूज्य गणेश जी का पंचोपचार विधि पूजन उपरांत सरस्वती का ध्यान करें ध्यान मंत्र 〰️🔸〰️ या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।। या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ।। शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्व्यापनीं । वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यांधकारपहाम्।। हस्ते स्फाटिक मालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम् । वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्।।2।। 3. मां की पूजा करते समय सबसे पहले उन्हें आचमन व स्नान कराएं। 4. माता का श्रंगार कराएं । 5. माता श्वेत वस्त्र धारण करती हैं इसलिए उन्हें श्वेत वस्त्र पहनाएं। 6. प्रसाद के रुप में खीर अथवा दुध से बनी मिठाईयों का भोग लगाएं। 7. श्वेत फूल माता को अर्पण करें। 8. तत्पश्चात नवग्रह की विधिवत पूजा करें। बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा के साथ सरस्वती चालीसा पढ़ना और कुछ मंत्रों का जाप आपकी बुद्धि प्रखर करता है। अपनी सुविधानुसार आप ये मंत्र 11, 21 या 108 बार जाप कर सकते हैं। निम्न मंत्र या इनमें किसी भी एक मंत्र का यथा सामर्थ्य जाप करें 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ 1. सरस्वती महाभागे विद्ये कमललोचने विद्यारूपा विशालाक्षि विद्यां देहि नमोस्तुते॥ 2. या देवी सर्वभूतेषू, मां सरस्वती रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। 3. ऐं ह्रीं श्रीं वाग्वादिनी सरस्वती देवी मम जिव्हायां। सर्व विद्यां देही दापय-दापय स्वाहा।। 4. एकादशाक्षर सरस्वती मंत्र ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः। 5. वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणी विनायकौ।। 6. सरस्वत्यै नमो नित्यं भद्रकाल्यै नमो नम:। वेद वेदान्त वेदांग विद्यास्थानेभ्य एव च।। सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने। विद्यारूपे विशालाक्षी विद्यां देहि नमोस्तुते।। 7. प्रथम भारती नाम, द्वितीय च सरस्वती तृतीय शारदा देवी, चतुर्थ हंसवाहिनी पंचमम् जगतीख्याता, षष्ठम् वागीश्वरी तथा सप्तमम् कुमुदीप्रोक्ता, अष्ठमम् ब्रह्मचारिणी नवम् बुद्धिमाता च दशमम् वरदायिनी एकादशम् चंद्रकांतिदाशां भुवनेशवरी द्वादशेतानि नामानि त्रिसंध्य य: पठेनर: जिह्वाग्रे वसते नित्यमं ब्रह्मरूपा सरस्वती सरस्वती महाभागे विद्येकमललोचने विद्यारूपा विशालाक्षि विद्या देहि नमोस्तुते” 8. स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए। जेहि पर कृपा करहिं जन जानि। कवि उर अजिर नचावहिं वानी॥ मोरि सुधारहिं सो सब भांति। जासु कृपा नहिं कृपा अघाति॥ 9. गुरु गृह पढ़न गए रघुराई। अलप काल विद्या सब पाई॥ माँ सरस्वती चालीसा 〰️〰️🔸🔸〰️〰️ दोहा 〰️🔸〰️ जनक जननि पदम दुरज, निजब मस्तक पर धारि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि।। पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु। दुष्टजनों के पाप को, मातु तुही अब हन्तु।। चौपाई 〰️🔸〰️ जय श्रीसकल बुद्धि बलरासी।जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी।। जय जय जय वीणाकर धारी।करती सदा सुहंस सवारी।। रूप चतुर्भुज धारी माता।सकल विश्व अन्दर विख्याता।। जग में पाप बुद्धि जब होती।तबही धर्म की फीकी ज्योति।। तबहि मातु का निज अवतारा।पाप हीन करती महितारा।। बाल्मीकि जी था हत्यारा।तव प्रसाद जानै संसारा।। रामचरित जो रचे बनाई । आदि कवि की पदवी पाई।। कालीदास जो भये विख्याता । तेरी कृपा दृष्टि से माता।। तुलसी सूर आदि विद्वाना । भये जो और ज्ञानी नाना।। तिन्ह न और रहेउ अवलम्बा । केवल कृपा आपकी अम्बा।। करहु कृपा सोई मातु भवानी।दुखित दीन निज दासहि जानी।। पुत्र करई अपराध बहूता । तेहि न धरई चित माता।। राखु लाज जननि अब मेरी।विनय करऊ भांति बहुतेरी।। मैं अनाथ तेरी अवलंबा । कृपा करउ जय जय जगदंबा।। मधुकैटभ जो अति बलवाना । बाहुयुद्ध विष्णु से ठाना।। समर हजार पांच में घोरा।फिर भी मुख उनसे नहीं मोरा।। मातु सहाय कीन्ह तेहि काला।बुद्धि विपरीत भई खलहाला।। तेहि ते मृत्यु भई खल केरी । पुरवहु मातु मनोरथ मेरी।। चण्ड मुण्ड जो थे विख्याता । क्षण महु संहारे उन माता।। रक्त बीज से समरथ पापी । सुर मुनि हृदय धरा सब कांपी।। काटेउ सिर जिम कदली खम्बा।बार बार बिनवऊं जगदंबा।। जगप्रसिद्ध जो शुंभ निशुंभा।क्षण में बांधे ताहि तूं अम्बा।। भरत-मातु बुद्धि फेरेऊ जाई । रामचन्द्र बनवास कराई।। एहि विधि रावन वध तू कीन्हा।सुर नर मुनि सबको सुख दीन्हा।। को समरथ तव यश गुण गाना।निगम अनादि अनंत बखाना।। विष्णु रूद्र जस कहिन मारी।जिनकी हो तुम रक्षाकारी।। रक्त दन्तिका और शताक्षी।नाम अपार है दानव भक्षी।। दुर्गम काज धरा पर कीन्हा।दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा।। दुर्ग आदि हरनी तू माता । कृपा करहु जब जब सुखदाता।। नृप कोपित को मारन चाहे । कानन में घेरे मृग नाहै।। सागर मध्य पोत के भंजे । अति तूफान नहिं कोऊ संगे।। भूत प्रेत बाधा या दु:ख में।हो दरिद्र अथवा संकट में।। नाम जपे मंगल सब होई।संशय इसमें करई न कोई।। पुत्रहीन जो आतुर भाई । सबै छांड़ि पूजें एहि भाई।। करै पाठ नित यह चालीसा । होय पुत्र सुन्दर गुण ईसा।। धूपादिक नैवेद्य चढ़ावै।संकट रहित अवश्य हो जावै।। भक्ति मातु की करैं हमेशा।निकट न आवै ताहि कलेशा।। बंदी पाठ करें सत बारा । बंदी पाश दूर हो सारा।। रामसागर बांधि हेतु भवानी।कीजे कृपा दास निज जानी।। दोहा 〰️🔸〰️ मातु सूर्य कान्ति तव, अंधकार मम रूप। डूबन से रक्षा कार्हु परूं न मैं भव कूप।। बलबुद्धि विद्या देहु मोहि, सुनहु सरस्वती मातु। रामसागर अधम को आश्रय तू ही दे दातु।। माँ सरस्वती वंदना 〰️〰️🔸🔸〰️〰️ वर दे, वीणावादिनि वर दे ! प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव भारत में भर दे ! काट अंध-उर के बंधन-स्तर बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर; कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर जगमग जग कर दे ! नव गति, नव लय, ताल-छंद नव नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव; नव नभ के नव विहग-वृंद को नव पर, नव स्वर दे ! वर दे, वीणावादिनि वर दे। कुछ क्षेत्रों में देवी की पूजा कर प्रतिमा को विसर्जित भी किया जाता है। विद्यार्थी मां सरस्वती की पूजा कर गरीब बच्चों में कलम व पुस्तकों का दान करें। संगीत से जुड़े व्यक्ति अपने साज पर तिलक लगा कर मां की आराधना करें व मां को बांसुरी भेंट करें। पूजा समय 〰️🔸〰️ पंचमी तिथि अारंभ👉 29/जनवरी/2020 को 10.45 बजे से पंचमी तिथि समाप्त👉 30/जनवरी/2020 को 01.18 बजे तक सरस्वती पूजा का मुहूर्त सुबह 10:45 बजे से मध्यान 12:52 तक का है और इस मुहूर्त की अवधि 2 घंटे 07 मिनट तक रहेगी दोपहर तक इस पूजन को क‍िया जा सकता है। बसंत पंचमी के पूरे दिन आप अपने किसी भी नए कार्य का आरम्भ कर सकते हैं ये एक स्वयं सिद्ध और श्रेष्ठ मुहूर्त होता है। सरस्वती स्तोत्रम् 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ श्वेतपद्मासना देवि श्वेतपुष्पोपशोभिता। श्वेताम्बरधरा नित्या श्वेतगन्धानुलेपना॥ श्वेताक्षी शुक्लवस्रा च श्वेतचन्दन चर्चिता। वरदा सिद्धगन्धर्वैर्ऋषिभिः स्तुत्यते सदा॥ स्तोत्रेणानेन तां देवीं जगद्धात्रीं सरस्वतीम्। ये स्तुवन्ति त्रिकालेषु सर्वविद्दां लभन्ति ते॥ या देवी स्तूत्यते नित्यं ब्रह्मेन्द्रसुरकिन्नरैः। सा ममेवास्तु जिव्हाग्रे पद्महस्ता सरस्वती॥ ॥इति श्रीसरस्वतीस्तोत्रं संपूर्णम्॥ बसन्त पंचमी कथा 〰️〰️🔸🔸〰️〰️ सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की। अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़का, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा। इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ। यह प्राकट्य एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया। पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। ये विद्या और बुद्धि प्रदाता हैं। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी भी हैं। बसन्त पंचमी के दिन को इनके जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं। ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है- प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु। अर्थात ये परम चेतना हैं। सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं। हममें जो आचार और मेधा है उसका आधार भगवती सरस्वती ही हैं। इनकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है। पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने सरस्वती से ख़ुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि वसंत पंचमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जाएगी और यूं भारत के कई हिस्सों में वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की भी पूजा होने लगी जो कि आज तक जारी है। 🙏🌷आरती श्री सरस्वती जी 🌷🙏 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 🕉जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ 🕉जय सरस्वती माता॥ चन्द्रवदनि पद्मासिनि, कृति मंगलकारी। सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥ 🕉जय सरस्वती माता॥ बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला। शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥ 🕉जय सरस्वती माता॥ देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया। बैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥ 🕉जय सरस्वती माता॥ विद्या दान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो। मोह अज्ञान और निरखा का, जग से नाश करो॥ 🕉जय सरस्वती माता॥ धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो। ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥ 🕉जय सरस्वती माता॥ माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे। हितकारी सुखकारी ज्ञान भक्ति पावे॥ 🕉जय सरस्वती माता॥ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता। सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ 🕉जय सरस्वती माता 🙏🙏॥ 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️

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Aruna Sharma (anu) Jan 27, 2020

🙏🙏🌹🌹💯%*कटु सत्य*🌹🌹🙏🙏 🙏🙏🌹🌹🌹 जय श्री राम 🌹🌹🙏🙏 ईसाईयों को इंग्लिश आती है वो बाइबिल पढ लेते है, उधर मुस्लिम को उर्दू आती है वो कुरान शरीफ़ पढ लेते हैं, सिखों को गुरबानी का पता है वो श्री गुरू ग्रन्थ साहिब पढ लेते है । हिन्दूओ को संस्कृत नही आती वो ना वेद पढ पाते है न उपनिषद । इस से बडा दुर्भाग्य क्या होगा हमारा *संस्कृत ही विश्व की सर्वश्रेष्ठ भाषा है इसे अवश्य सीखें* *प्रतिदिन स्मरण योग्य शुभ सुंदर मंत्र। संग्रह* *🔹 प्रात: कर-दर्शनम्🔹* कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती। करमूले तू गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥ *🔸पृथ्वी क्षमा प्रार्थना🔸* समुद्र वसने देवी पर्वत स्तन मंडिते। विष्णु पत्नी नमस्तुभ्यं पाद स्पर्शं क्षमश्वमेव॥ *🔺त्रिदेवों के साथ नवग्रह स्मरण🔺* ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्र: शनिराहुकेतव: कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्॥ *स्नान मन्त्र* गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु॥ *🌞 सूर्यनमस्कार🌞* ॐ सूर्य आत्मा जगतस्तस्युषश्च आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने। दीर्घमायुर्बलं वीर्यं व्याधि शोक विनाशनम् सूर्य पादोदकं तीर्थ जठरे धारयाम्यहम्॥ ॐ मित्राय नम: ॐ रवये नम: ॐ सूर्याय नम: ॐ भानवे नम: ॐ खगाय नम: ॐ पूष्णे नम: ॐ हिरण्यगर्भाय नम: ॐ मरीचये नम: ॐ आदित्याय नम: ॐ सवित्रे नम: ॐ अर्काय नम: ॐ भास्कराय नम: ॐ श्री सवितृ सूर्यनारायणाय नम: आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीदमम् भास्कर। दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥ *🔥दीप दर्शन🔥* शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तु ते॥ दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते॥ *🌷 गणपति स्तोत्र 🌷* गणपति: विघ्नराजो लम्बतुन्ड़ो गजानन:। द्वै मातुरश्च हेरम्ब एकदंतो गणाधिप:॥ विनायक: चारूकर्ण: पशुपालो भवात्मज:। द्वादश एतानि नामानि प्रात: उत्थाय य: पठेत्॥ विश्वम तस्य भवेद् वश्यम् न च विघ्नम् भवेत् क्वचित्। विघ्नेश्वराय वरदाय शुभप्रियाय। लम्बोदराय विकटाय गजाननाय॥ नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय। गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥ शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजं। प्रसन्नवदनं ध्यायेतसर्वविघ्नोपशान्तये॥ *⚡आदिशक्ति वंदना ⚡* सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ *🔴 शिव स्तुति 🔴* कर्पूर गौरम करुणावतारं, संसार सारं भुजगेन्द्र हारं। सदा वसंतं हृदयार विन्दे, भवं भवानी सहितं नमामि॥ *🔵 विष्णु स्तुति 🔵* शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥ *⚫ श्री कृष्ण स्तुति ⚫* कस्तुरी तिलकम ललाटपटले, वक्षस्थले कौस्तुभम। नासाग्रे वरमौक्तिकम करतले, वेणु करे कंकणम॥ सर्वांगे हरिचन्दनम सुललितम, कंठे च मुक्तावलि। गोपस्त्री परिवेश्तिथो विजयते, गोपाल चूडामणी॥ मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम्‌। यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम्‌॥ *श्रीराम वंदना* लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्। कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥ ♦ *श्रीरामाष्टक♦* हे रामा पुरुषोत्तमा नरहरे नारायणा केशवा। गोविन्दा गरुड़ध्वजा गुणनिधे दामोदरा माधवा॥ हे कृष्ण कमलापते यदुपते सीतापते श्रीपते। बैकुण्ठाधिपते चराचरपते लक्ष्मीपते पाहिमाम्॥ 🔱 *एक श्लोकी रामायण* आदौ रामतपोवनादि गमनं हत्वा मृगं कांचनम्। वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीवसम्भाषणम्॥ बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं लंकापुरीदाहनम्। पश्चाद्रावण कुम्भकर्णहननं एतद्घि श्री रामायणम्॥ 🍁 *सरस्वती वंदना* या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वींणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपदमासना॥ या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता। सा माम पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्याऽपहा॥ 🔔 *हनुमान वंदना* अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम्‌। दनुजवनकृषानुम् ज्ञानिनांग्रगणयम्‌। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम्‌। रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥ मनोजवं मारुततुल्यवेगम जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणम् प्रपद्ये॥ 🌹 *स्वस्ति-वाचन* ॐ स्वस्ति न इंद्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्ट्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥ * *शांति पाठ ** ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्‌ पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥ ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष (गुँ) शान्ति:, पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:। वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:, सर्व (गुँ) शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥ *॥ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥* 🚩 बहुत ही सुंदर संग्रह इसे हर हिन्दू को अपने 'saver' में डाले या प्रिंट आउट ले । ऐसा संग्रह सरलता से नही मिलता । एक प्रति परिवार के बच्चों को भी दे । 🙏🙏🙏

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Aruna Sharma (anu) Jan 21, 2020

🙏🌹🌹🥀🥀जय बाबा खाटू श्याम🥀🥀🌹🌹🙏 🌺🌸🍀 श्रीब्रज-रज महिमा 🌺🌸🍀 *एक बार प्रयाग राज का कुम्भ योग था। चारों ओर से लोग प्रयाग-तीर्थ जाने के लिये उत्सुक हो रहे थे। श्रीनन्द महाराज तथा उनके गोष्ठ के भाई-बन्धु भी परस्पर परामर्श करने लगे कि हम भी चलकर प्रयाग-राज में स्नान-दान-पुण्य कर आवें ।* *किन्तु कन्हैया को यह कब मंज़ूर था। प्रातः काल का समय था , श्रीनन्द बाबा वृद्ध गोपों के साथ अपनी बैठक के बाहर बैठे थे कि तभी सामने से एक भयानक काले रंग का घोड़ा सरपट भागता हुआ आया। भयभीत हो उठे सब कि कंस का भेजा हुआ कोई असुर आ रहा है ।* *वह घोड़ा आया और ज्ञान-गुदड़ी वाले स्थल की कोमल-कोमल रज में लोट-पोट होने लगा। सबके देखते-देखते उसका रंग बदल गया, काले से गोरा, अति मनोहर रूपवान हो गया वह। श्रीनन्दबाबा सब आश्चर्यचकित हो उठे। वह घोड़ा सबके सामने मस्तक झुका कर प्रणाम करने लगा । श्रीनन्दमहाराज ने पूछा-' कौन है भाई तू ? कैसे आया और काले से गोरा कैसे हो गया ?* *वह घोड़ा एक सुन्दर रूपवान विभूषित महापुरुष रूप में प्रकट हो हाथ जोड़ कर बोला- हे व्रजराज! मैं प्रवयागराज हूँ। विश्व के अच्छे बुरे सब लोग आकर मुझमें स्नान करते हैं और अपने पापों को मुझमें त्याग कर जाते हैं, जिससे मेरा रंग काला पड़ जाता है। अतः मैं हर कुम्भ से पहले यहाँ श्रीवृन्दावन आकर इस परम पावन स्थल की धूलि में अभिषेक प्राप्त करता हूँ। मेरे समस्त पाप दूर हो जाते हैं। निर्मल-शुद्ध होकर मैं यहाँ से आप व्रजवासियों को प्रणाम कर चला जाता हूँ। अब मेरा प्रणाम स्वीकार करें ।* *इतना कहते ही वहाँ न घोड़ा था न सुन्दर पुरुष। श्रीकृष्ण बोले- बाबा! क्या विचार कर रहे हो? प्रयाग चलने का किस दिन मुहूर्त है ?* *नन्दबाबा और सब व्रजवासी एक स्वर में बोल उठे- अब कौन जायेगा प्रयागराज? प्रयागराज हमारे व्रज की रज में स्नान कर पवित्र होता है, फिर हमारे लिये वहाँ क्या धरा है ? सबने अपनी यात्रा स्थगित कर दी । ऐसी महिमा है श्रीब्रज रज व श्रीधाम वृन्दावन की ।।* *"धनि धनि श्रीवृन्दावन धाम॥* *जाकी महिमा बेद बखानत,* *सब बिधि पूरण काम॥* *आश करत हैं जाकी रज की,* *ब्रह्मादिक सुर ग्राम॥* *लाडिलीलाल जहाँ नित विहरत,* *रतिपति छबि अभिराम॥* *रसिकनको जीवन धन कहियत,* *मंगल आठों याम॥* *नारायण बिन कृपा जुगलवर,* *छिन न मिलै विश्राम॥* 🌺🌸🙏जय जय श्री वृंदावन धाम🌺🌸🍀 🌺🌸🙏जय जय श्री राधेश्याम🌺🌸🍀

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Aruna Sharma (anu) Jan 5, 2020

🙏🌹🌹🥀🥀🌹🌹🥀🥀🌹🌹🙏 -* 👇विशेष जानकारी👇* *xxxxxxxxxx 01 xxxxxxxxxx* *दो लिंग :* नर और नारी । *दो पक्ष :* शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। *दो पूजा :* वैदिकी और तांत्रिकी (पुराणोक्त)। *दो अयन :* उत्तरायन और दक्षिणायन। *xxxxxxxxxx 02 xxxxxxxxxx* *तीन देव :* ब्रह्मा, विष्णु, शंकर। *तीन देवियाँ :* महा सरस्वती, महा लक्ष्मी, महा गौरी। *तीन लोक :* पृथ्वी, आकाश, पाताल। *तीन गुण :* सत्वगुण, रजोगुण, तमोगुण। *तीन स्थिति :* ठोस, द्रव, गेस। *तीन स्तर :* प्रारंभ, मध्य, अंत। *तीन पड़ाव :* बचपन, जवानी, बुढ़ापा। *तीन रचनाएँ :* देव, दानव, मानव। *तीन अवस्था :* जागृत, मृत, बेहोशी। *तीन काल :* भूत, भविष्य, वर्तमान। *तीन नाड़ी :* इडा, पिंगला, सुषुम्ना। *तीन संध्या :* प्रात:, मध्याह्न, सायं। *तीन शक्ति :* इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति, क्रियाशक्ति। *xxxxxxxxxx 03 xxxxxxxxxx* *चार धाम :* बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम्, द्वारका। *चार मुनि :* सनत, सनातन, सनंद, सनत कुमार। *चार वर्ण :* ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र। *चार निति :* साम, दाम, दंड, भेद। *चार वेद :* सामवेद, ॠग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद। *चार स्त्री :* माता, पत्नी, बहन, पुत्री। *चार युग :* सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग, कलयुग। *चार समय :* सुबह,दोपहर, शाम, रात। *चार अप्सरा :* उर्वशी, रंभा, मेनका, तिलोत्तमा। *चार गुरु :* माता, पिता, शिक्षक, आध्यात्मिक गुरु। *चार प्राणी :* जलचर, थलचर, नभचर, उभयचर। *चार जीव :* अण्डज, पिंडज, स्वेदज, उद्भिज। *चार वाणी :* ओम्कार्, अकार्, उकार, मकार्। *चार आश्रम :* ब्रह्मचर्य, ग्रहस्थ, वानप्रस्थ, सन्यास। *चार भोज्य :* खाद्य, पेय, लेह्य, चोष्य। *चार पुरुषार्थ :* धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष। *चार वाद्य :* तत्, सुषिर, अवनद्व, घन। *xxxxxxxxxx 04 xxxxxxxxxx* *पाँच तत्व :* पृथ्वी, आकाश, अग्नि, जल, वायु। *पाँच देवता :* गणेश, दुर्गा, विष्णु, शंकर, सुर्य। *पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ :* आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा। *पाँच कर्म :* रस, रुप, गंध, स्पर्श, ध्वनि। *पाँच उंगलियां :* अँगूठा, तर्जनी, मध्यमा, अनामिका, कनिष्ठा। *पाँच पूजा उपचार :* गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य। *पाँच अमृत :* दूध, दही, घी, शहद, शक्कर। *पाँच प्रेत :* भूत, पिशाच, वैताल, कुष्मांड, ब्रह्मराक्षस। *पाँच स्वाद :* मीठा, चर्खा, खट्टा, खारा, कड़वा। *पाँच वायु :* प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान। *पाँच इन्द्रियाँ :* आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा, मन। *पाँच वटवृक्ष :* सिद्धवट (उज्जैन), अक्षयवट (Prayagraj), बोधिवट (बोधगया), वंशीवट (वृंदावन), साक्षीवट (गया)। *पाँच पत्ते :* आम, पीपल, बरगद, गुलर, अशोक। *पाँच कन्या :* अहिल्या, तारा, मंदोदरी, कुंती, द्रौपदी। *xxxxxxxxxx 05 xxxxxxxxxx* *छ: ॠतु :* शीत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, बसंत, शिशिर। *छ: ज्ञान के अंग :* शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष। *छ: कर्म :* देवपूजा, गुरु उपासना, स्वाध्याय, संयम, तप, दान। *छ: दोष :* काम, क्रोध, मद (घमंड), लोभ (लालच), मोह, आलस्य। *xxxxxxxxxx 06 xxxxxxxxxx* *सात छंद :* गायत्री, उष्णिक, अनुष्टुप, वृहती, पंक्ति, त्रिष्टुप, जगती। सात स्वर : सा, रे, ग, म, प, ध, नि। *सात सुर :* षडज्, ॠषभ्, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत, निषाद। *सात चक्र :* सहस्त्रार, आज्ञा, विशुद्ध, अनाहत, मणिपुर, स्वाधिष्ठान, मूलाधार। *सात वार :* रवि, सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि। *सात मिट्टी :* गौशाला, घुड़साल, हाथीसाल, राजद्वार, बाम्बी की मिट्टी, नदी संगम, तालाब। *सात महाद्वीप :* जम्बुद्वीप (एशिया), प्लक्षद्वीप, शाल्मलीद्वीप, कुशद्वीप, क्रौंचद्वीप, शाकद्वीप, पुष्करद्वीप। *सात ॠषि :* वशिष्ठ, विश्वामित्र, कण्व, भारद्वाज, अत्रि, वामदेव, शौनक। *सात ॠषि :* वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र, भारद्वाज। *सात धातु (शारीरिक) :* रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, वीर्य। *सात रंग :* बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल। *सात पाताल :* अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल, पाताल। *सात पुरी :* मथुरा, हरिद्वार, काशी, अयोध्या, उज्जैन, द्वारका, काञ्ची। *सात धान्य :* गेहूँ, चना, चांवल, जौ मूँग,उड़द, बाजरा। *xxxxxxxxxx 07 xxxxxxxxxx* *आठ मातृका :* ब्राह्मी, वैष्णवी, माहेश्वरी, कौमारी, ऐन्द्री, वाराही, नारसिंही, चामुंडा। *आठ लक्ष्मी :* आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, संतानलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी। *आठ वसु :* अप (अह:/अयज), ध्रुव, सोम, धर, अनिल, अनल, प्रत्युष, प्रभास। *आठ सिद्धि :* अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व। *आठ धातु :* सोना, चांदी, तांबा, सीसा जस्ता, टिन, लोहा, पारा। *xxxxxxxxxx 08 xxxxxxxxxx* *नवदुर्गा :* शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कुष्मांडा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री। *नवग्रह :* सुर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु। *नवरत्न :* हीरा, पन्ना, मोती, माणिक, मूंगा, पुखराज, नीलम, गोमेद, लहसुनिया। *नवनिधि :* पद्मनिधि, महापद्मनिधि, नीलनिधि, मुकुंदनिधि, नंदनिधि, मकरनिधि, कच्छपनिधि, शंखनिधि, खर्व/मिश्र निधि। *xxxxxxxxxx 09 xxxxxxxxxx* *दस महाविद्या :* काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्तिका, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला। *दस दिशाएँ :* पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, आग्नेय, नैॠत्य, वायव्य, ईशान, ऊपर, नीचे। *दस दिक्पाल :* इन्द्र, अग्नि, यमराज, नैॠिति, वरुण, वायुदेव, कुबेर, ईशान, ब्रह्मा, अनंत। *दस अवतार (विष्णुजी) :* मत्स्य, कच्छप, वाराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध, कल्कि। *दस सती :* सावित्री, अनुसुइया, मंदोदरी, तुलसी, द्रौपदी, गांधारी, सीता, दमयन्ती, सुलक्षणा, अरुंधती। 🕉🙏✡ नोट : कृपया उपर्युक्त पोस्ट को बच्चो को कण्ठस्थ करा दे। इससे घर में भारतीय संस्कृति जीवित रहेगी।

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