🙏🙏🌹🌹जय श्री श्याम्🌹🌹🙏 दूसरों को सही-गलत साबित करने में जल्दबाजी न करें | 2 कहानियाँ पहली कहानी : ट्रेन में एक पिता-पुत्र सफर रहे थे. 24 वर्षीय पुत्र खिड़की से बाहर देख रहा था, अचानक वो चिल्लाया – पापा देखो पेड़ पीछे की ओर भाग रहे हैं ! पिता कुछ बोला नहीं, बस सुनकर मुस्कुरा दिया. ये देखकर बगल में बैठे एक युवा दम्पति को अजीब लगा और उस लड़के के बचकाने व्यवहार पर दया भी आई. तब तक वो लड़का फिर से बोला – पापा देखो बादल हमारे साथ दौड़ रहे हैं ! युवा दम्पति से रहा नहीं गया और वो उसके पिता से बोल पड़े – आप अपने लड़के को किसी अच्छे डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाते ? लड़के का पिता मुस्कुराया और बोला – हमने दिखाया था और हम अभी सीधे हॉस्पिटल से ही आ रहे हैं. मेरा लड़का जन्म से अंधा था और आज वो यह दुनिया पहली बार देख रहा है. ———- दूसरी कहानी : एक प्रोफेसर अपनी क्लास में कहानी सुना रहे थे, जोकि इस प्रकार है – एक बार समुद्र के बीच में एक बड़े जहाज पर बड़ी दुर्घटना हो गयी. कप्तान ने शिप खाली करने का आदेश दिया. जहाज पर एक युवा दम्पति थे. जब लाइफबोट पर चढ़ने का उनका नम्बर आया तो देखा गया नाव पर केवल एक व्यक्ति के लिए ही जगह है. इस मौके पर आदमी ने औरत को धक्का दिया और नाव पर कूद गया. डूबते हुए जहाज पर खड़ी औरत ने जाते हुए अपने पति से चिल्लाकर एक वाक्य कहा. अब प्रोफेसर ने रुककर स्टूडेंट्स से पूछा – तुम लोगों को क्या लगता है, उस स्त्री ने अपने पति से क्या कहा होगा ? ज्यादातर विद्यार्थी फ़ौरन चिल्लाये – स्त्री ने कहा – मैं तुमसे नफरत करती हूँ ! I hate you ! प्रोफेसर ने देखा एक स्टूडेंट एकदम शांत बैठा हुआ था, प्रोफेसर ने उससे पूछा कि तुम बताओ तुम्हे क्या लगता है ? वो लड़का बोला – मुझे लगता है, औरत ने कहा होगा – हमारे बच्चे का ख्याल रखना ! प्रोफेसर को आश्चर्य हुआ, उन्होंने लडके से पूछा – क्या तुमने यह कहानी पहले सुन रखी थी ? लड़का बोला- जी नहीं, लेकिन यही बात बीमारी से मरती हुई मेरी माँ ने मेरे पिता से कही थी. प्रोफेसर ने दुखपूर्वक कहा – तुम्हारा उत्तर सही है ! प्रोफेसर ने कहानी आगे बढ़ाई – जहाज डूब गया, स्त्री मर गयी, पति किनारे पहुंचा और उसने अपना बाकि जीवन अपनी एकमात्र पुत्री के समुचित लालन-पालन में लगा दिया. कई सालों बाद जब वो व्यक्ति मर गया तो एक दिन सफाई करते हुए उसकी लड़की को अपने पिता की एक डायरी मिली. डायरी से उसे पता चला कि जिस समय उसके माता-पिता उस जहाज पर सफर कर रहे थे तो उसकी माँ एक जानलेवा बीमारी से ग्रस्त थी और उनके जीवन के कुछ दिन ही शेष थे. ऐसे कठिन मौके पर उसके पिता ने एक कड़ा निर्णय लिया और लाइफबोट पर कूद गया. उसके पिता ने डायरी में लिखा था – तुम्हारे बिना मेरे जीवन को कोई मतलब नहीं, मैं तो तुम्हारे साथ ही समंदर में समा जाना चाहता था. लेकिन अपनी संतान का ख्याल आने पर मुझे तुमको अकेले छोड़कर जाना पड़ा. जब प्रोफेसर ने कहानी समाप्त की तो, पूरी क्लास में शांति थी. ————— इस संसार में कईयों सही गलत बातें हैं लेकिन उसके अतिरिक्त भी कई जटिलतायें हैं, जिन्हें समझना आसान नहीं. इसीलिए ऊपरी सतह से देखकर बिना गहराई को जाने-समझे हर परिस्थिति का एकदम सही आकलन नहीं किया जा सकता. – कलह होने पर जो पहले माफ़ी मांगे, जरुरी नहीं उसी की गलती हो. हो सकता है वो रिश्ते को बनाये रखना ज्यादा महत्वपूर्ण समझता हो. – दोस्तों के साथ खाते-पीते, पार्टी करते समय जो दोस्त बिल पे करता है, जरुरी नहीं उसकी जेब नोटों से ठसाठस भरी हो. हो सकता है उसके लिए दोस्ती के सामने पैसों की अहमियत कम हो. – जो लोग आपकी मदद करते हैं, जरुरी नहीं वो आपके एहसानों के बोझ तले दबे हों. वो आपकी मदद करते हैं क्योंकि उनके दिलों में दयालुता और करुणा का निवास है. आजकल जीवन कठिन इसीलिए हो गया है क्योंकि हमने लोगो को समझना कम कर दिया और फौरी तौर पर judge करना शुरू कर दिया है. थोड़ी सी समझ और थोड़ी सी मानवता ही आपको सही रास्ता दिखा सकती है. जीवन में निर्णय लेने के कई ऐसे पल आयेंगे, सो अगली बार किसी पर भी अपने पूर्वाग्रह का ठप्पा लगाने से पहले विचार अवश्य करें. 🙏🙏🌹हर हर महादेव🌹🌹🙏

+277 प्रतिक्रिया 29 कॉमेंट्स • 78 शेयर

🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏 🙏🌷🌷जय श्री राधे राधे 🌷🌷🙏 ***** कड़वी बहु ***** जानकी के बहु बेटे शहर में बस चुके थे लेकिन उसका गाँव छोड़ने का मन नहीं हुआ इसलिए अकेले ही रहती थी। वह रोजाना की तरह मंदिर जा कर आ रही थी। रास्ते मे उसका संतुलन बिगड़ा और गिर पड़ी। गाँव के लोगों ने उठाया, पानी पिलाया और समझाया 'अब इस अवस्था में अकेले रहना उचित नहीं। किसी भी बेटे के पास चली जाओ।' जानकी ने भी परिस्थिति को स्वीकार कर बेटे बहुओं को ले जाने के लिए कहने हेतु फोन करने का मन बना लिया। जानकी की तीन बहुएँ थी। एक बड़ी सविता जो आज्ञाकारी मंझली शोभग आज्ञाकारी और छोटी ममता कड़वी। जानकी अति धार्मिक थी। कोई व्रत त्यौहार आता पहले से ही तीनों बहुओं को सचेत कर देती। 'सविता' खुशी खुशी व्रत करती। शोभग भी मान जाती थी लेकिन ममता एक कान से सुनती ओर दूसरे कान से निकाल देती या विरोध पर उतर आती । "आप हर त्योहार पर व्रत रखवा कर उसके आनंद को कष्ट में परिवर्तित कर देती हैं।" "तेरी जुबान लड़ाने की आदत है। कुछ व्रत तप कर ले आगे तक साथ जाएँगे।" दोनों की किसी न किसी बात पर बहस हो जाती। गुस्से में एक दिन जानकी ने कह दिया था "तू क्या समझती है! बुढापे में मुझे तेरी जरूरत पड़ने वाली है। तो अच्छी तरह समझ ले। सड़ जाऊँगी लेकिन तेरे पास नहीं आऊँगी।" अब सबसे पहले उसने सविता को फोन किया "गिर गई हूँ। आजकल कई बार ऐसा हो गया है। सोचती हूँ तुम्हारे पास ही आजाउँ।" सविता ने कहा "नवरात्र में? अभी नहीं माँ जी। नंगे पाँव रह रही हूं आजकल। किसी का छुआ भी नहीं खाती।" शोभाग को भी फोन किया लेकिन उसने भी बहाना कर टाल दिया। जब सविता और शोभाग ही टाल चुकी तो ममता को फोन करने का कोई फायदा नहीं था और अहम अभी टूटा था लेकिन खत्म नहीं हुआ था। फोन पर हाथ रख आने वाले कठिन समय की कल्पना करने लगी थी। तभी फोन की घण्टी बजी। आवाज़ से ही समझ गई थी ममता है "माँ जी गिर गये ना? आपने तो बताया नहीं लेकिन मैंने भी जासूस छोड़ रखे हैं। पोते को भेज रही हूँ लेने।" सासु -"क्या तुझे मेरे शब्द याद नहीं?" ममता -"जिंदगी भर नहीं भूलूँगी। आपने कहा था सड़ जाऊँगी तो भी तेरे पास नहीं आऊँगी। तभी मैंने व्रत ले लिया था इस बुढ़िया को सड़ने नहीं देना है। मेरा तप अब शुरू होगा।" क्योंकि मेरी ने मुझे मेरी माँ ने यह शिक्षा दी थी कि बुढापे में सास , ससुर की ही सबसे बड़ा महाव्रत ओर महातप है । 🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏

+506 प्रतिक्रिया 84 कॉमेंट्स • 75 शेयर

🙏🌹🌹जय बाबा खाटु श्याम 🌹🌹🙏 * ☝🏻एक बार की बात है। कोई मालिक का प्यारा जो आंखों से अंधा था। चला गर्म रेत के रास्ते, नंगे पांव अपने सतगुरू से मिलने। संत तो घट-घट की जानते हैं। उन्होेंने देखा कि कोई मेरा प्यारा आंखों से लाचार, गर्म रेत पर चल कर, लंबा रास्ता तय करके मेरे पास मुझे मिलने को आ रहा है। संत कहां अपने प्यारे का दुख देख सकते हैं। अपने बाकी शिश्यों से बोले के मैं अपने किसी प्यारे से मिलने जा रहा हूं। जब सतगुरू अपने उस आंखों से लाचार प्यारे से मिलने पहुंचे, मिल कर बोले- तेरे प्यार के सदके! प्यारे मांग क्या चाहिये। दास बोला- जी कुछ नहीं। सतगुरू बोले- तेरा दिल बहुत बड़ा है। अब दो चीजें मांग। तब वो दास बोला- सच्चे पातशाह! मेरी आंखे लौटा दो। ताकी मैं आप के दर्शन कर सकूं। मालिक ने मेहर की। दास को दिखाई देने लगा। (क्योंकि कहते हैं ना ------ करता करे ना कर सके, गुरू करे सो होये।) दास ने जी भर दर्शन किये। तब सतगुरु ने कहा- अब दूसरी मांग मांगो। तो दास रो पड़ा, बोला- सच्चे पातशाह! मेरी ये आंखें वापिस ले लो। सतगुरू बोले- प्यारे ये तुम क्या मांग रहे हो? तब दास बोला- सच्चे पातशाह! मैं आप को देख कर कुछ और नहीं देखना चाहता। सतगुरू जी ने दास को गले लगा लिया। (फिर तो गुरु राजी, तो रब राजी).....🙏🏻

+605 प्रतिक्रिया 139 कॉमेंट्स • 237 शेयर

🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏 🙏🙏निर्जला एकादशी बथाई जी🙏🙏 *एकादशी से अगले दिन एक भिखारी एक सज्जन की दुकान पर भीख मांगने पहुंचा। सज्जन व्यक्ति ने 1 रुपये का सिक्का निकाल कर उसे दे दिया।* *भिखारी को प्यास भी लगी थी,वो बोला बाबूजी एक गिलास पानी भी पिलवा दो,गला सूखा जा रहा है। सज्जन व्यक्ति गुस्से में तुम्हारे बाप के नौकर बैठे हैं क्या हम यहां,पहले पैसे,अब पानी,थोड़ी देर में रोटी मांगेगा,चल भाग यहां से।* *भिखारी बोला:-* *बाबूजी गुस्सा मत कीजिये मैं आगे कहीं पानी पी लूंगा।पर जहां तक मुझे याद है,कल इसी दुकान के बाहर मीठे पानी की छबील लगी थी और आप स्वयं लोगों को रोक रोक कर जबरदस्ती अपने हाथों से गिलास पकड़ा रहे थे,मुझे भी कल आपके हाथों से दो गिलास शर्बत पीने को मिला था।मैंने तो यही सोचा था,आप बड़े धर्मात्मा आदमी है,पर आज मेरा भरम टूट गया।* *कल की छबील तो शायद आपने लोगों को दिखाने के लिये लगाई थी।* *मुझे आज आपने कड़वे वचन बोलकर अपना कल का सारा पुण्य खो दिया। मुझे माफ़ करना अगर मैं कुछ ज्यादा बोल गया हूँ तो।* *सज्जन व्यक्ति को बात दिल पर लगी, उसकी नजरों के सामने बीते दिन का प्रत्येक दृश्य घूम गया। उसे अपनी गलती का अहसास हो रहा था। वह स्वयं अपनी गद्दी से उठा और अपने हाथों से गिलास में पानी भरकर उस बाबा को देते हुए उसे क्षमा प्रार्थना करने लगा।* *भिखारी:-* *बाबूजी मुझे आपसे कोई शिकायत नही,परन्तु अगर मानवता को अपने मन की गहराइयों में नही बसा सकते तो एक दो दिन किये हुए पुण्य व्यर्थ है।* *मानवता का मतलब तो हमेशा शालीनता से मानव व जीव की सेवा करना है।* *आपको अपनी गलती का अहसास हुआ,ये आपके व आपकी सन्तानों के लिये अच्छी बात है।* *आप व आपका परिवार हमेशा स्वस्थ व दीर्घायु बना रहे ऐसी मैं कामना करता हूँ,यह कहते हुए भिखारी आगे बढ़ गया।* *सेठ ने तुरंत अपने बेटे को आदेश देते हुए कहा:-* *कल से दो घड़े पानी दुकान के आगे आने जाने वालों के लिये जरूर रखे हो।उसे अपनी गलती सुधारने पर बड़ी खुशी हो रही थी।* 🌹🌹 *सिर्फ दिखावे के लिए किये गए पुण्यकर्म निष्फल हैं, सदा हर प्राणी के लिए आपके मन में शुभकामना शुभ भावना हो यही सच्चा पुण्य है*🙏🏼

+772 प्रतिक्रिया 157 कॉमेंट्स • 501 शेयर

🙏🌹🥀💕💕🥀🌹💕💕🥀🌹🙏 🙏🎉🎉जय श्री राधे कृष्णा 🎉🎉🙏 यह मैसेज जनसाधारण के लिए है और बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसे कृपया अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य और खासकर बच्चों को अवश्य पढ़ाएं और समझाएं:- कई वर्ष पहले जे0 पी0 होटल वसंत विहार नई दिल्ली में आग की दुर्घटना हुई, जिसमें बहुत सारे भारतीय मारे गए लेकिन जापानी और अमेरिकन नहीं। जानते हैं क्यों? मैं आपको बताता हूँ:- 1. सभी अमेरिकन और जापानी लोगों ने अपने कमरों के दरवाज़ों के नीचे खाली जगहों में गीले तौलिये लगा दिए और खाली जगहों को सील कर दिया, जिससे धुआं उनके कमरों तक नहीं पहुंच सका। या बहुत कम मात्रा में पहुंचा। 2. इन सभी विदेशी मेहमानों ने अपनी नाक पर गीले रुमाल बांध लिए, जिससे उनके फेफड़ों में धुआं प्रवेश न कर सके। 3. सभी विदेशी मेहमान अपने अपने कमरों के फर्श पर औंधे लेट गए। (क्योंकि धुआं हमेशा ऊपर की ओर उठता है) इस प्रकार जब तक अग्निशमन विभाग के कर्मचारी आये, तब तक वे अपने आपको जीवित रख पाने में सफल रहे। जबकि होटल के भारतीय मेहमानों को इन सुरक्षा उपायों के बारे में पता ही नहीं था इसलिए वे इधर से उधर भागने लगे और उनके फेफड़ों में धुआं भर गया और कुछ समय में ही उनकी मौत हो गई। अभी हाल ही में (24.05.2019) को सूरत (गुजरात) के एक कोचिंग सेंटर में आग की दुर्घटना हुई जिसमें कई बच्चों की जान इस अज्ञानता और भगदड़ के कारण हो गई। यदि उन्हें इन सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी होती तो शायद इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की जान न जाती। याद रखें, आग लगने की स्थिति में ज़्यादातर मौतें शरीर में धुआं जाने से होती हैं, जबकि आग के कारण कम होती हैं। क्योंकि आग की स्थिति में हम लोग धैर्य से काम नहीं लेते हैं और इधर से उधर भागने लगते हैं। भागने से हमारी सांसें तेज़ हो जाती हैं जिसके कारण बहुत सारा धुआं हमारे फेफड़ों में प्रवेश कर जाता है और हम बेहोश हो जाते हैं और ज़मीन पर गिर जाते हैं तथा फिर आग की लपटों से घिर जाते हैं। इसलिए आग लगने की स्थिति में ये सुरक्षा उपाय अपनाएं:- 1. भगदड़ न मचाएं और अपने होश कायम रखें ताकि आप दूसरों की मदद कर सकें। 2. अपने नाक पर गीला रुमाल या गीला लेकिन घना कपड़ा बांधें। तथा फर्श पर लेट जाएं। 3. यदि आप किसी कमरे में बंद हों तो उसके खिड़की दरवाज़े बंद कर दें तथा उनके नीचे या ऊपर या कहीं से भी धुआं आने की संभावना हो तो उस जगह को भी गीले कपड़े से सील कर दें। 4 अपने आसपास के लोगों से भी ऐसा ही करने को कहें। 5. अग्निशमन की सहायता की प्रतीक्षा करें। याद रखें, अग्निशमन वाले प्रत्येक कमरे की जांच करते हैं और वे फंसे हुए व्यक्तियों को ढूंढ लेंगे। 6. यदि आपका मोबाइल काम कर रहा हो तो आप लगातार 100, 101 या 102 पर मदद के लिए कॉल करते रहें। उन्हें आप अपने स्थान की जानकारी भी दें। वे आप तक सबसे पहले पहुंचेंगे। आप इस मैसेज को अपने प्रियजनों तक कुछ सेकंड में पहुंचा सकते हैं। दुर्घटना में कोई भी फंस सकता है। इसलिए सुरक्षा उपायों की जानकारी सबको अवश्य होनी चाहिए। मेरी सलाह है, आपके हर प्रियजनों तक पहुंचना चाहिए। 🙏🙏🙏🙏🙏 शुभरात्रि वंदन जी🙏🌹🌹

+555 प्रतिक्रिया 105 कॉमेंट्स • 126 शेयर

🙏🌹💕💕🥀🥀💕💕🥀🥀🌹🙏 🎉🎉🎉जय श्री राधे कृष्णा जी🎉🎉🎉 मेरी माँ का ब्लड प्रेशर और शुगर बढ़ा हुआ था, सो सवेरे सवेरे उन्हें लेकर उनके पुराने डॉक्टर के पास गई, क्लिनिक से बाहर उनके गार्डन का नज़ारा दिख रहा था जहां डॉक्टर साहब योग और व्यायाम कर रहे थे मुझे करीब 45 मिनिट इंतज़ार करना पड़ा। कुछ देर में डॉक्टर साहब अपना नींबू पानी लेकर क्लिनिक आये और माँ का चेकअप करने लगे। उन्होंने मम्मी से कहा आपकी दवाइयां बढ़ानी पड़ेंगी और एक पर्चे पर करीब 5 या 6 दवाइयों के नाम लिखे। उन्होंने माँ को दवाइयां रेगुलर रूप से खाने की हिदायत दी। बाद में मैंने उत्सुकता वश उनसे पूछा कि क्या आप बहुत समय से योग कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि पिछले 15 साल से वो योग कर रहे हैं और ब्लड प्रेशर व अन्य बहुत सी बीमारियों से बचे हुए हैं! मैं अपने हाथ मे लिए हुए माँ के उस पर्चे को देख रही थी जिसमे उन्होंने BP और शुगर कम करने की कई दवाइयां लिख रखी थी? 🤔 सर में भयंकर दर्द था सो अपने परिचित केमिस्ट की दुकान से सर दर्द की गोली लेने रुकी। दुकान पर नौकर था ,उसने मुझे गोली का पत्ता दिया तो उससे मैंने पूछा गोयल साहब कहाँ गए हैं, तो उसने कहा साहब के सर में दर्द था सो सामने वाले कैफ़े में काफी पीने गये हैं अभी आते होंगे!! मैं अपने हाथ मे लिए उस दवाई के पत्ते को देख रही थी? 🤔🤔 अपनी मित्र के साथ एक ब्यूटी पार्लर गई। मेरी सहेली को हेयर ट्रीटमेंट कराना था क्योंकी उनके बाल काफी खराब हो रहे थे। रिसेप्शन में बैठी लड़की ने उन्हें कई पैकेज बताये और उनके फायदे भी। पैकेज 1200 से लेकर 3000 तक थे कुछ डिस्काउंट के बाद मेरी मित्र को उन्होंने 3000 रु वाला पैकेज 2400रु में कर दिया। हेयर ट्रीटमेंट के समय उनका ट्रीटमेंट करने वाली लड़की के बालों से अजीब सी खुशबू आ रही थी मैंने उससे पूछा कि आपने क्या लगा रखा है कुछ अजीब सी खुशबू आ रही है, तो उसने कहा उसने तेल में मेथी और कपूर मिला कर लगा रखा है इससे बाल सॉफ्ट हो जाते हैं और जल्दी बढ़ते हैं। मैं अपनी मित्र की शक्ल देख रही थी जो 2400 रु में अपने बाल अच्छे कराने आई थी 🤔🤔🤔 मेरी रईस कज़िन जिनका बड़ा डेयरी फार्म है उनके फार्म पर गई ।फार्म में करीब 150 विदेशी गाय थी जिनका दूध मशीनों द्वारा निकाल कर प्रोसेस किया जा रहा था। एक अलग हिस्से में 2 देसी गैया हरा चारा खा रही थी। पूछने पर बताया घर उन गायों का दूध नही आता जिनका दुध उनके डेयरी फार्म से सप्लाई होता है बल्कि परिवार के इस्तेमाल के लिए इन 2 गायों का दूध,दही व घी इस्लेमाल होता है। मै उन लोगों के बारे में सोच रही थी जो ब्रांडेड दूध को बेस्ट मानकर खरीदते हैं 🤔🤔🤔🤔 एक प्रसिद्ध रेस्टुरेंट जो कि अपनी विशिष्ट थाली और शुद्ध खाने के लिए प्रसिद्ध है हम खाना खाने गये। निकलते वक्त वहां के मैनेजर ने बडी विनम्रता से पूछा मैडम खाना कैसा लगा,हम बिल्कुल शुद्ध घी तेल और मसाले यूज़ करते हैं, हम कोशिश करते हैं बिल्कुल घर जैसा खाना लगे। मैंने खाने की तारीफ़ की तो उन्होंने अपना विजिटिंग कार्ड देने को अपने केबिन में गये। काउंटर पर एक 3 खण्ड का स्टील का टिफिन रखा था। एक वेटर ने दूसरे से कहा"सुनील सर का खाना अंदर केबिन में रख दे ,बाद में खाएंगे" मैंने वेटर से पूछा क्या सुनील जी यहां नही खाते तो उसने जवाब दिया" सुनील सर कभी बाहर नही खाते, हमेशा घर से आया हुआ खाना ही खाते हैं" मैं अपने हाथ मे 670 रु के बिल को देख रही थी 🤔🤔🤔🤔🤔 ये कुछ वाकये हैं जिनसे मुझे समझ आया कि हम जिसे सही जीवन शैली समझते हैं वो हमें भृमित करने का जरिया मात्र है। हम मार्केटिंग के बैंक का ATM हैं जिसमें से कुशल मार्केटिंग वाले लोग मोटा पैसा निकाल लेते हैं। अक्सर जिन चीजों को हमे बेचा जाता है उन्हें बेचने वाले खुद इस्तेमाल नही करते 🙏 जय श्री राम जी🙏

+638 प्रतिक्रिया 117 कॉमेंट्स • 126 शेयर

🙏🌹🥀🥀जय श्री राधे कृष्णा जी🥀🥀🌹🙏 🎉🎉🎉🎉 Good evening Ji🎉🎉🎉🎉 🙏एक महत्वपूर्ण संदेश 🙏 गुड़गांव में, मेरे घर के रास्ते पर कल रात लगभग 8: 15 बजे, जैसे ही मैंने स्टार गेट से पुराने टर्मिनल की ओर दाएं मुड़कर देखा, एक पुलिसवाले ने मुझे रुकने का इशारा किया। जैसे ही मैं रुका, उसने मुझे गाड़ी की डिक्की खोलने को कहा। मैंने अंदर से ट्रंक खोला और नीचे उतरने वाला था, लेकिन पुलिसवाले ने कहा, "ओके ओके तुम जा सकते हो।" मैंने अपनी कार शुरू की और ड्राइविंग शुरू कर दी, लेकिन मेरे दिमाग में कुछ आया, जैसा कि मेरे रियर व्यू मिरर से, मैंने पुलिसवालों में से एक को तुरंत उसके फोन पर देखा। मैं थोड़ा आगे गया और एक अच्छी रोड लाइट पाकर अपनी कार रोक दी। इंजन को बंद करके मैं गया और अपनी कार की डिक्की खोली। क्या देखता हूं.... मैं अंदर सफेद क्रिस्टल के साथ दो छोटे ज़िप लॉक पाउच देखकर चौंक गया था। मैं स्तब्ध था, लेकिन बस मैने इसे फेंकने का फैसला किया और भगवान को धन्यवाद दिया कि मुझे ऐसे बदमाशों से बचाया, जिन्होंने मुझे ड्रग से संबंधित मामले में फसाने का प्लान बनाया होगा। पुलिसकर्मियों ने अपने भाई को अगली चौकी पर खड़े होने के लिए सूचित किया होगा ताकि वह कार नंबर देखकर पकड़ सकें। मैं अपने अनुमान में सही था। लगभग आधा मील बाद मुझे दूसरे पुलिसकर्मी द्वारा रोका गया। इस बार भी मुझे अपनी सूंड (डिक्की) खोलने के लिए कहा गया। अब मैं नीचे उतरा, पीछे गया और शारीरिक रूप से ट्रंक खोला। मुझे यकीन है कि वे हैरान और हैरान रह गए होंगे कि उन्हें कुछ नहीं मिला। *कृपया अपनी कार ट्रंक (डिक्की) को किसी के लिए, यहां तक ​​कि मॉल में भी न खोलें। हमेशा नीचे कदम रखें और चाबियों के साथ ट्रंक खोलें और अपनी निगरानी में खोज की अनुमति दें।* *लोगों को बचाने के लिए कृपया इसे अधिक से अधिक शेयर करें।*🙏🌹जय श्री राधे राधे जी🌹🙏

+501 प्रतिक्रिया 92 कॉमेंट्स • 128 शेयर