Asha Anil Agarwal Jan 2, 2019

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Asha Anil Agarwal Jan 1, 2019

अपने क्रोध, आवेश को नियंत्रण में रखें महाभारत के एक प्रसंग में आता है कि एक बार श्रीकृष्ण, बलराम और सात्यकि यात्रा के दौरान शाम हो जाने के कारण एक भयानक वन में रात्रि विश्राम के लिए ये निश्चय करके रुके कि दो-दो घंटे के लिए बारी-बारी से पहरा देंगे। उस जंगल में एक बहुत भयानक राक्षस रहता था, जब सात्यकि पहरा दे रहा था जो उस राक्षस ने उसे छेड़ा, भला-बुरा कहा। उनका युद्ध हुआ, सात्यकि पराजित होकर जान बचाकर बलराम जी के पास आ कर छुप गए । बलराम जी को भी राक्षस ने बहुत उकसाया, उनके साथ भी युद्ध हुआ, बलराम जी ने देखा कि राक्षस की शक्ति तो बढ़ती ही जा रही है तब उन्होंने श्रीकृष्ण को जगाया। राक्षस ने उन्हें भी छेड़ा, अपशब्द कहे, उकसाया लेकिन श्रीकृष्ण मुस्कुराते रहे। साथ ही श्रीकृष्ण ने राक्षस को कहा की तुम बहुत भले आदमी हो, तुम्हारे जैसे दोस्त के साथ रात अच्छे से कट जाएगी। इस पर राक्षस थोड़ा शांत हुआ और हंसकर पूछा, मैं तुम्हारा मित्र कैसे हुआ? श्रीकृष्ण बोले, भाई तुम अपना काम छोड़कर मेरा सहयोग करने आए हो, तुम सोच रहे हो मुझे कहीं आलस्य न घेर ले, इसलिए हंसी-मजाक करने आ गए। राक्षस ने उन्हें बहुत छेड़ने, उकसाने की कोशिश की लेकिन श्रीकृष्ण हंसते ही रहे। परिणाम यह हुआ कि राक्षस की ताकत घटने लगी और देखते ही देखते वह एक छोटी मक्खी जैसा हो गया। श्रीकृष्ण ने राक्षस को पकड़कर अपने पीतांबर में बांध लिया। श्रीकृष्ण ने दोनों से कहा कि जानते हो यह राक्षस कौन है? लेकिन बलराम और सात्यकि कोई जवाब नहीं दे पाए। तब श्रीकृष्ण ने बताया कि इसका नाम है आवेश, मनुष्य के अंदर भी यह आवेश (क्रोध) का राक्षस घुस जाता है। मनुष्य उसे जितनी हवा देता है वह उतना ही दोगुना, तिगुना, चौगुना होता चला जाता है। इस राक्षस की ताकत तभी घटती है, जब इंसान अपने आपको संतुलित रखता है, हर समय मुस्कुराता रहता है। क्रोध रूपी राक्षस की जितनी उपेक्षा करोगे, वह उतना ही घटता जाएगा और जितना बदले की भावना रखोगे, वह बढ़ता चला जाएगा। इसलिए अपने आवेश, क्रोध को हमेशा नियंत्रण में रखें। हरेकृष्ण जी। नया साल मुबारक हो

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