Ansouya M 🍁 Apr 18, 2021

🙏🙏श्री गणेशाय नमः 🌹🙏🌹🙏 🙏🙏🙏🙏🙏🙏जय श्री राधे कृष्ण 🙏🙏🕉 🙏🙏🙏🙏🙏🙏जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 🙏🙏सर्व स्वरूपे सर्वेशे सर्व शक्ति समम्वीते ।।।भयेभय्स्त्राहि नव देवी दुर्गे देवी नमोस्तुते 🙏🙏🌷🌷 🙏🌷सर्व मंगल मागल्ये शिवे सर्वाथ साघिके शरणये त्रयमबके गौरी नारायणी नमोस्तुते 🙏🌷🙏🙏जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम 🌷🙏🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷सभी स्नेही मानसप्रेमी साधकजनों को शुभ संध्या की हमारी स्नेहमयी राम राम |।।। जय सियाराम जय सियाराम जय सियाराम जय जय सियाराम🙏🌷🙏🙏 श्रीरामचरितमानस– लंकाकाण्ड दोहा संख्या 110 से आगे .... छंद : जय राम सदा सुख धाम हरे। रघुनायक सायक चाप धरे।। भव बारन दारन सिंह प्रभो। गुन सागर नागर नाथ बिभो॥ तन काम अनेक अनूप छबी। गुन गावत सिद्ध मुनींद्र कबी।। जसु पावन रावन नाग महा। खगनाथ जथा करि कोप गहा॥ जन रंजन भंजन सोक भयं। गत क्रोध सदा प्रभु बोधमयं।। अवतार उदार अपार गुनं। महि भार बिभंजन ग्यानघनं।। अज ब्यापकमेकमनादि सदा। करुनाकर राम नमामि मुदा।। रघुबंस बिभूषन दूषन हा। कृत भूप बिभीषन दीन रहा।। गुन ग्यान निधान अमान अजं। नित राम नमामि बिभुं बिरजं।। भुजदंड प्रचंड प्रताप बलं। खल बृंद निकंद महा कुसलं।। बिनु कारन दीन दयाल हितं। छबि धाम नमामि रमा सहितं।। भव तारन कारन काज परं। मन संभव दारुन दोष हरं।। सर चाप मनोहर त्रोन धरं। जलजारुन लोचन भूपबरं।। सुख मंदिर सुंदर श्रीरमनं। मद मार मुधा ममता समनं।। अनवद्य अखंड न गोचर गो। सब रूप सदा सब होइ न गो।। इति बेद बदंति न दंतकथा। रबि आतप भिन्नमभिन्न जथा।। कृतकृत्य बिभो सब बानर ए। निरखंति तवानन सादर ए।। धिग जीवन देव सरीर हरे। तव भक्ति बिना भव भूलि परे।। अब दीनदयाल दया करिऐ। मति मोरि बिभेदकरी हरिऐ।। जेहि ते बिपरीत क्रिया करिऐ। दुख सो सुख मानि सुखी चरिऐ।। खल खंडन मंडन रम्य छमा। पद पंकज सेवित संभु उमा।। नृप नायक दे बरदानमिदं। चरनांबुज प्रेमु सदा सुभदं।। भावार्थ:- ब्रह्माजी स्तुति कर रहे हैं .... हे नित्य सुखधाम और (दु:खों को हरने वाले) हरि! हे धनुष-बाण धारण किए हुए रघुनाथजी! आपकी जय हो। हे प्रभो! आप भव (जन्म-मरण) रूपी हाथी को विदीर्ण करने के लिए सिंह के समान हैं। हे नाथ! हे सर्वव्यापक! आप गुणों के समुद्र और परम चतुर हैं‍॥आपके शरीर की अनेकों कामदेवों के समान, परंतु अनुपम छवि है। सिद्ध, मुनीश्वर और कवि आपके गुण गाते रहते हैं। आपका यश पवित्र है। आपने रावणरूपी महासर्प को गरुड़ की तरह क्रोध करके पकड़ लिया।। हे प्रभो! आप सेवकों को आनंद देने वाले, शोक और भय का नाश करने वाले, सदा क्रोधरहित और नित्य ज्ञान स्वरूप हैं। आपका अवतार श्रेष्ठ, अपार दिव्य गुणों वाला, पृथ्वी का भार उतारने वाला और ज्ञान का समूह है।। (किंतु अवतार लेने पर भी) आप नित्य, अजन्मा, व्यापक, एक (अद्वितीय) और अनादि हैं। हे करुणा की खान श्रीरामजी! मैं आपको बड़े ही हर्ष के साथ नमस्कार करता हूँ। हे रघुकुल के आभूषण! हे दूषण राक्षस को मारने वाले तथा समस्त दोषों को हरने वाले! विभिषण दीन था, उसे आपने (लंका का) राजा बना दिया।। हे गुण और ज्ञान के भंडार! हे मानरहित! हे अजन्मा, व्यापक और मायिक विकारों से रहित श्रीराम! मैं आपको नित्य नमस्कार करता हूँ। आपके भुजदंडों का प्रताप और बल प्रचंड है। दुष्ट समूह के नाश करने में आप परम निपुण हैं।। हे बिना ही कारण दीनों पर दया तथा उनका हित करने वाले और शोभा के धाम! मैं श्रीजानकीजी सहित आपको नमस्कार करता हूँ। आप भवसागर से तारने वाले हैं, कारणरूपा प्रकृति और कार्यरूप जगत दोनों से परे हैं और मन से उत्पन्न होने वाले कठिन दोषों को हरने वाले हैं।। आप मनोहर बाण, धनुष और तरकस धारण करने वाले हैं। (लाल) कमल के समान रक्तवर्ण आपके नेत्र हैं। आप राजाओं में श्रेष्ठ, सुख के मंदिर, सुंदर, श्री (लक्ष्मीजी) के वल्लभ तथा मद (अहंकार), काम और झूठी ममता के नाश करने वाले हैं।। आप अनिन्द्य या दोषरहित हैं, अखंड हैं, इंद्रियों के विषय नहीं हैं। सदा सर्वरूप होते हुए भी आप वह सब कभी हुए ही नहीं, ऐसा वेद कहते हैं। यह (कोई) दंतकथा (कोरी कल्पना) नहीं है। जैसे सूर्य और सूर्य का प्रकाश अलग-अलग हैं और अलग नहीं भी है, वैसे ही आप भी संसार से भिन्न तथा अभिन्न दोनों ही हैं।। हे व्यापक प्रभो! ये सब वानर कृतार्थ रूप हैं, जो आदरपूर्वक ये आपका मुख देख रहे हैं। (और) हे हरे! हमारे (अमर) जीवन और देव (दिव्य) शरीर को धिक्कार है, जो हम आपकी भक्ति से रहित हुए संसार में (सांसारिक विषयों में) भूले पड़े हैं।। हे दीनदयालु! अब दया कीजिए और मेरी उस विभेद उत्पन्न करने वाली बुद्धि को हर लीजिए, जिससे मैं विपरीत कर्म करता हूँ और जो दु:ख है, उसे सुख मानकर आनंद से विचरता हूँ।।आप दुष्टों का खंडन करने वाले और पृथ्वी के रमणीय आभूषण हैं। आपके चरणकमल श्री शिव-पार्वती द्वारा सेवित हैं। हे राजाओं के महाराज! मुझे यह वरदान दीजिए कि आपके चरणकमलों में सदा मेरा कल्याणदायक (अनन्य) प्रेम हो।।🙏🌷🙏🙏🌷🙏🙏 🙏🌷जय सिया राम 🙏🌷🙏🙏🌷🙏🙏🙏🙏🙏सिया राम मै सब जग जानी करउँ प्रनाम जोरि जुग पाणी 🌷🙏🌷🌷🙏🌷🌷🌷🌷🌷🌷🙏🙏सर्वे भवन्तू सुखिनह 🌷🙏🌷🌷🌷🌷🌷🙏🌷ॐ शान्ति शान्ति शान्ति 🙏🌷🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🥥🕉🕉🕉🌷🙏🙏

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Ansouya M 🍁 Apr 18, 2021

🌷🙏श्री गणेशाय नम ः🌷 🌷🙏🌷🌷🌷🌷🌷🌷जय श्री राधे कृष्ण 🙏🙏🕉 🙏🌷🙏🙏🌷🙏🙏ॐ घृणी सुर्याय नमः 🌹🙏 🌷🙏🌷🌷🙏🌷जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 🌷🙏सर्व मंगल मागल्ये शिवे सर्वाथ साघिके शरणये त्रयमबके गौरी नारायणी नमोस्तुते 🌷🙏🌷🌷🙏🌷जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम शेरा वाली माता की षष्ठम स्वरुप कात्यय्नी माता सभी भक्तों के जीवन को सुख समृद्धि और खुशियों से परिपूर्ण रक्खे 🙏🌷 सभी को सस्नेह शुभ प्रभात मंगलमय हो 🙏🌷🙏 🙏🙏🙏जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम 🙏 मानस में नाम-वन्दन की महिमा 🙏 नाम से निर्गुण-सगुणकी सुलभता. अस प्रभु हृदयँ अछत अबिकारी । सकल जीव जग दीन दुखारी ॥ ……………(मानस, बालकाण्ड, दोहा २३ । ७) संसारमें जितने जीव हैं, उनके हृदयमें आनन्दराशि परमात्मा विराजमान हैं । ‘अस प्रभु’ कहनेका तात्पर्य है कि ऐसे आनन्दराशि प्रभुके हृदयमें रहते हुए संसारमें जितने जीव हैं, वे सब-के-सब दीन हो रहे हैं और दुःखी हो रहे हैं । महान् आनन्दराशि भगवान्‌ के भीतर रहते हुए दीन हो रहे हैं । आनन्दराशि निर्गुण परमात्मा सबके हृदयमें रहकर भी जीवोंका दुःख दूर नहीं कर सके, दरिद्रता नहीं मिटा सके । परंतु भगवन्नामका यदि यत्नसे निरूपण किया जाय तो वह आनन्द प्रत्यक्ष प्रकट हो जाता है । दुःख और दरिद्रता सर्वथा मिट जाते हैं । 🙏जय सिया राम 🌷🙏🌷🌷🌷🌷🌷🙏🙏 🌷🌿ऐसी करनी कर चलो हम हंसे जग रोए🌿 संत कबीर की रचनाओं में एक दोहा आता है। कबीरा जब हम पैदा भये, जग हंसे हम रोए। ऐसी करनी कर चलो, हम हंसे जग रोए। इस दोहे में संत कबीर ने भोगा हुआ सच व्यक्त किया है। यह प्रत्यक्ष अनुभव की बात है कि जब मनुष्य का जन्म होता है तब वह रोता है। यदि नहीं रोता तो उसे थपकी मार-मार कर रुलाने की कोशिश की जाती है, लेकिन उसके परिवार और समाज-बिरादरी के लोग अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते थकते नहीं हैं। मृत्यु के समय मनुष्य मोहवश मरना नहीं चाहता। अत: वह रोता है। पर उसके परिवार व समाज की प्रतिक्रिया मृतक के जीवन-अवस्था में किए गए कार्यों व उसके व्यवहार पर निर्भर होती है। मृतक के कार्य और व्यवहार समाज के लिए कष्टकारी रहे हैं, तब लोगों की प्रतिक्रिया विपरीत होती है और वे उसकी मृत्यु की अपेक्षा का भाव रखते हैं। यदि किसी व्यक्ति का जीवन मानवता को समर्पित, परोपकार एवं करुणा से परिपूर्ण होता है तो लोग ऐसे व्यक्ति के लिए अत्यंत संवेदनशील रहते हैं और उसकी मृत्यु पर अति भावुक हो जाते हैं। मनुष्य शरीर का जीवन क्षण भंगुर है। इसलिए बुराई से बचें और मानवता के प्रति समर्पित होकर जरूरतमंद की निस्वार्थ सेवा करें ताकि मानव उत्त्थान के साथ जब संसार से विदा लेने का समय आए तो मृत्यु भी हंसते हुए कहे : ऐसी करनी कर चले, हम हंसे जग रोए। 🌷🙏🙏सर्वे भवन्तू सुखिनह 🌷🙏🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷सर्वे सन्तु निरामय 🙏🌷🙏🙏🌷🌷🌷🌷🌷🌷ॐ शान्ति शान्ति शान्ति 🙏🌷🙏🙏🌷🌷🌷🌷🌷🙏🙏🕉🕉🕉🌷🌷🙏

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Ansouya M 🍁 Apr 16, 2021

🌷🌷🙏🙏श्री गणेशाय नम ः🌷 🌷🙏🌷🌷🙏🌷🙏जय श्री राधे कृष्ण 🙏🙏🕉 🌷🙏🌷🌷🌷🌷जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 🙏🌷🙏🌷🌷🌷🌷🙏🙏🙏शेरा वाली माता की जय 🙏🌷🙏🌷🌷🌷🌷🌷आप सभी भक्ततों को सूबह की राम राम जी🌷🙏🙏🌷🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌷🙏जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम 🌷🙏🌷🙏🌷🙏 🙏🌷अध्यात्म विद्या में राम राग-द्वेष रहित होने की बात हैं। राग-द्वेष रहित होने का मंत्र राम राम ही हैं राम राम कहने या राम राम सुनने से राग-द्वेष रहित हो ही जाते हैं। #राम नाम रस है अनूठा मानना भी आसान नहीं हैं तो जानने की जिज्ञासा कैसे हो मानों तो जानों जानों तो मानों अनुभूति युक्त अनुभव सिद्ध हो तब सब कुछ समझने में आ जाता हैं। 🌷🙏राम राम🙏🌷🌷 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 सर्व मंगल मागल्ये शिवे सर्वाथ साघिके शरणये त्रयमबके गौरी नारायणी नमोस्तुते 🙏🌷🌷🌷🌷🌷🌷या देवी सॅव भूतेशू शक्ती रूपेण संसथिता नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नमः 🙏🌷 🌷🙏🌷🌷🙏🌷🙏🙏🙏🙏🙏🌷🕉🌷🌷

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Ansouya M 🍁 Apr 15, 2021

🙏🌷🙏श्री गणेशाय नमः 🌹🙏🌹🙏 🌷🙏🌷🌷🌷🙏🌷जय श्री राधे कृष्ण 🙏🙏🕉 🌷🙏🌷जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 🌷🙏सर्व मंगल मागल्ये शिवे सर्वाथ साघिके शरणये त्रयमबके गौरी नारायणी नमोस्तुते 🌷🙏🌷🌷🙏या देवी सॅव भूतेशू शक्ती रूपेण संसथिता नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नमः 🌷🙏🌷🌷🙏🙏ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🙏🌹🙏 🌷#पंचमहाभूत का यह शरीर नाश्वंत हैं परन्तु कल्याण का साधन हैं यह शरीर को स्वस्थ रखने के लिए शरीर की जरुरत को समझने का और जरुरत की पूर्ति करना चाहिए---- नहीं की शरीर से मोहित हो जाना देहात्मबुद्धि का त्याग करना चाहिए मृत्यु के पश्चात शरीर पंच महाभूत में ही विलीन हो जाता है। अध्यात्म विद्या जीवन दर्शन हैं निस्वार्थ भाव से कर्म सेवा ही मानव का धर्म हैं। सबको सन्मति दे भगवान 🌷🙏🌷शुभ संद्या मंगलमय हो 🌷🙏🙏🙏🙏🌷🌷🙏॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🙏 गीता प्रबोधनी बारहवाँ अध्याय --- अर्जुन उवाच--- एवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां पर्युपासते। येचाप्यक्षरमव्यक्तं तेषां के योगवित्तमाः।।१।। श्री भगवानुवाच----🌷 मय्यावेश्य मनो ये मां नित्ययुक्ता उपासते। श्रद्धया परयोपेतास्ते मे युक्ततमा मताः।।२।। जो भक्त इस प्रकार निरन्तर आप में लगे रहकर आप (सगुण-साकार)-- की उपासना करते हैं और जो अविनाशी निर्गुण-निराकार की ही उपासना करते हैं; उन दोनों में से उत्तम योगवेत्ता कौन हैं ? श्रीभगवान् बोले— मुझमें मनको लगाकर नित्यनिरन्तर मुझमें लगे हुए जो भक्त परम श्रद्धा से युक्त होकर मेरी (सगुण-साकार) की उपासना करते हैं, वे मेरे मत में सर्वश्रेष्ठ योगी हैं। व्याख्या— यद्यपि ज्ञान और भक्ति—दोनों ही मनुष्य का दुःख दूर करने में समान हैं, तथापि ज्ञान की अपेक्षा भक्ति की अधिक महिमा है । ज्ञान से तो अखण्डरस की प्राप्ति होती है, पर भक्तिसे अनन्तरस (प्रतिक्षण वर्धमान प्रेम)-की प्राप्ति होती है । जैसे संसार में किसी वस्तु का ज्ञान होता है कि ‘ये रुपये हैं’ आदि,तो इस ज्ञान से केवल अज्ञान (अनजानपना) मिट जाता है, ऐसे ही तत्त्वज्ञान से केवल अज्ञान मिटता है । अज्ञान मिटने से दुःख, भय, जन्म-मरण- ये सब मिट जाते हैं । परन्तु भक्ति, ज्ञान से भी विलक्षण है । जैसे ‘ये रुपये हैं’ यह ज्ञान हो जानेपर अनजानपना मिट जाता है, पर उनको पाने का लोभ हो जाय कि ‘और मिले, और मिले’ तो उसमें एक विशेष रस मिलता है । वस्तुके आकर्षण में जो रस है वह रस वस्तु के ज्ञान में नहीं है । ऐसे ही भक्ति में एक विशेष रस है । ज्ञान का रस तो स्वयं लेता है, पर प्रेम का रस भगवान्‌ लेते हैं । भगवान्‌ प्रेम के भूखे हैं । अतः ‘प्रेम’ मुक्ति, तत्त्वज्ञान, स्वरूप-बोध, आत्मसाक्षात्कार, कैवल्यसे भी आगेकी वस्तु है ! ज्ञानमार्ग में सत्‌ और असत्‌ दोनों की मान्यता (विवेक) साथ-साथ रहनेसे असत्‌ की अति सूक्ष्म सत्ता अर्थात्‌ सूक्ष्म अहम्‌ दूर तक साथ रहता है । यह सूक्ष्म अहम्‌ मुक्त होने पर भी रहता है । इस सूक्ष्म अहम्‌ के रहने से पुनर्जन्म तो नहीं होता, पर भगवान्‌ से अभिन्नता नहीं होती और दार्शनिकों में तथा उनके दर्शनों में परस्पर मतभेद रहता है । परन्तु प्रेम का उदय होने पर भगवान्‌ से अभिन्नता हो जाती है तथा सम्पूर्ण दार्शनिक मतभेद मिट जाते हैं 🙏🌷🙏🙏ॐ नमो नारायणाय नमः 🙏🌷🌷🌷🌷🌷ॐ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🙏🌹 सर्वे भवनतू सूखिनह 🙏🌷🙏🙏🌷🙏🌷🙏🙏🌿🙏🌷🌷🕉🕉🕉🌿🙏🌷🌷

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Ansouya M 🍁 Apr 14, 2021

🙏🙏श्री गणेशाय नमः 🌹🙏🌹🙏 🙏🍰🌷🙏🌷जय श्री राधे कृष्ण 🙏🙏🕉 🌷🙏🌷🌷🙏🌷🌷जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा माता जाकी पार्वती पिता महादेव 🙏🌷🙏🌷🙏🌷🌷जेहि सुमिरत सिद्धि होई गण नायक करिबर बदन ।करहू अनुग्रह सोई बुद्धि रासी सुभ गुण सदन।।मूक होई वाचाल पंगु चढई गिरिवर गहन ।जासु कृपा सो दयाल दृवहु सकल कली मल दहन ।।🙏🌷जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹 या देवी सॅव भूतेशू बुद्धि रूपेण संसथिता नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नमः 🙏🌷 🙏🌷🙏🙏🌷🙏सर्व मंगल मागल्ये शिवे सर्वाथ साघिके शरणये त्रयमबके गौरी नारायणी नमोस्तुते । 🙏🌷🌷🌷आप सभी भक्ततों को शुभ प्रभात मंगलमय हो 🙏🌷🙏🙏🌷🙏🙏🙏🌷🙏🙏🙏🌷🌷जय माता दी 🙏🌹 जय माता दी 🙏🌹

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