Ansouya Feb 23, 2021

🌹🙏🌹🙏जय श्री राधे कृष्ण 🌹🙏🌹🙏🌹🙏🙏ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🙏🌹 🌹🙏🌹🌹जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम 🙏🌹🙏🌹🙏🕉🕉 🙏🕉जय बजरंग बली हनुमान 🙏🙏 🙏🕉🙏🙏🕉🙏🕉🙏🕉🙏🙏🙏🌹🌹🌹🙏🌹🌹🌹🌹🙏🌹 आत्म ज्ञान रूपी अंकुर 🌹 गुरु किसान होते है और शिष्य खेत होता है। जिस प्रकार किसान खेत को भली प्रकार से सुन्दर बना कर उसमें अच्छा से अच्छा बीज उगाता है और बोते समय यह इच्छा रखता है कि अच्छा ही अनाज पैदा हो,उसी प्रकार गुरु रूपी किसान शिष्य रुपी खेत में नाम रूपी बीज बोते समय इसी प्रकार की भावना रखते है कि इसका कल्याण हो,इसे परम शांति मिले। 🌹🙏कृष्णम जगत गुरुम 🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🌹🙏🙏🌹शांतिपूर्ण भक्तिमयी संध्या आप सभी भक्तों को जी 🙏🌹🙏🕉🕉🙏🙏🌹🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹सर्वे भंवंतू सुखिनह 🙏🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🌹🌹ॐ शान्ति शान्ति शान्ति 🙏🌹🙏🙏🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🕉🕉🙏🙏🌹🌹🕉🙏

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Ansouya Feb 23, 2021

🌹🙏🌹जय श्री राधे कृष्ण 🙏🌹🙏🌹🌹🌹🌹🌹🙏ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🙏🌹🌹🙏🙏सुख समृद्धि और खुशियों की कामना करते हुए शुभ प्रभात आप सभी भक्ततों को जी 🌷🙏🌷🙏🌹🙏🌹🌹🌹🌹🌹🙏🌹🌹🙏🙏🙏🙏🌿भक्ति स्वांसों के जीवन की स्वतंत्रता🌿 भक्ति कोई शास्त्र नहीं है। भक्ति तो सच्ची श्रद्धा के सच्चे प्रेम की एक यात्रा है जो स्वांसों के सत्य पथ पर चलते हुए परमानंद की मंजिल तक पहुंचती है। भक्ति कोई सिद्धांत भी नहीं है, भक्ति तो जीवन का अमृत रस है। भक्ति को समझकर आज तक कोई समझ नहीं पाया। भक्ति में डूबकर ही कोई भक्ति के राज को समझ पाता है। मस्तिष्क से ज्यादा करीब हृदय होता है और हृदय का भाव विचारों से कहीं ज्यादा करीब है। हृदय के समुद्र की लहरों से जो आंदोलन आता है वह रुलाता भी है, क्योंकि भक्ति आंसुओं के बहुत करीब है। जो रो न सके वह भक्त नहीं हो सकेगा। छोटे बच्चे की तरह जो असहाय होकर रो सके, वही भक्ति-मार्ग से गुजर पाता है। परतंत्रता का अर्थ है कि चित्त के ऊपर लोगों के द्वारा थोपा गया तंत्र, जिससे व्यक्ति को बांधा जाता है। यह जो बंधन है, निश्चित ही यह बंधन किसी को भी प्रीतिकर नहीं है। ऐसे बंधनों के प्रति सहज ही भीतर एक विरोध है। ऐसे बंधनों को तोड़ देने की भीतर एक तीव्र बलवती आकांक्षा है। जब भी व्यक्ति मौका पाता है, ऐसे बंधनों को तोड़ता है। ऐसे परतंत्रता को तोड़ने से, परतंत्रता के विरोध में, वह जो विद्रोही चित्त है, उससे स्वच्छंदता पैदा होती है। क्रियाओं के अभ्यास से अपने स्वांस के भीतर की शक्ति को पहचान कर स्वयं को जानने से जो जीवन उपलब्ध होता है, उसका नाम स्वतंत्रता है। स्वतंत्र होना इस जगत में सबसे दुर्लभ बात है। स्वतंत्र वही हो सकता है, जो स्वयं को जानता हो। जो स्वयं को नहीं जानता, वह परतंत्र हो सकता है या स्वच्छंद हो सकता है, लेकिन स्वतंत्र नहीं हो सकता। इसलिए सच्ची श्रद्धा के अभ्यास से स्वांसों के भीतर की शक्ति को पहचान कर स्वयं को जानें और परमात्मा के सानिध्य में शांति के अनुभव से मनुष्य जीवन सफल बनाकर स्वतंत्र बनें।🌹🙏🌹🌹🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏गुरू चरणों में कोटि कोटि प्रणाम है 🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🙏🙏🌹🕉

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Ansouya Feb 22, 2021

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