Anju Mishra Jan 20, 2019

परमात्मा की पहचान....... जय श्री राधे कृष्ण 🙏🌹 आज का विषय बहुत ही अलग है कि क्या वास्तव में हमें परमात्मा की पहचान है? हम सभीजन रोजाना या कभी किसी दिन भगवान श्री राम, श्री कृष्ण, श्री हरि विष्णु, भगवान शिव, हनुमान जी, देवी लक्ष्मी, देवी सरस्वती, देवी दुर्गा आदि कितने ही देवी-देवताओं की पूजा-पाठ व साधना के समय इनके स्वरूप का ध्यान करते है। मगर हमारी स्तिथि ये है कि हम भगवान या परमात्मा के स्वरूप का नही बल्कि उसके आयुधों, प्रतीकों, पहनावे और धारनो का ही ध्यान करते है, वास्तव में हमें भगवान या परमात्मा की पहचान नही बल्कि उनके धारण किये आयुधों और प्रतीकों की है। हमें श्रीराम के धनुष व तरकश की, श्रीकृष्ण के बाँसुरी, पीताम्बर और मोरपंख की, श्रीविष्णु के सुदर्शनचक्र, गदा, कमल-फूल व शंख की, भगवान शिव के त्रिशूल, गले के सर्प व बागम्बर की, इसी प्रकार देवी सरस्वती की वीणा व पुस्तक से, देवी लक्ष्मी की धन व कमल के फूल से, देवी दुर्गा की हाथों में अस्त्र-शस्त्र से। सही मायनों में परमात्मा के सतचिदानंद स्वरूप की बात दो दूर उनकी शरीर (भाव, बुद्धि व मन के गुण) रूप में भी पहचान नही है। हम उसके चैतन्य स्वरूप की पहचान भूल कर, उसके आयुधों, प्रतीकों और वेषभूषा की ही पहचान किये हुए है। हमारी पहचान तुच्छ (सांसारिक) है और परमात्मा (चैतन्य-रूप) का स्तर बड़ा विराट है। इसलिए उस सत्यस्वरूप राम को जानो जो सब जीवों मे रमा हुआ है, उस विष्णु को जानो जिसका हर जीव में वास है, उस शिव को जानो जिंसके बिना शरीर शव है, उस शक्ति स्वरूपा देवियों को जानो जिनकी शक्ति से जीव बोल, गा व पढ़लिख सकता, पुरुषार्थ करके पैसा कमा सकता है और अपनी व दूसरों की रक्षा कर सकता है।

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Anju Mishra Jan 20, 2019

ॐ सूर्याय नमः 🌷🙏🌹 जय श्री राधे कृष्णा 🌹🙏 🌻 @👦🏻एक बेटे ने पिता से पूछा- पापा.. ये 'सफल जीवन' क्या होता है ??🤔 👴🏼पिता, बेटे को पतंग 🔶🔷 उड़ाने ले गए। बेटा पिता को ध्यान से पतंग उड़ाते देख रहा था...🤔 थोड़ी देर बाद बेटा बोला- पापा.. 😌ये धागे की वजह से पतंग अपनी आजादी से और ऊपर की और नहीं जा पा रही है, क्या हम इसे तोड़ दें !! ये और ऊपर चली जाएगी....🙂 👴🏼😌😮पिता ने धागा तोड़ दिया .. पतंग थोड़ा सा और ऊपर गई और उसके बाद लहरा कर नीचे आयी और दूर अनजान जगह पर जा कर गिर गई...💢♨ तब पिता ने बेटे को जीवन का दर्शन समझाया...😎 बेटा.. 'जिंदगी में हम जिस ऊंचाई पर हैं.. हमें अक्सर लगता की कुछ चीजें, जिनसे हम बंधे हैं वे हमें और ऊपर जाने से रोक रही हैं और हम उनसे आजाद होना चाहते हैं...😏 वास्तव में यही वो धागे होते हैं जो हमें उस ऊंचाई पर बना के रखते हैं..😮 'इन धागों के बिना हम एक बार तो ऊपर जायेंगे परन्तु बाद में हमारा वो ही हश्र होगा जो बिन धागे की पतंग का हुआ...'🙂 "अतः जीवन में यदि तुम ऊंचाइयों पर बने रहना चाहते हो तो, कभी भी इन धागों से रिश्ता मत तोड़ना.. राधे राधे

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Anju Mishra Jan 19, 2019

जय श्री राधे कृष्ण 🙏🌹 🌻 जिस प्रकार एक माँ का हाथ में डंडा लेने का उद्देश्य अपनी संतान को पीटना नहीं अपितु उसे थोडा सा भय दिखाकर गलत काम करने से रोकना होता है। ठीक इसी प्रकार हमारे शास्त्रों में भी दंड विधान का मतलव किसी को आतंकित करना अथवा भयभीत करना नहीं, थोडा सा भय दिखाकर मनुष्यों को कुमार्ग पर चलने से बचा लेना है। 🌻 शास्त्रों का काम डराना नहीं है , जीवन को अराजकता से बचाना है। शास्त्र पशु बने मनुष्यों के लिए उस चाबुक के समान है जो सही दिशा में जाने को बार- बार प्रेरित करता है। शास्त्रों का उद्देश्य भयभीत करना नहीं आपितु भयमुक्त कर देना है। 🌻 शास्त्र घर में सजाकर रखने के लिए नहीं होते, जीवन में उतारकर कर्मों को सुन्दर बनाने के लिए होते हैं। अतः शास्त्रों से डरो नहीं बल्कि उनके बताये मार्ग पर चलो। ताकि आपको समझाने के लिए कोई विरोध रुपी शस्त्र का सहारा ना ले। ✍ जीवन का आनंद केवल लड़ाई जितने में नही बल्कि उससे बचने में है कुशलता पूर्वक पीछे हट जाना भी अपने आप मे बड़ी जीत होती है।

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Anju Mishra Jan 19, 2019

ऊँ जय श्री राम रामाय नमः ऊँ जय श्री शनिदेव की 🙏🌹 🌹💟🌹💟 जय हनुमान 💟🌹💟🌹 उल्टा नाम जपा जग जाना, बाल्मीकि भये ब्रह्म समाना। राम राम जी, 🙏🌹 एक चौपाई है जो ऊपर लिखी, कई बार रामायण पढ़ने वाले श्रद्धालु को असमंजस में डाल देती है कि उल्टा जाप क्या है। मगर ये चौपाई बड़ी गूढ़ता से भरी है। इसका अर्थ कि जगत ने तो जाना (देखा) कि बाल्मीकि जी उल्टा नाम जाप कर रहे है मगर किसी ने ये नही देखा कि वो एक शब्द (राम-राम, जो बोलने पर उल्टा हो या सीधा हो) को पकड़ कर वास्तविक ध्यान में उतर गए। जगत तो आंखों देखी ही देख सकता, कानों सुनी सुन सकता है। ऊपर से देखने मे जग को लगता है कि उल्टा नाम जप रहे है मगर अंतःकरण में तो ध्यान घटित हो रहा है। और उसी आंतरिक घटना से ब्रह्म हो गए। कितने ही साधक बार बार गुरुमंत्र को मुँह और ओठो में ही चबाते रहते है फिर कहते कि कृपा नही हो रही। जप जभी होगा जब ध्यान की अवस्था में हो। ध्यान इतना गहरा हो जाये कि गुरुमंत्र उल्टा क्या, चाहे कुछ से कुछ हो जाये। शब्द या मंत्र तो सिर्फ सहारा (साधन) है ध्यान तक पहुँचने का और जब ध्यान हुआ तब काम बन गया, कृपा सुरु। बस यही सार है इस चौपाई का। जय श्री राम

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