Anju Mishra Oct 14, 2019

जय श्री गणेशाय नमः 🙏🌹 जय शिव शक्ति की करवाचौथ विशेष 👇 करवा चौथ या करक चतुर्थी विशेषकर स्‍त्रियों का सुहाग पर्व है। इस व्रत को करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है।  प्रात:काल स्नानादि से निवृत्त होकर वस्त्राभूषण से सज्जित होकर श्री गणेशजी का पूजन करें।  श्रद्धापूर्वक 10 करवे भगवान गणेश के आगे रखें तथा भक्तिपूर्वक प्रार्थना करें- हे करुणासिन्धु, हे श्री गणेश, हे विघ्ननाश करने वाले गजानन, मुझ पर प्रसन्न हों। मेरा सौभाग्य अटल रखें।  करवे ब्राह्मणों तथा सुहागन स्त्रियों को आदरपूर्वक दक्षिणा सहित बांट दें। गणेशजी के 7 दिव्य मंत्र यह :    (1) 'ॐ गं गणपतये नम:।'  (2) 'ॐ वक्रतुण्डाय हुं।'  (3) 'हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा।' (4) 'लम्बोदराय विद्महे महोदराय धीमहि, तन्नो दन्ती प्रचोदयात्।' (5) 'महोत्कटाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात्।' (6) 'तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात्।' (7) 'एकदन्ताय विद्महे हस्तिमुखाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात्।' गणेशजी को अर्घ्य निम्न मंत्र से दें-  'गणेशाय नमस्तुभ्यं सर्वसिद्धि प्रदायक। संकष्टहर मे देव गृहाणर्घ्यं नमोस्तुते। कृष्णपक्षे चतुर्थ्यां तु सम्पूजित विधूदये।  क्षिप्रं प्रसीद देवेश गृहाणर्घ्यं नमोस्तुते।' पूजन हेतु मंत्र 'ॐ शिवायै नमः' से पार्वती का, 'ॐ नमः शिवाय' से शिव का, 'ॐ षण्मुखाय नमः' से स्वामी कार्तिकेय का, 'ॐ गणेशाय नमः' से गणेश का तथा 'ॐ सोमाय नमः' से चंद्रमा का पूजन

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Anju Mishra Oct 12, 2019

🙏🌹 जय श्री लक्ष्मी नारायण की 🙏🌹 🌞चांद सी शीतलता, शुभ्रता, कोमलता, उदारता, प्रेमलता आपको और आपके परिवार को प्रदान हो । शरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं ।🌻 पौराणिक एवं प्रचलित कथा...  👉शरद पूर्णिमा को कोजागिरी पूर्णिमा व्रत और रास पूर्णिमा भी कहा जाता है तथा कुछ क्षेत्रों में इस व्रत को कौमुदी व्रत भी कहा जाता है। शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा व भगवान विष्णु का पूजन कर, व्रत कथा पढ़ी जाती है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी दिन चन्द्र अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होते हैं। पौराणिक एवं प्रचलित कथा - एक कथा के अनुसार एक साहुकार को दो पुत्रियां थीं। दोनो पुत्रियां पूर्णिमा का व्रत रखती थीं। लेकिन बड़ी पुत्री पूरा व्रत करती थी और छोटी पुत्री अधूरा व्रत करती थी। इसका परिणाम यह हुआ कि छोटी पुत्री की संतान पैदा होते ही मर जाती थी। उसने पंडितों से इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया की तुम पूर्णिमा का अधूरा व्रत करती थी, जिसके कारण तुम्हारी संतान पैदा होते ही मर जाती है।  पूर्णिमा का पूरा व्रत विधिपूर्वक करने से तुम्हारी संतान जीवित रह सकती है। उसने पंडितों की सलाह पर पूर्णिमा का पूरा व्रत विधिपूर्वक किया। बाद में उसे एक लड़का पैदा हुआ। जो कुछ दिनों बाद ही फिर से मर गया। उसने लड़के को एक पाटे (पीढ़ा) पर लेटा कर ऊपर से कपड़ा ढंक दिया। फिर बड़ी बहन को बुलाकर लाई और बैठने के लिए वही पाटा दे दिया। बड़ी बहन जब उस पर बैठने लगी जो उसका लहंगा बच्चे का छू गया। बच्चा लहंगा छूते ही रोने लगा। तब बड़ी बहन ने कहा कि तुम मुझे कलंक लगाना चाहती थी। मेरे बैठने से यह मर जाता। तब छोटी बहन बोली कि यह तो पहले से मरा हुआ था। तेरे ही भाग्य से यह जीवित हो गया है। तेरे पुण्य से ही यह जीवित हुआ है। उसके बाद नगर में उसने पूर्णिमा का पूरा व्रत करने का ढिंढोरा पिटवा दिया।

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Anju Mishra Oct 11, 2019

जय मां लक्ष्मी की शरद पूर्णिमा विशेष 👇: शरद पूर्णिमा की रात में की गई पूजन और आराधना से साल भर के लिए लक्ष्मी और कुबेर की कृपा प्राप्ति होती है। इसके अलावा मनोबल में वृद्धि, स्मरण शक्ति व खूबसूरती में वृद्धि होती है। मां लक्ष्मी इस दिन विशेष प्रसन्न होती हैं क्योंकि मान्यतानुसार इस दिन समुद्र मंथन से वे अवतरित हुई थीं.. शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी को मनाने का मंत्र  ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः भागवत महापुराण में कहा गया है कि आप चाहते हैं आपका भाग्य, सौभाग्य बन जाए तो शरद पूनम पर चमकीले, श्वेत और सुंदर चंद्र देव को इस मंत्र से पूजें। चांदी के बर्तन में दूध और मिश्री का भोग लगाकर इस मंत्र का रात भर जप करें।

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Anju Mishra Oct 11, 2019

🙏🌹जय माता दी🌹🙏 देश के 51 शक्तिपीठों मे एक विश्वविख्यात आदि शक्ति मां पाटेश्वरी देवी मंदिर नेपाल सीमा से सटे उत्तर प्रदेश में बलरामपुर जिले की तुलसीपुर तहसील क्षेत्र के पाटन गांव मे सिरिया नदी के तट पर स्थित देवी पाटन मंदिर मे मुख्य रुप से माँ पाटेश्वरी विराजमान है। यहाँ पाटन गांव मे माँ जगदम्बा का बांया स्कंद पाटम्बर समेत गिरा। तभी से इसी शक्तिपीठ को मां पाटेश्वरी  देवी पाटन मंदिर के नाम से जाना जाता है। मंदिर में एक गर्भगृह भी स्थित है जहां माता सीता का पाताल गमन हुआ था। नव दुगार्ओ मां शैलपुत्री ,कुष्माडा ,स्कंदमाता,कालरात्रि ,महागौरी, चंद्रघंटा,सिद्धदात्री,ब्रह्म्चारिणीऔर कात्यायनी  की प्रतिमायें मंदिर मे स्थापित है। मंदिर मे स्थित  गर्भगृह सुरंग पर माँ की प्रतिमा विद्यमान है। यहाँ कई रत्नजडित छतर है। ताम्रपत्र पर दुगार् सप्तशती अंकित है। मंदिर मे स्थापना काल से 'अखंड ज्योति' प्रज्जवलित है। यहाँ प्रमुख रुप से रोट का प्रसाद चढ़ाया जाता है। मान्यताओ के अनुसार ,महाभारत काल मे सूर्यपुत्र कर्ण ने मंदिर परिसर मे बने कुंड मे स्नान कर भगवान परशुराम से दीक्षा ली थी। तभी से इस कुंड का नाम सूर्य कुंड पड़ा। त्रेतायुग मे माता जानकी का पातालगमन भी यही हुआ उस स्थान को गर्भगृह कहा जाता है।

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Anju Mishra Oct 10, 2019

🌹🙏🌹जय श्री राधे कृष्णा 🌹🙏🌹 👇 एक बोध कथा ⬇ एक बार एक राजा ने विद्वान ज्योतिषियों की सभा बुलाकर प्रश्न किया- **मेरी जन्म पत्रिका के अनुसार मेरा राजा बनने का योग था मैं राजा बना, किन्तु उसी घड़ी मुहूर्त में अनेक जातकों ने जन्म लिया होगा जो राजा नहीं बन सके क्यों ..?** इसका क्या कारण है ? राजा के इस प्रश्न से सब निरुत्तर हो गये .. अचानक एक वृद्ध खड़े हुये बोले - महाराज आपको यहाँ से कुछ दूर घने जंगल में एक महात्मा मिलेंगे उनसे आपको उत्तर मिल सकता है.. ☝राजा ने घोर जंगल में जाकर देखा कि एक महात्मा आग के ढेर के पास बैठ कर अंगार ( गरमा गरम कोयला ) खाने में व्यस्त हैं.. राजा ने महात्मा से जैसे ही प्रश्न पूछा महात्मा ने क्रोधित होकर कहा “तेरे प्रश्न का उत्तर आगे पहाड़ियों के बीच एक और महात्मा हैं ,वे दे सकते हैं ।” *राजा की जिज्ञासा और बढ़ गयी, पहाड़ी मार्ग पार कर बड़ी कठिनाइयों से राजा दूसरे महात्मा के पास पहुंचा..* राजा हक्का बक्का रह गया ,दृश्य ही कुछ ऐसा था, वे महात्मा अपना ही माँस चिमटे से नोच नोच कर खा रहे थे.. *राजा को महात्मा ने भी डांटते हुए कहा ” मैं भूख से बेचैन हूँ मेरे पास समय नहीं है...* आगे आदिवासी गाँव में एक बालक जन्म लेने वाला है ,जो कुछ ही देर तक जिन्दा रहेगा.. वह बालक तेरे प्रश्न का उत्तर दे सकता है.. *राजा बड़ा बेचैन हुआ, बड़ी अजब पहेली बन गया मेरा प्रश्न..* उत्सुकता प्रबल थी.. राजा पुनः कठिन मार्ग पार कर उस गाँव में पहुंचा.. गाँव में उस दंपति के घर पहुंचकर सारी बात कही.. *जैसे ही बच्चा पैदा हुआ दम्पत्ति ने नाल सहित बालक राजा के सम्मुख उपस्थित किया..* राजा को देखते ही बालक हँसते हुए बोलने लगा .. राजन् ! मेरे पास भी समय नहीं है ,किन्तु अपना उत्तर सुन लो – तुम,मैं और दोनों महात्मा सात जन्म पहले चारों भाई राजकुमार थे.. *एक बार शिकार खेलते खेलते हम जंगल में तीन दिन तक भूखे प्यासे भटकते रहे ।* अचानक हम चारों भाइयों को आटे की एक पोटली मिली ।हमने उसकी चार बाटी सेंकी.. अपनी अपनी बाटी लेकर खाने बैठे ही थे कि भूख प्यास से तड़पते हुए एक महात्मा वहां आ गये.. अंगार खाने वाले भइया से उन्होंने कहा – *“बेटा ,मैं दस दिन से भूखा हूँ ,अपनी बाटी में से मुझे भी कुछ दे दो , मुझ पर दया करो , जिससे मेरा भी जीवन बच जाय ...* इतना सुनते ही भइया गुस्से से भड़क उठे और बोले.. **तुम्हें दे दूंगा तो मैं क्या खाऊंगा आग ...? चलो भागो यहां से ….।** वे महात्मा फिर मांस खाने वाले भइया के निकट आये उनसे भी अपनी बात कही.. किन्तु उन भईया ने भी महात्मा से गुस्से में आकर कहा कि.. **बड़ी मुश्किल से प्राप्त ये बाटी तुम्हें दे दूंगा तो क्या मैं अपना मांस नोचकर खाऊंगा ?** भूख से लाचार वे महात्मा मेरे पास भी आये.. मुझसे भी बाटी मांगी… किन्तु मैंने भी भूख में धैर्य खोकर कह दिया कि **चलो आगे बढ़ो मैं क्या भूखा मरुँ …?** अंतिम आशा लिये वो महात्मा , हे राजन !.. आपके पास भी आये,दया की याचना की.. दया करते हुये ख़ुशी से आपने अपनी बाटी में से आधी बाटी आदर सहित उन महात्मा को दे दी । बाटी पाकर महात्मा बड़े खुश हुए और बोले.. **तुम्हारा भविष्य तुम्हारे कर्म और व्यवहार से फलेगा ।** बालक ने कहा “इस प्रकार उस घटना के आधार पर हम अपना अपना भोग, भोग रहे हैं... और वो बालक मर गया **धरती पर एक समय में अनेकों फल-फूल खिलते हैं,किन्तु सबके रूप, गुण,आकार-प्रकार,स्वाद भिन्न होते हैं ..।** राजा ने माना कि शास्त्र भी तीन प्रकार के हॆ-- **ज्योतिष शास्त्र, कर्तव्य शास्त्र और व्यवहार शास्त्र** जातक सब अपना **किया, दिया, लिया** ही पाते हैं.. यही है जीवन... "गलत पासवर्ड से एक छोटा सा मोबाइल नही खुलता.. तो सोचिये .. **गलत कर्मो से जन्नत के दरवाजे कैसे खुलेंगे** 🔔🕉🔔🙏 🐚🐚🐚

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