anju mishra Apr 24, 2019

🚩🌹🙏जय श्री गणेशाय नमः 🙏🌹🚩 गणेश नामावली-108  1. बाल गणपति : सबसे प्रिय बालक।  2. भालचन्द्र : जिसके मस्तक पर चंद्रमा हो।  3. बुद्धिनाथ : बुद्धि के भगवान।  4. धूम्रवर्ण : धुएं को उड़ाने वाला।  5. एकाक्षर : एकल अक्षर।  6. एकदन्त : एक दांत वाले।  7. गजकर्ण : हाथी की तरह कान वाला।  8. गजानन : हाथी के मुख वाले भगवान।  9. गजवक्र : हाथी की सूंड वाला।  10. गजवक्त्र : जिसका हाथी की तरह मुंह है।  11. गणाध्यक्ष : सभी गणों का मालिक।  12. गणपति : सभी गणों के मालिक।  13. गौरीसुत : माता गौरी का बेटा।  14. लम्बकर्ण : बड़े कान वाले देव।  15. लम्बोदर : बड़े पेट वाले।  16. महाबल : अत्यधिक बलशाली वाले प्रभु।  17. महागणपति : देवातिदेव।  18. महेश्वर : सारे ब्रह्मांड के भगवान।  19. मंगलमूर्ति : सभी शुभ कार्य के देव।  20. मूषक वाहन : जिसका सारथी मूषक है।  21. निदीश्वरम : धन और निधि के दाता।  22. प्रथमेश्वर : सबके बीच प्रथम आने वाला।  23. शूपकर्ण : बड़े कान वाले देव।  24. शुभम : सभी शुभ कार्यों के प्रभु।  25. सिद्धिदाता : इच्छाओं और अवसरों के स्वामी।  26. सिद्धिविनायक : सफलता के स्वामी।  27. सुरेश्वरम : देवों के देव।  28. वक्रतुण्ड : घुमावदार सूंड।  29. अखूरथ : जिसका सारथी मूषक है।  30. अलम्पता : अनन्त देव।  31. अमित : अतुलनीय प्रभु।  32. अनन्तचिदरुपम : अनंत और व्यक्ति चेतना।  33. अवनीश : पूरे विश्व के प्रभु।  34. अविघ्न : बाधाओं को हरने वाले।  35. भीम : विशाल।  36. भूपति : धरती के मालिक।  37. भुवनपति : देवों के देव।  38. बुद्धिप्रिय : ज्ञान के दाता।  39. बुद्धिविधाता : बुद्धि के मालिक।  40. चतुर्भुज : चार भुजाओं वाले।  41. देवादेव : सभी भगवान में सर्वोपरि।  42. देवांतकनाशकारी : बुराइयों और असुरों के विनाशक।  43. देवव्रत : सबकी तपस्या स्वीकार करने वाले।  44. देवेन्द्राशिक : सभी देवताओं की रक्षा करने वाले।  45. धार्मिक : दान देने वाला।  46. दूर्जा : अपराजित देव।  47. द्वैमातुर : दो माताओं वाले।  48. एकदंष्ट्र : एक दांत वाले।  49. ईशानपुत्र : भगवान शिव के बेटे।  50. गदाधर : जिसका हथियार गदा है।  51. गणाध्यक्षिण : सभी पिंडों के नेता।  52. यशस्कर : प्रसिद्धि और भाग्य के स्वामी।  53. गुणिन : जो सभी गुणों के ज्ञानी।  54. हरिद्र : स्वर्ण के रंग वाला।  55. हेरम्ब : मां का प्रिय पुत्र।  56. कपिल : पीले भूरे रंग वाला।  57. कवीश : कवियों के स्वामी।  58. कीर्ति : यश के स्वामी।  59. कृपाकर : कृपा करने वाले।  60. कृष्णपिंगाश : पीली भूरी आंख वाले।  61. क्षेमंकरी : माफी प्रदान करने वाला।  62. क्षिप्रा : आराधना के योग्य।  63. मनोमय : दिल जीतने वाले।  64. मृत्युंजय : मौत को हरने वाले।  65. मूढ़ाकरम : जिनमें खुशी का वास होता है।  66. मुक्तिदायी : शाश्वत आनंद के दाता।  67. नादप्रतिष्ठित : जिसे संगीत से प्यार हो।  68. नमस्थेतु : सभी बुराइयों और पापों पर विजय प्राप्त करने वाले।  69. नन्दन : भगवान शिव का बेटा।  70. सिद्धांथ : सफलता और उपलब्धियों के गुरु।  71. पीताम्बर : पीले वस्त्र धारण करने वाला।  72. प्रमोद : आनंद।  73. पुरुष : अद्भुत व्यक्तित्व।  74. रक्त : लाल रंग के शरीर वाला।  75. रुद्रप्रिय : भगवान शिव के चहेते।  76. सर्वदेवात्मन : सभी स्वर्गीय प्रसाद के स्वीकार्ता।  77. सर्वसिद्धांत : कौशल और बुद्धि के दाता।  78. सर्वात्मन : ब्रह्मांड की रक्षा करने वाला।  79. ओमकार : ओम के आकार वाला।  80. शशिवर्णम : जिसका रंग चंद्रमा को भाता हो।  81. शुभगुणकानन : जो सभी गुण के गुरु हैं।  82. श्वेता : जो सफेद रंग के रूप में शुद्ध है।  83. सिद्धिप्रिय : इच्छापूर्ति वाले।  84. स्कन्दपूर्वज : भगवान कार्तिकेय के भाई।  85. सुमुख : शुभ मुख वाले।  86. स्वरूप : सौंदर्य के प्रेमी।  87. तरुण : जिसकी कोई आयु न हो।  88. उद्दण्ड : शरारती।  89. उमापुत्र : पार्वती के बेटे।  90. वरगणपति : अवसरों के स्वामी।  91. वरप्रद : इच्छाओं और अवसरों के अनुदाता।  92. वरदविनायक : सफलता के स्वामी।  93. वीर गणपति : वीर प्रभु।  94. विद्यावारिधि : बुद्धि के देव।  95. विघ्नहर : बाधाओं को दूर करने वाले।  96. विघ्नहर्ता : बुद्धि की देव।  97. विघ्नविनाशन : बाधाओं का अंत करने वाले।  98. विघ्नराज : सभी बाधाओं के मालिक।  99. विघ्नराजेन्द्र : सभी बाधाओं के भगवान।  100. विघ्नविनाशाय : सभी बाधाओं का नाश करने वाला।  101. विघ्नेश्वर : सभी बाधाओं के हरने वाले भगवान।  102. विकट : अत्यंत विशाल।  103. विनायक : सबका भगवान।  104. विश्वमुख : ब्रह्मांड के गुरु।  105. विश्वराजा : संसार के स्वामी।  105. यज्ञकाय : सभी पवित्र और बलि को स्वीकार करने वाला।  107. यशस्विन : सबसे प्यारे और लोकप्रिय देव।  108. योगाधिप : ध्यान के प्रभु।

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anju mishra Apr 24, 2019

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anju mishra Apr 23, 2019

मंगलवार को करें हनुमान जी के इन 12 नामों का पाठ, साढ़ेसाती और ढय्या से भी मिलेगा छुटकारा   1. हनुमान, ॐ श्री हनुमते नमः। अर्थ -  भक्त हनुमान, जिनकी ठोड़ी में दरार हो। 2. अञ्जनी सुत, ॐ अञ्जनी सुताय नमः। अर्थ - देवी अंजनी के पुत्र 3. वायु पुत्र, ॐ वायुपुत्राय नमः। अर्थ - पवनदेव के पुत्र 4. महाबल, ॐ महाबलाय नमः। अर्थ - जिसके पास बहुत ताकत हो। 5. रामेष्ट, ॐ रामेष्ठाय नमः। अर्थ - श्रीराम के प्रिय 6. फाल्गुण सखा, ॐ फाल्गुण सखाय नमः। अर्थ - अर्जुन के मित्र 7. पिङ्गाक्ष, ॐ पिंगाक्षाय नमः। अर्थ - जिनकी आंखे लाल या सुनहरी है। 8. अमित विक्रम, ॐ अमितविक्रमाय नमः। अर्थ - जिसकी वीरता अथाह या असीम हो। 9. उदधिक्रमण, ॐ उदधिक्रमणाय नमः। अर्थ - एक छलांग में समुद्र पार करने वाले 10. सीता शोक विनाशन, ॐ सीताशोकविनाशनाय नमः। अर्थ - माता सीता का दुख दूर करने वाले 11. लक्ष्मण प्राण दाता, ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमः। अर्थ - लक्ष्मण के प्राण वापस लाने वाले 12. दशग्रीव दर्पहा, ॐ दशग्रीवस्य दर्पाय नमः। अर्थ - दस सिर वाले रावण का घमंड नाश करने वाले

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anju mishra Apr 23, 2019

राम लक्ष्मण जानकी जय बोलो हनुमान की श्री राम, जय राम,जय जय राम पूज्जनीय प्रभु श्रीराम का वनवास काल- भगवान राम को 14 वर्ष को वनवास हुए था। उनमें से 12 वर्ष उन्होंने जंगल में रहकर ही काटे। 12वें वर्ष की समाप्त के दौरान सीता का हरण हो गया तो बाद के 2 वर्ष उन्होंने सीता को ढूंढने, वानर सेना का गठन करने और रावण से युद्ध करने में गुजारे। 14 वर्ष के दौरान उन्होंने बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य किए जिसके चलते आज भी हमारे देश और देश के बाहर राम संस्कृति और धर्म को देखा जा सकता है। प्रभु श्रीराम ने वन में बहुत ही सादगीभरा तपस्वी का जीवन जिया। वे जहां भी जाते थे तो 3 लोगों के रहने के लिए एक झोपड़ी बनाते थे। वहीं भूमि पर सोते, रोज कंद-मूल लाकर खाते और प्रतिदिन साधना करते थे। उनके तन पर खुद के ही बनाए हुए वस्त्र होते थे। धनुष और बाण से वे जंगलों में राक्षसों और हिंसक पशुओं से सभी की रक्षा करते थे। इस दौरान उन्होंने देश के सभी संतों के आश्रमों को बर्बर लोगों के आतंक से बचाया।  अत्रि को राक्षसों से मुक्ति दिलाने के बाद प्रभु श्रीराम दंडकारण्य क्षेत्र में चले गए, जहां आदिवासियों की बहुलता थी। यहां के आदिवासियों को बाणासुर के अत्याचार से मुक्त कराने के बाद प्रभु श्रीराम 10 वर्षों तक आदिवासियों के बीच ही रहे। उन्होंने वनवासी और आदिवासियों के अलावा निषाद, वानर, मतंग और रीछ समाज के लोगों को भी धर्म, कर्म और वेदों की शिक्षा दी।   वन में रहकर उन्होंने वनवासी और आदिवासियों को धनुष एवं बाण बनाना सिखाया, तन पर कपड़े पहनना सिखाया, गुफाओं का उपयोग रहने के लिए कैसे करें, ये बताया और धर्म के मार्ग पर चलकर अपने री‍ति-रिवाज कैसे संपन्न करें, यह भी बताया। उन्होंने आदिवासियों के बीच परिवार की धारणा का भी विकास किया और एक-दूसरे का सम्मान करना भी सिखाया। उन्हीं के कारण हमारे देश में आदिवासियों के कबीले नहीं, समुदाय होते हैं। उन्हीं के कारण ही देशभर के आदिवासियों के रीति-रिवाजों में समानता पाई जाती है। भगवान श्रीराम ने ही सर्वप्रथम भारत की सभी जातियों और संप्रदायों को एक सूत्र में बांधने का कार्य अपने 14 वर्ष के वनवास के दौरान किया था। एक भारत का निर्माण कर उन्होंने सभी भारतीयों के साथ मिलकर अखंड भारत की स्थापना की थी। भारतीय राज्य तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश, केरल, कर्नाटक सहित नेपाल, लाओस, कंपूचिया, मलेशिया, कंबोडिया, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका, बाली, जावा, सुमात्रा और थाईलैंड आदि देशों की लोक-संस्कृति व ग्रंथों में आज भी राम इसीलिए जिंदा हैं।

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