anju mishra Feb 18, 2019

ओम् नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🙏🌹 माघ पूर्णिमा इस बार 19 फरवरी 2019 मंगलवार को है। इस  दिन पुष्य नक्षत्र होने से इस दिन का महत्व और अधिक हो गया है।  माघ पूर्णिमा पर स्नान, दान और जप करना काफी काफी फलदायी माना गया है। माघ पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त में नदी स्नान करने से रोग दूर होते हैं। इस दिन तिल और कंबल का दान करने से नरक लोक से मुक्ति मिलती है। जानें कब से शुरु होगी पूर्णिमा पूर्णिमा आरंभ: 19 फरवरी 2019, मंगलवार 01:11 बजे से  पूर्णिमा समाप्त: 19 फरवरी 2019, मंगलवार 21:23 बजे। शुभ मुहूर्त 1: 20 बजे से रात 9 बजकर 10 मिनट तक है  माघ पूर्णिमा व्रत कथा पौराणिक कथा के मुताबिक नर्मदा नदी के तट पर शुभव्रत नामक विद्वान ब्राह्मण रहते थे, लेकिन वे काफी लालची थे। इनका लक्ष्य किसी भी तरह धन कमाना था और ऐसा करते-करते ये समय से पूर्व ही वृद्ध दिखने लगे और कई बीमारियों की चपेट में आ गए। इस बीच उन्हें अंर्तज्ञान हुआ कि उन्होंने पूरा जीवन तो धन कमाने में बीता दिया, अब जीवन का उद्धार कैसे होगा। इसी क्रम में उन्हें माघ माह में स्नान का महत्व बताने वाला एक श्लोक याद आया। इसके बाद स्नान का संकल्प लेकर ब्राह्मण नर्मदा नदी में स्थान करने लगे। करीब 9 दिनों तक स्नान के बाद उऩकी तबियत ज्यादा खराब हो गई और मृत्यु का समय आ गया। वे सोच रहे थे कि जीवन में कोई सत्कार्य न करने के कारण उन्हें नरक का दुख भोगना होगा, लेकिन वास्तव में मात्र 9 दिनों तक माघ मास में स्नान के कारण उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।  जय श्री हरि विष्णु की 🙏🌹

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anju mishra Feb 18, 2019

🔥🍃🔥ऊँ नमः शिवाय हर हर महादेव🔥🍃🔥 🌿🌿🌿🍁🍁🍁🌿🌿🌿 🔥🔥ऊँ नमः शिवाय चरणं शरणं ममह🔥🔥 (भगवान शिव का अनुपम सौंदर्य) "एक बार गणेशजी ने भगवान शिवजी से कहा, पिताश्री ! आप यह चिताभस्म लगाकर, मुण्डमाला धारणकर अच्छे नहीं लगते, मेरी माता गौरी अपूर्व सुंदरी और आप उनके साथ इस भयंकर रूप में। पिताजी आप एक बार कृपा करके अच्छे से स्नान करके माता के सम्मुख आएं, जिससे हम आपका असली स्वरूप देख सकें। भगवान शिवजी ने गणेशजी की बात मान ली। कुछ समय बाद जब शिवजी स्नान करके लौटे तो उनके शरीर पर भस्म नहीं, बिखरी जटाएं सँवरी हुई, मुण्डमाला उतरी हुई थी। सभी देवता, यक्ष, गंधर्व, शिवगण उन्हें अपलक देखते ही रहे। वो ऐसा रूप था कि मोहिनी अवतार रूप भी फीका पड़ जाय। भगवान शिव ने अपना रूप कभी देखा ही नहीं न कभी उसे प्रकट किया। शिवजी का ऐसा अतुलनीय रूप कि करोड़ों कामदेव को भी मलिन किये दे रहा था। गणेशजी अपने पिता की इस मनमोहक छवि को देखकर स्तब्ध रह गए और मस्तक झुकाकर बोले - मुझे क्षमा करें पिताजी, परन्तु अब आप अपने पूर्व स्वरूप को धारण कर लीजिए। भगवान शिव ने पूछा - क्यों पुत्र अभी तो तुमने ही मुझे इस रूप में देखने की इच्छा प्रकट की थी, अब पुनः पूर्व स्वरूप में आने की बात क्यों ? गणेशजी ने मस्तक झुकाये हुए ही कहा - क्षमा पिताश्री मेरी माता से सुंदर कोई और दिखे मैं ऐसा कदापि नहीं चाहता। और शिवजी मुस्कुराते हुए अपने पुराने स्वरूप में लौट आये। कई संत महात्माओं ने अपने अनुभव से कहा है कि कर्पूरगौर शंकर तो भगवान श्रीराम से भी सुंदर हैं परन्तु वह अपना निज स्वरूप कभी प्रकट नहीं करते क्योंकि इससे उनके प्रियतम आराध्य श्रीराम की सुंदरता के यश की प्रशंसा में कमी होगी।" जय गजानन महाराज की ।। हर हर महादेव !!

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anju mishra Feb 17, 2019

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