anita sharma Jun 26, 2019

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anita sharma Jun 26, 2019

🔔🔔🔔🔔 संसार में ऐसी कोई वस्तु नहीं है, जो प्रेम के बदले में न दी जा सके | तन, मन, धन, प्राण – सभी इस पर निछावर किये जा सकते हैं | प्रहलाद को देखिये | उन्हें न राज्य की परवा है न प्राणों की | उन्हें तरह-तरह के कष्ट दिये जाते हैं – बार-बार मार पड़ती है, पर्वत शिखर से गिराया जाता है, साँपों से डसाया जाता है, हाथियों से कुचलवाया जाता है, अग्नि में गिराया जाता है तो भी वे अपनी टेक नहीं छोड़ते – प्राणों की बाजी लगाकर भी भगवत्प्रेम को नहीं छोड़ते | आखिर भगवान् प्रकट होते हैं और आने में विलम्ब हुआ, इसके लिये प्रहलाद से क्षमा माँगते हैं | जिस समय साधु वेषधारी भगवान् ने अपने सिंह के लिये मयूरध्वज से उसका शरीर माँगा तो राजा बड़े हर्ष से कहता है, ‘महाराज ! आप कोई चिन्ता न करें, मैं प्रसन्नतापूर्वक यह शरीर बाघ को देने को तैयार हूँ | यह बाघ तो साक्षात नारायण का स्वरूप है | इनकी सेवा का सौभाग्य फिर कब प्राप्त होगा ?’ देखिये, कैसी ऊँची दृष्टि है ! शरीर की भिक्षा माँगने वाले में भी राजा को साक्षात श्रीहरि की ही झाँकी होती है | भगवान् ऐसे प्रेमियों के ऋण से कैसे उऋण हो सकते हैं

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anita sharma Jun 26, 2019

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anita sharma Jun 26, 2019

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anita sharma Jun 26, 2019

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anita sharma Jun 26, 2019

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anita sharma Jun 25, 2019

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