anita sharma Apr 18, 2019

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anita sharma Apr 18, 2019

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anita sharma Apr 18, 2019

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anita sharma Apr 18, 2019

🔔🔔 अपने जीवन को सँभालें और सोचें कि हम क्या कर रहे हैं ? किधर जा रहे हैं ? हमें क्या अच्छा लगता है ? भगवान् का भजन अच्छा लगता है कि संसार (भोग और संग्रह) अच्छा लगता है ? संसार क्या फायदा करता है और भगवान् क्या नुकसान करते हैं ? पाप क्या फायदा करता है और धर्म क्या नुकसान करता है विचार करें, देखें, सोचें – संसार साथी सब स्वार्थ के हैं, पक्के विरोधी परमार्थ के हैं | देगा न कोई दुःख में सहारा, सुन तू किसी की मत बात प्यारा || भजन स्मरण करें तो घर वाले राजी नहीं होंगे | पर झूठ, कपट, बेईमानी करें तो घर वाले राजी हो जायँगे | विचार करो कि वे आपके फायदे में राजी होते हैं कि आपके नुकसान में में राजी होते हैं ? इस तरफ ध्यान दो कि आपका भला चाहने वाले और भला करने वाले कौन-कौन हैं ? भगवान् ने हमें शरीर दिया है, पदार्थ दिये हैं, पर सब कुछ देकर भी वे हमारे पर एहसान नहीं करते | परन्तु संसार थोड़ा-सा काम करता है तो कितना एहसान करता है ? वह तो अच्छा लगता है, पर भगवान् अच्छे नही लगते ! भगवान् ने शरीर दिया, आँखें दी, हाथ दिये, पाँव दिये, बुद्धि दी, विवेक दिया, सब कुछ दिया, उनसे सुख पाते हैं और भगवान् को याद ही नहीं करते | 🙏🙏

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