Anita Mittal May 9, 2019

🌴🌴आपका आजीवन हर पल सर्वशुभमंगलकारी हो जी 🌴🌴 🌿🌿हर हर महादेव जी 🌿🌿 🌼🌼सबसे सुखी कौन है ? 🌼🌼 ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ एक बार भगवान बुद्ध का उपदेश सुनने बहुत से लोग आये थे । प्रवचन के समय उनके शिष्य आनंद ने पूछा , भंते ! आपके सामने हजारों की संख्या में लोग बैठे हैं । बताइए , इनमें से सबसे सुखी कौन है ? बुद्ध ने कहा , वह देखो ! सबसे पीछे दुबला सा फटेहाल जो आदमी बैठा है , वह सबसे अधिक सुखी है । यह उत्तर सुनकर आनंद की समस्या का समाधान नहीं हुआ । उसने पुनः प्रश्न किया , यह कैसे हो सकता है ? बुद्ध ने आनंद की ओर देखा और बोले , अच्छा अभी बताता हूँ । उन्होंने बारी - 2 से अपने सामने बैठे लोगों से पूछा , तुम्हें क्या चाहिए ? किसी ने धन माँगा , किसी ने संतान , किसी ने बीमारी से मुक्ति माँगी । किसी ने अपने दुश्मन पर विजय माँगी तो किसी ने मुकद्दमें में जीत की प्रार्थना की । वहाँ पर कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं निकला , जिसने कुछ न कुछ ना माँगा हो । अंत में उस फटेहाल व्यक्ति की बारी आई । बुद्ध ने उससे पूछा , कहो भाई ! तुम्हें क्या चाहिए ? उस व्यक्ति ने कहा , कुछ भी नहीं । अगर भगवान को कुछ देना ही है , तो बस इतना कर दे कि मेरे अंदर कभी कोई चाह ही ना पैदा हो । मैं ऐसे ही अपने आप को बड़ा सुखी मानता हूँ । तब बुद्ध ने आनंद से कहा , आनंद ! जहाँ चाह है , वहाँ सुख नहीं हो सकता । 🌷🌷महादेव जी का स्नेहानुराग आपके साथ हर पल बना रहे जी 🌷🌷 🌹🌿हर हर महादेव जी 🌿🌹🥀

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Anita Mittal May 7, 2019

🌷🌷कहीं डूब न जाऊँ ! मेरा हाथ थामे रखना , हे आदिशक्ति माँ !! मुझ पर रहमत की नज़र रखना 🌷🌷 🌹🌹जय माँ लक्ष्मी जी 🌹🌹 🌺🌺पश्चाताप , ज्ञान का प्रारंभ है 🌺🌺 ***************************** आलंदी गाँव के ब्राह्मणों में विसोबा चारी अत्यंत दुष्ट था । वह ज्ञानदेव , सोपान देव एवं मुक्ताबाई जैसे बच्चों से द्वेष करता था । एक बार मुक्ता को मांडा ( पतली रोटी ) खाने की इच्छा हुई । मांडा बनाने के लिए एक विशेष बर्तन की आवश्यकता होती है । ज्ञानदेव बर्तन लाने के लिये कुम्हार के पास जाने लगे , तो विसोबा भी उनके पीछे जाने लगा । जब ज्ञानदेव ने कुम्हार से बर्तन माँगा , तो विसोबा ने उन्हें देने से मना कर दिया । ज्ञानदेव को खाली हाथ लौटना पड़ा । घर आकर मुक्ता से कहा , आटा गूंथो ! मगर बर्तन कहाँ है ? मुक्ता ने पूछा । ज्ञानदेव बोले , मेरी पीठ है ना । उन्होंने अपनी पीठ सामने कर दी । मुक्ता ने भाई की पीठ पर ही मांडे सेंकने शुरु कर दिये । विसोबा ने प्रपंच बच्चों का मज़ाक उड़ाने के लिये रचा था और अब उन सबके पीछे छिपकर खड़ा हो गया था । लेकिन जब ज्ञानदेव की पीठ पर मांडे सिंकने का चमत्कार देखा तो उसका घमंड चूर -2 हो गया ।उसे पश्चाताप हुआ कि व्यर्थ ही वह इश अबोध बालकों से द्वेष रखता था । उसने ज्ञानदेव के चरण पकड़े और माफी माँगी । यही ज्ञानदेव आगे चलकर संत ज्ञानेश्वर के रुप में जाने गये । विसोबा प्रभु की लीला से प्रभावित हो गया था । उसके स्वभाव में परिवर्तन आ गया था । अब वह भी संत विसोबा के नम से जाना जाने लगा था । 🌻🌻अक्षय तृतीया की सपरिवार अनेकानेक हार्दिक शुभेच्छायें 🌻🌻 🌹🌹जय माँ लक्ष्मी जी 🌹🌹 🌹🌹जय श्री हरि जी 🌹🌹

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