Anita Mittal Mar 11, 2019

🥀🥀भगवान के पास तो , देने के हजार तरीक़े हैं माँगने वाले तू देख , तुझमें कितने सलीके हैं 🥀🥀 🌿🌿जय भोलेनाथ की जी 🌿🌿 🌼🌼किरात बन कर परीक्षा ली 🌼🌼 ################### युद्ध अवश्यंभावी है , ऐसा जानकर कर्ण को युद्ध में शिकस्त देने के लिए अर्जुन पाशुपतास्त्र प्राप्त करना चाहते थे । शिव को प्रसन्न करने के उद्देश्य से वह तपस्या में बैठ गये । अर्जुन के हवनकुंड की आग से आसपास का इलाका तपने लगा । तमाम ऋषि - मुनि घबराकर भगवान शिव के पास पहुँचे । शिव को सारी बात पता थी । उन्होंने अर्जुन की परीक्षा लेने की सोची । शिव ने किरात का और पार्वती ने किरात पत्नी का वेश बनाया और वहाँ पहुँचे। पर वे अर्जुन के पास पहुँचते इससे पहले ही एक राक्षस सूअर का रुप धर अर्जुन पर झपटने जा रहा था । शिव ने बाण चलाया । पर तपस्या में लीन अर्जुन ने सूअर की पदचाप सुनकर बाण छोड़ दिया था । दोनों के बाण एक साथ सूअर रुपी राक्षस को लगे । सूअर को मारने को लेकर किरात और अर्जुन में विवाद हो गया , जिसकी परिणति युद्ध में हुई । पर अर्जुन यह देखकर चकित हो गया कि उसकी तमाम कोशिशों के बावजूद किरात को एक भी खरोंच तक नहीं लगी । उसने शिव की मिट्टी की प्रतिमा की पूजा करते हुए कहा , ईश्वर ये कैसा चमत्कार है ? तभी उसने देखा कि शिव की प्रतिमा पर अर्पित माला किरात के गले में है । अर्जुन को अपनी भूल का अहसास हुआ । शिव ने कहा , मैं तुम्हारी वीरता एवं भक्ति से प्रसन्न हूँ । शिवजी ने अर्जुन को ना सिर्फ पाशुपतास्त्र दिया , बल्कि उसे चलाने की विधि भी सिखाई और कहा , इसका प्रयोग सिर्फ धर्म की रक्षार्थ ही करना । 🌷🌷भगवान भोलेनाथ का स्नेहानुराग आपके साथ बना रहे 🌷🌷 🌿🌹जय भोलेनाथ की जी 🌹🌿

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Anita Mittal Mar 9, 2019

🌸🌸इंसानियत ही पहला धर्म है इन्सान का , फिर पन्ना खुलता है " गीता " या " कुरान " का 🌸🌸 🌹🌹जय श्री राम जी 🌹🌹 🌻🌻सत्संग की महिमा 🌻🌻 ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;; भगवान श्रीराम समय -2 पर अपने गुरुदेव वशिष्ठ जी के आश्रम में जाकर उनका सत्संग किया करते थे । एक दिन सत्पुरुषों के सत्संग के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुये महर्षि वशिष्ठ जी ने कहा , रघुकुल भूषण राम ! जिस प्रकार दीपक अंधकार का नाश करता है , उसी प्रकार विवेक ज्ञान सम्पन्न महापुरुष हृदय स्थित अज्ञान रुपी अंधेरे को सहज में ही हटा देने में सक्षम होते हैं । इसलिए सभी धर्मग्रंथों में प्रतिदिन किसी ना किसी सत्पुरुष के सत्संग तथा शास्त्रों के स्वाध्याय पर बल दिया गया है । महर्षि वशिष्ठ जी ने अपने शिष्य श्रीराम से आगे कहा , विवेकी महापुरुष इन्द्रियनिग्रही ; परम विरक्त तथा हर क्षण ब्रह्म का चिंतन करने वाले होते हैं । जिनमें तमोगुण का सर्वथा अभाव है , जो रजोगुण रहित होय हैं , जिनमें संसार के प्रति वैराग्य सुदृढ हो जाता है , ऐसे सत्पुरुषों का सान्निध्य बड़े भाग्य और पुण्य से प्राप्त होता है । उनका सान्निध्य पाते ही सांसारिक भोगों की तृष्णा मिट जाती है । आनंद स्वरुप आत्मा की अनुभूति हो जाने से साधक धन - सम्पत्ति, भोग - वैभव त्याग देने को सहज ही तत्पर हो जाता है । श्रीराम जी ने पूछा , गुरुवर ! ऐसे महापुरुष का सर्वोत्कृष्ट गुण क्या होता है ? वशिष्ठ जी ने कहा , उसका नाम है विवेक । विवेक अधिकारी पुरुष ही हृदयरूपी गुफा में ऐसे स्थित हो जाता है , जैसे निर्मल आकाश में चंद्रमा । विवेक ही वासनायुक्त अज्ञानी जीव को ज्ञान प्रदान करता है । ज्ञानस्वरुप आत्मा ही सबसे बड़ा परमेश्वर है । ज्ञानरुपी चिदात्म सूर्य का उदय होते ही संसाररूपी रात्रि में विचरता हुआ मनरूपी पिशाच नष्ट हो जाता है । 🌷🌷श्रीराम जी का स्नेहानुराग आपके साथ आजीवन बना रहे 🌷🌷 🌹🌹जय श्री राम जी 🌹🌹

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Anita Mittal Mar 8, 2019

🌷🌷भावों की गहराइयाँ माप सका है कौन भाषा जहाँ असमर्थ हो , बोल उठता है मौन 🌷🌷 🌹🌹जय माता की जी 🌹🌹 🌸🌸 माँ की महिमा 🌸🌸 ----------------------------- स्वामी विवेकानंद से एक जिज्ञासु ने प्रश्न किया , माँ की महिमा संसार में किस कारण गाई जाती है ? स्वामी जी मुस्कुराये , उस व्यक्ति से बोले , पाँच सेर वज़न का एक पत्थर लेकर आओ । जब वह व्यक्ति पत्धर ले आया , तो स्वामी जी ने उससे कहा , अब इस पत्धर को किसी कपड़े में लपेटकर अपने पेटपर बाँध लो और 24 घंटे बाद मेरे पास आओ , तब मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर दूँगा । स्वामी जी के निर्देशानुसार उस व्यक्ति ने पत्धर को अपने पेट से बाँध लिया और चला गया । पत्धर बाँधे वह दिन भर अपना काम करता रहा , किंतु हर क्षण उसे परेशानी और थकान महसूस हुई । शाम होते -2 पत्धर का बोझ संभाले हुये उससे चलना - फिरना दुश्वार हो गया । वह असह्य हो उठा । थका - मांदा वह स्वामी जी के पास पहुँचा और बोला , मैं और अधिक देर तक बाँधे नहीं रख सकूँगा । एक प्रश्न का उत्तर पाने के लिए मैं इतनी बड़ी सज़ा नहीं भुगत सकता । स्वामी जी मुस्कुराते हुए बोले , पेट पर इस पत्थर का बोझ तुमसे कुछ घंटे भी नहीं उठाया गया । वह एक माँ ही है जो अपने गर्भ में पूरे नौ माह तक अपने शिशु को ढोती है और गृहस्थी का भी सारा काम करती है । संसार में माँ के सिवा कोई इतना धैर्यवान औऋ सहनशील नहीं है , इसलिए माँ सज बढ़कर इस संसार में कोई नहीं है । 🌲🌲माता रानी की मेहर आपके साथ बनी रहे 🌲🌲 🌹🌹जय माता की जी 🌹🌹

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