Anita Mittal Apr 25, 2019

🌺🌺हरि से बड़ा हरि का नाम , वह जन सारे डूब जायेंगे जिनके मुख नाहिं राम 🌺🌺 🌹🌹जय श्री हरि जी 🌹🌹 🌸🌸सर्वस्व वनस्पति उपयोगी है 🌸🌸 ''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''' आयुर्वेद के महान् ज्ञाता चरक के आश्रम के पास अनेक प्रकार की वनस्पतियाँ थीं । वह हर पूर्णिमा की रात अपने शिष्यों को लेकर वन में निकल जाते और वहाँ उन्हें विविध प्रकार की वनस्पतियों का ज्ञान करवाते । रात में हिंसक पशुओं की भयावह ध्वनि से डरकर कुछ शिष्य भाग जाते । तब चरक कहते , अच्छा हुआ कि कायर भाग गये । जो मृत्यु से डर गया , वह क्या वैद्य बनेगा ! वैका तो काम ही मृत्यु से लड़ना है । चरक की परीक्षा अत्यंत कठिन होती थी , जिसमें से कुछ ही विद्यार्थी उत्तीर्ण होते थे । एक बार परीक्षा में चरक ने अपने छात्रों को एक महीने में घूम - घूमकर उन वनस्पतियों को ढूंढ कर लाने को कहा जिनका आयुर्वेद में प्रयोग नहीं होता । कुछ छात्र घास - फूस और कंटीली झाड़ ले आये । कुछ पत्तियाँ और वृक्षों की छाल ले आये । कुछ ने अधिक परिश्रम कर विषैली फलियाँ और जड़ें ढूंढ निकाली । उनतीसवें दिन ज्यादातर छात्रों ने अपनी वनस्पतियाँ गुरुदेव को दिखा दी । चरक ने उनमें से कुछ वनस्पतियों से बनने वाली औषधियों के बारे में बताया , तो कुछ के बारे में उन्होंने कुछ नहीं कहा । तीसवें दिन एक छात्र खाली हाथ आया और कहने लगा , गुरुदेव ! मुझे तो ऐसी एक भी ऐसी वनस्पति नहीं मिली जिसका आयुर्वेद में उपयोग नहीं होता । इसपर सभी छात्र हँस पड़े । चरक ने कहा , इस बार की परीक्षा में सिर्फ यही एक छात्र उत्तीर्ण हुआ हैं । 🍁🍁श्रीहरि जी की कृपा से आप और आपका परिवार आन्नदित व सुखी रहे 🍁🍁 🌹🌹जय श्री हरि जी 🌹🌹जय माँ लक्ष्मी जी 🌹🌹

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Anita Mittal Apr 24, 2019

🌼🌼किसी को " प्रेम देना "सर्वश्रेष्ठ उपहार है और किसी से " प्रेम पाना "सर्वश्रेष्ठ सम्मान है 🌼🌼🌷🌷जय श्री गणेश जी 🌷🌷 🌲🌲संत का आभूषण अंहकार नहीं 🌲🌲 ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;; संत ज्ञानेश्वर एक बार नामदेव तथा मुक्ताबाई के साथ तीर्थाटन करते हुए प्रसिद्ध संत गोरा के यहाँ पधारे । संत समागम हुआ । आपस में बातचीत चलने लगी । तपस्विनी मुक्ताबाई ने पास में रखे डंडे को लक्ष्य कर गोरा कुम्हार से पूछा , यह क्या है ? गोरा ने उत्तर दिया , मैं इस डंडे से ठोककर अपने घड़ो की परीक्षा लेता हूँ कि वे पक गये हैं या कच्चे ही हैं । मुक्ताबाई हँस पड़ी और कहने लगी , हम भी तो मिट्टी के ही पात्र हैं । क्या इस डंडे सेतुम हमारी परीक्षा कर सकते हो ? यह सुन गोरा उठे और वहाँ उपस्थित प्रत्येक महात्मा का मस्तक उस डंडे से ठोकने लगे । उनमें से कुछ ने इसे गोरा का विनोद माना , तो कुछेक को यह रहस्य प्रतीत हुआ । किंतु नामदेव को बुरा लगा कि एक कुम्हार उन जैसे संतों की एक डंडे से परीक्षा ले रहा है । उनके चेहरे पर क्रोध की झलक दिखाई दी । गोरा ने उनका मस्तक ठोककर कहा , यह बर्तन अभी कच्चा है । उसके बाद बेहद आत्मीय स्वर में उन्होंने नामदेव से कहा , तपस्वी श्रेष्ठ ! आप निश्चय ही संत हैं , लेकिन आपके हृदय का अंहकार रुपी सर्प अभी मरा नहीं है । तभी तो मान - अपमान की ओर आपका ध्यान तुरंत चला जाता है । आपको किसी सद्गुरु का मार्गदर्शन चाहिए । संत नामदेव यह सुनकर लज्जित हुये । थोड़े दिनों बाद उन्होंने संत विठोबा खेचर से दीक्षा ली , जिससे उनके भीतर का अंहकार छूट गया । 🌻🌻आप आजीवन सुख - समृद्धि से भरपूर रहें यही शुभमंगलकामना 🌻🌻 🌹🌹जय श्री गणेश जी 🌹🌹 🌹🌹जय सुखकर्ता दुखहर्ता की 🌹🌹

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Anita Mittal Apr 22, 2019

🌷🌷अस्तुति केहि विधि करुँ तुम्हारी , क्षमहु नाथ अब चूक हमारी । शंकर हो संकट के नाशन , विघ्नविनाशन मंगल कारन 🌷🌷 🌿🌿जय भोलेनाथ की 🌿🌿 🌻🌻समय और परिस्थिति की महत्ता 🌻🌻 ---------------------------------------------- एक राजा अपने दरबार में आने वाले पंडितों , विद्वानों से प्रायः प्रश्न किया करते थे , संसार में सबसे महत्त्वपूर्ण कौन है , सबसे बड़ा कर्त्तव्य क्या है ? कोई भगवान को महत्त्वपूर्ण बताता , तो कोई कह देता , राजन् ! सबसे महत्त्वपूर्ण तो प्रजापालक राजा होता है । किसी के उत्तर से राजा को संतुष्टि नहीं होती । एक दिन राजा घोड़े पर सवार होकर शिकार के लिए जंगल में गये । एक हिंसक पशु का पीछा करते - 2 वह बहुत दूर निकल गए । भीषण गर्मी के कारण उन्हें प्यास लगी और चक्कर आने लगा । सामने एक आश्रम देख वह भीतर गये तो देखा , एक संत समाधि में लीन थे । राजा कुछ पलों में ही बेहोश होकर गिर पड़े । होश आने पर देखा , कि संत उनके मुँह पर शीतल जल के छींटे मार रहे थे । संत ने उन्हें उठाकर शीतल जल पिलाया । राजा ने विनम्रता से पूछा , महात्मन् ! आप तो समाधि में लीन थे , आपने भगवान का ध्यान छोड़कर मेरे जैसे संसारी व्यक्ति के लिये समाधि क्यों भंग की ? संत ने कहा , राजन ! आपके प्राण संकट में थे । ऐसे समय में मेरे लिए भगवान की अपेक्षा आपकी सहायता करना जरुरी था । समय और परिस्थितियों को देखते हुए कर्त्तव्य का निर्धारण करना चाहिए । पूजा उपासना से अधिक महत्त्वपूर्ण किसी के प्राण बचाने का कार्य है । राजा की जिज्ञासा का आज प्रत्यक्ष समाधान हो गया , वह संत के चरणों में झुक गये । 🌺🌺महादेव की असीम कृपा आपके साथ बनी रहे जी 🌺🌺 🌿🌿हर हर महादेव जी 🌹🌹जय शिवशम्भू जी 🌿🌿

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Anita Mittal Apr 21, 2019

🌿🌿कुबूल हो या ना हो सज़दा और प्रणाम मेरा , तेरे बंदे हैं हम भोले ! बंदगी है काम मेरा 🌿🌿 🌹🌿हर हर महादेव जी 🌿🌹 🌼🌼यज्ञ देवता की तृप्ति 🌼🌼 """""""""""""""""""""'"""""""""" महाराजा युधिष्ठिर ने पूर्ण विधि - विधान से राजसूय यज्ञ किया । दिल खोलकर ऋषि - मुनियों का स्वागत - सत्कार और सम्मान किया । इसके बावजूद यज्ञ की सफलता सूचक आकाश - घण्टियों की ध्वनि नहीं सुनाई पड़ी । सभी पांडव चिंता मग्न हो गये कि यज्ञ में कहाँ कमी रह गई ? पंडितों ने भी कहा कि यज्ञ में किसी त्रुटि की संभावना का प्रश्न ही नहीं उठता । अंत में युधिष्ठिर भगवान श्रीकृष्ण के पास पहुँचे और उन्हें सारी बात बताकर पूछा कि इसका क्या कारण हो सकता है ? श्रीकृष्ण मुस्कुराते हुए बोले , धर्मराज ! यज्ञ कराने वाले सारे ब्राह्मणों को अपनी विद्वता का अंहकार हो गया था । वे अपने पांडित्य और जाति के अहं से दग्ध थे । ऐसे में यज्ञ कैसे सफल होता ? युधिष्ठिर ने हाथ जोड़कर पूछा , तो भगवन् ! अब यज्ञ को सफल कराने के लिए क्या करना होगा ? श्रीकृष्ण ने कहा , आप सच्चे और निश्छल हृदय वाले अमुक भक्त को बुलाकर पूर्ण श्रद्धा और प्रेम से भोजन कराइए । उसकी तृप्ति या आशीर्वाद से ही यज्ञ सफल हो सकता है । युधिष्ठिर सामान्य कुल में जन्मे उस भक्त तक पहुँचे । उससे अपने यहाँ आकर भोजन करने की प्रार्थना की । उस भक्त का हृदय द्रवित हो गया और वह यज्ञस्थल पर भोजन के लिये पधारे । उसने भोजन के बाद जैसे ही तृप्ति की डकार लीकि आकाश में घंटियों की ध्वनियाँ गूँजने लगी । सच्चे भक्त की तृप्ति से यज्ञ देवता भी प्रसन्न हो गये । 🌷🌷महादेव की कृपादृष्टि आपके साथ सदैव बनी रहे जी 🌷🌷 🌿🌿ऊँ नमः शिवाय 🌿🌿 🌿🌿हर हर महादेव जी 🌿🌿

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