Anita Mittal Aug 19, 2019

🌷🌷जिसने दी है जिंदगी उसका साया भी नज़र नहीं आता , यूँ तो भर जाती हैं झोलियाँ भी मगर देने वाला नज़र नहीं आता 🌷🌷 🌿🌿ऊँ नमः शिवाय जी 🌿🌿 🌼🌼अनिष्ट का रक्षा कवच : रुद्र अश्रु 🌼🌼 ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;; माना जाता है कि रुद्राक्ष प्रत्येक नकारात्मक उऊर्जा से बचाव करता है । यह सिर्फ योगी , तपस्वियों के लिये ही ना होकर बल्कि सांसारिक प्राणियों के लिये भी है क्योंकि यह जीवन में नकारात्मकता को क्षीण करता है । वजह यह है कि इसमें एक विलक्षण स्पंदन होता है , जो व्यक्ति में ऊर्जा का रक्षा कवच बना देता है और इससे फिर बाहरी नकारात्मक ऊर्जा परेशान नहीं कर पाती । अधिकतर लोग यह जानते हैं कि रुद्राक्ष एक खास किस्म के पेड़ का बीज है । इसका उपयोग आध्यात्मिक क्षेत्र में किया जाता है । ऐसा माना जाता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान् शिव की आँखों के अश्रुबिंदु से हुई । रुद्राक्ष शिव का वरदान है , जो शिव ने भौतिक दु: खों को दूर करने के लिये शिव ने प्रकट किया है । आपने गौर किया होगा कि आप कहीं बाहर जाते हैं तो किसी जगह जल्दी ही नींद आ जाती है तो कहीं बेहद थके हुए होने के बाद भी नहीं । इसकी पहचान के लिए लोग रुद्राक्ष को पानी के ऊपर पकड़कर रखते हैं । अगर वह अपने आप घड़ी की दिशा में घूमने लगे तो पानी पीने लायक है । पानी अगर जहरीला या हानिकारक है तो रुद्राक्ष घड़ी की उल्टी दिशा में घूमेगा । कारण कि माहौल यदि ऊर्जा के अनुकूल नहीं हुआ तो, उस जगह ठहरने का औचित्य ही नहीं । साधु - संन्यासी भी लगातार अपनी जगह बदलते रहते हैं , क्योंकि कभी - 2 किसी स्थान पर सकारात्मक ऊर्जा का वास नहीं होता । ना ही वे एक जगह पर पुनः ठहरते हैं । वे हमेशा रुद्राक्ष पहनते हैं , क्योंकि इससे सकारात्मक ऊर्जा निरंतर मिलती रहती है । लगातार यात्रा करने वालों के लिए रुद्राक्ष बहुत सहायक होता है । 🌻🌻 भगवान् भोलेनाथ का शुभाशीष आपके साथ हर पल बना रहे जी 🌻🌻 🌿🌿हर हर महादेव जी 🌿🌿

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Anita Mittal Aug 12, 2019

🌻🌻मंदिर की परिक्रमा क्यों लगाई जाती है ? 🌻🌻 🌿🌿ऊँ नमः शिवाय 🌿🌿 हम सभी अक्सर मंदिर की परिक्रमा करते हैं । मन में सवाल भी आता होगा कि आखिर क्या कारण या वजह है कि हम मंदिर की परिक्रमा करते हैं ? मान्यताओं के अनुसार मंदिर या ईश्वर की परिक्रमा करने से सकारात्मक ऊर्जा शरीर में प्रवेश करती है व मन को शांति मिलती है । साथ ही यह भी मान्यता है कि नंगे पाँव परिक्रमा करने से अधिक सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है । इसी के साथ यह भी बोला जाता हैं कि जब गणेश जी ने अपने भाई कार्तिकेय के साथ पूरी सृष्टि के चक्कर लगाने की शर्त रखी थी , तभी उन्होंने अपनी चतुराई से पिता शिव व माता पार्वती के तीन चक्कर लगाये थे व उन्हें विजय प्राप्त हुई थी । कहते हैं कि परिक्रमा करने से घर मेंसुख - समृद्धि आती है व जिंदगी में खुशियाँ बनी रहती हैं । 🌷🌷 अन्तिम श्रावणीय सोमवार की सपरिवार हार्दिक शुभेच्छायें जी । महादेव का वरद्हस्त आप सभी के साथ बना रहे जी इन्हीं शुभेच्छाओं के साथ 🌿🌿🌷🌷🌹🌹🙏🙏🌹🌹🌷🌷🌿🌿 🌿🌿हर हर महादेव जी 🌿🌿 🌹🌹🌿🌿🌹🌹

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Anita Mittal Aug 10, 2019

🌼🌼 कमाई की कोई परिभाषा तय नहीं होती , धन तुर्ज़बा , रिश्ते , सम्मान और सबक सब कमाई के रूप हैं 🌼🌼 🌿🌿जय बाबा बर्फानी जी 🌿🌿 🌹🌹आस्था के बंधन ( रक्षा सूत्र )🌹🌹 ------------------------------------------ लाल , पीले और हरे इन तीन धागों से मौली बनती है , कभी - 2 इसमें नीला और सफेद मिलाकर 5 धागों की भी बनाई जाती हैं । तीन और पाँच का मतलब कभी त्रिदेव के नाम की या फिर पंचदेव । मौली को धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है । इसे बाँधने के तीन करण मुख्यतः आध्यात्मिक , चिकित्सकीय और मनोवैज्ञानिक हैं । इसे कलाई , गले और कमर में भी बाँधा जाता है । मौली को कलाई में बाँधने पर * कलावा * या * उपमणिबंध * कहते हैं । हाथ में मूलतः तीन रेखायें होती हैं , जिन्हें * मणिबंध * कहा जाता है । भाग्य और जीवन रेखा का उद् गम स्थल भी मणिबंध ही है । इन तीनों रेखाओं में , दैविक , दैहिक और भौतिक जैसे त्रिविध तापों को देने या मुक्त करने की शक्ति रहती है । इन मणिबंधों के नाम शिव , विष्णु व ब्रह्मा हैं । इसी तरह शक्ति , लक्ष्मी व सरस्वती का भी यहाँ साक्षात् वास रहता है । जब मंत्रित कर कलावा हाथ पर बाँधा जाता है, तो यह तीनों धागों का सूत्र त्रिदेवों व त्रिशक्तियों को समर्पित हो जाता है , जिससे पहनने वाले प्राणी की सब तरह से रक्षा हो जाती है । मौली जैसा पवित्र धागा हाथ पर इसलिए बाँधा जाता है , ताकि मन के सात्विक विचारों में वृद्धि हो । गस धागे को कलाई में बाँधने से शरीर के वात , पित्त तथा कफ के दोषों में सामंजस्य बैठता है । माना जाता है कि कलावा बाँधने से रक्तचाप , हृदय रोग , मधुमेह और लकवा जैसे गंभीर रोगों से काफी हद तक बचाव होता है । शरीर की संरचना का प्रमुख नियंत्रण हाथ की कलाई में होता है , इसलिए रक्षासूत्र बाँधने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है । प्रति वर्ष प्रत्येक मांगलिक कार्यों में रक्षासूत्र बाँधा जाता है । हिंदू धर्म में प्रत्येक धार्मिक कार्यों से पूर्व पुरोहितों द्वारा यजमान के दायें हाथ में रक्षासूत्र बाँधा जाता है । इसके अलावा गाय ,भैंस और बैल को भी पड़वा , गोवर्धन और होली के दिन रक्षासूत्र बाँधा जाता है । 🌻🌻महादेव का शुभाशीषों भरा हाथ आपके साथ हर पल बना रहे जी 🌻🌻 🌹🌹जय बाबा बर्फानी जी 🌹🌹

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Anita Mittal Aug 9, 2019

🌹🌿धीरज रख वो रहमत की बरखा बरसा भी देगा , जिस मालिक ने दर्द दिया है वो दवा भी देगा 🌿🌹 🌿🌿हर हर महादेव जी 🌿🌿 🌹🌹सेवा - धर्म सर्वोपरि 🌹🌹 ********************** महर्षि अनमीषि धर्मशास्त्रों के प्रकाण्ड विद्वान तथा त्यागी तपस्वी संत थे । जहाँ छात्रों को ज्ञान दान करने में लगे रहते थे वहीं उनका यह भी दृढ़ नियम था कि जब तक किसी अतिथि को भोजन नहीं करा देते , तब तक स्वयं भोजन नहीं करते थे । एक दिन दोपहर तक कोई उनके आश्रम में भोजन करने नहीं आया । तीसरे पहर तक वह भूखे अतिथि की प्रतीक्षा करते रहे । पति - पत्नी को लगने लगा कि आज यह क्रम टूट जायेगा । वे अत्यंत व्यग्र हो उठे । ऋषि दंपति भूखे की खोज में निकल पड़े । जंगल में उन्होंने एक वृक्ष के नीचे एक वृद्ध कुष्ठ रोगी को लेटे देखा । वह पीड़ा से कराह रहा था । उसके शरीर के घावों से खून - मवाद रिस रहा था । महर्षि का हृदय द्रवित हो उठा । ऋषि ने रोगी को आश्रम में चलने , भोजन करने व औषधि लगवाने का अनुरोध किया । इस पर वृद्ध रोगी ने कहा , महाराज ! मैं एक चांडाल हूँ । आपके आश्रम कैसे जा सकता हूँ ? ऋषि ने विनम्र भाव से कहा , हम और तुम एक ही परमात्मा के अंश हैं । हम तुम्हें अपने आश्रम ले जाकर रोगमुक्त करेंगे । तुम हमेशा हमारे आश्रम में ही रहोगे । वह वृद्ध रोगी को आश्रम ले आये । उसके घावों को धोकर औषधि लगाई । बड़े प्यार से भोजन करवाया । इसके बाद वह वृद्ध वहीं रहने लगा । 🌿🌿 भोलेनाथ का स्नेहानुराग आपके साथ हर पल बना रहे 🌿🌿 🌿🌿जय भोलेनाथ जी 🌿🌿 🌹🌹जय शिवशंकर जी 🌹🌹

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Anita Mittal Aug 8, 2019

🌻🌻अंहकार से जिसका मन मैला है , करोड़ों की भीड़ में भी वह अकेला है 🌻🌻 🌹🌹जय वृषभानुजा प्यारी की 🌹🌹 🌼🌼उपदेशों की सार्थकता 🌼🌼 महर्षि गौतम ने एक दिन अपने पुत्र चिरकारी को उपदेश देते हुए बताया , मन में अगर किसी की सेवा - सहायता करने का विचार आये तो उसे तुरंत पूरा कर लेना चाहिए , अन्यथा विलंब होने पर मन बदल सकता है । वहीं किसी के प्रति प्रतिशोध लेने या उसके प्रति हिंसा की बात आये , तो उन्हें सोच - विचार के लिये रोककर रखना चाहिए । कुछ दिनों बाद महर्षि गौतम अकस्मात् अपनी भार्या से किसी बात पर क्रोधित हो उठे । उन्होंने अपने पुत्र को बुलाया और उसकी माता का तत्काल वध करने को कहा । ऐसा कह वे वन की ओर चले गये । इधर चिरकारी को महर्षि द्वारा दिया गया उपदेश स्मरण हो आया कि हिंसा के मामले में तत्परता नहीं दिखानी चाहिए । उन्होंने तलवार एक तरफ रखी और प्रभु भजन करने लगे । वन में जब महर्षि का क्रोध शांत हुआ , तो उन्हें आभास हुआ कि पत्नी की हत्या का आदेश देकर उन्होंने बहुत बड़ी भूल कर दी है । वे भागे - 2 आश्रम की आये । वहाँ उन्होंने अपने पुत्र से पूछा , क्या तुमने अपनी माता की हत्या कर दी हैं ? चिरकारी ने उत्तर दिया , आपने ही तो कहा था कि हिंसा के समय तत्परता नहीं दिखानी चाहिए । इसलिए हत्या नहीं की । अब किये देता हूँ । चिरकारी तलवार उठाकर चलने लगा , तो महर्षि ने वह तलवार छीन कर नदी में फैंक दी । उन्हें संतोष हुआ कि उनके द्वारा दिये उपदेशों को पुत्र ने अमल में लाकर सार्थक कर दिया है और पुत्र को मातृ - हत्या के पाप से बचा लिया । 🌷🌷राधेरानी की रहमतें व अनुकम्पा आपके साथ बनी रहें जी 🌷🌷 🌹🌹जय हो बरसाने वाली की जी 🌹🌹

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Anita Mittal Aug 5, 2019

🌷🌷आराधना प्रकृति परिवार की 🌷🌷 🌿🌿हर हर महादेव जी 🌿🌿 पशु - पक्षी , वृक्ष - वनस्पति सबके सार थ अपनी संस्कृति में ही आत्मीय संबंध जोड़ने का प्रयत्न हुआ है । उदाहरणतया गाय की पूजा होती है । कोकिला - व्रत के नियमानुसार कोकिला के दर्शन या आवाज सुनने पर ही भोजन किया जाता है अन्यथा नहीं । नागपंचमी के अवसर पर नागों जैसे विषधर की पूजा तो पराकाष्ठा है । अर्थ ओर उद्देश्य यह है कि जीव - जंतु , नदी , पर्वत - पहाड़ और वृक्ष आदि सभी उपादानों के लिये देवत्व भाव रहे । यही कारण है कि सर्प या नाग को विषधर होते हुये भी उन्हें शत्रुता या घृणा से नहीं देखा जाता । श्रावण में नाग - पूजा की परंपरा है । श्रावणीय शुक्ल पक्षीय पंचमी को सर्पों की पूजा विधिवत् करने की परंपरा विषधर जीव को भी देवता मानने का संदेश देती है । शिव नागों या सर्पों की माला गले में आभूषण की तरह धारण करते हैं तो गणेश जी नाग को यज्ञोपवीत की भांति पहनते दिखलाया है । वहीं श्रीहरि जी शेषनाग पर शयन करते हुए नज़र आते हैं । श्रावणीय शुक्ल पंचमी पर प्रकाश डालते हुये वाराह पुराण में बताया गया है कि इस दिन ब्रह्मा जी ने अपने प्रसाद से शेषनाग को विभूषित किया था । सर्वविदित है कि समुद्र मंथन के समय नाग वासुकि की रस्सी बनायी गयी थी । अग्नि पुराण में नागों के अस्सी कुलों का उल्लेख मिलता है । उनमें नव नाग प्रमुख हैं -- अनन्त , वासुकि , शेष , पद्मनाभं च कंबलम । शंखपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं ।। मान्यता है कि पाणिनि व्याकरण के महाभाष्यकार पतंजलि शेषनाग के अवतार थे । 🌷🌷महादेव की असीम अनुकम्पा आपके साथ बनी रहे जी 🌷🌷 🌻🌻श्रावणीय शुक्लपंचमी ( नागपंचमी ) की सपरिवार अनेकों हार्दिक शुभेच्छायें 🌻🌻 🌿🌿हर हर महादेव जी 🌿🌿 🌹🌹जय नागदेवता की जी 🌹🌹

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