चाहे जितना बोलो कि मैंने इतना जप किया । इतना काम किया । पर वह कुछ भी नहीं है । महामाया अगर मार्ग न छोड़ दें तो कौन क्या कर सकता है । एक बार कामारपुकुर में गर्मी के दिन में बहुत वर्षा होने के कारण खेत पानी से भर गये और तालाब भी पूरा भर जाने के कारण ...

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🌿🌿सुन्दर पन्क्तियाँ🌿🌿

एक बार एक शिष्य नदी पार कर अपने आश्रम जा रहा था । नाव में उसके साथ अनेक यात्री बैठे थे । उनमें कुछ युवक भी थे । शिष्य की धोती एवं शिखा देख सभी युवक उसका उपहास कर रहे थे । किन्तु वह कुमार अत्यंत धीर - गम्भीर हो बैठा था ।
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🍀जब प्रभु श्री राम जी की परीक्षा ली भोलेनाथ जी ने🍀
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श्रीराम का वनवास ख़त्म हो चुका था। एक बार श्रीराम ब्राम्हणों को भोजन करा रहे थे तभी भगवान शिव ब्राम्हण वेश में वहाँ आये।

श्रीराम ने लक्ष्मण और हनुमान सहित उनक...

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Jyot Pranam Like +4 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 3 शेयर

जिंदगी मे हुनर
कितना भी सीख लो
फिर भी कुछ अधूरा रहता है ,

जिंदगी का ये_लम्हे सीखने का है
जितना कुछ भी सीखो फिर भी
कम रहता है

ये_जिन्दगी_हैं
नया सीखने को हर दिन
मिलते ही रहता है.

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महावेदान्ती ओशो कहते हैं -----

मनुष्य की पात्रता परम है - उतनी ही जितनी परमात्मा की पात्रता। मनुष्य छिपा हुआ परमात्मा है। मनुष्य बीज है परमात्मा का। परमात्मा खिला हुआ है, मनुष्य अनखिला परमात्मा है। कहो बीज, कहो कली। पात्रता बड़ी है आदमी क...

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Pranam Like +5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 18 शेयर