JAI SHRI KRISHNA Feb 14, 2019

🔷➖🔷➖🔷➖🔷➖🔷➖🔷➖🔷➖🔷 🌾🍎 मिठा फल 🍎🌾 🔷➖🔷➖🔷➖🔷➖🔷➖🔷➖🔷➖🔷 “मुझे वो मीठा फल लाकर दो ना ...कान्हा जी ....” श्रीराधे ने बड़े ही स्नेह से कान्हा जी ठुड्डी हिलाते हुए कहा... बसंत ऋतू की वजह से ...वृन्दावन की छटा कुछ अलग ही है...शरद ऋतू समाप्त हो चुकी है...लेकिन हवा में अभी कुछ शीतलता बाकी है... वृक्ष मस्त होकर हवा के हलके हलके झोंको पर ...झूम रहे हैं... दिन धीरे धीरे बड़ा होने लगा है... जिस से श्रीराधे को कान्हा जी के साथ बिताने के लिए ...जादा समय मिलने लगा है... अपने कान्हा जी के कंधे पर सर रख कर बैठी राधे को अनायास ही सामने वृक्ष की डाली पर एक सुन्दर फल दिख गया... और वो कान्हा जी से उस फल को खिलाने की जिद करने लगीं.... “ला दो....न कान्हा जी... बड़ी भूख लगी है....फिर ये फल कितना सुन्दर भी है...” “ओहो...राधे!!! दो पल शान्ति से नहीं बैठा जाता तुमसे... ये ला दो...वो ला दो.... युम्हे कैसे पता की वो फल मीठा ही है???” कान्हा जी राधे पर झूट मूट में चिल्लाये... “वो इसलिए कान्हा जी....की वो भी तुम्हारी तरह श्याम वर्ण का है... तो सीधी से बात है...आप की ही तरह मीठा भी होगा....” श्रीराधे अपने दोनों हाथों से कान्हा जी के दोनों गाल खींचते हुई बोलीं... “आऊउ!!!!!.....गाल मत खीचो ना राधे!!!.... ठीक है... तुम कहती हो तो लाता हूँ...श्याम रंग का मीठा फल!!!.......हूंह!!!”.... कान्हा जी मुह बनाते हुए बोले... श्रीराधे देखती रहीं... की किस तरह कान्हा जी अपना पीताम्बर कमर में बाँध कर ...पेड़ पर चढ़ गए... और वो फल लाकर कान्हा जी के हाथ में रख दिया... “ये...लो...खा लो!!!” “अच्छा रुको...मै फल को आधा आधा बाँट देता हूँ....” कान्हा जी ने वापिस फल ...राधे के हाथ से छीन लिया... और फल का आधा भाग राधे को खाने के लिए दे दिया.... कान्हा जी अपना पीताम्बर संभालने में व्यस्त थे... उतनी देर में राधे ने अपना आधा भाग खा लिया... और फिर कान्हा जी की ठुड्डी हिलाते हुई बोलीं... “कान्हा जी!!!.... और आधा दो न...उम्म्म्म!!!” कृष्ण जी ने राधे की आँखों में उस फल के लिए बड़ी चाहत देखी ...और बचे हुए फल का फिर से आधा भाग कर राधे को दे दिया... “ये लो....” कान्हा जी बचा हुआ फल खाने ही वाले थे... की तभी राधे ने उनका हाथ पकड़ लिया... “बस आखिरी बार कान्हा जी... थोडा सा और दे दो!!!! दे दो ना....कान्हा जी....” कान्हा जी ने सोचा...ये तो मान ही नहीं रही... लेकिन फिर राधे के स्नेह का आगे हार गए... और बचे हुए फल का भी आधा भाग कर राधे को दे दिया..... श्रीराधे उसे भी खाकर.... फिर से ...बचे हुए फल का टुकड़ा कृष्ण से छीनने ही वालीं थीं.... की कान्हा जी ने गप्प से बचा हुआ टुकड़ा अपने मुह में डाल लिया.... “सारा मीठा फल अकेले ही खाना चाहती है....देखो तो!!!” कान्हा जी ने जैसे ही फल का टुकड़ा मुह में डाला... तो एक पल के लिए भी उसे मुह के भीतर ना रख सके.... “थू!!!....थू!!!!.....थू!!!!!!!.......कितना कडुआ है..... तुम इतना कडुआ फल मुझसे छीन छीन कर कैसे खाती रहीं....राधे???” कान्हा जी ने फल का टुकड़ा थूकते हुए कहा... श्रीराधे ने मटकी से यमुना का जल निकाल कर ...कान्हा जी को पीने के लिए दिया... और फिर हाथ मुह पोछने के लिए अपना आँचल आगे करती हुई बोलीं.... “मै तो सिर्फ ...इतना ही चाहती थी कान्हा जी... की सारी कडुआहट मै ही खा लूँ.... और आपको ये कडुआ फल खाना ही ना पड़े....” कान्हा जी ने राधे की आँखों में अपने लिए असीम स्नेह देखा.... और अपने हाथो से ... यमुना का जल राधे को पिलाकर.... वहां से विदा किया... ⬛️🔷🔷🔷⬛️ ⬛️🔷🔷🔷⬛️ ⬛️🔷🔷🔷⬛️ ‼️🙏जय जय श्री राधे 🙏‼️ ⬛️🔷🔷🔷⬛️ ⬛️🔷🔷🔷⬛️ ⬛️🔷🔷🔷⬛️

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JAI SHRI KRISHNA Feb 14, 2019

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JAI SHRI KRISHNA Feb 14, 2019

. 🌷 #सबसे_ऊँची_प्रार्थना 🌷 🌅 एक व्यक्ति जो मृत्यु के करीब था, मृत्यु से पहले अपने बेटे को चाँदी के सिक्कों से भरा थैला देता है और बताता है की "जब भी इस थैले से चाँदी के सिक्के खत्म हो जाएँ तो मैं तुम्हें एक प्रार्थना बताता हूँ, उसे दोहराने से चाँदी के सिक्के फिर से भरने लग जाएँगे । उसने बेटे के कान में चार शब्दों की प्रार्थना कही और वह मर गया । अब बेटा चाँदी के सिक्कों से भरा थैला पाकर आनंदित हो उठा और उसे खर्च करने में लग गया । वह थैला इतना बड़ा था की उसे खर्च करने में कई साल बीत गए, इस बीच वह प्रार्थना भूल गया । जब थैला खत्म होने को आया तब उसे याद आया कि "अरे! वह चार शब्दों की प्रार्थना क्या थी ।" उसने बहुत याद किया, उसे याद ही नहीं आया ।अब वह लोगों से पूँछने लगा । पहले पड़ोसी से पूछता है की "ऐसी कोई प्रार्थना तुम जानते हो क्या, जिसमें चार शब्द हैं । पड़ोसी ने कहा, "हाँ, एक चार शब्दों की प्रार्थना मुझे मालूम है, "ईश्वर मेरी मदद करो ।" उसने सुना और उसे लगा की ये वे शब्द नहीं थे, कुछ अलग थे । कुछ सुना होता है तो हमें जाना-पहचाना सा लगता है । फिर भी उसने वह शब्द बहुत बार दोहराए, लेकिन चाँदी के सिक्के नहीं बढ़े तो वह बहुत दुःखी हुआ । फिर एक ब्राह्मण से मिला, उन्होंने बताया की "ईश्वर तुम महान हो" ये चार शब्दों की प्रार्थना हो सकती है, मगर इसके दोहराने से भी थैला नहीं भरा । वह एक धनिक से मिला, उसने कहा "ईश्वर मुझे धन दो" यह प्रार्थना भी कारगर साबित नहीं हुई । वह बहुत उदास हुआ उसने सभी से मिलकर देखा मगर उसे वह प्रार्थना नहीं मिली, जो पिताजी ने बताई थी । वह उदास होकर घर में बैठा हुआ था तब एक भिखारी साधु उसके दरवाजे पर आया । उसने कहा, "सुबह से कुछ नहीं खाया, खाने के लिए कुछ हो तो दो ।" उस लड़के ने बचा हुआ खाना भिखारी साधु को दे दिया । उस भिखारी साधु ने खाना खाकर बर्तन वापस लौटाया और ईश्वर से प्रार्थना की, *"हे ईश्वर ! तुम्हारा धन्यवाद ।" अचानक वह चौंक पड़ा और चिल्लाया की "अरे! यही तो वह चार शब्द थे ।" उसने वे शब्द दोहराने शुरू किए-"हे ईश्वर तुम्हारा धन्यवाद"........और उसके सिक्के बढ़ते गए... बढ़ते गए... इस तरह उसका पूरा थैला भर गया ।इससे समझें की जब उसने किसी की मदद की तब उसे वह मंत्र फिर से मिल गया । "हे ईश्वर ! तुम्हारा धन्यवाद ।" यही उच्च प्रार्थना है क्योंकि जिस चीज के प्रति हम धन्यवाद देते हैं, वह चीज बढ़ती है । अगर पैसे के लिए धन्यवाद देते हैं तो पैसा बढ़ता है, प्रेम के लिए धन्यवाद देते हैं तो प्रेम बढ़ता है । ईश्वर या गुरूजी के प्रति धन्यवाद के भाव निकलते हैं की ऐसा ज्ञान सुनने तथा पढ़ने का मौका हमें प्राप्त हुआ है । बिना किसी प्रयास से यह ज्ञान हमारे जीवन में उतर रहा है वर्ना ऐसे अनेक लोग हैं, जो झूठी मान्यताओं में जीते हैं और उन्हीं मान्यताओं में ही मरते हैं । मरते वक्त भी उन्हें सत्य का पता नहीं चलता । उसी अंधेरे में जीते हैं, मरते हैं । #ऊपर_दी_गई_कहानी_से_समझें_की "#हे_ईश्वर_तुम्हारा_धन्यवाद" ये चार शब्द, शब्द नहीं प्रार्थना की शक्ति हैं । अगर यह चार शब्द दोहराना किसी के लिए कठिन है तो इसे #तीन_शब्दों_में_कह_सकते_हैं, "#ईश्वर_तुम्हारा _धन्यवाद ।" ये तीन शब्द भी ज्यादा लग रहे हों तो #दो_शब्द_कहें, "#ईश्वर_धन्यवाद !" और दो शब्द भी ज्यादा लग रहे हों तो सिर्फ #एक_ही_शब्द_कह_सकते_हैं, " #धन्यवाद ।" #आइए, #हम_सब_मिलकर_एक_साथ_धन्यवाद_दें #उस_ईश्वर_को, जिसने हमें मनुष्य जन्म दिया और उसमें दी दो बातें - पहली "साँस का चलना" दूसरी "सत्य की प्यास ।" यही प्यास हमें खोजी से भक्त बनाएगी । भक्ति और प्रार्थना से होगा आनंद, परम आनंद, तेज आनंद । 🙏#जय_श्री_कृष्णा 🙏 🙏🙏#राधे_राधे🙏🙏

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JAI SHRI KRISHNA Feb 14, 2019

#भगवान_के_आश्रय_से_सब_दोष_नष्ट_हो_जाते_है #आप_अपने_को_जिन_सब_मानस_शत्रुओं_से_घिरा #देखते_हैं , #वे_सब_शत्रु_तुरंत_भाग_जायेंगे , यदि आप श्रीभगवान् के चरणकमलों का आश्रय ले लेंगे|* असल में हमारा ममत्व, जो लोकिक सम्बन्धियों में हो रहा है , वही हमे सता रहा है | यदि हम प्रयत्न करके अपने इस सम्बन्ध को सबसे तोड़ कर एकमात्र प्रभु में जोड़ सकें और सबके साथ प्रभु के सम्बन्ध से ही सम्बन्ध रखें तो फिर हमें कोई नहीं सता सकता एवं करने में किसी के साथ व्यावहारिक सम्बन्ध तोड़ने की आवश्यकता नहीं होती | भगवन के सम्बन्ध से हम ही सभी के साथ यथायोग्य व्यवहार करें; पर मन से ममत्व रहे केवल प्रभु चरणों में ही | ममता नहीं छूटती तो मत छोडो , उसे इधर -उधर बिखेर कर जो दुःख पा रहे हो , कभी इधर खिंचते हो कभी उधर , #फिर_तनिक_से_स्वार्थ_का_धक्का_लगते€ही ममता के कच्चे धागे टूट जाते हैं - एस नित्य की आशांति से अपने आप को छुड़ा लो | यह मान लो की एकमात्र भगवत्चरणारविन्द ही मेरे हैं , उनके अतिरिक्त कुछ मेरा नहीं है | #इस_प्रकार_अपने_मन_को_भगवान्_के_साथ #मजबूत_रस्सी_से_बांध_दो | #एक_बार_यहाँ_बंधे_की_फिर_कभी_छूटने_के_नहीं | फिर तो भगवान् हमारे वश में ही हो जायेंगे और बाध्य होंगे हमको अपने हृदय में स्थान देने के लिए सच्ची | 🙏🌹#श्री_राधे_राधे_बोलना_तो_पड़ेगा_जी🌹🙏

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