Rajesh Agrawal 🌹 Sep 14, 2019

धर्म यात्रा की आज की कडी़ मे हम जानेंगे कुछ अद्भुत रहस्य लिये हुये उन छह शनि मंदिर के बारे मे आईये शनिदेव जी के दर्शनो हेतु || 🙏 जय श्री शनिदेव जी🙏शनिदेव की उत्पत्ति पौराणिक कथा के अनुसार सम्पूर्ण जगत में श्री ब्रह्मा, श्री विष्णु, श्री महेष त्रिदेव के नाम से विख्यात हैं। श्री ब्रह्माजी सृष्टि के रचनाकार, श्री विष्णु पालनहार एवं भगवान शंकर संहारक के पद को संभालकर कार्यरत हो गये। सूर्य पुत्र यम तथा शनिदेव में अपने राजपाट को लेकर विवाद हो गया, इस विवाद के निराकरण के लिये वे दोनों भगवान शंकर के समीप गये तथा अपनी चिंता प्रकट की। उन दोनों के वचनों को सुनकर भगवान शंकर ने यमराज को मृत्यु के देवता का पद दिया एवं प्रत्येक जीव को उनके कर्मों के आधार पर दण्ड या फल देने का कार्य अर्थात् दण्डाधिकारी का पद शनिदेव को प्रदान किया तथा शनिदेव को वरदान दिया कि तुम्हारी दृष्टि के प्रभाव से देवता भी नहीं बच पायेंगे तथा कलियुग में तुम्हारा अत्यधिक महत्व होगा।|| 🙏🌹 जय श्री शनिदेव जी 🙏🌹

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Rajesh Agrawal 🌹 Sep 13, 2019

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Rajesh Agrawal 🌹 Sep 11, 2019

🙏🌷ॐ गं गणपतये नमो नमः🌷🙏 धर्म यात्रा में आज की कडी़ मे आईये आज चलते है श्री चिंतामन गणेश जी मंदिर सिहोर (मध्यप्रदेश) के दर्शनो हेतु || 🙏🌷🙏🌷🙏🌷🙏🌷🙏🌷 भारत में स्थित चार स्वयं-भू चिंतामन गणेश मंदिर में से एक अति प्राचीन विक्रमादित्य कालीन ऐतिहासिक श्री चिंतामन सिद्ध गणेश मंदिर सीहोर में स्थित है। यह मंदिर सीहोर के वायव्य पश्चिम-उत्तर कोण में स्थित है जो कि शुगर फैक्ट्री से पश्चिम में लगभग एक किलोमीटर दूरी पर गोपालपुर में स्थित है। 2000 वर्ष पूर्व उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य परमार वंश के राजा ने मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर में स्थापित श्रीगणेश जी की मूर्ति खड़ी हुई है। मूर्ति जमीन के अंदर आधी धंसी हुई है, इसलिए आधी मूर्ति के ही दर्शन होते हैं। यह स्वयंभू प्रतिमा है। इस मंदिर का निर्माण विक्रम संवत् 155 में महाराज विक्रमादित्य द्वारा गणेशजी के मंदिर का निर्माण श्रीयंत्र के अनुरूप करवाया गया था। राजा विक्रमादित्य के पश्चात मंदिर का जीर्णोद्धार एवं सभा मंडप का निर्माण बाजीराव पेशवा प्रथम ने करवाया था। शालीवाहन शक, राजा भोज, कृष्ण राय तथा गौंड राजा नवल शाह आदि ने मंदिर की व्यवस्था में सहयोग किया। नानाजी पेशवा विठूर आदि के समय मंदिर की ख्याति व प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई है।

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Rajesh Agrawal 🌹 Sep 10, 2019

धर्म यात्रा में आज की कडी़ मे आप सभी भक्तो का स्वागत है,आज चलते है छत्तीसगढ़ का दिल कहा जाने वाले शहर राजधानी रायपुर के श्री राम मंदिर दर्शन हेतु 🌷राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड़ स्थित 108 फिट उचे श्री राम मंदिर को राजास्थान और उडी़सा के सैकडो़ कारिगरो की अथक मेहनत से बनाया गया है,मंदिर मे स्थित प्रभु श्री राम व सीता माता की मुर्ती को एक ही पत्थर (राजास्थान के मकराना पत्थर) मे तराशा गया है,अंदर और बाहर की दिवारो पर बारिक कारिगरी देखते ही बनती है मंदिर मे श्री राम सीता और हनुमान जी के अलावा 16 और देवी देवताओ की मुर्तीया भी है,तथा एक नवग्रह मंदिर भी है,देश विदेश से यहा श्री राम भक्त दर्शनो हेतु आते है, जय श्री राम,🙏🌷जय श्री हनुमान🌷🙏

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धर्म यात्रा मे आईये आज आप सभी भक्तो को लेकर चलते है, जगत गुरु श्री कृपालु जी महराज की जन्मस्थली उत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़ के मनगढ़ मे बना श्री राधा कृष्ण मंदिर के दर्शन हेतु || बोलो 🌷 राधे राधे 🌷. प्रतापगढ़ ज़िले के कुंडा तहसील मुख्यालय से 2 किलोमीटर पर भगवान राधा-कृष्ण को समर्पित भक्तिधाम मंदिर है।इस मंदिर की नीवं जगद्गुरु कृपालु जी महाराज ने रखी है।भक्तिधाम में भगवान श्री कृष्णलीला दर्शन के लिए भक्तों का ताँता लगा रहता है।भक्ति धाममें हर ओर राधे-राधे की गूंज सुनाई पड़ती है। मंदिर की रमणीय बनावट और धाम की राधे-राधे कि गूँज से वातावरण सुंदरता देखते ही बनती है।भक्तिधाम मनगढ़ में श्री कृष्ण भगवान के जन्मोत्सव पर धाम को विद्युत झालरों से बखूबी सजाया जाता है और सबसे ज्यादा रमणीय राधा-कृष्ण दरबार दिखाई पड़ता है।धाम पर श्री कृष्ण जन्मोत्सव में सबसे अधिक भीड़ होती है।लाखों की संख्या में लोग जन्मोत्सव आयोजन में ही सम्मिलित होते हैं। हजारों भक्तो का आवागमन भगवान श्री कृष्ण जी के दर्शन के लिए हमेशा बना रहता है || 🌷जय श्री राधे कृष्णा🌷

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किसी भी पूजा-अर्चना या शुभ कार्य को सम्पन्न कराने से पूर्व गणेश जी की आराधना की जाती है। आईये जानते है श्री गणेश पुराण का संक्षिप्त विवरण,🙏 ॐ गं गणपतये नमो नमः🙏🌷🌷यह गणेश पुराण अति पूज्यनीय है |इसके पठन-पाठन से सब कार्य सफल हो जाते है, पहला खण्ड - आरम्भ खण्ड - इस खंड में ऐसी कथाएं सूत जी ने सुनाई हैं जिनके पढ़ने या सुनने से हमेशा सब जगह मंगल ही होगा। सूत जी ने सबसे पहली कथा द्वारा बताया है कि किस प्रकार प्रजाओं की सृष्टि हुई और सर्वश्रेष्ठ देव भगवान गणेश का आविर्भाव किस प्रकार हुआ। आगे सूत जी ने शिव के अनेक रूपों का वर्णन किया है। वे कैसे सृष्टि की उत्पत्ति, संहार और पालन करते हैं। साथ ही यह भी बताया गया है कि विष्णु का एक वर्ष शिव के एक दिन के बराबर होता है। साथ ही सती की कथा है जिसका विवाह शिवजी से हुआ। दूसरा खण्ड - परिचय खण्ड - दूसरा खण्ड परिचय खण्ड है जिसमें गणेश जन्म कथाओं का परिचय दिया गया है। इसमें अलग-अलग पुराणों के अनुसार कथा कही गई है। जैसे पद्म व लिंग पुराण के अनुसार और अंत में गणेश की उत्पत्ति की सविस्तार से कथा है। तीसरा खण्ड - माता पार्वती खण्ड - तीसरा खण्ड माता पार्वती खण्ड है। इसमें पार्वती के पर्वतराज हिमालय के घर जन्म की कथा है और शिव से विवाह की कथा। आगे कार्तिकेय के जन्म की कथा है जिसमें तारकासुर के अत्याचार से लेकर कार्तिकेय के जन्म की कथा है। इस खण्ड में वशिष्ठ जी द्वारा सुनाई अरण्यराज की कथा है। चौथा खण्ड - युद्ध खण्ड -  चौथा खण्ड युद्ध खण्ड : नाम खण्ड है। इसमें आरम्भ में मत्सर नामक असुर के जन्म की कथा है जिसने दैत्य गुरु शुक्राचार्य से शिव पंचाक्षरी मन्त्र की दीक्षा ली। आगे तारक नामक असुर की कथा है। उसने ब्रह्मा की अराधना कर त्रैलोक्य का स्वामित्व प्राप्त किया। साथ में इसमें महोदर व महासुर के आपसी युद्ध की कथा है। लोभासुर व गजानन की कथा भी है जिसमें लोभासुर ने गजानन के मूल महत्त्व को समझा और उनके चरणों की वंदना करने लगा। इसी तरह आगे क्रोधासुर व लम्बोदर की कथा है। पांचवा खण्ड - महादेव पुण्य कथा खण्ड - पांचवा खण्ड महादेव पुण्य कथा खण्ड है। इसमें सूत जी ने ऋषियों को कहा, आप कृपा करके गणेश, पार्वती के युगों का परिचय दीजिए। तब आगे इस खण्ड में सतयुग, त्रेतायुग व द्वापर युग के बारे में बताया गया है। जन्मासुर, तारकासुर की कथा से इसका अन्त हुआ है।

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Rajesh Agrawal 🌹 Aug 31, 2019

धर्म यात्रा मे आज चलते शनिदेव जी के दर्शन हेतु ||उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में एक प्राचीन शनिदेव का मंदिर स्थित है। ये मंदिर प्रतापगढ़ में विश्वनाथगंज बाजार से लगभग 2 किलो मीटर दूर कुश्फरा के जंगल में बना है। इस मंदिर पर लोगों की गहन श्रद्धा और आस्था बतायी जाती है। ऐसी मान्‍यता है कि यहां पर केवल दर्शन मात्र करने आने वाले भी शनिदेव की कृपा के पात्र बन जाते हैं। ये अवध क्षेत्र के एक मात्र पौराणिक शनि धाम होने के कारण भी अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण माना जाता है। प्रत्येक शनिवार को इस मंदिर में 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। श्री यंत्र जैसी है बनावट ये शनि धाम कुछ इस तरह बना है कि एक श्री यंत्र की तरह हो गया है। इसके दक्षिण की तरफ प्रयाग, उत्तर की तरफ अयोध्या, पूर्व की ओर काशी और पश्चिम में तीर्थ गंगा स्वर्गलोक कड़े मानिकपुर है। मानिकपुर मां शीतला का सिद्धपीठ मंदिर है। शनि मंदिर के विषय में कई कथायें प्रचलित हैं। ऐसी ही एक कथा के अनुसार यहां पर शनिदेव की प्रतिमा स्वयंभू है। जो कुश्फारा के जंगल में एक ऊंचे टीले में दबी थी। जहां से महंत स्वामी परमा महाराज ने इसको खोज कर मंदिर का निर्माण करवाया था। 🙏🌷जय श्री शनिदेव जी🌷🙏

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