जय भोले नाथ 🌼 जय भोले भंडारी 🔱 जय जय काल के महाकाल 🔱 आरंभ ही तू अंत भी सिर्फ तू नर्माण भी तू विनाश भी तू हर्षोल्लाल भी तू रुदन, विलाप भी तू तू ही शून्य तू ही ब्रम्हाण्ड तू ही सजीव तू ही निर्जीव तू ही अलंकार तू ही निर्विकार तू ही विचार तू ही व्यवहार तू ही काम तू ही मोक्ष तू ही पर्वत तू ही रज तू ही अमृत तू ही विष तू ही प्रकृति तू ही निवृत्ती देवो के देव सदाशिव ओमकार शंकर शिव माह के प्रथम सोमवार की आप समस्त भोले भक्तों को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनायें 🙏🙏🙏 भोले नाम जपों 🌼🌼🙏🙏 भोलेनाथ आप सभी की समस्त समस्याओं का निराकरण अवश्य करेंगे हर हर महादेव🔱 ॐ नमः शिवाय 🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼 #🔱हर हर महादेव #🌞

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सर्वज्ञ शिव ने संपूर्ण शिव पुराण संहिता में कहा है कि सर्वज्ञ शिव ने संपूर्ण देहधारियों के सारे मनोरथों की सिद्धि के लिए इस 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का प्रतिपादन किया है। यह आदि षड़क्षर मंत्र संपूर्ण विद्याओं का बीज है। जैसे वट बीज में महान वृक्ष छिपा हुआ है, उसी प्रकार अत्यंत सूक्ष्म होने पर भी यह मंत्र महान अर्थ से परिपूर्ण है।   शिव और मंत्र का यह वाच्य वाचक भाव अनादिकाल से चला आ रहा है। जैसे यह घोर संसार सागर अनादिकाल से चला आ रहा है, उसी प्रकार संसार से छ़ुडानेवाले भगवान शिव भी अनादिकाल से ही नित्य विराजमान हैं। जैसे औषध रोगों का स्वभावतः शत्रु है, उसी प्रकार भगवान शिव संसार दोषों के स्वाभाविक शत्रु माने गए हैं। देहधारियों के सारे मनोरथों की सिद्धि के लिए इस 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का प्रतिपादन किया है। यह आदि षड़क्षर मंत्र संपूर्ण विद्याओं का बीज है। जैसे वट बीज में महान वृक्ष छिपा हुआ है, उसी प्रकार अत्यंत सूक्ष्म होने पर भी यह मंत्र महान अर्थ से परिपूर्ण है। 🌹🌹 ऊँ नमः शिवाय, 🌹🌹हर हर महादेव 🌹🌹

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भक्त होने का मतलब यह कतई नहीं है कि दिन और रात आप पूजा ही करते रहें। भक्त वह है जो बस हमेशा लगा हुआ है, अपने मार्ग से एक पल के लिए भी विचलित नहीं होता। वह ऐसा शख्स नहीं होता जो हर स्टेशन पर उतरता-चढ़ता रहे। वह हमेशा अपने मार्ग पर होता है, वहां से डिगता नहीं है। अगर ऐसा नहीं है तो यात्रा बेवजह लंबी हो जाती है। भक्ति की शक्ति कुछ ऐसी है कि वह सृष्टा का सृजन कर सकती है। जिसे मैं भक्ति कहता हूं उसकी गहराई ऐसी है कि यदि ईश्वर नहीं भी हो, तो भी वह उसका सृजन कर सकती है, उसको उतार सकती है। जब भक्ति आती है तभी जीवन में गहराई आती है। भक्ति का अर्थ मंदिर जा कर राम-राम कहना नहीं है। वो इन्सान जो अपने एकमात्र लक्ष्य के प्रति एकाग्रचित है, वह जो भी काम कर रहा है उसमें वह पूरी तरह से समर्पित है, वही सच्चा भक्त है। उसे भक्ति के लिए किसी देवता की आवश्यकता नहीं होती और वहां ईश्वर मौजूद रहेंगे। भक्ति इसलिए नहीं आई, क्योंकि भगवान हैं। चूंकि भक्ति है इसीलिए भगवान है। 🙏🙏🌹 जय श्री राधे कृष्णा 🌹🙏🙏

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