RAJKUMAR RATHOD Sep 23, 2020

+254 प्रतिक्रिया 68 कॉमेंट्स • 273 शेयर
RAJKUMAR RATHOD Sep 23, 2020

🙏जय श्री गणेश 🙏 शुभ बुधवार..... प्रभात वंदन 🌹🌹 🌹🙏🌹प्रेरणादायक कहानी-धैर्यशीलता🌹🙏🌹 ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ 👉 एक बार कि बात है, एक गुरू अपने कुछ शिष्यों के साथ पैदल ही यात्रा पर थे। वे चलते-चलते किसी गांव में पहुंच गए। ये गांव काफी बड़ा था, वहां घूमते हुए उन्हें काफी देर हो गयी थी। गुरू जी थक चुके थे और उन्हें बहुत प्यास लगी थी, तो उन्होनें अपने एक शिष्य से कहा कि हम इसी गांव में कुछ देर रूकते हैं, तुम मेरे लिए पानी ले आओ। जब शिष्य गांव के अंदर थोड़ा घुमा तो उसने देखा कि वहां एक नदी थी, जिसमें कई लोग कपड़े धो रहे थे, तो कई लोग नहा रहे थे और इसी वजह से नदी का पानी बहुत ही गंदा सा दिख रहा था। शिष्य को लगा कि ऐसा गंदा पानी गुरू जी के स्वास्थ्य को खराब कर सकता है, उन्हें ये पानी नहीं पिलाया जा सकता। इसलिए शिष्य बिना पानी लिए ही वापस लौट आया और नदी के गंदे पानी की सारी बात गुरू जी को बता दी। इसके बाद गुरू जी ने किसी दूसरे शिष्य को पानी लाने के लिए भेजा। कुछ देर बाद वह शिष्य पानी साथ लेकर लौटा। गुरू जी ने इस दूसरे शिष्य से पूछा कि नदी का पानी तो गंदा था फिर तुम ये पानी कैसे लाए? शिष्य बोला की गुरू जी, नदी का पानी वास्तव में बहुत ही गंदा था। लेकिन लोगों के नदी से चले जाने के बाद मैंने कुछ देर इंतजार किया और कुछ देर बाद नदी में मिट्टी नीचे बैठ गई और साफ पानी ऊपर आ गया। उसके बाद मैं उसी नदी से आपके लिए पानी भरकर ले आया। गुरू जी, ये सुनकर बड़े प्रसन्न हुए और बाकी शिष्यों को भी सीख दी कि हमारा जीवन भी इसी नदी के पानी की तरह है। जीवन में कई बार दुख और समस्याएं आती है तो जीवन रूपी पानी गंदा लगने लगता है। लेकिन थोड़े इंतजार और सब्र के बाद ये दुःख और समस्याएं नीचे दब जाती है और अच्छा समय ऊपर आ जाता है। कुछ लोग पहले वाले शिष्य की तरह दुःख और समस्याओं को देख कर घबरा जाते हैं और मुसीबत देखकर वापस लौट आते हैं। ऐसे लोग जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ पाते वहीं दूसरी ओर कुछ लोग जो धैर्यशील होते हैं, इंतजार करते हैं कि कुछ समय बाद गंदगी रूपी समस्याएं और दुःख खत्म हो जाएंगे, वे ही सफल होते हैं। 🌹🕉️🙏!!~ जय श्री गणेश ~!!🙏🕉️🌹

+668 प्रतिक्रिया 156 कॉमेंट्स • 595 शेयर
RAJKUMAR RATHOD Sep 22, 2020

🌹🌹🙏जय श्री राम 🙏 🙏जय हनुमान 🙏🌹🌹 🌹🌹🌹🌹आपको हनुमान जी का शुभ दिन मंगलवार की सुबह का प्यार भरा प्रणाम 🙏🙏 *🌹🌻।।राम नाम की महिमा।।🌻🌹* *एक फ़क़ीर जो एक शहर के बस स्टैंड के पास एक वृक्ष की छाया में माला फेर रहा था तो एक अंग्रेज बस से उतरा बाबा के पास जाकर बोला ये आपके हाथ में क्या है? बाबा ने अंग्रेज के कंधे में बन्दुक टांगी हुयी थी बाबा बोले ये क्या है?अंग्रेज ने कहा ये मेरा हथियार है। बाबा बोले ये मेरा हथियार है ।अंग्रेज बोला ये आपको किसने दिया। बाबा बोले बन्दुक किसने दी आपको। अंग्रेज बोला मेरी अंग्रेज सरकार ने दी तो बाबा ने कहा ये मेरी सरकार ने मुझे दिया ।अंग्रेज बोला ये क्या काम करती है ।बाबा बोले तेरा हथियार क्या काम करता है तो अंग्रेज ने ऊपर बैठे पक्षी को गोली मारी और तड़पता गिर गया बोला ये काम करता है मेरा हथियार। बाबा ने उसी पक्षी पे माला लगायी और राम कहा वो पक्षी उड़ कर अपने स्थान पर बैठ गया।बाबा बोले मेरा हथियार ये काम करता है। वो अंग्रेज भी राम नाम की दीक्षा ले राम नाम में रंग गया।* *🌹🌹।।राम राम जी।।🌹🌹*

+548 प्रतिक्रिया 135 कॉमेंट्स • 354 शेयर
RAJKUMAR RATHOD Sep 21, 2020

*हे भोलेनाथ। एक छोटी सी अर्जी, कबूल कर लेना। जो भी हर हर महादेव बोले, उसके सारे दुख हर लेना। ॐ नमः शिवाय.. 🌹मालिक सब देखता है 🌹 एक बार एक महात्मा के पास दो आदमी ज्ञान लेने के लिए आए| महात्मा बहुत पहुंचे हुए थे| उन्होंने दोनों को एक-एक चिड़िया दे दी और कहा:-” जाओ, इन चिड़ियाओं को ऐसी जगह मार कर लाओ जहां कोई और ना देखे|” उनमें से एक तो तुरंत ही पेड़ की ओट में जाकर उस चिड़िया को मार कर ले आया| जो दूसरा व्यक्ति था वह किसी सुनसान जगह पर चला गया| जब वह उस चिड़िया को मारने ही वाला था, वह अचानक रुक गया और सोचने लगा-‘ जब मैं इसे मारता हूं तो यह मुझे देखती है और मैं भी इसे देखता हूं| तब तो हम दो हो गए और तीसरा ईश्वर भी यह सब कुछ देख रहा है| महात्मा का आदेश है कि इस चिड़िया को वहां मारना है जहां कोई और ना देखें|’ आखिर यह सोच-सोचकर उस चिड़िया को महात्मा के पास जीवित ही ले आया और बोला:-” महात्मा जी! मुझे तो ऐसी कोई जगह नहीं मिली जहां कोई नहीं देखता हो, क्योंकि ईश्वर हर जगह मौजूद है|” महात्मा ने कहा:-” तुम ही ज्ञान के सही अधिकारी हो| मैं तुझे ज्ञान दूंगा|” महात्मा ने उस दूसरे आदमी को वहां से डांट कर भगा दिया| सीख:- अगर हम ईश्वर को हर जगह हाजिर-नाजिर समझें तो हम कितनी ही बुराइयों

+655 प्रतिक्रिया 161 कॉमेंट्स • 322 शेयर
RAJKUMAR RATHOD Sep 20, 2020

🌅🙏ॐ भास्कराय नमः 🙏🌅 🌻🌹सुप्रभात वंदन 🌹🌻 🌹🌹#भोजन के #प्रकार ..... #भीष्म_पितामह ने #अर्जुन को ४ प्रकार से भोजन न करने के लिए बताया था ...! १ ;- #पहला भोजन .... जिस भोजन की थाली को कोई लांघ कर गया हो वह भोजन की थाली नाले में पड़े कीचड़ के समान होती है ...! २ :-#दूसरा भोजन .... जिस भोजन की थाली में ठोकर लग गई,पाव लग गया वह भोजन की थाली भिष्टा के समान होता है ....! ३ :- #तीसरे प्रकार का भोजन .... जिस भोजन की थाली में बाल पड़ा हो, केश पड़ा हो वह दरिद्रता के समान होता है ....! ४ :-#चौथे नंबर का भोजन .... अगर पति और पत्नी एक ही थाली में भोजन कर रहे हो तो वह मदिरा के तुल्य होता है ..... और सुनो अर्जुन अगर पत्नी,पति के भोजन करने के बाद थाली में भोजन करती है उसी थाली में भोजन करती है या पति का बचा हुआ खाती है तो उसे चारों धाम के पुण्य का फल प्राप्त होता है ...! चारों धाम के प्रसाद के तुल्य वह भोजन हो जाता है ....! और सुनो अर्जुन ..... बेटी अगर कुमारी हो और अपने पिता के साथ भोजन करती है एक ही थाली में तो उस पिता की कभी अकाल मृत्यु नहीं होती .... क्योंकि बेटी पिता की अकाल मृत्यु को हर लेती है ! इसीलिए बेटी जब तक कुमारी रहे तो अपने पिता के साथ बैठकर भोजन करें ! क्योंकि वह अपने पिता की अकाल मृत्यु को हर लेती हैं ...! ☝🏼 स्मरण रखियेगा !👇🏽 "संस्कार दिये बिना सुविधायें देना, पतन का कारण है ...!" "सुविधाएं अगर आप ने बच्चों को नहीं दिए तो हो सकता है वह थोड़ी देर के लिए रोए ... पर संस्कार नहीं दिए तो वे जीवन भर रोएंगे 🌹🌹🌹

+645 प्रतिक्रिया 159 कॉमेंट्स • 434 शेयर
RAJKUMAR RATHOD Sep 19, 2020

🌹जय शनिदेव 🌹सुप्रभात वंदन 🌹 🌻🙏🙏🌻 ((( भक्त गरीब क्यों होते हैं ? )))) . एक बार नारद जी ने भगवान से प्रश्न किया कि प्रभु आपके भक्त गरीब क्यों होते हैं? . भगवान बोले - "नारद जी ! मेरी कृपा को समझना बड़ा कठिन है।" . इतना कहकर भगवान नारद के साथ साधु भेष में पृथ्वी पर पधारे और एक सेठ जी के घर भिक्षा मांगने के लिए दरवाजा खटखटाने लगे। . सेठ जी बिगड़ते हुए दरवाजे की तरफ आए और देखा तो दो साधु खड़े हैं। . भगवान बोले - "भैया ! बड़े जोरों की भूख लगी है। थोड़ा सा खाना मिल जाए।" . सेठ जी बिगड़कर बोले "तुम दोनों को शर्म नहीं आती। तुम्हारे बाप का माल है ? कर्म करके खाने में शर्म आती है, जाओ-जाओ किसी होटल में खाना मांगना।" नारद जी बोले - "देखा प्रभु ! यह आपके भक्तों और आपका निरादर करने वाला सुखी प्राणी है। इसको अभी शाप दीजिये।" नारद जी की बात सुनते ही भगवान ने उस सेठ को अधिक धन सम्पत्ति बढ़ाने वाला वरदान दे दिया। . इसके बाद भगवान नारद जी को लेकर एक बुढ़िया मैया के घर में गए। . जिसकी एक छोटी सी झोपड़ी थी, जिसमें एक गाय के अलावा और कुछ भी नहीं था। . जैसे ही भगवान ने भिक्षा के लिए आवाज लगायी, बुढ़िया मैया बड़ी खुशी के साथ बाहर आयी। . दोनों सन्तों को आसन देकर बिठाया और उनके पीने के लिए दुध लेकर आयीं और.. बोली - "प्रभु ! मेरे पास और कुछ नहीं है, इसे ही स्वीकार कीजिये।" . भगवान ने बड़े प्रेम से स्वीकार किया। . तब नारद जी ने भगवान से कहा - "प्रभु ! आपके भक्तों की इस संसार में देखो कैसी दुर्दशा है, मेरे पास तो देखी नहीं जाती। यह बेचारी बुढ़िया मैया आपका भजन करती है और अतिथि सत्कार भी करती है। आप इसको कोई अच्छा सा आशीर्वाद दीजिए।" . भगवान ने थोड़ा सोचकर उसकी गाय को मरने का अभिशाप दे डाला।" . यह सुनकर नारद जी बिगड़ गए और कहा - "प्रभु जी ! यह आपने क्या किया ?" भगवान बोले - "यह बुढ़िया मैया मेरा बहुत भजन करती है। कुछ दिनों में इसकी मृत्यु हो जाएगी और मरते समय इसको गाय की चिन्ता सताएगी कि.. . मेरे मरने के बाद मेरी गाय को कोई कसाई न ले जाकर काट दे, मेरे मरने के बाद इसको कौन देखेगा ? . तब इस मैया को मरते समय मेरा स्मरण न होकर बस गाय की चिन्ता रहेगी और वह मेरे धाम को न जाकर गाय की योनि में चली जाएगी।" . उधर सेठ को धन बढ़ाने वाला वरदान दिया कि मरने वक़्त धन तथा तिजोरी का ध्यान करेगा और वह तिजोरी के नीचे साँप बनेगा। प्रकृति का नियम है जिस चीज मे अति लगाव रहेगा यह जीव मरने के बाद बही जनम लेता है ओर बहुत दुख भोगता है.. . अतः अपना चिंतन प्रभू की तरफ अधिक रखे ... ~~~~~~~~~~~~~~~~~ ((((((( जय जय श्री शनिदेव )))))))

+554 प्रतिक्रिया 143 कॉमेंट्स • 647 शेयर
RAJKUMAR RATHOD Sep 18, 2020

🙏शुभ संध्या वंदन 🙏 🌹जय श्री राधे कृष्णा 🌹 *🔴"राधा जी के प्यारे ~ कान्हा जी हमारे"🔴* वृन्दावन का एक भक्त ठाकुर जी को बहुत प्रेम करता था, भाव विभोर हो कर नित्य प्रतिदिन उनका श्रृंगार करता था। आनंदमय हो कर कभी रोता तो कभी नाचता। एक दिन श्रृंगार करते हुए जैसे ही मुकट लगाने लगा, तभी मुकट ठाकुर गिरा देते। एक बार दो बार कितनी बार लगाया पर छलिया तो आज लीला करने में लगे थे। अब भक्त को गुस्सा आ गया, वो ठाकुर से कहने लगा तोह को तेरे बाबा की कसम मुकट लगाई ले पर ठाकुर तो ठाकुर है, वो किसी की कसम माने ही नही। जब नही लगाया तो भक्त बोला तो को तेरी मइया की कसम। ठाकुर जी माने नही। अब भक्त का गुस्सा और बढ़ गया। उसने सबकी कसम दे दी। तोहे मेरी कसम.. तोरी गायिओ की कसम.. तोरे सखाँ की कसम.. तोरी गोपियों की कसम.. तोरे ग्वालों की कसम.. सबकी कसम दे दी, पर ठाकुर तो टस से मस ना हुए। अब भक्त बहुत परेशान हो गया और दुखी भी। फिर खीज गया और गुस्से में बोला- ऐ गोपियन के रसिया.. ऐ छलिया, गोपियन के दीवाने, तो को तोरी राधा की कसम है, अब तो मुकुट लगाले। बस फिर क्या था.. ठाकुर जी ने झट से मुकट धारण कर लिया। अब भक्त भी चिढ़ गया। अपनी कसम दी, गोप-गोपियों की, माँ, बाबा, ग्वालन की दी। किसी की नही सुनी लेकिन राधा की दी तो मान गये। अगले दिन फिर जब भक्त श्रंगार करने लगा तो इस बार ठाकुर ने बाँसुरी गिरा दी। भक्त हल्के से मुस्करायाऔर बोला- इस बार तोह को अपनी नही मेरी राधा की कसम। तो भी ठाकुर ने झट से बांसुरी लगा ली। अब भक्त आनंद में आकर कर झर-झर रोने लगा। भक्त कहता है- मै समझ गया मेरे ठाकुर, तो को राधा भाव समान निश्चल निर्मल प्रेम ही पसंद है। समर्पण पसंद है। इसलिये राधा से प्रेम करत है। अपने भाव को राधा भाव समान निर्मल बना कर रखे अपने प्रेम को पूर्ण-समर्पण रखे सरलता में ही प्रभु है। : हे मेरी राधे जू, सारी रौनक देख ली ज़माने की मगर, जो सुकून तेरे चरणों में है, वो कहीं नहीं !!" *"जय जय श्री राधे....!!"* *"जय श्री कृष्ण जी.....!!"* 🍯🍯🍯🍯🍯🍯

+366 प्रतिक्रिया 59 कॉमेंट्स • 128 शेयर