*श्री रुद्राष्टकम् (संस्कृत: श्री रुद्राष्टकम्) स्तोत्र गोस्वामी तुलसीदास द्वारा भगवान् शिव की स्तुति हेतु रचित है। इसका उल्लेख श्री रामचरितमानस के उत्तर कांड में आता है।* 🌹🌲🌹🌲🌹🌲🌹🌲 *॥ अथ रुद्राष्टकम् ॥* नमामीशमीशाननिर्वाणरूपं। विभुंव्यापकंब्रह्मवेदस्वरूपम्। निजम्निर्गुणम्निर्विकल्पम्निरीहं। चिदाकाशमाकाशवासंभजेऽहम्| 🌸🎄🌸🎄🌸🎄🌸🎄 हे मोक्षस्वरूप, विभु, ब्रह्म और वेदस्वरूप, ईशान दिशा के ईश्वर व सबके स्वामी श्री शिव जी! मैं आपको नमस्कार करता हूँ। निजस्वरूप में स्थित (अर्थात माया आदि से रहित), गुणों से रहित, भेद रहित, इच्छा रहित, चेतन आकाशरूप एवं आकाश को ही वस्त्र रूप में धारण करने वाले दिगम्बर आपको भजता हूँ।॥१॥ 💐🌴💐🌴💐🌴💐🌴 निराकारमोंकारमूलम् तुरीयम्। गिराज्ञानगोतीतमीशम् गिरीशम्। करालम् महाकालकालम्कृपालम्। गुणागारसंसारपारम् नतोऽहम् ॥२॥ निराकार, ओंकार के मूल, तुरीय (तीनों गुणों से अतीत), वाणी, ज्ञान व इंद्रियों से परे, कैलासपति, विकराल, महाकाल के भी काल, कृपालु, गुणों के धाम, संसार के परे आप परमेश्वर को मैं नमस्कार करता हूँ।॥२॥ 🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹 तुषाराद्रिसंकाशगौरम् गभीरम्। मनोभूतकोटि प्रभाश्रीशरीरम्। स्फुरन्मौलि कल्लोलिनीचारुगंगा। लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजंगा ॥३॥ जो हिमाचल समान गौरवर्ण व गम्भीर हैं, जिनके शरीर में करोड़ों कामदेवों की ज्योति एवं शोभा है,जिनके सर पर सुंदर नदी गंगा जी विराजमान हैं, जिनके ललाट पर द्वितीय का चंद्रमा और गले में सर्प सुशोभित है।॥३॥ 🕉🦚🕉🦚🕉🦚🕉🦚 चलत्कुण्डलम् भ्रूसुनेत्रम्विशालम्। प्रसन्नाननम् नीलकण्ठम् दयालम्। मृगाधीश चर्माम्बरम् मुण्डमालम्। प्रियम् शंकरम् सर्वनाथम् भजामि ॥४॥ जिनके कानों में कुण्डल हिल रहे हैं, सुंदर भृकुटि व विशाल नेत्र हैं, जो प्रसन्नमुख, नीलकंठ व दयालु हैं, सिंहचर्म धारण किये व मुंडमाल पहने हैं, उनके सबके प्यारे, उन सब के नाथ श्री शंकर को मैं भजता हूँ।॥४॥ 🔔☔🔔☔🔔☔🔔☔ प्रचण्डम् प्रकृष्टम् प्रगल्भम्परेशम्। अखण्डंअजम्भानुकोटिप्रकाशम्। त्रयः शूलनिर्मूलनम् शूलपाणिम्। भजेऽहंभवानीपतिम्भावगम्यम् ॥५॥ प्रचण्ड (रुद्र रूप), श्रेष्ठ, तेजस्वी, परमेश्वर, अखण्ड, अजन्मा, करोड़ों सूर्यों के समान प्रकाश वाले, तीनों प्रकार के शूलों (दु:खों) को निर्मूल करने वाले, हाथ में त्रिशूल धारण किये, प्रेम के द्वारा प्राप्त होने वाले भवानी के पति श्री शंकर को मैं भजता हूँ।॥५॥ 🌸🌷🌸🌷🌸🌷🌸🌷 कलातीत कल्याणकल्पान्तकारी। सदा सज्जनानन्ददाता पुरारि। चिदानन्द सन्दोह मोहापहारि। प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारि ॥६॥ कलाओं से परे, कल्याणस्वरूप, कल्प का अंत(प्रलय) करने वाले, सज्जनों को सदा आनन्द देने वाले, त्रिपुर के शत्रु सच्चिनानंदमन, मोह को हरने वाले, प्रसन्न हों, प्रसन्न हों।॥६॥ ⛈💞⛈💞⛈💞⛈💞 न यावद् उमानाथपादारविन्दम्। भजन्तीह लोके परे वा नराणाम्। न तावत्सुखं शान्तिसन्तापनाशम्। प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम् ॥७॥ हे पार्वती के पति, जबतक मनुष्य आपके चरण कमलों को नहीं भजते, तब तक उन्हें न तो इसलोक में न परलोक में सुख शान्ति मिलती है और न ही तापों का नाश होता है। अत: हे समस्त जीवों के अंदर (हृदय में) निवास करने वाले प्रभो, प्रसन्न होइये।॥७॥ 🎈🎄🎈🎄🎈🎄🎈🎄 न जानामि योगं जपंनैव पूजाम्। नतोऽहंसदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम्। जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानम्। प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ॥८॥ मैं न तो जप जानता हूँ, न तप और न ही पूजा। हे प्रभो, मैं तो सदा सर्वदा आपको ही नमन करता हूँ। हे प्रभो, बुढ़ापा व जन्म [मृत्यु] दु:खों से जलाये हुए मुझ दुखी की दुखों से रक्षा करें। हे ईश्वर, मैं आपको नमस्कार करता हूँ।॥८॥ 🔔🕉🔔🕉🔔🕉🔔🕉 रुद्राष्टकमिदम् प्रोक्तम् विप्रेण हरतोषये| ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषाम् शम्भुः प्रसीदति॥ भगवान रुद्र का यह अष्टक भगवान शंकर जी की स्तुति के लिये है। जो मनुष्य इसे प्रेमस्वरूप पढ़ते हैं, श्रीशंकर उन से प्रसन्न होते हैं। 🚥🚥🚥🚥🚥🚥🚥🚥 *॥ इति श्री रुद्राष्टकम् सम्पूर्णम् ॥* 🚥🚥🚥🚥🚥🚥🚥🚥

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*श्रीगणेशाय नम :* *श्रीमाधोपुर के अनुसार* *आज का पंचांग : 20 जुलाई 2019, शनिवार* 🔔🌷🔔🌷🔔🌷🔔🌷 वार -शनिवार माह -सावन तिथि -तृतीया – 09:15:04 तक पक्ष -कृष्ण करण -विष्टि – 09:15:04 तक, बव – 22:27:45 तक नक्षत्र शतभिषा – पूर्ण रात्रि तक *सूर्य व चंद्र से संबंधित जानकारी* सूर्योदय 05:48:31 चंद्रोदय 21:52:00 सूर्यास्त 19:18:56 चंद्रास्त 08:29:59 सूर्य राशि- कर्क चंद्र राशि- कुंभ *20 जुलाई 2019 शुभ मुहूर्त* 💐🌲💐🌲💐🌲💐🌲 अभिजित मुहूर्त- 12:06 से 01:00 तक अमृत काल- 23:20 से 25:08 *20 जुलाई 2019 का अशुभ मुहूर्त* 🚥♾🚥♾🚥♾🚥♾ दुष्टमुहूर्त - 05:35:31 से 06:30:25 तक, 06:30:25 से 07:25:19 तक कालवेला / अर्द्धयाम -13:49:40 से 14:44:34 तक कुलिक- 06:30:25 से 07:25:19 तक यमघण्ट - 15:39:28 से 16:34:23 तक कंटक -11:59:51 से 12:54:45 तक यमगण्ड - 14:10:15 से 15:53:12 तक राहुकाल 09:01:24 से 10:44:21 तक गुलिक काल - 05:35:31 से 07:18:27 तक *20 जुलाई 2019 का व्रत और त्यौहार* 🦚🎈🦚🎈🦚🎈🦚🎈 जयापार्वती व्रत समाप्त, संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत *शनिवार, जुलाई 20, 2019 को चौघड़िया मुहूर्त* ☔🌸☔🌸☔🌸☔🌸 *चौघड़िया आरंभ का समय समाप्ति का समय शुभ / अशुभ* *काल* 6:01:04 AM 7:38:57 AM अशुभ चौघड़िया *शुभ* 7:38:57 AM 9:16:51 AM शुभ चौघड़िया *रोग* 9:16:51 AM 10:54:44 AM अशुभ चौघड़िया *उद्वेग* 10:54:44 AM 12:32:37 PM अशुभ चौघड़िया *चल* 12:32:37 PM 2:10:31 PM इंटरमीडिएट चौघड़िया *लाभ* 2:10:31 PM 3:48:24 PM शुभ चौघड़िया *अम्रत* 3:48:24 PM 5:26:17 PM शुभ चौघड़िया *काल* 5:26:17 PM 7:04:11 PM अशुभ चौघड़िया *लाभ* 7:04:11 PM 8:26:17 PM शुभ चौघड़िया *उद्वेग* 8:26:17 PM 9:48:24 PM अशुभ चौघड़िया *शुभ* 9:48:24 PM 11:10:31 PM शुभ चौघड़िया *अम्रत* 11:10:31 PM 12:32:37 AM शुभ चौघड़िया *चल* 12:32:37 AM 1:54:44 AM इंटरमीडिएट चौघड़िया *रोग* 1:54:44 AM 3:16:51 AM अशुभ चौघड़िया *काल* 3:16:51 AM 4:38:57 AM अशुभ चौघड़िया *लाभ* 4:38:57 AM 6:01:04 AM शुभ 🌹🌲🌹🌲🌹🌲🌹🌲 2⃣0⃣ 0⃣7⃣ 1⃣9⃣ *🕉🌻🙏सुप्रभात 🙏🌻🕉* 🚥🚥🚥🚥🚥🚥🚥🚥

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🕉🔔🕉🔔🕉🔔🕉🔔 *शिव-मानस-पूजा स्तोत्रं :-* 🚥🚥🚥🚥🚥🚥🚥🚥 *रत्नै: कल्पितमासनं हिम-जलै: स्नानं च दिव्याम्बरं* *नाना-रत्न-विभूषितं मृगमदामोदांकितं चन्दनं ।* *जाती-चम्पक-बिल्व-पत्र-रचितं पुष्पं च धूपं तथा*, *दीपं देव दयानिधे पशुपते हृत-कल्पितं गृह्यताम् ..||१||* 🌷🎄🌷🎄🌷🎄🌷🎄 *सौवर्णे नव-रत्न-खंड-रचिते पात्रे घृतं पायसं,* *भक्ष्यं पञ्च-विधं पयो-दधि-युतं रम्भाफलं पानकं ।* *शाकानामयुतं जलं रुचिकरं कर्पूर- खंडोज्ज्वलं ,* *ताम्बूलं मनसा मया विरचितं भक्त्या प्रभो स्वीकुरु !..||२|* 🌲🌹🌲🌹🌲🌹🌲🌹 *छत्रं चामरयो:युगं व्यजनकं चादर्शकं निर्मलं ,* *वीणा-भेरि-मृदंग-काहलकला गीतं च नृत्यं तथा ।* *साष्ट-अंगं प्रणति: स्तुति: बहुविधा ह्येतत्समस्तं मया,* *संकल्पेन समर्पितं तव विभो पूजां गृहाण प्रभो ! ..||३||* 🌴🦚🌴🦚🌴🦚🌴🦚 *आत्मा त्वं गिरिजा मति: सहचरा: प्राणा: शरीरं गृहं ,* *पूजा ते विषयोपभोग-रचना निद्रा समाधि-स्थिति: ।* *संचार: पदयो: प्रदक्षिणविधि: स्तोत्रानि सर्वागिरो ,* *यद्यत्कर्म करोमि तत्तदखिलं शम्भो तवाराधनं ..||४||* 🎈🌸🎈🌸🎈🌸🎈🌸 *कर-चरण-कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा,* *श्रवण-नयनजं वा मानसं वापराधं ।* *विहितमविहितं वा सर्वमेतत्-क्षमस्व ,* *जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ! ..|*|५!! 🌻☔🌻☔🌻☔🌻☔ *इति श्रीमत् शंकराचार्य-विरचिता शिव-मानस-पूजा समाप्त* 🚥🕉🚥🕉🚥🕉🚥🕉

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*श्रीगणेशाय नम :* *श्रीमाधोपुर के अनुसार* *19 जुलाई 2019 आज का पंचांग तिथि नक्षत्र* 🌷🔔🌷🔔🌷🔔🌷🔔 माह – श्रावण तिथि – द्वितीया – 06:56:41 तक नक्षत्र – धनिष्ठा – 28:25:11 तक करण – गर – 06:56:41 तक, वणिज – 20:04:23 तक पक्ष – कृष्ण योग – आयुष्मान – 29:17:50 तक वार – शुक्रवार *19 जुलाई 2019 का सूर्योदय और चंद्रोदय* 🌞सूर्योदय – 05:47 🌞सूर्यास्त – 19:19 🌝चंद्रोदय – 21:18:00 🌝चंद्रास्त – 07:38:00 *19 जुलाई 2019 को इस समय शुभ कार्य नहीं कर सकते ये अशुभ समय है* 🚥♾🚥♾🚥♾🚥♾ दुष्टमुहूर्त – 08:19:53 से 09:14:51 तक, 12:54:44 से 13:49:42 तक कुलिक – 08:19:53 से 09:14:51 तक कंटक – 13:49:42 से 14:44:40 तक राहु काल – 10:44:11 से 12:27:15 तक कालवेला / अर्द्धयाम – 15:39:38 से 16:34:36 तक यमघण्ट – 17:29:34 से 18:24:32 तक यमगण्ड – 15:53:23 से 17:36:27 तक गुलिक काल – 07:18:02 से 09:01:07 तक *19 जुलाई 2019 का शुभ समय (शुभ मुहूर्त)* 🌻🌴🌻🌴🌻🌴🌻🌴 अभिजीत मुहूर्त (आज शुभ कार्य करने का शुभ समय) – 12:06से 1:00 तक *19 जुलाई 2019 आज का चौघड़िया* 🎈🦚🎈🦚🎈🦚🎈🦚 चर – 05:39 से 07:21 लाभ – 07:21 से 09:03 अमृत – 09:03 से 10:45 शुभ – 12:27 से 14:09 चर – 17:33 से 19:15 🌹🌲🌹🌲🌹🌲🌹🌲 1⃣9⃣ 0⃣7⃣ 1⃣9⃣ *💐🙏जयश्रीराम 🙏💐*

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🕉 *श्रीगणेशाय नम :*🕉 *श्रीमाधोपुर के अनुसार* *18 जुलाई 2019 का पंचांग* 🎈🌹🎈🌹🎈🌹🎈🌹 माह – श्रावण तिथि – द्वितीया – पूर्ण रात्रि तक नक्षत्र – श्रवण – 25:34:19 तक करण – तैतिल – 17:52:45 तक पक्ष – शुक्ल योग – प्रीति – 28:25:35 तक वार – गुरूवार *18 जुलाई 2019 सूर्य उदय और चंद्र उदय* 🌝🌞🌝🌞🌝🌞🌝🌞 सूर्योदय – 05:47 सूर्यास्त – 19:20 चंद्रोदय – 20:32:00 चंद्रास्त – 06:35:59 *18 जुलाई 2019 को इस समय शुभ कार्य नहीं कर सकते ये अशुभ समय है* 🎄🚥🎄🚥🎄🚥🎄🚥 दुष्टमुहूर्त – 10:09:36 से 11:04:38 तक, 15:39:47 से 16:34:49 तक कुलिक – 10:09:36 से 11:04:38 तक कंटक – 15:39:47 से 16:34:49 तक राहु काल – 14:10:21 से 15:53:32 तक कालवेला / अर्द्धयाम – 17:29:51 से 18:24:53 तक यमघण्ट – 06:29:28 से 07:24:30 तक यमगण्ड – 05:34:27 से 07:17:37 तक गुलिक काल – 09:00:48 से 10:43:59 तक *18 जुलाई 2019 का शुभ समय (शुभ मुहूर्त)* 🌷🌲🌷🌲🌷🌲🌷🌲 अभिजीत मुहूर्त (आज शुभ कार्य करने का शुभ समय) – 12:06 से1:00 तक *18 जुलाई 2019 आज का चौघड़िया* 🌻💐🌻💐🌻💐🌻💐 शुभ – 05:39 से 07:21 चर – 10:45 से 12:27 लाभ – 12:27 से 14:09 अमृत – 14:09 से 15:51 शुभ – 17:34 से 19:16 1⃣8⃣ 0⃣7⃣ 1⃣9⃣ *⛈☔🙏जयश्रीराम🙏☔⛈*

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🕉 *श्रीगणेशाय नम :*🕉 *श्रीमाधोपुर के अनुसार* *17 जुलाई 2019 का पंचांग तिथि नक्षत्र* 🔔🦚🔔🦚🔔🦚🔔🦚 माह – श्रावण तिथि – प्रतिपदा – 28:53:19 तक नक्षत्र – उत्तराषाढा – 22:59:03 तक करण – बालव – 15:58:56 तक, कौलव – 28:53:19 तक पक्ष – शुक्ल योग – विश्कुम्भ – 27:45:16 तक वार – बुधवार *17 जुलाई 2019 सूर्य उदय और चंद्र उदय* 🌞🌝🌞🌝🌞🌝🌞🌝 सूर्योदय – 05:46:55 सूर्यास्त – 19:21:17 चंद्रोदय – 19:55:59 चंद्रास्त – 05:48:00 *17 जुलाई 2019 को इस समय शुभ कार्य नहीं कर सकते ये अशुभ समय है* 💬💭💬💭💬💭💬💭 दुष्टमुहूर्त – 11:59:33 से 12:54:39 तक कुलिक – 11:59:33 से 12:54:39 तक कंटक – 17:30:06 से 18:25:11 तक राहु काल – 12:27:06 से 14:10:24 तक कालवेला / अर्द्धयाम – 06:29:01 से 07:24:06 तक यमघण्ट – 08:19:12 से 09:14:17 तक यमगण्ड – 07:17:13 से 09:00:31 तक गुलिक काल – 10:43:48 से 12:27:06 तक *17 जुलाई 2019 का शुभ समय (शुभ मुहूर्त)* 💐☔💐☔💐☔💐☔ अभिजीत मुहूर्त (आज शुभ कार्य करने का शुभ समय) – कोई नहीं *17 जुलाई 2019 आज का चौघड़िया* 🌻🌲🌷🌻🌲🌷🌻🌲 लाभ – 05:38 से 07:20 अमृत – 07:20 से 09:03 शुभ – 10:45 से 12:27 चर – 15:52 से 17:34 लाभ – 17:34 से 19:16 ♾🚥♾🚥♾🚥♾🚥 1⃣7⃣ 0⃣7⃣ 1⃣9⃣ *श्रावण शिव का अत्यंत प्रिय मास है। इस मास में शिव की भक्ति करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। उनके पूजन के लिए अलग-अलग विधान भी है। भक्त जैसे चाहे उनका अपनी कामनाओं के लिए उनका पूजन कर सकता है।* *शवे भक्ति:शिवे भक्ति:शिवे भक्तिर्भवे भवे ।* *अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरंण मम्।।* *उच्चारण में अत्यंत सरल शिव शब्द अति मधुर है। शिव शब्द की उत्पत्ति वश कान्तौ धातु से हुई हैं। जिसका तात्पर्य है जिसको सब चाहें वह शिव हैं ओर सब चाहते हैं आंनद को अर्थात शिव का अर्थ हुआ आंनद।* 🌴🎄☔🌲🌴🎄☔🌲 *भगवान शिव का ही एक नाम शंकर भी हैं। शं यानी आंनद एवं कर यानी करने वाला अर्थात आंनद को करने वाला या देने वाला ही शंकर हैं। शिव को जानने के बाद कुछ शेष रह नहीं जाता इसी प्रकार मानकर सावन मास में शिव का पूजन पूरी विधि विधान से करना चाहिए।* *प्रात: सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें।* *फिर शुद्ध वस्त्र धारण कर भगवान शिव का पंचोपचार या षोडषोपचार पूजन करें।* *अन्न ग्रहण ना करें।* *क्रोध, काम, चाय, कॉफी पर नियंत्रण रखें।* *दिनभर ॐ नम: शिवाय का जाप करें।* *शिव का पूजन सदा उत्तर की तरफ मुंह करके करना चाहिए क्योंकि पूर्व में उनका मुख पश्चिम में पृष्ठ भाग एवं दक्षिण में वाम भाग होता हैं।* *शिव के पूजन के पहले मस्तक पर चंदन अथवा भस्म का त्रिपुंड लगाना चाहिए।* *पूजन के पहले शिव लिंग पर जो भी चढ़ा हुआ हैं उसे साफ कर देना चाहिए।* ⛈🎈⛈🎈⛈🎈⛈🎈 *🌹🙏जयश्रीराम 🙏🌹* 🚥♾🚥♾🚥♾🚥♾

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🕉 *श्रीगणेशाय नम :*🕉 *श्रीमाधोपुर के अनुसार* *16 जुलाई 2019 आज का पंचांग तिथि नक्षत्र* 🌹🌴🌹🌴🌹🌴🌹🌴 माह – आषाढ़ पूर्णिमा तिथि – पूर्णिमा – 27:10:05 तक नक्षत्र – पूर्वाषाढा – 20:44:04 तक करण – विष्टि – 14:27:08 तक, बव – 27:10:05 तक पक्ष – शुक्ल योग – वैधृति – 27:20:31 तक वार – मंगलवार *16 जुलाई 2019 सूर्य उदय और चंद्र उदय* 🌝🌞🌼🌸🌝🌞🌸🌼 सूर्योदय – 05:45:55 सूर्यास्त – 19:20:36 चंद्रोदय – 19:10:00 चंद्रास्त – चन्द्रास्त नहीं *16 जुलाई 2019 को इस समय शुभ कार्य नहीं कर सकते ये अशुभ समय है* 🎄☔🦚⛈☔🦚⛈🎄 दुष्टमुहूर्त – 08:18:50 से 09:13:59 तक कुलिक – 13:49:43 से 14:44:52 तक कंटक – 06:28:32 से 07:23:41 तक राहु काल – 15:53:48 से 17:37:12 तक कालवेला / अर्द्धयाम – 08:18:50 से 09:13:59 तक यमघण्ट – 10:09:08 से 11:04:17 तक यमगण्ड – 09:00:12 से 10:43:36 तक गुलिक काल – 12:27:00 से 14:10:24 तक *16 जुलाई 2019 का शुभ समय (शुभ मुहूर्त)* 🌷🌲🌷🌲🌷🌲🌷🌲 अभिजीत मुहूर्त (आज शुभ कार्य करने का शुभ समय) – 12:05 से 12:59:34 तक *16 जुलाई 2019 आज का चौघड़िया* 🌻🔔🌻🔔🌻🔔🌻🔔 चर – 09:02 से 10:45 लाभ – 10:45 से 12:27 अमृत – 12:27 से 14:09 शुभ – 15:52 से 17:34 🚥♾🚥♾🚥♾🚥♾ 1⃣6⃣ 0⃣7⃣ 1⃣9⃣ *💐🌷🙏जयश्रीराम 🙏🌷* ♾🚥♾🚥♾🚥♾🚥 16 जुलाई की रात में चंद्र ग्रहण हो रहा है। ये साल 2019 का अंतिम चंद्र ग्रहण है। भारत के साथ ही ये ग्रहण आस्ट्रेलिया, अफ्रीका, एशिया, यूरोप और दक्षिण अमेरिका में दिखाई देगा मंगलवार, 16 जुलाई 2019 की रात करीब 1.31 बजे से ग्रहण शुरू हो जाएगा। इसका मोक्ष 17 जुलाई की सुबह करीब 4.30 बजे होगा। चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। चंद्र ग्रहण का सूतक काल दोपहर 4.30 बजे से शुरू हो जाएगा, जो कि 17 जुलाई की सुबह 4.30 बजे तक रहेगा। सूतक से पहले करें पूजा-पाठ 16 जुलाई को आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि है और *गुरु पूर्णिमा* का पर्व मनाया जाएगा। इस पर्व पर सभी अपने गुरु की पूजा करते हैं, बड़ी संख्या में भक्त अपने इष्टदेव के मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ग्रहण का सूतक दोपहर 4.30 से शुरू हो जाएगा। इससे पहले ही पूजा-पाठ संबंधी शुभ काम करना होंगे। ग्रहण के समय में पूजा-पाठ वर्जित रहते हैं। इस दौरान सिर्फ मंत्रों का जाप करना चाहिए। मंत्र जाप भी मानसिक रूप से करना चाहिए। ग्रहण के समय सभी मंदिरों के पट बंद रहते हैं। ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिर की साफ-सफाई की जाती है, इसके बाद ही आम भक्तों के लिए मंदिर खोले जाते हैं। ये परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। ग्रहण और सूतक के समय चंद्र से निकलने वाली नकारात्मक तरंगों के संपर्क में आने वाली सभी चीजें अपवित्र हो जाती हैं। मंदिर में रखी पूजन सामग्री, मंदिर परिसर भी अशुद्ध हो जाती है। ग्रहण के बाद मंदिर की शुद्धि की जाती है, भगवान की प्रतिमा को स्नान कराया जाता है, इसके बाद ही आम भक्तों के लिए मंदिर को खोला जाता है। इस संबंध में एक अन्य मान्यता ये है कि ग्रहण काल में वातावरण में नकारात्मक शक्तियां सक्रिय रहती हैं। । जो भक्त नियमित रूप से रोज मंदिर जाते हैं, उन लोगों को ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं। मंदिर बंद होने से नियमित दर्शनार्थी अपने घर पर रहे, ताकि उन पर ग्रहण का बुरा असर न हो। इसी सोच के साथ मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं। 🌻🌲🌹☔🌻🌲🌹💐

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