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🌷 OM ❤ SAI ❤ RAM 🌷 गुरुभक्ति की कठिन परीक्षा 💜💙💜💙💜💙💜💙💜💙 कोई मसजिद में एक बकरा बलि देने को लाया । वह अत्यन्त दुर्बल, बूढ़ा और मरने ही वाला था । उस समय मालेगाँव के फकीर पीरमोहम्मद उर्फ बड़े बाबा भी उनके समीप ही खड़े थे । बाबा ने उन्हें बकरा काटकर बलि चढ़ाने को कहा । श्री साईबाबा बड़े बाबा का अधिक आदर किया करते थे । इस कारण वे सदैव उनके दाहिनीओर ही बैठा करते थे । सबसे पहले वे ही चिलम पीते और फिर बाबा को देते, बाद में अन्य भक्तों को । जब दोपहर को भोजन परोस दिया जाता, तब बाबा बड़े बाबा को आदरपूर्वक बुलाकर अपने दाहिनी ओर बिठाते और तब सब भोजन करते । बाबा के पास जो दक्षिणा एकत्रित होती, उसमें से वे 50 रु. प्रतिदिन बड़े बाबा को दे दिया करते थे । जब वे लौटते तो बाबा भी उनके साथ सौ कदम जाया करते थे । उनका इतना आदर होते हुए भी जब बाबा ने उनसे बकरा काटने को कहा तो उन्होंने अस्वीकार कर स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि बलि चढ़ाना व्यर्थ ही है । तब बाबा ने शामा से बकरे की बलि के लिये कहा । वे राधाकृष्ण माई के घर जाकर एक चाकू ले आये और उसे बाबा के सामने रख दिया । राधाकृष्माई को जब कारण का पता चला तो उन्होंने चाकू वापस मँगवा लिया । अब शामा दूसरा चाकू लाने के लिये गये, किन्तु बड़ी देर तक मसजिद में न लौटे । तब काकासाहेब दीक्षित की बारी आई । वह सोना सच्चा तो था, परन्तु उसको कसौटी पर कसना भी अत्यन्त आवश्यक था । बाबा ने उनसे चाकू लाकर बकरा काटने को कहा । वे साठेवाड़े से एक चाकू ले आये और बाबा की आज्ञा मिलते ही काटने को तैयार हो गये । उन्होंने पवित्र ब्राहमण-वंश में जन्म लिया था और अपने जीवन में वे बलिकृत्य जानते ही न थे । यघपि हिंसा करना निंदनीय है, फिर भी वे बकरा काटने के लिये उघत हो गये । सब लोगों को आश्चर्य था कि बड़े बाबा एक यवन होते हुए भी बकरा काटने को सहमत नहीं हैं और यह एक सनातन ब्राहमण बकरे की बलि देने की तैयारी कर रहा है । उन्होंने अपनी धोती ऊपर चढ़ा फेंटा कस लिया और चाकू लेकर हाथ ऊपर उठाकर बाबा की अन्तिम आज्ञा की प्रतीक्षा करने लगे । बाबा बोले, अब विचार क्या कर रहे हो । ठीक है, मारो । जब उनका हाथ नीचे आने ही वाला था, तब बाबा बोले ठहरो, तुम कितने दुष्ट हो । ब्राहमण होकर तुम बकरे की बलि दे रहे हो । काकासाहेब चाकू नीचे रख कर बाबा से बोले आपकी आज्ञा ही हमारे लिये सब कुछ 🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 है, हमें अन्य आदेशों से क्या । हम तो 🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 केवल आपका ही सदैव स्मरण तथा 🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 ध्यान करते है और दिन रात आपकी 🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 आज्ञा का ही पालन किया करते है । 🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 हमें यह विचार करने की आवश्यकता 🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 नहीं कि बकरे को मारना उचित है या 🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 अनुचित । और न हम इसका कारण 🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 ही जानना चाहते है । हमारा कर्तव्य 🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 और धर्म तो निःसंकोच होकर गुरु की 🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 आज्ञा का पूर्णतः पालन करने में है । 🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 तब बाबा ने काकासाहेब से कहा कि मैं स्वयं ही बलि चढ़ाने का कार्य करुँगा । तब ऐसा निश्चित हुआ कि तकिये के पास जहाँ बहुत से फकीर बैठते है, वहाँ चलकर इसकी बलि देनी चाहिए । जब बकरा वहाँ ले जाया जा रहा था, तभी रास्ते में गिर कर वह मर गया । ( From -- Sri Sai Satcharitra ) 🌷 SRI SATCHIDANANDA SADGURU SAINATH MAHARAJ KI JAI 🌷

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