Narayan Tiwari Aug 18, 2019

🌿!!बाबा अमरनाथ जी के गुफ़ा की खोज कैंसे हुई!!⛺ ■••••◆••••◆••••●••••●•••••■•••••• एक गड़रिये ने ढूंढा भगवान अमरनाथ जी की गुफा:⛺ •••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• पवित्र गुफा की खोज के बारे में पुराणों में भी एक कथा प्रचलित है कि एक गड़रिये को एक साधु मिला। उसने उस गड़रिये को कोयले से भरी एक बोरी दी। गड़रिया अपने कंधे पर लादकर अपने घर को चल दिया। घर आकर उसने बोरी खोली तो वह आश्चर्य चकित हुआ। क्योंकि, कोयले की बोरी अब सोने के सिक्कों की हो चुकी थी। इसके बाद वह गड़रिया साधु से मिलने व धन्यवाद देने के लिए उसी स्थान पर गया, जहां पर साधु से मिला था। परन्तु वहां उसे साधु नहीं मिला बल्कि ठीक उसी जगह एक गुफा दिखाई दी। गड़रिया जैसे ही उस गुफा के अंदर गया तो उसने वहां पर देखा कि भगवान भोले शंकर बर्फ के बने शिवलिंग के आकार में स्थापित थे। उसने वापस आकर सबको यह कहानी बताई और इस तरह भोले बाबा की पवित्र अमरनाथ गुफा की खोज हुई। धीरे-धीरे दूर-दूर से भी लोग पवित्र गुफा एवं बाबा के दर्शन के लिए पहुंचने लगे। श्री अमरनाथ जी के दर्शन से लाभ:--⛺ ``````````````````````````````````````````` बाबा अमरनाथ दर्शन का महत्व पुराणों में भी मिलता है। पुराण अनुसार काशी में लिंग दर्शन और पूजन से दस गुना, प्रयाग से सौ गुना और नैमिषारण्य से हजार गुना पुण्य देने वाले श्री अमरनाथ जी के दर्शन है..!! 🙏 || ऊं श्री अमरनाथाय नमः ||⛳ || बोलो, बाबा बर्फानी जी की जय ||⛺ 🌿🔽🌿🔽🌿🔽🌿🔽🌿🔽🌿🔽🌿🔽

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Narayan Tiwari Aug 17, 2019

जानें,भगवान झूलेलाल जी कौन थे!!⛳ ■••••◆••••◆••••●••••●••••■•••••• झूलेलाल जी सिन्धी हिन्दुओं के उपास्य देव हैं जिन्हें 'इष्ट देव' कहा जाता है। उनके उपासक उन्हें वरूण (जल देवता) काअवतार मानते हैं। वरुण देव को सागर के देवता, सत्य के रक्षक और दिव्य दृष्टि वाले देवता के रूप में सिंधी समाज भी पूजता है। उनका विश्वास है कि जल से सभी सुखों की प्राप्ति होती है और जल ही जीवन है। जल-ज्योति,भगवान वरुणावतार, झूलेलाल जी सिंधियों के ईष्ट देव हैं..! जिनके आगे दामन फैलाकर सिंधी समाज यही मंगल कामना करते हैं कि सारे विश्व में सुख-शांति , समृद्धि , बनी रहे और चारों दिशाओं में हरियाली और खुशहाली बनी रहे....!!!! 🙏 ⛺ || जय झूलेलाल जी || ⛺🙏

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Narayan Tiwari Aug 16, 2019

⛺⛺ | सबसे बड़ी शक्ति सहनशक्ति हैं ..||⛺⛺ ,◆•••••••●•••••••■•••■•••••••••••••• _*♻बन्द दुकान में कहीं से घूमता फिरता एक सांप घुस गया। दुकान में रखी एक आरी से टकराकर सांप मामूली सा जख्मी हो गया। घबराहट में सांप ने पलट कर आरी पर पूरी ताकत से डंक मार दिया।जिस कारण उसके मुंह से खून बहना शुरू हो गया।अबकी बार सांप ने अपने व्यवहार के अनुसार आरी से लिपट कर उसे जकड़कर और दम घोंटकर मारने की पूरी कोशिश कर डाली।अब सांप अपने गुस्से की वजह से पूरी तरह घायल हो गया। दूसरे दिन जब दुकानदार ने दुकान खोली तो सांप को आरी से लिपटा मरा हुआ पाया जो किसी ओर कारण से नहीं केवल अपनी तैश और गुस्से की भेंट चढ़ गया था।*_ _♻कभी -कभी गुस्से में हम दूसरों को हानि पहुंचाने की कोशिश करते हैं, मगर समय बीतने के बाद हमें पता चलता है कि हमने अपने आप का ज्यादा नुकसान किया है। अब इस कहानी का सार ये है कि अच्छी जिंदगी के लिए कभी -कभी हमें कुछ चीजों को, कुछ लोगों को, कुछ घटनाओं को, कुछ कामों को, और कुछ बातों को इग्नोर करना चाहिए। अपने आप को मानसिक मजबूती के साथ इग्नोर करने का आदी जरूर बनाइये। *जरूरी नहीं कि हम हर एक्शन का एक रिएक्शन दिखाएं।* 👌"सबसे बड़ी शक्ति सहनशक्ति है।" संयम ऐसी सवारी है जो अपने सवार को गिरने नहीं देती न किसी के कदमों में न किसी की नजरों में_...... ।। जय श्री राम ।।⛺ 🌹🌿🌹🌿🙏🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹

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Narayan Tiwari Aug 15, 2019

⛺⛺⛺ || मां पीताम्बरा आल्हा--भजन || ⛺⛺⛺ ■•••••◆••••◆•••••●•••••••••■••• जय मृत्युंजय राज🚩जय मांई की🚩 श्री पीताम्बरायै नमः ।।🚩 ऊं ह्लीं ह्लीं ह्लीं बगले सर्व भयं हन |🚩 कलयुग की संकटनाशनी कही जाने वाली मां पीताम्बरा आप और आपके परिवार का जीवन निष्कंटक बनायें..! पीताम्बरा पीठ मध्य प्रदेश राज्य के दतिया शहर में स्थित एक हिंदू मंदिर परिसर (एक आश्रम सहित) है। यह कई पौराणिक कथाओं के साथ-साथ वास्तविक जीवन में लोगों की 'तपस्थली' (ध्यान का स्थान) है। यहाँ स्थित श्री वनखंडेश्वर शिव के शिवलिंग को महाभारत के समकालीन के रूप में अनुमोदित किया जाता है। यह मुख्य रूप से शक्ति (देवी पीताम्बरा को समर्पित) का आराधना स्थल है.! 🚩 ।। जय मांई की ।।🚩

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Narayan Tiwari Aug 14, 2019

सभी देशवासियों को स्वत्रंत्रता दिवस की शुभकामनाएं!! ■•••••◆••••●•••••◆••••••••••••••• भारत अपना 73वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है । 15 अगस्त, 1947 के दिन हिन्दुस्तान अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ था। तब से हर साल देश में 15 अगस्त का दिन स्वतंत्रता दिवस के तौर पर मनाया जाएगा। भारत के प्रधानमंत्री दिल्ली के लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं!15 अगस्त को स्कूलों से लेकर दफ्तरों में तिरंगा फहराया जाता है। हमें जो आजादी मिली उसमें इस मातृभूमि के लाखों अमर सपूतों ने अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया था। इस राष्ट्रीय पर्व के हर्ष के मौके पर हम अपने प्राणों को न्यौछावर करने वीरों को याद करें.....! [ ना सरकार मेरी है, ना रौब मेरा है, ना बड़ा सा नाम मेरा है, मुझे तो एक छोटी सी बात का गौरव है, मैं हिन्दुस्तान का हूं, और हिन्दुस्तान मेरा है।। जय हिंद.....जय भारत !!🚩 वंदेमातरम्🚩भारत माता की जय ।।

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Narayan Tiwari Aug 13, 2019

संसार में सबको अपने-अपने भाग्य से मिलता हैं..!!⛳ ■••••••••◆••••••••●••●••••••••••••••• ▪➖▪➖▪➖▪➖▪➖▪➖▪➖▪ ‼🌹🌹अपनी अपनी किस्मत🌹🌹‼ ▪➖▪➖▪➖▪➖▪➖▪➖▪➖▪ एक राजा के तीन पुत्रियाँ थीं अौर तीनों बडी ही समझदार थी। वे तीनो राजमहल मे बडे आराम से रहती थी। एक दिन राजा अपनी तीनों पुत्रियों सहित भोजन कर रहे थे कि अचानक राजा ने बातों ही बातों मे अपनी तीनों पुत्रियो से कहा : एक बात बताओ , तुम तीनो अपने भाग्‍य से खाते - पीते हो या मेरे भाग्‍य से.? दो बडी पुत्रियो ने कहा :-- पिताजी हम आपके भाग्‍य से खाते हैं। यदि आप हमारे पिता महाराज न होते तो हमें इतनी सुख-सुविधा व विभिन्‍न प्रकार के व्‍यंजन खाने को नसीब नहीं होते। ये सब आपके द्वारा अर्जित किया गया वैभव है , जिसे हम भोग रहे हैं। पुत्रियों के मुँह से यह सुन कर राजा को अपने अाप पर बडा गर्व और खु:शी हो रही थी , लेकिन राजा की सबसे छोटी पुत्री ने इसी प्रश्‍न के उत्‍तर में कहा :- - पिताजी मैं आपके भाग्‍य से नहीं बल्कि अपने स्‍वयं के भाग्‍य से यह सब वैभव भोग रही हुँ। छोटी पुत्री के मुँख से ये बात सुन राजा के अहंकार को बडी ठेस लगी। उसे गुस्‍सा भी आया और शोक भी हुआ क्‍योंकि उसे अपनी सबसे छोटी पुत्री से इस प्रकार के जवाब की आशा नहीं थी। समय बीतता गया लेकिन राजा अपनी सबसे छोटी पुत्री की वह बात भुला नहीं पाया और समय आने पर राजा ने अपनी दोनो बडी पुत्रियो की विवाह दो राजकुमारो से करवा दिया परन्‍तु सबसे छोटी पुत्री का विवाह क्रोध्‍ा के कारण एक गरीब लक्‍कडहारे से कर दिया अौर विदाई देते समय उसे वह बात याद दिलाते हुए कहा :- - यदि तुम अपने भाग्‍य से राज वैभव का सुख भोग रही थी, तो तुम्‍हें उस गरीब लकड़हारे के घर भी वही राज वैभव का सुख प्राप्‍त होगा , अन्‍यथा तुम्‍हें भी ये मानना पडे़गा कि तुम्‍हे आज तक जो राजवैभव का सुख मिला , वह तुम्‍हारे नहीं बल्कि मेरे भाग्‍य से मिला। चूंकि , लक्‍कडहारा बहुत ही गरीब था इसलिए निश्चित ही राजकुमारी को राजवैभव वाला सुख तो प्राप्‍त नहीं हो रहा था। लक्‍कड़हारा दिन भर लकडी काटता और उन्‍हें बेंच कर मुश्किल से ही अपना गुजारा कर पाता था। राजकुमारी के दिन बडे ही कष्‍ट दायी बीत रहे थे लेकिन वह निश्चित थी। क्‍योंकि राजकुमारी यही सोचती कि यदि उसे मिलने वाले राजवैभव का सुख उसे उसके भाग्‍य से मिला था , तो निश्चित ही उसे वह सुख गरीब लक्‍कड़हारे के यहाँ भी मिलेगा। एक दिन राजा ने अपनी सबसे छोटी पुत्री का हाल जानना चाहा तो उसने अपने कुछ सेवको को उसके घर भेजा और सेवको से कहलवाया कि राजकुमारी को किसी भी प्रकार की सहायता चाहिए तो वह अपने पिता को याद कर सकती है क्‍योंकि यदि उसका भाग्‍य अच्‍छा होता तो वह भी किसी राजकुमार की पत्नि होती। लेकिन राजकुमारी ने किसी भी प्रकार की सहायता लेने से मना कर दिया , जिससे महाराज को आैर भी ईर्ष्‍या हुई अपनी पुत्री से। क्राेध के कारण महाराज ने उस जंगल को ही निलाम करने का फैसला कर लिया जिस पर उस लक्‍कड़हारे का जीवन चल रहा था। एक दिन लक्‍कडहारा बहुत ही चिंता मे अपने घर आया और अपना सिर पकड़ कर झोपडी के एक कोने मे बैठ गया। राजकुमारी ने अपने पति को चिंता में देखा तो चिंता का कारण पूछा और लक्‍कड़हारे ने अपनी चिंता बताते हुए कहा :- - जिस जंगल में मैं लकडी काटता हुँ , वह कल निलाम हो रहा है और जंगल को खरीदने वाले को एक माह में सारा धन राजकोष में जमा करना होगा। जंगल के निलाम हो जाने के बाद मेरे पास कोई काम नही रहेगा जिससे हम अपना गुजारा कर सके। राजकुमारी बहुत समझदार थी , उसने एक तरकीब लगाई और लक्‍कडहारे से कहा :- जब जंगल की बोली लगे, तब तुम एक काम करना , तुम हर बोली मे केवल एक रूपया बोली बढ़ा देना। दूसरे दिन लक्‍कड़हारा जंगल गया और नीलामी की बोली शुरू हुई और राजकुमारी के समझाए अनुसार जब भी बोली लगती , तो लक्‍कड़हारा हर बोली पर एक रूपया बढा कर बोली लगा देता। परिणामस्‍वरूप अन्‍त में लक्‍कड़हारे की बोली पर वह जंगल बिक गया लेकिन अब लक्‍कड़हारे को और भी ज्‍यादा चिंता हुई क्‍योंकि वह जंगल पांच लाख में लक्‍कड़हारे के नाम पर छूटा था जबकि लक्‍कड़हारे के पास रात्रि के भोजन की व्‍यवस्‍था हो सके , इतना पैसा भी नही था। आखिर घोर चिंता में घिरा हुआ वह अपने घर पहुँचा और सारी बात अपनी पत्नि से कही। राजकुमारी ने कहा :-- चिंता न करें आप , आप जिस जंगल में लकड़ी काटने जाते हैं , वहाँ मैं भी आई थी एक दिन। जब आप भोजन करने के लिए घर नही आये थे और मैं आपके लिए भोजन लेकर आई थी। तब मैंने वहाँ देखा कि जिन लकडियों को आप काट रहे थे , वह तो चन्‍दन की थी। आप एक काम करें। आप उन लकड़ीयों को दूसरे राज्‍य के महाराज को बेंच दें। चुंकि एक माह में जंगल का सारा धन चुकाना है सो हम दोनों मेहनत करके उस जंगल की लकडि़या काटेंगे और साथ में नये पौधे भी लगाते जायेंगे और सारी लकड़ीया राजा को बेंच दिया करेंगे। लकड़हारा ने अपनी पत्नि से पूंछा कि क्‍या महाराज को नही मालुम होगा कि उनके राज्‍य के जंगल में चन्‍दन का पेड़ भी है। राजकुमारी ने कहा :-- मालूम है , परन्‍तु वह जंगल किस और है , यह नही मालुम है। लकड़हारा को अपनी पत्नि की बात समझ में आ गई और दोनो ने कड़ी मेहनत से चन्‍दन की लकड़ीयों को काटा और दूर-दराज के राजाओं को बेंच कर जंगल की सारी रकम एक माह में चुका दी और नये पौधों की खेप भी रूपवा दी ताकि उनका काम आगे भी चलता रहे। धीरे-धीरे लकड़हारा और राजकुमारी धनवान हो गए। लक्‍कड़हारा और राजकुमारी ने अपना महल बनवाने की सोच एक-दूसरे से विचार-विमर्श करके काम शुरू करवाया। लक्‍कड़हारा दिन भर अपने काम को देखता और राजकुमारी अपने महल के कार्य का ध्‍यान रखती। एक दिन राजकुमारी अपने महल की छत पर खडी होकर मजदूरो का काम देख रही थी कि अचानक उसे अपने महाराज पिता और अपना पूरा राज परिवार मजदूरो के बीच मजदूरी करता हुआ नजर आता है। राजकुमारी अपने परिवार वालों को देख सेवको को तुरन्‍त आदेश देती है कि वह उन मजदूरो को छत पर ले आये। सेवक राजकुमारी की बात मान कर वैसा ही करते हैं। महाराज अपने परिवार सहित महल की छत पर आ जाते हैं और अपनी पुत्री को महल में देख आर्श्‍चय से पूछते हैं कि तुम महल में कैसे.? राजकुमारी अपने पिता से कहती है :-- महाराज… आपने जिस जंगल को नीलाम करवाया, वह हमने ही खरीदा था क्‍योंकि वह जंगल चन्‍दन के पेड़ों का था और फिर राजकुमारी ने सारी बातें राजा को कह सुनाई। अन्‍त में राजा ने स्‍वीकार किया कि उसकी पुत्री सही थी। संसार में सभी अपने नसीब से पाते हैं। सबका अपना भाग्‍य होता है। सबको अपने भाग्‍य से ही मिलता है। 🔲🔶🔶🔶🔲 🔲🔶🔶🔶🔲 🔲🔶🔶🔶🔲 🔽 ‼🙏 जय श्री गजानन 🙏‼⛳ 🔲🔶🔶🔶🔲 🔲🔶🔶🔶🔲 🔲🔶🔶🔶🔲

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Narayan Tiwari Aug 12, 2019

🔽🔽|| जीवन का सार•• प्रभु की भक्ति ||🔽🔽 ■••••••••••••••••◆••◆•••★•••••••••••••••••• *सत्संग वाणी ............*🔽🔽🔽🔽⛳ *====================* एक बार एक राजा नगर भ्रमण को गया तो रास्ते में क्या देखता है कि .......एक छोटा बच्चा माटी के खिलौनो को कान में कुछ कहता फिर तोड कर माटी में मिला रहा है राजा को बडा अचरज हुआ तो उसने बच्चे से पुछा कि तुम ये सब क्या कर रहे हो??? तो बच्चे ने जवाब दिया कि मैं इन से पुछता हुं कि कभी राम नाम जपा और माटी को माटी में मिला रहा हूँ तो राजा ने सोचा इतना छोटा सा बच्चा इतनी ज्ञान की बात ....... राजा ने बच्चे से पुछा कि तुम मेरे साथ मेरे राजमहल में रहोगे????? तो बच्चे ने कहा कि जरुर रहूंगा पर मेरी चार शर्त है 1 जब मैं सोऊं तब तुम्हें जागना पडेगा 2 मैं भोजन खाऊगा तुम्हें भूखा रहना पडेगा 3 मैं कपड़े पहनुंगा मगर तुम्हें नग्न रहना पडेगा 4 और जब मैं कभी मुसीबत में होऊ तो तुम्हें अपने सारे काम छोड़ कर मेरे पास आना पड़ेगा अगर आपको ये शर्तें मन्जुर हैं तो मैं आपके राजमहल में चलने को तैयार हुं राजा ने कहा कि ये तो असम्भव है तो बच्चे ने कहा राजन तो मैं उस परमात्मा का आसरा छोड़ कर आपके आसरे क्यूँ रहुँ जो खुद नग्न रह कर मुझे पहनाता है खुद भूखा रह कर मुझे खिलाता है खुद जागता है और मैं निश्चिंत सोता हूँ और जब मैं किसी मुश्किल में होता हूँ तो वो बिना बुलाए मेरे लिए अपने सारे काम छोड़ कर दौडा आता है ........ अर्कहने का भाव केवल इतना ही है कि हम लोग सब कुछ जानते समझते हुए भी बेकार के विषय विकारो में उलझ कर परमात्मा को भुलाए बैठे हैं जो हमारी पल पल देखभाल कर रहे हैं उस प्रभु की भक्ति को भूलाए बैठे हैं..!! 🔽।। राम राम जी ।।⛳ 🙏,🔽🙏🔽🙏🔽🙏🔽🙏🔽🙏🔽🙏🔽

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Narayan Tiwari Aug 12, 2019

जानें,भगवान शिवजी,शास्त्र और सुखमय जीवन रहस्य!! ■••••••••••••••◆•••●•••◆••••••••••••••■•••••••• 🙏🔽🔽🔽🔽🔽🔽🔽🔽🔽🔽🔽🔽🙏 🎪 *धन संबंधी बाधाएं दूर करने के लिए* ⛳ ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ 🙏*धन संबंधी बाधाएं दूर करने के लिए नियमित रूप से यहां बताए जा रहे उपाय करते रहेंगे तो जल्दी ही शुभ फल मिल सकते हैं। यहां जानिए शास्त्रों में बताए उपाय, जिनसे परेशानियां दूर होती हैं...* १)➡ *पीपल को चढ़ाएं जल* *सभी शुभ मुहूर्त में पीपल की जड़ में जल चढ़ाना चाहिए । शास्त्रों की मान्यता है कि पीपल भगवान श्रीहरि का ही एक स्वरूप है और इसमें सभी देवी-देवताओं का वास है । इस कारण जो लोग पीपल की पूजा करते हैं , जल चढ़ाते हैं, उन्हें सभी प्रकार की सुख-सुविधाएं प्राप्त होती है ।* २)➡ *शिवलिंग पर चढ़ाएं जल* *एक लोटे में शुद्ध जल भरें और उसमें काले तिल डाल दें । अब इस जल को शिवलिंग पर ॐ नम: शिवाय मंत्र जप करते हुए चढ़ाएं ।जल की पतली धार से चढ़ाएं और मंत्र का जप करते रहें । जल चढ़ाने के बाद फूल और बिल्व पत्र चढ़ाएं । इस उपाय से शुभ फल प्राप्त होने की संभावनाएं बढ़ती है ।* ३)➡ *शनि दोष की शांति के लिए* *कुंडली में शनि के दोष हो या शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो तो किसी पवित्र नदी में हर शनिवार को काले तिल प्रवाहित करना चाहिए ।इस उपाय से शनि के दोष की शांति होती है ।* ४)➡ *पीपल को चढ़ाएं दूध* *दूध में काले तिल मिलाकर पीपल पर चढ़ाएं । इससे बुरा समय दूर हो सकता है ।* ५)➡ *पूजा के बाद घर के सभी कमरों में शंख और घंटी बजाने चाहिए। इससे नकारात्मकता, दरिद्रता बाहर चली जाती है। घर में लक्ष्मी आती हैं।* ६)➡ *सुबह जब भी उठे, सबसे पहले अपनी दोनों हथेलीयों को देखना चाहिए। इससे भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की विशेष कृपा मिलती है।* ७)➡ *यदि कोई व्यक्ति पीपल के नीचे छोटा सा शिवलिंग स्थापित करके नियमित पूजा करता है तो उसकी सभी परेशानियाँ दूर हो सकती हैं ।* ८)➡ *काले तिल का दान करें। इससे राहु-केतु और शनि के बुरे प्रभाव समाप्त हो जाते हैं।कालसर्प योग, साढ़ेसाती, ढय्या, पितृ दोष आदि में भी यह उपाय किया जा सकता है।* ९)➡ *सुबह घर से निकलने से पहले केसर को पानी में मिलाकर तिलक लगाएं। इस उपाय से महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और सफलता मिलती है।* १०)➡ *जल चढ़ाते समय शिवलिंग को हथेलियों से रगड़ना चाहिए। इस उपाय से किसी की भी किस्मत बदल सकती है ।* ११)➡ *चावल पकाएं और चावलों से शिवलिंग का श्रृंगार करें। इसके बाद पूजा करें। इससे मंगलदोष शांत होते हैं ।* १२)➡ *शिवलिंग पर रोज धतुरा चढ़ाने से घर और संतान से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। यह उपाय संतान को सभी कार्यों में सफलता दिलाती है।* 1३)➡ *नियमित रुप से आंकड़े के फूल की माला बनाकर शिवलिंग पर चढ़ाते हैं तो आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।* १४)■ शनिवार को शिवलिंग का अभिषेक सरसों के तेल से करने पर शनि,राहु,केतु का प्रभाव कम होता हैं...!! ।।जय श्री मृत्युंजय राज ।।⛳ ।। ऊं ह्रीं महाकालाय नमः ।।⛳ 🙏🔽।। जय श्री मृत्युंजय ।।🔽🙏 🌿🔽🌿🔽🌿🔽🌿🔽🌿🔽🌿🔽🌿🔽🌿

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