Narayan Tiwari Jun 12, 2019

श्री गंगा दशहरा: मोक्षदायिनी मां गंगा ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• गंगा का पौराणिक महत्व क्या है? १)- माना जाता है कि गंगा श्री विष्णु के चरणों में रहती थीं। २)- भागीरथ की तपस्या से, शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया। ३)- फिर शिव जी ने अपनी जटाओं को सात धाराओं में विभाजित कर दिया। ४)- ये धाराएं हैं - नलिनी, हृदिनी, पावनी, सीता, चक्षुष, सिंधु और भागीरथी। ५)- भागीरथी ही गंगा हुयी और हिन्दू धर्म में मोक्षदायिनी मानी गयी। ६)- इन्हे कहीं कहीं पर पार्वती की बहन कहा जाता है। ७- इन्हे शिव की अर्धांगिनी भी माना जाता है। ८)- और अभी भी शिव की जटाओं में इनका वास है। गंगा दशहरा के पर्व की महिमा क्या है? 1)- गंगा दशहरा का पर्व ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि को मनाया जाता है! 2)- माना जाता है कि, इसी दिन गंगा का अवतरण धरती पर हुआ था! 3)- इस दिन गंगा स्नान, गंगा जल का प्रयोग, और दान करना विशेष लाभकारी होता है! 4)- इस दिन गंगा की आराधना करने से पापों से मुक्ति मिलती है! 5)- व्यक्ति को मुक्ति मोक्ष का लाभ मिलता है! क्या करें गंगा दशहरा के दिन? १)- किसी पवित्र नदी या गंगा नदी में स्नान करें! २)- घी में चुपड़े हुये तिल और गुड़ को या तो जल में डालें या पीपल के नीचे रख दें! ३)- इसके बाद माँ गंगा का ध्यान करके उनकी पूजा करें, उनके मन्त्रों का जाप करें! ४)- पूजन में जो सामग्री प्रयोग करें , उनकी संख्या दस होनी चाहिए , विशेष रूप से दस दीपक का प्रयोग करें ! ५)- दान भी दस ब्राह्मणों को करें , परन्तु उन्हें दिए जाने वाले अनाज सोलह मुट्ठी होने चाहिए! क्या करें अगर किसी पवित्र नदी तक न जा पायें? १)- घर में ही शीतल जल से स्नान करें! २)- जल में थोडा सा गंगाजल मिलाएं या तुलसी के पत्ते डालें! ३)- इसके बाद माँ गंगा का ध्यान करते हुये स्नान आरम्भ करें ! ४)- स्नान करने के बाद सूर्य देवता को जल अर्पित करें! ५)- इसके बाद माँ गंगा के मन्त्रों का जाप करें ! ६)- निर्धन व्यक्ति या ब्राह्मण को दान करें! अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए गंगा दशहरा पर क्या करें? १)- सम्पूर्ण श्रृंगार करके माँ गंगा की आरती करें २)- इसके बाद माँ को वस्त्र और श्रृंगार की वस्तुएँ अर्पित करें. ३)- माँ से अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करें. ४)- अर्पित की हुई वस्तुएँ किसी सौभाग्यवती स्त्री को दान कर दें ! आयु और स्वास्थ्य रक्षा के लिए, गंगा दशहरा पर क्या करें? १)- घर से गंगाजल लोटे में भरकर शिव जी के मंदिर जाएँ! २)- गंगाजल से शिव जी का अभिषेक करें! ३)- इसके बाद अमृत मृत्युंजय का जाप करें! ४)- अच्छे स्वास्थ्य और लम्बी आयु की प्रार्थना करें। गंगा दशहरा पर क्या अवश्य करें? १)- पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करें। २)- भगवान शिव की उपासना अवश्य करें। ३)- इसके बाद माँ गंगा की पूजा करें। ४)- निर्धनों को ग्रीष्म ऋतु वाली वस्तुओं का दान करें। ५)- हो सके तो नदी के किनारे दीप दान करें! श्री गंगा देव्यै नमः।।🚩 हर हर गंगे।।🚩 जय गंगा मांई की।।🚩

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Narayan Tiwari Jun 7, 2019

🌿🌹🌿 || दुर्गा अमृतवाणी ||🌿🌹🌿 •••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• 🌹ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवि भगवती हि सा । बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति॥१॥ 🌹दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि। दारिद्रयदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता॥२॥ 🌹सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बकेगौरि नारायणि नमोस्तु ते ॥३॥ 🌹शरणागतदीनार्तपरित्राण परायणे। सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोस्तु ते॥४॥ 🌹सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते। भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोस्तु ते ॥५॥ 🌹रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्। त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥६॥ 🌹सर्वबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरी। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥७॥ ।।ऊं ह्रीं दुं दुर्गाय नमः।।🚩 ।। जय मांई की।।🚩

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Narayan Tiwari Jun 5, 2019

🌹🌿🌹 || श्री विष्णु मंत्र || 🌹🌿🌹 ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• 1)श्री विष्णु मूल मंत्र :--🚩 ॐ नमोः नारायणाय॥ 2)श्री विष्णु भगवते वासुदेवाय मंत्र:- ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥ 3) श्री विष्णु गायत्री मंत्र:--🚩 ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि।  तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ 4) विष्णु शान्ताकारम् मंत्र:-🚩 शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्  विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।  लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्  वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥ 5) मंगल श्री विष्णु मंत्र:-🚩 मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।  मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥ 🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹

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Narayan Tiwari Jun 2, 2019

श्री शनिदेव जयंती विशेष: दर्शन करें, बछुआ गांव,काठगढ़ जिला-नवांशहर •••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• 1 )शनि जयंती को काले रंग की चिड़िया खरीदकर उसे दोनों हाथों से आसमान में उड़ा दें। आपकी दुख-तकलीफें दूर हो जाएंगी।  2 )शनि जयंती के दिन लोहे का त्रिशूल महाकाल शिव, महाकाल भैरव या महाकाली मंदिर में अर्पित करें। शनि दोष के कारण विवाह में विलंब हो रहा हो, तो 250 ग्राम काली राई, नए काले कपड़े में बांधकर पीपल के पेड़ की जड़ में रख आएं और शीघ्र विवाह की प्रार्थना करें।  3) पुराना जूता शनि जयंती के दिन चौराहे पर रखें।  4) आर्थिक वृद्धि के लिए आप सदैव शनिवार के दिन गेंहू पिसवाएं और गेहूं में कुछ काले चने भी मिला दें।  5) शनि जयंती को 10 बादाम लेकर हनुमान मंदिर में जाएं। 5 बादाम वहां रख दें और 5 बादाम घर लाकर किसी लाल वस्त्र में बांधकर धन स्थान पर रख दें।  6)शनि जयंती के दिन बंदरों को काले चने, गुड़, केला खिलाएं।  7) शनि जयंती पर सरसों के तेल का छाया पात्र दान करें।  8) बहते पानी में नारियल विसर्जित करें।  9 )शनि जयंती को काले उड़द पीसकर उसके आटे की गोलियां बनाकर मछलियों को खिलाएं।  10) शनि जयंती को आक के पौधे पर 7 लोहे की कीलें चढ़ाएं। काले घोड़े की नाल या नाव की कील से बनी लोहे की अंगूठी मध्यमा उंगली में शनि जयंती को सूर्यस्त के समय पहनें।  11) शमशान घाट में लकड़ी का दान करें।  12)शनि जयंती को सरसों का तेल हाथ और पैरों के नाखूनों पर लगाएं। 13) शनि जयंती से आरंभ कर चीटिंयों को 7 शनिवार काले तिल, आटा, शक्कर मिलाकर खिलाएं।  14)शनि जयंती की शाम पीपल के पेड़ के नीचे तिल या सरसों के तेल का दीपक जलाएं।  15)शनि की ढैया से ग्रस्ति व्यक्ति को हनुमान चालीसा का सुबह-शाम जप करना चाहिए।  16)दशरथकृत शनि स्त्रोत पढ़ें! ऊं शं शनैश्चराय नमः।।🚩 ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नमः।। ऊं महाकाल शनैश्चराय नमः।। ।। ऊं शं धनुष्मते नमः।।🚩 ।। जय शनिदेव।। बोलो धनुषाकार शनि धाम की जय।🚩

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Narayan Tiwari Jun 1, 2019

श्री सूर्यदेव को अर्घ्य देने की विधि:🚩 ````````````````````````````````````````````````` सूर्य देव एकमात्र ऐसे देव है जो प्रत्यक्ष दिखाई देते है इसलिए सूर्य देव की आराधना घर में पूजा स्थल की जगह बाहर खुले में सूर्य देव के समक्ष करना अधिक फलदायी है । सूर्यदेव आराधना में सूर्यदेव को जल अर्पित करना सबसे अधिक महत्व रखता है। इसे हम सूर्य को अर्घ्य देना कहते है। सूर्यदेव को अर्ध्य देने हेतु सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और जैसे ही सूर्य उदय होता है आप पूर्व दिशा की तरफ मुख करके खड़े हो जाएं। एक ताम्बे के पात्र में जल भरकर इसमें थोड़े चावल, थोड़ी चीनी, पुष्प डाले व कुमकुम द्वारा जल में छींटे लगाएं। अब आप सूर्य देव के सामने खड़े होकर ताम्बे के पात्र द्वारा दोनों हाथों से जल नीचे जमीन पर छोड़ते जाये। ध्यान दें, ताम्बे के पात्र को अपने सीने के सामने रखे और सूर्य देव को जल अर्पित करते हुए पात्र को कंधो से ऊपर तक ले जाने का प्रयास करें। पात्र द्वारा नीचे गिरने वाली जलधारा में सूर्य के प्रतिबिम्ब को देखने का प्रयास करें । सूर्य देव को अर्ध्य देते समय निरंतर सूर्यदेव के इस मंत्र का जप करते रहे : “ ॐ सूर्याय नमः ” । सूर्य देव को अर्घ्य देने के पश्चात् नीचे झुककर जल को स्पर्श करें और अंत में सीधे खड़े होकर हाथ जोड़कर सूर्यदेव को प्रणाम करें । सूर्य देव को जल अर्पित करने का सबसे उत्तम समय सूर्य उदय से लेकर इसके एक घंटे बाद तक होता है। इसलिए इस अवधि में ही सूर्यदेव को अर्ध्य देने का प्रयत्न करें। रविवार का दिन सूर्य देव आराधना के लिए विशेष माना गया है, यदि समय का अभाव रहते आप नियमित सूर्यदेव को अर्घ्य नहीं दे पाते हैं तो रविवार के दिन सूर्य देव को अर्ध्य जरुर दें! ऊं आदित्याय नमः।।🚩 ।। ऊं भास्कराय नमः।।🚩 जय भास्कर देव।।🚩

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