Shyam Yadav Apr 11, 2021

🌞🌼🌞🌼🌞🌼🌞🌼🌞🌼🌞 🌹👣🌹 || *गुरुभक्तियोग कथा अमृत* || 🙏 10/04/2021 🌷 *आचार्य शंकर और कपालियो का प्रसंग....(भाग- 2)* 🌷 गुरूभक्तियोगामृत परमसुख, मुक्ति, संपूर्णता, शाश्वत आनंद और चिरंतन शांति प्रदान करता है। गुरुभक्तियोग का अभ्यास सांसारिक पदार्थों के प्रति निष्क्रियता और वैराग्य उत्पन्न करता है तथा तृष्णा का छेदन करता है एवं कैवल्य मोक्ष देता है। गुरुभक्तियोग का अभ्यास भावनाओं एवं तृष्णाओं पर विजय पाने में शिष्य को सहायरूप बनता है। प्रलोभनों के साथ टक्कर लेने में तथा मन को क्षुब्ध करनेवाले तत्वों का नाश करने में सहाय करता है। अंधकार को पार करके प्रकाश की ओर ले जाने वाली गुरुकृपा प्राप्त करने के लिए शिष्य को योग्य बनाता है । गुरुभक्तियोग का अभ्यास आपको भय, अज्ञान, निराशा, संशय, रोग चिंता आदि से मुक्त होने के लिए शक्तिमान बनाता है और मोक्ष, परम शांति और शाश्वत आनंद प्रदान करता है। गुरुभक्तियोग का अर्थ व व्यक्तिगत भावनाओं, इच्छाओं, समझ, बुद्धि एवं निश्चयात्मक बुद्धि के परिवर्तन द्वारा अहोभाव को अनंत चेतनास्वरूप में परिणित करना। गुरुभक्तियोग गुरुकृपा के द्वारा प्राप्त सचोट, सुंदर अनुशासन का मार्ग है। कर्मयोग, भक्तियोग, हठयोग, राजयोग आदि सब योगों की नींव गुरुभक्तियोग है। गुरुभक्तियोग का अभ्यास जीवन के परम ध्येय की प्राप्ति का मार्ग दिखाता है। कल हमने सुना… राजा सुधनवा द्वारा अपमानित कपालिक क्रकच कुल्हाड़ी नचाते हुए बड़े जोरों से चिल्लाया कि, "हे दुष्टों! यदि तुम्हारे सिरों को काटकर छिन्न-भिन्न न कर दूं, तो मेरा नाम क्रकच नहीं!" इतना कहकर वह वहां से चला गया। थोड़ी ही देर बाद क्रकच ने यतिराज शंकर का विनाश करने के लिए एक विशाल वाहिनी भेजी। वे सब क्रोध में उन्मत्त थे। समुद्र की भांति गर्जन-तर्जन कर रहे थे और विविध प्रकार के हथियारों से लैश थे। उनके भैरवाकार रूप को देखकर आचार्य शंकर के सभी शिष्य और भक्त भयभीत हो गए। राजा सुधनवा कवच पहनकर रथ में सवार हुए। उन्होंने हाथ में धनुषबाण लेकर कपालिकों का संहार करना शुरू किया। यह संग्राम चल ही रहा था कि क्रकच ने एक विशाल वाहिनी पीछे की ओर से और भेज दी। क्रकच का मंतव्य था कि पीछे की ओर से आचार्य शंकर के शिष्यों और भक्तों को घेरकर मार डाला जाए। सामने की ओर राजा सुधनवा युद्ध कर रहे हैं और पीछे की ओर से अचानक आक्रमण हुआ कपालिकों द्वारा! शिष्य और भक्तगण अत्यधिक भयार्थ होकर अपने गुरुदेव आचार्य शंकर की शरण में पहुंचे। बड़ी ही विचित्र घटना है कि आचार्य शंकर एक यति हैं, संन्यासी हैं। ना ही उन्होंने कोई युद्ध कला सीखी है और ना ही उनके पास कोई आयुध है फिर भी समस्त शिष्यगण अपने गुरुदेव के पास आ गए, उनकी शरण में आ गए। ऐसे महापुरुष कभी-कभी तो स्वयं पर आए हुए आघातों को बड़ी ही प्रसन्नता से सह लेते हैं; परंतु शरणागतों पर किये हुए आघातों को यह महापुरुष कदापि सहन नहीं करते। कपालिक तलवार, तोमर, पट्टीश, त्रिशूल आदि से शंकर के भक्तों का संहार करने आए थे। वे बार-बार भीषण अट्टहास कर रहे थे। कपालिकों की सेना जो आचार्य के समक्ष खड़ी हुई थी। कहते हैं कि वह आचार्य के तेज से जलकर भस्म हो गई! परंतु यह शाब्दिक अर्थ है, शाब्दिक कहावत है। इसका अभिप्राय यह है कि आचार्य के ब्रह्मतेज में सभी के वैर वृत्तियां या वैरभाव नष्ट हो गए और वे सभी आचार्य की ओर एकटक निहारते ही रह गए। मानो दुर्भाव जलकर भस्म हो गया हो और उनका तन-मन शुद्ध हो गया। ऐसा ब्रह्मतेज! राजा सुधनवा ने भी स्वर्णपंख वाले तीक्ष्ण बाणों से अगणित कपालिकों के सिर काटे। यहां पर राजा सुधनवा के पास गुरुदेव का बल था। गुरुदेव का बल जिसके साथ होता है उसके समक्ष सब बल स्वयं को निर्बल महसूस करते हैं। इसलिए वेद मंत्र है *ब्रह्म बलं ही बलं!* उन्होंने विपक्षियों के सहस्त्र समुदाय मस्तकरूपी कमलों से रणभूमि को अलंकृत किया। फिर प्रसन्न मन से वे मुनींद्र शंकर के समक्ष उपस्थित हुए। अपने अनुयायियों को मृतक और कुछ अनुयायियों को आचार्य शंकर के समक्ष निष्क्रिय खड़ा देखकर और आचार्य शंकर के शिष्यों और भक्तों को सुरक्षित देखकर क्रकच क्रोध से आगबबूला हो गया! उसी अवस्था में वह यतिंद्र शंकर के समक्ष उपस्थित होकर कहने लगा कि "हे नास्तिक! अब मेरी शक्ति का प्रभाव देखो। तुमने जो दुष्कर्म किए हैं उनका फल भोगो। इतना कहकर वह हाथ में मनुष्य की खोपड़ी लेकर, आंख मूंदकर ध्यान मुद्रा में खड़ा हो गया। वह भैरवतंत्र का प्रकांड पंडित था ।उसकी इस क्रिया के प्रभाव से रिक्त खोपड़ी मदिरा से भर गई। उसने वह मदिरा आधी पी ली और वह पुनः ध्यान मुद्रा में स्थित हो गया। इतने ही में क्रकच के सन्मुख नरमुंडो की माला पहने, हाथ में त्रिशूल लिए, विकट अट्टहास और दर्शन करते हुए, आग की लपट के समान लाल-लाल जटाओं वाले भगवान भैरव प्रकट हो गए। क्रकच ने अपने इष्टदेव को देखकर प्रसन्न भाव से प्रार्थना किया कि " हे भगवन! आपके भक्तों से द्रोह रखनेवाले इस ढोंगी शंकर को अपनी दृष्टि मात्र से भस्म कर दीजिए!" क्रकच की प्रार्थना सुनकर भगवान भैरव ने उत्तर दिया,"अरे दुष्ट! शंकर तो मेरे ही अवतार हैं! मेरे ही निजरूप हैं! इनका वध करके क्या मैं अपना ही वध करूं? क्या तुम मेरे शरीर से द्रोह करते हो? ऐसा कहकर भगवान भैरव ने क्रोध से क्रकच का सिर अपने त्रिशूल से काट दिया।" कपालिकों के राजा की मृत्यु के बाद आचार्य शंकर ने बचे हुए कपालिकों के विषय में विचार किया। परंतु इन बचे हुए कपालिकों को स्वयं उपदेश नहीं दिया; क्योंकि कपालिकों की श्रद्धा अपने भगवान भैरव में थी, क्योंकि वही उनके आराध्य देव है। अतः शंकर ने समयानुकूल वातावरण समझकर भगवान भैरव से ही प्रार्थना किया कि "आप ही हमें और हमारे शिष्यों को कुछ अपने श्री वचनों से संबोधित कीजिए।" भगवान भैरव ने कहा,"हे शंकर! आप सदैव पूजनीय है! वेदों में समस्त रहस्यों के ज्ञाता है! धर्मविहीन, वेदविरोधी ब्राह्मणों को दंड देने के लिए आप भूमंडल पर अवतरित हुए हैं। जो आपका कार्य है, वही मेरा भी कार्य है। वास्तव में जो सद्गुरु का कार्य होता है, वही समष्टि में व्याप्त ईश्वरीय सत्ता का कार्य होता है। इन क्रूर कपालिकों को सनातन धर्म में निरत कीजिए। कलयुग के प्रभाव से इनकी बुद्धि धर्मविहीन हो गई है। मैं तो मंत्रबद्ध होकर यहां प्रकट हुआ हूं। धर्म के आचरण से प्रकट नहीं हुआ।" ऐसा कहकर भगवान भैरव अंतर्ध्यान हो गए। भगवान भैरव के वचन सुनकर शेष कपालिक अत्यंत भयभीत हो गए और उन्होंने आचार्य शंकर की शरण लेकर वेदविरुद्ध कपालिक मत का परित्याग कर दिया। यतिराज शंकर के आदेशानुसार वे सनातन धर्म में दीक्षित हो गए इस प्रकार आचार्य शंकर ने कपालिकों के विशालगढ़ को ध्वस्त कर वैदिक धर्म की पुनर्प्रतिष्ठा की। 🌿🙏👣🙏🌿🌿🙏👣🙏🌿🙏

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Shyam Yadav Apr 11, 2021

. ।। 🕉 ।। 🚩🌞 *सुप्रभातम्* 🌞🚩 📜««« *आज का पञ्चांग* »»»📜 कलियुगाब्द.........................5122 विक्रम संवत्........................2077 शक संवत्...........................1942 मास.....................................चैत्र पक्ष....................................कृष्ण तिथी.............................अमावस्या दुसरे दिन प्रातः 08.01 पर्यंत पश्चात प्रतिपदा रवि...............................उत्तरायण सूर्योदय............प्रातः 06.10.43 पर सूर्यास्त............संध्या 06.46.18 पर सूर्य राशि..............................मीन चन्द्र राशि.............................मीन गुरु राशि.............................कुम्भ नक्षत्र........................उत्तराभाद्रपद प्रातः 08.48 पर्यंत पश्चात रेवती योग.....................................इंद्र दोप 01.44 पर्यंत पश्चात वैधृति करण.............................चतुष्पद संध्या 07.02 पर्यंत पश्चात नाग ऋतु.................................बसंत दिन...............................रविवार 🇬🇧 *आंग्ल मतानुसार :-* 11 अप्रैल सन 2021 ईस्वी । ☸ शुभ अंक..........................2 🔯 शुभ रंग.........................लाल ⚜️ *अभिजीत मुहूर्त :-* दोप 12.02 से 12.52 तक । 👁‍🗨 *राहुकाल :-* संध्या 05.08 से 06.42 तक । 🌞 *उदय लग्न मुहूर्त :-* *मीन* 04:50:21 06:20:02 *मेष* 06:20:02 08:02:13 *वृषभ* 08:02:13 10:00:51 *मिथुन* 10:00:51 12:14:32 *कर्क* 12:14:32 14:30:42 *सिंह* 14:30:42 16:42:31 *कन्या* 16:42:31 18:53:11 *तुला* 18:53:11 21:07:48 *वृश्चिक* 21:07:48 23:23:59 *धनु* 23:23:59 25:29:37 *मकर* 25:29:37 27:16:45 *कुम्भ* 27:16:45 28:50:21 🚦 *दिशाशूल :-* पश्चिमदिशा - यदि आवश्यक हो तो दलिया, घी या पान का सेवनकर यात्रा प्रारंभ करें । ✡ *चौघडिया :-* प्रात: 07.46 से 09.20 तक चंचल प्रात: 09.20 से 10.53 तक लाभ प्रात: 10.53 से 12.27 तक अमृत दोप. 02.00 से 03.34 तक शुभ सायं 06.41 से 08.07 तक शुभ संध्या 08.07 से 09.33 तक अमृत रात्रि 09.33 से 11.00 तक चंचल । 📿 *आज का मंत्रः* ॥ ॐ रवये नम:॥  *संस्कृत सुभाषितानि :-* पाषाणो भिध्यते टंके वज्रः वज्रेण भिध्यते । सर्पोऽपि भिध्यते मन्त्रै र्दुष्टात्मा नैव भिध्यते ॥ अर्थात :- पाषाण टंक से, वज्र वज्रसे, साप मंत्रसे भेदा जाता है, लेकिन दुष्ट मानव किसी से भी नहीं भेदा जाता । 🍃 *आरोग्यं सलाह :-* *हृदय रोग के लिए प्राणायाम -* *2. अनुलोम विलोम प्राणायाम -* अनुलोम विलोम प्राणायाम दिमाग शांत करता है। यह उच्च रक्तचाप कम करता है, जो दिल की समस्याओं का कारण बनता है। इसके अलावा यह तनाव, अवसाद और चिंता को दूर करने में भी लाभकारी है। रक्त प्रवाह को बढ़ाने और दिल के दौरे को रोकने में मदद करता है। इस प्राणायाम में, आपको हाथ के अंगूठे के साथ दाएं नाक को बंद करना होगा और बाएं नाक के माध्यम से गहराई से श्वास लेना होगा। अब बाएं नाक को बंद करें और दाएं नाक से श्वास को बाहर निकालें। इस तरह आपको इस चक्र को दोहराना होगा। ⚜ *आज का राशिफल :-* 🐐 *राशि फलादेश मेष :-* *(चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)* सही काम का भी विरोध होगा। कोई पुरानी व्याधि परेशानी का कारण बनेगी। कोई बड़ी समस्या बनी रहेगी। चिंता तथा तनाव रहेंगे। नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। सामाजिक कार्य करने के प्रति रुझान रहेगा। मान-सम्मान मिलेगा। रुके कार्यों में गति आएगी। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में चैन बना रहेगा। 🐂 *राशि फलादेश वृष :-* *(ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)* धर्म-कर्म में रुचि रहेगी। कोर्ट व कचहरी के कार्य मनोनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। चोट व रोग से बचें। सेहत का ध्यान रखें। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। झंझटों में न पड़ें। व्यापार-व्यवसाय में वृद्धि होगी। नौकरी में मातहतों का सहयोग मिलेगा। निवेश शुभ रहेगा। परिवार में प्रसन्नता रहेगी। 👫🏻 *राशि फलादेश मिथुन :-* *(का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)* शत्रुभय रहेगा। जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। विवाद से क्लेश होगा। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। ऐश्वर्य के साधनों पर सोच-समझकर खर्च करें। कोई ऐसा कार्य न करें जिससे कि बाद में पछताना पड़े। दूसरे अधिक अपेक्षा करेंगे। नकारात्मकता हावी रहेगी। 🦀 *राशि फलादेश कर्क :-* *(ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)* प्रतिद्वंद्विता कम होगी। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। बात बिगड़ सकती है। शत्रुभय रहेगा। कोर्ट व कचहरी के काम मनोनुकूल रहेंगे। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। स्त्री वर्ग से सहायता प्राप्त होगी। नौकरी व निवेश में इच्छा पूरी होने की संभावना है। 🦁 *राशि फलादेश सिंह :-* *(मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)* भूमि व भवन संबंधी खरीद-फरोख्त की योजना बनेगी। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। आर्थिक उन्नति होगी। संचित कोष में वृद्धि होगी। देनदारी कम होगी। नौकरी में मनोनुकूल स्थिति बनेगी। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। शेयर मार्केट आदि से बड़ा फायदा हो सकता है। परिवार की चिंता बनी रहेगी। 🙎🏻‍♀️ *राशि फलादेश कन्या :-* *(ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)* शारीरिक कष्ट संभव है। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। किसी आनंदोत्सव में भाग लेने का अवसर प्राप्त होगा। यात्रा मनोरंजक रहेगी। स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। किसी प्रभावशाली व्यक्ति मार्गदर्शन प्राप्त होगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। झंझटों में न पड़ें। ⚖ *राशि फलादेश तुला :-* *(रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)* शत्रुओं का पराभव होगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। दु:खद समाचार मिल सकता है। व्यर्थ भागदौड़ रहेगी। काम पर ध्यान नहीं दे पाएंगे। बेवजह किसी व्यक्ति से कहासुनी हो सकती है। प्रयास अधिक करना पड़ेंगे। दूसरों के बहकावे में न आएं। फालतू बातों पर ध्यान न दें। लाभ में वृद्धि होगी। 🦂 *राशि फलादेश वृश्चिक :-* *(तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)* पुराना रोग परेशानी का कारण बन सकता है। जल्दबाजी न करें। आवश्यक वस्तुएं गुम हो सकती हैं। चिंता तथा तनाव रहेंगे। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। भेंट व उपहार देना पड़ सकता है। प्रयास सफल रहेंगे। कार्य की बाधा दूर होगी। निवेश शुभ रहेगा। व्यापार में वृद्धि तथा सम्मान में वृद्धि होगी। 🏹 *राशि फलादेश धनु :-* *(ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)* किसी भी तरह के विवाद में पड़ने से बचें। जल्दबाजी से हानि होगी। राजभय रहेगा। दूर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। घर में मेहमानों का आगमन होगा। व्यय होगा। सही काम का भी विरोध हो सकता है। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। निवेश शुभ रहेगा। सट्टे व लॉटरी के चक्कर में न पड़ें। 🐊 *राशि फलादेश मकर :-* *(भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)* कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर करें। किसी अनहोनी की आशंका रहेगी। शारीरिक कष्ट संभव है। लेन-देन में लापरवाही न करें। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल चलेगा। शेयर मार्केट से बड़ा लाभ हो सकता है। 🏺 *राशि फलादेश कुंभ :-* *(गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)* मस्तिष्क पीड़ा हो सकती है। आवश्यक वस्तु गुम हो सकती है या समय पर नहीं मिलेगी। पुराना रोग उभर सकता है। दूसरों के झगड़ों में न पड़ें। हल्की हंसी-मजाक करने से बचें। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। चिंता रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। यश बढ़ेगा। 🐋 *राशि फलादेश मीन :-* *(दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)* बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। विवेक से कार्य करें। लाभ में वृद्धि होगी। फालतू की बातों पर ध्यान न दें। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में उन्नति होगी। व्यापार-व्यवसाय की गति बढ़ेगी। चिंता रह सकती है। थकान रहेगी। प्रमाद न करें। ☯ *आज का दिन सभी के लिए मंगलमय हो ।* ।। 🐚 *शुभम भवतु* 🐚 ।। 🇮🇳🇮🇳 *भारत माता की जय* 🚩🚩

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Shyam Yadav Apr 9, 2021

🌞🌼🌞🌼🌞🌼🌞🌼🌞🌼🌞 🌹👣🌹 || *गुरुभक्तियोग कथा अमृत* || 🙏 09/04/2021 🌷 *आचार्य शंकर और कपालियो का प्रसंग....(भाग- 1)* 🌷 गुरूभक्तियोग का अभ्यास माने गुरु के प्रति शुद्ध, उत्कट प्रेम! ईमानदारी के सिवाय गुरुभक्ति में बिल्कुल प्रगति नहीं हो सकती। महान योगी गुरु के आश्रय में उच्च आध्यात्मिक स्पंदनोंवाले शांत स्थान में मिलते है। फिर उनकी निगरानी में गुरु भक्ति योग का अभ्यास करो तभी आपको गुरुभक्तियोग में सफलता मिलेगी। ब्रह्मनिष्ठ गुरु के चरणकमलों में बिनशर्ति आत्मसमर्पण करना ही गुरुभक्तियोग का मुख्य सिद्धांत है। गुरु के प्रति संपूर्ण आत्मसमर्पण करना यह गुरुभक्तियोग का सर्वोच्च सोपान है। गुरूभक्तियोग के अभ्यास में गुरुसेवा सर्वोच्च है। गुरुकृपा गुरुभक्तियोग का आखिरी ध्येय है। मोटी बुद्धि का शिष्य गुरुभक्तियोग के अभ्यास में कोई निश्चित प्रगति नहीं कर सकता। जो शिष्य गुरुभक्तियोग का अभ्यास करना चाहता है उसके लिए कुसंग शत्रु के समान है। अगर आपको गुरुभक्तियोग का अभ्यास करना हो तो विषयी जीवन का त्याग करो। जो व्यक्ति दु:ख को पार करके जीवन में सुख एवं आनंद प्राप्त करना चाहता है उसे अंतःकरण पूर्वक गुरुभक्तियोग का अभ्यास करना जरूरी है। ब्रह्मसूत्र, उपनिषदों और श्रीमद्भगवद्गीता पर भाष्य लिखना, श्रृंगेरी मठ का संस्थापन तथा अपने शिष्यों के द्वारा वेदांत ग्रंथों की रचना कराना आचार्य शंकर के महत्वपूर्ण कार्य थे। उन्होंने यह विचार किया की जनजागरण के लिए इतना ही पर्याप्त नहीं है। जिन तीर्थों में वैदिक धर्म की परंपरा की शुद्धता से निर्वाह किया जाता था वे मद्य, मांस ,मीन,मुद्रा और मैथुन के केंद्रस्थल बन गए थे। सात्विकता के स्थान पर घोर तमोगुण व्याप्त हो गया था। आचार्य ने तीर्थों में जाकर तमोगुण व्यक्तियों का खंडन कर वेदांत मत का पावन पथ प्रदर्शित किया। उन्होंने वेद विरोधियों का खंडन कर सर्वत्र अद्वैत वेदांत की जयंती फहराई। उनकी इस प्रचार यात्रा में उनके अनन्य भक्त,शिष्यों का बहुत सा समुदाय जुड़ गया। साथ ही साथ वैदिक धर्म के परम पोषक व हितैषी राजा सुधनवा भी आकस्मिक आपत्तियों से बचाने के लिए इस मंडली के साथ साथ चलते थे रक्षक के रूप में। यह मंडली भारत के प्रमुख तीर्थों और धार्मिक क्षेत्रों में पर्यटन करती। आवश्यकतानुसार कुछ समय वहां रहती। आचार्य वेद विरोधियों मतों के दिग्गजों से शास्त्रार्थ करने और अपने अकाट्य तर्कों और प्रबल युक्तियों से उन्हें पराजित कर वैदिक धर्म और वेदांत मत को स्वीकार करने के लिए बाध्य कर देते थे। आचार्य का यह तीर्थ भ्रमण दिग्विजय के नाम से प्रसिद्ध हुआ। तदनंतर विदर्भ की राजधानी में पहुंच विदर्भ के राजा नेे यतिराज शंकर और उनके शिष्यों का भव्य स्वागत कर उनका विधिवत पूजन किया। वहां पर भैरव मतानुयायी की संख्या बहुत अधिक थी। पद्मपाद आदि शिष्यों द्वारा शंकर ने उन्हें शास्त्रार्थ में पराजित कराकर वैदिक धर्मावलंबी बनाया। अब आचार्य कर्नाटक जाने को उदयुत हुये। यह खबर सुनते ही विदर्भ के राजा ने आचार्य के कर्नाटक जाने के विचार का विरोध करते हुए उनसे प्रार्थना किया कि "भगवंत! कर्नाटक का कपालियों का गढ़ है और आपके द्वारा पहले ही एक कपाली का संहार हो चुका है। आपका वहां जाना उचित नहीं है। आपके ही एक शिष्य ने मैंने सुना है कि कपाली उग्रभैरव का शिरोच्छेद कर दिया था।इसलिए वहां जाना उचित नहीं। वे घनघोर वेद विरोधी हैं और अग्नि में मनुष्यों की आहुति देते हैं। उनकी वीभत्स व भयावह साधना प्रणाली मानवता के लिए अभिशाप है। अत:हे प्रभु! आप वहां न जाइये।" विदर्भ नरेश की बात सुनकर राजा सुधनवा ने उत्तेजित होकर कहा, "विदर्भ नरेश! आप चिंतित ना हो। मैं आचार्य के साथ-साथ चल रहा हूं और इसीलिए तो चल रहा हूं कि मैं इनकी रक्षा कर सकूं। जब तक मेरे हाथ में धनुषबाण है, तलवार हैं तब तक नृशंस कपालिक आचार्य का बाल भी बांका ना कर सकेंगे। मेरे ऐसे वैदिक धर्म के पोषक के रहते हुए उन करोड़ों की एक भी ना चल पाएगी। अतः आप आश्वस्त रहें। किसी प्रकार का भय ना माने।" आचार्य शंकर ने कपालिको के वीभत्स मत के खंडन के निमित्त शिष्यों सहित कर्नाटक में प्रवेश किया।उस प्रदेश में कपालिकों के सरदार का क्रकच का बोलबाला था। उसका आतंक सब जगह फैला हुआ था। जब क्रकच को पता चला कि आचार्य शंकर ने मेरे राज्य में प्रवेश किया है, तो वह आगबबूला हो गया। क्योंकि इसको खबर थी इनके शिष्य द्वारा कपाली महाभैरव का शिरोच्छेद किया गया था अब कपालिकों का राजा क्रकच अत्यंत क्रोधित होकर गरजकर कहने लग गया कि "उस यति की इतनी हिम्मत कि हमारे ही समुदाय के व्यक्ति की हत्या करके हमारे ही राज्य में घुसा चला आ रहा है और हमारे ही लोगों का धर्म परिवर्तन करना चाहता है। परंतु संभवत: उस सन्यासी को ज्ञात नहीं कि मैं वह भावुक कपाली उग्रभैरव नही हूं । मैं कपालिको का राजा हूं, क्रकच हूं ।" वह शंकर का विरोध करने के लिए कटिबद्ध हो गया। शरीर में श्मशान भस्म लपेटे, एक हाथ में मनुष्य की खोपड़ी लिए और दूसरे हाथ में त्रिशूल उठाएं अनाप-शनाप बड़बड़ाते हुए भयंकर रूप में आचार्य शंकर से मिलने के लिए चल पड़ा और उसी की तरह वेशभूषा में उसके पीछे-पीछे अनेक अगणित अनुयाई भी चल रहे थे। मदिरा की मस्ती में झूमता हुआ, लाल-लाल आंखें नचाता हुआ वह आचार्य के खेमे के पास पहुंचा। कपालिको को देखकर अंगरक्षकों ने उन्हें बाहर ही रोकने का प्रयास किया; परंतु मद्रासी कपालिक क्रकच ने अपनी भयंकर लाल आंखों को दिखाते हुए अंगरक्षकों को एक ओर धकेल दिया और सीधे आचार्य शंकर के समक्ष जा खड़ा हुआ। वहीं पर मिट्टी का घड़ा रखा हुआ था जल से भरा हुआ आचार्य शंकर के पास। मिट्टी के घड़े को देखकर क्रकच ने कहना शुरू किया कि "आचार्य! इस भस्म का धारण करना तो बिल्कुल ठीक है; परंतु पवित्र नरमुंड को छोड़कर इस मिट्टी के गंदे पात्र को क्यों रखा है तुमने! तुम कपाली अर्थात महाभैरव शिव की उपासना क्यों नहीं करते। रक्त से परिपूर्ण नरमुंडरूपी कमलों से और मदिरा से कपाली भगवान की उपासना किए बिना तथा मृगनयनी सुंदरी के आलिंगन किए बिना भला कोई मनुष्य आनंद पा सकता है!" क्रकच की बातें सुनकर राजा सुधनवा अत्यधिक क्रुद्ध होकर बोले, "नराधम! कापुरुष! यहां से बाहर निकलो!"ऐसा कहकर राजा ने अपने कर्मचारियों से उसे जबरदस्ती बाहर निकलवा दिया। कपालिकों को राजा क्रकच इस घोर अपमान को न सह सका। क्रोधावेश में उसकी भौएँ तन गई, होठ कांपने लगे। क्रकच अपनी कुल्हाड़ी नचाते हुए बड़े जोर से चिल्लाया, "हे दुष्टों! यदि तुम्हारे सिरों को काटकर छिन्न-भिन्न ना कर दूं, तो मेरा नाम क्रकच नहीं!" इतना कहकर वह वहां से चला गया। 🌿🙏👣🙏🌿🌿🙏👣🙏🌿🙏

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Shyam Yadav Apr 7, 2021

*🚩विश्व स्वास्थ्य दिवस पर जान लीजिए आजीवन स्वस्थ रहने के नियम* 07 अप्रैल 2021 azaadbharat.org *🚩आजकल पाये जाने वाले अधिकांश रोगों का कारण अस्त-व्यस्त दिनचर्या व विपरीत आहार ही है। हम अपनी दिनचर्या शरीर की जैविक घड़ी के अनुरूप बनाये रखें तो शरीर के विभिन्न अंगों की सक्रियता का हमें अनायास ही लाभ मिलेगा। इस प्रकार थोड़ी-सी सजगता हमें स्वस्थ जीवन की प्राप्ति करा देगी।* *🚩जैविक घड़ी पर आधारित शरीर की दिनचर्या ऐसे बनाएं...* *★ प्रातः 3 से 5 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से फेफड़ो में होती है। थोड़ा गुनगुना पानी पीकर खुली हवा में घूमना एवं प्राणायाम करना चाहिए । इस समय दीर्घ श्वसन करने से फेफड़ों की कार्यक्षमता खूब विकसित होती है। उन्हें शुद्ध वायु ( ऑक्सीजन) और ऋण आयन विपुल मात्रा में मिलने से शरीर स्वस्थ व स्फूर्तिमान होता है। ब्रह्म मुहूर्त में उठने वाले लोग बुद्धिमान व उत्साही होते है, और सोते रहनेवालो का जीवन निस्तेज हो जाता है ।* *★ प्रातः 5 से 7 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से आंत में होती है। प्रातः जागरण से लेकर सुबह 7 बजे के बीच मल-त्याग एवं स्नान कर लेना चाहिए । सुबह 7 के बाद जो मल – त्याग करते हैं, उनकी आँतें मल में से त्याज्य द्रवांश का शोषण कर मल को सुखा देती हैं। इससे कब्ज तथा कई अन्य रोग उत्पन्न होते हैं।* *★ सुबह 7 से 9 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से आमाशय में होती है। यह समय भोजन के लिए उपर्युक्त है । इस समय पाचक रस अधिक बनते हैं। भोजन के बीच –बीच में गुनगुना पानी (अनुकूलता अनुसार ) घूँट-घूँट पिये।* *★ सुबह 11 से 1 – इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से हृदय में होती है। दोपहर 12 बजे के आस–पास मध्याह्न – संध्या (आराम ) करने की हमारी संस्कृति में विधान है। इसीलिए भोजन वर्जित है । इस समय तरल पदार्थ ले सकते हैं। जैसे मट्ठा पी सकते हैं। दही खा सकते हैं।* *★ दोपहर 1 से 3 - इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से छोटी आंत में होती है। इसका कार्य आहार से मिले पोषक तत्त्वों का अवशोषण व व्यर्थ पदार्थों को बड़ी आँत की ओर धकेलना है। भोजन के बाद प्यास अनुरूप पानी पीना चाहिए । इस समय भोजन करने अथवा सोने से पोषक आहार-रस के शोषण में अवरोध उत्पन्न होता है व शरीर रोगी तथा दुर्बल हो जाता है ।* *★ दोपहर 3 से 5 - इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से मूत्राशय में होती है । 2-4 घंटे पहले पिये पानी से इस समय मूत्र-त्याग की प्रवृति होती है।* *★ शाम 5 से 7 - इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से गुर्दे में होती है । इस समय हल्का भोजन कर लेना चाहिए । शाम को सूर्यास्त से 40 मिनट पहले भोजन कर लेना उत्तम रहेगा। सूर्यास्त के 10 मिनट पहले से 10 मिनट बाद तक (संध्याकाल) भोजन नही करना चाहिए। शाम को भोजन के तीन घंटे बाद दूध पी सकते हैं । देर रात को किया गया भोजन सुस्ती लाता है यह अनुभवगम्य है।* *★ रात्रि 7 से 9 - इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से मस्तिष्क में होती है । इस समय मस्तिष्क विशेष रूप से सक्रिय रहता है । अतः प्रातःकाल के अलावा इस काल में पढ़ा हुआ पाठ जल्दी याद रह जाता है । आधुनिक अन्वेषण से भी इसकी पुष्टि हुई है।* *★ रात्रि 9 से 11 - इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से रीढ़ की हड्डी में स्थित मेरुरज्जु में होती है। इस समय पीठ के बल या बायीं करवट लेकर विश्राम करने से मेरूरज्जु को प्राप्त शक्ति को ग्रहण करने में मदद मिलती है। इस समय की नींद सर्वाधिक विश्रांति प्रदान करती है । इस समय का जागरण शरीर व बुद्धि को थका देता है । यदि इस समय भोजन किया जाय तो वह सुबह तक जठर में पड़ा रहता है, पचता नहीं और उसके सड़ने से हानिकारक द्रव्य पैदा होते हैं जो अम्ल (एसिड) के साथ आँतों में जाने से रोग उत्पन्न करते हैं। इसलिए इस समय भोजन करना खतरनाक है।* *★ रात्रि 11 से 1 - इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से पित्ताशय में होती है । इस समय का जागरण पित्त-विकार, अनिद्रा , नेत्ररोग उत्पन्न करता है व बुढ़ापा जल्दी लाता है । इस समय नई कोशिकाएं बनती हैं ।* *★ रात्रि 1 से 3 - इस समय जीवनीशक्ति विशेष रूप से लीवर में होती है । अन्न का सूक्ष्म पाचन करना यह यकृत का कार्य है। इस समय का जागरण यकृत (लीवर) व पाचन-तंत्र को बिगाड़ देता है । इस समय यदि जागते रहे तो शरीर नींद के वशीभूत होने लगता हैं, दृष्टि मंद होती है और शरीर की प्रतिक्रियाएं मंद होती हैं। अतः इस समय सड़क दुर्घटनाएँ अधिक होती हैं।* *🚩नोट :-- ऋषियों व आयुर्वेदाचार्यों ने बिना भूख लगे भोजन करना वर्जित बताया है। अतः प्रातः एवं शाम के भोजन की मात्रा ऐसी रखे, जिससे ऊपर बताए भोजन के समय में खुलकर भूख लगे। जमीन पर कुछ बिछाकर सुखासन में बैठकर ही भोजन करें। इस आसन में मूलाधार चक्र सक्रिय होने से जठराग्नि प्रदीप्त रहती है। कुर्सी पर बैठकर भोजन करने में पाचनशक्ति कमजोर तथा खड़े होकर भोजन करने से तो बिल्कुल नहींवत् हो जाती है। इसलिए ʹबुफे डिनरʹ से बचना चाहिए।* *🚩पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का लाभ लेने हेतु सिर पूर्व या दक्षिण दिशा में करके ही सोयें, अन्यथा अनिद्रा जैसी तकलीफें होती हैं।* *🚩शरीर की जैविक घड़ी को ठीक ढंग से चलाने हेतु रात्रि को बत्ती बंद करके सोयें। इस संदर्भ में हुए शोध चौंकाने वाले हैं। देर रात तक कार्य या अध्ययन करने से और बत्ती चालू रख के सोने से जैविक घड़ी निष्क्रिय होकर भयंकर स्वास्थ्य-संबंधी हानियाँ होती हैं। अँधेरे में अथवा कम प्रकाश में सोने से यह जैविक घड़ी ठीक ढंग से चलती है।* *🚩आप अपना जीवन नियमित बनाएं और स्वस्थ रहें।* 🚩

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Shyam Yadav Apr 7, 2021

🌞🌼🌞🌼🌞🌼🌞🌼🌞🌼🌞 🌹👣🌹 || *गुरुभक्तियोग कथा अमृत* || 🙏 07/04/2021 *◆आचार्य शंकर के शिष्य पद्मपाद की तीर्थ यात्रा प्रसंग....(भाग- 10)* *ब्रम्ह निष्ठ गुरु के चरण कमलों में बिन शर्ती आत्म समर्पण करना ही गुरुभक्तियोग का मुख्य सिद्धांत है।* गुरु भक्ति योग के अभ्यास में गुरु सेवा सर्वस्व है। जीवन का ध्येय गुरु की सेवा करने का बनाओ, सद्गुरु का हृदय सौंदर्य का धाम है।गुरु की आज्ञा का अतिक्रमण करना खुद अपनी कब्र खोदने के बराबर है। सद्गुरु शिष्य पर सतत् आशिर्वाद बरसाते हैं, आत्मसाक्षात्कारी गुरु जगत् गुरु हैं,परम गुरु हैं। गुरु का आश्रय लो और सत्य का अनुशरण करो, आत्मवेत्ता गुरु के संघ के प्रभाव से आपका जीवन संग्राम सरल बन जायेगा। जिसने सद्गुरु के दर्शन नहीं किए वह मनुष्य अंधा ही है,गुरु के दर्शन करना ईश्वर के दर्शन करने के बराबर है। ईश्वर कृपा गुरु का स्वरूप धारण करती है। आत्मसाक्षात्कार के मंदिर में गुरु का सत्संग प्रथम स्तंभ है,गुरु के प्रति शुद्ध प्रेम यह गुरु आज्ञा पालन का सच्चा स्वरूप है। कल हमने सुना की आचार्य शंकर शिष्यों को उपदेश कर रहें हैं, भक्ति ज्ञान संयुक्त उपदेश की हे जगदीश! आपकी माया अनिर्वचनीय है,वह न सत् कही जा सकती है और न असत् इसी से आप जड़-चेतन की सृष्टि करतें हैं,आप तो आप्तकाम है, हे प्रभु! आप अकेले होकर भी विविध रुप धारण कर सृष्टि परंपरा का संचालन कर रहें हैं। 'अज्' अर्थात ब्रम्हा के रूप में रजोगुण का आश्रय लेकर सृष्टि की रचना कर रहें हैं। विष्णु बनकर सत्वगुण के सहारे जगत् का पालन पोषण कर रहें हैं,और हर का स्वरूप धारण कर तमोगुण से सृष्टि के संहार में निरत हैं। हे प्रभु आप एक होकर भी ब्रह्मा विष्णु और शिव के नाना रूपों में बरत रहे हैं। जिस प्रकार यह विविध घटों में प्रतिबिंबित होकर प्रतिमान हो रहा है। उसी प्रकार आप भी एक अद्वितीय अखंड होकर विविध शरीरों में विविध रूप धारण कर प्रकाशित हो रहे हैं। इस प्रकार आचार्य शिष्यों को भक्ति और ज्ञान संयुक्त उपदेश कर रहे थे। कि इतने में समस्त शिष्य गण पद्मपाद सहित आकर उस सभा में सबसे पीछे बैठ गए, और सत्संग पूरा होते ही पद्मपाद व समस्त शिष्य गण आकर आचार्य शंकर के चरण कमलों में श्रद्धा भक्ति पूर्वक नमित हो गये। पद्मपाद को आचार्य शंकर ने निहारा गुरु और शिष्य की दृष्टि अब एकमिक हो गई। पद्मपाद तुम लौट आए, चलो अच्छा हुआ मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं। मुझे इस बात का हर्ष है। कि तुम वापस आ गए। कहो पद्मपाद! यात्रा में सब कुशल तो रहा न..। गुरुदेव के बस इतना कहते ही पद्मपाद दोनों हाथ जोड़े हुए जोर से चीखते हुए आचार्य शंकर के चरणों में लिपट गए। सभा स्तब्ध सी रह गई आचार्य शंकर भी कुछ क्षणों के लिए कुछ बोल ना सके ना ही कोई प्रतिक्रिया दे सके, सभी जन मात्र पद्मपाद की सिसकियों को ही सुनने में मग्न हो गए। जी हां पद्म पाद की दर्दीली सिसकियों को सुनकर समस्त सभा मगन हो गई। यहां पर मग्न शब्द का प्रयोग किया गया। क्योंकि यह सभा गुरु शिष्य की है। जब भी शिष्य अपने गुरु के समक्ष या गुरुदेव के निमित्त रुदन करता है, सिसकियां भरता है तो शिष्य की आंखों से तो मात्र अश्रु बरसते हैं। परंतु शिष्य की बरसती हुई आंखों को देख कर करुणा के श्री विग्रह गुरुदेव का हृदय बरसने लगता है। और उसी करुणा के प्रसाद में सभी शिष्य भी तृप्ति का अनुभव कर मग्न हो जाते हैं। इसलिए यहां कहां गया कि पद्म पाद की सिसकियों को सुनकर सभी मगन हो गए। पद्मपाद के आंसू बरस रहे हैं। और आचार्य शंकर का हृदय बरस रहा है। कुछ क्षणों के उपरांत आचार्य शंकर ने पद्मपाद को अपने कर कमलों से ऐसे ही पकड़कर उठाया जैसे पद्म द्वारा मधुप संभाला जाता है। मधु अर्थात भंवरा, क्या हुआ पद्मपाद क्या मेरा विछोह तुम्हें इतना अखरा इसलिए रो रहे हो ? पद्मपाद तब तक एक भी शब्द नहीं बोल पाए थे। परंतु अब पद्म पाद लड़खड़ाती अपनी दिन वाणी में अपना दुखड़ा रोना प्रारंभ किया। पद्मपाद की वाचा इतनी लड़खड़ा रही थी। मानो उनके मुख में कोई लकवा का आघात हो गया हो। बोलते समय पद्मपाद की मुख से लार टपकता अब यह घटना पूर्वक गुरुदेव से कहने लग गए, कि गुरुदेव ! तीर्थ यात्रा करते समय जब मैं भगवान रंग नाथ का दर्शन कर लौट रहा था। तो मार्ग में मेरे पूर्व आश्रम के मामा मिल गए पूर्व आश्रम मतलब गृहस्थ आश्रम आदर और स्नेह पूर्वक वह मुझे अपने घर ले गए। वे भेदवादी में विमांसक है। वे बड़े ही विद्वान और विमान सुख सिद्धांत के नाते माने जाते हैं। पूर्व आश्रम का संबंध स्मरण कर उनके आग्रह को स्वीकार कर उनके घर चला गया। उन्होंने मेरा आतिथ्य स्वीकार किया। बातचीत में आपके टिका का प्रसंग आया। मैंने अपने भाष्य की टीका उन्हें दिखलाई उन्होंने मेरी कृति पर अनेक आशंकाएं प्रकट की आरक्षित किया। मैंने आपकी युक्तियों और तर्कों का सहारा लेकर उनकी सारी शंकाओं का समाधान करके उनकी अक्षय को का प्रमाण सहित मुंहतोड़ उत्तर दिया। वे चुप हो गए परंतु भीतर से वे मेरी कृति पर अत्यधिक रुष्ट हो गए। उनका व्यवहार ज्यों का त्यों बना रहा उन्होंने मेरी कृति विद्वत्ता और पांडित्य की भूरी भूरी प्रशंसा की। मैं अदूरदर्शी व्यक्ति, यहां पद्मपाद ने अपने लिए अदूरदर्शी शब्द का प्रयोग किया है वास्तव में बड़ा ही सटीक शब्द है ऐसे शिष्यों के लिए जो गुरुदेव की आज्ञाओं की अवहेलना कर देते हैं। पद्मपाद कहते हैं। कि मैं अदूरदर्शी व्यक्ति उनकी बातों में आ गया अतः जब मैं जब रामेश्वरम की यात्रा पर जाने लगा तो सुरक्षा के लिए अपनी कृति उन्हें सौंप दी। मेरे कृति के प्रति मामा के मन में बहुत दुरभाव आ गया था। अतः उन्होंने अवसर पाकर स्वयं अपने घर मे आग लगा दी। आग अत्यंत प्रचंड थी उसी अग्नि में मेरी अनमोल रचना भी स्वाहा हो गई। तीर्थ यात्रा से लौट आने पर उन्होंने इसके लिए ऊपरी और बनावटी भावों से अत्यधिक खेद प्रकट किया परंतु वहां के आसपास के लोगों ने मुझे बताया कि आपके ग्रंथ को नष्ट करने के लिए मामा ने जानबूझकर अपने ही हाथों से अपने ही घर में आग लगा दी। मैंने उसे पुनः लिखने का प्रयत्न किया परंतु मामा ने भोजन मे विष खिलाकर मेरी बुद्धि विकृत कर दी उन्हें यह पूरा भय था कि यदि सानंदन अपनी कृति पुनः लिख लेगा तो मीमांसा के कर्म कांड का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। गुरुदेव! विष का प्रभाव अब तक मेरे ऊपर है। क्योंकि मेरे मस्तिष्क पहले की भांति निर्मल और सशक्त नहीं रह गया है। हे स्वामी! आपकी आज्ञा का उल्लंघन करने का यह अभिशाप लगा....। 🌿🙏👣🙏🌿🌿🙏👣🙏🌿🙏

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Shyam Yadav Apr 7, 2021

. *।। ॐ ।।* 🚩🌞 *सुप्रभातम्* 🌞🚩 📜««« *आज का पंचांग* »»»📜 कलियुगाब्द.......................5122 विक्रम संवत्......................2077 शक संवत्.........................1942 मास....................................चैत्र पक्ष...................................कृष्ण तिथी.............................एकादशी रात्रि 02.31 पर्यंत पश्चात द्वादशी रवि..............................उत्तरायण सूर्योदय...........प्रातः 06.14.41 पर सूर्यास्त...........संध्या 06.44.47 पर सूर्य राशि.............................मीन चन्द्र राशि...........................मकर गुरु राशि.............................कुम्भ नक्षत्र................................धनिष्ठा रात्रि 03.26 पर्यंत पश्चात शतभिषा योग..................................साध्य दोप 02.23 पर्यंत पश्चात शुभ करण...................................बव दोप 02.19 पर्यंत पश्चात बालव ऋतु..................................बसंत दिन.................................बुधवार 💮 *आंग्ल मतानुसार* :- 07 अप्रैल सन 2021 ईस्वी । 👁‍🗨 *राहुकाल* :- दोपहर 12.28 से 02.01 तक । 🌞 *उदय लग्न मुहूर्त :-* *मीन* 05:06:05 06:35:51 *मेष* 06:35:51 08:17:59 *वृषभ* 08:17:59 10:16:37 *मिथुन* 10:16:37 12:30:18 *कर्क* 12:30:18 14:46:29 *सिंह* 14:46:29 16:58:18 *कन्या* 16:58:18 19:08:57 *तुला* 19:08:57 21:23:34 *वृश्चिक* 21:23:34 23:39:45 *धनु* 23:39:45 25:45:23 *मकर* 25:45:23 27:32:31 *कुम्भ* 27:32:31 29:06:05 🚦 *दिशाशूल* :- उत्तरदिशा - यदि आवश्यक हो तो तिल का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें । ☸ शुभ अंक..........................6 🔯 शुभ रंग..........................हरा 💮 *चौघडिया :-* प्रात: 07.49 से 09.22 तक अमृत प्रात: 10.55 से 12.28 तक शुभ दोप 03.34 से 05.06 तक चंचल सायं 05.06 से 06.39 तक लाभ रात्रि 08.06 से 09.33 तक शुभ । 📿 *आज का मंत्र* :- || ॐ वक्रतुण्डाय नम: || 📯 *संस्कृत सुभाषितानि :-* तुष्यन्ति भोजनैर्विप्राः मयूरा धनगर्जितैः । साधवः परकल्याणैः खलाः परविपत्तिभिः ॥ अर्थात : ब्राह्मण भोजन से, मोर मेघगर्जना से, सज्जन परकल्याण से ओर दुष्ट परविपत्ति से खुश होता है । 🍃 *आरोग्यं :*- *अजवाइन की पत्ती के फायदे -* *4. डायबिटीज को करे नियंत्रित -* आजवाइन की पत्तियां टाइप-1 डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद के लिए भी जाना जाता है। डायबिटीज के विकास को रोकने में आजवाइन की पत्तियों की बड़ी सफलता के कारण, यह भविष्य में मधुमेह के उपचार में स्थिरता ला सकता है। ⚜ *आज का राशिफल :-* 🐐 *राशि फलादेश मेष :-* *(चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)* चोट व दुर्घटना से हानि संभव है। जल्दबाजी न करें। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रह सकता है। विवाद को बढ़ावा न दें। बनते काम बिगड़ सकते हैं। भाइयों से कहासुनी हो सकती है। आय बनी रहेगी। व्यापार ठीक चलेगा। नौकरी में सहकर्मी विरोध कर सकते हैं। जोखिम व जमानत के कार्य टालें, धैर्य रखें। 🐂 *राशि फलादेश वृष :-* *(ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)* कोर्ट व कचहरी में लाभ की स्थिति बनेगी। नौकरी में अधिकारी प्रसन्न रहेंगे। पिछले लंबे समय से रुके कार्य बनेंगे। प्रसन्नता रहेगी। दूसरों से अपेक्षा न करें। घर-परिवार की चिंता रहेगी। अज्ञात भय सताएगा। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। व्यापार लाभदायक रहेगा। प्रयास करें। 👫🏻 *राशि फलादेश मिथुन :-* *(का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)* भूमि व भवन संबंधित कार्य बड़ा लाभ दे सकते हैं। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। व्यापार अच्‍छा चलेगा। नौकरी में अनुकूलता रहेगी। मातहतों का सहयोग मिलेगा। कर्ज की रकम चुका पाएंगे। प्रतिद्वंद्वी सक्रिय रहेंगे। आलस्य न करें। निवेश शुभ रहेगा। 🦀 *राशि फलादेश कर्क :-* *(ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)* रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। पार्टी व पिकनिक का आनंद मिलेगा। शत्रु परास्त होंगे। व्यापार ठीक चलेगा। निवेश में जल्दबाजी न करें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। वाणी पर संयम रखें। अनहोनी की आशंका रहेगी। पारिवारिक जीवन सुख-शांति से बीतेगा। प्रसन्नता रहेगी। 🦁 *राशि फलादेश सिंह :-* *(मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)* बेवजह दौड़धूप रहेगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। कोई शोक समाचार मिल सकता है। अपेक्षित कार्यों में बाधा उत्पन्न हो सकती है। पार्टनरों से मतभेद संभव है। व्यवसाय की गति धीमी रहेगी। आय बनी रहेगी। दूसरों को कार्य में हस्तक्षेप न करें। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। 🙎🏻‍♀️ *राशि फलादेश कन्या :-* *(ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)* सामाजिक कार्य करने का मन बनेगा। मेहनत का फल मिलेगा। मान-सम्मान मिलेगा। निवेश शुभ रहेगा। व्यापार में वृद्धि होगी। भाग्य का साथ मिलेगा। नए काम करने की इच्छा बनेगी। प्रसन्नता रहेगी। पारिवारिक सहयोग मिलेगा। मनोरंजन का वक्त मिलेगा। जोखिम व जमानत के कार्य बिलकुल न करें। ⚖ *राशि फलादेश तुला :-* *(रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)* पराक्रम व प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त होगी। ऐश्वर्य के साधनों पर व्यय होगा। भूले-बिसरे साथियों से मुलाकात होगी। मित्रों तथा पारिवारिक सदस्यों के साथ समय अच्छा व्यतीत होगा। व्यवसाय लाभप्रद रहेगा। निवेश शुभ रहेगा। शत्रुओं का पराभव होगा। प्रमाद न करें। 🦂 *राशि फलादेश वृश्चिक :-* *(तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)* जीवनसाथी से सहयोग प्राप्त होगा। भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। यात्रा लाभदायक रहेगी। नौकरी में प्रमोशन मिल सकता है। रोजगार प्राप्ति होगी। किसी बड़ी समस्या का हल निकलेगा। प्रसन्नता रहेगी। भाग्य अनुकूल है। लाभ लें। प्रमाद न करें। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। 🏹 *राशि फलादेश धनु :-* *(ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)* कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। यात्रा में कोई चीज भूलें नहीं। फालतू खर्च होगा। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। लापरवाही न करें। बनते काम बिगड़ सकते हैं। विवेक का प्रयोग करें। लाभ होगा। लाभ में कमी रह सकती है। नौकरी में कार्यभार रहेगा। आलस्य न करें। 🐊 *राशि फलादेश मकर :-* *(भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)* डूबी हुई रकम प्राप्त हो सकती है। यात्रा लाभदायक रहेगी। किसी बड़ी समस्या से सामना हो सकता है। व्यापार में वृद्धि के योग हैं। पार्टनरों का सहयोग मिलेगा। नौकरी में चैन रहेगा। व्यवसाय में अधिक ध्यान देना पड़ेगा। किसी अपने का व्यवहार दु:ख पहुंचाएगा। कानूनी समस्या हो सकती है। 🏺 *राशि फलादेश कुंभ :-* *(गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)* सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। योजना फलीभूत होगी। किसी बड़ी समस्या का हल एकाएक हो सकता है। प्रसन्नता रहेगी। प्रयास अधिक करना पड़ेंगे। नौकरी में अधिकार बढ़ेंगे। आय में वृद्धि होगी। सुख के साधनों पर व्यय होगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। प्रमाद न करें। 🐋 *राशि फलादेश मीन :-* *(दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)* कानूनी सहयोग मिलेगा। लाभ में वृद्धि होगी। रुके कार्यों में गति आएगी। तंत्र-मंत्र में रुचि बढ़ेगी। सत्संग का लाभ मिलेगा। शेयर मार्केट से लाभ होगा। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। व्यापार में वृद्धि होगी। भाग्य का साथ रहेगा। थकान महसूस हो सकती है। आलस्य हावी रहेगा। ☯ *आज का दिन सभी के लिए मंगलमय हो ।* ।। 🐚 *शुभम भवतु* 🐚 ।। 🇮🇳🇮🇳 *भारत माता की जय* 🚩🚩

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Shyam Yadav Apr 6, 2021

🌞🌼🌞🌼🌞🌼🌞🌼🌞🌼🌞 🌹👣🌹 || गुरुभक्तियोग कथा अमृत || 🙏 06/04/2021 *◆आचार्य शंकर के शिष्य पद्मपाद की तीर्थ यात्रा प्रसंग....(भाग- 9)* ➡️ 🔹 गुरुभक्तियोग में आचार्य की उपासना के द्वारा गुरु कृपा की प्राप्ति को खूब महत्व दिया जाता है। गुरुभक्तियोग वेद एवं उपनिषद के समय जितना प्राचीन है। गुरुभक्तियोग जीवन के सब दुःख एवं दर्दों को दूर करने का मार्ग दिखाता है। गुरु भक्ति योग का मार्ग केवल योग्य शिष्य को ही तत्काल फल देने वाला है। गुरुभक्तियोग अहम भाव के नाश एवं शाश्वत सुख की प्राप्ति में परिणित होता है। गुरु भक्ति योग सर्वोत्तम योग है। गुरु के पावन चरणों में साष्टांग प्रणाम करने में संकोच होना यह गुरु भक्ति योग के अभ्यास में बड़ा अवरोध है। 🔹 गुरुभक्तियोग के सतत अभ्यास के द्वारा मन की चंचल प्रकृति का नाश करो। जब मन की बिखरी हुई शक्ति के किरण एकत्रित होते हैं तब चमत्कारिक कार्य कर सकते हैं। गुरु भक्ति योग का शास्त्र समाधि एवं आत्मसाक्षात्कार करने हेतु ह्रदय शुद्धि प्राप्त करने के लिये गुरु सेवा पर खूब जोर देता है। सच्चा शिष्य गुरु भक्ति योग के अभ्यास में लगा रहता है। पहले गुरु भक्ति योग की फिलॉसफी समझो फिर उसका आचरण करो आपको सफलता अवश्य मिलेगी। 🔹 कल हमने सुना कि मामा ने पद्मपाद का ग्रंथ जला दिया। पद्मपाद ने कहा कि मैं पुनः ग्रंथ लिख सकता हूं और इससे भी अच्छा लिखूंगा। मामा ने मन ही मन विचार किया कि अब समस्त वृक्ष के मूल को ही काटना पड़ेगा। अगर पद्मपाद जीवित रहा तो फिर से ग्रंथ लिख लेगा। अतः इसे जीवित रहने का कोई अधिकार नहीं। अब मामा पद्मपाद की हत्या के षडयंत्र में विचारशील हो उठे। फिर पुनः उन्होंने विचार किया कि अपने ही भांजे की हत्या उचित नहीं। इसलिये कुछ ऐसा उपाय किया जाए कि उसकी बुद्धि विकृत हो जाए। विष का प्रयोग कर पद्मपाद की बुद्धि विकृत कर देनी चाहिये। 🔹ऐसा सोच कर मामा ने पद्मपाद के भोजन में बुद्धि को विकृत करने वाला विष मिला दिया। फलस्वरूप पद्मपाद के भोजन करने के उपरांत विष ने अपना बड़ा ही गहरा प्रभाव दिखाया और पद्मपाद उस समय तो स्वयं का नाम भी स्मरण नहीं कर पा रहे थे कि मैं कौन हूं ? कहां से आया हूं ? किस कार्य हेतु यहां रुका हूं ? विष के कारण बिल्कुल मूढ़ हो चले। पद्मपाद को तनिक भी सुध न रह गयी कि वे कौन सा कार्य कर रहे हैं ? कभी मिट्टी में बैठ जाते तो कभी बालकवत हंसने लगते तो कभी अनावश्यक कार्य में प्रवृत हो जाते। ऐसी दयनीय स्थति थी कि उनके मुख से लार टपकती। 🔹कई लोगों को लगा कि पद्मपाद में किसी प्रेत का तो प्रादुरभाव नहीं हुआ है। तो किसी ने कहा इतना तो विचारशील होंगे तो यही हालत होगी। किसी ने कहा कि शायद ग्रंथ के नष्ट होने का सदमा लगा है इनको। बुद्धि अत्यंत दूषित हो चली पद्मपाद की। यह जीव अपनी ही अकड़-पकड़ से गुरु की अवज्ञा करके स्वयं को कितने कष्ट में व्यर्थ ही डाल लेता है। संयोगवश पद्मपाद के साथियों शिष्यों ने इस घटना को भांप लिया कि किसी वैद्य को दिखाना चाहिये और पद्मपाद के उपचार के लिये मामा से कहकर वैद्य को बुलवाया गया। 🔹यहां वैद्य के आते ही मामा ने वैद्य को समझा दिया कि किसी भी भांति पद्मपाद के लोगों को यह ज्ञात नहीं होना चाहिये कि उसके भोजन में विष मिलाया गया था और तुम इस भांति उपचार भी करना ताकि पद्मपाद पूर्ण स्वस्थ न हो सके। और हां वैद्यजी मैं उसका मामा हूं, बस मुझे उससे द्वेष नहीं है। परन्तु उसकी तर्क युक्त बुद्धि से मुझे मात्सर्य है। यह देखना कि पद्मपाद का विष के कारण प्राण न चला जाए, बस उसकी बुद्धि विकृत हो जाए। वैद्य ने नाड़ी की गति देखकर उपचार प्रारम्भ किया। कुछ दिनों के उपरांत पद्मपाद के स्थित में किंचित सा सुधार हुआ उन्हें अब धीरे धीरे सब स्मरण हो आया। 🔹परन्तु विष का प्रभाव इतना अधिक था कि उनकी बुद्धि अब पूर्ववत दुरुस्त न रह गयी। अब बुद्धि कमज़ोर हो चली। बुद्धि की अब वो विलक्षणता नहीं रह गयी जिससे वे शास्त्रों का चिंतन मनन करें। अतः अब वे इस स्थति में नहीं रह गये कि पहले की भांति वे अपने गुरुदेव के भाष्य पर टीका लिख सकें। अत्यंत विक्षिप्त हो गये। पद्मपाद के कुछ कनिष्ठ शिष्य भी तीर्थ यात्रा पर निकले थे। संयोगवश उन्हें यह ज्ञात था कि इस स्थान पर पद्मपाद के मामा का घर है। तनिक विश्राम हेतु वह कनिष्ठ शिष्य भी वहीं पहुंचे और वहां पर पद्मपाद का दर्शन किया। लम्बे विछोह के पश्चात् वे सब पद्मपाद के दर्शन कर अत्यधिक आल्हादित हुए। उन्होंने सभक्ति गुरुदेव पद्मपाद के चरणकमलों में साष्टांग प्रणाम किया परन्तु अपने गुरुदेव पद्मपाद की ऐसी बावले जैसी मूढ़वत स्थति देखकर इन शिष्यों को बड़ा ही दुःख हुआ। 🔹इन कनिष्ठ शिष्यों में एक शिष्य ने बताया कि आचार्य शंकर संप्रतीक केरल प्रदेश में विचरण कर रहे हैं। इस समाचार को सुनकर सब का यही निश्चय हुआ कि अब शीघ्र चल कर हमें आचार्य के चरणों की शरण लेनी चाहिये। उन्हीं से हमारी विपत्ति कटेगी। सभी शिष्यों ने एक साथ इस बात का सर्मथन किया क्योंकि अब पदमपाद इस स्थति में नहीं न रह गये थे कि वे किसी प्रकार का निर्णय ले सकें। शायद यह पद्मपाद की वर्तमान स्थति गुरुदेव के निर्णयों को अस्वीकार करने का ही परिणाम था। सब लोग अति शीघ्र आचार्य शंकर के दर्शन करने वहां से केरल की ओर चल पड़े। केरल यानी नारियल, नारियल की अधिकता के कारण उस प्रदेश का नाम केरल रखा गया । 🔹हमने सुना था कि शंकर माता का अंतिम संस्कार करके धर्म के रक्षार्थ विचरण करते हुए महशूर नामक स्थान पर ठहरे थे। शायद गुरुदेव को यह भली भांति ज्ञात था कि पद्मपाद से यहीं भेंट होगी। इसलिये तो शंकर वहीं रुके थे कई माह तक। आचार्य शंकर के आस पास शिष्य मण्डली बैठी है और आचार्य शंकर अपने शिष्यों को भक्ति व् ज्ञान संयुक्त उपदेश सिंचित करते हुए कह रहे हैं कि हे जगदीश आपकी माया अनिर्वचनीय है वह न सत् कही जा सकती है ना असत् । इसी से आप जड़ चेतन की सृष्टि करते हैं। आप तो आप्तकाम हैं। हे देव! आप अकेले होकर भी विविध रूप धारण कर सृष्टि परम्परा का संचालन कर रहे हैं। 🌿🙏👣🙏🌿🌿🙏👣🙏🌿🙏

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Shyam Yadav Apr 6, 2021

. *।। ॐ ।।* .🚩🌞 *सुप्रभातम्* 🌞🚩 📜««« *आज का पंचांग* »»»📜 कलियुगाब्द........................5122 विक्रम संवत्.......................2077 शक संवत्..........................1942 रवि...............................उत्तरायण मास.....................................चैत्र पक्ष....................................कृष्ण तिथी..................................दशमी रात्रि 02.12 पर्यंत पश्चात एकादशी सूर्योदय.............प्रातः 06.15.38 पर सूर्यास्त.............संध्या 06.44.31 पर सूर्य राशि...............................मीन चन्द्र राशि.............................मकर गुरु राशि...............................कुम्भ नक्षत्र..................................श्रवण रात्रि 02.29 पर्यंत पश्चात धनिष्ठा योग....................................सिद्ध दोप 03.25 पर्यंत पश्चात साध्य करण.................................वणिज दोप 02.14 पर्यंत पश्चात विष्टि ऋतु....................................वसंत दिन................................मंगलवार 🇬🇧 *आंग्ल मतानुसार :-* 06 अप्रैल सन 2021 ईस्वी । ⚜️ *अभिजीत मुहूर्त :-* दोप 12.04 से 12.53 तक । 👁‍🗨 *राहुकाल :-* दोप 03.34 से 05.07 तक । ☸ शुभ अंक.....................8 🔯 शुभ रंग...................सफ़ेद 🌞 *उदय लग्न मुहूर्त :-* *मीन* 05:10:01 06:39:57 *मेष* 06:39:57 08:21:56 *वृषभ* 08:21:56 10:20:33 *मिथुन* 10:20:33 12:34:15 *कर्क* 12:34:15 14:50:25 *सिंह* 14:50:25 17:02:14 *कन्या* 17:02:14 19:12:54 *तुला* 19:12:54 21:27:31 *वृश्चिक* 21:27:31 23:43:41 *धनु* 23:43:41 25:49:19 *मकर* 25:49:19 27:36:28 *कुम्भ* 27:36:28 29:10:01 🚦 *दिशाशूल :-* उत्तरदिशा - यदि आवश्यक हो तो गुड़ का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें । ✡ *चौघडिया :-* प्रात: 09.23 से 10.55 तक चंचल प्रात: 10.55 से 12.28 तक लाभ दोप. 12.28 से 02.01 तक अमृत दोप. 03.33 से 05.06 तक शुभ रात्रि 08.06 से 09.33 तक लाभ । 📿 *आज का मंत्र :-* ।। ॐ सुरार्चिताय नम: ।। 📯 *संस्कृत सुभाषितानि :-* कृतवैरे न विश्र्वासः कार्यस्त्विह सुहध्यति । छन्नं संतिष्ठते वैरं गूठोऽग्रिरिव दारुषु ॥ अर्थात :- जिसके साथ बैर हुआ हो एसे सुह्र्द पर भी भरोसा नहीं करना चाहिए । जैसे लकडे में अग्नि छूपा है वैसे उनमें बैर छूपा होता है । 🍃 *आरोग्यं :*- *अजवाइन की पत्ती के फायदे -* *3. उर्जा को बढ़ाए -* ओरिगैनो या आजवाइन की पत्तियां उर्जा को बढ़ाने काम करता है। यह मेटाबॉलिज्म या चयापचय की कार्यक्षमता में सुधार करने में मदद करता है तथा शरीर हर समय कायाकल्प और उत्साहित रहता है। यह ब्लड सर्कुलेशन में वृद्धि, आयरन जैसे खनिजों की उपस्थिति के कारण, हमारे शरीर की कोशिकाओं और मांसपेशियों को ऑक्सीजन करने में मदद करता है, जो ऊर्जा को बढ़ावा देता है और हमें शक्ति देता है। ⚜ *आज का राशिफल :-* 🐐 *राशि फलादेश मेष :-* *(चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)* वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। जरा सी लापरवाही से अधिक हानि हो सकती है। पुराना रोग बाधा का कारण बन सकता है। वाणी पर नियंत्रण रखें। अपेक्षित कार्यों में विलंब हो सकता है। चिंता तथा तनाव रहेंगे। पार्टनरों से मतभेद संभव है। व्यवसाय ठीक चलेगा। समय नेष्ट है। 🐂 *राशि फलादेश वृष :-* *(ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)* पारिवारिक चिंता बनी रहेगी। अनहोनी की आशंका रहेगी। शत्रुभय रहेगा। कानूनी अड़चन दूर होगी। जीवनसाथी से सहयोग प्राप्त होगा। कारोबार में वृद्धि होगी। नौकरी में अधिकारी प्रसन्न रहेंगे। रुके हुए कार्यों में गति आएगी। घर-बाहर सभी अपेक्षित कार्य पूर्ण होंगे। दूसरों के कार्य की जवाबदारी न लें। 👫🏻 *राशि फलादेश मिथुन :-* *(का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)* प्रतिद्वंद्विता में वृद्धि होगी। जीवनसाथी से अनबन हो सकती है। स्थायी संपत्ति खरीदने-बेचने की योजना बन सकती है। परीक्षा व साक्षात्कार आदि में सफलता प्राप्त होगी। कारोबार में वृद्धि होगी। नौकरी में अधिकार बढ़ सकते हैं। छोटे भाइयों का सहयोग प्राप्त होगा। प्रसन्नता रहेगी। संचित कोष में वृद्धि होगी। प्रमाद न करें। 🦀 *राशि फलादेश कर्क :-* *(ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)* लाभ के अवसर हाथ आएंगे। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। व्यापार में अधिक लाभ होगा। यात्रा मनोरंजक रहेगी। किसी आनंदोत्सव में भाग लेने का अवसर प्राप्त होगा। मनपसंद भोजन का आनंद प्राप्त होगा। लेन-देन में सावधानी रखें। शत्रुओं का पराभव होगा। विवाद को बढ़ावा न दें। भय रहेगा। प्रमाद न करें। 🦁 *राशि फलादेश सिंह :-* *(मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)* पारिवारिक समस्याओं में इजाफा होगा। चिंता तथा तनाव बने रहेंगे। भागदौड़ रहेगी। दूर से बुरी खबर मिल सकती है। विवाद को बढ़ावा न दें। बनते कामों में बाधा हो सकती है। दूसरों से अपेक्षा न करें। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। मातहतों से अनबन हो सकती है। कुसंगति से हानि होगी। 🙎🏻‍♀️ *राशि फलादेश कन्या :-* *(ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)* पुराने किए गए प्रयासों का लाभ मिलना प्रारंभ होगा। मित्रों की सहायता कर पाएंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। नौकरी में अधिकारी प्रसन्न रहेंगे। किसी बड़े काम करने की योजना बनेगी। व्यवसाय लाभप्रद रहेगा। भाइयों का सहयोग मिलेगा। भाग्य का साथ मिलेगा। प्रसन्नता रहेगी। ⚖ *राशि फलादेश तुला :-* *(रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)* दूर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। सुख के साधन जुटेंगे। पराक्रम बढ़ेगा। घर में मेहमानों का आगमन होगा। व्यय होगा। किसी पारिवारिक आयोजन का हिस्सा बन सकते हैं। निवेश शुभ रहेगा। व्यापार ठीक चलेगा। प्रसन्नता रहेगी। शत्रु परास्त होंगे। 🦂 *राशि फलादेश वृश्चिक :-* *(तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)* शारीरिक कष्ट से बाधा संभव है। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। नौकरी में उच्चाधिकारी की प्रसन्नता प्राप्त होगा। आय में वृद्धि होगी। निवेश शुभ रहेगा। पार्टनरों का सहयोग प्राप्त होगा। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। 🏹 *राशि फलादेश धनु :-* *(ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)* यात्रा में सावधानी रखें। जल्दबाजी से हानि होगी। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। चिंता तथा तनाव रहेंगे। पुराना रोग उभर सकता है। वाणी पर नियंत्रण रखें। दूसरों के कार्य में दखल न दें। अपेक्षित कार्यों में विलंब होगा। आय में निश्चितता रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। प्रमाद न करें। लाभ बढ़ेगा। 🐊 *राशि फलादेश मकर :-* *(भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)* कोई बड़ी बाधा आ सकती है। राजभय रहेगा। जल्दबाजी से काम बिगड़ेंगे। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। किसी के व्यवहार से स्वाभिमान को चोट पहुंच सकती है। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। नौकरी में अनुकूलता रहेगी। व्यापार में वृद्धि होगी। 🏺 *राशि फलादेश कुंभ :-* *(गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)* नई योजना बनेगी जिसका लाभ तुरंत नहीं मिलेगा। सामाजिक कार्य करने में रुचि रहेगी। प्रतिष्ठा बढ़ेगी। शारीरिक कष्ट संभव है। चिंता तथा तनाव हावी रहेंगे। सभी तरफ से सफलता प्राप्त होगी। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। व्यापार में वृद्धि होगी। आय बढ़ेगी। घर में प्रसन्नता रहेगी। ऐश्वर्य पर व्यय हो सकता है। 🐋 *राशि फलादेश मीन :-* *(दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)* पूजा-पाठ में मन लगेगा। कोर्ट व कचहरी के काम बनेंगे। अध्यात्म में रुचि बढ़ेगी। व्यापार लाभदायक रहेगा। नौकरी में चैन रहेगा। निवेश शुभ रहेगा। किसी वरिष्ठ व्यक्ति का सहयोग प्राप्त होगा। बेचैनी रहेगी। चोट व रोग से बचें। विवेक से कार्य करें। लाभ में वृद्धि होगी। मान-सम्मान मिलेगा। प्रसन्नता रहेगी। ☯ *आज मंगलवार है परन्तु कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते आपसे मंदिर स्थान पर ज्यादा संख्या एकत्रित होना उपयुक्त नहीं है अतः आपसे आग्रह है अपने घर के मंदिर में संध्या 7 बजे सपरिवार हनुमान चालीसा पाठ अवश्य करे और यदि संभव होवे तो उसे फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लाइव के माध्यम से सम्पूर्ण जगत के साथ साझा करे (यदि आप लाइव करते है तो #हनुमत_शक्ति_जागरण इस हैशटैग का उपयोग आपकी पोस्ट में अवश्य करें) |* ।। 🐚 *शुभम भवतु* 🐚 ।। 🇮🇳🇮🇳 *भारत माता की जय* 🚩🚩

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