🕉 एक संत के पास 3 सेवक रहते थे एक सेवक ने गुरुजी के आगे अरदास की महाराज जी मेरी बहन की शादी है तो आज एक महीना रह गया है तो मैं दस दिन के लिए वहां जाऊंगा कृपा करें आप भी साथ चले तो अच्छी बात है गुरु जी ने कहा बेटा देखो टाइम बताएगा नहीं तो तेरे को तो हम जानें ही देंगे उस सेवक ने बीच-बीच में इशारा गुरु जी की तरफ किया कि गुरुजी कुछ ना कुछ मेरी मदद कर दे आखिर वह दिन नजदीक आ गया सेवक ने कहा गुरु जी कल सुबह जाऊंगा मैं गुरु जी ने कहा ठीक है बेटा सुबह हो गई जब सेवक जाने लगा तो गुरु जी ने उसे 5 किलो अनार दिए और कहा ले जा बेटा भगवान तेरी बहन की शादी खूब धूमधाम से करें दुनिया याद करें ऐसी शादी तो हमने कभी देखी ही नहीं और साथ में दो सेवक भेज दिये जाओ तुम शादी पूरी करके आ जाना जब सेवक घर से निकले 100 किलोमीटर गए तो मन में आया जिसकी बहन की शादी थी वह सेवक से बोला गुरु जी को पता ही था कि मेरी बहन की शादी है और हमारे पास कुछ भी नहीं है फिर भी गुरु जी ने मेरी मदद नहीं की दो-तीन दिन के बाद वह अपने घर पहुंच गया उसका घर रेतीली इलाके में था वहां कोई फसल नहीं होती थी वहां के राजा की लड़की बीमार हो गई वैद्य ने बताया इस लड़की को अनार के साथ यह दवाई दी जाएगी तो यह लड़की ठीक हो जाए राजा ने मुनादी करवा रखी थी अगर किसी के पास आनार है तो राजाजी उसे बहुत ही इनाम देंगे इधर मुनादी वाले ने आवाज लगाई अगर किसी के पास आनार है तो राजा को जरूरत है जल्दी आ जाओ जब यह आवाज उन सेवकों के कानों में पड़ी वह सेवक उस मुनादी वाले के पास गए हमारे पास आनार है चलो राजा जी के पास राजाजी को अनार दिए गए अनार का जूस निकाला गया लड़की को दवाई दी गई लड़की ठीक-ठाक हो गई राजा जी ने पूछा तुम कहां से आए हो तो उसने सारी हकीकत बता दी राज ने कहा ठीक है तुम्हारी बहन की शादी में करूंगा राजा जी ने हुकुम दिया ऐसी शादी होनी चाहिए कि लोग यह कहे कि यह राजा की लड़की की शादी है सब बारातियों को सोने चांदी गहने के उपहार दिए गए बरात की सेवा बहुत अच्छी हुई लड़की को बहुत सारा धन दिया गया लड़की के मां-बाप को बहुत ही जमीन जायदाद आलीशान मकान बहुत ही पैसे रुपए दिए गए लड़की भी राजी खुशी विदा होकर चली गई अब सेवक सोच रहे हैं कि गुरु की महिमा गुरु ही जाने हम ना जाने क्या-क्या सोच रहे थे गुरु जी के बारे में गुरु जी के वचन थे जा बेटा तेरी बहन की शादी ऐसी होगी दुनिया देखेगी संत वचन हमेशा सच होते हैं शिक्षा संतों के वचन के अंदर ताकत होती है लेकिन हम नहीं समझते जो भी वह वचन निकालते हैं वह सिद्ध हो जाता है हमें संतों के वचनों के ऊपर अमल करना चाहिए और विश्वास करना चाहिए ना जाने संत मोज में आकर क्या दे दे रंक से राजा बना दे । ।।।। जय सिया राम जी ||||

+61 प्रतिक्रिया 14 कॉमेंट्स • 97 शेयर

*🙏जय राधेकृष्ण जी🙏* *"जीवन'* *एक यात्रा है।* *यह यात्रा है.. मृत्यु से अमृत की ओर,* *अंधकार से प्रकाश की ओर,* *व्यर्थ से सार्थक की ओर* *और पदार्थ से परमात्मा की ओर।* इस यात्रा में वे सारे लोग जो बाहर तलाश रहे हैं.. भटके हुए हैं। लाख तलाशें, कहीं कुछ पाएंगे नहीं। न काशी में, न काबा में और न कहीं और। *यह यात्रा कहीं जाने की नहीं, लौटने की है।* जा तो आप बहुत दूर चुके हैं.. अपने आप से छोड़ देना है अपनी वासनाओं को *ताकि अपने आप पर आना हो सके।* *संसार नहीं.. स्वप्न छोड़ने हैं* *क्योंकि स्वप्न ही संसार है।* ★★★★★★★★★★ *"मन" बड़ा चमत्कारी शब्द है,* *इसके आगे "न" लगाने पर यह "नमन" हो जाता है..!* *और पीछे "न" लगाने पर "मनन" हो जाता है..!* *जीवन में "नमन" और "मनन" करते चलिए..!* *जीवन "सफल" ही नहीं "सार्थक" भी हो जायेगा..!!* *🙏🙏राम राम जी💐💐*

+48 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 180 शेयर

🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ *जब तक दुख नहीं मिलते, प्रभु की याद नहीं आती।* 🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹 एक दिन किसी निर्माण के दौरान भवन की छटी मंजिल से सुपर वाईजर ने नीचे कार्य करने वाले मजदूर को आवाज दी। निर्माण कार्य की तेज आवाज के कारण नीचे काम करने वाला मजदूर कुछ समझ नहीं सका की उसका सुपरवाईजर उसे आवाज दे रहा है। फिर सुपरवाईजर ने उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए एक १० रु का नोट नीचे फैंका, जो ठीक मजदूर के सामने जा कर गिरा। मजदूर ने नोट उठाया और अपनी जेब मे रख लिया, और फिर अपने काम मे लग गया। अब उसका ध्यान खींचने के लिए सुपर वाईजर ने पुन: एक ५०० रु का नोट नीचे फैंका। उस मजदूर ने फिर वही किया और नोट जेब मे रख कर अपने काम मे लग गया ये देख अब सुपर वाईजर ने एक छोटा सा पत्थर का टुकड़ा लिया और मजदूर के उपर फैंका जो सीधा मजदूर के सिर पर लगा। अब मजदूर ने ऊपर देखा और उसकी सुपर वाईजर से बात चालू हो गयी। ये वैसा ही है जो हमारी जिन्दगी मे होता है। भगवान् हमसे संपर्क करना, मिलना चाहता है, लेकिन हम दुनियादारी के कामो मे व्यस्त रहते है, अत: भगवान् को याद नहीं करते। भगवान् हमें छोटी छोटी खुशियों के रूप मे उपहार देता रहता है, लेकिन हम उसे याद नहीं करते, और वो खुशियां और उपहार कहाँ से आये ये ना देखते हुए, उनका उपयोग कर लेते है, और भगवान् को याद नहीं करते। भगवान् हमें और भी खुशियों रूपी उपहार भेजता है, लेकिन उसे भी हम हमारा भाग्य समझ कर रख लेते है, भगवान् का धन्यवाद नहीं करते, उसे भूल जाते है। तब भगवान् हम पर एक छोटा सा पत्थर फैंकते है, जिसे हम कठिनाई कहते है, और तुरंत उसके निराकरण के लिए भगवान् की और देखते है, याद करते है। यही जिन्दगी मे हो रहा है यदि हम हमारी छोटी से छोटी ख़ुशी भी भगवान् के साथ उसका धन्यवाद देते हुए बाँटें, तो हमें भगवान् के द्वारा फैंके हुए पत्थर का इन्तजार ही नहीं करना पड़ेगा! *जय श्री राधेजी*🙏🙏💐💐 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀

+26 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 91 शेयर

+72 प्रतिक्रिया 12 कॉमेंट्स • 283 शेयर