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भक्ती करने का आधार केवल राम राम राम राम राम राम राम राम राम........ राम राम राम राम राम...। रटना नहीं है!मन को भी संत बनाना है,मन से समस्त कामनाओं और बासनाओं का त्याग पुरी तरह कर दें और क्षमा, दया, करुणा, सरलता, मैत्री तता संतोष का मार्ग गृहण करें। «सर्बे भबंतु सुखना:, सर्बे संतु निरामया। सर्बे भद्राणिं पस्यंतु,मा कश्चित दुःख भाग भबेत्।।» अर्थात:-सभी जन सुखी हों,सभी जन निरोगी हों। सभी जन दृष्टा यानि आत्म ज्ञानी बने (सभी प्राणियों में चेतना स्वरूप एक ही आत्मा का प्रकाश है)सभी जन तीनों तापों के दुखों से दुखी न रहें। शारीरिक दुःख,मांशिक दुःख और प्राकृतिक आपदा से उत्पन्न दुःख प्राणियों के जीवन में न आवें। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूं। सबका मंगल हो,सबका भला हो,सब सुखी रहें। “ सुप्रभात "

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