murlidhargoyal39 Dec 27, 2018

🌻💝श्री कृष्ण बलराम की शिक्षा 🥀💝श्री कृष्ण और बलराम शिक्षा ग्रहण कर रहे | shree krishna leela | ramanand sagar | mahabharat सान्दीपनि, जिसका अर्थ ‘देवताओं के ऋषि’ है, भगवान कृष्ण के गुरु थे। सान्दीपनि उज्जैन के एक संत/ मुनि/ ऋषि थे। सान्दीपनि मुनि का आश्रम उज्जैन रेलवे स्टेशन से 5 किमी की दूरी पर स्थित है। आश्रम के समीप ‘अंकपट’ है। इसके प्रति लोगों में ऐसा विश्वास है कि यहाँ भगवान कृष्ण अपनी लेखन पट्टिका को साफ किया करते थे। इस आश्रम के पास एक पत्थर पर 1 से 100 तक गिनती लिखी है और ऐसा माना जाता है कि यह गिनती गुरु सान्दीपनि द्वारा लिखी गई थी। आश्रम के पास ही गोमती कुंड है, जिसके विषय में कहा जाता है कि पवित्र गोमती नदी का आह्वान इस कुण्ड में श्री कृष्ण ने किया था, जिससे उनके वृद्ध गुरु को अन्य पवित्र स्थलों की यात्रा न करनी पड़े। गुरु सान्दीपनि के आश्रम में रहते हुए दोनों भ्राता श्री कृष्ण और बलराम शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। इनके साथ ही सुदामा भी आश्रम में रहते हुए शिक्षा प्राप्त कर रहे थे, जहाँ श्री कृष्ण और सुदामा मित्र बने थे। शिक्षा पूरी करने के पश्चात श्री कृष्ण और बलराम गुरु सान्दीपनि से गुरु दक्षिणा माँगने की प्रार्थना की। ऋषि ने दक्षिणा के रूप में अपने पुत्र को माँग लिया, जो समुद्र के प्रभास क्षेत्र में विलुप्त हो गया था। दोनों भाई प्रभास क्षेत्र में गये और उन्हें पता चला कि शंखासुर नामक राक्षस ऋषि पुत्र को ले गया है, जो समुद्र के नीचे पवित्र शंख में रहता है, जिसे ‘पाँचजन्य’ कहते हैं। दोनों भाइयों ने राक्षस का वध कर ‘पाँचजन्य’ में चारों ओर ऋषि पुत्र को खोजा। ऋषि पुत्र को उसमें न पाकर वे शंख लेकर यम के पास पहुँचे और उसे बजाने लगे। यम ने दोनों भ्राताओं की पूजा करते हुए कहा,”हे सर्वव्यापी भगवान, अपनी लीला के कारण आप मानव स्वरूप में हैं। मैं आप दोनों के लिए क्या कर सकता हूँ?” श्री कृष्ण ने कहा,’हे महान शासक, मेरे गुरु पुत्र को मुझे सौंप दीजिये, जो अपने कर्मों के कारण यहाँ लाया गया था।’ अपने गुरु को श्री कृष्ण ने उनका जीवित पुत्र सौंपा। श्री कृष्ण शंखासुर से पाँचजन्य ले आये। श्री कृष्ण ने पाँचजन्य के साथ अर्जुन के देवदत्त शंख को बजाया, जो महाभारत के आरम्भ का प्रतीक था। DIL KI AWAZ

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murlidhargoyal39 Dec 27, 2018

श्री राधा चरण शरणम् मम् ।।

रुचि के प्रकास परस्पर खेलन लागे।
राग-रागिनी अलौकिक उपजत, नृत्य-संगीत अलग लाग लागे॥
राग ही में रंग रह्यौ, रंग के समुद्र में ये दोउ झागे।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा-कुंजबिहारी पै रंग रह्यौ, रस ही में पागे॥....

Shyama...

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murlidhargoyal39 Dec 27, 2018

🌺🌼🌺🌼🌺🌼🌺
🌸महाभारत में ऋषि दुर्वासा से सम्बन्धित कई घटनाओं का उल्लेख है🌸
एक बार महर्षि दुर्वासा द्वारका गये। वहाँ जाकर उन्होंने घोषणा करी कि वही मुझे अपने यहां ठहराये जो मुझे सह सके। श्रीकृष्ण ने उनको अपने यहां ठहराया।
🍄🍄
दुर्वासा श्रीकृष...

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murlidhargoyal39 Dec 27, 2018

*जै जै श्री हित हरिवंश।।*
श्री हित सेवक जी महाराज द्वारा रचित " सेवक वाणी " में से आज से हम "श्री हित जस-विलास प्रथम प्रकरण" प्रारम्भ कर रहे है, सभी अनन्य रसिको को विशाल लाल गोस्वामी की श्री हित वृन्दावन धाम से जै जै श्री हित हरिवंश।।
*श्री हित जस...

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murlidhargoyal39 Dec 27, 2018

#नमामीश्वरं_सच्चिदानन्दरूपं_लसत्कुण्डलं_गोकुले_भ्राजमानम्।
#यशोदाभियोलूखलाधावमानं_परामृष्टमत्यं_ततो_द्रुत्य_गोप्या।।

#रुदन्तं_मुहुर्नेत्रयुग्मं_मृजन्तं_कराम्भोज-#युग्मेन_सातंकनेत्रम्।
#मुहुःश्वासकम्प - #त्रिरेखाप्रकण्ठ -#स्थित_ग्रैव-#दामोदरं_भक्त...

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murlidhargoyal39 Dec 27, 2018

#वरं_देव_मोक्षं_न_मोक्षावधिं_वा
#न_चान्यं_वृणेऽहं_वरेशादपीह
#इदं_ते_वपुर्नाथ_गोपाल_बालं
#सदा_मे_मनस्याविरास्तां_किमन्यैः॥
हे देव, आप सब प्रकार के वर देने में पूर्ण समर्थ हैं। तो भी मै आपसे चतुर्थ पुरुषार्थरूप मोक्ष या मोक्ष की चरम सीमारूप श्री वै...

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murlidhargoyal39 Dec 27, 2018

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आहा ! श्रीनाथ जी के विरह में पुष्टिमार्ग के महान रसिक कवि श्री चतुर्भुज दास जी के द्वारा रचित पद
🙏💙💚💛💜🖤💝💘❤️💓💔💕💖💗🙏
श्री गोवर्धन वासी सांवरे ला...

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murlidhargoyal39 Dec 27, 2018

* तुलसीदास-रत्नावली*-सवांद-
●अंतिम भाग●

---वह देखते है कि यमुना के तट पर हलचल थी ,यात्री कुछ उस पार जा रहे थे ,कुछ इस इस पार आ रहे थे।यमुना, शांत स्वभाव से बह रही थी सूर्य अपने उत्थान की ओर था ,औऱ यमुना की लहरों में अपनी किरण...

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