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प्रणाम जी महामती श्री प्रांनाथ प्यारे की जय हो जय श्री कृष्णा जीव को ऐसा लगता है कि वह अपनी चतुराई से प्रत्येक समस्या का हल निकाल लेगा और सदा के लिए सुखी हो जायेगा और अपनी इस नाममात्र सफलता का बखान वह अपने मित्रों व सम्बन्धियों से करता हुए गर्व का अनुभव भी करता है परन्तु यह सफलता उसके परलोक तो क्या इस लोक में भी उसकी सहायता करने में अपूर्ण सिद्ध होती है क्यों कि सत्य का बोध कभी मानसिक अटकलों के माध्यम से नहीं होता । इसका कारण बद्धजीव में चार त्रुटियों का होना है : वह ग़लतिआं करता हैं, उसकी इन्द्रियाँ दोषपूर्ण हैं , वह भर्मित होता है, और वह स्वयं तथा दूसरों से छल करता है । .... आज सम्पूर्ण विश्व की आवश्यकता कृष्ण भावना भावित होना, परब्रह्म की श्रेष्ठता को समझना और उनके सहयोग से उन्हीं की सेवा करना है । प्रभु के निर्देश हमें सभी प्रामाणिक धर्म-ग्रन्थों व धर्म- गुरुओं से प्राप्त होते हैं । 🚩Heart of Bhagvatam🚩

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