🐚 जय श्री राम। *_पाँच अगस्त बस पांच नहीं,_* *_यह पंचामृत कहलायेगा !_* *_एक रामायण फिरसे अब,_* *_राम मंदिर का लिखा जाएगा!!_* *_जितना समझ रहे हो उतना,_* *_भूमिपूजन आसान न था!_* *_इसके खातिर जाने कितने,_* *_माताओं का दीप बुझा !_* *_गुम्बज पर चढ़कर कोठारी,_* *_बन्धुओं ने गोली खाई थी!_* *_नाम सैकड़ो गुमनाम हैं,_* *_जिन्होंने जान गवाई थी!!_* *_इसी पांच अगस्त के खातिर,_* *_पांचसौ वर्षो तक संघर्ष किया!_* *_कई पीढ़ियाँ खपी तो खपी,_* *_आगे भी जीवन उत्सर्ग किया!!_* *_राम हमारे ही लिए नहीं बस,_* *_उतने ही राम तुम्हारे हैं!_* *_जो राम न समझ सके वो,_* *_सचमुच भाग्य के मारे हैं!!_* *_एक प्रार्थना हैं सबसे बस,_* *_दीपक एक जला देना!_* *_पाँच अगस्त के भूमिपूजन में,_* *_अपना प्रकाश पहुँचा देना!!_* *_नहीं जरूरत आने की कुछ,_* *_इतनी ही हाजरी काफी है!_* *_राम नाम का दीप जला तो,_* *_कुछ चूक भी हो तो माफी है!!_* *_कविता नहीं यह सीधे सीधे,_* *_रामभक्तो को निमन्त्रण है!_* *_असल सनातनी कहलाने का,_* *_समझो कविता आमंत्रण है!!_* *_जय श्रीराम, जय जय श्रीराम_* 👣 पांच राम भक्तो को अवश्य भेजे 🛕🛕🛕🛕🛕 🙏🙏🙏🙏🙏

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