*🔱ॐ महामृत्युंजय मंत्र✍🏻✍🏻✍🏻**       *🔱🌹समय:-05.47🌹🔱* ​•··············••●◆❁✿❁◆●••·············· *🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉हरदिनपावन=== आजकादिनविशेष============= महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ*👇🏼 *महामृत्युंजय मंत्र के 33 अक्षर हैं।जो महर्षि वशिष्ठ के अनुसार 33 कोटी देवताओं के प्रतिक हैं।उन तैंतीस देवताओं में 8वसु ,11रुद्र और 12आदित्य,1 प्रजापति व 1षटकार हैं।इन तैंतीस कोटि देवताओं की सम्पूर्ण शक्तियाँ महामृत्युंजय मंत्र से निहित होती हैं। मंत्र इस प्रकार है-*👇🏼 *ॐ त्रयंमकम यजामहे, सुंगधीपुष्टीवर्धनम!* *उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात!!* *==महामृत्युंजय मंत्र-==* *संस्कृत में महामृत्युंजय उस व्यक्ति को कहते हैं जो मृत्यु को जीतने वाला हो। ऋग्वेद से लेकर यजुर्वेद में भी इस मंत्र का उल्लेख मिलता हैं।इसके अलावा शिवमहापुराण में इस मंत्र व इसके आशय को विस्तार से बताया गया हैं।* *==महा मृत्युंजय मंत्र का अक्षरश अर्थ:-👇🏼* *त्रयंबकम*- त्रि.नेत्रों वाला ;कर्मकारक। *यजामहे*- हम पूजते हैं, सम्मान करते हैं। हमारे श्रद्देय। *सुगंधिम*- मीठी महक वाला, सुगंधित। *पुष्टि*- एक सुपोषित स्थिति, फलने वाला व्यक्ति। जीवन की परिपूर्णता *वर्धनम*- वह जो पोषण करता है, शक्ति देता है। *उर्वारुक*- ककड़ी। *इव*- जैसे, इस तरह। *बंधनान्*- वास्तव में समाप्ति से अधिक लंबी है। *मृत्यु*- मृत्यु से *मुक्षिय*, हमें स्वतंत्र करें, मुक्ति दें। *अमृतात*- अमरता, मोक्ष। *====सरलअनुवाद===*👇🏼 *हम त्रि-नेत्रीय वास्तविकता का चिंतन करते हैं।जो जीवन की मधुर परिपूर्णता को पोषित करता है और वृद्धि करता है। ककड़ी की तरह हम इसके तने से अलग हम जीवन व मृत्यु के बंधन से मुक्त हो।।==महामृत्युंजय मंत्र=====================ॐ हौं जूं स:ॐ भूर्भुव:स्व: ॐ त्र्यम्बकं. यजामहेसुगन्धिंपुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्, मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्.ॐ स्व: भुव: भू: ॐ स: जूं हौं ॐ !!भगवान शिवशक्ति. शिव शंकर शम्भू भोलेनाथ जी का प्राकट्य एवं विवाह दिवस सबके लिए शुभ मंगलकारी हो ऐसी हार्दिक शुभकामनाएं शुभेच्छायें. एवं बधाइयां!* 🌹🙏🙏🌹🕉🚩🚩🙏🌹

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