🙏🌻🌻🌻जय श्री राधे कृष्णा🌻🌻🌻🙏 आज सुबह जब पहली चाय पी रहा था तो घर वाली ने मेन गेट से आवाज़ लगाई बोले- बाहर आओ..आपके देखने लायक सीन है...मैंने कहा क्या हुआ..?? बोले आओ तो सही देखो वेगन आर में आम बिक रहे हैं... मैं उठ कर गया तो देखा एक वेगनआर में एक बंदा पीछे की सीट और डिक्की में लगभग 10-15 कैरेट आम के रखकर लाया था..एक तराजू गाड़ी में ..उसके साथ उसका एक साथी था जो आवाज़ लगा रहा था...आम ले लो आम 100 के 2 किलो....अभी सबके चेहरे पर मास्क है तो अचानक कोई पहचान में नही आता...लेकिन उस आम विक्रेता ने मुझे पहचान लिया... अरे कमल भैया आप यहां रहते है क्या..?? मैंने कहा हाँ... उसने थोड़ा मास्क नीचे किया तो तो मैं भी उसे पहचान गया...वो राजीव था...मैंने कहा अरे तू कबसे आम बेचने लगा...तेरा तो चश्मे का होलसेल का काम है... बोला भैया इसी गाड़ी में चश्मे भरकर आस पास के गांवो में सप्लाई करने जाता था लेकिन लॉकडाउन की वजह से सारे गांव सील, शहर सील... अचानक हुए इस घटनाक्रम और लोकडाउन के बाद टेंशन सताने लगी कि कार की किश्त कैसे जाएगी, मकान भाड़ा कैसे दूंगा, घर का रोज़ मर्रा का खर्च कैसे चलेगा...हम तो रोज़ कमा कर रोज़ खाने वाले आदमी है...कोई बचत- सेविंग भी नही कैसे चलेगा..मैन कहा फिर..?? बोले कमल भैया सिर्फ 3 दिन घर खाली बैठा.और उसके बाद सोच लिया कि ऐसे नही चल पाएंगे...उसके बाद कृषि मंडी जाकर आम के 5 कैरेट लाया और पहले दिन 50 किलो आम बेच दिए...600/- मुनाफा हुआ...100-150 की गैस जल गई गाड़ी में...फिर भी 400-450 बच गए...फिर धीरे धीरे क्वांटिटी बढ़ाता गया...अब लगभग 10 कैरेट मतलब 100 किलो आम रोज़ बेच लेता हूँ...आम 36-37 रु किलो मंडी से मिल जाता है..50/- किलो बेचता हूँ...1200-1300 मुनाफा हो जाता है रोज़ का... अकेला गाड़ी चलाना , फिर उतारना फिर तोल के देना , आवाज़ लगाना , दिक्कत हो रही थी तो मासी के लड़के प्रकाश को साथ ले लिया 200/- रोज़ उसको देता हूँ और लगभग 200 की गैस जल जाती है...800/- नेट बच जाते है रोज़ भैया... वो बोलता जा रहा था मेरी आँखें फटी की फटी. इस लड़के ने मात्र 3 दिन में खुद को मानसिक रुप से मजबूत करके बिज़नेस कन्वर्शन कर लिया और 50 दिन में 40 हज़ार कमा चुका..और खुद के साथ एक बंदे को रोजगार दे दिया...और इधर मैं और मेरे जैसे देश के असंख्य मिडिल क्लास लोग बस अपने भविष्य की चिंता में घुले जा रहे है, आगे क्या होगा..लेकिन हम सिर्फ चिंता कर रहे है एक्शन नही.. ऐसे विकट काल मे भी राजीव अपनी ज़िम्मेदारियाँ अपनी कमाई से पूरी कर रहा है , कर्ज़े से नही...कोई शर्म नही की इसने की मैं चश्मे का होलसेलर हूँ मैं , गली गली आम कैसे बेचूंगा... ये एक छोटा सा उदाहरण था..अब आप और हम भी समझ लें पक्के से..हमे तैयार रहना ही होगा एक बड़े बदलाव के लिए... इस लॉकडाउन के बाद कई बिज़नेस बिल्कुल खतम हो जाएंगे तो कई नए जन्म लेंगे..लक्ज़री से जुड़े सारे बिज़नेस ठप्प होंगे या धीमे हो जाएंगे..रूटीन खर्च निकालना मुश्किल होगा...लेकिन बेसिक्स नीड्स और हाइजीन से जुड़े कई नए बिज़नेस डेवेलप होंगे... मैंने कुछ दिन पहले एक आर्टिकल लिखा भी था कि 'व्यापार मरता नही बस रूप बदलता है'...हमको भी राजीव की तरह निर्णय लेंगे और त्वरित लेने होंगे क्यों कि खर्चा कोई भी नही रुका है..लेकिन कमाई का चक्का जाम है.. जरूरी नही की सब कार लेकर आम बेचने निकल पड़े...लेकिन अब आप अपने बिजनेस को कैसे कन्वर्ट करेंगे ये आपको सोचना है..या हो सकता है जहां आप नौकरी करते थे वहां आपकी जरूरत ही नही रहे... वो संस्थान ही अपना व्यापार बदल लें तो फिर आपकी स्किल कहाँ काम आएगी..?? आप पर नौकरी जाने का खतरा आ जायेगा आप खुद को नई परिस्थितयो के मानसिक रूप से तैयार अभी से तैयार कर लें..क्यों कि लॉकडाउन खतम होगा और परेशानियां शुरू होंगी...अभी तक सब इसलिए आराम से है क्यों कि सब रुका हुआ है.... बहुत बदलाव आएंगे जैसा पहले था वैसा अब कुछ नही रहने वाला... जुड़े रहिये, पढ़ते रहिये..पोस्ट अच्छी लगे तो मित्रो के साथ शेयर भी कीजिये. शायद किसी की ज़िंदगी मे बदलाव आ जाये... इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर कीजिये। शायद किसी को कुछ करने की प्रेरणा मिल जाये ।

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जीवन का एक सीधा सा नियम है और वो ये कि अगर अनुशासन नहीं तो प्रगति भी नहीं। अनुशासन में बहकर ही एक नदी सागर तक पहुँचकर सागर ही बन जाती है। अनुशासन में बँधकर ही एक बेल जमीन से उठकर वृक्ष जैसी ऊँचाई को प्राप्त कर पाती है और अनुशासन में रहकर ही वायु फूलों की खुशबु को अपने में समेटकर स्वयं भी सुगंधित हो जाती है व चारों दिशाओं को सुगंध से भर देती है। पानी अनुशासन हीन होता है तो बाढ़ का रूप धारण कर लेता है, हवा अनुशासन हीन होती है तो आँधी बन जाती है और अग्नि अगर अनुशासन हीन हो जाती है तो महा विनाश का कारण बन जाती है। ऐसे ही अनुशासनहीनता स्वयं के जीवन को तो विनाश की तरफ ले ही जाती है साथ ही साथ दूसरों के लिए भी विनाश का कारण बन जाती है। गाड़ी अनुशासन में चले तो सफर का आनंद और बढ़ जाता है। इसी प्रकार जीवन भी अनुशासन में चले तो जीवन यात्रा का आनंद और बढ़ जाता है। जीवन का घोड़ा निरंकुशता अथवा उच्छृंखलता का त्याग करके निरंतर प्रगति पथ पर अथवा तो अपने लक्ष्य की ओर दौड़ता रहे उसके लिए अपने हाथों में अनुशासन रुपी लगाम का होना भी परमावश्यक हो जाता है 🙏🙏🙏जय गजानंद,जय श्री गणेश🙏🙏🙏

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#बुधवार_विशेष #भगवान_श्रीगणेश_के_आठ_अवतारो_की_कथा अन्य सभी देवताओं के समान भगवान गणेश ने भी आसुरी शक्तियों के विनाश के लिए विभिन्न अवतार लिए। श्रीगणेश के इन अवतारों का वर्णन गणेश पुराण, मुद्गल पुराण, गणेश अंक आदि ग्रंथो में मिलता है। जानिए श्रीगणेश के अवतारों के बारे में : 🌹1. #वक्रतुंड वक्रतुंड का अवतार राक्षस मत्सरासुर के दमन के लिए हुआ था। मत्सरासुर शिव भक्त था और उसने शिव की उपासना करके वरदान पा लिया था कि उसे किसी से भय नहीं रहेगा। मत्सरासुर ने देवगुरु शुक्राचार्य की आज्ञा से देवताओं को प्रताडि़त करना शुरू कर दिया। उसके दो पुत्र भी थे सुंदरप्रिय और विषयप्रिय, ये दोनों भी बहुत अत्याचारी थे। सारे देवता शिव की शरण में पहुंच गए। शिव ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे गणेश का आह्वान करें, गणपति वक्रतुंड अवतार लेकर आएंगे। देवताओं ने आराधना की और गणपति ने वक्रतुंड अवतार लिया। वक्रतुंड भगवान ने मत्सरासुर के दोनों पुत्रों का संहार किया और मत्सरासुर को भी पराजित कर दिया। वही मत्सरासुर कालांतर में गणपति का भक्त हो गया। 🌹2. #एकदंत महर्षि च्यवन ने अपने तपोबल से मद की रचना की। वह च्यवन का पुत्र कहलाया। मद ने दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य से दीक्षा ली। शुक्राचार्य ने उसे हर तरह की विद्या में निपुण बनाया। शिक्षा होने पर उसने देवताओं का विरोध शुरू कर दिया। सारे देवता उससे प्रताडि़त रहने लगे। मद इतना शक्तिशाली हो चुका था कि उसने भगवान शिव को भी पराजित कर दिया। सारे देवताओं ने मिलकर गणपति की आराधना की। तब भगवान गणेश एकदंत रूप में प्रकट हुए। उनकी चार भुजाएं थीं, एक दांत था, पेट बड़ा था और उनका सिर हाथी के समान था। उनके हाथ में पाश, परशु और एक खिला हुआ कमल था। एकदंत ने देवताओं को अभय वरदान दिया और मदासुर को युद्ध में पराजित किया। 🌹3. #महोदर जब कार्तिकेय ने तारकासुर का वध कर दिया तो दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने मोहासुर नाम के दैत्य को संस्कार देकर देवताओं के खिलाफ खड़ा कर दिया। मोहासुर से मुक्ति के लिए देवताओं ने गणेश की उपासना की। तब गणेश ने महोदर अवतार लिया। महोदर का उदर यानी पेट बहुत बड़ा था। वे मूषक पर सवार होकर मोहासुर के नगर में पहुंचे तो मोहासुर ने बिना युद्ध किये ही गणपति को अपना इष्ट बना लिया। 🌹4. #गजानन एक बार धनराज कुबेर भगवान शिव-पार्वती के दर्शन के लिए कैलाश पर्वत पर पहुंचा। वहां पार्वती को देख कुबेर के मन में काम प्रधान लोभ जागा। उसी लोभ से लोभासुर का जन्म हुआ। वह शुक्राचार्य की शरण में गया और उसने शुक्राचार्य के आदेश पर शिव की उपासना शुरू की। शिव लोभासुर से प्रसन्न हो गए। उन्होंने उसे सबसे निर्भय होने का वरदान दिया। इसके बाद लोभासुर ने सारे लोकों पर कब्जा कर लिया और खुद शिव को भी उसके लिए कैलाश को त्यागना पड़ा। तब देवगुरु ने सारे देवताओं को गणेश की उपासना करने की सलाह दी। गणेश ने गजानन रूप में दर्शन दिए और देवताओं को वरदान दिया कि मैं लोभासुर को पराजित करूंगा। गणेश ने लोभासुर को युद्ध के लिए संदेश भेजा। शुक्राचार्य की सलाह पर लोभासुर ने बिना युद्ध किए ही अपनी पराजय स्वीकार कर ली। 🌹5. #विघ्नराज एक बार पार्वती अपनी सखियों के साथ बातचीत के दौरान जोर से हंस पड़ीं। उनकी हंसी से एक विशाल पुरुष की उत्पत्ति हुई। पार्वती ने उसका नाम मम (ममता) रख दिया। वह माता पार्वती से मिलने के बाद वन में तप के लिए चला गया। वहीं उसकी मुलाकात शम्बरासुर से हुई। शम्बरासुर ने उसे कई आसुरी शक्तियां सीखा दीं। उसने मम को गणेश की उपासना करने को कहा। मम ने गणपति को प्रसन्न कर ब्रह्मांड का राज मांग लिया। शम्बर ने उसका विवाह अपनी पुत्री मोहिनी के साथ कर दिया। शुक्राचार्य ने मम के तप के बारे में सुना तो उसे दैत्यराज के पद पर विभूषित कर दिया। ममासुर ने भी अत्याचार शुरू कर दिए और सारे देवताओं के बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया। तब देवताओं ने गणेश की उपासना की। गणेश विघ्नराज के रूप में अवतरित हुए। उन्होंने ममासुर का मान मर्दन कर देवताओं को छुड़वाया। 🌹6. #लंबोदर समुद्रमंथन के समय भगवान विष्णु ने जब मोहिनी रूप धरा तो शिव उन पर काम मोहित हो गए। उनका शुक्र स्खलित हुआ, जिससे एक काले रंग के दैत्य की उत्पत्ति हुई। इस दैत्य का नाम क्रोधासुर था। क्रोधासुर ने सूर्य की उपासना करके उनसे ब्रह्मांड विजय का वरदान ले लिया। क्रोधासुर के इस वरदान के कारण सारे देवता भयभीत हो गए। वो युद्ध करने निकल पड़ा। तब गणपति ने लंबोदर रूप धरकर उसे रोक लिया। क्रोधासुर को समझाया और उसे ये आभास दिलाया कि वो संसार में कभी अजेय योद्धा नहीं हो सकता। क्रोधासुर ने अपना विजयी अभियान रोक दिया और सब छोड़कर पाताल लोक में चला गया। 🌹7. #विकट भगवान विष्णु ने जलंधर के विनाश के लिए उसकी पत्नी वृंदा का सतीत्व भंग किया। उससे एक दैत्य उत्पन्न हुआ, उसका नाम था कामासुर। कामासुर ने शिव की आराधना करके त्रिलोक विजय का वरदान पा लिया। इसके बाद उसने अन्य दैत्यों की तरह ही देवताओं पर अत्याचार करने शुरू कर दिए। तब सारे देवताओं ने भगवान गणेश का ध्यान किया। तब भगवान गणपति ने विकट रूप में अवतार लिया। विकट रूप में भगवान मोर पर विराजित होकर अवतरित हुए। उन्होंने देवताओं को अभय वरदान देकर कामासुर को पराजित किया। 🌹8. #धूम्रवर्ण एक बार भगवान ब्रह्मा ने सूर्यदेव को कर्म राज्य का स्वामी नियुक्त कर दिया। राजा बनते ही सूर्य को अभिमान हो गया। उन्हें एक बार छींक आ गई और उस छींक से एक दैत्य की उत्पत्ति हुई। उसका नाम था अहम। वो शुक्राचार्य के समीप गया और उन्हें गुरु बना लिया। वह अहम से अहंतासुर हो गया। उसने खुद का एक राज्य बसा लिया और भगवान गणेश को तप से प्रसन्न करके वरदान प्राप्त कर लिए। उसने भी बहुत अत्याचार और अनाचार फैलाया। तब गणेश ने धूम्रवर्ण के रूप में अवतार लिया। उनका वर्ण धुंए जैसा था। वे विकराल थे। उनके हाथ में भीषण पाश था जिससे बहुत ज्वालाएं निकलती थीं। धूम्रवर्ण ने अहंतासुर का पराभाव किया। उसे युद्ध में हराकर अपनी भक्ति प्रदान की। . 🙏जय श्री गणेश 🙏

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_*अक्षय तृतीया* (आखा तीज)_, [वैशाख ] उसका महत्व क्यों है और जानिए आज ही के दिन कि कुछ महत्वपुर्ण जानकारियाँ: 🕉 ब्रह्माजी के पुत्र *अक्षय कुमार* का अवतरण। 🕉 *माँ अन्नपूर्णा* का जन्म। 🕉 *चिरंजीवी महर्षी परशुराम* का जन्म हुआ था इसीलिए आज *परशुराम जन्मोत्सव* भी हैं। 🕉 *कुबेर* को खजाना मिला था। 🕉 *माँ गंगा* का धरती अवतरण हुआ था। 🕉 सूर्य भगवान ने पांडवों को *अक्षय पात्र* दिया। 🕉 महाभारत का *युद्ध समाप्त* हुआ था। 🕉 वेदव्यास जी ने *महाकाव्य महाभारत की रचना* गणेश जी के साथ शुरू किया था। 🕉 प्रथम तीर्थंकर *आदिनाथ ऋषभदेवजी भगवान* के 13 महीने का कठीन उपवास का *पारणा इक्षु (गन्ने) के रस से किया* था। 🕉 प्रसिद्ध तीर्थ स्थल *श्री बद्री नारायण धाम* का कपाट खोले जाते है। 🕉 बृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में *श्री कृष्ण चरण के दर्शन* होते है। 🕉 जगन्नाथ भगवान के सभी *रथों को बनाना प्रारम्भ* किया जाता है। 🕉 आदि शंकराचार्य ने *कनकधारा स्तोत्र* की रचना की थी। 🕉 *अक्षय* का मतलब है जिसका कभी क्षय (नाश) न हो!!! 🕉 *अक्षय तृतीया अपने आप में स्वयं सिद्ध मुहूर्त है कोई भी शुभ कार्य का प्रारम्भ किया जा सकता है....!!!* अक्षय रहे *सुख* आपका,😌 अक्षय रहे *धन* आपका,💰 अक्षय रहे *प्रेम* आपका,💕 अक्षय रहे *स्वास्थ* आपका,💪 अक्षय रहे *रिश्ता* हमारा 🌈 अक्षय तृतीया की आपको और आपके सम्पूर्ण परिवार को *हार्दिक शुभकामनाएं* 🙏🏻🙏🏻

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