🇮🇳 जय हिन्द 🇮🇳 !! श्री शिव !! 🇮🇳 वंदे मातरम 🇮🇳 🇮🇳🌷🇮🇳 हिन्दू राष्ट्र भारत की जय 🇮🇳🌷🇮🇳 🇮🇳🌺🇮🇳 गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🇮🇳🌺🇮🇳 🧡🧡🧡 भौम प्रदोष व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं सहित सस्नेह 🧡🧡🧡 🔥‼🔥 हर हर महादेव 🔥‼🔥 🌼🏹🌼 जय श्री राम 🌼🏹🌼 🏵💥🏵 जय श्री हनुमान 🏵💥🏵 💞💓💞 जय श्री राधे कृष्ण 💞💓💞 🥀🥀🇮🇳🇮🇳🥀🥀🥀🇮🇳🥀🥀🥀🇮🇳🇮🇳🥀🥀 जो भारत आज़ाद हुआ था वह ऐतिहासिक पल हमारा था जिसमें गौरवान्ति हुआ भारत देश हमारा था अधिकार दिए इतने सारे बिना भेदभाव के थे लोकतंत्र बना हमारे देश की शान था लाल किले पर बड़ी शान से लहराता तिरंगा हमारा है यह गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय पर्व हमारा है देश भक्तों के बलिदान से , स्वतंत्र हुए है हम .. कोई पूछे कौन हो , तो गर्व से कहेंगे . भारतीय है हम … गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं 💖💖 भौम प्रदोष व्रत 💖💖 🔥... पौष मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत है। यह प्रदोष व्रत 26 जनवरी 2021 (मंगलवार) को है। मंगलवार को होने के कारण इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। प्रदोष व्रत हर महीने एक बार शुक्ल पक्ष और एक बार कृष्ण पक्ष में आते हैं। इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने से कलह, आर्थिक संकट और विवाह संबंधी परेशानियां दूर हो जाती हैं। 🧡👉.. प्रदोष 2021 शुभ मुहूर्त ..👈🧡 त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ- 25 जनवरी दिन सोमवार को देर रात 12 बजकर 24 मिनट पर। त्रयोदशी तिथि समाप्त- 26 जनवरी को देर रात 01 बजकर 11 मिनट पर।  प्रदोष व्रत 26 जनवरी मंगलवार को रखा जाएगा। पूजा का समय-  शाम 05:56 से रात्रि 08:35 तक कुंभ राशि में शाम 4:19 बजे बुध ग्रह करेंगे गोचर, राशि परिवर्तन का इस राशि वालों पर क्या पड़ेगा प्रभाव 🧡👉.. 26 जनवरी का पंचांग ..👈🧡 🔥... भौम प्रदोष व्रत के दिन चंद्रमा मिथुन राशि में गोचर कर रहा है। त्रयोदशी तिथि पर वैधृति योग का निर्माण हो रहा है। 🧡👉.. अभिजीत मुहूर्त ..👈🧡 दोपहर 12:12:22 से 12:55:12 तक रहेगा। राहुकाल का समय- 15:14:27 से 16:34:47। शास्त्रों के अनुसार, राहुकाल के दौरान शुभ कार्य वर्जित होते हैं। 🧡👉.. प्रदोष व्रत का महत्व ..👈🧡 🔥... मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है। कहते हैं कि जिन कन्याओं के विवाह में दिक्कत आ रही है, इससे यह भी दूर होती है। साथ ही अशुभ ग्रहों की अशुभता भी दूर होती है। 🧡👉.. प्रदोष व्रत पूजा विधि ..👈🧡 🔥... ब्रह्म मूहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। पूजा स्थल को साफ करें। इसके बाद गंगाजल छिड़कर जगह को पवित्र करें। अब सफेद रंग का कपड़ा बिछाकर चौकी के चारों ओर कलावा बांधें। अब भगवान शिव की प्रतिमा को विराजित करें। शिवजी के चरणों पर गंगाजल अर्पित करें और भगवान को फूल-माला अर्पित करें। भगवान शिव को चंदन लगाएं। शिव प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग का अभिषेक करें। शिवलिंग पर धतूरा और भांग चढ़ाएं। भांग-धतूरा न मिलने मौसमी फल भी चढ़ा सकते हैं। भगवान शिव को धूप, दीप और अगरबत्ती जलाएं। इसके बाद शिवजी की आरती करें। अब भगवान शिव को भोग लगाएं। 🧡👉.. प्रदोष व्रत कथा ..👈🧡 🔥... एक नगर में तीन मित्र राजकुमार, ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र रहते थे। राजकुमार और ब्राह्मण कुमार विवाहित थे, धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया था, लेकिन गौना होना बाकी था। एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे। ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा- ‘नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है।’ धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरन्त ही अपनी पत्‍नी को लाने का फैसला ले लिया। तब धनिक पुत्र के माता-पिता ने समझाया कि अभी शुक्र देवता डूबे हुए हैं, ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवा लाना शुभ नहीं माना जाता, लेकिन धनिक पुत्र ने एक नहीं सुनी और ससुराल पहुंच गया। 🔥... पति-पत्नी के बीच ये 5 बातें ही बढ़ाती हैं प्यार, आप भी जान लीजिए सुखद वैवाहिक जीवन का राज  ससुराल में भी उसे मनाने की कोशिश की गई लेकिन वो नहीं माना। कन्या के माता-पिता को अपनी बेटी की विदाई करनी पड़ी। विदाई के बाद पति-पत्‍नी शहर से निकले ही थे कि बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल की टांग टूट गई। दोनों को चोट लगी लेकिन फिर भी वो चलते रहे। कुछ दूर जाने पर डाकू उनका धन लूटकर ले गए। दोनों घर पहुंचे. वहां धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया। उसके पिता ने वैद्य को बुलाया तो वैद्य ने बताया कि वो तीन दिन में मर जाएगा। जब ब्राह्मण कुमार को यह खबर मिली तो वो धनिक पुत्र के घर पहुंचा और उसके माता-पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। और कहा कि इसे पत्‍नी सहित वापस ससुराल भेज दें। धनिक ने ब्राह्मण कुमार की बात मानी और ससुराल पहुंच गया। धीरे-धीरे उसकी हालात ठीक हो गई और धन-सपंदा में कोई कमी नहीं रही। 💖💖 शुभ मंगल कामनाओ के साथ भौम प्रदोष और गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभेच्छा 💖💖

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दिलों की नफरत को निकालो, वतन के इन दुश्मनों को मारो, ये देश है खतरे में ए -मेरे -हमवतन, भारत मां के सम्मान को बचा लो। 🇮🇳 जय हिन्द 🇮🇳 !! श्री शिव !! 🇮🇳 वंदे मातरम 🇮🇳 🇮🇳🌷🇮🇳 हिन्दू राष्ट्र भारत की जय 🇮🇳🌷🇮🇳 🇮🇳🌺🇮🇳 गणतंत्र दिवस की अग्रिम हार्दिक शुभकामनाएं 🇮🇳🌺🇮🇳 🥀🥀🇮🇳🇮🇳🇮🇳🥀🥀🥀🇮🇳🥀🥀🥀🇮🇳🇮🇳🇮🇳🥀🥀 🌼🌼 गणतंत्र दिवस की एक सुन्दर कविता 🌼🌼 गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय पर्व हमारा है ना कोई हिंदू मुस्लिम ना कोई सिख ईसाई हैं इस पर्व में हम सब हैं हिंदुस्तानी भाई भाई है इस दिन हुआ संविधान लागू हमारा आज़ादी की वो पहली लहर थी रूबरू हुए थे हम अपने अधिकारों से फिर हम सब ने मिल कर भारत माता कि जय का जयकारा लगाया था एक सुकून और अपना पन इस हवा में पाया था कहां गया वो सुकून और अपना पन आज हवा में भी दहसत हैं एक डर है क्या इस आज़ाद भारत लिए इतने वीरों की बलि चढ़ाई थी क्यों भूल गए हम सब उन बलिदानों को जो भारत मां के और अपनी बहनों के लिए हंसते हंसते शहीद हुए आज उन्ही बहनों को अपने हवस की बली चढ़ता है आज हर बच्ची रात से डरती हैं भारत माता खून के आंसू रोती हैं मेरे बच्चे अपने ही भाइयों को ही मार रहे हैं कहां गया वो प्यार विश्वास अपनापन कैसे हैं आज का गणतंत्र दिवस जो भारत आज़ाद हुआ था वह ऐतिहासिक पल हमारा था जिसमें गौरवान्ति हुआ भारत देश हमारा था अधिकार दिए इतने सारे बिना भेदभाव के थे लोकतंत्र बना हमारे देश की शान था लाल किले पर बड़ी शान से लहराता तिरंगा हमारा है यह गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय पर्व हमारा है तब अंग्रेजों का डर था पर आज तो हर गली कूचों में दंगे फसाद और धरने का डर है आज की गंदी राजनीति में हर इंसान दो दो पैसे के लिए बिक जाता है आज अधिकार छीनने का भय नहीं पर आज लड़की पढ़ाओ लड़की बचाओ का नारा है क्या ज़रूरत है इस नारे की यदि समानता का अधिकार हमारा है इंसान इस गंदी राजनीति को समझ कर अपने हितों के लिए सही निर्णय ले पाएगा असल मायने में तब हमारा गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय पर्व बन पाएगा अब हर एक बच्ची हर एक बालक सुरक्षित होगा शहीदों के बलिदानों का मोल पूरा होगा सही मायने में हम उन को सच्ची श्रद्धांजलि दे पाएंगे जिसकी खातिर वह हंसते-हंसते मर गए उनको हम इस नए भारत की पहचान करवाएंगे ना डर होगा ना हवस के पुजारी तब उन वीर क्रांतिकारी की खातिर इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति हम दिल से जलाएंगे तब लाल किले पर बड़ी शान से तिरंगा अपना लेहराएंगे गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय पर्व हम अपना खूब धूमधाम से मनाएंगे।

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🇮🇳 जय हिन्द 🇮🇳 🔥!! श्री शिव !! 🔥 🇮🇳 वंदे मातरम 🇮🇳 🇮🇳🌺🇮🇳 हिन्दू राष्ट्र भारत की जय 🇮🇳🌺🇮🇳 🧡...!! ओम निलकंठेश्वराय नमः !!...🧡 🧡🧡🧡🔥🔥🙏🏻🙏🏻🔥🔥🧡🧡🧡 🏵🏵 देवों के देव महादेव जी के चरणों में प्रणाम एवं आप सभी प्रिय भ्राता, अनुज एवं निज सखी सम छोटी बड़ी बहनों को सस्नेह वंदन 🏵🏵 🔮🔮🔮🔮💜💜🙏🏻 🔮 ॐ हौं जूं स: ॐ भूर्भुव: स्व: 🔮 ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं 🔮 पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव 🔮 बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् 🔮 ॐ स्व: भुव: भू: ॐ स: जूं हौं ॐ !! 🔮 🙏🏻💜💜🔮🔮🔮🔮 🌼🌤🌼 श्री पार्वतीपतेय श्री शिव शंकर भोलेनाथ की असीम कृपा और आशीर्वाद सदैव आप आप एवं आपके परिवार पर अविरत बरसता रहें 🌼🌤🌼 🧡🏵🧡 आपका दिन शुभ एवं मंगलमय रहें 🧡🏵🧡 💥💢💥 ‼ ओम नमः शिवाय ‼💥💢💥 🌼🏹🌼 ओम रामेश्वराय नमः 🌼🏹🌼 ❤❤❤ श्री महालक्ष्मीये नमः ❤❤❤ 💝💝💝 जय श्री राधे कृष्ण 💝💝💝

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🌼🌼...!! ओम सूर्याय नमः !!...🌼🌼 🏵🏵🏵🥀🥀🙏🏻🥀🥀🏵🏵🏵 🌞🌞🌞🌤🌤🙏🏻 🌞 ऊँ भास्कराय पुत्रं देहि महातेजसे।   🌞 धीमहि तन्नः सूर्य प्रचोदयात् ॥ 🌞 🙏🏻🌤🌤🌞🌞🌞 💝💝💝 आज शुभ रविवार के दिन आरोग्य के देवता भगवान श्री सूर्य देव और श्री हरि विष्णु जी की पूजा अर्चना भरी पुत्रदा एकादशी पर आप सभी को हार्दिक शुभेच्छा सह वंदन 💝💝💝 🧡🧡🧡 ओम सूर्य देवाय नमः 🧡🧡🧡 ❤❤❤ ओम नमो भगवते वासुदेवाय ❤❤❤ 💙💙💙💦💦🙏🏻 💙 ॐ सहस्त्र शीर्षाः पुरूषः 💙 सहस्त्राक्षः सहस्त्र पाक्ष। 💙 स भूमि ग्वं सब्येत स्तपुत्वा 💙 अयतिष्ठ दर्शां गुलम्॥ 💙 🙏🏻💦💦💙💙💙 🌺🌺🌺 जय श्री हरि विष्णु 🌺🌺🌺 🌷🔱🌷 जय महालक्ष्मी माता 🌷🔱🌷 🌼⚜🌼 हर हर महादेव 🌼⚜🌼 💝💝💝 जय श्री राधे कृष्ण 💝💝💝 👨‍👩‍👦✍.. पौष मास में शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पौष पुत्रदा एकादशी कहा जाता है. हिन्दू धर्म में पुत्रदा एकादशी का बहुत महत्व है और सभी व्रतों में सबसे ज्यादा महत्व का होता है। ..✍👨‍👩‍👦 👨‍👩‍👦✍.. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पुत्रदा एकादशी पर विधि-विधान से व्रत रखने पर संतान की प्राप्ति होती है। ..✍👨‍👩‍👦 👨‍👩‍👦✍.. पुत्रदा एकादशी वर्ष में दो बार आती है। पुत्रदा एकादशी सावन और पौष मास मे पड़ती है। जानिए पुत्रदा एकादशी का शुभ मुहूर्त महत्व, व्रत कथा और पूजन विधि ..✍👨‍👩‍👦 👨‍👩‍👦✍.. पुत्रदा एकादशी व्रत का आरंभ 23 जनवरी, शनिवार को रात 08 बजकर 55 मिनट पर होगा और व्रत की समाप्ति 24 जनवरी, रविवार को 10 बजकर 56 मिनट पर होगी। व्रत पारण 25 जनवरी, सोमवार को सुबह 07 बजकर 12 मिनट से 09 बजकर 22 मिनट तक होगा। ..✍👨‍👩‍👦 👨‍👩‍👦👉... पुत्रदा एकादशी का महत्व ...👈👨‍👩‍👦 पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। माना जाता है कि जो जातक पुत्रदा एकादशी पर विधि-विधान से व्रत रखता है, भगवान विष्णु उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. इस दिन व्रत रखने से व्रती को योग्य संतान की प्राप्ति भी होती है। 👨‍👩‍👦👉...पोष पुत्रदा एकादशी व्रत कथा ...👈👨‍👩‍👦 🏵.. भारतीय हिन्दू संस्कृति में हर महीने की 11वीं तिथि को ग्यारस/एकादशी का व्रत-उपवास किया जाता है। यह तिथि अत्यंत पवित्र तिथि मानी गई है। प्रत्येक मास में 2 एकादशी तिथियां आती हैं- एक शुक्ल पक्ष और दूसरी कृष्ण पक्ष में। जो भक्त एकादशी का व्रत पूरे विधि-विधान से करता है, उसकी समस्त मनोकामनाएं श्री हरि विष्णु शीघ्र ही पूरी करते हैं...। ..🏵 🏵.. महाराज युधिष्ठिर ने पूछा- हे भगवान! आपने सफला एकादशी का माहात्म्य बताकर बड़ी कृपा की। अब कृपा करके यह बतलाइए कि पौष शुक्ल एकादशी का क्या नाम है, उसकी विधि क्या है और उसमें कौन-से देवता का पूजन किया जाता है।  🏵.. भक्तवत्सल भगवान श्रीकृष्ण बोले- हे राजन! इस एकादशी का नाम पुत्रदा एकादशी है। इसमें भी नारायण भगवान की पूजा की जाती है। इस चर और अचर संसार में पुत्रदा एकादशी के व्रत के समान दूसरा कोई व्रत नहीं है। इसके पुण्य से मनुष्य तपस्वी, विद्वान और लक्ष्मीवान होता है। इसकी मैं एक कथा कहता हूं, सो तुम ध्यानपूर्वक सुनो। 🏵.. भद्रावती नामक नगरी में सुकेतुमान नाम का एक राजा राज्य करता था। उसके कोई पुत्र नहीं था। उसकी स्त्री का नाम शैव्या था। वह निपुती होने के कारण सदैव चिंतित रहा करती थी। राजा के पितर भी रो-रोकर पिंड लिया करते थे और सोचा करते थे कि इसके बाद हमको कौन पिंड देगा। राजा को भाई, बांधव, धन, हाथी, घोड़े, राज्य और मंत्री इन सबमें से किसी से भी संतोष नहीं होता था।  🏵.. वह सदैव यही विचार करता था कि मेरे मरने के बाद मुझको कौन पिंडदान करेगा। बिना पुत्र के पितरों और देवताओं का ऋण मैं कैसे चुका सकूंगा। जिस घर में पुत्र न हो, उस घर में सदैव अंधेरा ही रहता है इसलिए पुत्र उत्पत्ति के लिए प्रयत्न करना चाहिए।  🏵.. जिस मनुष्य ने पुत्र का मुख देखा है, वह धन्य है। उसको इस लोक में यश और परलोक में शांति मिलती है अर्थात उसके दोनों लोक सुधर जाते हैं। पूर्व जन्म के कर्म से ही इस जन्म में पुत्र, धन आदि प्राप्त होते हैं। राजा इसी प्रकार रात-दिन चिंता में लगा रहता था।  🏵.. एक समय तो राजा ने अपने शरीर को त्याग देने का निश्चय किया, परंतु आत्मघात को महान पाप समझकर उसने ऐसा नहीं किया। एक दिन राजा ऐसा ही विचार करता हुआ अपने घोड़े पर चढ़कर वन को चल दिया तथा पक्षियों और वृक्षों को देखने लगा। उसने देखा कि वन में मृग, व्याघ्र, सूअर, सिंह, बंदर, सर्प आदि सब भ्रमण कर रहे हैं। हाथी अपने बच्चों और हथिनियों के बीच घूम रहा है। 🏵.. इस वन में कहीं तो गीदड़ अपने कर्कश स्वर में बोल रहे हैं, कहीं उल्लू ध्वनि कर रहे हैं। वन के दृश्यों को देखकर राजा सोच-विचार में लग गया। इसी प्रकार आधा दिन बीत गया। वह सोचने लगा कि मैंने कई यज्ञ किए, ब्राह्मणों को स्वादिष्ट भोजन से तृप्त किया फिर भी मुझको दु:ख प्राप्त हुआ, क्यों? 🏵.. राजा प्यास के मारे अत्यंत दु:खी हो गया और पानी की तलाश में इधर-उधर फिरने लगा। थोड़ी दूरी पर राजा ने एक सरोवर देखा। उस सरोवर में कमल खिले थे तथा सारस, हंस, मगरमच्छ आदि विहार कर रहे थे। उस सरोवर के चारों तरफ मुनियों के आश्रम बने हुए थे। उसी समय राजा के दाहिने अंग फड़कने लगे। राजा शुभ शकुन समझकर घोड़े से उतरकर मुनियों को दंडवत प्रणाम करके बैठ गया।  🏵.. राजा को देखकर मुनियों ने कहा- हे राजन्! हम तुमसे अत्यंत प्रसन्न हैं। तुम्हारी क्या इच्छा है, सो कहो।  🏵.. राजा ने पूछा- महाराज आप कौन हैं और किसलिए यहा आए हैं? कृपा करके बताइए। 🏵.. मुनि कहने लगे कि हे राजन्! आज संतान देने वाली पुत्रदा एकादशी है, हम लोग विश्वदेव हैं और इस सरोवर में स्नान करने के लिए आए हैं। 🏵.. यह सुनकर राजा कहने लगा कि महाराज, मेरे भी कोई संतान नहीं है। यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो एक पुत्र का वरदान दीजिए।  🏵.. मुनि बोले- हे राजन्! आज पुत्रदा एकादशी है। आप अवश्य ही इसका व्रत करें, भगवान की कृपा से अवश्य ही आपके घर में पुत्र होगा।  🏵.. मुनि के वचनों को सुनकर राजा ने उसी दिन एकादशी का व्रत किया और द्वादशी को उसका पारण किया। इसके पश्चात मुनियों को प्रणाम करके महल में वापस आ गया। कुछ समय बीतने के बाद रानी ने गर्भ धारण किया और 9 महीने के पश्चात उनके एक पुत्र हुआ। 🏵.. वह राजकुमार अत्यंत शूरवीर, यशस्वी और प्रजापालक हुआ। श्रीकृष्ण बोले- हे राजन्! पुत्र की प्राप्ति के लिए पुत्रदा एकादशी का व्रत करना चाहिए। जो मनुष्य इस माहात्म्य को पढ़ता या सुनता है, उसे अंत में स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

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फिर में कह चूका हु की  ये किताब लिखने का काम करने वाले चतुर जवान लोग थे ! लगभग 40 से 60 वर्ष के बिच के ! और इन आयु का व्यक्ति 1858 में पैदा भी नही हुआ !!.......................झूठ नं 8 ❤❤❤... इससे आगे की कथा ...❤❤❤ ये किताब पूरी एक महाधोखा है !  ये राजू के जन्म के पश्चात लिखी गई और कोरे झूठ ही झूठ है इसमें ! G.एक और झूठ :  फ़क़ीर से साधू बनाने का प्रयास :-- निम्न तस्वीर में बिच वाला साईं नही है ! बिच वाले व्यक्ति की तस्वीर , दाये-बाये (असली साईं) की जगह लेने का प्रयास कर रही है ! यदि ध्यान  नही दिया गया तो असली साईं की तस्वीर बिच वाली तस्वीर से बदल दी जाएगी । क्योकि बिच वाले की सूरत भोली है !................................झूठ नं 9  "Recently there appeared on some websites what was claimed to be a recently discovered photo of Shirdi Sai Baba.It is clearly a photo of that much revered Indian ‘saint’." बिच वाले बाबे के माथे पर बंधा कपडा भी नकली है ! गौर से देखें :- photo shop से एडिट किया हुआ है ! मेने नही किया है इस साईट पर उपलब्ध है :-- http://robertpriddy.wordpress.com/2008/07/04/undiscovered-photo-of-shirdi-sai-baba/ H.एक और महाझूठ !! साँईँ के चमत्कारिता के पाखंड और झूठ का पता चलता है, उसके “साँईँ चालिसा” से।  दोस्तोँ आईये पहले चालिसा का अर्थ जानलेते है:- “हिन्दी पद्य की ऐसी विधा जिसमेँ चौपाईयोँ की संख्या मात्र 40 हो, चालिसा कहलाती है।” सर्वप्रथम देखें की चोपाई क्या / कितनी बड़ी होती है ? हनुमान चालीसा की प्रथम चोपाई :--- जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥...1 ठीक है !! अब साँईँ चालिसा की एक चोपाई देखें :-- पहले साईं के चरणों में, अपना शीश नवाऊँ मैं। कैसे शिर्डी साईं आए, सारा हाल सुनाऊँ मैं।। (1) उपरोक्त में प्रथम पंक्ति में एक कोमा (,) है अतः यदि पहली पंक्ति को (कोमे के पहले व बाद वाले भाग को) एक चोपाई माने तो चोपाईयों की संख्या हुई :--  204 और यदि दोनों पंक्तियों को एक चोपाई माने तो चोपाईयों की संख्या हुई :--  102 हनुमान चालीसा में पुरे 40  है आप यहाँ देख सकते है --->  http://www.vedicbharat.com/p/blog-page_6.html साँईँ चालिसा में  कुल 102  या  204  है .........................................झूठ नं 10 यहाँ देखें --> http://bharatdiscovery.org/india/साईं_चालीसा http://www.indif.com/nri/chalisas/sai_chalisa/sai_chalisa.asp तनिक विचारेँ क्या इतने चौपाईयोँ के होने पर भी उसे चालिसा कहा जा सकता है?? नहीँ न?….. बिल्कुल सही समझा आप लोगोँ ने…. जब इन व्याकरणिक व आनुशासनिक नियमोँ से इतना से इतना खिलवाड़ है, तो साईँ केझूठे पाखंडवादी चमत्कारोँ की बात ही कुछ और है! कितने शर्म की बात है कि आधुनिक विज्ञान के गुणोत्तर प्रगतिशिलता के बावजूद लोग साईँ जैसे महापाखंडियोँ के वशिभूत हो जा रहे हैँ॥ क्या इस भूमि की सनातनी संताने इतनी बुद्धिहीन हो गयी है कि जिसकी भी काल्पनिक महिमा के गपोड़े सुन ले उसी को भगवान और महान मानकर भेडॉ की तरह उसके पीछे चल देती है ? इसमे हमारा नहीं आपका ही फायदा है …. श्रद्धा और अंधश्रद्धा में फर्क होता है,  श्रद्धालु बनो ….  भगवान को चुनो … I.बाबा फ़क़ीर अथवा धनि   1. बाबा की चरण पादुका स्थापित करने के लिए बम्बई के एक भक्त ने 25 रुपयों का मनीआर्डर भेजा । स्थापना में कुल 100 रूपये व्यय हुए जिसमे 75  रुपये चंदे द्वारा एकत्र हुए ! प्रथम पाच वर्षों तक कोठारे के निमित 2 रूपये मासिक भेजते रहे । स्टेशन से छडे ढोने और  छप्पर बनाने का खर्च 7   रूपये 8 आने सगुण मेरु नायक ने दिए ! {अध्याय 5} 25 +75 =100  2 रु  मासिक, 5 वर्षों तक = 120 रूपये  100 +120 =220  रूपये कुल   ये घटनाये 19वीं सदी की है उस समय लोगो की आय 2-3 रूपये प्रति माह हुआ करती थी ! तो 220 रूपये कितनी बड़ी रकम हुई ?? उस समय के लोग  2-3 रूपये प्रति माह में अपना जीवन ठीक ठाक व्यतीत करते थे ! और आज के 10,000 रूपये प्रति माह में अपना जीवन ठीक ठाक व्यतीत करते है ! तो उस समय और आज के समय में रुपयों का अनुपात (Ratio) क्या हुआ ?  10000/3=3333.33 तो उस समय के  220 रूपये आज के कितने के बराबर हुए ?  220*3333.33=733332.6 रूपये (7 लाख 33 हजार रूपये) यदि हम यह अनुपात 3333.33 की अपेक्षा कम से कम 1000  भी माने तो :- उस समय के 220 रूपये अर्थात आज के कम से कम 2,20000  (2 लाख 20 हजार रूपये) {अनुपात=1000 } इतने रूपये एकत्र हो गये ?  मस्त गप्पे है इस किताब में तो ! स्थापना में कुल 100 रूपये व्यय हुए =1,00,000 (1 लाख रूपये) 2. बाबा का दान विलक्षण था ! दक्षिणा के रूप में जो धन एकत्र होता था उसमें से वे किसी को 20, किसी को 15 व किसी को 50 रूपये प्रतिदिन  वितरित कर देते थे ! {अध्याय 7 } 3. बाबा हाजी के पास गये और अपने पास से 55 रूपये निकाल कर हाजी को दे दिए !  {अध्याय 11 } 4. बाबा ने प्रो.सी.के. नारके से 15 रूपये दक्षिणा मांगी, एक अन्य  घटना में उन्होंने श्रीमती आर. ए. तर्खड से 6 रूपये  दक्षिणा मांगी {अध्याय 14  } 5 . उन्होंने जब महासमाधि ली तो 10 वर्ष तक हजारों रूपये दक्षिणा मिलने पर भी उनके पास स्वल्प राशी ही शेष थी । {अध्याय 14   } यहाँ हजारों रूपये को कम से कम 1000 रूपये भी माने तो आप सोच सकते है कितनी बड़ी राशी थी ये ? उस समय के 1000  अर्थात आज के 10  लाख  रूपये कम से कम ! {अनुपात =1000 } 6 . बाबा ने आज्ञा  दी की शामा के यहाँ जाओ और कुछ समय वर्तालाब  कर 15 रूपये दक्षिणा ले आओ ! {अध्याय 18  } 7 बाबा के पास जो दक्षिणा एकत्र होती थी, उनमे से वे 50 रूपये प्रतिदिन बड़े बाबा को दे दिया करते थे ! {अध्याय 23  } 8 . प्रतिदिन दक्षिणा में बाबा के पास  बहुत रूपये इक्कठे हो जाया करते थे, इन रुपयों में से वे किसी को 1, किसी को 2 से 5, किसी को 6,  इसी प्रकार 10 से 20  और 50  रूपये तक वो अपने भक्तों को दे दिया करते थे ! {अध्याय 29  } 9  . निम्न प्रति अध्याय 32 की है : ❤❤❤... क्रमश ...❤❤❤

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🇮🇳 जय हिन्द 🇮🇳 🥀🙏🏻🥀🇮🇳 वंदे मातरम 🇮🇳 🇮🇳🥀🇮🇳 हिन्दू राष्ट्र भारत की जय 🇮🇳🥀🇮🇳 🔥🏹🔥 सुबह की राम राम जी 🔥🏹🔥 🤎💢🤎...!! ओम शं शनैश्चराय नमः !!...🤎💢🤎 💢💢⚜⚜⚔⚔🙏🏻🔔🙏🏻⚔⚔⚜⚜💢💢 💙💙💙💦💦🙏🏻 💙 ध्वजिनी धामिनी चैव कंकाली कलहप्रिया। 💙 कण्टकी कलही चाऽथ तुरंगी महिषी अजा॥ 💙 🙏🏻💦💦💙💙💙 🌼🌼 सूर्य पूत्र श्री शनिदेव की अमी दृष्टी और भगवान श्री रामचंद्र जी की कृपा और आशीर्वादों भरे दिन शनिवार का आपको सस्नेह वंदन 🌼🌼 🔮🔮🔮🇮🇳🇮🇳🙏🏻🙏🏻 🔮 एक सच्चे सैनिक को सैन्य 🔮 प्रशिक्षण और आध्यात्मिक 🔮 प्रशिक्षण दोनों की ज़रुरत होती है। 🔮 🙏🏻🇮🇳🇮🇳🔮🔮🔮 🔮🇮🇳🔮 नेताजी सुभाषचंद्र बोस 🔮🇮🇳🔮 🇮🇳🇮🇳 🙏🏻 नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जन्म जयंती पर शत शत नमन 🙏🏻 🇮🇳🇮🇳 🌷🌷...!! 🏹 जय श्री राम 🏹 !!...🌷🌷 🔥🔥...!! जय श्री हनुमान !!...🔥🔥 🌼🔔🌼...!! हर हर महादेव !!...🌼🔔🌼 💝💝💝...!! जय श्री कृष्ण !!...💝💝💝     🔱🔱🔱🏹🏹🙏🏻🙏🏻     जय राम रमा रमनं समनं । भव ताप भयाकुल पाहि जनम ॥   अवधेस सुरेस रमेस बिभो ।   सरनागत मागत पाहि प्रभो ॥        राजा राम, राजा राम,       सीता राम,सीता राम ॥          🙏🏻🙏🏻🏹🏹🔱🔱🔱

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इसी तथ्य के कारन शिर्डी साईं को प्रसिद्धी मिलनी शुरू हुई ! इससे पूर्व शिर्डी साईं को गली का कुता  भी नही जनता था :- आगे सिद्ध किया गया है ! ये है सारा खेल ! ❤❤❤ .... इससे आगे की कथा ...❤❤❤ सत्यनारायण राजू ने शिरडी के साईं बाबा के पुनर्जन्म की धारणा के साथ ही सत्य साईं बाबा के रूप में पूरी दुनिया में ख्याति अर्जित की। सत्य साईं बाबा अपने चमत्कारों के लिए भी प्रसिद्ध रहे और वे हवा में से अनेक चीजें प्रकट कर देते थे और इसके चलते उनके आलोचक उनके खिलाफ प्रचार करते रहे। वैसे ये भी एक नंबर का नाटक खोर था ! यहाँ देखें:-- http://hi.wikipedia.org/wiki/सत्य_साईं_बाबा मेने सुना है की सत्य साईं (राजू) के पुनर्जन्म का किस्सा इसकी(राजू की ) पुस्तक में है ! (यधपि  मेने इसकी पुस्तक नही पड़ी है ) "पुट्टापर्थी के सत्य साईं इस दुनिया को एक साल पहले अलविदा कह गये थे. उनके चमत्कारों और दावों पर सवाल उठे तो भक्तों को उनमें भगवान दिखते थे. उसी सत्य साईं ने सालों पहले ये भविष्यवाणी की थी कि अपने देहांत के एक साल बाद वो फिर अवतार लेंगे. इसीलिए उनकी पहली बरसी पर ये सवाल उठ रहा है कि कहां है सत्य साईं का अवतार" जरा सोचिये, ये लोग इतने पापी है की इनकी मुक्ति ही नही हो  पा रही, बार बार जन्म ले रहे है ! इसी प्रकार ये लोग पुनर्जन्म लेते रहेंगे, अभी के भारतीय, महान ऋषियों की संताने होकर भी मुर्ख है! इनके पीछे हो जाते है  !!! Both Exposed Shirdi Sai & Satya Sai as Well ! F.ये किताब कितनी सही कितनी गलत ? दोस्तों उपर हम देख चुके है की ये किताब निश्चित रूप से सत्य साईं (राजू) के जन्म के पश्चात लिखी गई ! तभी लोगो ने सोचा की राजू को ही बाबा का पुनर्जन्म सिद्ध करना है तभी राजू के जन्म की बात साईं सच्चरित्र में आयी है ! क्यू की साईं की प्रसिद्धी मात्र इसी एक तथ्य पर निर्भर करती थी की :- "भविष्य में वे 8 वर्ष के बालक के रूप में पुनः प्रकट होंगे" (अध्याय 43) राजू जन्मा  सन 1926 में अर्थात बाबा की मृत्यु के 8 वर्ष पश्चात ! इस हिसाब से "साईं सच्चरित्र" लिखने की  कम से कम तारिक बनती है सन 1926 (राजू का जन्म).. "इससे पहले किताब का लिखा जाना संभव ही नही" ---- मेरा दावा है !! क्यू की राजू के जन्म की बात उस किताब में दो जगह आ चुकी है ! F(a).गणितीय विवेचन :--- {एक और बड़ा खुलासा} 1. "साईं सच्चरित्र" लिखे जाने का कम से कम वर्ष सन 1926 ! 2. बाबा 16 वर्ष में दिखे, 3 वर्ष रहे फिर 1 वर्ष गायब इस प्रकार 20 वर्ष की आयु में बाबा का शिर्डी पुनः आगमन व मृत्यु होने तक वही निवास ! साईं बाबा का जीवन काल 1838 से 1918 (80 वर्ष) तक था (अध्याय 10) अर्थात बाबा 20 वर्ष के थे सन 1858 में ! इस किताब में जितनी भी बाबा की लीलाएं व चमत्कार लिखे गये है वे सभी 20 वर्ष के आयु के पश्चात के ही है ,   क्यू  की 20 वर्ष की आयु में ही वे शिर्डी में मृत्यु होने तक रहे ! 3. स्पष्ट है जो लीला बाबा ने सन 1858 से करनी प्रारंभ की वो लिखी गई इस किताब में सन 1926 में ! अर्थात (1926-1858) 68 वर्षों पश्चात ! अब जरा दिमाग, बुद्धि व अपने विवेक का प्रयोग करिये और सोचिये 68 वर्ष पुराणी घटनाओं को इस किताब में लिखा गया वो कितनी सही  होंगी ????? अब यदि ये माने की किताब लिखने वालों ने जो भी लिखा है वो सब आँखों देखा हाल है तो किताब लिखने वालों की सन 1858 में आयु क्या होगी ??? ध्यान से समझे :-- 1. जैसा की किताब लिखने  वाले बहुत ही चतुर किस्म के लोग थे तभी उन्होंने इस किताब को उलझा कर रख दिया, बाबा के सन्दर्भ में जहाँ जहाँ उनकी आयु व लीला करने का सन लिखने की नोबत आयी वहां वहां उन्होंने  बाते एक ही स्थान पर न लिख कर टुकड़ों में लिखी जैसे : बाबे के सर्वप्रथम देखे जाने की आयु लिखी 16 वर्ष पर सन नही लिखा -----> अध्याय 4 में  जीवन काल 1838 से 1918 लिखा  ----->अध्याय 10  में  इस बिच बाबे  के 3 वर्ष, आयु 16 से 19 को पूरा गायब ही कर दिया ! और बचपन पूरा अँधेरे में है  युवक -->व्यक्ति/फ़क़ीर-->युवक --->व्यक्ति/पुरुष  इस चतुराई से साफ है की वे(किताब लिखने वाले) 40 से 60 वर्ष के रहे होंगे  सन 1926 में जब किताब लिखनी प्रारंभ की ! 1. हम 40 वर्ष माने तो 1858 में वे(किताब लिखने वाले) पैदा भी नही हुए !  1926-40=1886>1858 २. किताब लिखने वालों की आयु सन 1926 में 50 वर्ष माने तो भी वे 1858 में पैदा नही हुए ! ३. 60 वर्ष माने तो भी पैदा नही हुए ----> 1926-60 = 1866 > 1858 4. 68 वर्ष माने तो किताब लिखने वाले जस्ट पैदा ही हुए थे जब बाबा 20 वर्ष के थे ---> 1926-68=1858 (1858=1858) ये तो संभव ही नही की किताब लिखने वाले सन 1858 में जन्मे और जन्म लेते ही  बाबे की लीलाए देखि समझी और 1926 में किताब में लिख दी हो ! तो अब क्या करे ??? किताब लिखने वालों की आयु 68 वर्ष होने भी संभव नही, आयु बढ़ानी पड़ेगी ! माना किताब लिखने वाले बाबे की लीलाओं के समय (सन 1858  से आगे तक) थे 20 वर्ष के, अर्थात बाबे की और किताब लिखने वालों की आयु सन 1858 में 20वर्ष (एक बराबर) थी ! क्यू की कम से कम 20 वर्ष आयु लेनी ही पड़ेगी तभी उन्होंने 1858  में  लीलाए देखि होंगी  व समझी होंगी ! 1. 1858  में 20 वर्ष के तो सन 1926 में हुए ----> 88 वर्ष के (कम से कम ) बाबा खुद ही 80 वर्ष में मर गये तो 88 वर्ष का व्यक्ति क्या जीवित होगा ?? यदि होगा तोभी 88 वर्ष की आयु में ये किताब लिखा जाना संभव ही नही, 88 वर्ष का व्यक्ति चार पाई पकड़ लेता है ! फिर में कह चूका हु की  ये किताब लिखने का काम करने वाले चतुर जवान लोग थे ! लगभग 40 से 60 वर्ष के बिच के ! और इन आयु का व्यक्ति 1858 में पैदा भी नही हुआ !!.......................झूठ नं 8 ❤❤❤... क्रमश ...❤❤❤

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, ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्। भावार्थः- हम उस अविनाशी ईश्वर का ध्यान करते है, जो भूलोक,अंतरिक्ष ,और स्वर्ग लोकोंका का उत्पन्न किया है,उस सृष्टी कर्ता ,पापनाशक,अतिश्रेष्ठ देव को हम धारण करते है – वह (ईश्वर) हमें सद्बुद्धी दें एवम सत्कर्म मे प्रेरित करे। 🌷🌷 जय गायत्री माता 🌷🌷 गायत्री मां से ही चारों वेदों की उत्पति मानी जाती हैं। इसलिये वेदों का सार भी गायत्री मंत्र को माना जाता है। मान्यता है कि चारों वेदों का ज्ञान लेने के बाद जिस पुण्य की प्राप्ति होती है अकेले गायत्री मंत्र को समझने मात्र से चारों वेदों का ज्ञान मिलता जाता है। गायत्री मां को हिंदू भारतीय संस्कृति की जन्मदात्री मानते हैं। कौन हैं गायत्री माता चारों वेद, शास्त्र और श्रुतियां सभी गायत्री से ही पैदा हुए माने जाते हैं। वेदों की उत्पति के कारण इन्हें वेदमाता कहा जाता है, ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं की आराध्य भी इन्हें ही माना जाता है इसलिये इन्हें देवमाता भी कहा जाता है। समस्त ज्ञान की देवी भी गायत्री हैं इस कारण गायत्री को ज्ञान-गंगा भी कहा जाता है। इन्हें भगवान ब्रह्मा की दूसरी पत्नी भी माना जाता है। मां पार्वती, सरस्वती, लक्ष्मी की अवतार भी गायत्री को कहा जाता है। कैसे हुआ गायत्री का विवाह कहा जाता है कि एक बार भगवान ब्रह्मा यज्ञ में शामिल होने जा रहे थे। मान्यता है कि यदि धार्मिक कार्यों में पत्नी साथ हो तो उसका फल अवश्य मिलता है लेकिन उस समय किसी कारणवश ब्रह्मा जी के साथ उनकी पत्नी सावित्री मौजूद नहीं थी इस कारण उन्होंनें यज्ञ में शामिल होने के लिए वहां मौजूद देवी गायत्री से विवाह कर लिया।  कैसे हुआ गायत्री का अवतरण माना जाता है कि सृष्टि के आदि में ब्रह्मा जी पर गायत्री मंत्र प्रकट हुआ। मां गायत्री की कृपा से ब्रह्मा जी ने गायत्री मंत्र की व्याख्या अपने चारों मुखों से चार वेदों के रुप में की। आरंभ में गायत्री सिर्फ देवताओं तक सीमित थी लेकिन जिस प्रकार भगीरथ कड़े तप से गंगा मैया को स्वर्ग से धरती पर उतार लाए उसी तरह विश्वामित्र ने भी कठोर साधना कर मां गायत्री की महिमा अर्थात गायत्री मंत्र को सर्वसाधारण तक पंहुचाया। कब मनाई जाती है गायत्री जयंती गायत्री जयंती की तिथि को लेकर भिन्न-भिन्न मत सामने आते हैं। कुछ स्थानों पर गंगा दशहरा और गायत्री जयंती की तिथि एक समान बताई जाती है तो कुछ इसे गंगा दशहरा से अगले दिन यानि ज्येष्ठ मास की एकादशी को मनाते हैं। वहीं श्रावण पूर्णिमा को भी गायत्री जयंती के उत्सव को मनाया जाता है। श्रावण पूर्णिमा के दिन गायत्री जयंती को अधिकतर स्थानों पर स्वीकार किया जाता है। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी-एकादशी को भी मान्यतानुसार गायत्री जयंती मनाई जाती है।  गायत्री माता की महिमा गायत्री की महिमा में प्राचीन भारत के ऋषि-मुनियों से लेकर आधुनिक भारत के विचारकों तक अनेक बातें कही हैं। वेद, शास्त्र और पुराण तो गायत्री मां की महिमा गाते ही हैं। अथर्ववेद में मां गायत्री को आयु, प्राण, शक्ति, कीर्ति, धन और ब्रह्मतेज प्रदान करने वाली देवी कहा गया है। महाभारत के रचयिता वेद व्यास कहते हैं गायत्री की महिमा में कहते हैं जैसे फूलों में शहद, दूध में घी सार रूप में होता है वैसे ही समस्त वेदों का सार गायत्री है। यदि गायत्री को सिद्ध कर लिया जाये तो यह कामधेनू (इच्छा पूरी करने वाली दैवीय गाय) के समान है। जैसे गंगा शरीर के पापों को धो कर तन मन को निर्मल करती है उसी प्रकार गायत्री रूपी ब्रह्म गंगा से आत्मा पवित्र हो जाती है। गायत्री को सर्वसाधारण तक पहुंचाने वाले विश्वामित्र कहते हैं कि ब्रह्मा जी ने तीनों वेदों का सार तीन चरण वाला गायत्री मंत्र निकाला है। गायत्री से बढ़कर पवित्र करने वाला मंत्र और कोई नहीं है। जो मनुष्य नियमित रूप से गायत्री का जप करता है वह पापों से वैसे ही मुक्त हो जाता है जैसे केंचुली से छूटने पर सांप होता है।

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