*🛕🚩ॐ श्री हनुमते नमः🚩* *🎪🔥हिन्दू पंचांग🔥🎪* ⛅ *दिनांक 02 मार्च 2021* ⛅ *दिन - मंगलवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2077* ⛅ *शक संवत - 1942* ⛅ *अयन - उत्तरायण* ⛅ *ऋतु - वसंत* ⛅ *मास - फाल्गुन (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार - माघ)* ⛅ *पक्ष - कृष्ण* ⛅ *तिथि - चतुर्थी 03 मार्च प्रातः 03:00 तक तत्पश्चात पंचमी* ⛅ *नक्षत्र - हस्त 03 मार्च प्रातः 03:29 तक तत्पश्चात स्वाती* ⛅ *योग - गण्ड सुबह 09:26 तक तत्पश्चात वृद्धि* ⛅ *राहुकाल - शाम 03:47 से शाम 05:15 तक* ⛅ *सूर्योदय - 06:59* ⛅ *सूर्यास्त - 18:42* ⛅ *दिशाशूल - उत्तर दिशा में* ⛅ *व्रत पर्व विवरण - अंगारकी-मंगलवारी चतुर्थी (सूर्योदय से 03 मार्च प्रातः 03:00 तक), संकष्ट चतुर्थी (चन्द्रोदय रात्रि 09:58)* 💥 *विशेष - चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* *🎪🔥हिन्दू पंचांग🔥🎪* 🌷 *मंगलवारी चतुर्थी* 🌷 🙏🏻 *मंत्र जप व शुभ संकल्प की सिद्धि के लिए विशेष योग* 🙏🏻 *मंगलवारी चतुर्थी को किये गए जप-संकल्प, मौन व यज्ञ का फल अक्षय होता है ।* 👉🏻 *मंगलवार चतुर्थी को सब काम छोड़ कर जप-ध्यान करना ... जप, ध्यान, तप सूर्य-ग्रहण जितना फलदायी है...* *🎪🔥हिन्दू पंचांग🔥🎪* 🌷 *मंगलवारी चतुर्थी* 🌷 🙏 *अंगार चतुर्थी को सब काम छोड़ कर जप-ध्यान करना …जप, ध्यान, तप सूर्य-ग्रहण जितना फलदायी है…* 🌷 *> बिना नमक का भोजन करें* 🌷 *> मंगल देव का मानसिक आह्वान करो* 🌷 *> चन्द्रमा में गणपति की भावना करके अर्घ्य दें* 💵 *कितना भी कर्ज़दार हो ..काम धंधे से बेरोजगार हो ..रोज़ी रोटी तो मिलेगी और कर्जे से छुटकारा मिलेगा |* 🙏🏻 *–Pujya Bapuji 17th Jan’10, उज्जैन* *🎪🔥हिन्दू पंचांग🔥🎪* 🌷 *कोई कष्ट हो तो* 🌷 🙏🏻 *हमारे जीवन में बहुत समस्याएँ आती रहती हैं, मिटती नहीं हैं ।, कभी कोई कष्ट, कभी कोई समस्या | ऐसे लोग शिवपुराण में बताया हुआ एक प्रयोग कर सकते हैं कि, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (मतलब पुर्णिमा के बाद की चतुर्थी ) आती है | उस दिन सुबह छः मंत्र बोलते हुये गणपतिजी को प्रणाम करें कि हमारे घर में ये बार-बार कष्ट और समस्याएं आ रही हैं वो नष्ट हों |* 👉🏻 *छः मंत्र इस प्रकार हैं –* 🌷 *ॐ सुमुखाय नम: : सुंदर मुख वाले; हमारे मुख पर भी सच्ची भक्ति प्रदान सुंदरता रहे ।* 🌷 *ॐ दुर्मुखाय नम: : मतलब भक्त को जब कोई आसुरी प्रवृत्ति वाला सताता है तो… भैरव देख दुष्ट घबराये ।* 🌷 *ॐ मोदाय नम: : मुदित रहने वाले, प्रसन्न रहने वाले । उनका सुमिरन करने वाले भी प्रसन्न हो जायें ।* 🌷 *ॐ प्रमोदाय नम: : प्रमोदाय; दूसरों को भी आनंदित करते हैं । भक्त भी प्रमोदी होता है और अभक्त प्रमादी होता है, आलसी । आलसी आदमी को लक्ष्मी छोड़ कर चली जाती है । और जो प्रमादी न हो, लक्ष्मी स्थायी होती है ।* 🌷 *ॐ अविघ्नाय नम:* 🌷 *ॐ विघ्नकरत्र्येय नम:* 🙏🏻 *- Shri Sureshanandji Dewas 16th April' 2013* *🎪🔥हिन्दू पंचांग🔥🎪* *प्रबिसि नगर कीजे सब काजा*। *हृदयँ राखि कौसलपुर राजा*।। *गरल सुधा रिपु करहिं मिताई*। *गोपद सिंधु अनल सितलाई*।। *गरुड़ सुमेरु रेनू सम ताही*। *राम कृपा करि चितवा जाही*।। *अति लघु रूप धरेउ हनुमाना*। *पैठा नगर सुमिरि भगवाना*।। *मंदिर मंदिर प्रति करि सोधा*। *देखे जहँ तहँ अगनित जोधा*।। *गयउ दसानन मंदिर माहीं*। *अति बिचित्र कहि जात सो नाहीं*।। *सयन किए देखा कपि तेही*। *मंदिर महुँ न दीखि बैदेही*।। *भवन एक पुनि दीख सुहावा*। *हरि मंदिर तहँ भिन्न बनावा*।। 🛕🛕🕉️🕉️🎪🙏🎪🕉️🕉️🛕🛕

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*🌞🌞ॐ श्री सूर्याय नमः🌞🌞* *🎪🔥हिन्दू पंचांग🔥🎪* ⛅ *दिनांक 28 फरवरी 2021* ⛅ *दिन - रविवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2077* ⛅ *शक संवत - 1942* ⛅ *अयन - उत्तरायण* ⛅ *ऋतु - वसंत* ⛅ *मास - फाल्गुन (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार - माघ)* ⛅ *पक्ष - कृष्ण* ⛅ *तिथि - प्रतिपदा सुबह 11:18 तक तत्पश्चात द्वितीया* ⛅ *नक्षत्र - पूर्वाफाल्गुनी सुबह 09:36 तक तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी* ⛅ *योग - धृति शाम 04:22 तक तत्पश्चात शूल* ⛅ *राहुकाल - शाम 05:15 से शाम 06:43 तक* ⛅ *सूर्योदय - 07:01* ⛅ *सूर्यास्त - 18:41* ⛅ *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में* ⛅ *व्रत पर्व विवरण - गुरु प्रतिपदा, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस* 💥 *विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड(कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* 💥 *रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)* 💥 *रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)* 💥 *रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)* 💥 *स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए। इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं।* *🎪🔥हिन्दू पंचांग🔥🎪* 🌷 *अनिद्रा के रोग में* 🌷 🍉 *३ ग्राम तरबूज के सफ़ेद बीज पीसके उसमें ३ ग्राम खसखस पीस के सुबह अथवा शाम को १ हफ्ते तक खाएं ।* 🍸 *६ ग्राम खसखस २५० ग्राम पानी में पीस के छान लें और उसमें २०-२५ ग्राम मिश्री मिलाकर सुबह या शाम पियें ।* 🍎 *मीठे सेब का मुरब्बा खाएं ।* 🍼 *रात को दूध पियें ।* 🙏🏻 *रात को सोते समय ॐ का लम्बा उच्चारण १५ मिनट तक करें ।* 🙏🏻 *पूज्य बापूजी - Nasik-4th March 2011* *🎪🔥हिन्दू पंचांग🔥🎪* 🌷 *क्रोधी व्यक्ति के लिए* 🌷 😬 *जिन्हें गुस्सा आता हो, वे सुबह २ मीठे सेब खूब चबा -चबा कर खाएं ।* 🙏🏻 *पूज्य बापूजी - Nasik -4th March 2011* *🎪🔥हिन्दू पंचांग🔥🎪* 🌷 *कोई भी ग्रह विपरीत हो तो*🌷 🙏🏻 *नौ ग्रहों में से कोई भी ग्रह* *किसी का विपरीत हो या कष्टदायी हो रहा हो तो शिवजी की पूजा करने से सब शांत रहते हैं | सब ग्रहों के स्वामी हैं शिवजी*। 🙏🏻 - *Shri Sureshanandji Surat 24th Dec' 2012* *🎪🔥हिन्दू पंचांग🔥🎪* *'बडे भाग मानुष तनु पावा ।* *सुर दुर्लभ सब ग्रन्थन्हि गावा ।।* *साधन धाम मोच्छ कर द्वारा ।* *पाइ न जेहिं परलोक संवारा ।।* *सो परत्र दुख पावइ* *सिर धुनि धुनि पछिताइ ।* *कालहि कर्महि ईस्वरहि* *मिथ्या दोष लगाइ* ।। 🛕🛕🎪🎪🕉️🚩🕉️🎪🎪🛕🛕

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*🛕🕉️ॐ नमः शिवाय🕉️🛕* *🎪🔥हिन्दू पंचांग🔥🎪* ⛅ *दिनांक 22 फरवरी 2021* ⛅ *दिन - सोमवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2077* ⛅ *शक संवत - 1942* ⛅ *अयन - उत्तरायण* ⛅ *ऋतु - वसंत* ⛅ *मास - माघ* ⛅ *पक्ष - शुक्ल* ⛅ *तिथि - दशमी शाम 05:16 तक तत्पश्चात एकादशी* ⛅ *नक्षत्र - मॄगशिरा सुबह 10:58 तक तत्पश्चात आर्द्रा* ⛅ *योग - प्रीति 23 फरवरी प्रातः 05:24 तक तत्पश्चात आयुष्मान्* ⛅ *राहुकाल - सुबह 08:31 से सुबह 09:58 तक* ⛅ *सूर्योदय - 07:05* ⛅ *सूर्यास्त - 18:38* ⛅ *दिशाशूल - पूर्व दिशा में* ⛅ *व्रत पर्व विवरण* - 💥 *विशेष* - *🎪🔥हिन्दू पंचांग🔥🎪* 🌷 *एकादशी व्रत के लाभ* 🌷 ➡ *22 फरवरी 2021 सोमवार को शाम 05:17 से 23 फरवरी, मंगलवार को शाम 06:05 तक एकादशी है ।* 💥 *विशेष - 23 फरवरी, मंगलवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।* 🙏🏻 *एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है ।* 🙏🏻 *जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।* 🙏🏻 *जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।* 🙏🏻 *एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं ।इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।* 🙏🏻 *धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।* 🙏🏻 *कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।* 🙏🏻 *परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है ।पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ ।भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है ।* *🎪🔥हिन्दू पंचांग🔥🎪* 🌷 *एकादशी के दिन करने योग्य* 🌷 🙏🏻 *एकादशी को दिया जला के विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें .......विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l* 🙏🏻 *Sureshanandji Haridwar 11.02.2010* *🎪🔥हिन्दू पंचांग🔥🎪* 🌷 *एकादशी के दिन ये सावधानी रहे* 🌷 🙏🏻 *महीने में १५-१५ दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के दिन जो चावल खाता है... तो धार्मिक ग्रन्थ से एक- एक चावल एक- एक कीड़ा खाने का पाप लगता है...ऐसा डोंगरे जी महाराज के भागवत में डोंगरे जी महाराज ने कहा* 🙏🏻 *- पूज्य बापूजी मुंबई 1/1/2012* *🎪🔥हिन्दू पंचांग🔥🎪* *बिस्वनाथ मम नाथ पुरारी*। *त्रिभुवन महिमा विदित तुम्हारी* ।। *वेद मंत्र मुनिवर उच्चरहीं*। *जय जय जय संकर सुर करहीं* ।। *महामंत्र जोई जपत महेसू*। *कासी मुकुति हेतु उपदेसू*।। 🎪🎪🕉️🕉️🔥🔱🔥🕉️🕉️🎪🎪

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‼️श्रीरामचरित मानस प्रारंभ‼️ ‼️बाल काण्ड ‼️ ‼️प्रथम सोपान ‼️ ‼️भाग-४ ‼️ दोहा: जथा सुअंजन अंजि दृग साधक सिद्ध सुजान। कौतुक देखत सैल बन भूतल भूरि निधान॥1॥ भावार्थ:- जैसे सिद्धांजन को नेत्रों में लगाकर साधक, सिद्ध और सुजान पर्वतों, वनों और पृथ्वी के अंदर कौतुक से ही बहुत सी खानें देखते हैं॥1॥ चौपाई: गुरु पद रज मृदु मंजुल अंजन। नयन अमिअ दृग दोष बिभंजन॥ तेहिं करि बिमल बिबेक बिलोचन। बरनउँ राम चरित भव मोचन॥1॥ भावार्थ:- श्री गुरु महाराज के चरणों की रज कोमल और सुंदर नयनामृत अंजन है, जो नेत्रों के दोषों का नाश करने वाला है। उस अंजन से विवेक रूपी नेत्रों को निर्मल करके मैं संसाररूपी बंधन से छुड़ाने वाले श्री रामचरित्र का वर्णन करता हूँ॥1॥ चौपाई: बंदउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना॥ सुजन समाज सकल गुन खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी॥2॥ भावार्थ:- पहले पृथ्वी के देवता ब्राह्मणों के चरणों की वन्दना करता हूँ, जो अज्ञान से उत्पन्न सब संदेहों को हरने वाले हैं। फिर सब गुणों की खान संत समाज को प्रेम सहित सुंदर वाणी से प्रणाम करता हूँ॥2॥ चौपाई: साधु चरित सुभ चरित कपासू। निरस बिसद गुनमय फल जासू॥ जो सहि दुख परछिद्र दुरावा। बंदनीय जेहिं जग जस पावा॥3॥ भावार्थ:- संतों का चरित्र कपास के चरित्र (जीवन) के समान शुभ है, जिसका फल नीरस, विशद और गुणमय होता है। (कपास की डोडी नीरस होती है, संत चरित्र में भी विषयासक्ति नहीं है, इससे वह भी नीरस है, कपास उज्ज्वल होता है, संत का हृदय भी अज्ञान और पाप रूपी अन्धकार से रहित होता है, इसलिए वह विशद है और कपास में गुण (तंतु) होते हैं, इसी प्रकार संत का चरित्र भी सद्गुणों का भंडार होता है, इसलिए वह गुणमय है।) (जैसे कपास का धागा सुई के किए हुए छेद को अपना तन देकर ढँक देता है, अथवा कपास जैसे लोढ़े जाने, काते जाने और बुने जाने का कष्ट सहकर भी वस्त्र के रूप में परिणत होकर दूसरों के गोपनीय स्थानों को ढँकता है, उसी प्रकार) संत स्वयं दुःख सहकर दूसरों के छिद्रों (दोषों) को ढँकता है, जिसके कारण उसने जगत में वंदनीय यश प्राप्त किया है॥3॥ हमारे पेज "सनातन वैदिक धर्म को नीचे दिए लिंक से लाइक करके फेवरेट लिस्ट में रख लीजिए ताकि आपको सत्य सनातन वैदिक हिन्दू हिन्दू धर्म की सम्पूर्ण जानकारियां प्राप्त हो सकें 👇👇👇👇 https://www.facebook.com/sanatanavaidikdharma2020/ सनातन धर्म की समस्त जानकारियों के लिए हमारे फेसबुक ग्रुप " संस्कार संस्कृति और सनातन धर्म" को नीचे दिए लिंक के माध्यम से ज्वॉइन कीजिए👇👇👇 https://www.facebook.com/groups/638083150254281/?ref=share 🚩 जय श्री राम 🚩 🚩 जय सियाराम 🚩 🚩 जय श्री रामचरितमानस 🚩

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मित्रों आज गुरुवार है, आज हम आपको भगवान विष्णु का सद्गुरु रूप में ‘दत्तात्रेय’ अवतार के बारे में बतायेगें!!!!!! दत्रात्रेयजी साक्षात् भगवान हैं,प्राणियों के अज्ञान को मिटाने और उनके हृदय में ज्ञान का प्रकाश फैलाने के लिए भगवान विष्णु ने सद्गुरु ‘श्रीदत्तात्रेयजी’ के रूप में अवतार धारण किया । भगवान विष्णु के चौबीस अवतारों में सिद्धराज श्रीदत्तात्रेयजी का अवतार छठा माना जाता है । इस अवतार की समाप्ति नहीं है इसलिए श्रीदत्तात्रेयजी ‘अविनाश’कहलाते हैं । चिरंजीवी होने के कारण इनके दर्शन अब भी भक्तों को होते हैं । समस्त सिद्धों के राजा होने के कारण इन्हें ‘सिद्धराज’ कहते हैं । योगविद्या के असाधारण आचार्य होने के कारण वे ‘योगीराज’ कहलाते हैं । उन्होंने अपने योगचातुर्य से देवताओं की रक्षा की इसलिए वे ‘देवदेवेश्वर’ भी कहे जाते हैं । महर्षि अत्रि और सती अनुसूया के पुत्र हैं श्रीदत्तात्रेयजी !!!!!! श्रीमद्भागवत (२।७।४) के अनुसार ब्रह्माजी के मानस पुत्र महर्षि अत्रि ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से घोर तप किया । भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर वर मांगने को कहा तो महर्षि अत्रि ने कहा—‘मुझे प्राणियों का दु:ख दूर करने वाला पुत्र प्राप्त हो ।’ इस पर भगवान विष्णु ने कहा—‘मैंने अपने-आप को तुम्हें दे दिया ।’ इस प्रकार भगवान विष्णु ही महर्षि अत्रि और सती अनुसूया के पुत्र रूप में अवतरित हुए और स्वयं को अत्रि को दान देने के कारण ‘दत्त’ कहलाए । अत्रि के पुत्र होने से वे ‘आत्रेय’भी कहलाते हैं । दत्त और आत्रेय नामों के संयोग से इनका नाम दत्तात्रेय’ प्रसिद्ध हो गया । महायोगी दत्तात्रेयजी का आविर्भाव मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को प्रदोषकाल में हुआ था जिसे ‘दत्तात्रेय जयन्ती’ के रूप में मनाया जाता है । परम कृपालु भगवान दत्तात्रेय!!!! ▪️ दयालु भगवान दत्तात्रेय कृपा की मूर्ति हैं । वे अंदर से बालक के समान सरल और बाहर से उन्मत्त से दिखाई पड़ने वाले हैं । भक्त के स्मरण करते ही वे उसके पास पहुंच जाते हैं, इसलिए उन्हें ‘स्मृतिगामी’ तथा ‘स्मृतिमात्रानुगन्ता’ भी कहते हैं । ▪️ उनका उन्मत्तों की भांति विचित्र वेष और उनके आगे-पीछे कुत्ते होने से उन्हें पहचानना सरल नहीं है । उच्च-कोटि के संत ही उन्हें पहचान सकते हैं । ▪️ ये सदा ही ज्ञान का दान देते रहते हैं, इसलिए ‘गुरुदेव’ या ‘सद्गुरु’ के नाम से जाने जाते हैं । ▪️ दत्तात्रेयजी श्रीविद्या के परम आचार्य हैं । इनके नाम पर ‘दत्त सम्प्रदाय’ दक्षिण भारत में विशेष रूप से प्रसिद्ध है । वहां इनके अनेक मन्दिर हैं । ▪️ गिरनार में भगवान दत्तात्रेय का सिद्धपीठ है और इनकी गुरुचरण पादुकाएं वाराणसी और आबूपर्बत आदि स्थानों में हैं । ▪️ दत्तात्रेयजी के नाम से एक उपपुराण ‘दत्तपुराण’ भी है । इसमें उनकी आराधना विधि का विस्तार से वर्णन है । ▪️ श्रीमद्भागवत में कहा गया है कि भगवान दत्तात्रेय ने चौबीस गुरुओं से शिक्षा प्राप्त की थी । ये चौबीस गुरु हैं—पृथ्वी, वायु, आकाश, जल, अग्नि, चन्द्रमा, सूर्य, कबूतर, अजगर, समुद्र, पतंग, भौंरा या मधुमक्खी, हाथी, शहद निकालने वाला, हरिन, मछली, पिंगला वेश्या, कुरर पक्षी, बालक, कुंआरी कन्या, बाण बनाने वाला, सर्प, मकड़ी और भृंगी कीड़ा । भगवान दत्तात्रेय के आविर्भाव की कथा!!!!!! एक बार लक्ष्मीजी, सतीजी और सरस्वतीजी को अपने पातिव्रत्य पर गर्व हो गया । भगवान को गर्व सहन नहीं होता है । उन्होंने इन तीनों के गर्वहरण के लिए एक लीला करने की सोची । इस कार्य के लिए उन्होंने नारदजी के मन में प्रेरणा उत्पन्न की । नारदजी घूमते हुए देवलोक पहुंचे और तीनों देवियों के पास बारी-बारी जाकर कहा—‘अत्रि ऋषि की पत्नी अनुसूया बहुत सुन्दर हैं, उनके पातिव्रत्य के समक्ष आपका सतीत्व कुछ भी नहीं है ।’ ‘वे हमसे बड़ी कैसे हैं ?’ यह सोचकर तीनों देवियों के मन में ईर्ष्या होने लगी । तीनों देवियों ने अपने पतियों—ब्रह्मा, विष्णु और महेश को नारदजी की बात बताई और अनुसूया के पातिव्रत्य की परीक्षा करने को कहा । तीनों देवों ने अपनी पत्नियों को सती शिरोमणि अनुसूया की परीक्षा न लेने के लिए समझाया पर वे अपनी जिद पर अड़ी रहीं । तीनों देव साधुवेश बनाकर अत्रि ऋषि के आश्रम में पहुंचे । अत्रि ऋषि उस समय आश्रम में नहीं थे । अतिथियों को आया देखकर देवी अनुसूया ने उन्हें प्रणाम कर अर्घ्य, फल आदि दिए परन्तु तीनों साधु बोले—‘हम तब तक आपका आतिथ्य स्वीकार नहीं करेंगे जब तक आप निर्वस्त्र होकर हमारे समक्ष नहीं आएंगी ।’ यह सुनकर देवी अनुसूया अवाक् रह गईं परन्तु आतिथ्यधर्म का पालन करने के लिए उन्होंने भगवान नारायण का व अपने पतिदेव का ध्यान किया तो उन्हें तीनों देवों की लीला समझ आ गई । उन्होंने हाथ में जल लेकर कहा—‘यदि मेरा पातिव्रत्य-धर्म सत्य है तो ये तीनों देव छ:-छ: मास के शिशु हो जाएं ।’ इतना कहते ही तीनों देव छ: मास के शिशु बन कर रुदन करने लगे । तब माता ने तीनों शिशुओं को बारी-बारी से गोद में लेकर स्तनपान कराया और पालने में झुलाने लगीं । ऐसे ही कुछ समय व्यतीत हो गया । इधर देवलोक में जब तीनों देव वापस न आए तो तीनों देवियां व्याकुल हो गईं । तब नारदजी आए, उन्होंने तीनों देवों का हाल कह सुनाया । हार कर तीनों देवियां देवी अनुसूया के पास आईं और उनसे क्षमा मांगकर अपने पतियों को पहले जैसा करने की प्रार्थना करने लगीं । दयामयी देवी अनुसूया ने तीनों देवों को पहले जैसा कर दिया । ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने प्रसन्न होकर देवी अनुसूया से वर मांगने को कहा तो देवी अनुसूया बोलीं—‘आप तीनों देव मुझे पुत्र रूप में प्राप्त हों ।’ तब त्रिदेवों ने कहा—‘आप चिन्ता न करें, हम आपके पुत्ररूप में आपके पास ही रहेंगे ।’ तीनों देव ‘तथास्तु’ कहकर अपनी पत्नियों के साथ अपने लोक को चले गये । कालान्तर में ये तीनों देव देवी अनुसूया के गर्भ से प्रकट हुए । ब्रह्मा के अंश से चन्द्रमा (रजोगुणप्रधान हैं), शंकर के अंश से दुर्वासा (तमोगुणप्रधान हैं) और विष्णु के अंश से दत्तात्रेयजी (सत्त्वगुणप्रधान हैं) का जन्म हुआ । त्रिदेव के दिव्य दर्शन से महर्षि अत्रि महाज्ञानी हुए और देवी अनुसूया पराभक्ति सम्पन्न हुईं । मराठी भाषा के प्रसिद्ध धर्मग्रन्थ ‘श्रीगुरुचरित्र’ में दत्तात्रेयजी के त्रिमूर्ति स्वरूप के विषय में कहा गया है कि—चन्द्रमा, दत्तात्रेय और दुर्वासा का यज्ञोपवीत-संस्कार होने के बाद चन्द्रमा और दुर्वासा अपना स्वरूप तथा तेज दत्तात्रेयजी को प्रदान कर तपस्या के लिए वन में चले गये । इस प्रकार दत्तात्रेयजी त्रिमूर्ति और तीन तेजों से युक्त हो गये । दत्तात्रेयजी के तीन मस्तक तीन वेद का प्रतिपादन करते हैं । भगवान विष्णु ने दत्तात्रेयजी के रूप में अवतरित होकर जगत का बड़ा ही उपकार किया है । उन्होंने श्रीगणेश, कार्तिकेय, प्रह्लाद, परशुराम, यदु, अलर्क आदि को योगविद्या और अध्यात्मविद्या का उपदेश दिया । कलियुग में भी भगवान शंकराचार्य, गोरक्षनाथजी, महाप्रभु आदि पर दत्रात्रेयजी ने अपना अनुग्रह बरसाया । संत ज्ञानेश्वर, जनार्दनस्वामी, एकनाथजी, दासोपंत, तुकारामजी—इन भक्तों को दत्तात्रेयजी ने अपना प्रत्यक्ष दर्शन दिया । दत्तात्रेयजी ने वैदिक धर्म की स्थापना की, लोगों को अपने कर्तव्यकर्म का उपदेश किया, सामाजिक वैमनस्य को दूर किया और भक्तों को सांसारिक पीड़ा से मुक्ति का, सच्ची सुख-शान्ति और आवागमन के बंधन से मुक्ति का मार्ग दिखलाया।6

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