🕉श्री हरिहरो विजयतेतराम🕉 🌄सुप्रभातम🌄 🗓आज का पञ्चाङ्ग🗓 🌻सोमवार, १९ अप्रैल २०२१🌻 सूर्योदय: 🌄 ०५:५५ सूर्यास्त: 🌅 ०६:४५ चन्द्रोदय: 🌝 १०:३८ चन्द्रास्त: 🌜२५:१५ अयन 🌕 उत्तराणायने (उत्तरगोलीय) ऋतु: 🍁 ग्रीष्म शक सम्वत: 👉 १९४३ (प्लव) विक्रम सम्वत: 👉 २०७८ (राक्षस) मास 👉 चैत्र पक्ष 👉 शुक्ल तिथि 👉सप्तमी (२४:०१ तक) नक्षत्र 👉 पुनर्वसु (पूर्ण रात्रि) योग 👉 सुकर्मा (२०:०७ तक) प्रथम करण 👉 गर (११:२३ तक) द्वितीय करण 👉 वणिज (२४:०१ तक) 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰️〰️ ॥ गोचर ग्रहा: ॥ 🌖🌗🌖🌗 सूर्य 🌟 मेष चंद्र 🌟 कर्क (२४:२७ से) मंगल 🌟 वृषभ (उदित, पूर्व, मार्गी) बुध 🌟 कुम्भ (अस्त, पूर्व, मार्गी) गुरु 🌟 कुम्भ (उदय, पूर्व, मार्गी) शुक्र 🌟 मेष (उदय, पश्चिम, मार्गी) शनि 🌟 मकर (उदय, पूर्व, मार्गी) राहु 🌟 वृष केतु 🌟 वृश्चिक 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 शुभाशुभ मुहूर्त विचार ⏳⏲⏳⏲⏳⏲⏳ 〰〰〰〰〰〰〰 अभिजित मुहूर्त 👉 ११:५० से १२:४२ अमृत काल 👉 २८:१८ से ०६:०१ विजय मुहूर्त 👉 १४:२६ से १५:१८ गोधूलि मुहूर्त 👉 १८:३४ से १८:५८ निशिता मुहूर्त 👉 २३:५४ से २४:३८ राहुकाल 👉 ०७:२३ से ०९:०१ राहुवास 👉 उत्तर-पश्चिम यमगण्ड 👉 १०:३९ से १२:१६ होमाहुति 👉 शुक्र दिशाशूल 👉 पूर्व अग्निवास 👉 पाताल (२४:०१ से पृथ्वी) भद्रावास 👉 स्वर्गलोक २४:०१ से २४:२९ मृत्युलोक २४:२९ से पूर्ण रात्रि चन्द्रवास 👉 पश्चिम (उत्तर २४:२९ से) 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ ☄चौघड़िया विचार☄ 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ ॥ दिन का चौघड़िया ॥ १ - अमृत २ - काल ३ - शुभ ४ - रोग ५ - उद्वेग ६ - चर ७ - लाभ ८ - अमृत ॥रात्रि का चौघड़िया॥ १ - चर २ - रोग ३ - काल ४ - लाभ ५ - उद्वेग ६ - शुभ ७ - अमृत ८ - चर नोट-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 शुभ यात्रा दिशा 🚌🚈🚗⛵🛫 उत्तर-पश्चिम (दर्पण देखकर अथवा खीर का सेवन कर यात्रा करें) 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰️〰️〰️〰️〰️ तिथि विशेष 🗓📆🗓📆 〰️〰️〰️〰️ नवरात्रि के सातवें दिन आदि शक्ति माँ दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की उपासना, उपनयन संस्कार+उद्योग मशीनरी+भूमि क्रय-विक्रय+व्यवसाय आरम्भ मुहूर्त ०९:१३ से १०:५० तक, वाहनादि क्रय-विक्रय मुहूर्त १४:१२ से १५:१८ तक आदि। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 आज जन्मे शिशुओं का नामकरण 〰〰〰〰〰〰〰〰〰️〰️ आज २९:५५ तक जन्मे शिशुओ का नाम पुनर्वसु नक्षत्र के प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (के, को, ह, ही) नामाक्षर से रखना शास्त्रसम्मत है। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 उदय-लग्न मुहूर्त मेष - २९:३४ से ०७:०८ वृषभ - ०७:०८ से ०९:०३ मिथुन - ०९:०३ से ११:१८ कर्क - ११:१८ से १३:३९ सिंह - १३:३९ से १५:५८ कन्या - १५:५८ से १८:१६ तुला - १८:१६ से २०:३७ वृश्चिक - २०:३७ से २२:५६ धनु - २२:५६ से २५:०० मकर - २५:०० से २६:४१ कुम्भ - २६:४१ से २८:०७ मीन - २८:०७ से २९:३० 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 पञ्चक रहित मुहूर्त रोग पञ्चक - ०५:४६ से ०७:०८ शुभ मुहूर्त - ०७:०८ से ०९:०३ मृत्यु पञ्चक - ०९:०३ से ११:१८ अग्नि पञ्चक - ११:१८ से १३:३९ शुभ मुहूर्त - १३:३९ से १५:५८ रज पञ्चक - १५:५८ से १८:१६ शुभ मुहूर्त - १८:१६ से २०:३७ चोर पञ्चक - २०:३७ से २२:५६ शुभ मुहूर्त - २२:५६ से २४:०१ रोग पञ्चक - २४:०१ से २५:०० शुभ मुहूर्त - २५:०० से २६:४१ मृत्यु पञ्चक - २६:४१ से २८:०७ अग्नि पञ्चक - २८:०७ से २९:३० शुभ मुहूर्त - २९:३० से २९:४५ 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 आज का राशिफल 🐐🐂💏💮🐅👩 〰️〰️〰️〰️〰️〰️ मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ) आज का दिन शुभ फलदायी रहेगा। प्रातः काल किसी योजना के पूर्ण होने से धन आगम होगा। आज दिनचर्या व्यवस्थित रहेगी कार्य भी समय से पूर्ण होंगे लेकिन यात्रा का मन बनने से आवश्यक कार्य मे बदलाव करना पड़ेगा। आर्थिक रूप से दिन शुभ रहेगा परन्तु हाथ खुला होने से ज्यादा देर टिकेगा नही। उधारी के व्यवहार ज्यादा ना बढ़ाएं अन्यथा उलझने बढ़ेंगी। सामाजिक सम्बन्ध आज दिखावा मात्र ही रहेंगे। परिवार में सुख शान्ति की अनुभूति होगी लेकिन महिला वर्ग का स्वभाव अचानक बदल सकता है सतर्क रहें। शान्ती बनाये रखने के लिए परिजनों की आवश्यकता पूर्ति करनी पड़ेगी। वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) आज का दिन भी शुभ फलो की प्राप्ति कराएगा। छोटी-छोटी बातों पर क्रोध वाले स्वभाव पर अंकुश लगाएं प्रेम संबंध में खटास बनेगी। कार्य क्षेत्र पर सहकर्मी अथवा अन्य लोगो के आश्रित रहना पड़ेगा फिर भी जरूरत के अनुसार लाभ अवश्य हो जायेगा। किसी भी महत्त्वपूर्ण निर्णय को लेने से पहले एक बार लाभ हानि की समीक्षा अवश्य करें जल्दबाजी में लिए अधिकांश निर्णय गलत साबित हो सकते है। सामाजिक कार्यो में योगदान के अवसर मिलेंगे। महिलाये आज व्यवहार संयमित रखें मान हानि की संभावना है। आडंबर युक्त जीवन पर खर्च अधिक रहेगा। मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा) आज आप दिन भर मन ही मन खयाली पुलाव पकाएंगे इनको सार्थक बनाने के लिए कोई ना कोई अभाव बाधा डालेगा। कार्य क्षेत्र अथवा घर मे शंकालु प्रवृत्ति रहने से किसी भी निर्णय को खुल कर नही ले सकेंगे। अधिकांश कार्यो के निर्णय अन्य के ऊपर डाल देंगे। आज आप फिजूल के झगड़े झंझटो से बच कर रहेंगे परन्तु फिर भी किसी अन्य के आपत्तिजनक व्यवहार के कारण माहौल उग्र बनेगा। धन संबंधित कार्यो में मध्यम सफलता मिलेगी। परिवार में थोड़ी खींच-तान के बाद भी स्थिति गंभीर नही बनेगी। संध्या पश्चात मनोरंजन के अवसर उपलब्ध होंगे। कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो) आज के दिन आपको प्रत्येक कार्यो में सावधानी बरतने की आवश्यकता है। दोपहर तक दिनचर्या सामान्य रहेगी। जोड़ तोड़ करके कार्य चलते रहेंगे। नौकरी व्यवसाय दोनों में थोड़ी बहुत समस्या बनी रहेगी फिर भी लाभ के अवसर मिलते रहेंगे। परन्तु संध्या बाद स्थिति प्रतिकूल होने पर विशेष कर सेहत के लिए ज्यादा नुकसानदायक रहेगी। आकस्मिक दुर्घटना चोटादि का भय है। परिजनों की छोटी मोटी बातों का बुरा ना माने भाई बंधुओ से भी व्यर्थ बहस ना करें विवाद बढ़ सकता है। महिलाये आज किसी कारणवश स्वयं को लाचार अनुभव करेंगी। सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे) आज का दिन भी आप सुख शांति से व्यतीत करेंगे। कार्य व्यवसाय में छोटी-मोटी बाधाएं आती रहेंगी लेकिन आप इनकी परवाह नही करेंगे। धर्म-आध्यत्म के प्रति गहरी आस्था कर्म पथ से डिगने नही देंगी। कम समय में ज्यादा लाभ कमाने के प्रलोभन भी मिलेंगे परन्तु ये कुछ ही समय प्रभाव दिखाएंगे आज आपके आचरण से किसी का अहित ना हो इसका विशेष ध्यान रखें। भाई-बंधुओ में कुछ समय के लिए अनबन गृहस्थ का वातावरण बिगाड़ेगी किसी बुजुर्ग के सहयोग से स्थिति सामान्य बनेगी फिर भी मन मे क्षोभ बना रहेगा। व्यावसायिक यात्रा की संभावना है लेकिन ज्यादा लाभदायक नही रहेगी। कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो) आज का दिन आपको सरकारी पक्ष से लाभ कराएगा आर्थिक स्थिति भी पहले से ज्यादा बेहतर रहेगी। खर्च भी अनावश्यक रहेंगे दिखावे पर ज्यादा खर्च करेंगे। कार्य व्यवसाय क्षेत्र पर आज जल्दबाजी में कार्य करेंगे जिससे कुछ ना कुछ त्रुटि अवश्य रहेगी। व्यावसायिक गतिविधियों से धन सम्मान मिलने पर भी मन मे किसी चीज की कमी खलेगी। मित्र परिचितों के साथ संध्या के समय मौज शौक पूरे करेंगे परन्तु रंग में भंग पड़ने वाली स्थिति बन सकती है सतर्क रहें। विपरीत लिंगीय वर्ग से आकर्षण बढेगा। प्रेम प्रसंगों में नजदिकी आएगी। संताने जिद पर अड़ेंगी। तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते) आज आपकी दिनचर्या आर्थिक कारणों से उथल-पुथल रहेगी। धार्मिक कार्यो में रुचि रहने पर भी एकाग्रता की कमी रहेगी कार्यो को बेमन से करने के कारण आरम्भ करने से पहले ही सफलता के प्रति आशंकित रहेंगे। आर्थिक लाभ परिश्रमानुसार अवश्य होगा परन्तु उधार के व्यवहारों के कारण बचत मुश्किल से ही कर पाएंगे। महिलाओं को भी आज गृहस्थी में तालमेल बैठाने में अधिक मशक्कत करनी पड़ेगी। पूर्व नियोजित यात्रा पर्यटन की योजना शारीरिक अथवा किसी अन्य कारण से निरस्त करनी पड़ेगी जिससे खास कर सन्ताने निराश होंगी। धर्म लाभ मिलेगा। वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू) आज दिन का पूर्वार्ध व्यस्तता से भरा रहेगा। व्यवसायी एवं नौकरी वाले लोग अपूर्ण कार्य पूर्ण करने का भरपूर प्रयास करेंगे फिर भी कुछ कार्य अधूरे रह सकते है। परिश्रम की अधिकता एवं स्वास्थ्य की अनदेखी के कारण शारीरिक रूप से कमजोरी थकान रहेगी। आज आपकी बौद्धिक क्षमता का विकास होगा परन्तु लाभ दिलाने में सहायक नही रहेगा। हतोत्साहित ना हो आशानुकूल ना सही काम चलाने लायक लाभ अवश्य होगा। पति पत्नी अथवा किसी अन्य से गरमा गरमी हो सकती है विवेकि व्यवहार अपनाए। यात्रा पर्यटन की योजना बनेगी। खर्च आज सोच समझ कर ही करें। धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे) आज का दिन आपको लगभग सभी कार्यो में सफलता दिलाएगा जहां असफल होंगे वहां कारण किसी अन्य की दखलंदाजी रहेगी। नौकरी पेशा जातको को जटिल कार्य सौंपे जाएंगे जिससे आरंभ में थोड़ी असुविधा रहगी परन्तु बाद में वही कार्य लाभ के साथ सम्मान भी दिलाएगा। व्यवसायी वर्ग कार्य क्षेत्र पर खुल कर निर्णय ले सकेंगे फिर भी आर्थिक लाभ के लिए थोड़ा इंतजार एवं किसी की खुशामद भी करनी पड़ेगी। महिलाये कार्य बोझ के कारण चिड़चिड़ी रहेंगी फिर भी घरेलू दिनचर्या को बिगड़ने नही देंगी। मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी) आज धन की प्राप्ति जितनी सुगम रहेगी खर्च भी उतनीं ही जल्दी हो जाएगा। खर्चो पर नियंत्रण ना रहने से आर्थिक उलझने बनेगी। व्यवसाय में विस्तार की योजना बनाएंगे परन्तु आज निवेश ना करें धन फंसने की संभावना अधिक है। नौकरी वाले जातक कार्यो की अधिकता से परेशान रहेंगे। आर्थिक लाभ दिन भर होता रहेगा अगर खर्च पर नियंत्रण रख सके तो यह धन आने वाले समय मे अतिउपयोगी सिद्ध होगा। घर के बुजुर्ग अथवा अधिकारी वर्ग से उचित मार्ग दर्शन मिलेगा फिर भी स्वभाव में जल्दबाजी के कारण इसका लाभ कम ही उठा पाएंगे। कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा) आज के दिन आपके मन मे कुछ ना कुछ उधेड़-बुन लगी रहेगी। किसी बड़े कार्य को करने की योजना बनाएंगे लेकिन आर्थिक कारणों से पीछे हटना पड़ेगा। गलती करने पर भी ना मानने के कारण घर एवं बाहरी लोगो से बुरा-भला सुनना पड़ सकता है। कार्य व्यवसाय में परिश्रम अधिक रहेगा लेकिन प्राप्ति अल्प मात्रा में होगी। खर्चे आज आवश्यकता पर ही करेंगे। महिलाओं का विपरीत व्यवहार घर मे कलह कराएगा। संध्या के बाद से मन मे चंचलता अधिक रहेगी पल पल में बातों से पलटेंगे जिससे परिजनों के साथ मित्रो को भी असुविधा होगी। मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची) दिन के प्रारंभ में आप पूर्वाग्रह से ग्रसित रहेंगे। अपने आगे किसी की नही चलने देंगे जिस वजह से हानि संभावित रहेगी। कार्य व्यवसाय की गति भी धीमी रहेगी। घरेलू आवश्यकता पूर्ति करने में असमर्थ अनुभव करेंगे। अतिआत्मविश्वास से बचें आज आपके अधिकांश निर्णय गलत निकलेंगे। परन्तु संध्या के समय व्यवसाय में आकस्मिक वृद्धि होगी धन लाभ भी काम चलाऊ हो जाएगा। आगे की योजनाओं पर खर्च करेंगे। महिलाये आज ईर्ष्यालु प्रवृत्ति से ग्रसित रह सकती है। सामाजिक क्षेत्र पर स्वयं के कारण से हास्य के पात्र बनेंगे। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰️

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नवदुर्गा: नौ रूपों में स्त्री जीवन का पूर्ण बिम्ब.. 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰 एक स्त्री के पूरे जीवनचक्र का बिम्ब है नवदुर्गा केनौ स्वरूप। 1. जन्म ग्रहण करती हुई कन्या "शैलपुत्री" स्वरूप है। 2. कौमार्य अवस्था तक "ब्रह्मचारिणी" का रूप है। 3. विवाह से पूर्व तक चंद्रमा के समान निर्मल होने से वह "चंद्रघंटा" समान है। 4. नए जीव को जन्म देने के लिए गर्भ धारण करने पर वह "कूष्मांडा" स्वरूप में है। 5. संतान को जन्म देने के बाद वही स्त्री "स्कन्दमाता" हो जाती है। 6. संयम व साधना को धारण करने वाली स्त्री "कात्यायनी" रूप है। 7. अपने संकल्प से पति की अकाल मृत्यु को भी जीत लेने से वह "कालरात्रि" जैसी है। 8. संसार (कुटुंब ही उसके लिए संसार है) का उपकार करने से "महागौरी" हो जाती है। 9. धरती को छोड़कर स्वर्ग प्रयाण करने से पहले संसार में अपनी संतान को सिद्धि(समस्त सुख-संपदा) का आशीर्वाद देने वाली "सिद्धिदात्री" हो जाती है। माँ के नवरात्रि पर्व पर आप व आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाये। 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰

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श्रीमद्भागवत महापुराणम् 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️ पञ्चम स्कन्ध: अथ त्रयोदशोऽध्यायः भवाटवी का वर्णन और रहूगण का संशयनाश...(भाग 1) 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️ ब्राह्मण उवाच दुरत्ययेऽध्वन्यजया निवेशितो रजस्तमःसत्त्वविभक्तकर्मदृक् स एष साथ्थोऽर्थपरः परिभ्रमन् । भवाटवीं याति न शर्म विन्दति ।। १ यस्यामिमे षण्नरदेव दस्यवः सार्थं विलुम्पन्ति कुनायकं बलात् । गोमायवो यत्र हरन्ति सार्थिकं प्रमत्तमाविश्य यथोरणं वृकाः ॥ २ प्रभूतवीरुत्तृणगुल्मगह्वरे कठोरदंशैर्मशकैरुपद्रुतः क्वचित्तु गन्धर्वपुरं प्रपश्यति क्वचित्क्वचिच्चाशुरयोल्मुकग्रहम् ॥ ३ निवासतोयद्रविणात्मबुद्धि- स्ततस्ततो धावति भो अटव्याम् । क्वचिच्च वात्योत्थितपांसुधूम्रा दिशो न जानाति रजस्वलाक्षः ।॥४ अदृश्यझिल्लीस्वनकर्णशूल उलूकवाग्भिव्व्यथितान्तरात्मा अपुण्यवृक्षान् श्रयते क्षुधार्दितो मरीचितोयान्यभिधावति क्वचित् ॥५ क्वचिद्वितोयाः सरितोऽभियाति परस्परं चालषते निरन्धः। आसाद्य दावं क्वचिदग्नितप्तो निर्विद्यते क्व च यक्षैर्हतासुः ॥ ६ शूरैर्हतस्वः क्व च निर्विण्णचेता: शोचन् विमुह्यन्नुपयाति कश्मलम् । क्वचिच्च गन्धर्वपुरं प्रविष्टः प्रमोदते निर्वृतवन्पुहूर्तम् ॥ ७ चलन् क्वचित्कण्टकशर्कराज्रि नर्ंगारुरक्षुर्विमना इवास्ते । पदे पदेऽभ्यन्तरवह्निनार्दितः कौटुम्बिकः क्रुध्यति वै जनाय । ८ क्वचित्निगीर्णोऽजगराहिना जनो नावैति किञ्चिद्विपिनेऽपविद्धः । दष्टः स्म शेते क्व च दन्दशूकै- रन्धोऽन्धकूपे पतितस्तमिस्रे ॥९ श्लोकार्थ 〰️〰️〰️ जडभरत ने कहा-राजन् ! यह जीवसमूह सुखरूप धन में आसक्त देश-देशान्तर में घूम-फिरकर व्यापार करने वाले व्यापारियों के दल के समान है। इसे माया ने दुस्तर प्रवृत्तिमार्ग में लगा दिया है; इसलिये इसकी दृष्टि सात्त्विक, राजस, तामस भेद से नाना प्रकार के कर्मो पर ही जाती है। उन कर्मो में भटकता-भटकता यह संसाररूप जंगल में पहुँच जाता है। वहाँ इसे तनिक भी शान्ति नहीं मिलती ॥ १ ॥ महाराज ! उस जंगल में छः डाकू हैं। इस वणिक्-समाज का नायक बड़ा दुष्ट है। उसके नेतृत्वमें जब यह वहाँ पहुँचता है, तब ये लूटेरे बलात् इसका सब माल-मत्ता लूट लेते हैं। तथा भेड़िये जिस प्रकार भेड़ों के झुंड में घुसकर उन्हें खींच ले जाते हैं, उसी प्रकार इसके साथ रहने वाले गीदड़ ही इसे असावधान देखकर इसके धनको इधर-उधर खींचने लगते हैं॥ २ ॥ वह जंगल बहुत-सी लता, घास और झाड़-झंखाड़ के कारण बहुत दुर्गम हो रहा है। उसमें तीव्र डाँस और मच्छर इसे चैन नहीं लेने देते । वहाँ इसे कभी तो गन्धर्व नगर दीखने लगता है और कभी-कभी चमचमाता हुआ अति चञ्चल अगिया बेताल आँखों के सामने आ जाता है॥ ३ ॥ यह वणिक्-समुदाय इस वन में निवास स्थान, जल और धनादि में आसक्त होकर इधर-उधर भटकता रहता है। कभी बवंडर से उठी हुई धूल के द्वारा जब सारी दिशाएँ धूमाच्छादित-सी हो जाती हैं और इसकी आँखों में भी धूल भर जाती है, तो इसे दिशाओं का ज्ञान भी नहीं रहता ।। ४ । कभी इसे दिखायी न देने वाले झींगुरो का कर्णकटु शब्द सुनायी देता है, कभी उल्लुओं की बोली से इसका चित्त व्यथित हो जाता है। कभी इसे सताने लगती है तो यह निन्दनीय वृक्षों का ही सहारा भूख टटोलने लगता है और कभी प्यास से व्याकुल होकर मृगतृष्णा की ओर दौड़ लगाता है।। ५॥ कभी जलहीन नदियों की ओर जाता है, कभी अन्न न मिलने पर आपस में एक-दूसरे से भोजन प्राप्ति की इच्छा करता है, कभी दावानल में घुसकर अग्नि से झुलस जाता है और कभी यक्षलोग इसके प्राण खींचने लगते हैं तो यह खिन्न होने लगता है। ६ ॥ कभी अपने से अधिक बलवान् लोग इसका धन छीन लेते हैं, तो यह दुःखी होकर शोक और मोह से अचेत हो जाता है और कभी गन्धर्वनगर में पहुँचकर घड़ीभर के लिये सब दुःख भूलकर खुशी मनाने लगता है।। ७ ।। कभी पर्वतो पर चढ़ना चाहता है तो काँटे और कंकड़ों द्वारा पैर चलनी हो जाने से उदास हो जाता है । कुटुम्ब बहुत बढ़ जाता है और उदरपूर्ति का साधन नहीं होता तो भूख की ज्वाला से सन्तप्त होकर अपने ही बन्धु-बान्धवों पर खीझने लगता है।। ८॥ कभी अजगर सर्प का ग्रास बनकर वन में फेंके हुए मुर्दे के समान पड़ा रहता है। उस समय इसे कोई सुध-बुध नहीं रहती। कभी दूसरे विषैले जन्तु इसे काटने लगते हैं तो उनके विष के प्रभाव से अंधा होकर किसी अँधे कुएँ गिर पड़ता है और घोर दुःखमय अन्धकार में बेहोश पड़ा रहता है।। ९॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय क्रमशः... शेष अलगे लेख में... 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️

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