🕉️🕉️🕉️ जय श्री गणेशाय नमः🕉️🕉️🕉️ 🌷🌷🌷🌷🌷🙏🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 शुभ श्रावण मास के पावन पर्व की, सुप्रभात में नई पहल हो 🌷 कठिन जिंदगी और सरल हो। अनसुलझी जो रही पहेली। अब शायद उसका भी हल हो। जो चलता है वक्त देखकर , आगे वही सफल हो ।। सुप्रभात का उगता सूरज, सबके लिए सुनहरा पल हो। समय हमारा साथ दे, कुछ ऐसी आगे हलचल हो। सुख के शौख पुरे हो हर द्वारे। सुखमय आँगन का हर पल हो।।।।। 🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆 मेरी प्रिय स्नेह शलिला बहनें शक्ति स्वरूपा माताओ, आदरणीय श्री भाइयो एवं गुरुओ को शुभ श्रावण मास की हार्दिक शुभकामनाएं 🎇🎇🎇🎋🎇🎇🎇🎇 प्राणाय नमो यस्य सर्वमिदम विशे। यो भूतः श्री गणेशाय यस्मिन्त सर्व प्रतिष्ठितम।। 🌷🌷🌷🌷🌷🙏🌷🌷🌷🌷🌷 🕉️ जय श्री गणेशाय नमः🕉️

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🕉️🕉️🕉️जय श्री हरि जी 🕉️🕉️🕉️ 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 🕉️आत्मज्ञानं समारम्भस्तितिक्षा धर्मनित्यता । यमर्था नापकर्षन्ति स वै पंडित उच्यते ।। निषेवते प्रश्स्तानी निन्दितानी न सेवते। अनासितकः श्रध्यानम एत्तपंडितलक्षणम।। ******************************************** भावार्थ:-- जिसको आत्मज्ञान सम्यक आरम्भ अर्थात सुख दुःख , लाभ हानि , मानापमान, निंदा स्तुति में हर्ष शोक कभी न करे , धर्म में ही नित्य निशिचत रहे ।और जिसके मन में विषय सम्बन्धी वास्तु आकर्षण न कर सके वही श्रेष्ठ कहता है। सदा धर्मयुक्त कर्मो का सेवन , अधर्मयुक्त कर्मो का त्याग ,ईश्वर , सत्याचार की निंदा न करनेहारा हो, धर्मशास्त्रो का अध्ययन ,ईश्वरादि अत्यन्त श्रद्धालु हो यही श्रेष्ठो का लक्षण है ।। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ यह श्लोक महाभारत उद्योग पर्व के विदुरप्रजागर के है ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 🌷🌷🌷जय श्री कृष्णाय नमः 🌷🌷🌷 🙏 आप सभी का हर पल शुभ व् मंगलमय हो🌷🙏 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🙏🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

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🕉️🕉️🕉️ जय श्री सच्चिदानंद स्वरूपाय नमः 🙏🌷🌷 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 सत्येन पूज्यते साक्षी ,धर्म: सत्येन वर्धते।। तस्मात्सत्यं हि वक्तव्यग्रम ,सर्व वर्णेषु साक्षिभि:।। आत्मैव ह्यात्मनः साक्षी:, गतिरात्मा तथात्मनः ।। भावमंस्था स्वमात्मानम , नृणाम साक्षिणमुक्तंम।। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ भावार्थ:--- सत्य बोलने से साक्षी पवित्र होता है और सत्य ही बोलने से धर्म बढ़ता है। इससे सब वर्णो में साक्षियों को सत्य ही बोलना योग्य है । आत्मा का साक्षी आत्मा और आत्मा की गति आत्मा है इसको जान के हे प्राणी ! तू सब मनुष्यो का उत्तम साक्षी अपने आत्मा का अपमान मत कर अर्थात जो सत्य भाषण है जो तेरे मन वाणी में है वही सत्य है ।। 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🙏🌷🌷🌷🌷🌷🌷 🕉️जय श्री जगत नियन्ताय नमः 🌷🙏🌷 आप सभी का हर पल शुभ व् मंगलमय हो 🌷

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🚩🚩🚩 जय श्री राम 🚩🚩🚩 §§§§§§§§§§§§§§§§§§§§§§§§§§§§§§§ मेरी प्रिय स्नेह शलिला बहनो , शक्तिस्वरूपा माताओ और देवतुल्य श्री आदरणीय भाइयो को मेरा सादर प्रणाम🙏 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 सुविचार 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 न सशरीरस्य सतः प्रियाप्रिययोर पहतिरसत्य शरीरं। वाव सन्तम न प्रियाप्रिये स्पृश्यतः।। 🚩छन्दोग्य उपनिषद ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ भावार्थ :-- जो देहधारी है वह सुख दुःख की प्राप्ति से पृथक कभी नही रह सकता और जो शरीररहित जीवात्मा मुक्ति में सर्वव्यापक परमेश्वर के साथ शुद्ध होकर रहता है तब उसे सांसारिक दुःख सुख प्राप्त नही होता । ********************************************* जो सब ऐश्वर्यो के देने और सुखों की वर्षा करने वाला धर्म है जो लोप करता वे लोग वृषल कहते हैं इसलिए किसी मनुष्य को धर्म का लोप करना उचित नही ।। इस संसार में एक धर्म ही सुहृद है जो मारयु के पश्चात् भी साथ चलता है। और सब पदार्थ वा संगी शरीर के नाश के साथ ही नाश को प्राप्त होते है अर्थात सब का संग छूट जाता है परंतु धर्म का संग कभी नही छूटता।। ******************************************* 🌷 आप सभी का हर पल शुभ व् मंगलमय हो। 🚩 🚩🚩जय श्री राम🚩🚩🚩 🙏🙏🙏🙏🕉️🙏🙏🙏🙏

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🕉️🕉️🕉️ जय माता दी 🕉️🕉️🕉️ 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 अय देवि दुर्गे महाशक्तिरूपे ।। महामंगले वत्सले मातृभूमे ।। त्वमेका भवानी त्वमेका शरण्यं ।। विधात्र्यै शिवायै नमस्ते नमस्ते।। त्वया प्रेरितः स्मो वयं वीरबालाः।। शुभम कर्म कर्तुम विजेतु रणञ्च ।। स्वदेशे विदेशे सुकार्य विकिर्य। सदाचारवृत्तिम व्यवस्थापयाम ।। श्रुतिम शीलतामानतिसतप्रवृत्तिम।। दयाभावनामेकतामात्मशक्तिम ।। इमाः साधिका: यच्छ चस्मकृते तवं। यतो भारते संतु नायः सामर्थः।। सदा रक्षितुम हिंदु धर्मम वरेण्यं। निहंतु खलान साधुवृन्दञ्च पातुम।। समुन्नेतुमतद वरं हिन्दुराष्ट्रम ।। जय पुण्ये भूमे देहि शक्तिम।। 🌷🌷🌷🌷जय माता दी 🌷🌷🌷🌷 🌷आप सभी का हर पल शुभ व् मंगलमय हो

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🌷🌷🌷🌷जय श्री राम 🌷🌷🌷 🔷🔷🔷🔷🔷🔷🔷🔷🔷🔷🔷🔷🔷🔷🔷 मनुष्य की फितरत 🔷🔷🔷🔷🔷🔷🔷🔷🔷🔷🔷🔷🔷🔷🔷 🌀 प्रार्थना :- 👉 मनुष्य प्रार्थना करते समय समय समझता है कि भगवान् सुन रहा है। 🌀निंदा :-👉निंदा करते समय भूल जाता है। 🌀पुण्य:-👉 करते हुए समझता है कि भगवान् देख रहा है। 🌀 पाप:-👉करते हुए भूल जाता है। 🌀 दान :-👉 दान करते समय समझता है कि भगवान् सबमे बसता है । 🌀 चोरी :-👉 करते समय भूल जाता है। 🌀प्रेम:-👉 प्रेम करते समय समझता है कि पूरी दुनिया भगवान् ने बनायीं है। 🌀नफरत :-👉 करते समय ये भूल जाता है। और फिर भी मनुष्य अपने आप को बुद्धिमान समझता है। मनुष्य उसी को कहना है जो मननशील होकर स्वात्मवत अन्यो के दुःख सुख और लाभ और हानि को समझे। इस काम में चाहे उसको चाहे कितना ही दारुण दुःख प्राप्त हो परंतु अपने मनुष्यपनरूप धर्म से पृथक कभी न होवे। इसमें श्रीमान महाराज भृतहरि जी ने कहा है'---- 🌀 निन्दतु नीतिनिपुणा यदि वा स्तुवन्तु लक्ष्मी: समाविशतु गच्छतु वा यथेष्टम ।। आद्यऐव वा मरणमस्तु युगान्तरे वा न्याय्यातपथः प्रविचलन्ति पदं न धीराः।। ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ 🌀 जो आचरण से चले और अपने अंतःकरण से निर्मल हो निश्छल हो वही सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति है।। 🌷🌷🌷जय श्री राम🌷🌷🌷

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