🌷🚩 *ॐ हं हनुमते नमः* 🚩 ⚜️☀️🌅 *सुप्रभातम्* 🌅☀️ ⚜️ 📜 *अथ पंचांगम्* 📜⚜️ 🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺 *दिनाँक -: 22/09/2020,मंगलवार* षष्ठी, शुक्ल पक्ष अधिक आश्विन """""""""""""""""""""""""""""""""""""(समाप्ति काल) तिथि ------------षष्ठी 21:30:16 तक पक्ष ---------------------------शुक्ल नक्षत्र -------अनुराधा 19:17:22 योग --------------प्रीति 25:54:52 करण ---------कौलव 10:31:24 करण -----------तैतुल 21:30:16 वार -----------------------मंगलवार माह ---------------- अधिक आश्विन चन्द्र राशि ------------------ वृश्चिक सूर्य राशि ------------------- कन्या रितु ----------------------------शरद आयन ----------------- दक्षिणायण संवत्सर -----------------------शार्वरी संवत्सर (उत्तर)------------- प्रमादी विक्रम संवत ----------------2077 विक्रम संवत (कर्तक)------2076 शाका संवत ----------------1942 वाराणसी सूर्योदय -----------------06:08:52 सूर्यास्त -----------------18:14:16 दिन काल -------------12:05:23 रात्री काल -------------11:55:03 चंद्रोदय -----------------11:14:15 चंद्रास्त -----------------22:08:47 लग्न ---- कन्या 5°20' , 155°20' सूर्य नक्षत्र --------उत्तराफाल्गुनी चन्द्र नक्षत्र ----------------अनुराधा नक्षत्र पाया --------------------रजत *🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩* नी ----अनुराधा 07:58:02 नू ----अनुराधा 13:36:34 ने ----अनुराधा 19:17:22 नो ----ज्येष्ठा 25:00:29 *💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮* ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद ======================== सूर्य=सिंह 05°52 ' उ o फा o , 3 पा चन्द्र = वृश्चिक 08°23 'अनुराधा ' 2 नी बुध = कन्या 29°57 ' चित्रा ' 2 पो शुक्र= कर्क 23°55, आश्लेषा ' 3 डे मंगल=मेष 02°30' अश्विनी ' 1 चु गुरु=धनु 23°22 ' पू oषा o , 4 ढा शनि=मकर 01°43' उ oषा o ' 2 भो राहू=मिथुन 00°10 ' मृगशिरा , 3 का केतु=धनु 00 ° 10 ' मूल , 1 ये *🚩💮🚩शुभा$शुभ मुहूर्त🚩💮🚩* राहू काल 15:13 - 16:44 अशुभ यम घंटा 09:10 - 10:41 अशुभ गुली काल 12:12 - 13:42 अशुभ अभिजित 11:47 -12:36 शुभ दूर मुहूर्त 08:34 - 09:22 अशुभ दूर मुहूर्त 23:00 - 23:48 अशुभ 🚩गंड मूल 19:17 - अहोरात्र अशुभ 💮चोघडिया, दिन रोग 06:09 - 07:40 अशुभ उद्वेग 07:40 - 09:10 अशुभ चर 09:10 - 10:41 शुभ लाभ 10:41 - 12:12 शुभ अमृत 12:12 - 13:42 शुभ काल 13:42 - 15:13 अशुभ शुभ 15:13 - 16:44 शुभ रोग 16:44 - 18:14 अशुभ 🚩चोघडिया, रात काल 18:14 - 19:44 अशुभ लाभ 19:44 - 21:13 शुभ उद्वेग 21:13 - 22:42 अशुभ शुभ 22:42 - 24:12* शुभ अमृत 24:12* - 25:41* शुभ चर 25:41* - 27:11* शुभ रोग 27:11* - 28:40* अशुभ काल 28:40* - 30:09* अशुभ 💮होरा, दिन मंगल 06:09 - 07:09 सूर्य 07:09 - 08:10 शुक्र 08:10 - 09:10 बुध 09:10 - 10:11 चन्द्र 10:11 - 11:11 शनि 11:11 - 12:12 बृहस्पति 12:12 - 13:12 मंगल 13:12 - 14:12 सूर्य 14:12 - 15:13 शुक्र 15:13 - 16:13 बुध 16:13 - 17:14 चन्द्र 17:14 - 18:14 🚩होरा, रात शनि 18:14 - 19:14 बृहस्पति 19:14 - 20:13 मंगल 20:13 - 21:13 सूर्य 21:13 - 22:13 शुक्र 22:13 - 23:12 बुध 23:12 - 24:12 चन्द्र 24:12* - 25:11 शनि 25:11* - 26:11 बृहस्पति 26:11* - 27:11 मंगल 27:11* - 28:10 सूर्य 28:10* - 29:10 शुक्र 29:10* - 30:09 *नोट*-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार । शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥ रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार । अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥ अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें । उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें । शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें । लाभ में व्यापार करें । रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें । काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है । अमृत में सभी शुभ कार्य करें । *💮दिशा शूल ज्ञान-------------उत्तर* परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा गुड़ खाके यात्रा कर सकते है l इस मंत्र का उच्चारण करें-: *शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l* *भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll* *🚩 अग्नि वास ज्ञान -:* *यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,* *चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।* *दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,* *नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्* *नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।* 6 + 3 + 1 = 10 ÷ 4 = 2शेष आकाश लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l *💮 शिव वास एवं फल -:* 6 + 6 + 5 = 17 ÷ 7 = 3 शेष वृषभारूढ़ = शुभ कारक *🚩भद्रा वास एवं फल -:* *स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।* *मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।* *💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮* * प्रीति योग 25:51 तक *💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮* मूर्खाणां पण्डिता द्वेष्या अधनानां महाधनाः । वरांगना कुलस्त्रीणां सुभगानां च दुर्भगा ।। ।।चा o नी o।। मूढ़ लोग बुद्धिमानो से इर्ष्या करते है. गलत मार्ग पर चलने वाली औरत पवित्र स्त्री से इर्ष्या करती है. बदसूरत औरत खुबसूरत औरत से इर्ष्या करती है. *🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩* गीता -: अक्षरब्रह्मयोग अo-08 मामुपेत्य पुनर्जन्म दुःखालयमशाश्वतम्‌ ।, नाप्नुवन्ति महात्मानः संसिद्धिं परमां गताः ॥, परम सिद्धि को प्राप्त महात्माजन मुझको प्राप्त होकर दुःखों के घर एवं क्षणभंगुर पुनर्जन्म को नहीं प्राप्त होते॥,15॥, *💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮* देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके। नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।। विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे। जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।। 🐏मेष नई योजना बनेगी। किसी प्रभावशाली का मार्गदर्शन व सहयोग प्राप्त हो सकता है। व्यापार-व्यवसाय की कार्यप्रणाली में सुधार होगा। सामाजिक सेवा करने की प्रेरणा मिलेगी। मान-सम्मान मिलेगा। धन प्राप्ति सुगम होगी। चोट व रोग से बाधा की आशंका है। 🐂वृष बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा लाभदायक रहेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। नया कार्य करने का मन बनेगा। निवेश शुभ रहेगा। कारोबार में वृद्धि के योग हैं। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। पारिवारिक सुख-शांति बनी रहेगी। मित्र मिलेंगे। जल्दबाजी न करें। 👫मिथुन कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। अप्रत्याशित‍ खर्च सामने आएंगे। आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। महत्वपूर्ण निर्णय लेने में जल्दबाजी न करें। वाणी पर नियंत्रण रखें। चिंता तथा तनाव बने रहेंगे। नौकरी में कार्यभार रहेगा। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। 🦀कर्क किसी बड़ी समस्या का हल सहज ही होगा। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। कारोबार में वृद्धि के योग हैं। भाग्य का साथ रहेगा। प्रतिद्वंद्वी सक्रिय रहेंगे। भेंट व उपहार की प्राप्ति संभव है। प्रसन्नता रहेगी। 🐅सिंह दूर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। नौकरी में सहकर्मी साथ देंगे। परिवार में कोई मांगलिक कार्य संभव है। बेचैनी रह सकती है। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। किसी व्यक्ति के उकसाने में न आएं। दुष्टजनों से बचकर रहें। 🙍‍♀️कन्या शत्रुभय बना रहेगा। पूजा-पाठ में मन लगेगा। कारोबार से लाभ में वृद्धि के योग हैं। कोर्ट व कचहरी इ‍त्यादि में स्थिति अनुकूल रहेगी। किसी विवाद में विजय प्राप्त हो सकती है। व्यापार में नए काम मिल सकते हैं। चिंता रहेगी। दुष्टजनों से बचकर रहें। ⚖️तुला यात्रा में जल्दबाजी न करें। किसी व्यक्ति से अकारण विवाद हो सकता है। भागदौड़ के चलते स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। लापरवाही न करें। किसी दु:खद समाचार मिलने की आशंका है। चिंता तथा तनाव रहेंगे। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। 🦂वृश्चिक विवाद को बढ़ावा देने से बचें। जल्दबाजी न करें। शारीरिक कष्ट की आशंका है। प्रयास सफल रहेंगे। नौकरी में कार्य की प्रशंसा होगी। किसी बड़े कार्य को करने की इच्छा प्रबल होगी। कारोबार अच्छा चलेगा। धन प्राप्ति सुगम होगी। 🏹धनु लेन-देन में सावधानी रखें। स्थायी संपत्ति में वृद्धि के योग हैं। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। आय में वृद्धि होगी। पार्टनरों से मतभेद दूर होकर स्थिति अनुकूल बनेगी। किसी से विवाद की आशंका है। मानहानि हो सकती है, सावधान रहें। 🐊मकर धनहानि की आशंका है। वाहन व मशीनरी इत्यादि के प्रयोग में सावधानी रखें। शारीरिक कष्ट से बनते कामों में विघ्न हो सकता है। स्वास्थ्‍य का विशेष ध्यान रखें। क्रोध व उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। चिंता रहेगी। 🍯कुंभ प्रसन्नता में वृद्धि होगी। किसी मनोरंजक यात्रा का कार्यक्रम बन सकता है। विद्यार्थी वर्ग अपने कार्य सफलतापूर्वक कर पाएंगे। परीक्षा व साक्षात्कार आदि में सफलता प्राप्त होगी। मनपसंद भोजन का आनंद प्राप्त होगा। प्रेम-प्रसंग का प्रस्ताव मिल सकता है। 🐟मीन मानसिक बेचैनी रहेगी। कोर्ट व कचहरी तथा सरकारी कार्यालयों में रुके कामों में गति आएगी। विवाद का हल हो सकता है। जीवनसाथी को भेंट व उपहार देने का अवसर प्राप्त होगा। प्रसन्नता रहेगी। पारिवारिक सहयोग मिलता रहेगा। आय में वृद्धि होगी। दिव्य ज्योतिष केंद्र वाट्स्अप👉9450786998 कालिंग👉8840618684 🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏 🌺🌺🌺🌺🙏🌺🌺🌺🌺

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*यज्ञोपवीत का महत्व*👇🚩 *आज के युग में अकसर यह देखने को मिलता है कि माता-पिता के कहने पर युवा यज्ञोपवीत संस्कार तो करवा लेते हैं लेकिन उसे पहनते नहीं हैं या पहनते हैं तो इसे धारण करने संबंधी नियमों का पालन नहीं करते।* यह ध्यान रखना चाहिए कि यदि आपका यज्ञोपवीत संस्कार हो गया है तो सदा इसे धारण करें और शिखा में गांठ लगाएं, बिना शिखा और बिना यज्ञोपवीत वाला जो धार्मिक कर्म करता है, वह निष्फल हो जाते हैं। यज्ञोपवीत न होने पर द्विज को पानी तक नहीं पीना चाहिए।* *जब बच्चों का उपनयन संस्कार हो जाये तभी शास्त्र की आज्ञानुसार उसका अध्ययन शुरू करना चाहिए।* ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य यह तीनों द्विज कहलाते हैं क्योंकि यज्ञोपवीत धारण करने से उनका दूसरा जन्म होता है। पहला जन्म माता के पेट से होता है, दूसरा जन्म यज्ञोपवीत संस्कार से होता है। *गायत्री मंत्र है जरूरी* *धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि यज्ञोपवीत धारण करते समय जो वेदारम्भ कराया जाता है, वह गायत्री मंत्र से कराया जाता है। प्रत्येक द्विज को गायत्री मंत्र जानना उसी प्रकार अनिवार्य है जैसे कि यज्ञोपवीत धारण करना।* यह गायत्री यज्ञोपवीत का जोड़ा ऐसा ही है जैसा लक्ष्मी−नारायण, सीता−राम, राधे−श्याम, प्रकृति−ब्रह्मा, गौरी−शंकर, नर−मादा का जोड़ा है। दोनों के सम्मिश्रण से ही पूर्ण इकाई बनती है। *यज्ञोपवीत धारण करने संबंधी कुछ नियम!* *जन्म सूतक, मरण सूतक, मल−मूत्र त्यागते समय कान पर यज्ञोपवीत चढ़ाने में भूल होने के प्रायश्चित में उपाकर्म से, चार मास तक पुराना हो जाने पर, कहीं से टूट जाने पर जनेऊ उतार देना चाहिए।* उतारने पर उसे जहां तहां नहीं फेंक देना चाहिए वरन किसी पवित्र स्थान पर नदी, तालाब या पीपल जैसे पवित्र वृक्ष पर विसर्जित करना चाहिए।बाएं कंधे पर इस प्रकार धारण करना चाहिए कि बाएं पार्श्व की ओर न रहे। लंबाई इतनी होनी चाहिए कि हाथ लंबा करने पर उसकी लंबाई बराबर बैठे। *ब्राह्मण बालक का उपवीत 5 से 8 वर्ष तक की आयु में, क्षत्रिय का 6 से 11 तक, वैश्य का 8 से 12 वर्ष तक की आयु में यज्ञोपवीत करा देना चाहिए। ब्राह्मण का वसंत ऋतु में, क्षत्रिय का ग्रीष्म में और वैश्य का उपवीत शरद ऋतु में होना चाहिए। ब्रह्मचारी को एक तथा गृहस्थ को दो जनेऊ धारण करना चाहिए क्योंकि गृहस्थ पर अपना तथा धर्मपत्नी दोनों का उत्तरदायित्व होता है।* आचर्य सत्यानन्द पाण्डेय ज्योतिष एवं तंत्राचार्य दिव्य ज्योतिष केंद्र वाराणसी उत्तर प्रदेश वाट्स्अप👉9450786998

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🚩🔱 *हर हर महादेव* 🔱🚩 ☀️ 🌅 *सुप्रभातम्* 🌅 ☀️ ⚜️📜 *अथ पंचांगम्* 📜⚜️ 🔱🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🔱 *दिनाँक -: 21/09/2020,सोमवार* पंचमी, शुक्ल पक्ष अधिक आश्विन """""""""""""""""""""""""""""""""""""(समाप्ति काल) तिथि ----------पंचमी 23:41:31 तक पक्ष ---------------------------शुक्ल नक्षत्र -------विशाखा 20:47:33 योग ------------वैधृति 07:57:07 योग ---------विश्कुम्भ 28:41:50 करण -------------बव 13:00:04 करण ----------बालव 23:41:31 वार -------------------------सोमवार माह ---------------- अधिक आश्विन चन्द्र राशि -------तुला 15:15:26 चन्द्र राशि -------------------वृश्चिक सूर्य राशि ---------------------कन्या रितु ----------------------------शरद आयन ----------------- दक्षिणायण संवत्सर ----------------------शार्वरी संवत्सर (उत्तर) ------------प्रमादी विक्रम संवत ----------------2077 विक्रम संवत (कर्तक)------2076 शाका संवत ----------------1942 वाराणसी सूर्योदय --------------- 06:08:24 सूर्यास्त -----------------18:15:26 दिन काल ---------------12:07:01 रात्री काल -------------11:53:26 चंद्रोदय ----------------10:07:31 चंद्रास्त -----------------21:21:37 लग्न ---- कन्या 4°21' , 154°21' सूर्य नक्षत्र -------उत्तरा फाल्गुनी चन्द्र नक्षत्र ----------------विशाखा नक्षत्र पाया -------------------रजत *🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩* तू ----विशाखा 09:45:18 ते ----विशाखा 15:15:26 तो ----विशाखा 20:47:33 ना ----अनुराधा 26:21:43 *💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮* ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद ======================== सूर्य=सिंह 04°52 ' उ o फा o , 3 पा चन्द्र = तुला 24°23 ' विशाखा ' 2 तू बुध = कन्या 28°57 ' चित्रा ' 2 पो शुक्र= कर्क 22°55, आश्लेषा ' 2 डू मंगल=मेष 03°30' अश्विनी ' 1 चु गुरु=धनु 23°22 ' पू oषा o , 4 ढा शनि=मकर 01°43' उ oषा o ' 2 भो राहू=मिथुन 00°10 ' मृगशिरा , 3 का केतु=धनु 00 ° 10 ' मूल , 1 ये *🚩💮🚩शुभा$शुभ मुहूर्त🚩💮🚩* राहू काल 07:39 - 09:10 अशुभ यम घंटा 10:41 - 12:12 अशुभ गुली काल 13:43 - 15:14 अशुभ अभिजित 11:48 -12:36 शुभ दूर मुहूर्त 12:36 - 13:25 अशुभ दूर मुहूर्त 15:02 - 15:50 अशुभ 💮चोघडिया, दिन अमृत 06:08 - 07:39 शुभ काल 07:39 - 09:10 अशुभ शुभ 09:10 - 10:41 शुभ रोग 10:41 - 12:12 अशुभ उद्वेग 12:12 - 13:43 अशुभ चर 13:43 - 15:14 शुभ लाभ 15:14 - 16:45 शुभ अमृत 16:45 - 18:15 शुभ 🚩चोघडिया, रात चर 18:15 - 19:45 शुभ रोग 19:45 - 21:14 अशुभ काल 21:14 - 22:43 अशुभ लाभ 22:43 - 24:12* शुभ उद्वेग 24:12* - 25:41* अशुभ शुभ 25:41* - 27:11* शुभ अमृत 27:11* - 28:40* शुभ चर 28:40* - 30:09* शुभ 💮होरा, दिन चन्द्र 06:08 - 07:09 शनि 07:09 - 08:10 बृहस्पति 08:10 - 09:10 मंगल 09:10 - 10:11 सूर्य 10:11 - 11:11 शुक्र 11:11 - 12:12 बुध 12:12 - 13:13 चन्द्र 13:13 - 14:13 शनि 14:13 - 15:14 बृहस्पति 15:14 - 16:14 मंगल 16:14 - 17:15 सूर्य 17:15 - 18:15 🚩होरा, रात शुक्र 18:15 - 19:15 बुध 19:15 - 20:14 चन्द्र 20:14 - 21:14 शनि 21:14 - 22:13 बृहस्पति 22:13 - 23:13 मंगल 23:13 - 24:12 सूर्य 24:12* - 25:12 शुक्र 25:12* - 26:11 बुध 26:11* - 27:11 चन्द्र 27:11* - 28:10 शनि 28:10* - 29:09 बृहस्पति 29:09* - 30:09 *नोट*-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार । शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥ रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार । अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥ अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें । उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें । शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें । लाभ में व्यापार करें । रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें । काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है । अमृत में सभी शुभ कार्य करें । *💮दिशा शूल ज्ञान-------------पूर्व* परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l इस मंत्र का उच्चारण करें-: *शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l* *भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll* *🚩 अग्नि वास ज्ञान -:* *यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,* *चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।* *दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,* *नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्* *नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।* 5 + 2 + 1 = 8 ÷ 4 = 0 शेष मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l *💮 शिव वास एवं फल -:* 5 + 5 + 5 = 15 ÷ 7 = 1 शेष कैलाश वास = शुभ कारक *🚩भद्रा वास एवं फल -:* *स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।* *मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।* *💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮* * सर्वार्थ सिद्धि योग 20:48 से * वैधृति योग *💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮* निःस्पृहो नाधिकारी स्यान्नाकामो मण्डनप्रियः । नाऽविदग्धः प्रियंब्रूयात् स्पष्टवक्ता न वञ्चकः ।। ।।चा o नी o।। वह व्यक्ति जिसके हाथ स्वच्छ है कार्यालय में काम नहीं करना चाहता. जिस ने अपनी कामना को ख़तम कर दिया है, वह शारीरिक शृंगार नहीं करता, जो आधा पढ़ा हुआ व्यक्ति है वो मीठे बोल बोल नहीं सकता. जो सीधी बात करता है वह धोका नहीं दे सकता. *🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩* गीता -: अक्षरब्रह्मयोग अo-08 अनन्यचेताः सततं यो मां स्मरति नित्यशः ।, तस्याहं सुलभः पार्थ नित्ययुक्तस्य योगिनीः ॥, हे अर्जुन! जो पुरुष मुझमें अनन्य-चित्त होकर सदा ही निरंतर मुझ पुरुषोत्तम को स्मरण करता है, उस नित्य-निरंतर मुझमें युक्त हुए योगी के लिए मैं सुलभ हूँ, अर्थात उसे सहज ही प्राप्त हो जाता हूँ॥,14॥, *💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮* देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके। नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।। विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे। जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।। 🐏मेष मानसिक शांति के लिए किए गए प्रयास सफल रहेंगे। कोर्ट-कचहरी के कार्य मनोनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। नौकरी में सहकर्मी साथ देंगे। प्रसन्नता रहेगी। किसी धार्मिक यात्रा की योजना बनेगी। पूजा-पाठ में मन लगेगा। 🐂वृष वाहन व मशीनरी इत्यादि के प्रयोग में लापरवाही न करें। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप न करें। अपेक्षित कार्यों में विलंब होगा। चिंता तथा तनाव रहेंगे। व्यापार ठीक चलेगा। 👫मिथुन कार्यक्षेत्र के लिए नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। बिगड़े काम बन सकते हैं। समाजसेवा करने का मन बनेगा। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। धन प्राप्ति सुगम होगी। व्यस्तता रहेगी। आराम का समय नहीं मिलेगा। थकान रहेगी। 🦀कर्क व्यावसायिक यात्रा मनोनुकूल रहेगी। किसी प्रभावशाली व्यक्ति का सहयोग व मार्गदर्शन प्राप्त होगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। व्यापार-व्यवसाय अच्‍छा चलेगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। 🐅सिंह समाजसेवा करने की प्रेरणा प्राप्त होगी। मान-सम्मान मिलेगा। खोई हुई वस्तु मिलने के योग हैं। व्यापार-व्यवसाय अच्‍छा चलेगा। नौकरी में उच्चाधिकारी की प्रसन्नता प्राप्त होगी। शत्रु सक्रिय रहेंगे। जोखिम व जमानत के कार्य बिलकुल न करें। 🙍‍♀️कन्या शुभ समाचार प्राप्त होंगे। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। कारोबार अच्‍छा चलेगा। नौकरी में सहकर्मी साथ देंगे। चिंता तथा तनाव रहेंगे। प्रतिद्वंद्विता में वृद्धि होगी। किसी आनंदोत्सव में भाग ले सकते हैं। भूले-बिसरे साथियों से मुलाकात होगी। ⚖️तुला किसी तरह से बड़ा लाभ होने की संभावना है। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। किसी तरह के विवाद में विजय प्राप्त होगी। स्वास्थ्य अच्‍छा रहेगा। कारोबार में वृद्धि होगी। नौकरी में नया कार्य मिल सकता है। 🦂वृश्चिक कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। थकान व कमजोरी रह सकती है। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। कर्ज लेना पड़ सकता है। दूसरों से अधिक अपेक्षा न करें। बेवजह चिड़चिड़ापन रहेगा। वाणी पर नियंत्रण रखें। कार्य में मन नहीं लगेगा। 🏹धनु भावना में बहकर महत्वपूर्ण निर्णय न लें। नौकरी में कार्यभार रहेगा। लाभ होगा। स्वास्थ्य के संबंध में लापरवाही न करें। स्वास्थ्‍य पर व्यय होगा। दु:खद समाचार मिल सकता है। क्रोध व उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। कुसंगति से हानि होगी। 🐊मकर मनपसंद व्यंजनों का आनंद प्राप्त होगा। विद्यार्थी वर्ग अपने कार्य उत्साह व लगन से कर पाएगा। किसी आनंदोत्सव में भाग लेने का अवसर प्राप्त हो सकता है। धन प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। व्यापार-व्यवसाय अच्‍छा चलेगा। प्रमाद न करें। 🍯कुंभ घर, दुकान, फैक्टरी व शोरूम इत्यादि के खरीद-फरोख्त की योजना बनेगी। कारोबार में बड़ा लाभ हो सकता है। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। आय के नए स्रोत प्राप्त हो सकते हैं। रुके काम बनेंगे। घर-बाहर उत्साह व प्रसन्नता से काम कर पाएंगे। 🐟मीन प्रसन्नता का वातावरण निर्मित होगा। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। वाणी पर नियंत्रण रखें। जीवनसाथी से सहयोग प्राप्त होगा। कानूनी अड़चन दूर होकर स्थिति अनुकूल बनेगी। व्यापार-व्यवसाय अच्‍छा चलेगा। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में मातहत साथ देंगे। दिव्य ज्योतिष केंद्र वाट्स्अप👉9450786998 🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏 🌺🌺🌺🌺🙏🌺🌺🌺🌺

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🔱 🚩 *ॐ सूर्याय नमः* 🚩🔱 ⚜️☀️ 🌅 *सुप्रभातम्* 🌅☀️ 🌷⚜️📜 *अथ पंचांगम्* 📜⚜️ 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 *दिनाँक -: 20/09/2020,रविवार* चतुर्थी, शुक्ल पक्ष अधिक आश्विन """"""""""""""""""""""""""""""""""""(समाप्ति काल) तिथि ----------चतुर्थी 26:26:20 तक पक्ष ---------------------------शुक्ल नक्षत्र ----------स्वाति 22:50:32 योग --------------ऐन्द्र 11:36:24 करण ---------वणिज 15:59:28 करण ------विष्टि भद्र 26:26:20 वार --------------------------रविवार माह ---------------- अधिक आश्विन चन्द्र राशि -------------------- तुला सूर्य राशि ---------------------कन्या रितु -----------------------------शरद आयन ------------------दक्षिणायण संवत्सर -----------------------शार्वरी संवत्सर (उत्तर)--------------प्रमादी विक्रम संवत ----------------2077 विक्रम संवत (कर्तक) ----2076 शाका संवत ----------------1942 वाराणसी सूर्योदय -----------------06:07:57 सूर्यास्त -----------------18:16:36 दिन काल ------------- 12:08:38 रात्री काल -------------11:51:48 चंद्रोदय -----------------09:00:15 चंद्रास्त -----------------20:38:09 लग्न ----कन्या 3°23' , 153°23' सूर्य नक्षत्र ---------उत्तराफाल्गुनी चन्द्र नक्षत्र -------------------स्वाति नक्षत्र पाया ------------------रजत *🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩* रू ----स्वाति 06:40:20 रे ----स्वाति 12:02:19 रो ----स्वाति 17:25:39 ता ----स्वाति 22:50:32 ती ----विशाखा 28:17:02 *💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮* ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद ======================== सूर्य=सिंह 03°52 ' उ o फा o , 3 पा चन्द्र = तुला 09°23 ' स्वाति ' 1 रू बुध = कन्या 26°57 ' चित्रा ' 2 पो शुक्र= कर्क 21°55, आश्लेषा ' 2 डू मंगल=मेष 03°30' अश्विनी ' 1 चु गुरु=धनु 23°22 ' पू oषा o , 4 ढा शनि=मकर 01°43' उ oषा o ' 2 भो राहू=मिथुन 00°10 ' मृगशिरा , 3 का केतु=धनु 00 ° 10 ' मूल , 1 ये *🚩💮🚩शुभा$शुभ मुहूर्त🚩💮🚩* राहू काल 16:46 - 18:17 अशुभ यम घंटा 12:12 - 13:43 अशुभ गुली काल 15:14 - 16:46 अशुभ अभिजित 11:48 -12:37 शुभ दूर मुहूर्त 16:39 - 17:28 अशुभ 💮चोघडिया, दिन उद्वेग 06:08 - 07:39 अशुभ चर 07:39 - 09:10 शुभ लाभ 09:10 - 10:41 शुभ अमृत 10:41 - 12:12 शुभ काल 12:12 - 13:43 अशुभ शुभ 13:43 - 15:14 शुभ रोग 15:14 - 16:46 अशुभ उद्वेग 16:46 - 18:17 अशुभ 🚩चोघडिया, रात शुभ 18:17 - 19:46 शुभ अमृत 19:46 - 21:15 शुभ चर 21:15 - 22:44 शुभ रोग 22:44 - 24:13* अशुभ काल 24:13* - 25:41* अशुभ लाभ 25:41* - 27:10* शुभ उद्वेग 27:10* - 28:39* अशुभ शुभ 28:39* - 30:08* शुभ 💮होरा, दिन सूर्य 06:08 - 07:09 शुक्र 07:09 - 08:09 बुध 08:09 - 09:10 चन्द्र 09:10 - 10:11 शनि 10:11 - 11:12 बृहस्पति 11:12 - 12:12 मंगल 12:12 - 13:13 सूर्य 13:13 - 14:14 शुक्र 14:14 - 15:14 बुध 15:14 - 16:15 चन्द्र 16:15 - 17:16 शनि 17:16 - 18:17 🚩होरा, रात बृहस्पति 18:17 - 19:16 मंगल 19:16 - 20:15 सूर्य 20:15 - 21:15 शुक्र 21:15 - 22:14 बुध 22:14 - 23:13 चन्द्र 23:13 - 24:13 शनि 24:13* - 25:12 बृहस्पति 25:12* - 26:11 मंगल 26:11* - 27:10 सूर्य 27:10* - 28:10 शुक्र 28:10* - 29:09 बुध 29:09* - 30:08 *नोट*-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार । शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥ रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार । अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥ अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें । उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें । शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें । लाभ में व्यापार करें । रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें । काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है । अमृत में सभी शुभ कार्य करें । *💮दिशा शूल ज्ञान-------------पश्चिम* परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा चिरौजी खाके यात्रा कर सकते है l इस मंत्र का उच्चारण करें-: *शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l* *भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll* *🚩 अग्नि वास ज्ञान -:* *यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,* *चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।* *दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,* *नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्* *नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।* 4 + 1 + 1 = 6 ÷ 4 = 2 शेष आकाश लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l *💮 शिव वास एवं फल -:* 4 + 4 + 5 = 13 ÷ 7 = 6 शेष क्रीडायां = शोक ,दुःख कारक *🚩भद्रा वास एवं फल -:* *स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।* *मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।* सांय 16:02 से रात्रि 27:26तक पाताल लोक = धनलाभ कारक *💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮* * विनायक चतुर्थी *💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮* आलस्योपगता विद्या परहस्तगतं धनम् । अल्पबीजं हतं क्षेत्रं हतं सैन्यमनायकम् ।। ।।चा o नी o।। खाली बैठने से अभ्यास का नाश होता है. दुसरो को देखभाल करने के लिए देने से पैसा नष्ट होता है. गलत ढंग से बुवाई करने वाला किसान अपने बीजो का नाश करता है. यदि सेनापति नहीं है तो सेना का नाश होता है. *🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩* गीता -: अक्षरब्रह्मयोग अo-08 सर्वद्वाराणि संयम्य मनो हृदि निरुध्य च ।, मूर्ध्न्याधायात्मनः प्राणमास्थितो योगधारणाम्‌ ॥, ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन्‌ ।, यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम्‌ ॥, सब इंद्रियों के द्वारों को रोककर तथा मन को हृद्देश में स्थिर करके, फिर उस जीते हुए मन द्वारा प्राण को मस्तक में स्थापित करके, परमात्म संबंधी योगधारणा में स्थित होकर जो पुरुष 'ॐ' इस एक अक्षर रूप ब्रह्म को उच्चारण करता हुआ और उसके अर्थस्वरूप मुझ निर्गुण ब्रह्म का चिंतन करता हुआ शरीर को त्यागकर जाता है, वह पुरुष परम गति को प्राप्त होता है॥,12-13॥, *💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮* देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके। नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।। विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे। जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।। 🐏मेष जल्दबाजी न करें। चोट लगने की आशंका है। थोड़े प्रयास से ही काम पूरे होंगे। प्रसन्नता रहेगी। नौकरी में नए प्रयोग करने का अवसर प्राप्त हो सकता है। धन प्राप्ति सुगम होगी। व्यापार-व्यवसाय अच्‍छा चलेगा। प्रमाद न करें। 🐂वृष विद्यार्थी वर्ग अपना कार्य कुशलता से कर पाएंगे। बौद्धिक कार्य सफल रहेंगे। मन में नए विचार आएंगे। स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ उठा पाएंगे। यात्रा मनोरंजक रहेगी। धनार्जन होगा। विवाह के उम्मीदवारों को वैवाहिक प्रस्ताव प्राप्त हो सकता है। 👫मिथुन उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। नए काम मिल सकते हैं। आय में वृद्धि होगी। स्थायी संपत्ति के सौदे बड़ा लाभ दे सकते हैं। पारिवारिक सहयोग प्राप्त होगा। वाणी पर नियंत्रण रखें। दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप न करें। सम्मान में कमी हो सकती है। 🦀कर्क दौड़धूप अधिक होने से थकान व कमजोरी रह सकती है। अतिउत्साह में कोई गलत निर्णय न लें। बुरी खबर मिल सकती है। चिंता तथा तनाव रहेंगे। यथासंभव यात्रा टालें। जोखिम न लें। आय बनी रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। 🐅सिंह राजकीय कार्यों में विशेष सफलता के योग हैं। किसी बड़े विवाद का हल प्राप्त होगा। विजय प्राप्त होगी। विवाह के उम्मीदवारों को वैवाहिक प्रस्ताव प्राप्त हो सकता है। धन प्राप्ति सुगम होगी। जल्दबाजी न करें। व्यस्तता के चलते थकान रह सकती है। 🙍‍♀️कन्या वाहन, मशीनरी व अग्नि आदि के प्रयोग में अतिरिक्त सावधानी रखें, विशेषकर गृहिणियां घर में कार्य करने वक्त लापरवाही न करें। शारीरिक हानि की आशंका है। दूसरों के बहकावे में न आकर स्वयं निर्णय लें। कारोबार अच्‍छा चलेगा। लाभ होगा। ⚖️तुला राजकीय सहयोग प्राप्त होगा। रुके काम अनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। किसी विवाद में अपना पक्ष मजबूती से रख पाएंगे। प्रतिद्वंद्वी सक्रिय रहेंगे। आय में वृद्धि होगी। किसी अनजान व्यक्ति की बातों में न आएं। सावधान रहें। 🦂वृश्चिक आर्थिक उन्नति के लिए किए गए निर्णयों का लाभ मिलना शुरू हो सकता है। मित्रों व रिश्तेदारों का सहयोग प्राप्त होगा। व्यापारिक लाभ में वृद्धि होगी। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। जोखिम न लें। शारीरिक कष्ट संभव है। प्रसन्नता बनी रहेगी। निवेश शुभ रहेगा। 🏹धनु व्यावसायिक यात्रा लंबी व सफल रहेगी। रुका हुआ पैसा मिल सकता है। नए काम मिलेंगे। आय में वृद्धि होगी। घर-बाहर सभी ओर से सहयोग व प्रसन्नता प्राप्त होगी। शेयर मार्केट में जल्दबाजी न करें। जोखिम व जमनत के कार्य टालें। लाभ होगा। 🐊मकर महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्थिति में जल्दबाजी न करें। भावना में न बहें। कार्यकुशलता में कमी होगी। व्ययवृद्धि से तनाव रहेगा। विवेक का प्रयोग करें। आवश्यक वस्तु गुम हो सकती है। आय बनी रहेगी। जोखिम न उठाएं। 🍯कुंभ अच्छी खबर प्राप्त होगी। भूले-बिसरे साथियों से मुलाकात होगी। हल्की हंसी-मजाक से बचें। शत्रु प्रताड़ित कर सकते हैं। आत्मसम्मान बना रहेगा। भाइयों का सहयोग मिलता रहेगा। कारोबार अच्छा चलेगा। बड़े फैसले ले पाएंगे। लाभ होगा। 🐟मीन कारोबारी नए अनुबंध हो सकते हैं। व्यापार की दृष्टि से की गई यात्रा सफल रहेगी। नौकरी में सम्मान मिलेगा। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। जोखिम न लें। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड इत्यादि लाभदायक रहेंगे। शुभ समय का लाभ लें। दिव्य ज्योतिष केंद्र वाराणसी उत्तर 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🚩 *ॐ शं शनैश्चराय नमः* 🚩 ☀️ 🌅 *सुप्रभातम्* 🌅 ☀️ ⚜️📜 *अथ पंचांगम्* 📜⚜️ 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 *दिनाँक -: 19/09/2020, शनिवार* द्वितीया, शुक्ल पक्ष अधिक आश्विन """"""""""""""""""""""""""''"""""""""""(समाप्ति काल) तिथि -----------द्वितीया09:09:40 तक तिथि -----------तृतीया29:38:28 पक्ष ----------------------------शुक्ल नक्षत्र -------------चित्रा25:19:36 योग ----------------ब्रह्म15:33:37 करण -----------कौलव09:09:40 करण -------------तैतुल19:22:16 करण ----------------गर29:38:28 वार -------------------------शनिवार माह ----------------अधिक आश्विन चन्द्र राशि ------ कन्या14:41:12 चन्द्र राशि --------------------- तुला सूर्य राशि ----------------------कन्या रितु -----------------------------शरद आयन ------------------दक्षिणायण संवत्सर-----------------------शार्वरी संवत्सर (उत्तर)--------------प्रमादी विक्रम संवत ----------------2077 संवतविक्रम (कर्तक)------2076 शाका संवत-----------------1942 वृन्दावन सूर्योदय-----------------06:07:29 सूर्यास्त -----------------18:17:46 दिन काल --------------12:10:16 रात्री काल --------------11:50:11 चंद्रोदय -----------------07:53:01 चंद्रास्त------------------19:57:23 लग्न ----कन्या2°24' , 152°24' सूर्य नक्षत्र ----------उत्तराफाल्गुनी चन्द्र नक्षत्र --------------------चित्रा नक्षत्र पाया --------------------रजत *🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩* पे ----चित्रा09:23:152 पो ----चित्रा14:41:123 रा ----चित्रा19:59:564 री ----चित्रा25:19:36 *💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮* ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद ======================== सूर्य=सिंह 02°52 ' उ o फा o , 2 टो चन्द्र = कन्या25°23 ' चित्रा ' 1 पे बुध = कन्या 08°57 ' उ oफा o ' 4 पी शुक्र= कर्क 19°55, अश्लेषा' 1 डी मंगल=मेष 03°30' अश्विनी ' 2 चे गुरु=धनु 23°22 ' पू oषा o , 4 ढा शनि=मकर 01°43' उ oषा o ' 2 भो राहू=मिथुन 00°10 ' मृगशिरा , 3 का केतु=धनु 00 ° 10 ' मूल , 1 ये *🚩💮🚩शुभा$शुभ मुहूर्त🚩💮🚩* राहू काल 09:10 - 10:41 अशुभ यम घंटा 13:44 - 15:15 अशुभ गुली काल 06:07 - 07:39 अशुभ अभिजित 11:48 -12:37 शुभ दूर मुहूर्त 07:45 - 08:34 अशुभ 💮चोघडिया, दिन काल 06:07 - 07:39 अशुभ शुभ 07:39 - 09:10 शुभ रोग 09:10 - 10:41 अशुभ उद्वेग 10:41 - 12:13 अशुभ चर 12:13 - 13:44 शुभ लाभ 13:44 - 15:15 शुभ अमृत 15:15 - 16:46 शुभ काल 16:46 - 18:18 अशुभ 🚩चोघडिया, रात लाभ 18:18 - 19:47 शुभ उद्वेग 19:47 - 21:15 अशुभ शुभ 21:15 - 22:44 शुभ अमृत 22:44 - 24:13* शुभ चर 24:13* - 25:42* शुभ रोग 25:42* - 27:10* अशुभ काल 27:10* - 28:39* अशुभ लाभ 28:39* - 30:08* शुभ 💮होरा, दिन शनि 06:07 - 07:08 बृहस्पति 07:08 - 08:09 मंगल 08:09 - 09:10 सूर्य 09:10 - 10:11 शुक्र 10:11 - 11:12 बुध 11:12 - 12:13 चन्द्र 12:13 - 13:13 शनि 13:13 - 14:14 बृहस्पति 14:14 - 15:15 मंगल 15:15 - 16:16 सूर्य 16:16 - 17:17 शुक्र 17:17 - 18:18 🚩होरा, रात बुध 18:18 - 19:17 चन्द्र 19:17 - 20:16 शनि 20:16 - 21:15 बृहस्पति 21:15 - 22:14 मंगल 22:14 - 23:14 सूर्य 23:14 - 24:13 शुक्र 24:13* - 25:12 बुध 25:12* - 26:11 चन्द्र 26:11* - 27:10 शनि 27:10* - 28:10 बृहस्पति 28:10* - 29:09 मंगल 29:09* - 30:08 *नोट*-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार । शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥ रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार । अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥ अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें । उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें । शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें । लाभ में व्यापार करें । रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें । काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है । अमृत में सभी शुभ कार्य करें । *💮दिशा शूल ज्ञान-------------पूर्व* परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो लौंग अथवा कालीमिर्च खाके यात्रा कर सकते है l इस मंत्र का उच्चारण करें-: *शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l* *भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll* *🚩 अग्नि वास ज्ञान -:* *यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,* *चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।* *दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,* *नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्* *नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।* 2 + 7 + 1 = 10 ÷ 4 = 2 शेष आकाश लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l *💮 शिव वास एवं फल -:* 2 + 2 + 5 = 9 ÷ 7 = 2 शेष गौरि सन्निधौ = शुभ कारक *🚩भद्रा वास एवं फल -:* *स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।* *मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।* *💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮* * सर्वार्थ सिद्धि योग 25:19 से * द्विपुष्कर योग *💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮* राजपत्नी गुरोः पत्नी मित्र पत्नी तथैव च । पत्नी माता स्वमाता च पञ्चैता मातरः स्मृता ।।।। धर्मं की रक्षा पैसे से होती है. ज्ञान की रक्षा जमकर आजमाने से होती है. राजा से रक्षा उसकी बात मानने से होती है. घर की रक्षा एक दक्ष गृहिणी से होती है. *🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩* गीता -: अक्षरब्रह्मयोग अo-08 यदक्षरं वेदविदो वदन्ति विशन्ति यद्यतयो वीतरागाः ।, यदिच्छन्तो ब्रह्मचर्यं चरन्ति तत्ते पदं संग्रहेण प्रवक्ष्ये ॥, वेद के जानने वाले विद्वान जिस सच्चिदानन्दघनरूप परम पद को अविनाश कहते हैं, आसक्ति रहित यत्नशील संन्यासी महात्माजन, जिसमें प्रवेश करते हैं और जिस परम पद को चाहने वाले ब्रह्मचारी लोग ब्रह्मचर्य का आचरण करते हैं, उस परम पद को मैं तेरे लिए संक्षेप में कहूँगा॥,11॥, *💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮* देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके। नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।। विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे। जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।। 🐏मेष पारिवारिक सुख-शांति बनी रहेगी। प्रेम-प्रसंग अनुकूल रहेंगे। भागदौड़ रहेगी। लाभ में कमी हो सकती है। स्थायी संपत्ति की खरीद-फरोख्त की योजना बनेगी। कारोबार अच्छा चलेगा। रोजगार में वृद्धि होगी। कोई बड़ी समस्या उत्पन्न हो सकती है। लापरवाही न करें। 🐂वृष किसी व्यक्ति के व्यवहार से स्वाभिमान को चोट पहुंच सकती है। जीवनसाथी से सहयोग प्राप्त होगा। कानूनी अड़चन दूर होगी। आय में वृद्धि होगी। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। नौकरी में अधीनस्थों का सहयोग प्राप्त होगा। उत्साह व प्रसन्नता बने रहेंगे। 👫मिथुन कानूनी अड़चन का सामना करना पड़ सकता है। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। विवाद हो सकता है। दु:खद समाचार की प्राप्ति संभव है। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। पुराना रोग परेशानी का कारण बन सकता है। व्यापार-व्यवसाय से लाभ होगा। 🦀कर्क रचनात्मक कार्यों में रुचि जागृत होगी। स्वादिष्ट भोजन का आनंद प्राप्त होगा। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। घर-बाहर जीवन सुखमय व्यतीत होगा। किसी मनोरंजक आनंददायी यात्रा की योजना बनेगी। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। 🐅सिंह कोई पुराना रोग उभर सकता है। वाहन व मशीनरी इत्यादि के प्रयोग में लापरवाही न करें। शारीरिक हानि की आशंका प्रबल है। दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप न करें। विवाद की आशंका है। शत्रु सामना नहीं कर पाएंगे। लाभ होगा। नौकरी में तनाव रहेगा। 🙍‍♀️कन्या लेन-देन में जल्दबाजी तथा कार्य करते समय लापरवाही न करें। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। सट्टे व लॉटरी से दूर रहें। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। ⚖️तुला किसी धार्मिक आयोजन में सम्मिलित होने का अवसर प्राप्त हो सकता है। सत्संग का लाभ प्राप्त होगा। कोर्ट-कचहरी व सरकारी कार्यालयों में काम अनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। दुष्टजनों को पहचानना आवश्यक है। उनसे दूर रहने के प्रयास करें। 🦂वृश्चिक शारीरिक कष्ट से कार्य में बाधा उत्पन्न हो सकती है। वाणी पर नियंत्रण रखें। कुसंगति से हानि होगी। स्वास्थ्य पर खर्च होगा। आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। चिंता तथा तनाव रहेंगे। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। व्यापार ठीक चलेगा। 🏹धनु फालतू खर्च पर नियंत्रण रखें। चिंता रहेगी। घर में मेहमानों का आवागमन रहेगा। शुभ समाचार प्राप्त होंगे। आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड में लाभ होगा। जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। जल्दबाजी न करें। 🐊मकर सुख के साधन जुटेंगे। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। आय में वृद्धि होगी। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। उत्साह व प्रसन्नता से कार्य कर पाएंगे। पारिवारिक चिंता रहेगी। प्रतिद्वंद्विता बढ़ेगी। सावधान रहें। 🍯कुंभ लाभ में वृद्धि होगी। नए कार्यकारी अनुबंध हो सकते हैं। नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। समाजसेवा करने की प्रेरणा प्राप्त होगी। मान-सम्मान मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल चलेगा। निवेश शुभ रहेगा। जोखिम न लें। 🐟मीन लाभ के अवसर अचानक बनेंगे। भाग्य का साथ मिलेगा। पुराने किए गए प्रयासों का लाभ अब मिल सकता है। सामाजिक कार्य करने की प्रेरणा प्राप्त होगी। मान-सम्मान मिलेगा। यश बढ़ेगा। आय में वृद्धि के योग हैं। चोट व रोग की तरफ से सावधानी रखें। भय रहेगा। दिव्य ज्योतिष केंद्र वाट्स्अप👉9450786998 🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏 🌺🌺🌺🌺🙏🌺🌺🌺🌺

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*पुरुषोत्तम मास 2020 की जानकारी :-* *18 सितंबर से 16 अक्टूबर :-* *हर तीन साल में एक बार एक अतिरिक्त माह का प्राकट्य होता है, जिसे अधिकमास, मल मास या पुरूषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है।* *सनातन धर्म में इस माह का विशेष महत्व है। संपूर्ण भारत की सनातन धर्म-परायण जनता इस पूरे मास में पूजा-पाठ, भगवद् भक्ति, व्रत-उपवास, जप और योग आदि धार्मिक कार्यों में संलग्न रहती है।* *ऐसा माना जाता है, कि अधिकमास में किए गए धार्मिक कार्यों का किसी भी अन्य माह में किए गए पूजा-पाठ से 10 गुना अधिक फल मिलता है।* *यही वजह है, कि श्रद्धालु जन अपनी पूरी श्रद्धा और शक्ति के साथ इस मास में भगवान को प्रसन्न कर अपना इहलोक तथा परलोक सुधारने में जुट जाते हैं।* *अब सोचने वाली बात यह है, कि यदि यह माह इतना ही प्रभावशाली और पवित्र है, तो यह हर तीन साल में क्यों आता है ???* *आखिर क्यों और किस कारण से इसे इतना पवित्र माना जाता है ???* *इस एक माह को तीन विशिष्ट नामों से क्यों पुकारा जाता है ???* *इसी तरह के तमाम प्रश्न स्वाभाविक रूप से हर जिज्ञासु के मन में आते हैं। तो आज ऐसे ही कई प्रश्नों के उत्तर और अधिकमास को गहराई से जानते हैं।* *इस मास में अधिक से अधिक महा मंत्र का जप करे।* *हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।* *हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।।* *भगवतगीता पाठ करें।* *भागवत कथा सुने या खुद पढ़े।* *श्री कृष्ण को रोज घी का दीपक लगाए, रोज पीले फूल और पीली चीजे चढाए और हरि विष्णु कृष्ण राम नाम का जप करें।* *हर तीन साल में क्यों आता है, अधिकमास :-* *वशिष्ठ सिद्धांत के अनुसार भारतीय ज्योतिष में सूर्य मास और चंद्र मास की गणना के अनुसार चलता है। अधिकमास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घटी के अंतर से आता है।* *इस का प्राकट्य सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच अंतर का संतुलन बनाने के लिए होता है। भारतीय गणना पद्धति के अनुसार प्रत्येक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है।* *दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है, जो हर तीन वर्ष में लगभग 1 मास के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अस्तित्व में आता है, जिसे अतिरिक्त होने के कारण अधिकमास का नाम दिया गया है।* *पुरूषोत्तम मास क्यों, और कैसे पड़ा नाम।* *अधिकमास के अधिपति स्वामी परम भगवान कृष्ण माने जाते हैं।* *पुरूषोत्तम भगवान कृष्ण का ही एक नाम है।* *इसीलिए अधिकमास को पुरूषोत्तम मास के नाम से भी पुकारा जाता है। इस विषय में एक बड़ी ही रोचक कथा पुराणों में पढ़ने को मिलती है। कहा जाता है, कि भारतीय मनीषियों ने अपनी गणना पद्धति से हर चंद्र मास के लिए एक देवता निर्धारित किए।* *चूंकि अधिकमास सूर्य और चंद्र मास के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रकट हुआ, तो इस अतिरिक्त मास का अधिपति बनने के लिए कोई देवता तैयार ना हुआ।* *ऐसे में ऋषि-मुनियों ने भगवान कृष्णा से आग्रह किया, कि वे ही इस मास का भार अपने उपर लें।* *भगवान कृष्णा ने इस आग्रह को स्वीकार कर लिया, और इस तरह यह मल मास के साथ पुरू-षोत्तम मास भी बन गया।* *मास हर व्यक्ति विशेष :-* *अधिकमास को पुरूषोत्तम मास कहे जाने का एक सांकेतिक अर्थ भी है। ऐसा माना जाता है, कि यह मास हर व्यक्ति विशेष के लिए तन-मन से पवित्र होने का समय होता है।* *इस दौरान श्रद्धालुजन व्रत, उपवास, ध्यान, योग और भजन- कीर्तन- मनन में संलग्न रहते हैं, और अपने आप को भगवान के प्रति समर्पित कर देते हैं।* *इस तरह यह समय सामान्य पुरूष से उत्तम बनने का होता है, मन के मैल धोने का होता है। यही वजह है, कि इसे पुरू-षोत्तम मास का नाम दिया गया है।* *अधिकमास का पौराणिक आधार क्या है।* *अधिक मास के लिए पुराणों में बड़ी ही सुंदर कथा सुनने को मिलती है।* *यह कथा दैत्यराज हिरण्यकश्यप के वध से जुड़ी है।* *पुराणों के अनुसार दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने एक बार ब्रह्मा जी को अपने कठोर तप से प्रसन्न कर लिया, और उन से अमरता का वरदान मांगा।* *चुकि अमरता का वरदान देना निषिद्ध है, इसीलिए ब्रह्मा जी ने उसे कोई भी अन्य वर मांगने को कहा।* *तब हिरण्यकश्यप ने वर मांगा कि उसे संसार का कोई नर, नारी, पशु, देवता या असुर मार ना सके। वह वर्ष के 12 महीनों में मृत्यु को प्राप्त ना हो। जब वह मरे, तो ना दिन का समय हो, ना रात का। वह ना किसी अस्त्र से मरे, ना किसी शस्त्र से। उसे ना घर में मारा जा सके, ना ही घर से बाहर मारा जा सके।* *इस वरदान के मिलते ही हिरण्यकश्यप स्वयं को अमर मानने लगा, और उस ने खुद को भगवान घोषित कर दिया। समय आने पर भगवान विष्णु ने अधिक मास में नरसिंह अवतार यानि आधा पुरूष और आधे शेर के रूप में प्रकट हो कर, शाम के समय, देहरी के नीचे अपने नाखूनों से हिरण्यकश्यप का सीना चीन कर उसे मृत्यु के द्वार भेज दिया।* *अधिकमास का महत्व क्या और क्यों है :-* *सनातन धर्म के अनुसार प्रत्येक जीव पंचमहाभूतों से मिलकर बना है। इन पंचमहाभूतों में जल, अग्नि, आकाश, वायु और पृथ्वी सम्मिलित हैं।* *अपनी प्रकृति के अनुरूप ही ये पांचों तत्व प्रत्येक जीव की प्रकृति न्यूनाधिक रूप से निश्चित करते हैं।* *अधिकमास में समस्त धार्मिक कृत्यों, चिंतन- मनन, ध्यान, योग, आदि के माध्यम से साधक अपने शरीर में समाहित इन पांचों तत्वों में संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है।* *इस पूरे मास में अपने धार्मिक और आध्यात्मिक प्रयासों से प्रत्येक व्यक्ति अपनी भौतिक और आध्यात्मिक उन्नति और निर्मलता के लिए उद्यत होता है।* *इस तरह अधिकमास के दौरान किए गए प्रयासों से व्यक्ति हर तीन साल में स्वयं को बाहर से स्वच्छ कर परम निर्मलता को प्राप्त कर नई उर्जा से भर जाता है। ऐसा माना जाता है, कि इस दौरान किए गए प्रयासों से समस्त कुंडली दोषों का भी निराकरण हो जाता है।* *अधिकमास में क्या करना उचित और संपूर्ण फल-दायी होता है।* *आमतौर पर अधिकमास में हिंदू श्रद्धालु व्रत- उपवास, पूजा- पाठ, ध्यान, भजन, कीर्तन, मनन को अपनी जीवनचर्या बनाते हैं।* *पौराणिक सिद्धांतों के अनुसार इस मास के दौरान यज्ञ-हवन के अलावा श्रीमद् भागवत पुराण, श्री विष्णु पुराण, भविष्योत्तर पुराण आदि का श्रवण, पठन, मनन विशेष रूप से फलदायी होता है।* *अधिकमास के अधिष्ठाता भगवान विष्णु हैं, इसीलिए इस पूरे समय में विष्णु मंत्रों का जाप विशेष लाभकारी होता है। ऐसा माना जाता है, कि अधिक मास में विष्णु मंत्र का जाप करने वाले साधकों को भगवान विष्णु स्वयं आशीर्वाद देते हैं, उन के पापों का शमन करते हैं, और उन की समस्त इच्छाएं पूरी करते हैं।* *सदैव जपिए महामंत्र :-* *हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे* *हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।।*

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🚩🔱 *जय माता दी* 🔱🚩 ☀️ 🌅 *सुप्रभातम्* 🌅 ☀️ ⚜️📜 *अथ पंचांगम्* 📜⚜️ 🌷🌺🌷🌺🌹🌷🌷🌹🌷 *दिनाँक -: 18/09/2020,शुक्रवार* प्रतिपदा, शुक्ल पक्ष अधिक आश्विन """""""”""""""""""""""""""""""""""(समाप्ति काल) तिथि --------प्रतिपदा 12:50:11 तक पक्ष ----------------------------शुक्ल नक्षत्र --------उ०फा० 06:58:55 नक्षत्र ------------हस्त 28:05:53 योग ------------शुक्ल 19:41:12 करण -------------बव 12:50:11 करण ----------बालव 22:59:25 वार -------------------------शुक्रवार माह ----------------अधिक आश्विन चन्द्र राशि -------------------कन्या सूर्य राशि --------------------कन्या रितु ---------------------------शरद आयन ----------------- दक्षिणायण संवत्सर -----------------------शार्वरी संवत्सर (उत्तर) -------------प्रमादी विक्रम संवत ----------------2077 विक्रम संवत (कर्तक)------2076 शाका संवत ----------------1942 सूर्योदय -----------------06:07:02 सूर्यास्त -----------------18:18:56 दिन काल --------------12:11:53 रात्री काल -------------11:48:33 चंद्रोदय -----------------06:45:52 चंद्रास्त -----------------19:18:04 लग्न ----कन्या 1°25' , 151°25' सूर्य नक्षत्र ---------उत्तराफाल्गुनी चन्द्र नक्षत्र ---------उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र पाया ------------------रजत *🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩* पी ----उत्तराफाल्गुनी 06:58:55 पू ----हस्त 12:15:38 ष ----हस्त 17:32:15 ण ----हस्त 22:48:56 ठ ----हस्त 28:05:53 *💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮* ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद ======================== सूर्य=सिंह 01°52 ' उ o फा o , 2 टो चन्द्र = कन्या 09°23 'उo फा o ' 4 पी बुध = कन्या 09°57 ' चित्रा ' 1 पे शुक्र= कर्क 18°55, आश्लेषा ' 1 डी मंगल=मेष 03°30' अश्विनी ' 2 चे गुरु=धनु 23°22 ' पू oषा o , 3 फा शनि=मकर 01°43' उ oषा o ' 2 भो राहू=मिथुन 00°10 ' मृगशिरा , 3 का केतु=धनु 00 ° 10 ' मूल , 1 ये *🚩💮🚩शुभा$शुभ मुहूर्त🚩💮🚩* राहू काल 10:42 - 12:13 अशुभ यम घंटा 15:16 - 16:47 अशुभ गुली काल 07:39 - 09:10 अशुभ अभिजित 11:49 -12:37 शुभ दूर मुहूर्त 08:33 - 09:22 अशुभ दूर मुहूर्त 12:37 - 13:26 अशुभ 💮चोघडिया, दिन चर 06:07 - 07:39 शुभ लाभ 07:39 - 09:10 शुभ अमृत 09:10 - 10:42 शुभ काल 10:42 - 12:13 अशुभ शुभ 12:13 - 13:44 शुभ रोग 13:44 - 15:16 अशुभ उद्वेग 15:16 - 16:47 अशुभ चर 16:47 - 18:19 शुभ 🚩चोघडिया, रात रोग 18:19 - 19:48 अशुभ काल 19:48 - 21:16 अशुभ लाभ 21:16 - 22:45 शुभ उद्वेग 22:45 - 24:13* अशुभ शुभ 24:13* - 25:42* शुभ अमृत 25:42* - 27:10* शुभ चर 27:10* - 28:39* शुभ रोग 28:39* - 30:07* अशुभ 💮होरा, दिन शुक्र 06:07 - 07:08 बुध 07:08 - 08:09 चन्द्र 08:09 - 09:10 शनि 09:10 - 10:11 बृहस्पति 10:11 - 11:12 मंगल 11:12 - 12:13 सूर्य 12:13 - 13:14 शुक्र 13:14 - 14:15 बुध 14:15 - 15:16 चन्द्र 15:16 - 16:17 शनि 16:17 - 17:18 बृहस्पति 17:18 - 18:19 🚩होरा, रात मंगल 18:19 - 19:18 सूर्य 19:18 - 20:17 शुक्र 20:17 - 21:16 बुध 21:16 - 22:15 चन्द्र 22:15 - 23:14 शनि 23:14 - 24:13 बृहस्पति 24:13* - 25:12 मंगल 25:12* - 26:11 सूर्य 26:11* - 27:10 शुक्र 27:10* - 28:09 बुध 28:09* - 29:08 चन्द्र 29:08* - 30:07 *नोट*-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार । शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥ रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार । अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥ अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें । उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें । शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें । लाभ में व्यापार करें । रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें । काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है । अमृत में सभी शुभ कार्य करें । *💮दिशा शूल ज्ञान-------------पश्चिम* परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l इस मंत्र का उच्चारण करें-: *शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l* *भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll* *🚩 अग्नि वास ज्ञान -:* *यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,* *चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।* *दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,* *नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्* *नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।* 1 + 6 + 1 = 8 ÷ 4 = 0 शेष मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l *💮 शिव वास एवं फल -:* 1 + 1 + 5 = 7 ÷ 7 = 0 शेष शमशान वास = मृत्यु कारक *🚩भद्रा वास एवं फल -:* *स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।* *मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।* *💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮* *पुरुषोत्तम मास प्रारम्भ (अधिक मास)* *सर्वार्थ एव अमृत सिध्दि योग अहोरात्र* *💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮* राजपत्नी गुरोः पत्नी मित्र पत्नी तथैव च । पत्नी माता स्वमाता च पञ्चैता मातरः स्मृता ।। ।।चा o नी o।। धर्मं की रक्षा पैसे से होती है. ज्ञान की रक्षा जमकर आजमाने से होती है. राजा से रक्षा उसकी बात मानने से होती है. घर की रक्षा एक दक्ष गृहिणी से होती है. *🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩* गीता -: अक्षरब्रह्मयोग अo-08 प्रयाण काले मनसाचलेन भक्त्या युक्तो योगबलेन चैव ।, भ्रुवोर्मध्ये प्राणमावेश्य सम्यक्‌- स तं परं पुरुषमुपैति दिव्यम्‌ ।, वह भक्ति युक्त पुरुष अन्तकाल में भी योगबल से भृकुटी के मध्य में प्राण को अच्छी प्रकार स्थापित करके, फिर निश्चल मन से स्मरण करता हुआ उस दिव्य रूप परम पुरुष परमात्मा को ही प्राप्त होता है॥,10॥, *💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮* देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके। नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।। विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे। जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।। 🐏मेष भूमि व भवन संबंधी सभी रुके कार्यों में गति आएगी। पार्टनरों से सहयोग प्राप्त होगा। प्रतिद्वंद्वी मैदान छोड़ेंगे। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल चलेगा। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। दूसरों के झगड़ों में न पड़ें। उन्नति होगी। 🐂वृष प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। भेंट व उपहार देना पड़ सकता है। यात्रा मनोरंजक रहेगी। कारोबार अच्‍छा चलेगा। नौकरी में सहकर्मी साथ देंगे। विवाद से बचें। समय सुखमय व्यतीत होगा। आय में वृद्धि होगी। अपेक्षाकृत सभी कार्य समय पर पूरे होंगे। प्रमाद न करें। 👫मिथुन लेखन-पठन-पाठन आदि के काम उत्साह व लगन से कर पाएंगे। पार्टी व पिकनिक आदि की योजना बनेगी। मनोरंजन का अवसर प्राप्त होगा। नौकरी में कोई नया कार्य कर पाएंगे। धन प्राप्ति सुगम होगी। जल्दबाजी न करें। समय की अनुकूलता का लाभ लें। 🦀कर्क नौकरी में उच्चाधिकारियों की अपेक्षा बढ़ेगी। स्वास्थ्य कमजोर रह सकता है। आय में निश्चितता रहेगी। कोई बुरी खबर प्राप्त हो सकती है, धैर्य रखें। मेहनत अधिक होगी। समय पर काम न होने से खिन्नता रहेगी। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। 🐅सिंह रुका हुआ पैसा मिलने के योग हैं। ऐश्वर्य के साधनों पर खर्च होगा। यात्रा लाभदायक रहेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। नौकरी में उच्चाधिकारी प्रसन्न रहेंगे। शत्रु सक्रिय रहेंगे। किसी से कहासुनी हो सकती है। परिवार की चिंता रहेगी। प्रमाद न करें। 🙍‍♀️कन्या किसी धर्मस्थल के दर्शन इत्यादि का कार्यक्रम बन सकता है। सत्संग का लाभ प्राप्त होगा। कानूनी अड़चन दूर होकर स्थिति अनुकूल बनेगी। शत्रु सक्रिय रहेंगे। दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप न करें। विवाद को टालें। कारोबार से लाभ होगा। ⚖️तुला आत्मसम्मान बना रहेगा। व्यय होगा। पारिवारिक चिंता बनी रहेगी। व्यापार-व्यवसाय अच्‍छा चलेगा। नौकरी में सहकर्मी साथ देंगे। घर-बाहर प्रसन्नता का वातावरण निर्मित होगा। भूले-बिसरे संबंधी साथी मिलेंगे। उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त होगी। 🦂वृश्चिक स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। शत्रु पस्त होंगे। व्यापार-व्यवसाय अच्‍छा चलेगा। नौकरी में कार्यभार रहेगा। मित्रों का सहयोग समय पर प्राप्त होगा। चोट व दुर्घटना से शारीरिक हानि हो सकती है। कार्य करते समय लापरवाही न करें। 🏹धनु फालतू खर्च पर नियंत्रण रखें। दुष्टजनों से सावधानी आवश्यक है। किसी बड़ी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। किसी के उकसाने में आकर या भावना में बहकर कोई निर्णय न लें। लेन-देन में जल्दबाजी से बचें। पुराना रोग उभर सकता है। 🐊मकर भेंट व उपहार की प्राप्ति हो सकती है। यात्रा से लाभ होगा। कारोबार में वृद्धि के योग हैं। आलस्य न कर भरपूर प्रयास करें। भाग्य का साथ बना है। समय का लाभ लें। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। किसी बड़े काम को करने की प्रबल इच्छा होगी। आवश्यक वस्तु गुम हो सकती है। 🍯कुंभ नए काम मिलने के योग हैं। कोई नया उपक्रम प्रारंभ करने की योजना बनेगी। कार्यस्थल पर परिवर्तन संभव है। मित्रों की सहायता कर पाएंगे। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। नौकरी में चैन रहेगा। कारोबार अच्‍छा चलेगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। 🐟मीन सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। आय में बढ़ोतरी होगी। स्वास्‍थ्य को नजरअंदाज न करें। जल्दबाजी से बचें। कठिन कार्य सहज ही सफल होंगे। चिंता रहेगी। पहले की गई मेहनत का फल मिलेगा। मित्रों व रिश्तेदारों का सहयोग करने का अवसर प्राप्त होगा। *🚩आपका दिन मंगलमय हो🚩*

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पाप कर्म व फल --------------------- धार्मिक मान्यता अनुसार नरक वह स्थान है जहां पापियों की आत्मा दंड भोगने के लिए भेजी जाती है। दंड के बाद कर्मानुसार उनका दूसरी योनियों में जन्म होता है। कहते हैं कि स्वर्ग धरती के ऊपर है तो नरक धरती के नीचे यानी पाताल भूमि में हैं। इसे अधोलोक भी कहते हैं। अधोलोक यानी नीचे का लोक है। ऊर्ध्व लोक का अर्थ ऊपर का लोक अर्थात् स्वर्ग। मध्य लोक में हमारा ब्रह्मांड है। सामान्यत: 1.उर्ध्व गति, 2.स्थिर गति और 3.अधोगति होती है जोकि अगति और गति के अंतर्गत आती हैं। कुछ लोग स्वर्ग या नरक की बातों को कल्पना मानते हैं तो कुछ लोग सत्य। जो सत्य मानते हैं उनके अनुसार मति से ही गति तय होती है कि आप अधोलोक में गिरेंगे या की ऊर्ध्व लोक में। हिन्दू धर्म शास्त्रों में उल्लेख है कि गति दो प्रकार की होती है 1.अगति और 2. गति। अगति के चार प्रकार है- 1.क्षिणोदर्क, 2.भूमोदर्क, 3. अगति और 4.दुर्गति।... और गति में जीव को चार में से किसी एक लोक में जाना पड़ता है। गति के अंतर्गत चार लोक दिए गए हैं: 1.ब्रह्मलोक, 2.देवलोक, 3.पितृलोक और 4.नर्कलोक। जीव अपने कर्मों के अनुसार उक्त लोकों में जाता है। जब मरता है व्यक्ति तो चलता है इस मार्ग पर... पुराणों के अनुसार जब भी कोई मनुष्य मरता है या आत्मा शरीर को त्यागकर यात्रा प्रारंभ करती है तो इस दौरान उसे तीन प्रकार के मार्ग मिलते हैं। ऐसा कहते हैं कि उस आत्मा को किस मार्ग पर चलाया जाएगा यह केवल उसके कर्मों पर निर्भर करता है। ये तीन मार्ग हैं- अर्चि मार्ग, धूम मार्ग और उत्पत्ति-विनाश मार्ग। अर्चि मार्ग ब्रह्मलोक और देवलोक की यात्रा के लिए होता है, वहीं धूममार्ग पितृलोक की यात्रा पर ले जाता है और उत्पत्ति-विनाश मार्ग नर्क की यात्रा के लिए है।

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