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#अक्षय_तृतीया14_मई 🔥 अक्षय तृतीया का महत्व क्यों है ? जानिए कुछ महत्वपुर्ण जानकारी :- आज ही के दिन जैनों के प्रथम तीर्थंकर श्री ऋषभदेव जी भगवान ने 13 महीने का कठीन निरंतर उपवास (बिना जल का तप) का पारणा (उपवास छोडना) इक्षु (गन्ने) के रस से किया था। और आज भी बहुत जैन भाई व बहने वही वर्षी तप करने के पश्चात आज उपवास छोड़ते है और नये उपवास लेते है। और भगवान को गन्ने के रस से अभिषेक किया जाता है।। आज ही के दिन माँ गंगा का अवतरण धरती पर हुआ था। महर्षी परशुराम का जन्म आज ही के दिन हुआ था। माँ अन्नपूर्णा का जन्म भी आज ही के दिन हुआ था। -द्रोपदी को चीरहरण से कृष्ण ने आज ही के दिन बचाया था। - कृष्ण और सुदामा का मिलन आज ही के दिन हुआ था। - कुबेर को आज ही के दिन खजाना मिला था। -सतयुग और त्रेता युग का प्रारम्भ आज ही के दिन हुआ था। -ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का अवतरण भी आज ही के दिन हुआ था। - प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री बद्री नारायण जी का कपाट आज ही के दिन खोला जाता है। - बृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में साल में केवल आज ही के दिन श्री विग्रह चरण के दर्शन होते है। अन्यथा साल भर वो बस्त्र से ढके रहते है। - इसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था। - अक्षय तृतीया अपने आप में स्वयं सिद्ध मुहूर्त है। कोई भी शुभ कार्य का प्रारम्भ किया जा सकता है।। आप सभी को अक्षयतृतीया की कोटिशः शुभकामनाएं...🙏 ( प्राप्त हुआ )

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*इन द्रव्यों से करें शिव जी का रूद्राभिषेक, दूर होंगे ग्रहों के दोष और बने रहेंगे स्वास्थ्य* ============================ ✍🏻जन्म कुंडली में कुछ ग्रह अशुभ स्थिति में भी होते हैं। इनका सीधा असर व्यक्ति के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है *१:- सूर्य ग्रह:-* जन्म कुंडली में सूर्य अशुभ स्थिति में होने पर हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट प्रॉब्लम, आंखों की समस्या व कमजोरी देता है। *उपाय-* प्रातिदिन जल से शिवलिंग का अभिषेक करें। *२:- चंद्र ग्रह:-* जन्म कुंडली में चंद्र नीच का होने से सर्दी, अस्थमा व आंखों से संबंधित समस्याएं होती हैं। *उपाय-* कच्चे दूध में काले तिल मिलाकर शिवजी का अभिषेक करें। *३:- मंगल ग्रह:-* जन्म कुंडली में मंगल अशुभ स्थिति में होने से खून व पेट से संबंधित बीमारियां होती हैं। *उपाय-* गिलोय (औषधि) की बूटी के रस से शिवजी का अभिषेक करें.! *४:- बुध ग्रह:-* जन्म कुंडली में बुध नीच का होने से पेट व फेफड़ों से संबंधित बीमारियां होने की आशंका रहती है। *उपाय-*-दूध में पीले फूल मिला कर शिवजी का अभिषेक करें। *५:-गुरु ग्रह:-* जन्म कुंडली में गुरु अशुभ स्थिति में होने पर स्कीन, दांत व कफ से संबंधित बीमारियां होती हैं। *उपाय-:-* विधारा की बूटी के रस से शिवजी का अभिषेक करें। *६:- शुक्र ग्रह:-* जन्म कुंडली में शुक्र कमजोर होने पर यौन संक्रमण, कमजोरी व शीत से संबंधित बीमारियां होती हैं। *उपाय-* पंचामृत से शिवजी का अभिषेक करें। *७:- शनि देव:-* जन्म कुंडली में शनि नीच का होने से अस्थमा, खांसी व घुटनों से जुड़ी समस्याएं होती हैं। *उपाय-* गन्ने के रस से शिवजी का अभिषेक करें। *८:- राहु ग्रह:-* जन्म कुंडली में राहु कमजोर होने से डिप्रेशन, बुखार व दुर्घटना होने की संभावनाएं रहती हैं। *उपाय-* भांग या नागकेसर से शिवजी का अभिषेक करें। *९:- केतु ग्रह:-* जन्म कुंडली में केतु अशुभ स्थिति में होने से शुगर, कान व गुप्तांग से संबंधित रोग होते हैं। *उपाय-* सरसों के तेल से शिवजी का अभिषेक करें, (प्राप्त हुआ) हर हर महादेव जय शिव शंकर

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