॥ ॐ देवी कुष्मांडयै नम : ॥🌿🍁🌿🍁 🌸🌿🌼🌿🌸 ”सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च। दधानाहस्तपद्याभ्यां कुष्माण्डा शुभदास्तु में॥“ श्री दुर्गाका चतुर्थ रूप श्री कूष्मांडा हैं। अपने उदर से अंड अर्थात् ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्मांडा देवी के नाम से पुकारा जाता है। नवरात्रि के चतुर्थ दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। श्री कूष्मांडा कीउपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक नष्ट हो जाते हैं। इनकी आराधनासे मनुष्य त्रिविध ताप से मुक्त होता है। माँ कुष्माण्डा सदैव अपने भक्तों पर कृपा दृष्टि रखती है। इनका स्थान अनहत चक्र में है, यहाँ ध्यान लगा कर इनकी पूजा आराधना से हृदय को शांति एवं लक्ष्मी की प्राप्ति होती हैं। 🌿🕉🌿🕉🌿🕉

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🌿॥ ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥🌸🍁 पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।  प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥   🍁🌿🍁🌿🌿 नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। चंद्रघंटा को शांतिदायक और कल्याणकारी माना जाता है। मां का ध्यान करने से व्यक्ति को लोक और परलोक दोनों में सद्गति की प्राप्ति होती है। मां के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। माता चंद्रघंटा का शरीर स्वर्ण के समान उज्ज्वल है, इनके दस हाथ हैं। दसों हाथों में खड्ग, बाण आदि शस्त्र सुशोभित रहते हैं। इनका वाहन सिंह है।  मां चन्द्रघंटा की कृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएं खत्म हो जाती हैं। इनकी अराधना फलदायी है। माना जाता है कि मां चंद्रघंटा भक्तों के कष्ट का निवारण शीघ्र कर देती हैं। मां चंद्रघंटा की आराधना से साधक में वीरता-निर्भरता के साथ ही सौम्यता एवं विनम्रता का विकास होता है। साथ ही स्वर में दिव्य, अलौकिक, माधुर्य का समावेश हो जाता है । 🍁🌿🍁🌿🍁

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